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दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगा : ताहिर हुसैन ने उमर खालिद से कहा: ट्रम्प आएगा तब कुछ बड़ा होगा, तैयार रहो

दिल्ली दंगा, पार्षद ताहिर हुसैन और ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब मोदी विरोधी जगह-जगह नागरिक संशोधक कानून की आड़ में शांति प्रदर्शन के नाम धरने एवं जलूसों में उत्पात मचा रहे थे, तब जिस बात की शंका थी, अब वही शंका हकीकत में बदल उन लोगों के गालों पर तमाचा है, जो गोधरा के लिए मोदी को पानी पी-पीकर गालियां दे रहे थे। क्योकि तत्कालीन गुजरात की मोदी सरकार ने केवल उन्ही दंगाइयों को जेलों में भरा जिन्होंने 56 बेकसूर रामभक्तों को जिन्दा जलाया था। यूपीए सरकार की तरह किसी बेकसूर हिन्दू को नहीं पकड़ा था। यानि दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगाइयों ने समझा कि "हम मुसलमान हैं, जो चाहे करें, सरकार कोई कार्यवाही करेगी, तो कहेंगे कि मुसलमान होने की सजा दी जा रही है।" इन दंगाइयों ने समझ रखा था कि जिस तरह यूपीए सरकार के समय इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने के लिए पुलिस बेकसूर हिन्दुओं को गिरफ्तार करती थी, अब भी वही होगा। और जो लोग बेशर्मी से इन दंगों के लिए कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को जिम्मेदार बता रहे हैं, वही बेशर्म लोग राष्ट्र को यह भी बताएं कि धरनों और प्रदर्शनों में "हिन्दू तेरी कब्र खुदेगी", "Fuck Hindutv", "मोदी तेरी कब्र खुदेगी" और "योगी तेरी कब्र खुदेगी" आदि उत्तेजक और भड़काऊ नारे लगाए जाते थे। दूसरे, क्या कपिल मिश्रा ने कहा था कि "पेट्रोल बम, एसिड ईंट-पत्थर जमा करो और हिन्दुओं पर फेंको?
इन दंगों में शामिल समस्त हिन्दू इन दहशतगर्दों के साथ सुरताल मिलाते रहे। पार्टी फंड से ख़रीदे फ्लैटों को बेच-बेचकर बिंद्रा जैसे लोग लंगर लगा रहे थे, खूब बिरयानी और कोरमा का वितरण कर, झूठा प्रचार कर रहे थे कि इस कानून से केवल मुस्लिम समाज ही नहीं दूसरे भी डरे हुए हैं। नागरिकता संशोधक कानून के विरोधी चाहे वह किसी भी पार्टी, धर्म अथवा जाति से हों, राष्ट्र को विश्व में एक ऐसे देश का नाम बताएं जहाँ यह कानून नहीं है। और ऐसे लोगों को हम अपना कीमती वोट देकर स्वयं ही नहीं देश को गुमराह कर रहे हैं। ये लोग केवल तुष्टिकरण के चाटुकार हैं। दिल्ली दंगा उसी का प्रमाण है।     
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी है, जिसमें आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। ये दंगे नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में हुए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था। वो खालिद सैफी से भी सम्पर्क में था।
सैफी शाहदरा के खुरेजी खास में हुए दंगों का आरोपित है। क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने कड़कड़डूमा कोर्ट में ये खुलासे किए। इस मामले में ताहिर और उसके भाई शाह आलम सहित 15 आरोपित हैं। ताहिर हुसैन ने दंगों से पहले एक लाइसेंसी पिस्टल रिलीज करवाया था, जिसका उसने इस्तेमाल किया। उसके पास 75 गोलियों का कोई हिसाब नहीं है। जनवरी के दूसरे हफ्ते में उसने 1.1 करोड़ रुपए फर्जी सेल कम्पनियों को ट्रान्सफर किया था और बाद में उसने इसे कैश में वापस लिया।
मीनू फैब्रिकेशन, एसपी फाइनैंशल सर्विस, यूद्धवी इंपेक्स, शो इफेक्ट एडवर्टाइजिंग और इसेंस सेलकॉम- ये वो शेल कम्पनियाँ हैं, जिन्हें ताहिर हुसैन ने रुपए ट्रान्सफर किए थे। ताहिर हुसैन के घर में कई सीसीटीवी कमरे हैं लेकिन आश्चर्य की बात ये है उनमें फ़रवरी 2020 में 23 तारीख से लेकर 28 तारीख तक का कोई फुटेज ही उपलब्ध नहीं है। ताहिर ने दंगों से पहले खजुरी खास थाने में जमा अपनी पिस्टल क्यों रिलीज करवाई, इसका उसके पास कोई जवाब नहीं।
ताहिर हुसैन को कुल 10 केसों में आरोपित बनाया गया है। उसके नाम पर 100 कार्टेज इशू कराए गए थे, जिनमें से 16 कहाँ गए और इनका क्या इस्तेमाल किया गया- इसका कोई हिसाब नहीं है। ताहिर हुसैन के मोबाइल लोकेशन से पता चला है कि दंगों से पहले ही वो सैफी और खालिद से मिला था। साथ ही उस पूरे इलाके में हुसैन का ही इकलौता घर है, जिसे दंगाइयों ने छुआ भी नहीं। इससे पता चलता है कि दंगों में उसकी बड़ी भूमिका थी।

साथ ही ताहिर हुसैन पुलिस कस्टडी से भागने के लिए 10 दिनों तक छिपा रहा। वो पुलिस से भागता रहा। इसका भी उसके पास कोई जवाब नहीं है। इसके बाद वह सीधा मीडिया के सामने प्रकट हुआ। उसके घर के बाहर 12 ऐसी बोतलें मिली थीं, जिनमें संदिग्ध द्रव्य भरा हुआ था और उनकी गर्दनों को कपड़े से बाँधा गया था। ताहिर हुसैन का छत पर डंडा लिए वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसे ऑपइंडिया ने भी रिपोर्ट किया था। उस वीडियो को भी सबूतों में इकट्ठा किया गया है।
ताहिर हुसैन की छत पर गुलेल, ईंट-पत्थर, पेट्रोल बम और अन्य हथियार जैसी सामग्रियाँ मिली थीं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि इन दंगों के पीछे गहरी साजिश थी, जो कई दिनों से रची जा रही थी। ताहिर की लाइसेंसी पिस्टल को जब्त कर लिया गया था। इस पिस्टल को उसने विधानसभा चुनाव से पहले जमा कराई थी। स्पेशल सेल ताहिर पर यूएपीए के तहत कार्रवाई कर रहा है। आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा की हत्या का मामला भी उस पर चल रहा है।
ताहिर हुसैन ने उमर खालिद से कहा था कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आने वाले हैं, तब कुछ बड़ा होने वाला है, जिसके लिए सबको तैयार रहना है। उसने अपने समर्थकों को ‘बड़े एक्शन’ के लिए तैयार रहने को कहा था। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच भी रुपए बाँटे थे। आरोपित रिफायत ने पुलिस को बताया है कि कुछ महिलाएँ थीं, जो सभी को भड़का रही थीं और कह रही थीं कि किसी को भी हटना नहीं है।
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दिल्ली दंगों में शामिल आरोपितों के ‘अपनी’ महिलाओं के लिए भेजे गए निर्देश सामने आए हैं दिल्ली में हिन्दू विरोधी दं....
देवांगना, नताशा, गुलफिशा, रुमशा सहित कई महिलाओं के नाम इसमें आए हैं, जो ‘पिंजरा तोड़’ जैसे संगठनों से ताल्लुक रखती हैं। इस दौरान रिफाकत ने भी भीड़ को लाठी-डंडा चलाने और फायरिंग करने के लिए उकसाया था।

दिल्ली : हिन्दू विरोधी दंगों में ‘अपनी’ महिलाओं के लिए निर्देश: खौलता तेल, एसिड की बोतलें, पेट्रोल जमा करो…

दिल्ली दंगे-पिंजरा तोड़
दिल्ली दंगों में शामिल आरोपितों के ‘अपनी’ महिलाओं के लिए भेजे गए निर्देश सामने आए हैं
दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में क्राइम ब्रांच ने कड़कड़डूमा कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और पार्षद ताहिर हुसैन पर ना सिर्फ दंगों को फंड करने का आरोप लगाया है बल्कि उसे इन दंगों का मास्टरमाइंड बताया है।
चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन समेत 15 लोगों को आरोपित बताया गया है। पुलिस ने एक हजार तीस पन्नों के चार्जशीट में पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम को भी आरोपित बनाया है। ताहिर हुसैन ने लोगों से बात की थी और उसी वक्त तय किया गया था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली आएँगे, तब दिल्ली में हिंसा कराई जाएगी। हालाँकि, पुलिस ने इस चार्जशीट में उमर खालिद को आरोपित नहीं बनाया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ताहिर हुसैन के साथ, उसके भाई शाह आलम सहित 15 और अभियुक्तों को उन दंगों में शामिल होने के लिए नामित किया गया है, जिसमें 53 लोगों ने अपनी जान गँवाई। ताहिर हुसैन, शाह आलम और गुलफाम के भाइयों को कथित तौर पर आगजनी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
पुलिस के अनुसार, हिंसा कराने के लिए ताहिर ने एक करोड़ 30 लाख रुपए खर्च किए थे। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि हिंसा से पहले आरोपित ताहिर हुसैन ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरकिता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल लोगों से बातचीत की थी। ताहिर ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से भी बात की थी और सब कुछ उसके नियंत्रण में था।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि हिंसा के वक्त आरोपित ताहिर हुसैन अपनी छत पर था।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी ट्वीट में कुछ पन्ने साझा करते हुए लिखा है – “ये पढ़िए – दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पिंजरा तोड़ की लड़कियाँ दंगो से पहले खास इलाकों में कैसे मैसेज कर रही हैं – घरों में तेजाब, खौलता तेल रखिए – छतों पर ईंट और पत्थर रखिए। ताहिर हुसैन ने 22 फरवरी को पिस्टल इश्यू करवाई थी, दंगो की भयानक तैयारी की गई थी।”

इस चार्जशीट में जिक्र किया गया है कि आरोपितों के मोबाइल में व्हाट्सऐप द्वारा भेजे गए कुछ संदेश, जिनसे उनके दिल्ली दंगों में हाथ होने का प्रमाण मिलता है, इस प्रकार थे –
  1. घर में गर्म खौलते हुए पानी और तेल का इंतजाम करें।
  2. बिल्डिंग की सीढ़ियों पर तेल, शैंपू या सर्फ डाल दें।
  3. लाल मिर्च गर्म पानी में या पाउडर के रूप में प्रयोग करें।
  4. दरवाजों को मजबूत करें, जल्द से जल्द ग्रिल या लोहे के गेट लगवाएँ।
  5. तेजाब की बोतलें घर में रखें।
  6. बालकनी व छत पर ईंट और पत्थर रखें।
  7. कार व बाइक से पेट्रोल निकाल कर रखें।
  8. लोहे के दरवाजों में स्विच से करंट का इस्तेमाल करें।
  9. एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने के लिए रास्ते का इंतजाम करें।
  10. बिल्डिंग के सारे मर्द हजरात एक साथ इमारत ना छोडें, कुछ लोग महिला सुरक्षा के लिए रुकें। 
ताहिर हुसैन पर आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या समेत दिल्ली में हिंसा फैलाने का आरोप है। इसके साथ ही यह भी आरोप है कि ताहिर हुसैन के घर की छत से ही लोगों पर हमला किया जा रहा था।

IB अधिकारी की हत्या
चाँदबाग़ वही इलाका है, जहाँ आईबी अधिकारी अंकित शर्मा एक नाले में मृत पाए गए थे और यह क्षेत्र दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। अंकित शर्मा के परिवार ने और प्रत्यक्षदर्शियों ने ताहिर हुसैन पर सीधे तौर पर इस निर्मम हत्या का आरोप लगाया था।
अंकित के पिता रविन्द्र शर्मा ने प्रशासन से तारिक हुसैन की आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच कराने का आह्वान करते हुए कहा था कि ताहिर हुसैन ने अपने आवास पर गुंडों को इकट्ठा किया था। ये सभी ताहिर की छत से लगातार फायरिंग कर रहे थे और नीचे खड़े लोगों पर छत से पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों में तनाव और डर का माहौल पैदा हुआ। 
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान ताहिर हुसैन की छत से ईंट, पत्थर, तेजाब के पैकेट, डंडे और अन्य हथियार बरामद हुए थे। ताहिर के घर के नीचे से पहले से लगाया गया गुलेल भी मिला था। इसके साथ ही पेट्रोल बम और बोतल भी बरामद किए गए थे।
एक अन्य चार्जशीट जाफ़राबाद इलाके में हुए दंगों के सिलसिले में दायर की गई थी। पिंजरा तोड़ के कार्यकर्ता पहले से ही इन इलाकों में दंगे भड़काने के मामले में जाँच का सामना कर रहे हैं। हाल ही में, शुक्रवार को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नताशा नरवाल को कड़े गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया और उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ ताहिर हुसैन दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (जून 2, 2020) को बड़ी कार्रवाई करते हुए फ़रवरी क.....
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों में मुख्य अभियुक्त पाया गया था। दिल्ली के दंगों में उनकी भूमिका के उजागर होने के बाद, सीएए विरोधी प्रदर्शनों के साथ उनके संबंध भी बाद में सामने आए थे।
चश्मदीदों के दिल्ली दंगों के दौरान अनुसार ताहिर हुसैन की इमारत में करीब तीन हजार दंगाई जमा थे जिन्होंने हिंदुओं को निशाना बनाया।  दंगों में अपनी भूमिका सामने आने के बाद ताहिर फरार हो गया था।

महीनों से हिन्दुओं पर हमले की योजना बना रही मुस्लिम भीड़ आख़िर पीड़ित कैसे?

दिल्ली दंगा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जिसने बड़ी मात्रा में ईंट-पत्थर घरों, मस्जिदों और ऊँचे मकानों की छतों पर सजा कर रख दिए हों, जिसने पेट्रोल खरीदकर, काँच की बोतलें इकट्ठा कर पेट्रोल बम बनाकर तैयार कर लिए हों, जिसने तेजाब खरीदकर बोतलों में जमा कर लिया हो, जिसने अपनी रक्षा के लिए हथियारों को सहेजकर रख लिया हो, जिसने अपने कीमती सामानों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचा दिया हो, जिसने हिन्दुओं की संपत्ती को अपने निशाने पर ले लिया हो, जिसने हमले को अंजाम देने के लिए ऊँची इमारतों का चयन कर लिया हो, जिसने हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाने के लिए बड़ी गुलेल तैयार कर ली हो, जिसने स्कूलों से अपने बच्चों को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया हो और जिसने कानों-कान अपने लोगों को हमला करने का संदेश दे दिया हो… आख़िर वही समुदाय दिल्ली दंगों का पीड़ित कैसे हो सकता है? इतने सारे ‘जिसने’ वाले सवाल उठना लाज़मी है, क्योंकि जिस समुदाय ने हिन्दुओं के खिलाफ़ महीनों तक साजिश रची और तैयारी की हो वही समुदाय आज अपने को पीड़त साबित करने पर तुला हुआ है।
खुद को पीड़ित दिखाने की कला भी देखिए! संतरों को सड़क पर फैला दिया जाता है, रेहड़ी में खुद ही आग लगा दी जाती है। किराए की दुकान से अपने कीमती सामान को निकालकर उसे आग के हवाले कर दिया जाता है। बीमा कंपनी का लाभ लेने के लिए शोरूम से बाईकों को पहले ही निकालकर उसमें खुद ही तोड़फोड़ की जाती है, और पीड़ित दिखाने के लिए शोरूम से एक काउंटर बाहर निकालकर उसमें आग लगा दी जाती है। हद तो तब हो गई कि जब अपनी ही भीड़ की चपेट में आने से जिस भाईजान की जान चली गई, उसकी लाश को 24 घंटे घर के अंदर रखा जाता है और फ़िर जैसै ही केजरीवाल सरकार मृतकों के लिए मुआवजे का ऐलान करती है, वैसे ही उस लाश को निकाल कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया जाता है। ये है फितरती दिमाग,पहले दंगा करो, फिर मरने पर घरवालों के लिए सरकारी मुआफज़ा। वीडियो देखिए, जिसमे बुढ़िया पुलिस पर ईंट फेंकते गिर जाती है, लेकिन बाद में मुआफजा लेने के लिए कहती है कि पुलिस ने मारा। 
आश्चर्य इस बात का कि जो दिल्ली दंगों में दंगाइयों का चेहरा बना, वही मुस्लिम समुदाय सबसे पहले मीडिया के सामने आकर झूठ के आँसू दिखाते हुए अपने को पीड़ित प्रदर्शित करता है। इसमें ग़ौर करने वाली बात ये है कि सीएए विरोध के नाम पर की गई हिन्दू विरोधी हिंसा में छोटे से लेकर बड़े तक, जवान से लेकर बूढ़े तक और महिलाओं से लेकर बच्चों तक हर कोई शामिल था। इसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लड़ाई एक दिन या सीएए विरोध की नहीं बल्कि गजवा-ए-हिंद के सपने को साकार करने की है।
अब आपको याद दिलाते हैं, दिल्ली हिंसा में असली पीड़ितों का दर्द और सच्ची कहानी, जो किसी न किसी रूप में मुस्लिमों की साजिश का तो शिकार हुए ही, साथ ही 'हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई' और 'गंगा-यमुना तहजीब' के मीडिया रचित शोर में अपने माल के साथ अपनी जान से भी हाथ धो बैठे।
बलिदानी रतनलाल– अपने घर से अपने परिवार की नहीं बल्कि उस समाज की रक्षा करने के लिए निकलते हैं, जो इस देश के वासी हैं, लेकिन दुखद उसी समुदाय का वह शिकार हो गए और गाँव में होली से पहले तिरंगे में लिपटकर पहुँचते हैं।
आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा– जिन्हें दंगाई घर लौटते समय ताहिर हुसैन के घर में खींच लेते हैं और 400 बार चाकुओं से प्रहार कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया जाता है। इसके बाद उनकी लाश को मस्जिद से नाले में फेंक दिया जाता है।
राहुल ठाकुर– जो अपने घर से बाहर निकल कर बस यह देखने के लिए जाते हैं कि आख़िर ये हंगामा किस बात का हो रहा है और इसी बीच दंगाई उन्हें पेट में गोली मार देते हैं। यह सब तीन मिनट के अंदर होता है। इसके बाद घर की चौखट पर बैठी बेटे का इंतजार कर रही माँ को राहुल नहीं बल्कि उनकी लाश मिलती है।
आलोक तिवारी– जो घर से खाना खाकर टहलने के लिए बाहर की ओर निकलते हैं और दंगाई भीड़ का शिकार हो जाते हैं। दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ इंतजार कर रही पत्नी को पति आलोक तिवारी नहीं बल्कि उनकी लाश मिलती है और इसी के साथ उसके जीवन में अँधेरा सा छा जाता है।
इंजीनियर राहुल सोलंकी– जो घर से आ रही आवाजों को सुनकर निकलते हैं, लेकिन दोबारा अपने घर वापस नहीं लौट पाते… क्योंकि दंगाई उनकी गर्दन में गोली मारकर हत्या कर देते हैं।
दिलबर नेगी– जो उत्तराखंड से जीवन यापन करने के लिए दिल्ली आकर एक दुकान में नौकरी करते हैं, लेकिन अफसोस दंगाइयों की भीड़ उनके हाथ-पैर काटकर उन्हें आग के हवाले कर देती है। परिवार को शव उस हालत में मिलता है, जिसका अंतिम संस्कार भी न किया जा सके। दिलबर सेना में जाकर देश की सेवा करना चाहते थे, उनका यह सपना अधूरा रह गया।
विवेक उर्फ विक्की– दुकान के अंदर बैठे विवेक के सिर में दंगाई ड्रिल घुसा देते हैं। इस घटना के बाद से पाँच बहनों के बीच इकलौते भाई विवेक आज भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं।
श्याम चाय वाले– दुकान पर बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे थे, तभी दंगाइयों की भीड़ आती है, दुकान में लूटपाट करती है और उसे आग के हवाले कर देती है। आज भी श्याम अपने परिवार का पेट पालने के लिए दर-दर भीख माँगते फिर रहे हैं।
अनूप सिंह– बाहर हो रहे शोर-शराबे को सुन घर से बाहर निकलते हैं। इसी बीच ताहिर हुसैन के छत से चली गोली सीधे अनूप सिंह की गर्दन में जाकर लगती है। आज भी इलाज जारी है।
अंकित पॉल– हर दिन की तरह उस दिन भी दुकान पर बैठे थे। तभी दंगाइयों की भीड़ आती है और उन्हीं की आँखों के सामने पहले दुकान फिर गोदाम और ऑफिस में लूटपाट करती है। फिर सब कुछ आग के हवाले कर देती है। चंद घटों के अंदर अंकित की जीवन भर की कमाई ख़ाक हो जाती है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कमान से निकला तीर और मुंह से निकले शब्द कभी वापस नहीं होते, उसी तरह हाथ में हथि...
यह उन पीड़ितों की कहानी है, जो दिल्ली दंगों की योजना और अपने ऊपर होने वाले हमलों से बिल्कुल अनजान थे। इसके बाद भी, जिन लोगों ने हिन्दुओं पर हमला करने की महीनों पहले योजना बनाई और उसे अंजाम भी दिया, वही आज नकली आँसू बहाकर मीडिया के सामने खुद को दंगा पीड़ित बताते हुए घूम रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि मुस्लिम दंगाइयों को मीडिया का एक बड़ा तबका पीड़ित बता भी रहे हैं और दिखा भी रहे हैं।

शाहीन बाग़ इलाके से मिले 3 शव

शाहीन बाग़
                                                                प्रतीकात्मक 
नए नागरिकता कानून के खिलाफ धरना प्रदर्शन के नाम पर होती अराजकता के लिए बदनाम हुए दिल्ली के शाहीन बाग क्षेत्र से 3 शव मिलने की खबर से हड़कंप मच गया है। दिल्ली के इस शाहीन बाग़ इलाके में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में 84 दिन से धरना चल रहा है। ये 3 शव इस क्षेत्र के 3 अलग-अलग इलाकों में पाए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साउथ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी आरपी मीणा ने बताया कि शव मिलने का पहला मामला शुक्रवार(मार्च 6) दोपहर करीब 12 बजे जानकारी में आया। यह शव यमुना नदी के किनारे मिला था, जिसमें मरने वाले की उम्र करीब 35 साल बताई जा रही है। मृतक की पहचान जाँच पड़ताल के बाद अशोक नगर दिल्ली निवासी मदन थापा पुत्र मनवीर थापा के रूप में हुई। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
मदन थापा नामक इस व्यक्ति के गायब होने की रिपोर्ट हरि नगर थाने में 3 फरवरी 2020 को दर्ज कराई गई थी। हालाँकि इस शव के ऊपर चोट का कोई निशान नहीं मिला है। वहीं शाहीन बाग क्षेत्र के मदर डेयरी के पीछे वाले नाले के पास स्थित एफ ब्लॉक से एक दूसरा शव दोपहर करीब साढ़े तीन बजे बरामद हुआ। इसकी शुक्रवार देर रात तक पहचान नहीं हो पाई थी, हालाँकि मृतक की उम्र करीब 40 साल बताई जा रही है। इस शव को पहचान और फिर पोस्टमॉर्टम के लिए पोस्टमॉर्टम हाउस में सुरक्षित रखवा दिया गया है। इस व्यक्ति की मौत कैसे हुई इस की भी जाँच अभी जारी है। तीसरा शव भी इसी इलाके में रेलवे लाइन के किनारे मिला बताया जा रहा है।
ऐसे में प्रश्न होता है, कि जनता को भ्रमित कर हवन करने और लंगर बाँटने वाले क्यों चुप हैं? 
इसके पहले दिल्ली स्थित शाहीन बाग कल भी चर्चा में रहा जब यहाँ की लाइव तस्वीरों को दिखाने के लिए शुक्रवार को शाहीन बाग पहुँची इंडिया टीवी की दो महिला पत्रकारों को देखते ही वहाँ मौजूद प्रदर्शनकारियों में भगदड़ मच गई। जिन्होंने खाली पड़े पंडाल में और ज्यादा भीड़ को एकत्र करने के लिए इमरजेंसी हूटर बजा दिया गया।

इसके बाद तो किसी ने महिला पत्रकार के माइक को थामा तो किसी ने कैमरे के सामने हाथ लगा दिया। और तो और, लाइव कवरेज को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों ने महिला पत्रकार के कैमरे तक को तोड़ने की कोशिश कर डाली। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जैसाकि शाहीन बाग़, जामिया, जामा मस्जिद और देश के अन्य क्षेत्रों में नागरिकता संशोधक का....
देश भर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन का केंद्र बने शाहीन बाग़ में अब वो रौनक नहीं रह गई है और नाम को ही धरना चल रहा है, इसी वजह से मौके पर खाली पड़े पंडाल को लाइव होते देख प्रदर्शनकारियों में अफरातफरी मच गई थी।

AAP पार्षद ताहिर हुसैन की गिरफ़्तारी कब?

ताहिर हुसैन, दिल्ली हिंसा
ताहिर हुसैन (दाएँ) की बहुमंजिला इमारत (बाएँ) से बमबारी करते कई लोग
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में जामिया इस्लामिया में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने भाषणबाज़ी की, जिसका परिणाम शाहीन बाग़ और उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में केजरीवाल की ही पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडों ने बमबारी की। अमानतुल्ला आज़ाद घूम रहा है और अब ताहिर ने दिल्ली को जला दिया या ये कहा जाए कि गोधरा बना दिया। चुन-चुनकर हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, हिन्दुओं की सम्पत्तियों को राख किया, अब कब होगी ताहिर की गिरफ़्तारी? क्या केजरीवाल उसको पार्टी से निकाल पुलिस से तुरन्त गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा देने के लिए कहेंगे? दिल्ली में दंगाइयों ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मार डाला। वो मात्र 26 वर्ष के थे और हाल ही में उनकी नौकरी लगी थी। जिस परिवार में कुछ दिनों पहले तक ख़ुशी का माहौल था, वो अब गम और मातम के साए में जी रहा है। पीड़ित परिवार ने सीधा आरोप लगाया है कि मुस्लिम भीड़ अंकित शर्मा को घसीट कर ले गई। उन्हें गली में से घसीट कर ले जाया गया। इसी इलाक़े में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद मोहम्मद ताहिर हुसैन का भी घर है, जहाँ से रह-रह कर गोलीबारी हो रही है। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी आरोप लगाया है कि हुसैन के घर से निकले गुंडों ने अंकित को मार डाला।
AAP पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत से गुंडे कर रहे बमबारी
नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप अंकित शर्मा के परिवार का वो बयान देख सकते हैं, जिसमें पता चल रहा है कि कैसे मुस्लिम भीड़ अंकित को गली में से घसीटते हुए ले गई। परिवार का रो-रो कर बेहद बुरा हाल है, आप इस वीडियो में देख सकते हैं:

केजरीवाल की पार्टी के नेता ताहिर हुसैन के घर से लगातार गोलीबारी हो रही है। उसके घर से पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं। इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं लेकिन अब तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का कोई बयान नहीं आया है और न ही पार्टी ने हुसैन पर कोई कार्रवाई की है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे ताहिर हुसैन के घर पर जमा कई लोग लगातार बम फेंक रहे हैं और जम कर पत्थरबाजी कर रहे हैं:
पत्रकार राहुल पंडिता ने भी सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर किए और बताया कि मूँगा नगर में हिन्दुओं ने आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छत पर से हुसैन के आदमी पेट्रोल बम और पत्थर फेंक रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन के 5 मंजिला ईमारत में पहले से हथियार जमा कर के रखे गए हैं और उसके ही गुंडों ने अंकित शर्मा को मारा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस ईमारत के हर मंजिल से बम फेंके जा रहे हैं और भारी संख्या में गुंडे जमा हैं।
देखिए वीडियो-
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नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लेकर देश के कई राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहा है । वहीं देश की राजधानी दिल्ली के जामिया...
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ओडिशा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रदीप माझी द्वारा विवादित बयाद दिए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिय....
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आर.बी.एल.निगम इतिहासकार और लेखक विलियम डालरिम्पल (William Dalrymple) ने एक कार्यक्रम के दौरान यह स्वीकार किया कि देश में वामपं.....
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जामिया, JNU से चले आजादी के नारे शाहीनबाग़ तक आते-आते इस्लामिक नारों, हिन्दू विरोधी नारों...
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल हमेशा मोदी सरकार पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का झूठ....

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जबसे नागरिकता संशोधन कानून बना है, देश में…
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ज़मीन पर चाहे जो भी स्थिति हो, लिबरलों के गिरोह विशेष का का पूरा जोर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपने अनुरूप माहौल बना.....
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अंकित शर्मा आईबी के कॉन्स्टेबल थे। कुछ दिनों पहले ही एजेंसी में उनकी नौकरी लगी थी। वह ...