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बिहार में एक्टिव आतंकवाद का ‘स्लीपर सेल’ : मोहम्मद अहद से लेकर सद्दाम तक

                                                                                                                             प्रतीकात्मक 
बिहार में हाल के दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को पूरी तरह अलर्ट पर डाल दिया है। केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कटिहार से मोहम्मद अहद नाम के एक संदिग्ध युवक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमा पार बैठे भारत विरोधी तत्व लगातार देश को दहलाने की साजिश रच रहे हैं।

मोहम्मद अहद को पाकिस्तानी आतंकी संगठन का एक सक्रिय ‘स्लीपर सेल’ बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया के जरिए सीधे पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में था, लेकिन यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों के भीतर बिहार के अलग-अलग जिलों जैसे मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर से भी इसी तरह के संदिग्धों को दबोचा गया है।

                                       पुलिस की गिरफ्त में मोहम्मद अहद (फोटो साभार: जागरण)

इन सभी मामलों की कड़ियों को आपस में जोड़ने पर एक बेहद खतरनाक और सुव्यवस्थित पैटर्न उभर कर सामने आता है। ये गिरफ्तारियाँ इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि बिहार आतंकियों के निशाने पर हैं, जहाँ वे स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की साजिश रच रहे हैं।

गिरफ्तारियों में ‘कॉमन फैक्टर’ और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स का कनेक्शन

अगर हम हाल के दिनों में बिहार से हुई तमाम गिरफ्तारियों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इन सब में कुछ बेहद खतरनाक और समान बातें देखने को मिलती हैं। सबसे बड़ी समानता यह है कि इन सभी संदिग्धों के तार सीधे तौर पर सीमा पार यानी पाकिस्तान में बैठे आकाओं से जुड़े हुए हैं।

चाहे वह कटिहार का मोहम्मद अहद हो, मुंगेर का मोहम्मद सद्दाम हो या फिर मुजफ्फरपुर से पकड़ा गया मोहम्मद अली, ये सभी लोग किसी न किसी रूप में पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में थे। कटिहार से पकड़े गए अहद के मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया कि वह पाकिस्तानी गैंगस्टर राणा हुसैन और शहजाद भट्टी के नेटवर्क से लगातार संपर्क में था।

मुंगेर से गिरफ्तार मोहम्मद सद्दाम के तार भी ‘राणा भाई’ गैंग से जुड़े पाए गए थे, जो सीमा पार के एक संदिग्ध नेटवर्क का संचालन करता था। यह इस बात का सबूत है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियाँ और आतंकी संगठन अब वहाँ के स्थानीय गैंगस्टर्स और अपराधियों के नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में स्लीपर सेल बनाने और हथियारों की सप्लाई के लिए कर रहे हैं।

दूसरा सबसे बड़ा कॉमन फैक्टर इन सभी का डिजिटल कनेक्शन है। ये सभी संदिग्ध आम तौर पर समाज के बीच बेहद सामान्य जिंदगी जी रहे थे, लेकिन डिजिटल दुनिया में ये देश के खिलाफ एक अघोषित युद्ध लड़ रहे थे। वॉट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन्हें सीमा पार से निर्देश मिल रहे थे।

इनका मुख्य काम बिहार के अन्य पिछड़े इलाकों के गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को ढूँढना, मजहबी आधार पर उनका ब्रेनवॉश करना और उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों के लिए भड़काकर एक नया नेटवर्क तैयार करना था।

पिछले कुछ महीनों के प्रमुख मामले: बिहार में आतंकी नेटवर्क की सक्रियता

 बिहार में पिछले एक-दो महीनों के भीतर सुरक्षा एजेंसियों ने ताबड़तोड़ कार्रवाइयाँ करते हुए कई बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। हाल ही में बिहार ATS और स्थानीय पुलिस ने एक बड़े कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र से 50 साल के मदरसा संचालक मौलाना इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया।

इजहार को एक पाकिस्तानी एजेंट बताया गया है जो बिहार में स्लीपर सेल तैयार करने और कट्टरपंथी मॉड्यूल की फंडिंग का काम संभाल रहा था। उसके पास से कई भड़काऊ वीडियो मिले, जिनमें भारत में शरीयत कानून लागू करने की बातें कही गई थीं। इस मॉड्यूल के तार पाँच राज्यों से जुड़े थे और इजहार की गिरफ्तारी इस सिलसिले में छठी बड़ी कामयाबी थी।

इसी तरह मुंगेर पुलिस ने तारापुर थाना क्षेत्र के मिलिक थानपुर गाँव में देर रात छापेमारी कर मोहम्मद सद्दाम नाम के युवक को गिरफ्तार किया। सद्दाम पिछले दो-तीन साल से मुंबई में रह रहा था और वहीं वह ‘राणा भाई’ नामक पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में आया था। मुंबई में जब सुरक्षा एजेंसियों की धर-पकड़ बढ़ी, तो वह भागकर मुंगेर आ गया।

पुलिस ने उसके पास से एक देसी पिस्तौल और मोबाइल बरामद किया है। वह अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। इसके अलावा 2 साल पहले गुजरात की सूरत स्पेशल ब्रांच की टीम ने बिहार पुलिस के सहयोग से मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र से मोहम्मद अली को गिरफ्तार किया।

मोहम्मद अली पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और हिंदू नेता उमेश्वर राणा को जान से मारने की धमकी देने और साजिश रचने का आरोप था। वह नेपाल में बैठकर इंटरनेट के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और साजिशें रचता था। उसका नेटवर्क सूरत के एक मौलाना और पाकिस्तान के कट्टरपंथी सदस्यों से जुड़ा हुआ था।

इसी तरह बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया में पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध वॉट्सऐप चैट के मामले में 25 वर्षीय खुर्शीद आलम को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपित के मोबाइल फोन में पाकिस्तान के फोन नंबरों के साथ बातचीत और कई क्यूआर कोड मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

बिहार के सीमावर्ती जिले मधुबनी में सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जाली नोट नेटवर्क के शातिर अपराधी अबुल इनाम उर्फ लादेन को गिरफ्तार किया था। अबुल इनाम पर केवल जाली नोट चलाने का ही नहीं, बल्कि एक पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मस्तान को सुरक्षित नेपाल के रास्ते भगाने का भी गंभीर आरोप था।

पुलिस के मुताबिक, लादेन इस गैंग का मुख्य लोकल ऑपरेटर था। वह सीमा पार से आने वाले संदिग्धों को पनाह और रास्ता मुहैया कराता था। आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुए अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 12 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें बिहार के शादमान दिलकुश, अजमनुल्लाह खान भी शामिल थे।

पुलिस की छानबीन में इनके संबंध अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS से जुड़े सामने आए। जाँच में ये भी पता चला है कि ये आतंकी एक गेमिंग ऐप के जरिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और इनके तार ISIS से संबंध रखने वाले Benex Com नामक एक समूह से भी जुड़े थे।

PFI का ‘मिशन 2047’: बिहार से ही खुला था देश को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश का राज

बिहार का आतंकी कनेक्शन आज का नहीं है, बल्कि देश को हिला देने वाली कई बड़ी साजिशों के तार इसी राज्य से खुले हैं। इसका सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत साल 2022 में तब मिला, जब पटना के फुलवारी शरीफ में पुलिस ने एक संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।

इस छापेमारी के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े दो मुख्य आरोपितों, अथर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से जो दस्तावेज बरामद हुए, उसने पूरे देश के सुरक्षा महकमे को हिलाकर रख दिया।

इस दस्तावेज का नाम ‘India Vision 2047’ था, जिसकी टैगलाइन ‘Towards Rule of Islam in India’ थी। इस गुप्त दस्तावेज में साल 2047 तक, यानी भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक, भारत को एक पूर्ण इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की एक बहुत ही खतरनाक और चरणबद्ध योजना तैयार की गई थी।

इस योजना के पहले चरण में देश के अलग-अलग मुस्लिम संप्रदायों को PFI के झंडे तले इकट्ठा करने और एक ऐसी कट्टरपंथी पहचान बनाने पर जोर था जो राष्ट्रीय पहचान से ऊपर हो। युवाओं को लाठी, रॉड, तलवार और अन्य हथियारों को चलाने का आक्रामक प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी।

दूसरे चरण में अपने विरोधियों के मन में डर पैदा करने और अपनी ताकत दिखाने के लिए चुनिंदा हिंसा का सहारा लेने का प्रस्ताव था। जिन कार्यकर्ताओं में ज्यादा आक्रामकता दिखाई दे, उन्हें उन्नत हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने की योजना थी।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस अंतिम हिंसक उद्देश्य को छुपाने के लिए कार्यकर्ताओं को भारतीय संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और डॉ बीआर आंबेडकर जैसे प्रतीकों और शब्दों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था ताकि वे कानून की नजरों से बच सकें।

इसके बाद तीसरे चरण में PFI अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ राजनीतिक गठबंधन बनाना चाहता था ताकि बहुसंख्यक समाज को आपस में लड़ाया जा सके। संगठन का लक्ष्य खुद को अल्पसंख्यकों और वंचितों का एकमात्र मसीहा साबित करना था।

इसी चरण में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जमा करने और विरोधियों पर सुनियोजित हमले करने की बात भी शामिल थी। चौथे और आखिरी चरण में PFI ने खुद को देश के मुसलमानों का निर्विवाद नेता बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाने की कल्पना की थी।

सत्ता के करीब पहुँचते ही अपने वफादार लोगों को कार्यपालिका, न्यायपालिका, पुलिस और सेना में भर्ती करने की योजना थी। इसके बाद मौजूदा लोकतांत्रिक संविधान को हटाकर देश में इस्लामिक संविधान लागू करने का अंतिम लक्ष्य था।

इसके लिए हर मुस्लिम परिवार से एक सदस्य की भर्ती और एक समर्पित सशस्त्र बल तैयार करने का खाका खींचा गया था, जो जरूरत पड़ने पर तुर्की जैसे विदेशी इस्लामिक मुल्कों की मदद से भारतीय राज्य के साथ अंतिम संघर्ष कर सके।

इस दस्तावेज के सामने आने के बाद ही केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सितंबर 2022 में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत PFI और उससे जुड़े 8 अन्य संगठनों पर 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया था।

स्लीपर सेल के खुलासों और भंडाफोड़ के पुराने मामले

मध्य प्रदेश से गिरफ्तार इजहार उल हक ने पूछताछ में यह कबूला था कि उनके स्लीपर सेल पूरे देश में शांत बैठे हुए हैं, जो सिर्फ सही समय और ऊपर से मिलने वाले आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे बाहर निकलकर बड़ी तबाही मचा सकें। स्लीपर सेल का यह खतरा कोई नया नहीं है। भारत में पिछले दो दशकों से यह पैटर्न लगातार देखा जा रहा है।

स्लीपर सेल ऐसे प्रशिक्षित आतंकवादी या समर्थक होते हैं जो किसी भी आम नागरिक की तरह समाज में रहते हैं और कोई नौकरी, दुकान या पढ़ाई करते हैं जिससे किसी को शक न हो। वे तब तक कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं करते जब तक कि उन्हें आकाओं द्वारा किसी विशेष हमले को अंजाम देने का निर्देश न मिले।

2012 में मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के समय भी देश के भीतर इंडियन मुजाहिदीन और सिमी जैसे संगठनों के स्लीपर सेल्स का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया था।

उस दौरान दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और बोधगया में हुए सिलसिलेवार धमाकों की जाँच में यह बात साफ हुई थी कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर इन्हीं स्लीपर सेल्स ने लॉजिस्टिक्स, रहने की जगह और रेकी करने में मदद पहुँचाई थी।

उस समय भी बिहार के दरभंगा और समस्तीपुर जैसे जिलों से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने दरभंगा मॉड्यूल का नाम दिया था। इसके बाद साल 2020 के दौरान देश में ISIS के कई डिजिटल मॉड्यूल्स का पता चला।

जाँच में सामने आया कि सीरिया और इराक में बैठे हैंडलर्स भारत के पढ़े-लिखे युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से प्रभावित कर रहे थे और इस दौरान भी बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी कर ऐसे युवाओं को पकड़ा गया जो ऑनलाइन माध्यमों से कसम लेकर देश में अकेले दम पर हमला करने की फिराक में थे।

वहीं साल 2023 में भी NIA ने देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर अल-कायदा और ISIS से प्रेरित मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, प्रतिबंधित साहित्य और हथियार बरामद किए गए थे, जिसमें बिहार से हुई कई गिरफ्तारियों ने यह साबित किया कि स्लीपर सेल्स का जाल समय के साथ और अधिक फैल चुका है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म: आतंकियों का नया और सुरक्षित ‘हथियार’

आज के समय में आतंकवादियों को अपना नेटवर्क चलाने के लिए किसी गुप्त जगह पर आमने-सामने मिलने की जरूरत नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक और इंटरनेट ने उनके काम को बेहद आसान और सुरक्षित बना दिया है, यही कारण है कि अब सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकवाद के इस नए रूप को डिजिटल जिहाद का नाम दे रही हैं।

टेलीग्राम, सिग्नल, थ्रेमा और वॉट्सएप जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स इन आतंकियों के सबसे बड़े मददगार बन गए हैं क्योंकि इन ऐप्स पर होने वाली बातचीत को आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता, जिससे ये कानून और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचे रहते हैं। आतंकी इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बहुत ही शातिराना तरीके से करते हैं।

जैसे टेलीग्राम और सिग्नल पर वे सीक्रेट चैट का उपयोग करते हैं, जहाँ संदेश अपने आप नष्ट हो जाते हैं और बिना नंबर दिखाए बड़े-बड़े ग्रुप्स का संचालन किया जाता है। वहीं फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भड़काऊ और प्रोपेगैंडा वीडियो शेयर करके समाज से असंतुष्ट युवाओं की पहचान की जाती है।

इन सब के साथ डार्क वेब और वीपीएन तकनीक का सहारा लेकर वे अपनी पहचान पूरी तरह छुपा लेते हैं और विदेशी आकाओं से बात करने के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंड ट्रांसफर का काम भी करते हैं। इन डिजिटल टूल्स की वजह से भारत के भोले-भाले युवाओं को निशाना बनाना बहुत आसान हो गया है।

पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखते हैं कि कौन से युवा देश की नीतियों या धार्मिक\मजहबी मुद्दों पर ज्यादा आक्रामक या असंतुष्ट हैं और फिर उन्हें निशाना बनाया जाता है। शुरुआत में उन्हें धार्मिक साहित्यों और वीडियो के जरिए जोड़ा जाता है और धीरे-धीरे उनके मन में देश के प्रति नफरत का बीज बो दिया जाता है।

उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और इसका एकमात्र उपाय व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होना है। जब युवा पूरी तरह उनके मानसिक नियंत्रण में आ जाता है, तब उसे टेलीग्राम या सिग्नल के किसी गुप्त ग्रुप में शामिल कर लिया जाता है, जहाँ उसे हथियार चलाने, प्रोपेगैंडा फैलाने या स्लीपर सेल के रूप में काम करने के निर्देश दिए जाते हैं।

कटिहार के मोहम्मद अहद और मुंगेर के सद्दाम के मोबाइल से मिले पाकिस्तानी नंबर और चैट इसी डिजिटल ब्रेनवाशिंग की कहानी बयां करते हैं। बिहार में लगातार मिल रहे स्लीपर सेल्स के सुराग यह दिखाते हैं कि देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौती कितनी गंभीर है, हालाँकि सुरक्षा एजेंसियाँ एक-एक कर इनका सफाया कर रही हैं।

10% मुस्लिमों के दम पर भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश, RSS-PM मोदी का जिक्र: महबूब आलम की गिरफ्तारी से चर्चा में आए PFI के ‘इंडिया विजन 2047’ की कहानी

                                                  प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार - द हिंदू )
कांग्रेस ने अपने आपको सत्ता में बनाए रखने के हिन्दू-मुस्लिम को लड़वाने का हर सामान रखा हुआ था, लेकिन समय कालचक्र के घूमते हर सामान बेनकाब होता रहा है। मुस्लिम तुष्टिकरण करते हर हिन्दू धार्मिक स्थल को विवादित बनाना, कोट पर जनेऊ पहन सनातन धर्म को अपमानित करना, फिरोज जहांगीर के वंशज होते हुए हिन्दू चोला पहनकर घूमना और मुस्लिम कट्टरपंथियों को समर्थन भारत विरोधी विदेशियों की कठपुतली बन उनके इशारे पर काम करना 
आदि आदि।      

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने शनिवार (14 सितंबर 2025) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के बिहार राज्य अध्यक्ष महबूब आलम उर्फ महबूब आलम नदवी को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई 2022 के फुलवारीशरीफ़ आपराधिक साजिश मामले से जुड़ी हुई है।

महबूब आलम, जो बिहार के कटिहार जिले के हसनगंज इलाके के रहने वाले हैं, उनको किशनगंज से पकड़ा गया। वह इस मामले में गिरफ्तार और चार्जशीट किए गए कुल 26 आरोपितों में से 19वें व्यक्ति हैं। यह केस PFI की उन गतिविधियों से जुड़ा है, जिनका मकसद धार्मिक नफरत फैलाकर समाज में डर और आतंक का माहौल बनाना और देश विरोधी साजिशों को अंजाम देना था।

NIA के मुताबिक, यह मामला शांति और सौहार्द बिगाड़ने, लोगों में असंतोष फैलाने और देश के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने से जुड़ा है। यह मुकदमा सबसे पहले स्थानीय पुलिस ने 26 संदिग्धों के खिलाफ दर्ज किया था। एजेंसी ने बताया कि आरोपित अवैध और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे, जिनका लक्ष्य था, धार्मिक उन्माद भड़काना, समाज में अशांति फैलाना और हिंसा को हथियार बनाकर अपने मकसद पूरे करना।

जाँच एजेंसी ने खुलासा किया कि महबूब आलम और दूसरे आरोपित PFI के उस विजन डॉक्यूमेंट पर काम कर रहे थे, जिसे 11 जुलाई 2022 को फुलवारीशरीफ़ स्थित अहमद पैलेस से बरामद किया गया था। इसी दस्तावेज में संगठन की गुप्त योजना का जिक्र था।

NIA ने बताया कि महबूब आलम इस साजिश का हिस्सा था और उसने भर्ती, ट्रेनिंग, बैठकों और अन्य देशविरोधी गतिविधियों में भाग लिया। इतना ही नहीं, उसने फंड भी जुटाया और इसे अपने साथियों और PFI कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया। एजेंसी ने कहा कि इस मामले की जाँच BNS और UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत जारी है।

जाँच में पता चला कि आलम और उसके साथी एक गुप्त विजन डॉक्यूमेंट पर काम कर रहे थे। इसका नाम इंडिया विजन 2047 था।

क्या है इंडिया विजन 2047

बिहार पुलिस ने जुलाई 2022 में आठ पन्नों का एक दस्तावेज जब्त किया था। जिस दस्तावेज का मकसद साफ था, वे 2047 तक भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की योजना बना रहे थे। इसमें कहा गया कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का मात्र 10% भी उनका साथ दे दे तो वे बहुसंख्यक समुदाय को दबाकर अपना वर्चस्व कायम कर लेंगे।

डायरेक्ट रोडमैप में भर्ती और प्रशिक्षण पर जोर था। खासकर एक PE विंग बनाकर उन्हें तलवार, डंडे और अन्य हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि आक्रमक व रक्षात्मक दोनों काम कर सकें। साथ ही सरकारी विभागों, कोर्ट, पुलिस और सेना में विश्वासी मुसलमान घुसाने की रणनीति बताई गई थी। दस्तावेज ने विरोधियों को अलग-थलग करने और जरूरत पड़ी तो हटा देने तक की बात कही थी।

                                                                 PFI का डॉक्यूमेंट

रणनीति में मीडिया-आउटरीच, हर इलाके में PFI की मौजूदगी और संघ या परिवार के नेताओं के खिलाफ जानकारी इकट्ठा करने जैसे कदम भी बताए गए थे। आखिरी हिस्से में कहा गया कि सीधी लड़ाई की स्थिति में विदेशों, खासकर तुर्की जैसे मित्र इस्लामी देशों से मदद ली जाएगी।

इस दस्तावेज में लिखा था कि 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की योजना है। इस दस्तावेज में पीएम मोदी पर हमले की साजिश का भी जिक्र था। दस्तावेज में साफ लिखा था कि सिर्फ 10% मुस्लिमों की मदद से भी ‘कायर हिंदुओं’ को दबाया जा सकता है।

योजना में विदेशी इस्लामी देशों, खासकर तुर्की से मदद लेकर भारत के खिलाफ हथियारबंद विद्रोह खड़ा करने की बात थी। इसके बाद NIA ने 17 राज्यों में छापेमारी की। इसमें बम बनाने के मैनुअल, ट्रेनिंग मॉड्यूल, विजन 2047 डॉक्यूमेंट और एक सीडी जब्त की गई।

इन सबका मकसद था भारत में दहशत फैलाना और इस्लामी शासन थोपना। इन खुलासों के बाद सितंबर 2022 में केंद्र सरकार ने PFI और उसके सहयोगी संगठनों पर 5 साल का बैन लगा दिया।

सरकार ने साफ कहा कि ये सभी संगठन यूएपीए कानून के तहत अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। बैन किए गए संगठनों में ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), रहाब इंडिया फाउंडेशन, NCHRO, नेशनल वीमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रहाब फाउंडेशन, केरल भी शामिल हैं।

विपक्ष में हिन्दुओं को सताया गज़वा-ए-हिन्द का डर; आगरा का धर्मांतरण गिरोह निकला ‘छांगुर पीर’ से भी ज्यादा खतरनाक, ISIS के पैटर्न पर करता था ब्रेनवॉश: PFI से लेकर PAK तक कनेक्शन, 6 राज्यों में छापे के बाद 10 गिरफ्तार

                               धर्मांतरण गैंग के पकड़े गए 10 लोग, उत्तर प्रदेश पुलिस ने 6 राज्यों से इन्हें दबोचा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस जिस तरह मुस्लिम कट्टरपंथियों के धर्मातरण गैंग का पर्दाफाश होने से समस्त विपक्ष में भी बड़ी हलचल शुरू हो चुकी है। सिर्फ सत्ता के लिए किये जा रहे मुस्लिम तुष्टिकरण पर सोंचने पर मजबूर हो रहे हैं। 
जिस तरह लव जिहाद और इस्लामीकरण गैंग सामने आ रहे हैं किसी मुस्लिम कट्टरपंथी और गंगा-जमुनी तहजीब के पाखंडी नारों से हिन्दुओं को गुमराह करने वालों की बोलती बंद है। जिससे विपक्ष में सनातन प्रेमी सतर्क होकर अंदरखाने योगी और मोदी के पीछे जाने का मन बना रहे हैं। उनमे मंथन शुरू हो गया कि अगर इस नाजुक समय पर योगी-मोदी का साथ नहीं दिया देश में हिन्दुओं का अस्तित्व घोर संकट में पड़ जायेगा। हमारी आने वाली पीढ़ियां पानी पी-पीकर हमें धिक्कारेंगी।   

उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में छह राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। यह नेटवर्क लव जिहाद के जरिए धर्मांतरण कराने, विदेशों से फंडिंग हासिल करने और कट्टरता फैलाने का काम कर रहा था। पुलिस मानती है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें कनाडा, UAE और अमेरिका से फंडिंग मिलती थी। यह मामला आगरा की दो लापता बहनों की जाँच से सामने आया।

जाँच में 7 लोगों के खिलाफ सबूत मिले। उनके खिलाफ वारंट जारी हुए। फिर पुलिस ने 11 टीमें छह राज्यों में भेजीं। आगरा पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। यह गिरोह बलरामपुर के छांगुर पीर वाले गैंग से भी खतरनाक बताया जा रहा है।

आगरा पुलिस कमिश्नर ने जानकारी दी कि इस गिरोह में हर सदस्य का काम तय था। कुछ लोग ब्रेनवॉश करते थे। कुछ पैसा जमा करते थे और विदेशों से आए फंड को दूसरों तक पहुँचाते थे। कुछ सदस्य गिरोह के लोगों को छिपने की जगह देते थे। कुछ कानूनी सलाह देते थे और कुछ नए फोन व सिम का इंतजाम करते थे।

कैसे शुरू हुई जाँच?

मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत दर्ज की गई थी। इनमें एक की उम्र 33 और एक की 18 साल थी। शुरुआत में यह गुमशुदगी का मामला था, लेकिन बाद में इसे अपहरण में बदल दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, दोनों बहनें अपना फोन नहीं ले गई थीं और सोशल मीडिया पर अपने असली नामों से एक्टिव नहीं थी, इसलिए पुलिस के लिए उनका पता लगाना मुश्किल था। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त ने इस ऑपरेशन की कमान संभाली।

I’D से खुली धर्मांतरण की पोल

पुलिस को परिवार से जो भी जानकारी प्राप्त थी उसी के आधार पर साइबर सेल ने काम करना शुरू किया था। उन्हें इंस्टाग्राम पर एक ‘कनेक्टिंग रिवर्ट आईडी‘ मिली। आईडी की जब जाँच की गई, तब कोलकाता लोकेशन का पता चला।

इस आईडी से जो भी लोग जुड़े थे उनकी जाँच की गई। पुलिस की एक महिला दारोगा ने फेक नाम बताकर खुद का धर्मांतरण के लिए संपर्क किया। फिर महिला दरोगा को आईडी से जवाब आता है। जवाब देने वाली एक महिला होती है। यहीं से पुलिस को आयशा का सुराग मिलता है। इसके बाद बैंक खातों की जानकारी भी हाथ लगती है।

छह राज्यों में एक साथ छापेमारी

लापता बहनों को खोजने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। कोलकाता में बहनों के होने का मजबूत सुराग था। इसलिए वहाँ एसीपी के साथ चार टीमें भेजी गईं। दिल्ली, राजस्थान, गोवा, उत्तराखंड और यूपी के बाकी इलाकों में भी टीमें भेजी गईं, जिनमें चार से पाँच पुलिसकर्मी थे।
गोवा के लिए पुलिस एयरप्लेन से भी गई। एक ही समय पर पुलिस ने सभी 6 राज्यों में छापा मारा। 50 पुलिसकर्मियों ने चार दिन तक दिन-रात काम किया और आखिरकार बहनें मिल गईं, साथ ही इस गिरोह के लोग भी पकड़े गए।

कैसे काम करता था यह गिरोह?

पुलिस ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही व्यवस्थित था। ये लोग लव जिहाद करते थे। यानी, लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाते थे। फिर उन्हें धर्म बदलने के लिए उकसाते थे। वे धर्म बदलने के कागजात भी बनाते थे। लड़कियों को कट्टर भी बनाते थे।
अवलोकन करें:-
इस्लामिक धर्मातरण और जेहादी हरकतों के लिए हमारी अदालतें और पिछली कांग्रेस सरकारें जिम्मेदार ;

इन्हें विदेशों से पैसा मिलता था। ये पैसे को सही जगह लगाते थे। छिपने के लिए सुरक्षित घर भी देते थे। कानूनी सलाह भी देते थे। नए फोन और सिम का भी इंतजाम करते थे। यह गिरोह दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, गोवा, देहरादून और यूपी के कई शहरों में फैला था।

भारत में इस्लामी आतंक फैलाने के लिए सिंगापुर-खाड़ी देशों में 13000 लोगों का नेटवर्क, बना रहे थे जिहादी फौज: PFI पर ED डोजियर की डिटेल

 

                                    पीएफआई के काले कारनामों की फाइल (फोटो साभार: DNA India)
प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर एक रिपोर्ट जारी उसके खतरनाक मंसूबों को बेनकाब किया है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) एक कट्टरपंथी संगठन है जिस पर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने, साम्प्रदायिक दंगों को भड़काने और एक इस्लामी जिहाद की योजना बनाने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा की गई जाँचों से यह साफ़ हुआ है कि PFI ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपने नेटवर्क का विस्तार किया है।

इसका उद्देश्य समाज में अस्थिरता फैलाकर साम्प्रदायिक दंगों को भड़काना, सरकार के खिलाफ विद्रोह करना और हिंसा को उकसाना था। इस रिपोर्ट में PFI के वित्तीय नेटवर्क, विदेशी फंडिंग, और उसकी गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

क्या है पीएफआई?

PFI की स्थापना 2006 में केरल में हुई थी। यह संगठन पहले एक ‘सामाजिक सुधारक’ संगठन के रूप में सामने आया, लेकिन धीरे-धीरे इसके असली उद्देश्य सामने आए। संगठन ने जल्दी ही भारत के विभिन्न राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, और अन्य राज्यों में विस्तार किया। इसके अलावा, PFI का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी खाड़ी देशों और सिंगापुर तक फैला हुआ है।
PFI का संचालन इसके शीर्ष नेताओं और महत्वपूर्ण पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। ये सदस्य संगठन के विभिन्न आयामों को संचालित करने, फंडिंग का प्रबंधन करने, और संगठन की रणनीति बनाने में शामिल हैं। पीएफआई के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों में सिर्फ देश में बैठे कट्टरपंथी ही नहीं हैं, बल्कि विदेश में बैठे इस्लामी कट्टरपंथी भी हैं, जिनमें से देश में बैठे अधिकांश कट्टरपंथियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कुछ को आप भी जान लीजिए..
KA रऊफ शरीफ, पद: नेशनल जनरल सेक्रेटरी, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI)
भूमिका: संगठन के युवा विंग के संचालन की जिम्मेदारी थी। इनके नेतृत्व में युवाओं को संगठन में शामिल किया गया और विभिन्न स्थानों पर हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया गया।
अब्दुल रज़ाक BP, पद: डिविजनल प्रेसिडेंट, केरल
भूमिका: स्थानीय स्तर पर संगठन का विस्तार और विभिन्न अभियानों का नेतृत्व किया।
अशरफ MK, पद: राज्य कार्यकारी परिषद (SEC) सदस्य, PFI केरल यूनिट
भूमिका: राज्य स्तर पर फंडिंग, कार्यक्रमों की योजना और सामरिक निर्णय लेने में शामिल थे।
शफीक़ पायथ, पद: PFI सदस्य, कतर
भूमिका: कतर से संगठन के लिए धन इकट्ठा करने और उसे भारत भेजने का कार्य किया।
परवेज़ अहमद, पद: दिल्ली स्टेट PFI के अध्यक्ष
भूमिका: दिल्ली में PFI की गतिविधियों का नेतृत्व और साम्प्रदायिक दंगे भड़काने में शामिल रहे।
साहुल हमीद, पद: PFI सदस्य, सिंगापुर
भूमिका: सिंगापुर से हवाला के जरिए धन इकट्ठा कर भारत में भेजने का कार्य किया।
KS एम. इब्राहिम उर्फ असगर, पद: अरिवगम मदरसा का सचिव
भूमिका: मदरसों का इस्तेमाल धार्मिक रूपांतरण के लिए किया और जिहादी प्रशिक्षण में शामिल रहे।
ओ. एम. ए. सलाम, पद: PFI के अध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद (NEC) सदस्य
भूमिका: संगठन के मुख्य रणनीतिकार थे और राष्ट्रीय स्तर पर अभियानों का नेतृत्व किया।
अनिस अहमद, पद: NEC सदस्य
भूमिका: PFI के राष्ट्रीय अभियानों में प्रमुख भागीदारी।
ए. मोहम्मद युसुफ, पद: NEC सदस्य
भूमिका: संगठन के आतंकी एजेंडे को लागू करने में शामिल थे।
अब्दुल खाडर पुत्तूर, पद: शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षक
भूमिका: सदस्यों को हथियारों का प्रशिक्षण देने का कार्य करते थे।

PFI का नेटवर्क और फंडिंग

PFI का वित्तीय नेटवर्क अत्यंत जटिल और वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है। जाँच में पाया गया कि संगठन ने विभिन्न स्रोतों से कुल 94 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जमा की थी। यह राशि हवाला, डमी दानदाताओं, और विदेशों से बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त की गई थी।
PFI ने देशभर में 29 बैंक खातों का उपयोग किया, जो कि केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में स्थित थे। यह धनराशि विभिन्न परियोजनाओं और अभियानों के लिए उपयोग की जाती थी, जिनमें हिंसक गतिविधियाँ और साम्प्रदायिक तनाव भड़काने के प्रयास शामिल थे​।
PFI का विदेशी नेटवर्क विशेष रूप से खाड़ी देशों में फैला हुआ था, जहां इसके 13,000 से अधिक सक्रिय सदस्य थे। संगठन ने सिंगापुर, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, ओमान और UAE में ज़िला कार्यकारी समितियाँ (District Executive Committees) बनाई थीं। हर समिति को करोड़ों रुपये जुटाने का लक्ष्य दिया गया था, और यह धन हवाला और अन्य गुप्त चैनलों के माध्यम से भारत में भेजा जाता था​।

पीएफआई खड़ा कर रही थी जिहादी फौज

PFI के सदस्यों को हिंसक अभियानों के लिए तैयार करने के लिए विशेष हथियार प्रशिक्षण दिया जाता था। केरल के कन्नूर जिले में स्थित नारथ कैम्प में 2013 में ऐसा ही एक प्रशिक्षण कैंप चल रहा था, जहाँ सदस्यों को विस्फोटक और हथियारों का उपयोग सिखाया जा रहा था। इन प्रशिक्षण शिविरों को ‘शारीरिक शिक्षा’ के नाम पर आयोजित किया जाता था, जबकि असल में यहाँ आक्रामक युद्धाभ्यास की तैयारी की जाती थी​।
PFI के सदस्यों ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में भाग लिया था, जिसमें उन्होंने हिंसा भड़काने का काम किया था। इसके अलावा, हाथरस (उत्तर प्रदेश) में संगठन के सदस्यों ने साम्प्रदायिक तनाव भड़काने का प्रयास किया। PFI का लक्ष्य था कि वह समाज में अस्थिरता फैलाकर सरकार और कानून-व्यवस्था को चुनौती दे सके​।
ED ने PFI और इसके सहयोगी संगठनों की 56.56 करोड़ रुपये की 35 संपत्तियाँ जब्त की हैं। इन संपत्तियों में कई ट्रस्टों और व्यक्तियों के नाम पर खरीदी गई जमीनें और इमारतें शामिल हैं। ये संपत्तियाँ धार्मिक संस्थानों और शैक्षिक ट्रस्टों के रूप में चलाई जा रही थीं, लेकिन इनका उपयोग संगठन की आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
जाँच में पाया गया कि PFI ने नकली दानदाताओं के नाम पर फंडिंग इकट्ठा की थी और इसे विभिन्न संपत्तियों और खातों में छुपा रखा था। ED ने अब तक PFI से जुड़े 26 सदस्यों को गिरफ्तार किया है और 9 शिकायतें दर्ज की हैं​।
PFI की गतिविधियों की जाँच से साफ़ है कि यह संगठन केवल एक सामाजिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक संगठित आतंकवादी नेटवर्क था। इसके विदेशी फंडिंग, हवाला तंत्र, और देशभर में हिंसक गतिविधियों में संलिप्तता ने इसे भारत की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बना दिया है। ED और NIA की जाँच में संगठन की गहरी जड़ें उजागर हो चुकी हैं, और इसके प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालाँकि PFI का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और इसे पूरी तरह से समाप्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियाँ और भी कठोर कदम उठा रही हैं।

उत्तर प्रदेश : 20 हजार की आबादी वाले गाँव में 19184 फर्जी दस्तावेज : रोहिंग्या-बांग्लादेशी मुस्लिमों का सर्टिफिकेट बनाता जीशान, विजय यादव करता मदद: ATS की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे

                            बांग्लादेशी-रोहिंग्या का फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला जीशान (साभार: भास्कर)
उत्तर प्रदेश के कई जिले रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के पनाहगाह बन गए हैं। कानपुर के बाद उन्नाव एवं रायबरेली में रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने वाले तंत्र के खुलासे के बाद शासन-प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। करीब 20,000 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के मामले में गिरफ्तार जीशान और ग्राम विकास अधिकारी विकास यादव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

उत्तर प्रदेश ATS की जाँच में अभी तक पता चला है कि पकड़ा गया सीएससी संचालक जीशान बस मोहरा है। इस पूरे खेल का असली सूत्रधार कोई और है। सूत्रधार के इशारे पर ही ये सारा खेल हुआ है। भाजपा के स्थानीय विधायक अशोक कुमार ने इसे आतंकी साजिश बताया है। वहीं, हिंदू संगठन भी इन मामलों में आतंकियों के शामिल होने का आरोप लगाकर अपना रोष बताया है।

यूपी के अलग-अलग जिलों में फैला है नेटवर्क

दरअसल, 18 जुलाई को यूपी एटीएस ने जनसेवा केंद्र संचालक जीशान खान, सुहैल, रियाज खान और VDO विजय यादव से अलग-अलग पूछताछ की थी। इस दौरान ATS को एक बड़े नेटवर्क की जानकारी मिली। यह नेटवर्क बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुस्लिमों को जगह-जगह बसाने में लगा हुआ है। कानपुर, उन्नाव, प्रयागराज, लखनऊ में भी इस तरह का खेल चल रहा है।
एटीएस इस मामले में बिहार, असम, कर्नाटक, केरल, मुंबई तक के तार जोड़ने में लगी हुई है। पुलिस को पता चला है कि इन लोगों को 20 हजार से अधिक बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर अलग-अलग जगहों पर बसाया है। रायबरेली का सलोन इलाका शुरू से ही संवेदनशील रहा है और यहाँ एक से बढ़कर एक आतंकी हुए हैं।
उधर, सलोन के प्रखंड विकास अधिकारी ने कहा है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा, यादव को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जाँच शुरू की गई है। कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। विजय यादव की आईडी से दो साल में 20 हजार से अधिक जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

कस्बे की जनसंख्या 20 हजार, 19 हजार से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाए

रायबरेली के पलाही गाँव की कुल जनसंख्या 4500 है और यहाँ सिर्फ एक मुस्लिम परिवार है, लेकिन इस गाँव के पते पर 819 मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए। इसी तरह एक अन्य गाँव नूरुद्दीनपुर की जनसंख्या 8,000 है लेकिन यहाँ के पते पर 12,000 से अधिक मुस्लिमों के जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं। ये लोग कुछ लोगों के हिंदू नाम से प्रमाण पत्र देते थे, ताकि शंका ना हो।
वहीं, 20 हजार की आबादी वाले सलोन कस्बे में 19,184 जन्म प्रमाण पत्र बना दिए गए।स्थानीय जन्म प्रमाण पत्र के लिए 3 से 5 हजार और बिहार, बंगाल एवं झारखंड आदि जगहों के लिए 5 से 10 हजार रुपए तक लिए जाते थे। बांग्लादेशी-रोहिंग्या मुस्लिमों से मिले इन पैसों का बँटवारा रोज शाम को विजय यादव, जीशान, रियाज और सुहैल के बीच होता था।
स्थानीय लोगों रायबरेली ये बानगी हैं। इनका नेटवर्क प्रयागराज, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अमेठी, लखनऊ सहित तमाम जिलों में फैला हुआ है। माना जा रहा है कि दूसरे राज्यों में भी इनका नेटवर्क होगा। दरअसल, रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसाने के लिए एक गैंग रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के नामों की सूची देता था और जीशान उनका जन्म प्रमाण पत्र बनाकर देता था।
अभी दो दिन पहले लखनऊ से नजमा नाम की बांग्लादेशी महिला को दो अन्य महिलाओं के साथ गिरफ्तार किया था। उसके घर से आधार कार्ड मिला है, जिसमें उसे मध्य प्रदेश की इंदौर का पता है। वहीं, उसके साथ की एक महिला आखी ने अपना नाम मधु सिंह रखा था। उसका भी पता इंदौर का है। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में भी बांग्लादेशियों का प्रमाण पत्र बनाया जाता है।

PFI आतंकी का भी जीशान ने बनाया था प्रमाण पत्र

जीशान ने प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक सदस्य का भी प्रमाण पत्र बनाया था। PFI के एक आतंकी को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। उसके पास से दस्तावेज बरामद किए गए थे। उसके सभी दस्तावेज रायबरेली के पलाही गाँव के पते पर ही बने थे। इन प्रमाण पत्रों को जीशान ने अपने जन सुविधा केंद्र से जारी किए गए थे।
गिरफ्तार PFI के आतंकी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह बात कबूल की थी कि सिर्फ केरल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और गुजरात के उसके कई साथियों के जन्म प्रमाण पत्र भी यहीं से बनवाए गए थे। अगर यहाँ की विस्तृत जाँच की जाए तो और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। वैसे भी सलोन आतंकियों से संबंधित रहा है।

आतंकियों और दाऊद के गैंग से कनेक्शन

रायबरेली 90 के दशक में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और दाऊद इब्राहिम के गैंग के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है। साल 1992 में आतंकी अब्दुल करीम टुंडा रायबरेली आया था। इसी तरह हिजबुल मुजाहिद्दीन का एरिया कमांडर बिलाल अहमद भी रायबरेली के खिन्नी तल्ला में शरण लिया था।
इसी तरह सलोन में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर इमरान अंसारी सक्रिय रहा। साल 2006 में ATS ने उसे पकड़ा था। बछरावाँ दाऊद गैंग का सेंटर रहा है। इसके अलावा भी समय-समय पर अन्य देश विरोधी एवं समाज विरोधी तत्व यहाँ से सक्रिय रहा। यहाँ आतंकियों से लेकर इन माफियाओं तक को किसने पनाह दिया, इसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया है।

भाजपा विधायक ने बताया ISI का हाथ

सलोन के भाजपा विधायक अशोक कुमार ने कहा कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बसाने के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को भारत में बसाने और उन्हें नागरिकता दिलाने के लि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे।
उन्होंने कहा कि इन सबके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ और उनकी फंडिंग है। उन्होंने कहा कि फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के जरिए वोटर आईडी समेत अन्य दस्तावेज तैयार कराए गए और इसके जरिए फर्जी लोगों ने रायबरेली-अमेठी जिले के लोकसभा चुनाव में वोटिंग भी की है। उन्होंने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

कर्नाटक : SDPI के चाँद पाशा ने ज्ञानवापी वाले जज को बताया ‘RSS का जूता चाटने वाला’, SI तनवीर हुसैन ने विरोध करने वालों पर ही कर दी FIR

वाराणसी के जज पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ कर्नाटक में लामबंद हुए वकील (फोटो साभार: द साउथ फर्स्ट/टाइम्स नाउ)
पिछले महीने वाराणसी की जिला अदालत ने ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास जी तहखाना में पूजा का अधिकार हिंदुओं को दिया था। इस फैसले के बाद कर्नाटक के रामनगर में एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फैसला सुनाने वाले जज को लेकर वकील चाँद पाशा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पाशा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI से भी जुड़ा हुआ है। उसकी टिप्पणी का विरोध करने वाले वकीलों पर SI तनवीर हुसैन द्वारा FIR करने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

यह मामला एक अभद्र फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार SDPI से जुड़े वकील चाँद पाशा ने वाराणसी कोर्ट के जज के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए एक पोस्ट किया। उसने हिंदुओं को व्यास जी तहखाना में पूजा करने की अनुमति देने वाले जज को कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘जूता चाटने वाला’ बताया था।

इसको लेकर रामनगर के वकीलों ने चाँद पाशा के खिलाफ इजूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पाशा को जिले के अधिवक्ता संघ से निकाले जाने की माँग भी हुई। इसको लेकर जब मीटिंग बुलाई गई तो उसमें विवाद हो गया। आरोप है कि पाशा ने इस मीटिंग में खलल डाला।

वकीलों ने आरोप लगाया है कि पाशा और उसके समर्थकों ने उत्पात मचाया। इसके बाद पाशा के एक साथी रफीक खान ने विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इस पर इजूर थाने के SI तनवीर हुसैन ने 10 वकीलों समेत 40 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

वकीलों ने तनवीर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रामनगर में जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर धरना देकर तनवीर को निलंबित किए जाने की माँग की है। इसको लेकर वकीलों ने रामनगर में रैली भी निकाली। वकीलों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्थानीय विधायक MA इकबाल हुसैन के दबाव में काम कर रहा है।

रामनगर की इस घटना पर अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। भाजपा और जेडीएस ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे वकीलों का समर्थन किया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक आर अशोक ने आरोप लगाया है कि SI तनवीर हुसैन राष्ट्रविरोधी ताकतों को मदद दे रहा है। अशोक ने कहा कि चाँद पाशा लगातार ऐसे ही अभद्र बयान देता रहा है और उसके खिलाफ जिले में 12 शिकायतें दर्ज हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने भी इस मामले पर राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस को चाँद पाशा को गिरफ्तार करना चाहिए था, क्योंकि उसने न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि तनवीर हुसैन को ऊपर से किसी ताकत का समर्थन हासिल है, क्योंकि उसने एक राष्ट्र विरोधी के साथ खड़े होने का काम किया है। इसकी उन्होंने जाँच की माँग की है।

चाँद पाशा को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वकील अपनी माँग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि इस मामले में तनवीर हुसैन ने सही आचरण नहीं दिखाया इसलिए उसे भी निलंबित किया जाना चाहिए। इसको लेकर आज (21 फरवरी 2024) बेंगलुरु में प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।


उत्तर प्रदेश : ‘कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे’: श्री कृष्ण जन्मभूमि के लिए लड़ रहे केस सत्यम पंडित को मिली धमकी

श्री कृष्ण जन्मभूमि का केस लड़ रहे सत्यम पंडित को 'सर तन से जुदा' की धमकी (फोटो साभार: एक्स हैंडल @SatyamS05818543 )
श्री कृष्ण जन्मभूमि को उसका हक दिलाने के लिए जो सत्यम पंडित कोर्ट तक पहुँचे, उन्हें अब ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। सत्यम पंडित ने एक लेटर दिखा कर दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की तरफ से उन्हें यह धमकी दी गई है। उनको यह पत्र गाजियाबद में अपने ऑफिस खोलने के दौरान शनिवार (2 दिसंबर 2023) को मिला। इसमें लिखा गया है: “तू श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह मथुरा केस में पैरवी करना बंद कर दे। वरना अल्लाह का वास्ता, राजस्थान के कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे, माशाल्लाह।”

सत्यम पंडित को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मामले के संबंध में गाजियाबाद घंटाघर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। एसीपी निमिष पाटिल के मुताबिक, शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और आगे जाँच की जा रही है। पीड़ित के ऑफिस के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पीड़ित सत्यम पंडित ने शनिवार (2 दिसंबर 2023)सुबह धमकी के तौर पर मिले PFI के इस पत्र को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने जब शनिवार (2 दिसंबर 2023)को गाजियाबाद के अपने ऑफिस का शटर उठाया तो वहाँ उन्हें एक कागज पड़ा मिला। इसमें उन्हें पीएफआई ने ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी है।

सत्यम पंडित ब्राह्मण एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट में केंद्रीय मंत्री के पद पर भी हैं। उन्होंने ट्रस्ट की तरफ से लगभग ढाई साल पहले कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को विवादित शाही मस्जिद से खाली कराने के लिए सिविल कोर्ट मथुरा में केस दर्ज किया था।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) नाम की ओर आए इस धमकी के बावजूद सत्यम पंडित ने कहा है कि वो इस केस में पैरवी करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली। मैं बता देना चाहता हूँ कि मैं डरने वाला नहीं।”

सत्यम पंडित को धमकी देने वाला पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) शायद यह भूल रहा है कि पीड़ित राजस्थान नहीं योगी के उत्तर प्रदेश में रहता है। यदि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) अपने मकसद में सफल हो भी जाता है, फिर इसके दुष्परिणाम भुगतने को भी तैयार रहना चाहिए। क्या 'सर तन से जुदा' की धमकी देकर सच्चाई को दबाने में सफल नहीं हो पायेगा। 

महाराष्ट्र : ATS ने हिंदू घृणा वाली आपत्तिजनक किताब का किया पर्दाफाश, PFI द्वारा भारत को इस्लामिक मुल्क का एजेंडा बेनकाब

भारत को असली खतरा किसी पाकिस्तान या चीन से नहीं, बल्कि जनमानस को पागल बना रहे भारत के ये धूर्त एवं छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता और पार्टियों से है, जो अपनी कुर्सी की खातिर देश की अस्मिता को ही दावं पर लगा रहे हैं। आखिर अपनी कुर्सी की खातिर देश को कहाँ ले जाना चाहते हो? कोई आत्मसम्मान है या नहीं? महाराष्ट्र ATS ने PFI के पास से  आपत्तिजनक किताब बरामद की है, कितने ऐसे हिन्दू नेता है, जिन्हे इस किताब के बारे में नहीं मालूम था? इतना याद रखो, इतिहास जयचन्दों का नाम अंकित नहीं करता। 

CAA विरोध में हिन्दुत्व के विरुद्ध भाषाशैली 
अडानी का विरोध करके भारत को नुकसान और विदेशो को लाभ करवाना, CAA विरोध हो या तथाकथित किसान आंदोलन विरोध वास्तविक मुद्दे की बजाए हिन्दू विरोध क्यों हुआ? किसान आंदोलन शाहीन बाग जैसे शाही आंदोलन अपने जीवन में नहीं देखे। किसकी भीख पर ये आंदोलन हुए? जिस आपत्तिजनक भाषाशैली का हिन्दुत्व के लिए प्रयोग हुआ था, अगर किसी अन्य मजहब के लिए किया होता, ज़िंदगी में कोई शाहीन बाग लगाने की सोंचता भी नहीं। क्या हिन्दू विरोध करके ये धूर्त नेता सत्ता हथियाना चाहते हैं? क्या हिन्दू विरोध करके मोदी-योगी को हराओगे, ये सबसे भयंकर भूल में हो? छद्दम धर्म-निरपेक्षों धर्म सीखना है इन कट्टरपंथियों से सीखो, जो सही बात को भी 'सर तन से जुदा' करके गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुर्सी के भूखे हिन्दू नेता देश की अस्मिता और धर्म को ही दावं पर लगा रहे हैं। भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश को लेकर महाराष्ट्र एटीएस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रतिबंधित संगठन PFI के 5 कट्टरपंथियों के खिलाफ दायर चार्जशीट में कहा गया है कि इनका इरादा 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना था। रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं का नाम लेकर मुस्लिम युवाओं को उकसाया जा रहा था। इनके पास से एक हिंदू घृणा से भरी किताब भी मिली है।

महाराष्ट्र एटीएस ने 2 फरवरी 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट को लेकर रिपब्लिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एटीएस ने पीएफआई के इन आरोपितों के फोन से ‘365 डेज: थ्रू अ थाउजेंड कट्स (365 days: Through a Thousand Cuts)’ नामक किताब जब्त की थी। इस किताब में कहा गया है कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने आने के बाद से देश में मुस्लिमों के लिए स्थितियाँ बदल गई हैं। इस किताब एक पैराग्राफ में लिखा है, “मोदी के सत्ता में आने के अगले ही दिन से सभी बुरी ताकतें सामने आ गईं। नफरत फैलाने वाले लोगों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन सभी को यह लग रहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र बन चुका है।”

हिंदुओं के खिलाफ नफरत से भरी हुई इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए 2002 के दंगों का भी जिक्र है। दंगों के समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके अलावा एटीएस द्वारा जब्त की गई इस किताब में योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह समेत कई अन्य हिंदू नेताओं का भी जिक्र किया गया है।

इस किताब में पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के संबंधों का भी खुलासा हुआ। इस किताब में एसडीपीआई का नाम बतौर प्रकाशक लिखा हुआ है। हालाँकि, एसडीपीआई ने पीएफआई से अपने संबंधों को कभी स्वीकार नहीं किया है। लेकिन इसे पीएफआई की शाखा के रूप में देखा जाता है।

चार्जशीट में एटीएस ने बताया है कि पीएफआई भारत को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था। गिरफ्तार कट्टरपंथियों ने मुस्लिम युवाओं को लेकर महाराष्ट्र के कई जिलों में सभाएँ की थी।

महाराष्ट्र एटीएस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सितंबर 2022 में छापेमार कार्रवाई करते हुए पीएफआई से जुड़े 21 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आरोपित मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। इन 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई थी। इन सभी को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

जिस रास्ते से अयोध्या आया शालिग्राम शिला, वहाँ NIA ने रेड में 8 को दबोचा: इनमें PFI सरगना रियाज भी शामिल

                                                  NIA और राम मंदिर (साभार: इंडियन एक्सप्रेस/जी न्यूज)
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। नेपाल से दो शालिग्राम शिला भी अयोध्या पहुँच चुकी है। शिला की पूजा-अर्चना के बाद श्रीराम मंदिर न्यास को सौंपा जा चुका है। इस बीच राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट मोड पर है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर को उड़ाने की साजिश के बीच NIA ने शनिवार (4 फरवरी 2023) को बिहार में छापेमारी कर 8 संदिग्ध लोगों को पकड़ा है। इस दौरान प्रतिबंधित चरमपंथी इस्लामी संगठन PFI से जुड़े रियाज मारुफ़ को भी गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, अधिकारी दो लोगों की हिरासत की बात कह रहे हैं। 

NIA की टीम ने मोतिहारी के चकिया थाना के कुंअवा गाँव में इस छापेमारी की। ये वही इलाका है, जहाँ से होकर शालिग्राम शिला नेपाल से अयोध्या पहुँचा था। बता दें कि रियाज का नाम पिछले साल फुलवारी शरीफ में PFI ट्रेनिंग सेन्टर चलाने में सामने आया था। उस दौरान भी NIA ने इस गाँव में छापेमारी की थी, लेकिन रियाज उससे पहले ही फरार हो गया था।

PFI ने साल 2047 तक भारत तो इस्लामी राष्ट्र बनाने का एजेंडा सेट किया है। पिछले साल पटना के फुलवारी शरीफ में छापेमारी के बाद इसका टूलकीट सामने आया था। इसमें अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की जगह फिर से मस्जिद बनाने की भी बात कही गई थी।

इससे पहले गुरुवार (2 फरवरी 2023) को अयोध्या के रहने वाले मनोज कुमार तिवारी नाम को एक अज्ञात व्यक्ति ने काॅल करके मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक धमकी देने वाले के तार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भी जुड़े सामने आ रहे हैं। 

मामले के संबंध में पुलिस ने बताया, ”एक अज्ञात व्यक्ति ने अयोध्या के रहने वाले मनोज कुमार को यह धमकी भरा फोन किया था। फोन कॉल में राम जन्म भूमि परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। मनोज ने इस फोन कॉल की जानकारी पुलिस को दी।” बकौल पुलिस, फोन कॉल करने वाले ने 2 फरवरी 2023 सुबह 10 बजे मंदिर उड़ाने की धमकी दी थी।

पुलिस ने बताया कि राम मंदिर को उड़ाने की धमकी भरा कॉल आते ही सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात जवानों को अलर्ट कर दिया गया है। वहीं, इस संबंध में राम जन्म भूमि पुलिस स्टेशन के एसएचओ संजीव सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है। फोन करने वाले शख्स की तलाश की जा रही है।

पुलिस ने इस संबंध में दो टीमों का गठन किया है। इसमें सर्विलांस सेल भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को मामले में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी भी हासिल हुई है। इस संबंध में एक टीम को दिल्ली भेजा गया है। 

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अयोध्या निवासी मनोज ने बताया कि 2 फरवरी 2023 सुबह 5 बजे उन्हें कॉल आया। कॉल करने वाले ने बताया कि 2 फरवरी 2023 को 10 बजे तक राम मंदिर को उड़ा देगा। उसने कहा कि वह दिल्ली से बोल रहा है। नाम पूछे जाने पर व्यक्ति ने कॉल काट दिया।