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बिहार में एक्टिव आतंकवाद का ‘स्लीपर सेल’ : मोहम्मद अहद से लेकर सद्दाम तक

                                                                                                                             प्रतीकात्मक 
बिहार में हाल के दिनों में सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिन्होंने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को पूरी तरह अलर्ट पर डाल दिया है। केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कटिहार से मोहम्मद अहद नाम के एक संदिग्ध युवक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सीमा पार बैठे भारत विरोधी तत्व लगातार देश को दहलाने की साजिश रच रहे हैं।

मोहम्मद अहद को पाकिस्तानी आतंकी संगठन का एक सक्रिय ‘स्लीपर सेल’ बताया जा रहा है, जो सोशल मीडिया के जरिए सीधे पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में था, लेकिन यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों के भीतर बिहार के अलग-अलग जिलों जैसे मधुबनी, मुंगेर और मुजफ्फरपुर से भी इसी तरह के संदिग्धों को दबोचा गया है।

                                       पुलिस की गिरफ्त में मोहम्मद अहद (फोटो साभार: जागरण)

इन सभी मामलों की कड़ियों को आपस में जोड़ने पर एक बेहद खतरनाक और सुव्यवस्थित पैटर्न उभर कर सामने आता है। ये गिरफ्तारियाँ इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि बिहार आतंकियों के निशाने पर हैं, जहाँ वे स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की साजिश रच रहे हैं।

गिरफ्तारियों में ‘कॉमन फैक्टर’ और पाकिस्तानी गैंगस्टर्स का कनेक्शन

अगर हम हाल के दिनों में बिहार से हुई तमाम गिरफ्तारियों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इन सब में कुछ बेहद खतरनाक और समान बातें देखने को मिलती हैं। सबसे बड़ी समानता यह है कि इन सभी संदिग्धों के तार सीधे तौर पर सीमा पार यानी पाकिस्तान में बैठे आकाओं से जुड़े हुए हैं।

चाहे वह कटिहार का मोहम्मद अहद हो, मुंगेर का मोहम्मद सद्दाम हो या फिर मुजफ्फरपुर से पकड़ा गया मोहम्मद अली, ये सभी लोग किसी न किसी रूप में पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में थे। कटिहार से पकड़े गए अहद के मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया कि वह पाकिस्तानी गैंगस्टर राणा हुसैन और शहजाद भट्टी के नेटवर्क से लगातार संपर्क में था।

मुंगेर से गिरफ्तार मोहम्मद सद्दाम के तार भी ‘राणा भाई’ गैंग से जुड़े पाए गए थे, जो सीमा पार के एक संदिग्ध नेटवर्क का संचालन करता था। यह इस बात का सबूत है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियाँ और आतंकी संगठन अब वहाँ के स्थानीय गैंगस्टर्स और अपराधियों के नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में स्लीपर सेल बनाने और हथियारों की सप्लाई के लिए कर रहे हैं।

दूसरा सबसे बड़ा कॉमन फैक्टर इन सभी का डिजिटल कनेक्शन है। ये सभी संदिग्ध आम तौर पर समाज के बीच बेहद सामान्य जिंदगी जी रहे थे, लेकिन डिजिटल दुनिया में ये देश के खिलाफ एक अघोषित युद्ध लड़ रहे थे। वॉट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन्हें सीमा पार से निर्देश मिल रहे थे।

इनका मुख्य काम बिहार के अन्य पिछड़े इलाकों के गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को ढूँढना, मजहबी आधार पर उनका ब्रेनवॉश करना और उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों के लिए भड़काकर एक नया नेटवर्क तैयार करना था।

पिछले कुछ महीनों के प्रमुख मामले: बिहार में आतंकी नेटवर्क की सक्रियता

 बिहार में पिछले एक-दो महीनों के भीतर सुरक्षा एजेंसियों ने ताबड़तोड़ कार्रवाइयाँ करते हुए कई बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। हाल ही में बिहार ATS और स्थानीय पुलिस ने एक बड़े कट्टरपंथी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र से 50 साल के मदरसा संचालक मौलाना इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया।

इजहार को एक पाकिस्तानी एजेंट बताया गया है जो बिहार में स्लीपर सेल तैयार करने और कट्टरपंथी मॉड्यूल की फंडिंग का काम संभाल रहा था। उसके पास से कई भड़काऊ वीडियो मिले, जिनमें भारत में शरीयत कानून लागू करने की बातें कही गई थीं। इस मॉड्यूल के तार पाँच राज्यों से जुड़े थे और इजहार की गिरफ्तारी इस सिलसिले में छठी बड़ी कामयाबी थी।

इसी तरह मुंगेर पुलिस ने तारापुर थाना क्षेत्र के मिलिक थानपुर गाँव में देर रात छापेमारी कर मोहम्मद सद्दाम नाम के युवक को गिरफ्तार किया। सद्दाम पिछले दो-तीन साल से मुंबई में रह रहा था और वहीं वह ‘राणा भाई’ नामक पाकिस्तानी नेटवर्क के संपर्क में आया था। मुंबई में जब सुरक्षा एजेंसियों की धर-पकड़ बढ़ी, तो वह भागकर मुंगेर आ गया।

पुलिस ने उसके पास से एक देसी पिस्तौल और मोबाइल बरामद किया है। वह अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। इसके अलावा 2 साल पहले गुजरात की सूरत स्पेशल ब्रांच की टीम ने बिहार पुलिस के सहयोग से मुजफ्फरपुर के सकरा थाना क्षेत्र से मोहम्मद अली को गिरफ्तार किया।

मोहम्मद अली पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और हिंदू नेता उमेश्वर राणा को जान से मारने की धमकी देने और साजिश रचने का आरोप था। वह नेपाल में बैठकर इंटरनेट के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणियाँ और साजिशें रचता था। उसका नेटवर्क सूरत के एक मौलाना और पाकिस्तान के कट्टरपंथी सदस्यों से जुड़ा हुआ था।

इसी तरह बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया में पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध वॉट्सऐप चैट के मामले में 25 वर्षीय खुर्शीद आलम को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आरोपित के मोबाइल फोन में पाकिस्तान के फोन नंबरों के साथ बातचीत और कई क्यूआर कोड मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई थी।

बिहार के सीमावर्ती जिले मधुबनी में सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जाली नोट नेटवर्क के शातिर अपराधी अबुल इनाम उर्फ लादेन को गिरफ्तार किया था। अबुल इनाम पर केवल जाली नोट चलाने का ही नहीं, बल्कि एक पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मस्तान को सुरक्षित नेपाल के रास्ते भगाने का भी गंभीर आरोप था।

पुलिस के मुताबिक, लादेन इस गैंग का मुख्य लोकल ऑपरेटर था। वह सीमा पार से आने वाले संदिग्धों को पनाह और रास्ता मुहैया कराता था। आंध्र प्रदेश और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुए अंतर-राज्यीय ऑपरेशन में 12 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें बिहार के शादमान दिलकुश, अजमनुल्लाह खान भी शामिल थे।

पुलिस की छानबीन में इनके संबंध अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) और ISIS से जुड़े सामने आए। जाँच में ये भी पता चला है कि ये आतंकी एक गेमिंग ऐप के जरिए विदेशी हैंडलरों के संपर्क में थे और इनके तार ISIS से संबंध रखने वाले Benex Com नामक एक समूह से भी जुड़े थे।

PFI का ‘मिशन 2047’: बिहार से ही खुला था देश को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश का राज

बिहार का आतंकी कनेक्शन आज का नहीं है, बल्कि देश को हिला देने वाली कई बड़ी साजिशों के तार इसी राज्य से खुले हैं। इसका सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत साल 2022 में तब मिला, जब पटना के फुलवारी शरीफ में पुलिस ने एक संदिग्ध नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।

इस छापेमारी के दौरान पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े दो मुख्य आरोपितों, अथर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से जो दस्तावेज बरामद हुए, उसने पूरे देश के सुरक्षा महकमे को हिलाकर रख दिया।

इस दस्तावेज का नाम ‘India Vision 2047’ था, जिसकी टैगलाइन ‘Towards Rule of Islam in India’ थी। इस गुप्त दस्तावेज में साल 2047 तक, यानी भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने तक, भारत को एक पूर्ण इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की एक बहुत ही खतरनाक और चरणबद्ध योजना तैयार की गई थी।

इस योजना के पहले चरण में देश के अलग-अलग मुस्लिम संप्रदायों को PFI के झंडे तले इकट्ठा करने और एक ऐसी कट्टरपंथी पहचान बनाने पर जोर था जो राष्ट्रीय पहचान से ऊपर हो। युवाओं को लाठी, रॉड, तलवार और अन्य हथियारों को चलाने का आक्रामक प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी।

दूसरे चरण में अपने विरोधियों के मन में डर पैदा करने और अपनी ताकत दिखाने के लिए चुनिंदा हिंसा का सहारा लेने का प्रस्ताव था। जिन कार्यकर्ताओं में ज्यादा आक्रामकता दिखाई दे, उन्हें उन्नत हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने की योजना थी।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस अंतिम हिंसक उद्देश्य को छुपाने के लिए कार्यकर्ताओं को भारतीय संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और डॉ बीआर आंबेडकर जैसे प्रतीकों और शब्दों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था ताकि वे कानून की नजरों से बच सकें।

इसके बाद तीसरे चरण में PFI अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ राजनीतिक गठबंधन बनाना चाहता था ताकि बहुसंख्यक समाज को आपस में लड़ाया जा सके। संगठन का लक्ष्य खुद को अल्पसंख्यकों और वंचितों का एकमात्र मसीहा साबित करना था।

इसी चरण में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक जमा करने और विरोधियों पर सुनियोजित हमले करने की बात भी शामिल थी। चौथे और आखिरी चरण में PFI ने खुद को देश के मुसलमानों का निर्विवाद नेता बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाने की कल्पना की थी।

सत्ता के करीब पहुँचते ही अपने वफादार लोगों को कार्यपालिका, न्यायपालिका, पुलिस और सेना में भर्ती करने की योजना थी। इसके बाद मौजूदा लोकतांत्रिक संविधान को हटाकर देश में इस्लामिक संविधान लागू करने का अंतिम लक्ष्य था।

इसके लिए हर मुस्लिम परिवार से एक सदस्य की भर्ती और एक समर्पित सशस्त्र बल तैयार करने का खाका खींचा गया था, जो जरूरत पड़ने पर तुर्की जैसे विदेशी इस्लामिक मुल्कों की मदद से भारतीय राज्य के साथ अंतिम संघर्ष कर सके।

इस दस्तावेज के सामने आने के बाद ही केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सितंबर 2022 में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत PFI और उससे जुड़े 8 अन्य संगठनों पर 5 साल का प्रतिबंध लगा दिया था।

स्लीपर सेल के खुलासों और भंडाफोड़ के पुराने मामले

मध्य प्रदेश से गिरफ्तार इजहार उल हक ने पूछताछ में यह कबूला था कि उनके स्लीपर सेल पूरे देश में शांत बैठे हुए हैं, जो सिर्फ सही समय और ऊपर से मिलने वाले आदेश का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे बाहर निकलकर बड़ी तबाही मचा सकें। स्लीपर सेल का यह खतरा कोई नया नहीं है। भारत में पिछले दो दशकों से यह पैटर्न लगातार देखा जा रहा है।

स्लीपर सेल ऐसे प्रशिक्षित आतंकवादी या समर्थक होते हैं जो किसी भी आम नागरिक की तरह समाज में रहते हैं और कोई नौकरी, दुकान या पढ़ाई करते हैं जिससे किसी को शक न हो। वे तब तक कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं करते जब तक कि उन्हें आकाओं द्वारा किसी विशेष हमले को अंजाम देने का निर्देश न मिले।

2012 में मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल के समय भी देश के भीतर इंडियन मुजाहिदीन और सिमी जैसे संगठनों के स्लीपर सेल्स का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया था।

उस दौरान दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और बोधगया में हुए सिलसिलेवार धमाकों की जाँच में यह बात साफ हुई थी कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर इन्हीं स्लीपर सेल्स ने लॉजिस्टिक्स, रहने की जगह और रेकी करने में मदद पहुँचाई थी।

उस समय भी बिहार के दरभंगा और समस्तीपुर जैसे जिलों से कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने दरभंगा मॉड्यूल का नाम दिया था। इसके बाद साल 2020 के दौरान देश में ISIS के कई डिजिटल मॉड्यूल्स का पता चला।

जाँच में सामने आया कि सीरिया और इराक में बैठे हैंडलर्स भारत के पढ़े-लिखे युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से प्रभावित कर रहे थे और इस दौरान भी बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी कर ऐसे युवाओं को पकड़ा गया जो ऑनलाइन माध्यमों से कसम लेकर देश में अकेले दम पर हमला करने की फिराक में थे।

वहीं साल 2023 में भी NIA ने देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर अल-कायदा और ISIS से प्रेरित मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, प्रतिबंधित साहित्य और हथियार बरामद किए गए थे, जिसमें बिहार से हुई कई गिरफ्तारियों ने यह साबित किया कि स्लीपर सेल्स का जाल समय के साथ और अधिक फैल चुका है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म: आतंकियों का नया और सुरक्षित ‘हथियार’

आज के समय में आतंकवादियों को अपना नेटवर्क चलाने के लिए किसी गुप्त जगह पर आमने-सामने मिलने की जरूरत नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक और इंटरनेट ने उनके काम को बेहद आसान और सुरक्षित बना दिया है, यही कारण है कि अब सुरक्षा एजेंसियाँ आतंकवाद के इस नए रूप को डिजिटल जिहाद का नाम दे रही हैं।

टेलीग्राम, सिग्नल, थ्रेमा और वॉट्सएप जैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स इन आतंकियों के सबसे बड़े मददगार बन गए हैं क्योंकि इन ऐप्स पर होने वाली बातचीत को आसानी से ट्रैक नहीं किया जा सकता, जिससे ये कानून और सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचे रहते हैं। आतंकी इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बहुत ही शातिराना तरीके से करते हैं।

जैसे टेलीग्राम और सिग्नल पर वे सीक्रेट चैट का उपयोग करते हैं, जहाँ संदेश अपने आप नष्ट हो जाते हैं और बिना नंबर दिखाए बड़े-बड़े ग्रुप्स का संचालन किया जाता है। वहीं फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भड़काऊ और प्रोपेगैंडा वीडियो शेयर करके समाज से असंतुष्ट युवाओं की पहचान की जाती है।

इन सब के साथ डार्क वेब और वीपीएन तकनीक का सहारा लेकर वे अपनी पहचान पूरी तरह छुपा लेते हैं और विदेशी आकाओं से बात करने के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंड ट्रांसफर का काम भी करते हैं। इन डिजिटल टूल्स की वजह से भारत के भोले-भाले युवाओं को निशाना बनाना बहुत आसान हो गया है।

पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखते हैं कि कौन से युवा देश की नीतियों या धार्मिक\मजहबी मुद्दों पर ज्यादा आक्रामक या असंतुष्ट हैं और फिर उन्हें निशाना बनाया जाता है। शुरुआत में उन्हें धार्मिक साहित्यों और वीडियो के जरिए जोड़ा जाता है और धीरे-धीरे उनके मन में देश के प्रति नफरत का बीज बो दिया जाता है।

उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और इसका एकमात्र उपाय व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होना है। जब युवा पूरी तरह उनके मानसिक नियंत्रण में आ जाता है, तब उसे टेलीग्राम या सिग्नल के किसी गुप्त ग्रुप में शामिल कर लिया जाता है, जहाँ उसे हथियार चलाने, प्रोपेगैंडा फैलाने या स्लीपर सेल के रूप में काम करने के निर्देश दिए जाते हैं।

कटिहार के मोहम्मद अहद और मुंगेर के सद्दाम के मोबाइल से मिले पाकिस्तानी नंबर और चैट इसी डिजिटल ब्रेनवाशिंग की कहानी बयां करते हैं। बिहार में लगातार मिल रहे स्लीपर सेल्स के सुराग यह दिखाते हैं कि देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौती कितनी गंभीर है, हालाँकि सुरक्षा एजेंसियाँ एक-एक कर इनका सफाया कर रही हैं।

असम : कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही गौरव गोगोई ने पाकिस्तानी कनेक्शन पर तोड़ी चुप्पी, कहा- बीवी वहाँ काम करती थी, मैं भी गया हूँ: मुख्यमंत्री सरमा बोले- इनके आतंकी मुल्क से गहरे लिंक

                           हिमंता बिस्वा सरमा, गौगव गोगोई और पत्नी एलिजाबेथ (फोटो साभार: रेडिफ/द हिंदू)
आखिर पाकिस्तान और चीन को लेकर कांग्रेस में होती बौखलाहट होना स्वाभाविक है। चीन को लेकर जवाहरलाल नेहरू ने जो कुछ किया उसका तोड़ निकाल रही है वर्तमान सरकार लेकिन राहुल गाँधी द्वारा चीन के साथ हुए MoU रहस्यमयी बना हुआ है। जब तक ये गुत्थी नहीं सुलझेगी, चीन के साथ समस्या बनी रहेगी। अब बात पाकिस्तान की। इसकी भी असलियत जानने के लिए लार्ड माउंटबेटन-नेहरू-जिन्ना-शेख अब्दुल्ला के इतिहास को जानना होगा। और वर्तमान कांग्रेस इस चौकड़ी की विरासत पर चल रही है। इसे भी वर्तमान सरकार तोड़ने की कोशिश कर रही है। लेकिन गंगा-जमुनी तहजीब गैंग हिन्दू-मुसलमान कर देश में अशांति फ़ैलाने की कोशिश करता रहता है। 
गंगा-जमुनी तहजीब गैंग एक हाथ से ताली बजाकर हिन्दुओं को गुमराह करता रहा है और हिन्दू गुमराह होता रहा है। 

राहुल गाँधी LoP तो बन गए लेकिन इस पद की गरिमा से बिलकुल अनपढ़ है। अगर राहुल को इस पद की गरिमा का पता होता कभी यह पूछने की हिम्मत नहीं करता कि पाकिस्तान के साथ आतंकवाद पर हुई लड़ाई में भारत का कितना नुकसान हुआ है? राहुल से लेकर परिवार समर्पित नेता और विपक्ष पाकिस्तान की बोली बोल रहे हैं, क्यों? आखिर इस तरह के सवाल पूछकर दुश्मन देश पाकिस्तान की मदद क्यों की जा रही है? पहले ही ये गैंग पाकिस्तान की सुर्खियां बना हुआ है। पहले डोसियर-डोसियर खेल भारत को मुर्ख बनाया जा रहा था। जिस कारण लोग पाकिस्तान का नाम सुनते ही डरते थे। आज उसी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब मिलने से पाकिस्तान डरा हुआ है। ठीक यही हालत कांग्रेस की है। कांग्रेस और विपक्ष घुसपैठियों का समर्थन कर देश का भला नहीं बल्कि अपना भला कर रहा है।             

असम कांग्रेस की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद गौरव गोगोई ने कबूल किया है कि उनकी पत्नी ने पाकिस्तान में काम किया है। वो खुद साल 2013 में पाकिस्तान गए थे। उनका ये कबूलनामा तब सामने आया है, जब हिमंता बिस्वा सरमा ने उन पर पाकिस्तान में ट्रेनिंग लेने का आरोप लगाया था और बताया था कि 10 सितंबर को वो इस मामले की जाँच रिपोर्ट सामने रखेंगे।

18 मई 2025 को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम के दौरान हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा, “गौरव गोगोई पाकिस्तान में ISI के निमंत्रण पर गए थे। यह कोई पर्यटन यात्रा नहीं थी, बल्कि ट्रेनिंग के लिए थी। हमें उनके पाकिस्तान के गृह मंत्रालय से मिले निमंत्रण पत्र के दस्तावेज उपलब्ध हैं।” सरमा ने दावा किया कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है और 10 सितंबर को वे इसकी पूरी जाँच रिपोर्ट जनता के सामने रखेंगे।

हिमंता ने यह भी कहा कि गोगोई ने पाकिस्तान की सत्ता के साथ मिलकर काम किया और भारत लौटकर राफेल सौदे का विरोध किया। सरमा ने चुनौती दी कि अगर उनका एक भी शब्द गलत साबित हुआ, तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।

गौरव गोगोई ने अपनी सफाई में क्या कहा?

 गौरव गोगोई ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पत्नी एलिजाबेथ 14-15 साल पहले दक्षिण एशिया के एक प्रतिष्ठित ‘इंडिया-एशिया प्रोजेक्ट’ के तहत एक साल के लिए पाकिस्तान गई थीं। उन्होंने बताया, “मेरी पत्नी पब्लिक पॉलिसी विशेषज्ञ हैं और उनका काम पूरी तरह पेशेवर था। इस मुद्दे को बार-बार उठाकर मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है।” गोगोई ने यह भी स्वीकार किया कि वे खुद 2013 में एक बार पाकिस्तान गए थे, लेकिन इसके बाद किसी भी सरकारी एजेंसी ने उनसे सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हमने कुछ गलत किया होता, तो 11 साल से केंद्र में बैठी सरकार और उसकी जाँच एजेंसियाँ क्या कर रही थीं?”

गोगोई ने आरोप लगाया कि एक विपक्षी सांसद के तौर पर संसद में उनकी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “असम की जनता मुझे जानती है। मेरे और मेरी पत्नी का नाम बार-बार उछालकर कुछ लोग पब्लिसिटी हासिल करना चाहते हैं।” गौरव ने यह भी तंज कसा कि इस विवाद को आधार बनाकर एक ‘सी-ग्रेड बॉलीवुड फिल्म’ बन रही है, जो 10 सितंबर को रिलीज होगी, लेकिन वह पूरी तरह फ्लॉप होगी।

हिमंता ने फिर से किया पलटवार, कहा- कोई असमवासी नहीं करेगा स्वीकार

गौरव गोगोई की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने फिर से तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “यह व्यक्ति (गौरव गोगोई) खुलेआम पाकिस्तानी एजेंट है। कोई भी असम वासी कारगिल युद्ध में शहीद जिंटु गोगोई या पहलगाम घटना के बलिदान को नहीं भूलेगा। कोई भी असम वासी पाकिस्तान यात्रा को जायज ठहराने को स्वीकार नहीं करेगा।”

सरमा ने कहा कि गौरव गोगोई और उनकी पत्नी के पासपोर्ट और वीजा की जाँच के लिए एक केस दर्ज किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) और LEAD जैसे संगठनों के लिए काम करते हुए अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। सरमा ने दावा किया कि कोलबर्न पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फोर्स में शामिल थीं, जो कथित तौर पर ISI का मुखौटा थी।

सरमा ने कोलबर्न की ब्रिटिश नागरिकता और उनके सुपरवाइजर अली तौकीर शेख के भारत विरोधी प्रोपेगैंडा का भी जिक्र किया। सरमा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या गौरव गोगोई के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कार्यकाल में ISI का असम के मुख्यमंत्री कार्यालय तक दखल था।

पंजाब : हथियारों के साथ आम आदमी पार्टी का युवा नेता दीपक गोयल सहित तीन गिरफ्तार

देश में स्वच्छ और भ्रष्टाचार विहीन राजनीति करने वाला दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ही भ्रष्टाचारी और पार्टी में गुंडों का समावेश कर ईमानदारी का चोला ओढ जनता को भ्रमित किया जा रहा है। 
पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद पाकिस्तान से ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है। सरकारी संरक्षण मिलने से अपराधी सरगनाओं के हौसले बुलंद है। वे खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लुधियाना में पंजाब पुलिस ने हथियारों के साथ आम आदमी पार्टी के युवा नेता दीपक गोयल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों से हुई पूछताछ में चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। इनका संबंध आम आदमी पार्टी के विधायक मनविंदर ग्यासपुरा से है और हथियारों की तस्करी के तार पाकिस्तान जुड़ते नजर आ रहे हैं। 

दरअलस खन्ना पुलिस ने आम आदमी पार्टी के युवा नेता दीपक गोयल निवासी (मलौद) को उसके दो साथियों आकाशदीप सिंह निवासी अहमदगढ़ और परमिंदर सिंह निवासी सहारन माजरा को जिला लुधियाना से गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 6 अवैध पिस्तौल, 22 राउंड गोली व 2 गाड़ियां बरामद कर मामला दर्ज किया। पहले गिरफ्तार आकाशदीप सिंह और परमिंदर सिंह से पूछताछ में आप नेता दीपक गोयल के नाम का खुलासा हुआ। जब पुलिस ने दीपक गोयल के ठिकाने पर छापेमारी की, तो उसके पास से 5 पिस्टल बरामद किए गए।

खन्ना के एसएसपी हरीश दाम्यिा ओमप्रकाश ने बताया कि मलौद पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दिन मलौद जीटी रोड पर नाकाबंदी की हुई थी। इस दौरान एक सफेद रंग की गाड़ी नाके पर आकर रुकी। जब गाड़ी की तलाशी ली गई तो आरोपी आकाशदीप सिंह की गाड़ी से एक ग्लॉक पिस्टल (जो यूनिक होती वह सिर्फ पुलिस के उच्चाधिकारियों के पास होती है)। ओमप्रकाश के पास ये पिस्टल कैसे पहुंचा, ये बड़ा जांच का विषय है। पुलिस को संदेह है कि सीमा पार पाकिस्तान से भी हथियार सप्लाई किए जा सकते हैं। इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। 

एक साल पहले दीपक गर्ग को विधायक मनविंदर ग्यासपुरा ने मंत्री जरनैल सिंह की मौजूदगी में पार्टी में शामिल करवाया था। इसके बाद से दीपक पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रुप से भाग ले रहा था।। उसकी विधायक ग्यासपुरा के साथ आप पार्टी में शामिल होने की फोटो भी खूब वायरल हो रही है। मामले में एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए लोगों का संबंध सुखप्रीत बुड्ढा गैंगस्टर के साथ निकला है। इन लोगों ने कई लोगों को मारने की प्लानिंग की थी, जिसका खुलासा नहीं किया जा सकता है।

आम आदमी पार्टी के नेता दीपक गोयल की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर पंजाब सरकार पर तंज कसा है। पूनावाला ने ट्वीट कर लिखा, ‘पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो गई है। अपराधियों से लेकर नशा माफिया तक, आरपीजी हमले से लेकर मूसेवाला की हत्या तक, AAP सीधे तौर पर जिम्मेदार है। आप विधायक का करीबी आप कार्यकर्ता अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार हुआ है, हथियार पाकिस्तान से आपूर्ति किए जाने का संदेह है’।