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जिन्होंने हिजाब पर लगाई रोक उन शिक्षक को टीचर्स डे पर मिलना था ‘बेस्ट प्रिंसिपल’अवॉर्ड, इस्लामी कट्टरपंथियों के विरोध की वजह से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने ‘रोक दिया

BG रामकृष्णा (बाएँ) का अवार्ड हिजाब रोकने को लेकर रोक दिया गया है (चित्र साभार: Vijaya Karanataka, TOI & India Today)
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य के एक प्रिंसिपल को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने पर रोक लगा दी है। पहले उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया था, लेकिन प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI के विरोध के बाद इस पर रोक लगा दी गई। SDPI ने प्रिंसिपल के खिलाफ हिजाब पहनने से रोकने की बात कही है।

कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने मंगलवार(3 सितम्बर, 2024) को बेस्ट प्रिंसिपल अवार्ड देने की घोषणा की थी। इसके लिए राज्य के दो प्रिंसिपल का नाम चुना गया था। इनमें से एक BG रामकृष्णा हैं। रामकृष्णा उडुपी के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। रामकृष्णा के अलावा एक और शिक्षक का नाम चुना गया था।

इन दोंनो को शिक्षक दिवस के दिन यह अवार्ड दिया जाना था। हालाँकि, कर्नाटक सरकार का यह फैसला कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI ने इसको लेकर विरोध जता दिया। SDPI ने तर्क दिया कि रामकृष्णा ने अपने कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोका था।

SDPI ने कहा कि जिस स्कूल में रामकृष्णा प्रिंसिपल हैं, वहाँ छात्राओं को हिजाब पहने के कारण कक्षा में नहीं घुसने दिया गया था, ऐसे में रामकृष्णा को यह अवार्ड नहीं दिया जाना चाहिए। SDPI के अलावा भी कई कथित एक्टिविस्टों ने इस पर बवाल मचाया।

दक्षिण कन्नड़ा के SDPI अध्यक्ष अनवर सादात ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “कुंडापुर सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल रामकृष्ण ने मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने पर गेट से बाहर रखा और महीनों तक धूप में रखा। वह मुस्लिम विरोधी हैं और प्रोफ़ेसर होने के बाद भी साम्प्रदायिक हैं, ऐसे व्यक्ति को कॉन्ग्रेस सरकार अवार्ड दे रही है।”

SDPI के बवाल के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इस पर झुक गई। कर्नाटक के शिक्षा विभाग ने BG रामकृष्णा को दिए जाने वाले अवार्ड को अभी के लिए रोक दिया है। शिक्षा विभाग ने इसके पीछे के कारण स्पष्ट नहीं किए हैं। उसने कहा है कि यह फैसला तकनीकी कारणों से लिया गया है।

कर्नाटक में मुस्लिम छात्राओं का क्लास में हिजाब पहनने की जिद को लेकर यह बवाल काफी लंबा चला था। 2022 में चालू हुआ यह बवाल 2023 तक जारी रहा था। इसकी शुरुआत एक कॉलेज में 6 छात्राओं को हिजाब पहन कर कक्षा में बैठने से रोकने पर हुई थी। इसके बाद छात्राएँ अड़ गई थीं।

विवाद बढ़ने पर कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में ड्रेस लागू करने के नियम बनाए थे। इसमें कहा गया था कि हिजाब ड्रेस का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकता। इसके विरोध में हिजाब पक्ष हाई कोर्ट तक पहुँच गया था। हाई कोर्ट ने भी कर्नाटक सरकार के फैसले को सही बताया था।

राज्य में 2023 में कांग्रेस की सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने ऐलान किया था कि अब स्कूलों में हिजाब पहनने पर कोई रोक नहीं रहेगी। भाजपा ने इसे कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए उठाया गया कदम बताया था। अब इसी विवाद के जिन्न के बोतल से बाहर आने पर एक शिक्षक का अवार्ड रोक दिया गया है।

महाराष्ट्र : ATS ने हिंदू घृणा वाली आपत्तिजनक किताब का किया पर्दाफाश, PFI द्वारा भारत को इस्लामिक मुल्क का एजेंडा बेनकाब

भारत को असली खतरा किसी पाकिस्तान या चीन से नहीं, बल्कि जनमानस को पागल बना रहे भारत के ये धूर्त एवं छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता और पार्टियों से है, जो अपनी कुर्सी की खातिर देश की अस्मिता को ही दावं पर लगा रहे हैं। आखिर अपनी कुर्सी की खातिर देश को कहाँ ले जाना चाहते हो? कोई आत्मसम्मान है या नहीं? महाराष्ट्र ATS ने PFI के पास से  आपत्तिजनक किताब बरामद की है, कितने ऐसे हिन्दू नेता है, जिन्हे इस किताब के बारे में नहीं मालूम था? इतना याद रखो, इतिहास जयचन्दों का नाम अंकित नहीं करता। 

CAA विरोध में हिन्दुत्व के विरुद्ध भाषाशैली 
अडानी का विरोध करके भारत को नुकसान और विदेशो को लाभ करवाना, CAA विरोध हो या तथाकथित किसान आंदोलन विरोध वास्तविक मुद्दे की बजाए हिन्दू विरोध क्यों हुआ? किसान आंदोलन शाहीन बाग जैसे शाही आंदोलन अपने जीवन में नहीं देखे। किसकी भीख पर ये आंदोलन हुए? जिस आपत्तिजनक भाषाशैली का हिन्दुत्व के लिए प्रयोग हुआ था, अगर किसी अन्य मजहब के लिए किया होता, ज़िंदगी में कोई शाहीन बाग लगाने की सोंचता भी नहीं। क्या हिन्दू विरोध करके ये धूर्त नेता सत्ता हथियाना चाहते हैं? क्या हिन्दू विरोध करके मोदी-योगी को हराओगे, ये सबसे भयंकर भूल में हो? छद्दम धर्म-निरपेक्षों धर्म सीखना है इन कट्टरपंथियों से सीखो, जो सही बात को भी 'सर तन से जुदा' करके गलत साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुर्सी के भूखे हिन्दू नेता देश की अस्मिता और धर्म को ही दावं पर लगा रहे हैं। भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने के पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश को लेकर महाराष्ट्र एटीएस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रतिबंधित संगठन PFI के 5 कट्टरपंथियों के खिलाफ दायर चार्जशीट में कहा गया है कि इनका इरादा 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना था। रिपोर्टों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं का नाम लेकर मुस्लिम युवाओं को उकसाया जा रहा था। इनके पास से एक हिंदू घृणा से भरी किताब भी मिली है।

महाराष्ट्र एटीएस ने 2 फरवरी 2023 को चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट को लेकर रिपब्लिक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एटीएस ने पीएफआई के इन आरोपितों के फोन से ‘365 डेज: थ्रू अ थाउजेंड कट्स (365 days: Through a Thousand Cuts)’ नामक किताब जब्त की थी। इस किताब में कहा गया है कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने आने के बाद से देश में मुस्लिमों के लिए स्थितियाँ बदल गई हैं। इस किताब एक पैराग्राफ में लिखा है, “मोदी के सत्ता में आने के अगले ही दिन से सभी बुरी ताकतें सामने आ गईं। नफरत फैलाने वाले लोगों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन सभी को यह लग रहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र बन चुका है।”

हिंदुओं के खिलाफ नफरत से भरी हुई इस किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात में हुए 2002 के दंगों का भी जिक्र है। दंगों के समय मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके अलावा एटीएस द्वारा जब्त की गई इस किताब में योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह समेत कई अन्य हिंदू नेताओं का भी जिक्र किया गया है।

इस किताब में पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के संबंधों का भी खुलासा हुआ। इस किताब में एसडीपीआई का नाम बतौर प्रकाशक लिखा हुआ है। हालाँकि, एसडीपीआई ने पीएफआई से अपने संबंधों को कभी स्वीकार नहीं किया है। लेकिन इसे पीएफआई की शाखा के रूप में देखा जाता है।

चार्जशीट में एटीएस ने बताया है कि पीएफआई भारत को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था। गिरफ्तार कट्टरपंथियों ने मुस्लिम युवाओं को लेकर महाराष्ट्र के कई जिलों में सभाएँ की थी।

महाराष्ट्र एटीएस और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सितंबर 2022 में छापेमार कार्रवाई करते हुए पीएफआई से जुड़े 21 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आरोपित मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। इन 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई थी। इन सभी को गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

PFI पर रेड में गिरफ्तार कट्टरपंथियों में मौलवी से लेकर वकील और नेता तक: अरब मुल्कों से आती थी फंडिंग


देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के खिलाफ चल रही छापेमारी के बीच 27 सितम्बर 2022 तक कुल 170 सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। ये गिरफ्तारियाँ 8 अलग-अलग राज्यों में हुई हैं। केरल वाली स्थिति को देखते हुए दिल्ली के शाहीन बाग और जामिया क्षेत्र में धारा 144 लागू कर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये छापेमारी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, गुजरात, कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र में हुई है। इसमें अबतक 170 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अकेले कर्नाटक से 45 गिरफ्तारियाँ होने की सूचना है। दिल्ली के शाहीन बाग़, निजामुद्दीन और जामिया इलाकों में भी NIA ने छापेमारी की है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और असम से भी कई दर्जन हिरासत में

महाराष्ट्र में भी रेड के दौरान कई संदिग्धों के हिरासत में लिए जाने की खबर है। औरंगाबाद और नांदेड़ में ATS की छापेमारी के दौरान लगभग 14 संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है। असम के विभिन्न जिलों से PFI के 25 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा, कर्नाटक के विभिन्न जिलों में भी छापेमारी के बाद कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। कर्नाटक के कोलार से PFI के 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, गुजरात ATS ने अहमदाबाद, सूरत, नवसारी और बनासकांठा से 15 लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए लोगों के तार विदेशों जुड़े मिले हैं।

दिल्ली से PFI के 30 संदिग्ध गिरफ्तार

दिल्ली के जामिया, शाहीन बाग और निजामु्द्दीन सहित विभिन्न इलाकों से NIA और दिल्ली पुलिस ने करीब 30 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के मोबाइल फोन और अन्य डिवाइस समेत कई दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। वहीं, जामिया नगर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। यह कर्फ्यू 17 नवंबर तक के लिए लगाया गया है।
इसके साथ ही जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को एक जगह इकट्ठा होने से रोक दिया गया है। उनसे कहा गया है कि वे कैंपस के अंदर ही रहे हैं। अगर वे कैंपस के बाहर एक जगह इकट्ठा होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यूपी से वकील सहित कई गिरफ्तार

यूपी के 8 जिलों में NIA, ATS और पुलिस ने मिलकर छापेमारी की। इस रेड में कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। यूपी के बुलंदशहर के स्याना के मोहल्ला चौधरियान से एक वकील अफजल को गिरफ्तार किया गया है। वकील लंबे समय से PFI से जुड़ा था।
मेरठ में पीएफआई दफ्तर पर इसका लगातार आना-जाना था। एटीएस करीब एक साल से इसकी निगरानी कर रही थी। वहीं, बुलंदशहर के मोहल्ला फैसलाबाद से एटीएस की टीम ने दो संदिग्धों को रियाज़ और खालिद को एटीएस ने पूछताछ के बाद छोड़ दिया।
यूपी के ही शामली में छापेमारी कर 4 लोगों को हिरासत में लिया। ATS ने शामली जिले के कैराना में सुबह 4 बजे मामौर गाँव से दो भाइयों मौलाना जाहिद और साबिर को उठाया। वहीं, गाँव पावटली कलां से SDPI के जिला पंचायत सदस्य परवेज के बड़े भाई जाबिर को कस्टडी में लिया गया। गाँव गोगवान से सरवन अली को पकड़ा गया है।

मध्य प्रदेश से कई गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, इंदौर समेत 8 जिलों में PFI सदस्यों के ठिकानों पर रेड के बाद 22 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन संदिग्धों की जानकारी पूर्व में पकड़े गए 4 आरोपियों की पूछताछ में मिली थी। वहीं, 3 संदिग्ध फरार होने में कामयाब हो गए हैं।
भोपाल के शाहजहाँनाबाद इलाके में स्थित PFI की राजनीतिक विंग SDPI के ऑफिस में रेड डालकर अब्दुल रऊफ को पकड़ा है। रऊफ SDPI का मध्य प्रदेश अध्यक्ष है। ऑफिस से कुछ दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जो आपत्तिजनक बताए जा रहे हैं। SDPI का ऑफिस शाहजहाँनाबाद थाने से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर स्थित है।
वहीं, उज्जैन जिले से 4 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उज्जैन शहर के नयापुरा से मस्जिद के इमाम जुबेर को हिरासत में लिया गया है। वहीं, नगारची बाखल इलाके से इसाक को पकड़ा गया है। इसकी नलिया बाखल में जामा-ए-शाकेब मस्जिद के पास एसएस स्टील नाम से फेब्रिकेशन की दुकान है।

मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुना गल्फ से फंडिंग

गिरफ्तार किया गया PFI का सदस्य शफीक पाएथ लखनऊ-दिल्ली से लेकर नेपाल बॉर्डर तक PFI का नेटवर्क फैलाया था। वह भारत में मुस्लिमों पर जुल्म की झूठी कहानियाँ सुनाकर जकात के नाम पर खाड़ी देशों से रकम बटोरता था। इसका इस्तेमाल लव जिहाद, धर्मांतरण और हिंसा के लिए करता था।
ईडी के सूत्रों के मुताबिक, शफीक ‘गल्फ तेजस डेली’ अखबार के जरिए नफरत फैलाने का काम करता था। ‘गल्फ तेजस डेली’ केरल से प्रकाशित होने वाले ‘तेजस’ अखबार का हिस्सा है। इसी अखबार जुड़ा सिद्दीक कप्पन हाथरस कांड की कवरेज करने पहुँचा था। इसके बाद यूपी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।
फिर इसका इस्तेमाल पीएफआई भारत में कट्‌टरता का पाठ पढ़ाने में होता था। टारगेट पर होते थे छोटे काम-धंधे पर लगे लोग। उन्हें एजुकेशन और इलाज के नाम पर दी जाने वाली मदद से धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा था। यहां आपको बता दें कि शफीक पाएथ को केरल के कोझिकोड से गिरफ्तार किया था।

पिछले सप्ताह भी NIA ने डाला था रेड

करीब 5 दिन पहले NIA और ED ने मिलकर 11 राज्यों के विभिन्न शहरों और इलाकों में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में 106 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में इनसे लिंक के आधार पर 27 सितंबर 2022 को NIA के साथ विभिन्न एजेंसियों ने फिर से एक्शन लिया है। 
गिरफ्तार किए लोगों पर विदेशी फंडिंग करने, दो समुदायों के बीच हिंसा फैलाने, दंगा कराने, लव जिहाद, देश में अराजकता फैलाने, हथियार इकट्ठा करने, लोगों का ब्रेनवॉश कर कट्टर बनाने जैसे कई देशद्रोही गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धमकी, कांग्रेस-सपा को कहा- ‘हरामखोर’

इस्लामी कट्टरपंथ इस्लामी कट्टरपंथ सड़कों पर (ट्विटर पर वायरल वीडियोज)
नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर किए गए सवाल के बाद कट्टरपंथी जगह-जगह आतंक मचाने पर जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक में जुमा नमाज के बाद भीषण हिंसा देखी गई। अब इसी क्रम में कुछ वीडियोज इंटरनेट पर सामने आई हैं और ऐसे दावे हुए हैं कि ये हिंसा पूर्व नियोजित थी जिसके पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पॉलिटिकल ईकाई SDPI का हाथ था।

ट्विटर यूजर विजय पटेल ने इस संबंध में लगातार कई ट्वीट शेयर किए। उन्होंने दावा किया है कि SDPI द्वारा जारी प्रदर्शन का पोस्टर हर रैली में देखा गया। इन रैलियों में SDPI के लोग खुलेआम सड़कों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाते सुनाए पड़े।

वीडियो में भारतीय सरकार को ललकारते हुए SDPI नेता कहता है- “तुमने बहुत बड़ी भूल कर दी है पैगंबर मोहम्मद की गुस्ताखी करके। ये मुसलमान जीता, उठता, सांस लेता ही अपने नबी के लिए है। अगर तुमने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की, तो मैं ये कहना चाहता हूँ… गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा सिर तन से जुदा।” वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे सैंकड़ों की भीड़ भी इस प्रदर्शन का हिस्सा है और जोर जोर से सिर तन से जुदा के नारे लगाती है।

आगे SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।”

इसके बाद अगली वीडियो में एक और कट्टरपंथी नेता रैली के बीच खड़ा होता है और कहता है, “हमने अमन का भाईचारे का पैगाम दिया। अब मैं कहना चाहता हूँ यहाँ की हुकूमत को, यहाँ की इंटेलीजेंस को, यहाँ की पुलिस को… अगर नुपूर शर्मा को सजा नहीं दे सकते, अगर नवीन जिंदल को आप सजा नहीं दे सकते, इस मुल्क के कानून के तहत आप सजा नहीं दे सकते या आपको किसी का हुकूम आना जरूरी है, अगर आपमें इतना दम नहीं कि आप नुपूर शर्मा और नवीन जिंदल को फाँसी पर लटका सको, तो उन लोगों को हमारे हवाले कर दो। ” इसके बाद मजहबी नेता भरी रैली में हिंदुओं के प्रति घृणा व्यक्त करता है और कहता है कि जब तक SDPI का एक भी कार्यकर्ता जिंदा है तब तक देश को हिंदू राष्ट्र ब्राह्मण राष्ट्र बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

अगली वीडियो में अन्य जगह एक अन्य SDPI नेता कहता सुनाई पड़ता है, “आरएसएस के गंदे कीड़ों, तुम हमारे नबी का नाम ले रहे हो, मैं आपको बताता हूँ, आज हमको ये महसूस हो गया कि ये आरएसएस और बीजेपी के गंदे कीड़े, ये बुजदिल और बेफकूफ हैं ये लोग। हमने इस मुल्क के अंदर SDPI को बनाया है। इस पार्टी को बनाने से लेकर अब तक हम चैंलेज कर रहे हैं कि इस पार्टी का वजूद तुमसे टकराने के लिए हुआ है।”

अगली वीडियो में चलती भीड़ से गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा-सिर तन से जुदा,सिर तन से जुदा के नारे लगवाए जा रहे हैं। रैली में शामिल लोगों के हाथ में नुपूर शर्मा के पोस्टर हैं और मुँह पर नरेंद्र मोदी हाय-हाय का नारा।

ऐसी तमाम वीडियोज कट्टरपंथियों की सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। कट्टरपंथी नुपूर शर्मा को या तो फाँसी देने की माँग कर रहे हैं या फिर माँग कर रहे हैं नुपूर शर्मा को उनके हवाले कर दिया जाए। भाजपा के साथ इन कट्टरपंथियों को अब कांग्रेस और सपा से भी नाराजगी है। इन पार्टियों को उन्होंने ‘हरामखोर’ कहा है। बंगाल मुख्यमंत्री को तो कहा गया कि वो जो आज मुख्यमंत्री बनी बैठी हैं वो इन्हीं मुसलमानों की देन हैं।