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‘अब तेरी बारी, ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा’: नवीन जिंदल और उनके पूरे परिवार का सिर काटने की धमकी, कन्हैया लाल के सिर कलम वाला Video भी भेजा

                      नवीन जिंदल को कन्हैया लाल की तरह गला काटने की धमकी (फोटो साभार: डेक्कन हेराल्ड)
नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर उदयपुर में 28 जून को कन्हैया लाल का सिर तन से अलग कर हत्या कर देने पर मुस्लिम नेताओं और इस्लामिक संस्थानों द्वारा आलोचना जरूर की जा रही है। लेकिन किसी ने नूपुर का सिर तन से अलग करने और उसके पुतले को टांगने वालों पर क्या कार्यवाही की? किसी मुद्दे के विरोध में धरना प्रदर्शन करना सभी का संवैधानिक अधिकार है, परन्तु जब नूपुर के विरोध में हो रहे धरने प्रदर्शनों में नूपुर का सिर तन से जुदा करने के नारे लगाए जाने पर क्यों नहीं सरकार और पुलिस पर ऐसे लोगों पर तुरन्त सख्त कार्यवाही करने के लिए  दबाव डाला? क्यों नहीं कमलेश तिवारी की हत्या को गंभीरता से लेकर सिर तन से अलग करने वालों की पहचान कर हत्या की धमकी के आरोप में कार्यवाही की गयी होती, कन्हैया की हत्या नहीं होती? क्यों नूपुर को उकसाने वाले तस्लीम रहमानी पर चुप्पी साधे हुए हैं? कहाँ है अब #award vapsi, #intolerance, #not in my name, #freedom of speech और #mob lynching आदि गैंग?

नवीन जिंदल और उनके पूरे परिवार का गला काटने की धमकी दी गई है। इसकी जानकारी उन्होंने बुधवार (29 जून 2022) सुबह ट्वीट कर दी है। उन्हें धमकी भरे तीन ई मेल मिले हैं। उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने का वीडियो भी भेजा गया है। जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर ​कथित विवादित टिप्पणी के बाद बीजेपी से निकाल दिया गया था।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “आज सुबह करीब 6:43 बजे मुझको तीन ईमेल आए हैं। उदयपुर में भाई कन्हैया लाल की गर्दन काटने का वीडियो अटैच करते हुए मेरी और मेरे परिवार की भी गर्दन ऐसी ही काटने की धमकी दी गई है। मैंने PCR को सूचना दे दी है।”

जिंदल ने अपने ट्वीट में दोनों ईमेल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। पहले ईमेल के स्क्रीनशॉट में अकबर आलम का नाम लिखा हुआ है। वह लिखता है, “नवीन कुमार आतंकवादी अब तेरी बारी है। ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा जल्द ही।” दूसरे ईमेल में अकबर आलम जिंदल को गाली देते हुए कहता है, “नवीन कुमार आतंकवादी @##$$$$ देख ले ऐसे ही कटिंग कर डालूँगा।”

पिछले दिनों जिंदल ने बताया था कि उन्हें इस्लामी चरमपंथियों द्वारा लगातार जान से मार डालने की धमकी मिल रही है। इन धमकियों के कारण उन्होंने परिवार सहित दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होने की भी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे और उनकी रेकी भी की गई है।

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को टेलर कन्हैया लाल की नृशंस हत्या कर दी गई थी। दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार रफीक मोहम्मद और अब्दुल जब्बार आए। नाप देने का बहाना बनाकर वे दुकान में गए। इससे पहले कन्हैयालाल कुछ समझ पाते तब तक दोनों इस्लामी हत्यारों ने उनकी गर्दन काटकर हत्या कर दी।

अवलोकन करें:-

अजमेर : ‘हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी बंद करो’: सड़क पर निकले आम लोग

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अजमेर : ‘हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी बंद करो’: सड़क पर निकले आम लोग

यही नहीं इस्लामवादी हत्यारे ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में वह कह रहा था, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धमकी, कांग्रेस-सपा को कहा- ‘हरामखोर’

इस्लामी कट्टरपंथ इस्लामी कट्टरपंथ सड़कों पर (ट्विटर पर वायरल वीडियोज)
नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर किए गए सवाल के बाद कट्टरपंथी जगह-जगह आतंक मचाने पर जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक में जुमा नमाज के बाद भीषण हिंसा देखी गई। अब इसी क्रम में कुछ वीडियोज इंटरनेट पर सामने आई हैं और ऐसे दावे हुए हैं कि ये हिंसा पूर्व नियोजित थी जिसके पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पॉलिटिकल ईकाई SDPI का हाथ था।

ट्विटर यूजर विजय पटेल ने इस संबंध में लगातार कई ट्वीट शेयर किए। उन्होंने दावा किया है कि SDPI द्वारा जारी प्रदर्शन का पोस्टर हर रैली में देखा गया। इन रैलियों में SDPI के लोग खुलेआम सड़कों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाते सुनाए पड़े।

वीडियो में भारतीय सरकार को ललकारते हुए SDPI नेता कहता है- “तुमने बहुत बड़ी भूल कर दी है पैगंबर मोहम्मद की गुस्ताखी करके। ये मुसलमान जीता, उठता, सांस लेता ही अपने नबी के लिए है। अगर तुमने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की, तो मैं ये कहना चाहता हूँ… गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा सिर तन से जुदा।” वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे सैंकड़ों की भीड़ भी इस प्रदर्शन का हिस्सा है और जोर जोर से सिर तन से जुदा के नारे लगाती है।

आगे SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।”

इसके बाद अगली वीडियो में एक और कट्टरपंथी नेता रैली के बीच खड़ा होता है और कहता है, “हमने अमन का भाईचारे का पैगाम दिया। अब मैं कहना चाहता हूँ यहाँ की हुकूमत को, यहाँ की इंटेलीजेंस को, यहाँ की पुलिस को… अगर नुपूर शर्मा को सजा नहीं दे सकते, अगर नवीन जिंदल को आप सजा नहीं दे सकते, इस मुल्क के कानून के तहत आप सजा नहीं दे सकते या आपको किसी का हुकूम आना जरूरी है, अगर आपमें इतना दम नहीं कि आप नुपूर शर्मा और नवीन जिंदल को फाँसी पर लटका सको, तो उन लोगों को हमारे हवाले कर दो। ” इसके बाद मजहबी नेता भरी रैली में हिंदुओं के प्रति घृणा व्यक्त करता है और कहता है कि जब तक SDPI का एक भी कार्यकर्ता जिंदा है तब तक देश को हिंदू राष्ट्र ब्राह्मण राष्ट्र बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

अगली वीडियो में अन्य जगह एक अन्य SDPI नेता कहता सुनाई पड़ता है, “आरएसएस के गंदे कीड़ों, तुम हमारे नबी का नाम ले रहे हो, मैं आपको बताता हूँ, आज हमको ये महसूस हो गया कि ये आरएसएस और बीजेपी के गंदे कीड़े, ये बुजदिल और बेफकूफ हैं ये लोग। हमने इस मुल्क के अंदर SDPI को बनाया है। इस पार्टी को बनाने से लेकर अब तक हम चैंलेज कर रहे हैं कि इस पार्टी का वजूद तुमसे टकराने के लिए हुआ है।”

अगली वीडियो में चलती भीड़ से गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा-सिर तन से जुदा,सिर तन से जुदा के नारे लगवाए जा रहे हैं। रैली में शामिल लोगों के हाथ में नुपूर शर्मा के पोस्टर हैं और मुँह पर नरेंद्र मोदी हाय-हाय का नारा।

ऐसी तमाम वीडियोज कट्टरपंथियों की सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। कट्टरपंथी नुपूर शर्मा को या तो फाँसी देने की माँग कर रहे हैं या फिर माँग कर रहे हैं नुपूर शर्मा को उनके हवाले कर दिया जाए। भाजपा के साथ इन कट्टरपंथियों को अब कांग्रेस और सपा से भी नाराजगी है। इन पार्टियों को उन्होंने ‘हरामखोर’ कहा है। बंगाल मुख्यमंत्री को तो कहा गया कि वो जो आज मुख्यमंत्री बनी बैठी हैं वो इन्हीं मुसलमानों की देन हैं।

मुंबई में सड़क पर निकलीं बुर्कानशीं महिलाएँ ; क्या यह चीखा-चिल्ली नूपुर और नवीन के विरुद्ध है या उस किताब के विरुद्ध जिसमें यह लिखा है?

                                               महाराष्ट्र के नवीं मुंबई में मुस्लिम महिलाओं का प्रदर्शन
जिस तरह नूपुर शर्मा का मामला तूल पकड़ रहा है, उसने भारत में मुस्लिम विद्वानों के साथ-साथ भाजपा का अल्पसंख्यक भी संदेह के घेरे में आ गया है। नूपुर ने कोई अपने मन से कोई बात नहीं बोली, नूपुर ने वही कहा जो इनकी इस्लामिक किताबों में लिखा है। क्यों नहीं उस किताब पर चर्चा करते, जिसमें यह सब कुछ लिखा है। परेशानी यह है कि कोई हिन्दू ऐसी बात क्यों बोल रहा है। गैर-मुस्लिमों के साथ-साथ शांतिप्रिय मुस्लिमों में चर्चा है कि क्या यह चीखा-चिल्ली नूपुर और नवीन के विरुद्ध है या उस किताब के विरुद्ध जिसमें यह लिखा है? शांतिप्रिय मुस्लिम एवं गैर-मुस्लिमों में यह भी चर्चा है कि नूपुर शर्मा केस की जाँच के दौरान ज़ाकिर नाइक के उन वीडियोस और हदीस का अवलोकन जरुरी है। इतना ही नहीं इस्लामिक विद्वानों से भी ऑन रिकॉर्ड बयान दर्ज कर सच्चाई उजागर करनी होगी। 31 जुलाई 1986 को तीस हज़ारी के Z.S.Lohat, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के आर्डर को सामने रखना होगा। इतना ही नहीं, कोर्ट और पुलिस को इन वीडियोस का भी संज्ञान लेना होगा। हकीकत यह है कि अयोध्या के बाद अब ज्ञानवापी और मथुरा के अलावा क़ुतुब मीनार, ताज महल आदि की सच्चाई सामने आने से छद्दम धर्म निरपेक्षों और कट्टरपंथियों के बेनकाब होने पर जनमानस से लेकर न्यायालय तक में डर बैठाने के उद्देश्य से देश में उपद्रव किया जा रहा है। 
        
महाराष्ट्र के नवीं मुंबई में मुस्लिम महिलाओं ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। बुर्के में महिलाओं को सड़क पर मार्च करते हुए देखा गया। पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा के निलंबित प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा टिप्पणी किए जाने के आरोप में जुमे की नमाज के बाद शुक्रवार (10 जून, 2022) को देश भर में हिंसा हुई। आगजनी और पत्थरबाजी कर के दंगे किए गए। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हालात सबसे ज्यादा बिगड़ गए।
झारखंड में पुलिस को मुस्लिम भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। राँची के हनुमान मंदिर के पास भी भीड़ पहुँच गई थी। वो सभी नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे। सुबह से ही नारेबाजी शुरू हो गई थी। कई दुकानें बंद रखी गई थीं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने भी आगजनी कर के विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई में मुस्लिमों ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।
प्रयागराज के अलावा सहारनपुर, मोरादाबाद, लखनऊ और रामपुर में भी मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर निकल कर नारेबाजी की। लखनऊ की टीले वाली मस्जिद से हजारों की भीड़ निकली, जिसे रोकने के लिए पुलिस को बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाने पड़े। स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाए गए हैं। राँची के मुस्लिम दुकानदारों ने पहले से दुकानें बंद रखी थीं। मार्च कर रही भीड़ वापस जाने को कहने पर भड़क गई। डेली मार्किट के थाना प्रभारी अवधेश कुमार का सिर फोड़ दिया गया।
वो लहूलुहान हो गए। राँची में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। प्रयागराज में जख्मी पुलिसकर्मियों में RAF के मनीष कुमार नाम का एक जवान चोटिल हो गया। दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर भी बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। कश्मीर में भी शटडाउन का माहौल है। राँची में कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और पत्थरबाजी में सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है।