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उत्तर प्रदेश : ‘नोटिस लेकर आएँ तो जूते-चप्पल से करो स्वागत’: मदरसों में सर्वे को लेकर मौलाना साजिद रशीदी के बिगड़े बोल

आज गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और सेकुलरिज्म की आड़ में कट्टरपंथी मुस्लिम नेता जो भड़काऊ बोली बोल रहे हैं, उसकी असली जड़ जानने के लिए थोड़ी दूर जाना होगा। अगर इन कट्टरपंथियों पर स्वामी श्रद्धानन्द का क़त्ल किये जाने पर महात्मा गाँधी ने कातिल रशीद का बचाव नहीं किया होता, किसी कट्टरपंथी की भड़काऊ बयानबाज़ी करने की हिम्मत नहीं होती। उसके बाद एक के बाद एक कड़ी जुड़ती गयी और मुसलंमानो का वोटबैंक के लिए इस्तेमाल किये जाने के कारण इन्हे मनमानी करने की जो आदत पड़ी अब वही इन्हें तकलीफ पहुंचा रही है। 
मौलाना साजिद रशीदी (Maulana Sajid Rashidi) ने उत्तर प्रदेश में मदरसे सर्वे को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम बहुत बर्दाश्त कर रहा है, जिस दिन अपने अधिकारों के लिए खड़ा हुआ, सरकार अपने आपको बचा नहीं पाएगी।” इसके साथ ही उन्होंने अन्य मुस्लिमों से अपील की है कि जो भी सर्वे का नोटिस लेकर आए, उसका चप्पल-जूतों से स्वागत करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर उनका सर्वे कराने जा रही है। इसे लेकर राज्य में 10 टीमें बनाई जा रही हैं, जो इसकी जाँच करेंगी कि कौन सा मदरसा मान्यता प्राप्त है और कौन सा नहीं। ये टीमें 5 अक्टूबर से सर्वे का काम शुरू करेंगी और रिपोर्ट 25 अक्टूबर तक देंगी। मौलाना मदरसों के सर्वे का विरोध कर रहे हैं। मौलाना रशीदी ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष हैं। उनके बयान पर यूपी सरकार के पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

रजा ने कहा कि रशीदी जैसे लोगों के विवादास्पद बयान छात्रों एवं मदरसों को भड़काने वाले हैं। सरकार सर्वे के जरिए मदरसों का भला करना चाहती है, लेकिन इस तरह के बयान जब आते हैं तो सरकार को कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। अब तो सर्वे बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान के लिए रशीदी पर कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे

31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया था कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। यह सर्वे 5 अक्टूबर, 2022 से शुरू किया जाएगा और 25 अक्टूबर तक दी जाएगी। इसमें उन सभी मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।
इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।
इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।

‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धमकी, कांग्रेस-सपा को कहा- ‘हरामखोर’

इस्लामी कट्टरपंथ इस्लामी कट्टरपंथ सड़कों पर (ट्विटर पर वायरल वीडियोज)
नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर किए गए सवाल के बाद कट्टरपंथी जगह-जगह आतंक मचाने पर जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक में जुमा नमाज के बाद भीषण हिंसा देखी गई। अब इसी क्रम में कुछ वीडियोज इंटरनेट पर सामने आई हैं और ऐसे दावे हुए हैं कि ये हिंसा पूर्व नियोजित थी जिसके पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पॉलिटिकल ईकाई SDPI का हाथ था।

ट्विटर यूजर विजय पटेल ने इस संबंध में लगातार कई ट्वीट शेयर किए। उन्होंने दावा किया है कि SDPI द्वारा जारी प्रदर्शन का पोस्टर हर रैली में देखा गया। इन रैलियों में SDPI के लोग खुलेआम सड़कों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाते सुनाए पड़े।

वीडियो में भारतीय सरकार को ललकारते हुए SDPI नेता कहता है- “तुमने बहुत बड़ी भूल कर दी है पैगंबर मोहम्मद की गुस्ताखी करके। ये मुसलमान जीता, उठता, सांस लेता ही अपने नबी के लिए है। अगर तुमने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की, तो मैं ये कहना चाहता हूँ… गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा सिर तन से जुदा।” वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे सैंकड़ों की भीड़ भी इस प्रदर्शन का हिस्सा है और जोर जोर से सिर तन से जुदा के नारे लगाती है।

आगे SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।”

इसके बाद अगली वीडियो में एक और कट्टरपंथी नेता रैली के बीच खड़ा होता है और कहता है, “हमने अमन का भाईचारे का पैगाम दिया। अब मैं कहना चाहता हूँ यहाँ की हुकूमत को, यहाँ की इंटेलीजेंस को, यहाँ की पुलिस को… अगर नुपूर शर्मा को सजा नहीं दे सकते, अगर नवीन जिंदल को आप सजा नहीं दे सकते, इस मुल्क के कानून के तहत आप सजा नहीं दे सकते या आपको किसी का हुकूम आना जरूरी है, अगर आपमें इतना दम नहीं कि आप नुपूर शर्मा और नवीन जिंदल को फाँसी पर लटका सको, तो उन लोगों को हमारे हवाले कर दो। ” इसके बाद मजहबी नेता भरी रैली में हिंदुओं के प्रति घृणा व्यक्त करता है और कहता है कि जब तक SDPI का एक भी कार्यकर्ता जिंदा है तब तक देश को हिंदू राष्ट्र ब्राह्मण राष्ट्र बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

अगली वीडियो में अन्य जगह एक अन्य SDPI नेता कहता सुनाई पड़ता है, “आरएसएस के गंदे कीड़ों, तुम हमारे नबी का नाम ले रहे हो, मैं आपको बताता हूँ, आज हमको ये महसूस हो गया कि ये आरएसएस और बीजेपी के गंदे कीड़े, ये बुजदिल और बेफकूफ हैं ये लोग। हमने इस मुल्क के अंदर SDPI को बनाया है। इस पार्टी को बनाने से लेकर अब तक हम चैंलेज कर रहे हैं कि इस पार्टी का वजूद तुमसे टकराने के लिए हुआ है।”

अगली वीडियो में चलती भीड़ से गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा-सिर तन से जुदा,सिर तन से जुदा के नारे लगवाए जा रहे हैं। रैली में शामिल लोगों के हाथ में नुपूर शर्मा के पोस्टर हैं और मुँह पर नरेंद्र मोदी हाय-हाय का नारा।

ऐसी तमाम वीडियोज कट्टरपंथियों की सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। कट्टरपंथी नुपूर शर्मा को या तो फाँसी देने की माँग कर रहे हैं या फिर माँग कर रहे हैं नुपूर शर्मा को उनके हवाले कर दिया जाए। भाजपा के साथ इन कट्टरपंथियों को अब कांग्रेस और सपा से भी नाराजगी है। इन पार्टियों को उन्होंने ‘हरामखोर’ कहा है। बंगाल मुख्यमंत्री को तो कहा गया कि वो जो आज मुख्यमंत्री बनी बैठी हैं वो इन्हीं मुसलमानों की देन हैं।