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उत्तर प्रदेश : सर्वे शुरू होते ही 2500+ गायब, कागजों पर चल रहे थे मदरसे

                 उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद (फोटो साभार: यूट्यूब)
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के मदरसों का सर्वे करवा रही है। यह सर्वे बीते 13 सितंबर से शुरू हो चुका है। मदरसों के इस सर्वे के लिए 5 अक्टूबर तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। मदरसों के सर्वे को लेकर ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद’ के अध्यक्ष डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा है कि सर्वे के शुरू होते ही राज्य से 2500 मदरसे गायब हो गए हैं।

ज्ञात हो, जब छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति सीधी छात्रों के बैंक खातों में जमा करने की योजना शुरू होने पर उत्तराखंड में मदरसों से 95000 छात्रों के गायब होने की खबर चर्चा में आयी थी, यानि मदरसों के नाम पर किस तरह मदरसा चलाने वाले कट्टरपंथी मुस्लिम सरकार को लूट रहे थे। ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मदरसों का सर्वे करवाने की घोषणा करते ही छद्दम धर्म-निरपेक्ष और कट्टरपंथी मुस्लिम नेता मुसलमानों पर अत्याचार करने का शोर मचाकर जनता को गुमराह कर भड़का कर देश का माहौल ख़राब का प्रयास कर रहे थे। लेकिन सर्वे शुरू होते ही मदरसों के नाम पर सरकार को लूटने का षड़यंत्र सामने आ गया है। मदरसों की आड़ में चल रहे जमीन जेहाद को जमींदोज करने सरकार को इन अवैध मदरसों की जमीन किसी वक़्फ़ बोर्ड को देने की बजाए अपने कब्जे में करनी चाहिए। 

अमर उजाला से हुई बातचीत में, डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा है, “कोई भी व्यक्ति जो गरीब मुसलमानों के बच्चों को आधुनिक बेहतर शिक्षा देने का पक्षधर होगा, वह मदरसों के सर्वे को गलत नहीं ठहरा सकता। हमें समझना चाहिए कि मदरसों के सर्वे का विरोध अब तक कौन और क्यों कर रहा था? जो असदुद्दीन ओवैसी मदरसों के सर्वे को दूसरा एनआरसी कह रहे थे, उन्हीं के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी का बेटा अमेरिका में एमबीबीएस कर रहा है और बेटी लंदन में लॉ पढ़ रही है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि लोग ओवैसी की बातों में न आएँ। उन्होंने बताया, “वे लोग अपने बच्चों को बड़े अंग्रेजी मिशनरी स्कूलों में पढ़ाकर उनके लिए तरक्की का रास्ता खोलना चाहते हैं। जबकि गरीब के बच्चों को धार्मिक शिक्षा तक सीमित रखना चाहते हैं, क्यों? इसके पीछे केवल राजनीति जिम्मेदार है, लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि मुसलमानों के गरीब बच्चे भी अब आधुनिक शिक्षा हासिल कर सकेंगे। उनके विकास का रास्ता खुल गया है।”

मदरसों के सर्वे का विरोध करने वाले लोगों पर आगे बोलते हुए उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ जावेद ने यह भी कहा कि जो लोग मदरसों के सर्वे का विरोध कर रहे थे वे इसे मुसलमानों के आंतरिक मामलों में सरकार का दखल बता रहे थे। लेकिन जब आप केंद्र सरकार से हर साल 3000 करोड़ रुपए की सहायता लेंगे। अनेकों मदरसों में 50 हजार से लेकर लाख रुपए से ज्यादा वेतन लेंगे और उन्हीं मदरसों में सरकार से मिलने वाली बिजली-पानी, सड़क की सुविधा का उपयोग करेंगे, तो यह आपका व्यक्तिगत मामला कैसे रह गया। सरकार को ऐसे संस्थानों के लिए नियम बनाने और इसके हितधारकों की चिंता करने का अधिकार है। इससे कोई बच नहीं सकता।

इसके अलावा, डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि यह सच है कि भारी संख्या में मदरसे केवल कागजों पर चल रहे थे। इनके नाम पर आने वाला चंदे-जकात का पैसा गलत लोगों की जेबों में जा रहा था। जब सर्वे की शुरुआत हुई थी, तब यूपी में 19 हजार से ज्यादा मदरसे होने की बात कही जा रही थी। लेकिन अब इनकी संख्या केवल 16,513 रह गई है। यानी ढाई हजार से ज्यादा मदरसे गायब हो गए हैं। इससे गलत हाथों में जाने वाला पैसा बचेगा और यह पैसा गरीब मुसलमानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च होगा।

उत्तर प्रदेश : ‘नोटिस लेकर आएँ तो जूते-चप्पल से करो स्वागत’: मदरसों में सर्वे को लेकर मौलाना साजिद रशीदी के बिगड़े बोल

आज गंगा-जमुनी तहजीब, संविधान और सेकुलरिज्म की आड़ में कट्टरपंथी मुस्लिम नेता जो भड़काऊ बोली बोल रहे हैं, उसकी असली जड़ जानने के लिए थोड़ी दूर जाना होगा। अगर इन कट्टरपंथियों पर स्वामी श्रद्धानन्द का क़त्ल किये जाने पर महात्मा गाँधी ने कातिल रशीद का बचाव नहीं किया होता, किसी कट्टरपंथी की भड़काऊ बयानबाज़ी करने की हिम्मत नहीं होती। उसके बाद एक के बाद एक कड़ी जुड़ती गयी और मुसलंमानो का वोटबैंक के लिए इस्तेमाल किये जाने के कारण इन्हे मनमानी करने की जो आदत पड़ी अब वही इन्हें तकलीफ पहुंचा रही है। 
मौलाना साजिद रशीदी (Maulana Sajid Rashidi) ने उत्तर प्रदेश में मदरसे सर्वे को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम बहुत बर्दाश्त कर रहा है, जिस दिन अपने अधिकारों के लिए खड़ा हुआ, सरकार अपने आपको बचा नहीं पाएगी।” इसके साथ ही उन्होंने अन्य मुस्लिमों से अपील की है कि जो भी सर्वे का नोटिस लेकर आए, उसका चप्पल-जूतों से स्वागत करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर उनका सर्वे कराने जा रही है। इसे लेकर राज्य में 10 टीमें बनाई जा रही हैं, जो इसकी जाँच करेंगी कि कौन सा मदरसा मान्यता प्राप्त है और कौन सा नहीं। ये टीमें 5 अक्टूबर से सर्वे का काम शुरू करेंगी और रिपोर्ट 25 अक्टूबर तक देंगी। मौलाना मदरसों के सर्वे का विरोध कर रहे हैं। मौलाना रशीदी ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष हैं। उनके बयान पर यूपी सरकार के पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

रजा ने कहा कि रशीदी जैसे लोगों के विवादास्पद बयान छात्रों एवं मदरसों को भड़काने वाले हैं। सरकार सर्वे के जरिए मदरसों का भला करना चाहती है, लेकिन इस तरह के बयान जब आते हैं तो सरकार को कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। अब तो सर्वे बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान के लिए रशीदी पर कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे

31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया था कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। यह सर्वे 5 अक्टूबर, 2022 से शुरू किया जाएगा और 25 अक्टूबर तक दी जाएगी। इसमें उन सभी मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।
इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।
इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।