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‘भारत में 100 करोड़ जानवर और 35 करोड़ इंसान’ – तथाकथित शायर मुनव्वर राना


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चाहे नसीरुद्दीन शाह हो, मुनव्वर राना हो या फिर राहत इंदौरी हो, इन सबने खुद ही अपने आप को बेनकाब करने का काम किया है।
मुनव्वर राना की जमात विटामिन-C यानी, विटामिन-कांग्रेस की कमी से जूझ रही है। उनके अन्नदाता स्वयं हर तरह से बेनक़ाब हो चुके हैं। उनकी अपनी ही झोली में अब लुटाने के लिए पुरस्कारों का अकाल है।
उर्दू के मशहूर और विवादित शायर मुनव्वर राना ने फिर से एक ट्वीट किया है। ट्वीट इस बार भी विवादित ही है। मुनव्वर राणा ने लिखा है कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं।
मुनव्वर राणा ने यह ट्वीट भाजपा नेता संबित पात्रा को सम्बोधित करते हुए भारत में रहने वाले लोगों को लेकर लिखा है। शायर मुनव्वर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा:

“डियर संबित, कांग्रेस की जवानी में तो आप गब्हे पे रहे होंगे (गब्हे का मतलब आप उड़ीसा में नहीं, यूपी में पूछना)। लेकिन कोरोना पर सरकार की नाकामी ने मेरी इस बात को सही साबित किया कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं, जो सिर्फ वोट देने के काम आते हैं।”
अपने इस ट्वीट पर एक कमेंट में मुनव्वर राना ने लिखा – “मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, हैरत है कि सर मेरा क़लम क्यूँ नहीं होता।”

सोशल मीडिया पर जिस तरह से आप लिखने को स्वतंत्र हैं, ठीक उसी तरह से लोग कॉमेंट करने को। मुनव्वर राना के विवादित ट्वीट के जवाब में एक यूजर ने रिप्लाई कर लिखा:
“जितनी ज़हालत पेलने की आजादी हिन्दुस्तान में मिली है, यदि इतनी जहालत किसी शरिया कानून वाले मुल्क में करते तो तेरी सर कलम वाली ख्वाहिश भी पूरी हो जाती! शुक्र मना तू दुनिया के सबसे सहिष्णु हिन्दुओं के बीच रह रहा है, जिन्होंने कुत्तों को भी भौंकने की आजादी दे रखी है!”
इस विवादित ट्वीट के प्रकाश में आते ही अब मुनव्वर राना सफाई देते हुए भी नजर आ रहे हैं। 100 करोड़ इंसानों को जानवर (शायद हिंदुओं को) बताकर निशाना बनाने की कोशिश करने के बाद अब शायर मुनव्वर ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा है:
“जिस तरह से हमारे ट्वीट को तोड़-मरोड़ कर हव्वा बनाया जा रहा है, वो सरासर ग़लत है। यहाँ 35 करोड़ वो लोग हैं जो ख़ुशहाल हैं, और 100 करोड़ लोगों से मुराद वो भारतवासी हैं, जो खाने-पीने और ओढ़ने-बिछाने जैसे हर बुनियादी हुक़ूक़ से महरूम हैं।”


मुनव्वर राना के इस ट्वीट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
मुनव्वर राना हिंदू जानवर
सस्ती लोकप्रियता के लिए भटकते लोग 
अवॉर्ड वापसी के कुछ समय बाद ही मुनव्वर राना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अच्छा शासक वो है, जो 60 साल की खराबियों को पाँच साल में ठीक कर दे, तो ही इतिहास में अकबर की तरह मोदी द ग्रेट लिखा जाएगा।
मुनव्वर राना ने दादरी की घटना के बाद भी हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए कहा था कि देश ने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि आतंक शब्द का मतलब क्या है। उन्होंने कहा कि जिस दिन आतंक की परिभाषा तय हो गई, बहुत सारी पार्टियाँ प्रतिबंधित हो जाएँगी।
राहत इंदौरी से लेकर मुनव्वर राना, अनुराग कश्यप और ऐसे ही अन्य कथित उदारवादियों की जमात को आखिर पिछले कुछ सालों से ही ऐसे स्टंट की जरूरत क्यों पड़ गई? इन सब के जरिए अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना क्यों आखिरी विकल्प हो गया?
यह सब घटनाक्रम अवॉर्ड वापसी की नौटंकी के बाद से अचानक शुरू हुआ था। कुछ ऐसे लोग थे, जिन्होंने तय कर लिया था कि अब अवॉर्ड वापसी ही इस देश में एकमात्र विपक्ष कहलाएगा। इसके लिए समय-समय पर नव-उदारवादियों द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी को बलि का बकरा बनाया गया।
लेकिन इनके ‘अच्छे दिन’ नहीं आए और उदारवादियों की चहेती पार्टी फिर सरकार बनाने से चूक गई। 2019 में एक बार फिर दक्षिणपंथी भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में स्थापित हो गई।
मुनव्वर राना वर्तमान सरकार और उसके क्रियाकलापों को लेकर इतने आश्वस्त हैं कि वह जानते हैं कि वो चाहें तब भी यह सरकार उन्हें कोई ऐसा कदम नहीं उठाने देगी।
इसके बेहद दूरगामी परिणाम सामने आए। हुआ यह कि वामपंथी और नव-उदारवादी अब अपनी बेचैनी पर नियंत्रण कर पाने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं।
यही वजह है कि मुनव्वर राना ने एक ही ट्वीट के ज़रिए अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए हिन्दुओं को जानवर और वोट बैंक बता दिया। मुनव्वर राणा ने यह ट्वीट भाजपा नेता संबित पात्रा को सम्बोधित करते हुए भारत में रहने वाले लोगों को लेकर लिखा है।
कल (मई 13)शाम ही मुनव्वर राना ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा है –
“डियर संबित, कांग्रेस की जवानी में तो आप गब्हे पे रहे होंगे (गब्हे का मतलब आप उड़ीसा में नहीं यूपी में पूछना)। लेकिन कोरोना पर सरकार की नाकामी ने मेरी इस बात को सही साबित किया कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं, जो सिर्फ वोट देने के काम आते हैं।”
अपने इस ट्वीट पर एक कमेंट में मुनव्वर राना ने लिखा है – “मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, हैरत है कि सर मेरा क़लम क्यूँ नहीं होता।”
अवॉर्ड वापसी के कुछ समय बाद ही मुनव्वर राना ने PM मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अच्छा शासक वो है, जो 60 साल की खराबियों को पाँच साल में ठीक कर दे, तो ही इतिहास में अकबर की तरह मोदी द ग्रेट लिखा जाएगा।
शब्दों की कंगाली से जूझता शायर 
आप यदि 2015 के मुनव्वर राना के बयान और 2020, यानी कल के बयान में अंतर तलाशेंगे तो सबसे खास बात उनके शब्दों को इस्तेमाल करने की तरकीब में आया खुलापन है। 2015 में वो सिर्फ इशारों में ही हिन्दुओं के खिलाफ बयान देने में सक्षम नजर आते हैं जबकि 2020 तक उनकी बौखलाहट इतनी बढ़ गई कि उन्होंने ‘बुद्धिजीवी’ वाले सारे मुखौटे त्यागकर स्पष्ट शब्दों में हिन्दुओं की आबादी को जानवर घोषित कर दिया।
इन कलाकारों को ऐसी क्या दिक्कत आ गई कि ये अपनी अभिव्यक्ति के प्रकटन के लिए इतने निम्नस्तरीय और घृणित शब्दों का इस्तेमाल करने पर विवश हो गए?
गत वर्ष दिसम्बर माह में नागरिकता कानून के विरोध में भी मुनव्वर राना परिवार सहित फन फैलाते देखे गए। लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन करने को दौरान मुनव्वर राना की बेटियों के खिलाफ धारा-144 के उल्लंघन का मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ जहर उगला था।
कारण है कि अब स्टेज पर उन्हें जो मौके नहीं मिलते, उनकी पूर्ति वो ट्विटर और सोशल मीडिया पर अपने मजहबी जहर को उगलकर करने को मजबूर हैं।
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मुनव्वर राणा, शेहला रशीद, आरफा खानम, राहत इंदौरी आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जो हिन्दू लोग आदम में यकीन नहीं करते क....

जामिया के विद्यार्थियों’ का ऐलान : "हम अल्लाह को मानते हैं, लोकतंत्र को नहीं"

Students of Jamia द्वारा शेयर किया गया फेसबुक पोस्ट
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम के समर्थन में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा रैली निकालने के बाद अब इन छात्रों ने ऐलान किया है कि वो लोकतंत्र को नहीं, अल्लाह को मानते हैं। 
Students of Jamia द्वारा इस तरह की पोस्ट पर हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई भाई-भाई, गंगा-यमुना तहजीब की राग रागने वाले, संविधान और लोकतन्त्र की दुहाई देने वाले, #not in my name, #award vapsi और #intolerance गैंग क्यों चुप हैं? क्या जब दूसरी तरफ से प्रतिक्रिया होने पर होश में आएंगे?  
फेसबुक पर Students of Jamia नाम के पेज ने ये पोस्ट किया है। इसमें लिखा गया है कि ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मद रसुल्लाह, लोकतंत्र के खिलाफ है।
इस पेज ने Al Haya Min Allah नाम के एक पेज को शेयर किया है। जिस पर लिखा गया है कि लोकतंत्र के सिद्धांत के विपरीत, इस्लाम जोर देकर कहता है कि हक को मेजॉरिटी के साथ परिभाषित नहीं किया गया है।
इसमें मसनद अहमद के हवाले से कहा गया है कि पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि कई दुष्ट लोगों के बीच धार्मिक लोग भी होते हैं। जो उनकी अवहेलना करते हैं, उनकी संख्या उनके मानने वालों की तुलना में अधिक होती है। अल्लाह सार्वजनिक रूप से स्वीकृत मेजरिटेरिज्म के खिलाफ बात करते हैं। और यदि आप उन लोगों की बातें मानते हैं तो वो आपको अल्लाह के रास्ते से गुमराह करेंगे।


एक तरफ जहाँ सीएए का विरोध करते हुए ये कहा जा रहा है कि वो लोकतंत्र और संविधान का पालन कर रहे हैं, उसकी रक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जामिया के छात्रों का इस तरह से खुले तौर पर कहना कि उनके अल्लाह लोकतंत्र के खिलाफ हैं, कई सवाल खड़े करता है। जब जामिया के दंगाईयों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी तो वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल समेत कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, मगर अब जो जामिया के छात्र कर रहे हैं, वो क्या है?
इसी जामिया के छात्रों ने असम को हिंदुस्तान से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकाला था। इस दौरान नारे लगाए गए थे, “शरजील तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। शरजील को रिहा करो।”
शरजील ही शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा था, जो घूम-घूम कर भड़काऊ भाषण दे रहा था। उसने मस्जिदों में आपत्तिजनक पोस्टर्स बाँटे थे। ऐसे में शरजील के समर्थन में जामिया के छात्रों का खड़ा होना संदेह पैदा करता है। मार्च के दौरान इन छात्रों ने हज़ारों शरजील इमाम पैदा करने की बात कही। इससे पहले लखनऊ में भी शरजील इमाम के समर्थन में मार्च निकालने की कोशिश की गई थी। हालाँकि योगी आदित्यनाथ की सरकार के प्रयासों के कारण ये संभव नहीं हो सका।

रहमत अली ने दलित किशोरी से 2 बार की अश्लील हरकत : मुस्लिम गुंडों ने तोड़ी अम्बेदकर मूर्ति

अंबेदकर मूर्ति
आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनाव अपने तीसरे पड़ाव पर ही आया है, कि दलित विरोधी गतिविधियाँ भी शुरू हो गयीं हैं। लेकिन यह काम किसी और ने नहीं, बल्कि छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियों के वोट बैंक यानि मुस्लिमों ने किया है, जिस कारण कोई #metoo, #not in my name, #award vapsi, #intolerance और न ही कोई #mob lynching आदि गैंग नहीं बोलेगा। सबको लगता है, पीना साँप पी गया है, जिस कारण उनके घरों में कोई शोक मन रहा होगा। कहाँ हैं मायावती, अखिलेश यादव, अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी और दलितों के घर भोजन करने वाले नेता? काश ! यही नीच काम हिन्दुओं ने किया होता, इन्ही छद्दमों ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर पुरे भारत में आसमान सिर पर उठा लिया होता। सारे गैंग बाहर निकल आये होते।    
उत्तर प्रदेश के देवरिया से बड़ी ख़बर सामने आई है। जनपद स्थित गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करजवाँ महुअवाँ दलित बस्ती में मुस्लिम दबंगों ने जम कर उत्पात मचाया। दरअसल, मामला शुरू हुआ रहमत अली द्वारा दलितों के घर में घुसकर लड़की से छेड़छाड़ करने पर। जब दलितों ने इस बात की शिकायत पुलिस से की तो मुस्लिम दबंगों ने गुस्से में दलित बस्ती में घुसकर न सिर्फ़ पीड़िता के परिवार वालों की पिटाई की बल्कि वहाँ लगी अम्बेदकर की मूर्ति को भी तोड़-ताड़ दिया। घटना के बाद दलित महिलाओं में भय का माहौल है। पूछने पर महिलाएँ रो पड़ती हैं। डरी, सहमी और बदहवास महिलाओं ने पुलिस पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। घर में बदहवास बैठी महिलाएँ किसी अनहोनी की आशंका से अभी भी घबराई हुई हैं।
रहमत अली द्वारा लड़की से दुर्व्यवहार करने का जब विरोध किया गया तो वो शमशेर, इशराद, नौशाद, अताउल, फ़ैसल, जहाँगीर समेत अपने दर्जन भर गुंडे साथियों के साथ वापस दलित बस्ती में पहुँचा और तांडव मचाया। ‘समुदाय विशेष’ के गुंडों द्वारा खुलेआम तलवारें लहराई गईं, जिसके कारण बच्चों में अभी तक भय व्याप्त है। दलितों का कहना है कि छेड़खानी के अगले ही दिन पुलिस से मामले की शिकायत की गई थी। अगर समय रहते पुलिस सक्रिय हो जाती तो गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती। घटना के बाद पीड़ितों ने थाने पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया। गाँव में तनाव का माहौल है।
रहमत अली ने 2 बार किशोरी से छेड़खानी की। जब वो पहली बार उसके घर में घुसा तो रात का समय था। किशोरी द्वारा शोर मचाए जाने के बाद घरवालों की नींद खुली, जिसके बाद रहमत भाग खड़ा हुआ। गुरुवार (अप्रैल 18, 2019) की इस घटना के बाद शुक्रवार को रहमत अली फिर से उक्त किशोरी के घर में घुस गया।परिवार के लोगों द्वारा दौड़ाए जाने के बाद वो भाग खड़ा हुआ। इसके बाद बौखलाए रहमत ने लाठी-डंडे और तलवारों से लैस होकर बस्ती में साथियों सहित पहुँच कर कहर बरपाया। गुंडों ने दिव्यांग तक को नहीं बख्शा। किशोरी की माँ को भी घायल कर दिया गया। पीड़िता के सीने पर ईंट से वार किया गया, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मुस्लिम दबंगों द्वारा किए गए इस हमले में 20 दलितों के घायल होने की सूचना है। उपद्रवी फ़रार हैं। अभी तक सिर्फ़ एक आरोपित रहमत अली की गिरफ़्तारी की सूचना है। ग्रामीणों की माँग है कि पहले सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और उसके बाद बाबासाहब अम्बेदकर की प्रतिमा की अच्छी तरह मरम्मत कराई जाए। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह से किसी के घर में घुसकर शर्मनाक हरकत करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रशासन को निष्पक्ष जाँच एवं कार्रवाई के लिए कहा है।
एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पुलिस के सामने ही अम्बेदकर की प्रतिमा तोड़ी गई। जब मुस्लिम दबंग डाली बस्ती में हंगामा मचा रहे थे, तभी पुलिस को सूचना दे दी गई थी और पुलिस मौके पर पहुँच भी गई थी। लेकिन गुंडों ने मूकदर्शक बनी पुलिस के सामने ही बाबासाहब भीमराव अम्बेदकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। एक दलित महिला के हाथ पर तलवार से प्रहार भी किया गया।(एजेंसीज इनपुट्स सहित)