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‘गाँधी राष्ट्र पुत्र हो सकते हैं राष्ट्रपिता नहीं’ ; भगवान राम-माँ सीता को गाली देने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं’: कालीचरण पर बोले जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर

                             कालीचरण महाराज पर बोले जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी
मोहनदास करमचंद गाँधी पर एक बयान के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कालीचरण महाराज को कानून को ताक पर रखकर गिरफ्तार किए जाने के बाद से इस मामले में चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि (Swami Yatindranand Giri) ने बड़ा बयान देते हुए सवाल किया है कि अगर सरकार सच में इतनी संवेदनशील है तो भगवान राम और सीता मैय्या के उपहास उड़ाने वालों और उन्हें व्यभिचारी कहने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करे।

स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि का कहना है कि कालीचरण ने महात्मा गाँधी पर जो भी टिप्पणी की है संत समाज उसका समर्थन नहीं करता है। गाँधी जी का सम्मान है, लेकिन इस देश में भगवान राम को आए दिन गालियाँ दी जाती हैं और माँ सीता को व्यभिचारिणी कहा जाता है। टीवी धारावाहिकों और फिल्मों में उनका उपहास उड़ाया जाता है, देवी-देवताओं की नंगी तस्वीरें बनाई जाती हैं। उस वक्त कोई कुछ क्यों नहीं बोलता। तब कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। उन्होंने ये बयान हरिद्वार में दिया।

दूसरे, जब नागरिक संशोधक कानून के विरोध में हिन्दू और हिन्दुत्व के विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग हो रहा था, उन पर क्यों नहीं कार्यवाही की गयी? क्या नेताओं के लिए गाँधी हिन्दू और हिन्दुत्व से अधिक प्रिय है? इतना ही नहीं, नाथूराम गोडसे के विरोधियों को गोडसे का विरोध करने से पहले कोर्ट में दर्ज उनके 150 बयानों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। 

स्वामी गिरि के मुताबिक, भारतीय स्वतंत्रता आदोलन में अहिंसा को सबसे ऊपर रखा उनका योगदान सम्मानीय है। संत ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि गाँधी के अफ्रीका से वापस आने से पहले भी कई क्रान्तिकारी थे और उन्हें भी याद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति को संग्राम का श्रेय नहीं दिया जा सकता। उस लड़ाई में सुभाष चंद्र बोष, चंद्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, गंगाधर तिलक समेत कई लोग हैं।

संत ने द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की बात को दोहराया और कहा कि उन्होंने बड़ी अच्छी बात कही है कि आदर और सम्मान अपनी जगह है। लेकिन राष्ट्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता। अगर राष्ट्र से बड़ा कोई है तो वो परमात्मा है। गाँधी राष्ट्रपिता नहीं राष्ट्र के पुत्र हो सकते हैं।

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‘महात्मा गोडसे ने बलिदान देकर हिंदुस्तान को मुस्लिम बनने से बचा लिया, गजवा-ए-हिन्द फेल कर दिया’:

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‘महात्मा गोडसे ने बलिदान देकर हिंदुस्तान को मुस्लिम बनने से बचा लिया, गजवा-ए-हिन्द फेल कर दिया’:

घर वापसी पर दिया बयान

वसीम रिजवी के हिंदू धर्म अपनाने पर स्वामी यतीन्द्रानंद गिरि ने कहा उन्होंने घर वापसी की है। अगर मुस्लिम अपनी भूल सुधार कर मूल धर्म में आते हैं तो उनका स्वागत है।

‘कन्यादान’ एड की वजह से मुश्किल में फँसीं आलिया भट्ट

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट खिलाफ मुंबई के सांताक्रूज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई हैं। दरअसल अपने नए टीवी एड की वजह से ‍मुश्‍किलों में घिर गई हैं। इस विज्ञापन में ‘कन्यादान’ की परंपरा पर सवाल उठाया गया है। कपड़े के ब्रांड मान्यवर के इस विज्ञापन में विवाह के दौरान होने वाले ‘कन्यादान’ को एक दमनकारी परंपरा के तौर पर दिखाया गया है और उसकी जगह ‘कन्यामान’ को एक विकल्प के तौर पर सुझाया गया है। मान्यवर ने दावा किया कि इससे परंपराओं के बारे में प्रगतिशील तरीकों को सोचने को बढ़ावा दे रहा है।

ये कोई पहली बार नहीं है, जब किसी ब्रांड ने अपने मार्केटिंग के जरिए हिंदू रीति-रिवाजों पर कुठाराघात करने की कोशिश की हो। हाल के दिनों में कई ब्रांड विशेष रूप से तनिष्क को उसकी सक्रियता के लिए गंभीर प्रतिक्रिया मिली है।

इस विज्ञापन के सामने आते ही आलिया पर हिन्दू धर्म की परंपराओं का मजाक उड़ाने का आरोप लगने लगा। खबरों के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आलिया भट्ट ने हिन्दू भावनाओं को आहत‍ किया है और कन्यादान को प्रतिगामी तरीके से दिखाया है।

इस मामले में मान्यवार कंपनी और आलिया भट्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। इस विज्ञापन में आलिया भट्ट को दुल्हन के रूप में दिखाया गया है। वह शादी के मंडप में बैठी हैं और सवाल करती हैं कि मैं क्या कोई दान की चीज हूँ?

इस विज्ञापन के बारे में आलिया भट्ट ने कहा था, “मैं पूरी तरह से इस विचारधारा से इत्तेफाक रखती हूँ और ये एक ऐसी चीज है जो मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं इस बात से खुश हूँ कि मैं इस एड का हिस्सा बन पाई और लोगों तक एक ऐसा संदेश पहुँचा पाई जिससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव हो।”

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है, जब किसी ब्रांड ने अपने मार्केटिंग के जरिए हिंदू रीति-रिवाजों पर कुठाराघात करने की कोशिश की हो। हाल के दिनों में कई ब्रांड विशेष रूप से तनिष्क को उसकी इस तरह की सक्रियता के लिए गंभीर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

खास बात यह है कि कंपनी ने इस विज्ञापन के लिए काम पर रखा तो किसे, एक बॉलीवुड अभिनेत्री को जबकि बॉलीवुड खुद शोषण और महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन के लिए कुख्यात है। उल्लेखनीय है कि ब्रांड हिंदू धर्म और परंपराओं को ही बार-बार इसलिए निशाना बनाते हैं, क्योंकि वो स्पष्ट रूप से अन्य धर्मों की समस्याग्रस्त प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने से डरते हैं।

लेकिन मान्यवर के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोगों ने जैसी प्रतिक्रियाएँ दी हैं, उससे स्पष्ट है कि हिंदू समुदाय धर्म पर बाहरी हमलों से नाखुश है। अगर आप विज्ञापन को ध्यान से देखेंगे तो पाएँगे कि पूरे विज्ञापन को विचित्र तरीके से बनाया गया। जबकि ब्रांड को भी यह पता है कि वो जिस तरह का सुझाव दे रहे हैं वह पूरी तरह से निंदनीय है और इसका कोई मतलब नहीं है।

अगर आप विज्ञापन को ध्यान से देखेंगे तो पाएँगे कि पूरे विज्ञापन को विचित्र तरीके से बनाया गया। जबकि ब्रांड को भी यह पता है कि वो जिस तरह का सुझाव दे रहे हैं वह पूरी तरह से निंदनीय है और इसका कोई मतलब नहीं है। वे पूरी तरह से जानते हैं कि कोई भी कपड़ों के ब्रांड की सिफारिश के आधार पर प्राचीन रीति-रिवाजों को नहीं बदलेगा और फिर भी, उन्हें वास्तव में परवाह नहीं है क्योंकि यह केवल एक मार्केटिंग नौटंकी के बारे में है और कुछ नहीं। अन्य धर्मों के रीति-रिवाजों पर उनकी चुप्पी जो वास्तव में महिलाओं को नुकसान पहुँचाती है, उनके प्रोपेगंडा के बारे में बहुत कुछ बताती है।

वे पूरी तरह से जानते हैं कि कोई भी कपड़ों के ब्रांड की सिफारिश के आधार पर प्राचीन रीति-रिवाजों को नहीं बदलेगा और फिर भी, उन्हें वास्तव में परवाह नहीं है क्योंकि यह केवल एक मार्केटिंग नौटंकी के बारे में है और कुछ नहीं। अन्य धर्मों के रीति-रिवाजों पर उनकी चुप्पी जो वास्तव में महिलाओं को नुकसान पहुँचाती है, उनके प्रोपेगंडा के बारे में बहुत कुछ बताती है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात को लेकर खेद जताया कि निकाह-हलाला और ट्रिपल तालक जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ पर्याप्त जागरूकता नहीं फैलाई जाती है, लेकिन ब्रांडों ने हिंदू परंपराओं के खिलाफ धर्मयुद्ध शुरू किया है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने आलिया के बहाने भट्ट परिवार के उस इतिहास पर भी प्रकाश डाला, जब आलिया के पिता महेश भट्ट ने पूजा भट्ट को लेकर कहा था कि अगर वह उनकी बेटी नहीं होती तो वह उनसे शादी कर लेते।


हम्जा की धमकी : ‘मेरठ से हूँ, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं.. पता दे फिर देखते हैं किसमें कितना दम है’

ट्विटर-मेरठ पुलिसपूर्व एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल ने एक ट्वीट में मुसलमानों को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र की माँग की वकालत करते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें हम्ज़ा नाम के एक युवक ने एक महिला को धमकी देते हुए उसका पता पूछकर कहा है कि हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है।
दरअसल, रविवार (अगस्त 09, 2020) को आकार पटेल ने एक ट्वीट में लिखा- “मुसलमानों को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र के लिए माँग करनी चाहिए। हिंदू राष्ट्र अधिकारों को स्वीकार नहीं करेगा।”
इस पर एक ट्विटर यूजर निधि बहुगुणा ने लिखा, “मेरे परिवार को पलायन के बाद सियालकोट से मेरठ प्रवास करने के लिए मजबूर किया गया था। मेरठ में मुसलमान अपने पैतृक घरों में रहे। मेरे परिवार को पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुस्लिमों से कोई सुरक्षा या अलग निर्वाचन का विकल्प नहीं दिया गया।”


लेकिन निधि बहुगुणा के इस ट्वीट से हम्ज़ा (@hamza63714280) नाम के एक युवक को बेहद आपत्ति हुई और इसके विरोध के लिए उसने निधि बहुगुणा को धमकी दे डाली।
@hamza63714280 ने लिखा – “मैं भी मेरठ से हूँ, हापुड़ रोड मेरठ। कहाँ से है तू? और हम भी हिन्दुस्तानी हैं, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है, समझा? एड्रेस (पता) दे अपना, देखते हैं किसमें कितना दम है।”
निधि बहुगुणा को @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर के इस यूजर द्वारा दी गई खुली धमकी पर एहतियात के तौर पर एक अन्य ट्विटर यूजर ने मेरठ पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि ये आदमी एक महिला को खुली धमकी दे रहा है और वह मेरठ से ही है।
इस पर मेरठ पुलिस ने फ़ौरन जवाब देते हुए लिखा कि इस मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं। 
लेकिन ख़ास बात यह रही कि मेरठ पुलिस के ट्वीट के फ़ौरन बाद @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर ने अपना धमकी भरा ट्वीट डिलीट कर दिया और अपना अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। यह अकाउंट अगस्त, 2020 में ही बनाया गया है, और सम्भव है कि यह हिन्दुओं को इसी प्रकार की धमकियाँ देने के लिए इस्तेमाल किया जाता हो।


ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने वर्ष 2013 में भी हिन्दुओं को ठीक इसी तरह की धमकी देते हुए कहा था कि ‘हम (मुसलमान) 25 करोड़ हैं और तुम (हिंदू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।’
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मानवतावादी संस्था के रूप में खुद को प्रचारित करने वाले ‘एमनेस्टी इंडिया’ के प्रमुख रह चुके आकार पटेल ने मुसलमानो.....

राहुल गाँधी ने किया हिन्दु विरोधी पेरियार का महिमामंडन, जिन्होंने तोड़ी थी भगवान गणेश की मूर्ति और जलाए थे राम के चित्र

TN Congress IT & Social Media Department's tweet - "எவ்வளவு ...
फाइल फोटो 
तमिलनाडु में पेरियार की एक प्रतिमा पर भगवा रंग चढ़ाने की घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिन्दुओं को लेकर घृणा फैलाने वाले ईवी रामासामी उर्फ ​​’पेरियार’ की प्रशंसा और महिमामंडन किया है। शनिवार (जुलाई 18, 2020) को एक ट्वीट में राहुल गाँधी ने लिखा, “घृणा की मात्रा किसी भी विशाल प्रतीक को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकती है।”
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने सिर्फ प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने पर ही विचार व्यक्त नहीं किए बल्कि उस व्यक्ति का भी महिमामंडन किया, जिसे हिन्दू विरोधी ‘बुद्धिजीवी’ के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है।
दरअसल, तमिलनाडु में कोयंबटूर के सुंदरपुरम इलाके में ईवी रामासामी जिसे कि ‘पेरियार’ के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को भगवा रंग में नजर आई। जिसके बाद डीएमके, आदि के कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया।


कुछ लोगों द्वारा पेरियार की प्रतिमा पर भगवा रंग से पुताई कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, पेरियार समर्थकों ने दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर ऐसी घटनाएँ फिर से हुई तो वे अपना प्रदर्शन उग्र कर देंगे।
कांग्रेस का पेरियार प्रेम 
पेरियार की यह प्रतिमा वर्ष 1995 में इस शहर में स्थापित की गई 3 समाज सुधारकों की प्रतिमाओं में से एक है। इस मामले में कथित रूप से भारत सेना संगठन के सदस्य 21 वर्षीय अरुण कृष्णन ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया है।
यह ध्यान रखने वाली बात है कि दक्षिण भारत में पेरियारवादियों के समर्थन की बदौलत ही 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी 50 सीटों को पार करने में सफल रही। इस तरह से देखा जाए तो हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने वाले पेरियार का महिमामंडन कर राहुल गाँधी सिर्फ पेरियार विचारधारा के समर्थकों का एहसान ही वापस कर रहे हैं।
सोनिया गाँधी के नेतृत्व तहत कांग्रेस पार्टी का लंबा इतिहास बताता है कि एक भी कोई ऐसा हिंदू-विरोधी कार्यकर्ता या ‘बुद्धिजीवी’ नहीं है, जिसे कांग्रेस पार्टी अपना समर्थन नहीं देती है। सत्ता में UPA के दौरान, सोनिया गाँधी ने अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को उन कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया, जिन्होंने विदेशों से फंड प्राप्त किया और विवादित हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया।
राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ हिन्दू समुदाय के प्रति अनादर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसे सोनिया गाँधी ने भलीभाँती सींचने का काम किया।
उदाहरण के लिए, कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी के कार्यकाल के दौरान, केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश में कहीं भी गोमांस प्रतिबंध के प्रति अपने विरोध प्रदर्शन में एक बछड़े की निर्मम हत्या की थी। ऐसी परिस्थितियों में, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि राहुल गाँधी ने पेरियार का महिमामंडन किया।
हिन्दू विरोधी पेरियार 
पेरियार ने रामायण के बारे में कई भ्रम फैलाए। श्री राम पर जातिवादी होने का आरोप लगाने से लेकर यह तक दावा किया गया कि उन्होंने महिलाओं को मार डाला। पेरियार के अनुसार, हिन्दू महाकाव्य रामायण और महाभारत को द्रविड़ पहचान को मिटाने के लिए ‘चालाक आर्यों’ द्वारा लिखा गया था। अगर पेरियार की मानें तो, राम, भरत को सिंहासन ना मिलने की साजिश का हिस्सा थे, जो पेरियार के अनुसार दशरथ के योग्य उत्तराधिकारी थे।
राम के प्रति अपनी घृणा के अलावा, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों को भी खंडित किया था। उसने श्री राम के चित्र भी जलाए थे। उसकी मृत्यु के बाद, पेरियारवादियों ने दशहरा के साथ ही ‘रावण लीला’ को वार्षिक आयोजन बनाने का प्रयास किया।
इंदिरा गाँधी के विरोधी 
आज इंदिरा गाँधी का पोता उन्हीं लोगों के साथ खड़ा है, जिन्होंने इंदिरा गाँधी का जीवन भर विरोध किया था। यह राहुल गाँधी और उनकी माँ, सोनिया गाँधी के तहत कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता में आए बदलाव को भी दर्शाता है, जहाँ पार्टी सक्रिय रूप से हर किसी को हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में बोलने के लिए प्रेरित करती है और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का हर प्रपंच करती है।

‘द वायर’ और ‘द हिन्दू’ के पत्रकार ने किया भगवान हनुमान का अपमान

द वायर, द हिंदू
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कुछ समय से 'द वायर' और 'द हिन्दू' जैसे मीडिया हाउस हिन्दू घृणा का जहर फैला कर अपने आपको धर्म-निरपेक्ष सिद्ध कर अपनी छाती चौड़ी किए घूम रहे हैं, भूल रहे हैं, कि जिस दिन किसी अन्य धर्म की इस तरह आलोचना शुरू करते ही, मुसीबतों का ऐसा पहाड़ टूटेगा, कहीं छुपने की इन साम्प्रदायिकतों को कहीं जगह नहीं मिलेगी। भूल जाएंगे धर्म-निरपेक्षता। ये तो हिन्दू है,जो ये सब बकवासें बर्दाश्त कर रहा है।  
‘द वायर’ और ‘द हिंदू’ जैसी कुख्यात वामपंथी वेबसाइटों में रोजगार प्राप्त करने की एकमात्र शर्त हिंदूफोबिक विचारों को पोषित और प्रकट करना है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हिन्दू-विरोधी प्रवृत्ति लंबे समय से इन वेबसाइटों से जुड़े पत्रकारों और लेखकों की पहचान रही है।
द वायर के सुप्रकाश मजूमदार नाम के पत्रकार ने भगवान राम के परम भक्त भगवान हनुमान पर तीक्ष्ण हिंदूफोबिक टिप्पणी की। सुप्रकाश मजूमदार ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि भगवान राम पर भगवान हनुमान का ”गे क्रश” था।
मजूमदार ने ट्विटर पर पूछा, “मुझे लगता है कि हनुमान का राम पर समलैंगिक क्रश था। आपको क्या लगता है?”
’द हिंदू’ की पत्रकार, सुचित्रा, ने हिंदुओं और हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाते हुए ट्वीट का जवाब देते हुए दावा किया कि हिन्दू अब सबसे आधुनिक और सहिष्णु धर्म होने का दावा करेंगे। इसके साथ ही सुचित्रा ने हिंदुओं पर चुटकी लेते हुए मजूमदार को सलाह दी कि वो इस तरह के तर्क से उन्हें अस्त्र शस्त्र उपलब्ध न करवाएँ।

सुचित्रा इससे पहले कांग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड में काम कर चुकी है। उन्होंने मजूमदार के ट्वीट का जवाब देते हुए भगवान हनुमान का अपमान किया।
भगवान हनुमान को दो पत्रकारों द्वारा बदनाम करने और हिंदूफोबिक कमेंट करने को लेकर सोशल मीडया यूजर्स का आक्रोश बढ़ गया। उन्होंने हिंदू भावना को ठेस पहुँचाने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इसके बाद सुप्रकाश मजूमदार ने अपना ट्विटर अकाउंट डिएक्टिवेट कर लिया।
वहीं दूसरी तरफ ’द हिंदू’ की पत्रकार सुचित्रा ने अपने ट्विटर अकाउंट में प्रोटेक्शन लगा दिया है, जिससे कि सिर्फ उसके फॉलोवर्स ही ट्वीट देख सकते हैं। सुचित्रा ने संभवतः इस डर से ऐसा किया हो कि उनके द्वारा हिंदू धर्म और हिंदू देवताओं का अपमान वाले ट्वीट को यूजर्स सामने ला सकते हैं।
सुचित्रा के ट्विटर बॉयो के अनुसार उन्होंने क्विंट, द सिटिजन, द कारवाँ, कॉन्ग्रेस के मुखपत्र-नेशनल हेराल्ड जैसे मीडिया संगठनों के साथ काम किया था, जिनमें से कई पर हिन्दू-विरोधी सामग्री प्रकाशित करने का आरोप लगाया गया है।
भारत के संविधान में निहित अभिव्यक्ति के अधिकार के बहाने हिन्दूफोबिक विचारों को फैलाना द वायर जैसे वामपंथी विचारधारा वाले वेबसाइट में काम करने वाले पत्रकारों का हथकंडा रहा है। इन वेबसाइटों से जुड़े लेखकों और पत्रकारों ने हमेशा ही हिंदुओं के प्रति उपेक्षा दिखाई है।
यह पहली बार नहीं है कि द वायर से जुड़े पत्रकारों ने हिन्दूफोबिक व्यवहार किया है। द वायर ने शरजील इमाम जैसे अपराधी को अपना प्लेटफॉर्म दिया था, जिन्होंने न केवल हिन्दूफोबिक उद्घोषणाओं को प्रकट किया था, बल्कि असम और भारत के शेष उत्तर पूर्व को काटने के लिए भारतीय मुसलमानों को ‘चिकेन नेक’ काटने के लिए उकसाने वाली देशद्रोही विचारधारा को भी प्रदर्शित किया था। इसके अलावा हिंदुओं के पर्व होली, दिवाली आदि पर भी अपनी घृणा का प्रदर्शन कर चुका है।

‘भारत में 100 करोड़ जानवर और 35 करोड़ इंसान’ – तथाकथित शायर मुनव्वर राना


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चाहे नसीरुद्दीन शाह हो, मुनव्वर राना हो या फिर राहत इंदौरी हो, इन सबने खुद ही अपने आप को बेनकाब करने का काम किया है।
मुनव्वर राना की जमात विटामिन-C यानी, विटामिन-कांग्रेस की कमी से जूझ रही है। उनके अन्नदाता स्वयं हर तरह से बेनक़ाब हो चुके हैं। उनकी अपनी ही झोली में अब लुटाने के लिए पुरस्कारों का अकाल है।
उर्दू के मशहूर और विवादित शायर मुनव्वर राना ने फिर से एक ट्वीट किया है। ट्वीट इस बार भी विवादित ही है। मुनव्वर राणा ने लिखा है कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं।
मुनव्वर राणा ने यह ट्वीट भाजपा नेता संबित पात्रा को सम्बोधित करते हुए भारत में रहने वाले लोगों को लेकर लिखा है। शायर मुनव्वर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा:

“डियर संबित, कांग्रेस की जवानी में तो आप गब्हे पे रहे होंगे (गब्हे का मतलब आप उड़ीसा में नहीं, यूपी में पूछना)। लेकिन कोरोना पर सरकार की नाकामी ने मेरी इस बात को सही साबित किया कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं, जो सिर्फ वोट देने के काम आते हैं।”
अपने इस ट्वीट पर एक कमेंट में मुनव्वर राना ने लिखा – “मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, हैरत है कि सर मेरा क़लम क्यूँ नहीं होता।”

सोशल मीडिया पर जिस तरह से आप लिखने को स्वतंत्र हैं, ठीक उसी तरह से लोग कॉमेंट करने को। मुनव्वर राना के विवादित ट्वीट के जवाब में एक यूजर ने रिप्लाई कर लिखा:
“जितनी ज़हालत पेलने की आजादी हिन्दुस्तान में मिली है, यदि इतनी जहालत किसी शरिया कानून वाले मुल्क में करते तो तेरी सर कलम वाली ख्वाहिश भी पूरी हो जाती! शुक्र मना तू दुनिया के सबसे सहिष्णु हिन्दुओं के बीच रह रहा है, जिन्होंने कुत्तों को भी भौंकने की आजादी दे रखी है!”
इस विवादित ट्वीट के प्रकाश में आते ही अब मुनव्वर राना सफाई देते हुए भी नजर आ रहे हैं। 100 करोड़ इंसानों को जानवर (शायद हिंदुओं को) बताकर निशाना बनाने की कोशिश करने के बाद अब शायर मुनव्वर ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा है:
“जिस तरह से हमारे ट्वीट को तोड़-मरोड़ कर हव्वा बनाया जा रहा है, वो सरासर ग़लत है। यहाँ 35 करोड़ वो लोग हैं जो ख़ुशहाल हैं, और 100 करोड़ लोगों से मुराद वो भारतवासी हैं, जो खाने-पीने और ओढ़ने-बिछाने जैसे हर बुनियादी हुक़ूक़ से महरूम हैं।”


मुनव्वर राना के इस ट्वीट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
मुनव्वर राना हिंदू जानवर
सस्ती लोकप्रियता के लिए भटकते लोग 
अवॉर्ड वापसी के कुछ समय बाद ही मुनव्वर राना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अच्छा शासक वो है, जो 60 साल की खराबियों को पाँच साल में ठीक कर दे, तो ही इतिहास में अकबर की तरह मोदी द ग्रेट लिखा जाएगा।
मुनव्वर राना ने दादरी की घटना के बाद भी हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए कहा था कि देश ने अभी तक यह फैसला नहीं किया है कि आतंक शब्द का मतलब क्या है। उन्होंने कहा कि जिस दिन आतंक की परिभाषा तय हो गई, बहुत सारी पार्टियाँ प्रतिबंधित हो जाएँगी।
राहत इंदौरी से लेकर मुनव्वर राना, अनुराग कश्यप और ऐसे ही अन्य कथित उदारवादियों की जमात को आखिर पिछले कुछ सालों से ही ऐसे स्टंट की जरूरत क्यों पड़ गई? इन सब के जरिए अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना क्यों आखिरी विकल्प हो गया?
यह सब घटनाक्रम अवॉर्ड वापसी की नौटंकी के बाद से अचानक शुरू हुआ था। कुछ ऐसे लोग थे, जिन्होंने तय कर लिया था कि अब अवॉर्ड वापसी ही इस देश में एकमात्र विपक्ष कहलाएगा। इसके लिए समय-समय पर नव-उदारवादियों द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी को बलि का बकरा बनाया गया।
लेकिन इनके ‘अच्छे दिन’ नहीं आए और उदारवादियों की चहेती पार्टी फिर सरकार बनाने से चूक गई। 2019 में एक बार फिर दक्षिणपंथी भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में स्थापित हो गई।
मुनव्वर राना वर्तमान सरकार और उसके क्रियाकलापों को लेकर इतने आश्वस्त हैं कि वह जानते हैं कि वो चाहें तब भी यह सरकार उन्हें कोई ऐसा कदम नहीं उठाने देगी।
इसके बेहद दूरगामी परिणाम सामने आए। हुआ यह कि वामपंथी और नव-उदारवादी अब अपनी बेचैनी पर नियंत्रण कर पाने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं।
यही वजह है कि मुनव्वर राना ने एक ही ट्वीट के ज़रिए अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए हिन्दुओं को जानवर और वोट बैंक बता दिया। मुनव्वर राणा ने यह ट्वीट भाजपा नेता संबित पात्रा को सम्बोधित करते हुए भारत में रहने वाले लोगों को लेकर लिखा है।
कल (मई 13)शाम ही मुनव्वर राना ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा है –
“डियर संबित, कांग्रेस की जवानी में तो आप गब्हे पे रहे होंगे (गब्हे का मतलब आप उड़ीसा में नहीं यूपी में पूछना)। लेकिन कोरोना पर सरकार की नाकामी ने मेरी इस बात को सही साबित किया कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं, जो सिर्फ वोट देने के काम आते हैं।”
अपने इस ट्वीट पर एक कमेंट में मुनव्वर राना ने लिखा है – “मैं झूठ के दरबार में सच बोल रहा हूँ, हैरत है कि सर मेरा क़लम क्यूँ नहीं होता।”
अवॉर्ड वापसी के कुछ समय बाद ही मुनव्वर राना ने PM मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि अच्छा शासक वो है, जो 60 साल की खराबियों को पाँच साल में ठीक कर दे, तो ही इतिहास में अकबर की तरह मोदी द ग्रेट लिखा जाएगा।
शब्दों की कंगाली से जूझता शायर 
आप यदि 2015 के मुनव्वर राना के बयान और 2020, यानी कल के बयान में अंतर तलाशेंगे तो सबसे खास बात उनके शब्दों को इस्तेमाल करने की तरकीब में आया खुलापन है। 2015 में वो सिर्फ इशारों में ही हिन्दुओं के खिलाफ बयान देने में सक्षम नजर आते हैं जबकि 2020 तक उनकी बौखलाहट इतनी बढ़ गई कि उन्होंने ‘बुद्धिजीवी’ वाले सारे मुखौटे त्यागकर स्पष्ट शब्दों में हिन्दुओं की आबादी को जानवर घोषित कर दिया।
इन कलाकारों को ऐसी क्या दिक्कत आ गई कि ये अपनी अभिव्यक्ति के प्रकटन के लिए इतने निम्नस्तरीय और घृणित शब्दों का इस्तेमाल करने पर विवश हो गए?
गत वर्ष दिसम्बर माह में नागरिकता कानून के विरोध में भी मुनव्वर राना परिवार सहित फन फैलाते देखे गए। लखनऊ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन करने को दौरान मुनव्वर राना की बेटियों के खिलाफ धारा-144 के उल्लंघन का मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने सरकार के खिलाफ जहर उगला था।
कारण है कि अब स्टेज पर उन्हें जो मौके नहीं मिलते, उनकी पूर्ति वो ट्विटर और सोशल मीडिया पर अपने मजहबी जहर को उगलकर करने को मजबूर हैं।
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मुनव्वर राणा, शेहला रशीद, आरफा खानम, राहत इंदौरी आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जो हिन्दू लोग आदम में यकीन नहीं करते क....

झारखण्ड : घर में थूकते हैं मुसलमान, पुलिस ले जाती है मोबाइल: प्रताड़ना से तंग राँची की ऋचा भारती, परिवार ने कहा- ‘गोली मार दो’

ऋचा भारती रांची, झारखंड सरकार
झारखण्ड में चरम पर हिन्दूफ़ोबिआ 
ये शब्द हैं ऋचा भारती के पिता के। राँची की वही ऋचा भारती, जिन्हें अदालत ने कुरान बाँटने की अजोबोग़रीब और विवादित सज़ा दी थी। उन्हें व उनके पूरे परिवार को जानबूझ कर प्रताड़ित किया जा रहा है। ये काम झारखण्ड पुलिस कर रही है, वो भी झारखण्ड सरकार के इशारों पर। गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को अचानक से 5-6 पुलिसवाले उनके घर आए और ऋचा भारती का मोबाइल फोन ले गए। मुद्दा क्या था, कारण क्या है, शिकायत किसने की- पुलिस ने ये सब कुछ भी नहीं बताया।
पुलिस से जब ऋचा भारती के पिता प्रकाश पटेल ने कहा कि वो कोई कागज़ दिखाएँ, जिसमें मोबाइल फोन जब्त करने का आदेश हो तो पुलिस कुछ नहीं दिखा पाई। बिना किसी सर्च वॉरंट वगैरह के पुलिस घर में घुस गई और परिवार के सभी सदस्यों का मोबाइल फोन खँगालने लगी। प्राइवेट मैसेजों का भी पड़ताल की है। ऋचा के भाई का फोन लेकर छानबीन की गई। वो लोग बार-बार पूछते रहे कि किसकी शिकायत पर ये हो रहा है, तो कुछ नहीं बताया गया।

पुलिस सिर्फ़ इतना बताती रही कि उन्हें मोबाइल लेना है और चेक करना है। ये पहली बार नहीं हुआ है। कुछ हफ़्तों पहले भी पुलिस आई थी और ऋचा भारती की माँ का मोबाइल फोन लेकर चली गई थी। तब भी कोई कारण नहीं बताया गया। मोबाइल फोन वापस लेने के लिए प्रकाश पटेल बार-बार थाने का चक्कर लगाते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। थाना में कहा जाता रहा कि जब्ती सूची बना दी गई है। वो रेडमी ए-1 हैंडसेट था।
अप्रैल 23 को साइबर क्राइम की डीएसपी भी आई थीं, जिन्होंने कहा कि वो लिखित में देने को तैयार हैं कि पुलिस मोबाइल फोन लेकर जा रही है। लेकिन, ये नहीं बताया गया कि किसकी शिकायत पर यह सब किया जा रहा है। ऋचा ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए आशंका जताई है कि ट्विटर पर कुछ मुसलमानों ने सरकरी नेताओं और पुलिस को टैग कर के कुछ शिकायत की होगी, जिसके बाद अचानक से पुलिस यूँ कार्रवाई करने लगी।
ऋचा के पिता प्रकाश व्यथा सुनाते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है कि उन्हें अब हिंदुस्तान में रहने में भी शर्म आ रही है। वो बताते हैं कि जब मोबाइल फोन जब्त कर के ले जाया गया, तो वो भी थाने पहुँचे ताकि पता चल सके कि मामला क्या है। उन्हें थाने में कोई नहीं मिला। फिर उसी दिन शाम को 15-20 की संख्या में पुलिसकर्मी फिर से ऋचा के घर पहुँचे।
बिना कुछ किए पीड़ित परिवार के साथ एकदम अपराधी की तरह व्यवहार किया गया। क़रीब एक घंटे तक साइबर क्राइम वालों ने घर के सारे मोबाइल फोन्स की जाँच की। उन्होंने जो-जो कहा, परिवार ने वो सब कर के जाँच में सहयोग किया। ऋचा की माँ की तबियत काफी खराब है। इन सब के बीच उनकी तबियत और बिगड़ गई। उन्हें डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। उनका कुछ दिनों पहले ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था। इसके अलावा एक और सर्जरी हुई थी।
पुलिस की पूछताछ के दौरान ही उनकी तबियत अचानक से बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस के ही सहयोग से ऋचा की माँ को किसी तरह हॉस्पिटल भेजा गया। वहाँ उनका इलाज चला, जिसके बाद उन्हें डिसचार्ज कर दिया गया। ऋचा के द्वारा क़ुरान बाँटने वाले प्रकरण के बाद ऋचा भारती के नाम से कई फेक फेसबुक एकाउंट्स बन गए हैं। उन्होंने थाने में ज्ञापन देकर उन फेक एकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की गुहार लगाई लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि इलाक़े के मुसलमानों के बीच ऋचा भारती के परिवार के ख़िलाफ़ चर्चाएँ आम हो गई हैं। एक व्यक्ति ने बताया कि उनके मेडिकल स्टोर पर शहजाद नामक आदमी ऋचा और उनके परिवार को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा था। उसने जब पुलिस द्वारा ऋचा के घर छानबीन किए जाने की ख़बर सुनी तो अफवाह उड़ा दी कि उन्हें पुलिस पकड़ के ले गई है। साथ ही वो बातें कर रहा था कि वो सब मिल कर ऋचा के परिवार को मार-पीट कर भगा देंगे।
ऋचा के परिवार के ख़िलाफ़ कुछ मुसलमान मार-पीट कर भगाने की बात कर रहे थे, ऐसा एक मेडिकल स्टोर वाले ने बताया। इस सम्बन्ध में भी परिवार ने पुलिस को सूचित किया था। कुछ दिनों पहले की ही बात है जब ऋचा का परिवार छत पर बैठा हुआ था और उनकी चचेरी बहन किनारे पर खड़ी थी। तभी दो-चार मुस्लिम युवक वहाँ से गुजर रहे थे और बातें कर रहे थे कि यही ऋचा का घर है। इसके बाद उन्होंने घर के दरवाज़े पर ही थूक दिया।
उन्होंने क़रीब 4-5 बार घर के दरवाज़े पर थूक फेंका था। जब तक परिवार के लोग वहाँ पहुँचते, वो लोग वहाँ से भाग निकले। परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार उकसाया जा रहा है ताकि वो जवाब में कुछ करें तो उसे बात का बतंगड़ बनाया जा सके। परिवार का आरोप है कि उनके साथ स्थानीय पुलिस जरा भी सहयोग नहीं कर रही है। ताज़ा मोबाइल फोन जब्ती वाली घटना के अगले दिन जब ऋचा के पिता थाने में आवदेन देने गए तो उन्हें थाना प्रभारी द्वारा प्रताड़ित किया गया।

ऋचा शर्मा द्वारा पुलिस को
लिखा पत्र 
थाना प्रभारी ने 3 बार उनसे थाने का चक्कर कटवाया और बाद में आवेदन लेने से भी इनकार कर दिया। आवेदन में पुलिस तरह-तरह की गलतियाँ निकालती रही। बाद में डीएसपी को शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने आवेदन तो लिया लेकिन उसमें काफ़ी कुछ बदलाव कर दिया। बिना शिकायतकर्ता की मर्जी के उस आवेदन के साथ छेड़छाड़ किया गया। ये काँके पिठौरिया थाना क्षेत्र की घटना है। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हतस्क्षेप की माँग की है, जो इस पर चुप हैं।
ऋचा के पिता प्रकाश पटेल ने बताया कि जब वो पुलिस से शिकायत करते हैं तो पुलिस झिड़क के कहती है कि हम क्या करें, आपके कारण सभी को गोली मार दें? बाद में तंग आकर प्रकाश पटेल ने थाना प्रभारी से कह दिया कि वो दूसरों को क्यों गोली मारेंगे, उनके पूरे परिवार को ही गोली मार दें। हालाँकि, अभी ऋचा का फोन लौटा दिया गया है लेकिन पुलिस द्वारा की जा रही प्रताड़ना के कारण परिवार अब भी सदमे में है।
ऋचा के पिता ने कहा कि जमशेदपुर में फल विक्रेताओं के दुकानों से हिन्दू वाला बैनर हटाने की बात हो या बंगाल में हिन्दुओं के मारे जाने की ख़बर, इन सब को सुन कर और उनके परिवार के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर ऐसा लगता ही नहीं है कि वो किसी धर्मनिपरपेक्ष राष्ट्र में रह रहे हैं। ऐसा लगता है, जैसे कोई इस्लामिक मुल्क़ में रह रहे हों। परिवार का कहना है कि अगर ऋचा के ख़िलाफ़ एक भी बनावटी सबूत मिल जाता तो उन्हें फिर से जेल में ले जाकर डाल दिया जाता।
परिवार सुरक्षा के लिए आवेदन 
जब ऋचा के पिता से पूछा कि वो किसी भी आरोपित का नाम पुलिस को क्यों नहीं बता रहे हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि जब वो नाम नहीं दे रहे हैं तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है तो अगर उन्होंने नाम दे दिया तो उनके ख़िलाफ़ और भी बड़ी साज़िश रची जाएगी। पिठौरिया के थानाध्यक्ष से भी ऑपइंडिया ने संपर्क किया, जिन्होंने आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि ऋचा के परिवार की पुलिस जितनी मदद कर रही है, वो उतना ज्यादा ‘नौटंकी’ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा की ऋचा की माँ की तबियत ख़राब होने पर उन्हें पुलिस की गाड़ी से ही इलाज के लिए भेजा गया। परिवार का कहना है कि डीएसपी के सहयोग के कारण ऐसा संभव हुआ, जो महिला ही हैं। थानाध्यक्ष ने कहा कि पुलिस उनके घर के पास से दिन भर में कई बार लॉकडाउन पेट्रोलिंग के दौरान गुजरती है, इसीलिए उनके द्वारा किए जा रहे ‘डर’ के दावों में कोई दम नहीं है। आवेदन में छेड़छाड़ होने की बात से भी उन्होंने इनकार कर दिया।
ऋचा भारती ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ मुसलमानों की ट्वीट्स के आधार पर बार-बार उनके घर आकर पुलिस उनके मोबाइल फोन्स की छानबीन करती है। ऋचा ने पुलिस से कहा कि वो उन पर कार्रवाई करें, जो इधर-उधर थूक फेंक रहे हैं, जो हमारे जवानों का सम्मान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखण्ड में सरकार बदलते ही हिन्दुओं के साथ दुर्व्यवहार शुरू हो गया है।
जब परिवार बार-बार कह रहा है कि उनके घर के आसपास संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया है और स्थानीय मुसलमान उन्हें मार भगाने की बात कर रहे हैं, फिर पुलिस कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही या सरकार उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान कर रही? उलटा किसी के आरोपों को ‘नौटंकी’ बता कर ख़ारिज कर देना कहाँ तक सही है? वो भी तब जब परिवार ख़ुद कई दूसरी परेशानियों से जूझ रहा है।
जुलाई 2019 में एक मामले में राँची की अदालत ने ऋचा को कुरान बाँटने का आदेश दिया था। ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? बाद में विरोध के बाद राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया था। (साभार)
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