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NDMC में लगातार चार बैठकों से नदारद केजरीवाल की सीट रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव पेश

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पंजाब में व्यस्तता देखकर कहा जा सकता है, वो एक साथ दो राज्यों दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए हैं। दो राज्यों की जिम्मेदारी लेकर चल रहे केजरीवाल के पास नई दिल्ली नगर निगम के लिए समय ही नहीं है। नई दिल्ली सीट से विधायक होने के कारण केजरीवाल स्वतः ही एनडीएमसी के सदस्य हैं। लेकिन बिना अनुमति लिए निगम परिषद की लगातार चार बैठकों से नदारद रहने की वजह से 22-06-2022 को उनकी सीट रिक्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया।

प्रस्ताव में केजरीवाल की दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक परिषद की बैठकों में गैरहाजिरी का हवाला दिया गया। इस मुद्दे पर परिषद की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, ”एनडीएमसी अधिनियम के अनुसार, परिषद का कोई सदस्य अगर बिना पूर्व अनुमति के लगातार तीन महीनों तक सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है तो परिषद ऐसे सदस्य की सीट रिक्त घोषित करने के लिए केंद्र सरकार से अनुशंसा कर सकती है।”

केजरीवाल के परिषद की बैठक से अनुपस्थित रहने के मुद्दे को उठाते हुए एनडीएमसी सदस्य कुलजीत सिंह चहल ने उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की। चहल ने निगम परिषद में जो प्रस्ताव रखा उसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एनडीएमसी के सदस्य हैं, लेकिन उन्होंने अपनी सदस्यता धर्म का निर्वहन नहीं किया।

दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी को करप्शन में सस्पेंड किया

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें से एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी हैं। उनके अलावा दो SDM पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कार्रवाई हुई है।

उपराज्यपाल ने जिन अधिकारियों को निलंबित किया है, उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव के पद पर तैनात प्रकाश चंद्र ठाकुर, वसंत विहार के एसडीएम हर्षित जैन और विवेक विहार के एसडीएम देवेंद्र शर्मा का नाम शामिल है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है। उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, मामला कथित रूप से प्राइवेट संस्थाओं को बेची गई सरकारी जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

इससे पहले उपराज्यपाल ने सोमवार (20 जून 2022) को कालकाजी एक्सटेंशन में ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के निर्माण में खामियाँ पाए जाने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के दो सहायक इंजीनियरों को भी निलंबित कर दिया था। पिछले हफ्ते, उप राज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की थी।

RTI ने खोली केजरीवाल की पोल

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने शासनकाल के दौरान जनता को ठगने का काम किया है। ऐसा हम नहीं बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवालों के वो जवाब कह रहे हैं, जिनके सामने आने पर उनके वादों की पोल खुल गई है।
इंडिया टीवी ने अपनी एक्सक्लूसिव ख़बर के माध्यम से उन सभी सवालों के जवाब को सिलसिलेवार तरीके से जनता के सामने रखा है। इन सवालों के जवाब देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि आम आदमी पार्टी (AAP), झुग्गी झोपड़ी (जेजे) क्लस्टर के निवासियों की शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास के मोर्चों पर किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है।
India Tv - The RTI replyRTI के जवाबों में, जेजे कॉलोनी में रहने वाले निवासियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने का ख़ुलासा हुआ है। जेजे कॉलानी में विकास को लेकर किए गए सर्वेक्षण के लिए नोडल प्राधिकरण, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने केजरीवाल सरकार को एक प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया था। जबकि इसकी सच्चाई यह है कि ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था, जिसके लिए केजरीवाल सरकार को सम्मानित किया गया। दरअसल, अपने चुनावी घोषणा-पत्र में, AAP ने वादा किया था कि वो शहर के सर्वेक्षण में शामिल होने के बाद उसी स्थान पर जेजे निवासियों को घरों के निर्माण की मंज़ूरी देगी, जहाँ वो रह रहे थे।
नई दिल्ली स्थित RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह ने 2019 में RTI के तहत कुछ सवाल पूछे थे। उन्हें आधिकारिक तौर पर जो जवाब दिए गए उनकी इमेज नीचे लगाई गई है।
फेक सर्वेक्षण प्रमाण-पत्र 
सूचना के अधिकार के माध्यम से यह पता चला कि सरकार ने 1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच 3,00,000 जेजे क्लस्टर के निवासियों के पुनर्वास के लिए कोई निर्माण शुरू नहीं किया। जबकि दिल्ली सरकार को इसके लिए सर्वेक्षण पूरा करने संबंधी प्रमाण-पत्र दिया गया। RTI से पता चला है कि उक्त तारीखों के दौरान ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था। सर्वेक्षण पूरा करने वाले प्रमाण-पत्रों में से एक इमेज जेजे निवासी द्वारा शेयर की गई।
इसके अलावा, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की ओर से 21 नवंबर, 2019 को दिए गए RTI जवाब में बताया गया था, “1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच किसी भी जेजे क्लस्टर में कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया था।”
India Tv - The RTI replyहेल्थ केयर का पर्दाफाश 
RTI के जवाबों से पता चला है कि सरकार 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में 30,000 बेड जोड़ने के अपने अभियान में पिछड़ गई।
इसके अलावा, एक अन्य RTI जवाब से पता चलता है कि 1 अप्रैल, 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच न कोई नया अस्पताल शुरू हुआ और न ही निर्माण हुआ।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से 3 जुलाई, 2019 को एक RTI जवाब में बताया, “अप्रैल 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच कोई नया अस्पताल नहीं बनाया गया।”
2015 के मुकाबले सड़क पर कम बसें 
India Tv - The RTI replyजहाँ तक ​​डीटीसी बसों की बात है, उनकी संख्या 2015 से 2019 के बीच कम हो गई है। एक RTI के जवाब के मुताबिक़, 1 अप्रैल, 2015 में दिल्ली की सड़कों पर 4,705 बसें चल रही थीं। वहीं, 31 अगस्त 2019 को यह संख्या घटकर 3,796 हो गई थी। इसका जवाब, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के एक अधिकारी ने 3 दिसंबर, 2019 को दिया था।
अपने घोषणा पत्र में, आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि वो 5,000 नई बसें खरीदेंगे।
शिक्षक पद आज तक खाली 
आम आदमी पार्टी ने 500 नए स्कूलों के निर्माण का वादा किया था, जबकि सच्चाई यह है कि 1 अप्रैल, 2015 से 31 अगस्त, 2019 के बीच केवल एक ही स्कूल के निर्माण को मँजूरी दी गई।
RTI के एक अन्य जवाब में बताया गया कि 1 फरवरी 2015 को 9,598 शिक्षक पद रिक्त थे, 30 सितंबर 2019 तक यह संख्या बढ़कर 15,702 पहुँच गई। 
नगर निगम स्कूल में धर्म के नाम पर अलग कक्षाएं 
अब इस स्कूल की वीडियो देखिए, जो दिल्ली के स्कूलों में साम्प्रदायिकता का जहर घोले जाने को उजागर कर रही है। समझ में नहीं आता इस गंभीर मुद्दे पर #intolerance, #award vapsi, #not in my name गैंग के अलावा गंगा-यमुना की तहजीब और संविधान की दुहाई देने वाले छद्दम धर्म-निरपेक्ष क्यों खामोश हैं? इतना ही नहीं, हिन्दू की दुहाई देने वाली भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस भी चुप्पी साधे हुए हैं। इस साम्प्रदायिकता के कौन है जिम्मेदार, आम आदमी पार्टी या नगर निगम में सत्ताधारी भाजपा? किसके आदेश पर स्कूल में धर्म के आधार पर कक्षाओं का विभाजन हुआ? मोदी जी क्या इसी तरह "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" होगा? जब इस स्कूल का यह हाल है, अन्य स्कूलों का भगवान ही मालिक है।  
RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह का कहना है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव पर मतदान होने से पहले केजरीवाल की यह सच्चाई जनता के सामने आना बेहद ज़रूरी है। ताकि जनता को यह पता चल सके कि केजरीवाल ने दिल्ली के निवासियों से एक नहीं कई झूठ बोले हैं, जिन पर उनकी जवाबदेही बनती है।( सभी RTI चित्र साभार India TV )