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दिल्ली : सीलमपुर में 16 साल के हिंदू लड़के को फैजान और उसके साथियों ने दौड़ा-दौड़कर घोंपा चाकू: जाँच में जुटी दिल्ली पुलिस; कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?

                    दिल्ली के सीलमपुर में 16 साल के लक्क की चाकू से गोदकर हत्या (फोटो साभार: NDTV)
केजरीवाल सरकार के समय किसी हिन्दू की हत्या होने पर जो बीजेपी शोर मचाती थी, आज उसी बीजेपी के राज में भी वही हो रहा है। जब तक इन जेहादियों के परिवार को मिलने वाली हर सरकारी सुविधा बंद नहीं होगी ये इस तरह आतंक करते रहेंगे। Victim card खेला जाएगा, कोई भटका हुआ मासूम बताएगा तो कोई दिमाग से पैदल आदि आदि इन जेहादियों के इस 
Victim card को नज़रअंदाज़ कर सरकारी सुविधाओं को बंद करना होगा।  
पहले जगह-जगह बम धमाके से आतंक फैलाया जाता था अब क़त्ल करके आतंक फैलाया जा रहा है। सरकार, पुलिस और अदालतों को इस बात की गंभीरता से जाँच करनी होगी कि कहीं ये जेहादी आतंकियों के sleeper cell तो नहीं?     

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर में 16 साल के नाबालिग लड़के की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि आरोपितों में से एक लड़के का नाम फैजान है, जिसने अपने साथियों संग मिलकर लक्की की हत्या को अंजाम दिया।

अगर यही काम हिन्दुओं ने किया होता सारे सेक्युलरिस्ट्स सडकों पर आकर चील-कौओं की तरह चिल्ला रहे होते। संविधान की दुहाई दे रहे होते लेकिन अब ये काम उनके शांतिदूतों ने किया है सबको सांप सूंघ गया है।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सीलमपुर थाना क्षेत्र के गौतमपुरी इलाके की है। यहाँ लक्की नाम के लड़के की बुधवार (24 जून 2026) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जानकारी के अनुसार, देर रात फैजान और उसके चार से ज्यादा साथियों ने लक्की को घेर लिया और उस पर ताबड़तोड़ चाकू से वार किए। गंभीर रूप से घायल लक्की सड़क पर गिर गया।

आसपास के लोगों ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। लक्की को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ज्यादा खून बहने से उसकी मौत हो गई। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुँची और इलाके का घेराव कर जाँच शुरू कर दी।

पुलिस ने लक्की के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और परिजनों व स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। बताया गया कि लक्की अक्सर माता की चौकी और जागरण में शामिल हुआ करता था, घटना वाले दिन भी वह माता की चौकी से ही लौट रहा था जब उसकी हत्या को अंजाम दिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल हत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है, हर पहलू से जाँच की जा रही है।

मोदी जी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश में कुकुरमुत्ते के तरह निकल रहे जेहादियों पर ब्रहमोस कब? मीडियाकर्मियों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के 13 मामले : दिल्ली… कर्नाटक… केरल… झारखंड या हो यूपी-उत्तराखंड, मुस्लिम भीड़ बनाती रही है हिंदू पत्रकारों को निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है बहुत अच्छी बात है। पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों का पता लगाया जा सकता है लेकिन देश कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे जेहादियों या कहा जाये कि भारत में ही पल रहे आतंकियों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही? देश में ही पल रहे ये जेहादी पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों से ज्यादा खतरनाक है। अगर इन पर कार्यवाही नहीं की गयी पाकिस्तान की बजाये भारत में जगह-जगह बने पाकिस्तान से लड़ना पड़ेगा। इन जेहादियों पर कार्यवाही करने के साथ-साथ इनके समर्थकों और आकाओं पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। Victim Card खेलने वालों-बच्चों से लेकर महिलाओं तक-पर और भी सख्ती से पेश आनी की जरुरत है जो कुछ रुपयों की खातिर हमले कर माहौल ख़राब कर रहे हैं। इन जेहादियों के आगे तो कई बार तो पुलिस भी बेबस हो जाती है। पुलिस वालों का भी अपना परिवार होता है। भारत में जितने भी संवेदनशील इलाके हैं सभी में टियर गैस और blind firing के आर्डर के पुलिस को तैनात करना चाहिए। ताकि कोई जेहादी समर्थक यह न कहने पर कि बाहरी लोग थे।    
दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। बुर्का पहने महिलाओं ने न सिर्फ सुप्रिया को पीटा बल्कि उनके बाल भी खींचे।

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू पत्रकारों पर हमले की ये घटना ना तो पहली बार हुई है, ना ही इसमें कोई बात ऐसी है, जिसके चलते इसे नई घटना का दर्जा दिया जा सकता हो। यूँ तो अनगिनत घटनाएँ ऐसी रही हैं, लेकिन आइए उदाहरण के तौर पर उनमें से 14 घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सीमापुरी में All India News की पत्रकार सुप्रिया और कैमरामैन श्याम पर मुस्लिम भीड़ का हमला

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर सुप्रिया रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार थी और उनके कैमरामैन श्याम बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रिया के बाल खींचे, भीड़ ने दोनों को पत्थर और बेल्ट से मारा। इस हमले में सुप्रिया का एक पैर भी टूट गया। हमलावरों ने उनके कैमरा और माइक के साथ-साथ उनका फोन और पर्स भी छीन लिया।

दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का हिंदू महिला पत्रकार पर हमला

दिल्ली में बुधवार (2 जुलाई 2025) को एक हिंदू महिला पत्रकार अवैध रुप से रह रहे कुछ मुस्लिमों से बात करने पहुँची थी। इसी बीच मुस्लिमों की भीड़ ने उसे घेर लिया और मारना शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों ने महिला पत्रकार पर पत्थरों से हमला किया, जबकि वो केवल रिपोर्टिंग कर रही थी। जब उसने उनके वहाँ अवैध रुप से रहने पर सवाल उठाया तो भीड़ उसे चाकू दिखाकर डराने लगी।

जयपुर में मुस्लिमों के क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थी महिला, मुस्लिमों ने सरेआम दी धमकी

राजस्थान के जयपुर में 28 अप्रैल 2025 को एक महिला पत्रकार रिपोर्टिंग करने उस इलाके में पहुँची, जहाँ मुस्लिमों की संख्या हिंदूओं की अपेक्षा अधिक थी। इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने महिला पत्रकार को कैमरा बंद करने के लिए कहा, जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो वे उसे धमकी देकर इलाके से भगाने लगे।

दिल्ली में वक्फ प्रदर्शन कर रही भीड़ का सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों पर हमला

दिल्ली में 17 मार्च 2025 को मुस्लिम प्रदर्शनकारी वक्फ के विरोध में धरनारत थे। अन्य मीडियाकर्मियों की तरह ही सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों ने भी वहाँ इकट्ठा हुए मुस्लिमों से इस बारे में सवाल किया। क्योंकि मुस्लिम जवाब ही नही दे पा रहे थे, इसलिए उन्हें पलट कर पत्रकारों पर ही हमला करना ठीक लगा। और तिलमिलाए कट्टरपंथियों ने सुदर्शन न्यूज के जर्नलिस्ट्स पर हमला कर दिया।

नैनीताल के हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का अमर उजाला के पत्रकार पर हमला

नैनीताल के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में बने अवैध मस्जिद और मदरसों को गिराने के उद्देश्य से प्रशासनिक टीम पहुँची हुई थी। इस दौरान यहाँ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। अवैध होने के बावजूद मस्जिद को ढहाने के फैसले से नाखुश मुस्लिमों ने न सिर्फ प्रशासनिक समूहों से मारपीट की बल्कि पत्रकारों को भी पीटा।

इनमें वे पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने कभी इन्ही कट्टरपंथियों के समर्थन में खबरें छापी थी। इस हमले में अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी चोटिल हुए थे। यही नहीं मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशनों और पेट्रोल पंप को भी जलाने के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी को भी जिंदा जलाने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में चुन-चुन कर हुआ था हिंदू पत्रकारों पर हमला

उत्तराखंड के हल्द्वानी में फरवरी 2024 की हिंसा में दंगा करने वाले मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन और वहाँ रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों की पहचान कर उनपर हमला किया था। समाचारपत्र अमृत विचार के पत्रकार संजय भी इसमें घायल हुए थे। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई दिनों तक वे ICU में भर्ती थे।

लखनऊ में मोनिस और एहसान ने काट दी थी पत्रकार की उंगलियाँ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 29 अप्रैल 2025 को जाने-माने साहसी पत्रकार कवि तिवारी पर मोहम्मद मोनिस, मोहम्मद एहसान और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इन मुस्लिम हमलावरों ने कवि तिवारी पर उस वक्त हमला किया, जब वे मंदिर जा रहे थे।

अचानक हुए इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई। हमलावरों ने उन पर चाकू से कई बार गंभीर वार किए, जिसके चलते उनकी उंगलियाँ ही नहीं मुँह भी बुरी तरह से कट गया।

झारखंड में मुस्लिमों ने घंटों तक रोके रखी महिला पत्रकार की कार

झारखंड के पाकुड़ में 18 अक्टूबर 2024 को महिला पत्रकार अर्चना अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर रिपोर्टिंग करने पहुँची थी। जिस समय उसकी कार पाकुड़ से गुजर रही थी। उसी समय मुस्लिमों ने अर्चना के पास पहुँचकर उन्हें धमकी दी। मुस्लिमों ने उनकी कार को रोककर काफी देर हंगामा किया। और उन्हें जाने से रोके रखा। वहाँ किसी तरह अर्चना ने खुद की जान बचाई और निकल पाई।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में महिला पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 31 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी के निधन के बाद रिपोर्टिंग करने पहुँची महिला पत्रकार अर्चना तिवारी पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। यहाँ अर्चना को घेरने की कोशिश की गई। रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। इस हमले में अर्चना को चोट भी आई।

दैनिक जागरण के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 10 जुलाई 2024 को दैनिक जागरण के पत्रकार अमित पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थी। बड़ी मुश्किल से अमित ने मुस्लिम भीड़ से अपनी जान बचाई थी।

रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ के इशारे के बाद हमला

सुदर्शन न्यूज का एक पत्रकार 31 अगस्त 2023 को रिपोर्टिंग कर रहा था। इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं पत्रकार के ऊपर अपनी गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। जिसकी वजह से पत्रकार जमीन पर गिर गया था।

कर्नाटक में गोहत्या का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में 5 दिसंबर 2020 को अवैध रूप से गोहत्या करने वाले गिरोह की सच्चाई सामने लाने वाली एक महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। भीड़ में शामिल बुर्काधारी महिलाओं ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार तो किया ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

केरल में रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ का हमला

केरल के पतनमतिट्टा में 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर पर कवरेज के दौरान रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा प्रसन्ना की कार का शीशा तोड़ने की भी कोशिश की।

कर्नाटक में अवैध बूचड़खाने की रिपोर्टिंग करने पर इंडिया टूडे के पत्रकार पर हमला

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपल्या गाँव में 10 अगस्त 2018 को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इंडिया टुडे के एक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने बूचड़खाने के बाहर पत्रकार और पुलिस की टीम कर हमला कर दिया। यहाँ छापेमारी के बाद 71 बछड़ों को छुड़ाया गया था, वहीं 7 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
अवलोकन करें:-
OpIndia Exclusive- क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता योगी की तरह इन जेहादियों पर कार्यवाही करेंगी? सी

सोचने वाली बात है कि आखिर इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी कौन सी योजना है, जिसको छिपाने की कोशिश में ये इस निर्ममता पर उतर आते हैं। जब किसी अवैध निर्माण के लिए पत्रकार इनसे सवाल करते हैं और इन मुस्लिमों के पास जवाब नहीं होता, तो ये जानलेवा हमला कर अपने गलत मंसूबों की सच्चाई सामने आने से बचाने में जुट जाते हैं।

OpIndia Exclusive- क्या दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता योगी की तरह इन जेहादियों पर कार्यवाही करेंगी? सीमापुरी में मीडियाकर्मियों पर हमला, जान बचाने जिस DTC में चढ़े उसमें भी तोड़फोड़ : बुर्काधारी औरतों ने नोचे महिला पत्रकार के बाल, मुस्लिम भीड़ ने पत्थर-बेल्ट से मारा:

          घायल पत्रकारों का दिल्ली के जीटीवी अस्पताल में कराया गया इलाज (फोटो साभार: X_Keshav_Malaan)
काफी समय से दिल्ली में जेहादी शोभायात्राओं पर किसी न बहाने से पत्थरबाज़ी कर हिन्दुओं के त्योहारों पर विध्न डाल रहे हैं। अगर अब दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार के होते हुए भी योगी आदित्यनाथ की तरह कार्यवाही नहीं होगी इन जेहादियों और आकाओं के होंसले बुलंद होते रहेंगे। 

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर रिपोर्टिंग के दौरान हुआ, जब दोनों पत्रकार बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

पीड़ितों के मुताबिक, बुर्कानशीं महिलाओं और नाबालिग किशोरों की भीड़ने न केवल पत्रकारों को बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके उपकरण, नकदी और निजी सामान भी लूट लिए। इस घटना ने दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, क्योंकि अभी तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही पीड़ितों को एफआईआर की कॉपी उपलब्ध कराई गई है।

दिल्ली की सड़क पर दिखा इस्लामी हिंसा का भयावह मंजर

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम करीब 6 बजे सुप्रिया पाठक और श्याम सीमापुरी के बंगाली बस्ती क्षेत्र में 200 फुटा रोड के पास पहुँचे। उनका मकसद सरकारी जमीन पर हो रहे अवैध अतिक्रमण की सच्चाई को उजागर करना था, जो स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। इस इलाके में अवैध झुग्गियाँ, निर्माण कार्य और कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की मौजूदगी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

सुप्रिया और श्याम ने जैसे ही मस्जिद के सामने अपनी रिपोर्टिंग शुरू करने के लिए कैमरा सेट किया, कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। शुरुआत में यह आपत्ति मौखिक थी, लेकिन जल्द ही यह हिंसक रूप ले लिया। भीड़ में शामिल बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों ने पत्रकारों को घेर लिया। शुरुआत में 20-30 लोगों की भीड़ कुछ ही मिनटों में 200 से अधिक लोगों की उग्र भीड़ में बदल गई।

भीड़ ने सुप्रिया और श्याम पर लाठियों, मुक्कों और लातों से हमला शुरू कर दिया। सुप्रिया को सड़क पर घसीटकर पीटा गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई और हड्डी टूट गई। उनके शरीर पर कई जगह घाव और चोट के निशान हैं। श्याम के चेहरे और शरीर पर भी गहरे घाव आए और उनके सिर पर मुक्कों की बौछार की गई। हमलावरों ने सुप्रिया का मोबाइल, कैमरा, माइक, बैटरी और जेब में मौजूद नकदी लूट ली, जबकि श्याम की घड़ी और पर्स भी छीन लिया गया।

पत्रकारों ने बचने की कोशिश में एक डीटीसी बस में शरण ली, लेकिन भीड़ ने बस को चारों ओर से घेर लिया। हमलावरों ने बस के शीशे तोड़ दिए और दोनों को जबरन बाहर खींच लिया। इस दौरान बस चालक ने कोई मदद नहीं की और उल्टा उन्हें बस से उतार दिया। भीड़ ने बस को भी नुकसान पहुँचाया, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँची। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।

दिल्ली के सीमापुरी में जिहादियों ने शुक्रवार की शाम को 2 पत्रकारों पर हमला किया। क्योंकि वो अवैध अतिक्रमण पर स्टोरी कर रहे थे। बुर्कानशीं महिलाओं ने महिला पत्रकार की टाँग तक तोड़ दी, तो उनका सामान भी लूट लिया गया। दोनों बचने की कोशिश में DTC की बस में चढ़ें, तो बस भी तोड़ी गई।… pic.twitter.com/dY0uPLx4sa

— Shravan Shukla (@epatrakaar) July 5, 2025

पीड़ित ने ऑपइंडिया से साझा की आपबीती

पीड़ित के मुताबिक, उन्हें अलग भीड़ ने मारा और उनकी साथी पत्रकार सुप्रिया को अलग से पीटा गया। बाद में कुछ बाइक वाले आए, उन्होंने मदद करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी बाइक समेत गिरा दिया गया। फिर पुलिसकर्मी आए और उन्होंने बाइक पर उन्हें आगे छोड़ने का प्रयास किया। हालाँकि इस दौरान भी भीड़ बाइक के पीछे रही, किसी ने पत्थर फेंके तो किसी ने बेल्ट मारी।

बचाव की नाकाम कोशिशें और प्रशासन की निष्क्रियता

घटना के दौरान सड़क पर जाम होने के बावजूद कोई भी स्थानीय व्यक्ति पत्रकारों की मदद के लिए आगे नहीं आया। कुछ राहगीरों ने कोशिश की, लेकिन भीड़ के आक्रामक रवैये और कथित कट्टरपंथी नारों के सामने उन्हें पीछे हटना पड़ा। एक राहगीर ने सुप्रिया को अपनी बाइक पर बिठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे भी खींचकर मारपीट की। आखिरकार एक पुलिसकर्मी ने हस्तक्षेप किया और दोनों को मौके से कुछ दूरी पर सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
पत्रकारों को इसके बाद सीमापुरी थाने ले जाया गया, जहाँ से उन्हें मेडिकल जाँच के लिए जीटीबी अस्पताल भेजा गया। रात 9 बजे अस्पताल पहुँचने के बावजूद, इलाज और मेडिकल प्रक्रिया में इतनी देरी हुई कि सुबह 4 बजे तक उन्हें वहाँ से निकलने का मौका मिला। सुप्रिया के पैर में प्लास्टर चढ़ा है और वह चलने में असमर्थ हैं, जबकि श्याम को भी गंभीर चोटें आई हैं।

कट्टरपंथी इरादों के साथ किया गया हमला

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने X लिखा कि यह हमला योजनाबद्ध था, क्योंकि पत्रकारों की रिपोर्टिंग से कई अवैध गतिविधियों का भेद खुलने का खतरा था।
इस घटना में मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग किशोरों की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से चिंताजनक है। बुर्का पहनी महिलाओं ने न केवल पत्रकारों पर शारीरिक हमला किया, बल्कि उन्हें अपशब्द कहे और धार्मिक आधार पर टिप्पणियाँ कीं। नाबालिग किशोरों ने भी हिंसा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जो यह दर्शाता है कि कट्टरपंथी विचारधारा युवा पीढ़ी में भी गहरे तक पैठ बना चुकी है।
लोगों का दावा है कि हमलावरों ने पत्रकारों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि वे हिंदू थे और हमलावरों को इस बात का भरोसा था कि उनकी मजहबी पहचान के चलते पुलिस कोई सख्त कार्रवाई नहीं करेगी। यह भी आरोप लगाया गया कि ऐसे मामलों में मुस्लिम समुदाय की भीड़ थाने को घेर लेती है, जिससे प्रशासन दबाव में आ जाता है और कार्रवाई करने में असमर्थ रहता है। इस तरह की धारणा हमलावरों को और अधिक बेखौफ बनाती है, जिससे वे कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकते।
लोगों का कहना है कि दिल्ली में अवैध कब्जाधारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकता है। यह भी दावा किया गया कि कुछ राजनीतिक दलों ने वोट बैंक की खातिर अवैध प्रवासियों को बसने की अनुमति दी, जिससे इस तरह की हिंसक घटनाएँ बढ़ रही हैं।
हालाँकि इस मामले में हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर हमले के बावजूद दिल्ली पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़ितों को न तो एफआईआर की कॉपी दी गई है और न ही किसी हमलावर की गिरफ्तारी हुई है। लोगों का दावा है कि पुलिस पीड़ित पत्रकारों को ही परेशान कर रही है, जबकि हमलावर खुले में घूम रहे हैं।

‘मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग’ पर याचिका लेकर पहुँचा वकील निजाम पाशा तो सुप्रीम कोर्ट ने दागा सवाल, कहा – सेलेक्टिव मत बनो; ‘कन्हैया लाल तेली का क्या?’

निजाम पाशा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कन्हैया लाल तेली हत्याकांड
आपको जून 2022 की घटना याद होगी, जब राजस्थान के उदयपुर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दर्जी कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर दिया। उनका अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था, वही नूपुर शर्मा जिन पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाया गया और क़तर तक ने जिनके बयान पर आपत्ति जताई और भाजपा को अपने प्रवक्ता को निलंबित करना पड़ा। हालाँकि, नूपुर शर्मा शिवलिंग का अपमान किए जाने के बाद वही कह रही थीं जो इस्लामी किताबों में लिखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट में उदयपुर के इस हत्याकांड के मामले का जिक्र आया है। असल में देश की सर्वोच्च अदालत मंगलवार (16 अप्रैल, 2024) को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अल्पसंख्यकों के खिलाफ मॉब लिंचिंग के अपराध बढ़ने का दावा करते हुए गोरक्षकों पर निशाना साधा गया था और तथाकथित पीड़ितों के लिए त्वरित वित्तीय मदद की व्यवस्था की माँग की गई थी। जस्टिस BR गवई, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस संदीप मेहता ने कन्हैया लाल तेली हत्याकांड का जिक्र करते हुए याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वो ऐसे मामलों को लेकर वो सेलेक्टिव न बनें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राजस्थान के टेलर का क्या? कन्हैया लाल, जिनकी हत्या कर दी गई।” अधिवक्ता निजाम पाशा ये याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। गुजरात सरकार की तरफ से पेश हुईं वकील अर्चना पाठक दवे ने कहा कि याचिका में सिर्फ मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग की बात है, जबकि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है सबको सुरक्षा देना। जस्टिस गवई ने पाशा से कहा कि आप कोर्ट में क्या कह रहे हैं इसे लेकर सतर्क रहें। याचिका में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हत्या की वारदातें बढ़ने का दावा किया गया था।

 वकील निजाम पाशा ने इस दौरान मध्य प्रदेश और हरियाणा से भी एकाध मामले उठा-उठा कर कोर्ट का ध्यान खींचने की कोशिश की। ये वही वकील है, जो ‘लव जिहाद’ की कलई खोलने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को ऑडियो-विजुअल प्रोपेगंडा बताते हुए इस पर बैन लगाने की माँग लेकर सुप्रीम कोर्ट गया था। इतना ही नहीं, बुर्का-हिजाब के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में उसने कुरान का हवाला देते हुए कहा था कि इसे पहनने वाली महिलाओं से छेड़खानी करने वाले डरते हैं और ये समझते हैं कि ये एक मजबूत महिला है, इसका समुदाय इसके पीछे खड़ा है। निजाम पाशा ज्ञानवापी सर्वे के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट गया था।


पश्चिम बंगाल : Mob lynching :साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा, भगवा वस्त्रों को पैरों से रोंडा: उनसे मिले BJP सांसद, राम मंदिर के पुजारी बोले – ममता बनर्जी है ‘मुमताज खान’

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा (बाएँ), BJP सांसद से मुलाकात के दौरान पीड़ित साधु (दाएँ)
अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार की चूलें हिला दी थीं। पुलिस चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखती रही और ये घटना हो गई। विषम परिस्थितियों के बावजूद मुस्कुराते हुए साधु की तस्वीर लोगों के जेहन में कैद हो गई। अब पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से भीड़ ने कुछ इसी तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की है। वहाँ साधुओं को नग्न कर के उन्हें मारा-पीटा गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में साधुओं के साथ पालघर लिचिंग जैसा वाकया सामने आया है। साधुओं के साथ ना सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें नंगा किया गया, उनकी जटाएँ खींची गईं, उनके गेरुआ वस्त्र को रौंदा गया और डंडों से उनकी पिटाई की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 30 सेकेंड के इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। बंगाल बचाने का आह्वान करते हुए मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू होना अपराध हो गया है।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में जिन साधुओं के साथ क्रूरता की गई, उनमें से एक मधुर गोस्वामी ने अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने बताया कि साधुओं का दल गंगासागर के लिए जा रहा है, रास्ते में पुरुलिया में अचानक गाड़ी को रोका गया। मधुर गोस्वामी ने बताया कि उनलोगों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, गाड़ी को भी तोड़-फोड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा। साधु ने बताया कि वहाँ 200-300 के करीब लोग थे, बेहोश हो जाने के कारण उन्हें ठीक से याद नहीं।

बता दें कि भीड़ ने साधुओं पर लड़कियों को लेकर भागने का आरोप लगाया था। इस पर पीड़ित मधुर गोस्वामी ने कहा, “बाद में वो भी बेटियाँ आईं और हमसे माफ़ी माँगने लगीं। हमने कहा कि हमसे ही कोई पाप हुआ जो हमें ये दंड भुगतना पड़ा।” ‘आप क्या चाहते हैं?’ वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि वो कुछ नहीं चाहते हैं, कोई सज़ा नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो गंगासागर भी नहीं जाएँगे क्योंकि उनकी गाड़ी टूट गई है। साथ ही बताया कि अब वो अपने आश्रम को लौट रहे हैं।

वहीं पुरुलिया से लोकसभा सांसद और राज्य में भाजपा के जनरल सेक्रेटरी ज्योतिर्मय सिंह महतो ने इन साधुओं से मुलाकात कर के उन्हें सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने पीड़ित साधुओं से बातचीत कर के जाना कि उनके साथ क्या-क्या हुआ। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी की भी व्यवस्था कराई। भाजपा के IT सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी TMC का गुंडा अनवर शेख का इस हमले में हाथ है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस में ‘सिविक वालंटियर’ भी है।

वहीं अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भी इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वहाँ की CM का नाम ममता बनर्जी नहीं बल्कि ‘मुमताज खान’ है जो भगवा रंग देखते ही भड़क जाती हैं। उन्होंने कहा कि वेस्ट बंगाल में हो रही हिन्दू विरोधी घटनाओं के पीछे वहाँ की मुख्यमंत्री का ही हाथ है। उन्होंने इस दौरान रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला और दुर्गा पूजा के पंडालों पर हमले का मामला भी उठाया।

सत्येंद्र दास ने कहा कि साधुओं के भगवा वस्त्र देख कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को और भी क्रोध आ जाता है, इसीलिए वो उन पर हमले कराती हैं। बता दें कि साधुओं से मारपीट के मामले में अब तक 12 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बता दें कि साधुओं ने रास्ते में लड़कियों से रास्ता पूछा था, जिसके बाद ये घटना हुई। वो मकर संक्रांति स्नान में हिस्सा लेने गंगासागर जा रहे थे। पुलिस ने भी माना है कि साधु रास्ता भटक गए थे और इसीलिए उन्होंने रास्ता पूछा था।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुकांता मजूमदार ने भी कहा कि साधुओं को निर्वस्त्र कर के उन्हें TMC के गुंडों द्वारा पीटा गया, जो पालघर त्रासदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में हिन्दू होना अपराध है, जबकि शाहजहाँ जैसों को सुरक्षा मिलती है। संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख ने अपने गुर्गों के साथ ED अधिकारियों की हत्या का प्रयास किया था। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘पालघर पार्ट 2’ करार दिया है।

इराक : बाइक रेस देखने पहुँची लड़की पर टूटे इस्लामी कट्टरपंथी, घेरकर लात-घूँसों से मारा

इराक में बाइक रेस देखने गई लड़की पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने किया हमला (साभार: वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
इराक में हुए बाइक रेस इवेंट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। दावा है कि यहाँ छोटे कपड़े पहनकर पहुँची एक लड़की को देख कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उस पर हमला किया। लड़की की उम्र सिर्फ 17 साल है। भीड़ ने उसे लात-घूँसों से मारा है। यह घटना 30 दिसंबर 2022 की है। इस मामले में पुलिस ने 16 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, लड़की पर यह हमला इराक के कुर्दिस्तान (Iraqi Kurdistan) में सुलेमानियाह (Sulaymaniyah) शहर में हुआ। बताया जा रहा है कि लड़की बाइक रेस देखने गई थी, जहाँ महिलाओं के न आने की माँग गई थी। वीडियो देखने के बाद लोगों में काफी आक्रोश है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि लड़की ने ब्राउन कलर का एक टॉप, कार्डिगन और एक स्कर्ट पहनी हुई है। वह तेज कदमों से भीड़ से दूर भागती नजर आ रही है। लेकिन बाइक रेस इवेंट में सैकड़ों कट्टरपंथी मुस्लिम इराकी लड़की को देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं। उसका पीछा कर रहे हैं। इस दौरान लड़की काफी डरी हुई लग रही है। वह वहाँ से भागने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। एक शख्स उसे पीछे से लात मारते हुए भी दिख रहा है। इस बीच उसे बचाने के लिए बाइक से एक लड़का आता है और अपनी जान पर खेलकर उसे उन दरिंदों से बचा कर ले जाता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन लोगों ने लड़की का अपमान किया, उसको पीटा, जिससे उसे थोड़ी बहुत चोटें भी आईं। वहीं, उसकी ओर से बीच-बचाव करने वाले एक व्यक्ति को चाकू मार दिया गया।

सुलेमानियाह के पुलिस प्रमुख सरकावत अहमद ने कहा कि हमले में शामिल 16 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार ने एक बयान जारी कर इस हमले की निंदा की और इसे घृणित बताया। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह सुलेमानियाह प्रांत में एक और हमला हुआ। वहीं, प्रवक्ता जोतियार आदिल ने कहा, “ये घटनाएँ अस्वीकार्य हैं।”

कुर्दिस्तान के ड्रॉ मीडिया के अनुसार, पुरुषों ने माँग की थी कि बाइक रेस कार्यक्रम से महिलाओं को बाहर रखा जाए। लड़की पर हमला करने वालों का कहना है कि उसके कपड़ों की वजह से उनका और बाइकर्स का ध्यान भटक रहा था। लड़कियों को इस तरह के शो में नहीं आना चाहिए, क्योंकि उनके होने से लोगों का ध्यान शो की बजाए उन पर होता है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स द्वारा शेयर की गई इस वीडियो पर देश के वरिष्ठ नेताओं ने भी कमेंट किया है। कुर्दिस्तान संसद की स्पीकर रेवाज फाक ने इसे मूर्खतापूर्ण हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला हमारे देश की महिलाओं के खिलाफ हो रहे बर्बर हमलों की कहानी बयाँ कर रहा है।

रेवाज ने ट्वीट किया, “किसी सामान्य व्यक्ति की तरह केवल एक रेस देखने की इच्छा रखने वाली लड़की पर इन पुरुष दरिंदों द्वारा किया गया बेहूदा हमला हमारी महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल किए गए एक बर्बर नरैटिव का परिणाम है। इस बर्बरता से जो समाज या सत्ता नहीं जागी, उसे शीघ्र मृत्यु की प्रतीक्षा करनी होगी।”

आखिर क्यों आफताब ने सर्च किया था साल 2010 का अनुपमा गुलाटी हत्याकांड केस?


श्रद्धा वालकर मामले में एक-एक करके खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को अब पता चला है कि आरोपी आफताब ने सनसनीखेज अनुपमा गुलाटी हत्याकांड के बारे में इंटरनेट पर खोज की थी, जिसने 2010 में देहरादून को हिला कर रख दिया था। वैसे नैना साहनी तंदूर कांड ने भी देश को झंझोर दिया था। 

नवंबर 17, 2022 को पुलिस द्वारा नार्को टेस्ट की मांग मांगने पर जब मजिस्ट्रेट द्वारा आफताब  से इस टेस्ट की जानकारी के बारे में पूछने पर कहना 'हाँ जानता हूँ', जो साबित करता है कि आफताब ने किसी अनजाने, पागलपन या आवेश में किया है, बल्कि बहुत ही सुनियोजित तरीके से घिनौने काम को अंजाम दिया। टीवी चर्चाओं कानून विशेषज्ञों ने लाश को धोने के कारणों पर प्रकाश 

इस घिनौने प्रकरण के चलते देश को छद्दम धर्म-निरपेक्षों के दोगलेपन को देख उन्हें दरकिनार करना चाहिए। अख़लाक़ आदि मुद्दों पर सियापा करने वाले सब गायब है,क्यों? उनसे पूछा जाए क्यों धर्म की बजाए मजहब देख चीखते-चिल्लाते हो? ना ही कोई award vapasi, not in my name, mob lynching आदि जितने भी गैंगस्टर हैं किसी की आवाज़ नहीं निकल रही, कहाँ है?      

आफताब पूनावाला ने पहले कैसे श्रद्धा का गला घोंटकर हत्या की और फिर उसके शरीर को 35 टुकड़ों में काटकर राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में फेंक दिया, यह भी 12 साल पुराने हत्या के मामले में किए गए खुलासे से काफी मिलता-जुलता है। अनुपमा गुलाटी की उनके पति राजेश गुलाटी ने 17 अक्टूबर, 2010 को हत्या कर दी थी। अनुपमा के 72 टुकड़े किए थे और एक-एक कर के टुकडो को फेंका था।

दोनों ही मामलों में हत्यारों ने न केवल शरीर को काटने के लिए आरी का इस्तेमाल किया बल्कि टुकड़ों और दुर्गंध को छिपाने के लिए फ्रिज या डीप फ्रीजर का भी इस्तेमाल किया। जिस तरह आफताब आधी रात के बाद छतरपुर के घने जंगलों में में शवों को ठिकाने लगाने जाता रहा, उसी तरह अनुपमा गुलाटी का पति राजेश गुलाटी राजपुर रोड स्थित मसूरी डायवर्जन पर नाले में डालने के लिए कई दिनों तक जाता रहा।

जानकारी के मुताबिक, राजेश गुलाटी अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते समय शरीर के टुकड़ों को साथ ले जाते थे और उन्हें मसूरी-देहरादून रोड के किनारे जंगलों में फेंक देते थे। श्रद्धा के मामले में आफताब ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह शरीर के अंगों को छिपाने के लिए अमेरिकी क्राइम शो ‘डेक्सटर’ से प्रेरित था। अनुपमा के मामले में भी उनके पति राजेश भी एक विदेशी शो से प्रेरित थे।

दोनों ही मामलों में हत्यारे इतने शातिर थे कि महीनों तक अपने किसी पड़ोसी को इस जघन्य अपराध की भनक तक नहीं लगने दी। अनुपमा गुलाटी के पति ने उनके परिवार और दोस्तों को उनकी मेल आईडी से मैसेज भेजकर गुमराह किया। आफताब हफ्तों तक श्रद्धा वालकर के सोशल मीडिया स्टेटस को अपडेट करते रहे।

अनुपमा की हत्या 17 अक्टूबर, 2010 को हुई थी, लेकिन यह 12 दिसंबर, 2010 को सामने आया। यह तब सामने आया जब उसके भाई ने कई दिनों तक अपनी बहन से संपर्क नहीं हो पाने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। श्रद्धा वालकर के मामले में, एक दोस्त ने भाई को बताया कि उसका फोन नहीं लग रहा था, जिसके बाद उसके पिता ने पुलिस से संपर्क किया और गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अनुपमा गुलाटी के पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

करीब छह महीने पहले दिल्ली के महरौली इलाके में अपने लिव-इन पार्टनर द्वारा श्रद्धा वाकर की हत्या कर दी गई थी। बहस के दौरान आफताब ने श्रद्धा का गला दबाकर हत्या कर दी और उसके शरीर के 35 टुकड़े कर दिए। मुंबई निवासी को आज अदालत में पेश किया जाएगा। आफताब पोनावाला के कॉलेज के दोस्त आशिक दोसानी के साथ हाल ही में टेलीफोन पर बातचीत में आफताब के निजी जीवन पर प्रकाश डाला गया है।

दोसानी के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि आफताब ने व्यवस्था के तहत किराए का फ्लैट लेने के लिए उनकी जानकारी का फायदा उठाया और कोविड लॉकडाउन के बाद से या श्रद्धा से मिलने के समय से ही उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

दोसानी ने यह भी कहा कि आफताब द्वारा श्रद्धा की हत्या के बारे में जानकर वह स्तब्ध रह गए। आफताब और श्रद्धा 2019 में बंबल के जरिए मिले और प्यार हो गया। उसके पिता रिश्ते के खिलाफ थे और कई महीनों से उसके संपर्क में नहीं थे। हिमाचल प्रदेश में इस जोड़ी की मुलाकात बद्री नाम के शख्स से हुई।। पुलिस द्वारा युवक की तलाश की जा रही है।

क्या अनुपमा गुलाटी केस 

दिल्ली में बेटे अमन द्वारा पिता संदेश अग्रवाल की हत्या कर शव के 50 टुकड़े करने के मामले ने ठीक 8 साल पहले वर्ष 2010 में हुए देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड की याद दिला दी है। दिल्ली के मामले में जहां अमन ने पहले पिता संदेश अग्रवाल को मारा फिर पुलिस से बचने के लिए शव के 50 टुकड़े किए फिर उन्हें 4 बैग में भरकर ठिकाने लगाने जा रहा था, तभी पुलिस ने धर दबोचा। इससे मिलता-जुलता देहरादून का अनुपमा गुलाटी हत्याकांड भी है।

देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जिसमें पति राजेश गुलाटी ने पत्नी अनुपमा की हत्या के बाद उसके शरीर के 72 टुकड़े किए थे। दोनों ही मामलों में हत्या के बाद शव के टुकड़े करने का मकसद अपना अपराध छिपाना था।

मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली अनुपमा की हत्या के तकरीबन 2 महीने बाद यानी 12 दिसंबर 2010 को देहरादून के कैंट क्षेत्र के प्रकाश नगर में यह वारदात सामने आई थी। इसमें मूलरूप से दिल्ली के ही रहने वाले सत्य निकेतन इलाके के निवासी राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा की हत्या कर दी थी।

झगड़ा होने पर राजेश ने अनुपमा का मार डाला

राजेश के मुताबिक, 17 अक्टूबर 2010 को अनुपमा से झगड़ा होने के बाद उसने उसकी गला घोंट कर हत्या कर दी। इसके बाद स्टोन कटर और आरी से शव के 72 टुकड़े कर डाले। शव के टुकड़ों को उसने घर के अंदर डीप फ्रीजर में दो महीने तक छिपाए रखा। दिल दहला देने वाली इस वारदात को देहरादून (उत्तराखंड) के लोग डीप फ्रीजर कांड के नाम से भी जानते हैं।

कैसे हुआ मर्डर का खुलासा

दरअसल, देहरादून में राजेश के साथ पत्नी अनुपमा गुलाटी और दो बच्चे भी रहते थे, जबकि अनुपमा का मायका दिल्ली के नेताजी नगर में था। ससुराल में रहने के दौरान अनुपमा की अक्सर दिल्ली में अपने मां-बाप से बातचीत हो जाया करती थी। इस बीच 17 अक्टूबर, 2010 के बाद जब मायके पक्ष का इस दौरान अनुपमा से संपर्क नहीं हुआ, तो उन्हें अपनी बेटी की चिंता होने लगी।

यही वजह थी कि 11 दिसंबर, 2010 को अनुपमा का भाई सिद्धांत प्रधान बहन के प्रकाश नगर स्थित घर पहुंचा। वह हैरान इस बात को लेकर हुआ कि लेकिन राजेश ने उसे घर में ही नहीं घुसने दिया। इसके बाद अनुपमा के भाई ने पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो डीप फ्रीजर से अनुपमा गुलाटी की लाश के टुकड़े मिले।

चार महीने की जांच के बाद 10 मार्च 2011 को पुलिस ने हत्या के आरोपी राजेश गुलाटी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। लगातार कई सालों तक चले मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त राजेश गुलाटी को पत्नी अनुपमा गुलाटी की हत्या का दोषी करार दिया। देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में सात साल बाद दोषी करार दिए गए राजेश गुलाटी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

दलित श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के मजहब पर क्यों डाला जा रहा पर्दा?

दिल्ली में श्रद्धा के कातिल आफताब के मुस्लिम की बजाए पारसी होने की अफवाह फैलाई जा रही (चित्र साभार: इंस्टाग्राम)
दिल्ली पुलिस ने शनिवार (12 नवंबर, 2022) को श्रद्धा नाम की दलित लड़की की हत्या और लाश के 35 टुकड़े करने के आरोप में आफ़ताब को गिरफ्तार किया है। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया के एक खास वर्ग ने आफताब के मज़हब को छिपाने की कोशिश शुरू कर दी। उस समूह ने यह अफवाह उड़ानी शुरू कर दी कि श्रद्धा का कातिल आफताब मुस्लिम नहीं बल्कि पारसी है।

देश की समस्त हिन्दू लड़कियों को मोहब्बत करने पहले अपनी सहेलियों, माता-पिता अथवा भाई से जरूर चर्चा करनी चाहिए। हालांकि पहले भी अनेक हिन्दू लड़कियों ने मुस्लिम धर्म और मुस्लिम लड़कियों ने हिन्दू धर्म में शादी की है, बहुत खुशहाली में जीवनलीला का आनंद लिया। लेकिन वह बिता हुआ कल है, वर्तमान में जिस अमीर खान को अपना हीरो मानती हो, उसका क्या कहना है कि "मेरी पत्नी हिन्दू होगी, लेकिन हिन्दू", इस बात की गहराई में जाने की जरुरत है। इस पर लेख भी प्रकाशित कर चूका हूँ। (नीचे दिए लिंक पर क्लिक करिए) आज के माहौल में और कल में बहुत अंतर आ गया है। हिन्दू महिला जगत को अपमानित करने का जो काम मुगलों ने वही काम आज love jehad के नाम पर किया जा रहा है। इतिहास कभी लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है। इन ठरकी जेहादियों के लिए हर महिला को रंग कुमारी और किरण देवी बनना होगा, जिन्होंने अकबर जैसे बादशाह को पैरों में सिर रगड़ने कर भीख मांगने को मजबूर कर दिया था। (नीचे दिए लिंक पर क्लिक करिये)

My wives may be Hindu but my kids will always follow only Islam: Aamir Khan

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Know more about Love Jihad O Hindu women, why do you fall prey into the 'Love Net' of the Muslims? Many Khans in Bollywood had married Hindu...

बादशाह अकबर की जूतों से क्यों हुई पिटाई?: कौन थी किरण देवी जिससे अय्याश अकबर ने ज़िंदगी की भीख मां

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बादशाह अकबर की जूतों से क्यों हुई पिटाई?: कौन थी किरण देवी जिससे अय्याश अकबर ने ज़िंदगी की भीख मां

दूसरे, दलित जाति के नाम पर सियासत की दुकान चलाने वाले क्यों खामोश हैं? लड़का हिन्दू है या मुसलमान इतनी दरिंदगी करने वाला न हिन्दू है न मुसलमान, किसी भी सूरत में बचाव करना अति शर्मनाक होगा। दिल्ली पुलिस का साथ देना चाहिए। आपने देख रहे हैं कोई mob lynching और मोमबत्ती गैंग सब खामोश हैं, उनको डर है कहीं वोटबैंक न खिसक जाए। अगर स्थिति विपरीत होती, देखिए क्या पिकनिक बन रही होती।   

इस नैरेटिव को भी सेट किया जाने लगा कि आफ़ताब को इस्लाम मजहब से जुड़ा बता कर मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जो लोग इस अति गंभीर मसले को मुसलमान और पारसी के जाल में फंसा कर भटकाने की बात कर रहे हैं, नहीं भूलना चाहिए कि फिरोज खान जहांगीर एक पारसी मुसलमान थे, इंदिरा गाँधी से निकाह होने पर मैमुना बेगम बनाया गया था, लेकिन कब मैमुना इंदिरा बन गयी। फिरोज खान को दफनाया जाता है, लेकिन इंदिरा गाँधी को सनातनी रिवाज के अनुसार अग्नि के सुपुर्द किया जाता है। 

भ्रम फैलाने की कोशिश

‘मियाँ ज़ालिक (@XunizXan)’ नाम के हैंडल ने भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला को Quote करते हुए लिखा, “वो तेरी बिरादरी का है।” बता दें कि शहजाद पारसी समुदाय से ही आते हैं।
लगभग इसी प्रकार का कमेंट सईद मोहम्मद ने भी @Syed5056 नाम के हैंडल से किया है। उन्होंने लिखा, “लड़के का नाम आफ़ताब पूनावाला है जो पारसी है न कि मुस्लिम। इसे कुछ लोग हिन्दू-मुस्लिम का रंग दे रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है।”
एक अन्य यूजर मोहम्मद मीराज ने भी आफ़ताब के पारसी होने का दावा किया है।

आफ़ताब ने ही खुद को बताया था मुस्लिम

अक्सर ये देखने को मिलता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग आरोपित के अपने मज़हब और पीड़ित के हिन्दू होने के मौकों पर मामले को उलझाने का प्रयास करते हैं। जबकि, सच्चाई इस से थोड़ा अलग होती है। आफ़ताब की ही साल 2014 में की गई एक पोस्ट में उसने खुद के मुस्लिम होने की बात कबूली है। आफताब का इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल ‘@thehungrychokro’ नाम से है। 
इंस्टाग्राम पर ‘@zloymom’ नाम के हैंडल ने साल 2014 में आफताब का मज़हब पूछा था। उस पोस्ट के जवाब में भी आफताब ने खुद को मुस्लिम बताया था।
                                                 चित्र साभार- आफताब के इंस्टाग्राम कमेंट
ऊपर दिए तमाम सबूतों से जाहिर है कि श्रद्धा का कातिल आफताब इस्लाम मजहब का है। इसके अतिरिक्त मृतका के पिता द्वारा पुलिस में दर्ज FIR में भी आरोपित को मुस्लिम मज़हब का बताया गया है।
साल 2019 में मुंबई के कॉल सेंटर में एक साथ काम करने के दौरान आफ़ताब और श्रद्धा लिव इन रिलेशन में रहना शुरू कर दिए थे। बाद में श्रद्धा ने आफताब पर शादी का दबाव बनाया। हालंकि इसके लिए मृतका के परिजन तैयार नहीं थे। बाद में सबको छोड़ कर श्रद्धा आफताब के साथ दिल्ली में रहने चली आई। यहाँ आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा का गला दबा कर मार डाला और लाश के 35 टुकड़े कर के 18 दिनों में ठिकाने लगा दिया। नवम्बर 2022 में श्रद्धा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।