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अहमदाबाद : सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्र की चाकू मारकर की हत्या, स्कूल प्रबंधन और पुलिस पर उठे सवाल: न एंबुलेंस बुलाई, न परिवार को किया रिपोर्ट, क्यों?

                                                                                                       (फोटो साभार - ऑपइंडिया गुजराती)
आज मीडिया के सामने सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह लग रहा है कि अहमदाबाद के 
सेवेंथ डे स्कूल में हो रहे विरोध का मुख्य आरोपी के मजहब क्यों छुपा रहा है? मीडिया कौन-सी सियासत खेल रहा है? मीडिया से ज्यादा खुलासे तो सोशल मीडिया पर हो रहे, जिसका किसी भी तरफ से खंडन नहीं किया जा रहा है। अगर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इस दुर्घटना को अंजाम नहीं दिया होता और स्कूल की लापरवाही नहीं हुई होती, शायद इतना हंगामा नहीं होता। मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता था सियासतखोरों की तरह आज मीडिया भी अपने सिद्धांत से भटक चुका है। जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। क्यों नहीं स्कूल की लापरवाही के लिए तुरंत स्कूल को बंद कर किया जा रहा है? क्यों नहीं क़त्ल होने पर मृतक छात्र के घर वालों को सूचित किया? क्यों नहीं तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गयी? क्या स्कूल प्रिंसिपल इस लापरवाही के लिए दोषी करार कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए?       

अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने एक हिंदू छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद स्कूल में भारी संख्या में अभिभावक और हिंदू संगठनों के लोग पहुँचे और गुस्सा जताया।

हालात बिगड़ते देख पुलिस बल तैनात करना पड़ा। मृतक छात्र के परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में ही उसका आठवीं कक्षा के कुछ छात्रों से मामूली बात पर झगड़ा हुआ था।

मृतक छात्र दसवीं कक्षा में पढ़ता था। मंगलवार (19 अगस्त 2025) को आरोपित छात्र स्कूल में उसके पास आए और चाकू मार दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए।

स्कूल ने समय पर नहीं की कार्यवाही

जानकारी के मुताबिक, मृतक छात्र के दादा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनका पोता स्कूल से छुट्टी के बाद सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, तभी एक मुस्लिम छात्र से उसका झगड़ा हुआ था।

बाद में उस छात्र ने सॉरी कह दिया और मामला शांत हो गया। लेकिन घटना वाले दिन आठ-दस लड़के चेहरा ढक कर आए और उनके पोते पर चाकू से हमला कर दिया। दादा का आरोप है कि चाकू लगने के बाद भी स्कूल ने न तो उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाया और न ही एम्बुलेंस को खबर दी।

परिवार के पहुँचने पर ही छात्र को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने स्कूल की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए कि आखिर चाकू जैसे हथियार लेकर लड़के स्कूल में कैसे घुस आए और सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे।

मृतक के दादा ने बताया कि चाकू मारने वाले एक लड़के को पुलिस ने उसी रात शाह आलम इलाके से पकड़ लिया और तुरंत FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में मुस्लिम छात्र अक्सर उनके पोते को परेशान करते थे। यहाँ तक कि वे मटन की सब्जी को पनीर बताकर उसे खिलाने की कोशिश करते थे, जबकि उनका परिवार शाकाहारी है।

मृतक छात्र के कुछ सहपाठियों ने बताया कि स्कूल में असामाजिक तत्वों का आतंक फैला हुआ है। उनका कहना है कि आरोपित अक्सर निचली कक्षाओं के बच्चों का गला दबाते हैं और उन्हें चाकू दिखाकर डराते-धमकाते हैं। मृतक छात्र के माता-पिता ने भी इस बारे में दो महीने पहले स्कूल में शिकायत की थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

गुस्साए अभिभावकों ने कहा- यहाँ हिंदू-मुस्लिम कहाँ पढ़ेंगे? 

स्कूल के बाहर जमा गुस्साए अभिभावकों ने बताया कि यहाँ पहले भी कई शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना था कि मुस्लिम छात्रों के उत्पीड़न के कारण लोग पूछ रहे हैं “यहाँ हिंदू कहाँ पढ़ेंगे, मुसलमान कहाँ पढ़ेंगे?” अभिभावकों की बस एक ही माँग है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

एक महिला ने गंभीर आरोप लगाया कि स्कूल में पहले भी शराब और ड्रग्स पकड़े गए थे, लेकिन पैसे लेकर मामले दबा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस स्कूल में अगर पैसा हो, तो कुछ भी हो सकता है।

एक अन्य महिला ने बताया कि दो महीने पहले मुस्लिम छात्रों ने उसके बेटे से झगड़ा किया था। उस समय भी स्कूल ने केवल अभिभावकों को बुलाकर मामला सुलझा दिया, लेकिन किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं की।

अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि घायल बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया गया। उनका कहना था कि अगर एम्बुलेंस की व्यवस्था होती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

स्कूल पर ताला लगा देना चाहिए: एबीवीपी

सिंधी समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर न्याय की माँग करने लगे। सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष कमल मेहतानी ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।

एक छोटी सी बात पर बच्चे को चाकू मार दिया गया, यह किसी भी छात्र के साथ हो सकता है। उन्होंने माँग की कि आरोपितों को तुरंत पकड़ा जाए, उन्हें सख्त सजा मिले और स्कूल प्रबंधन की भी जिम्मेदारी तय हो।

उन्होंने कहा कि स्कूल का काम सिर्फ फीस वसूलना नहीं है, बच्चों की सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है। एबीवीपी नेताओं ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब लाखों रुपए फीस लेने के बाद भी छात्र सुरक्षित नहीं हैं और असामाजिक तत्व स्कूल में चाकू लेकर घूम रहे हैं, तो ऐसे स्कूल पर ताला लगा दिया जाना चाहिए।

मोदी जी रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश में कुकुरमुत्ते के तरह निकल रहे जेहादियों पर ब्रहमोस कब? मीडियाकर्मियों पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के 13 मामले : दिल्ली… कर्नाटक… केरल… झारखंड या हो यूपी-उत्तराखंड, मुस्लिम भीड़ बनाती रही है हिंदू पत्रकारों को निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है बहुत अच्छी बात है। पाकिस्तान में आतंकियों के अड्डों का पता लगाया जा सकता है लेकिन देश कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे जेहादियों या कहा जाये कि भारत में ही पल रहे आतंकियों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही? देश में ही पल रहे ये जेहादी पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों से ज्यादा खतरनाक है। अगर इन पर कार्यवाही नहीं की गयी पाकिस्तान की बजाये भारत में जगह-जगह बने पाकिस्तान से लड़ना पड़ेगा। इन जेहादियों पर कार्यवाही करने के साथ-साथ इनके समर्थकों और आकाओं पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। Victim Card खेलने वालों-बच्चों से लेकर महिलाओं तक-पर और भी सख्ती से पेश आनी की जरुरत है जो कुछ रुपयों की खातिर हमले कर माहौल ख़राब कर रहे हैं। इन जेहादियों के आगे तो कई बार तो पुलिस भी बेबस हो जाती है। पुलिस वालों का भी अपना परिवार होता है। भारत में जितने भी संवेदनशील इलाके हैं सभी में टियर गैस और blind firing के आर्डर के पुलिस को तैनात करना चाहिए। ताकि कोई जेहादी समर्थक यह न कहने पर कि बाहरी लोग थे।    
दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और कैमरामैन श्याम पर इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। बुर्का पहने महिलाओं ने न सिर्फ सुप्रिया को पीटा बल्कि उनके बाल भी खींचे।

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू पत्रकारों पर हमले की ये घटना ना तो पहली बार हुई है, ना ही इसमें कोई बात ऐसी है, जिसके चलते इसे नई घटना का दर्जा दिया जा सकता हो। यूँ तो अनगिनत घटनाएँ ऐसी रही हैं, लेकिन आइए उदाहरण के तौर पर उनमें से 14 घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

सीमापुरी में All India News की पत्रकार सुप्रिया और कैमरामैन श्याम पर मुस्लिम भीड़ का हमला

दिल्ली के सीमापुरी इलाके की बंगाली बस्ती में शुक्रवार (4 जुलाई 2025) की शाम ऑल इंडिया न्यूज़ की पत्रकार सुप्रिया पाठक और उनके कैमरामैन श्याम पर मुस्लिमों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। यह हमला उस समय हुआ जब सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और झुग्गी-झोपड़ी के मुद्दे पर सुप्रिया रिपोर्टिंग करने के लिए तैयार थी और उनके कैमरामैन श्याम बंगाली मार्केट के पास एक मस्जिद के सामने कैमरा लेकर खड़े थे।

मुस्लिम महिलाओं ने सुप्रिया के बाल खींचे, भीड़ ने दोनों को पत्थर और बेल्ट से मारा। इस हमले में सुप्रिया का एक पैर भी टूट गया। हमलावरों ने उनके कैमरा और माइक के साथ-साथ उनका फोन और पर्स भी छीन लिया।

दिल्ली में मुस्लिम भीड़ का हिंदू महिला पत्रकार पर हमला

दिल्ली में बुधवार (2 जुलाई 2025) को एक हिंदू महिला पत्रकार अवैध रुप से रह रहे कुछ मुस्लिमों से बात करने पहुँची थी। इसी बीच मुस्लिमों की भीड़ ने उसे घेर लिया और मारना शुरू कर दिया। कट्टरपंथियों ने महिला पत्रकार पर पत्थरों से हमला किया, जबकि वो केवल रिपोर्टिंग कर रही थी। जब उसने उनके वहाँ अवैध रुप से रहने पर सवाल उठाया तो भीड़ उसे चाकू दिखाकर डराने लगी।

जयपुर में मुस्लिमों के क्षेत्र में रिपोर्टिंग कर रही थी महिला, मुस्लिमों ने सरेआम दी धमकी

राजस्थान के जयपुर में 28 अप्रैल 2025 को एक महिला पत्रकार रिपोर्टिंग करने उस इलाके में पहुँची, जहाँ मुस्लिमों की संख्या हिंदूओं की अपेक्षा अधिक थी। इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने महिला पत्रकार को कैमरा बंद करने के लिए कहा, जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो वे उसे धमकी देकर इलाके से भगाने लगे।

दिल्ली में वक्फ प्रदर्शन कर रही भीड़ का सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों पर हमला

दिल्ली में 17 मार्च 2025 को मुस्लिम प्रदर्शनकारी वक्फ के विरोध में धरनारत थे। अन्य मीडियाकर्मियों की तरह ही सुदर्शन न्यूज के पत्रकारों ने भी वहाँ इकट्ठा हुए मुस्लिमों से इस बारे में सवाल किया। क्योंकि मुस्लिम जवाब ही नही दे पा रहे थे, इसलिए उन्हें पलट कर पत्रकारों पर ही हमला करना ठीक लगा। और तिलमिलाए कट्टरपंथियों ने सुदर्शन न्यूज के जर्नलिस्ट्स पर हमला कर दिया।

नैनीताल के हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का अमर उजाला के पत्रकार पर हमला

नैनीताल के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में बने अवैध मस्जिद और मदरसों को गिराने के उद्देश्य से प्रशासनिक टीम पहुँची हुई थी। इस दौरान यहाँ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे। अवैध होने के बावजूद मस्जिद को ढहाने के फैसले से नाखुश मुस्लिमों ने न सिर्फ प्रशासनिक समूहों से मारपीट की बल्कि पत्रकारों को भी पीटा।

इनमें वे पत्रकार भी शामिल थे, जिन्होंने कभी इन्ही कट्टरपंथियों के समर्थन में खबरें छापी थी। इस हमले में अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र सिंह बिष्ट भी चोटिल हुए थे। यही नहीं मुस्लिमों ने पुलिस स्टेशनों और पेट्रोल पंप को भी जलाने के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी को भी जिंदा जलाने की कोशिश की थी।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में चुन-चुन कर हुआ था हिंदू पत्रकारों पर हमला

उत्तराखंड के हल्द्वानी में फरवरी 2024 की हिंसा में दंगा करने वाले मुस्लिमों ने पुलिस प्रशासन और वहाँ रिपोर्टिंग कर रहे हिंदू पत्रकारों की पहचान कर उनपर हमला किया था। समाचारपत्र अमृत विचार के पत्रकार संजय भी इसमें घायल हुए थे। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि कई दिनों तक वे ICU में भर्ती थे।

लखनऊ में मोनिस और एहसान ने काट दी थी पत्रकार की उंगलियाँ

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 29 अप्रैल 2025 को जाने-माने साहसी पत्रकार कवि तिवारी पर मोहम्मद मोनिस, मोहम्मद एहसान और उसके साथियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। इन मुस्लिम हमलावरों ने कवि तिवारी पर उस वक्त हमला किया, जब वे मंदिर जा रहे थे।

अचानक हुए इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई। हमलावरों ने उन पर चाकू से कई बार गंभीर वार किए, जिसके चलते उनकी उंगलियाँ ही नहीं मुँह भी बुरी तरह से कट गया।

झारखंड में मुस्लिमों ने घंटों तक रोके रखी महिला पत्रकार की कार

झारखंड के पाकुड़ में 18 अक्टूबर 2024 को महिला पत्रकार अर्चना अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर रिपोर्टिंग करने पहुँची थी। जिस समय उसकी कार पाकुड़ से गुजर रही थी। उसी समय मुस्लिमों ने अर्चना के पास पहुँचकर उन्हें धमकी दी। मुस्लिमों ने उनकी कार को रोककर काफी देर हंगामा किया। और उन्हें जाने से रोके रखा। वहाँ किसी तरह अर्चना ने खुद की जान बचाई और निकल पाई।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में महिला पत्रकार के साथ मारपीट

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में 31 मार्च 2024 को मुख्तार अंसारी के निधन के बाद रिपोर्टिंग करने पहुँची महिला पत्रकार अर्चना तिवारी पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। यहाँ अर्चना को घेरने की कोशिश की गई। रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। इस हमले में अर्चना को चोट भी आई।

दैनिक जागरण के पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 10 जुलाई 2024 को दैनिक जागरण के पत्रकार अमित पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने धारदार हथियार से हमला किया था। इसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थी। बड़ी मुश्किल से अमित ने मुस्लिम भीड़ से अपनी जान बचाई थी।

रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ के इशारे के बाद हमला

सुदर्शन न्यूज का एक पत्रकार 31 अगस्त 2023 को रिपोर्टिंग कर रहा था। इसी बीच एक मुस्लिम व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं पत्रकार के ऊपर अपनी गाड़ी चढ़ाने की भी कोशिश की। जिसकी वजह से पत्रकार जमीन पर गिर गया था।

कर्नाटक में गोहत्या का खुलासा करने वाली महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ का हमला

कर्नाटक में हसन जिले के पेंशन मोहल्ले में 5 दिसंबर 2020 को अवैध रूप से गोहत्या करने वाले गिरोह की सच्चाई सामने लाने वाली एक महिला पत्रकार पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। भीड़ में शामिल बुर्काधारी महिलाओं ने महिला पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार तो किया ही उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

केरल में रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ का हमला

केरल के पतनमतिट्टा में 17 अक्टूबर 2018 को सबरीमाला मंदिर पर कवरेज के दौरान रिपब्लिक टीवी की पत्रकार पूजा प्रसन्ना पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। इस बीच इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूजा प्रसन्ना की कार का शीशा तोड़ने की भी कोशिश की।

कर्नाटक में अवैध बूचड़खाने की रिपोर्टिंग करने पर इंडिया टूडे के पत्रकार पर हमला

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपल्या गाँव में 10 अगस्त 2018 को अवैध बूचड़खानों के खिलाफ छापेमारी के दौरान इंडिया टुडे के एक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे इसी बीच मुस्लिम भीड़ ने बूचड़खाने के बाहर पत्रकार और पुलिस की टीम कर हमला कर दिया। यहाँ छापेमारी के बाद 71 बछड़ों को छुड़ाया गया था, वहीं 7 आरोपितों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
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सोचने वाली बात है कि आखिर इस्लामी कट्टरपंथियों की ऐसी कौन सी योजना है, जिसको छिपाने की कोशिश में ये इस निर्ममता पर उतर आते हैं। जब किसी अवैध निर्माण के लिए पत्रकार इनसे सवाल करते हैं और इन मुस्लिमों के पास जवाब नहीं होता, तो ये जानलेवा हमला कर अपने गलत मंसूबों की सच्चाई सामने आने से बचाने में जुट जाते हैं।

उत्तर प्रदेश : 52000 फर्जी सर्टिफिकेट… बांग्लादेशियों-पाकिस्तानियों को बसाने के लिए: रायबरेली के 11 गाँवों में मिला ‘असली’ दिखने वाला जन्म प्रमाण पत्र, मोहम्मद जीशान और रियाज समेत 4 गिरफ्तार

रायबरेली में मिले पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों के 52 हजार से ज्यादा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (चित्र साभार- Newstrack & AFP)
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 18 जुलाई 2024 में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के जन्म प्रमाण पत्रों को बनाने का खुलासा हुआ था, तब इस मामले में जाँच बिठा दी गई थी जो अब पूरी हो चुकी है। कुल 52 हजार से अधिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस फर्जीवाड़े में भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल तक के लोगों के प्रमाण पत्र शामिल हैं। शासन ने इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का ऐलान किया है।

प्रमाण पत्र सिर्फ निरस्त ही नहीं किये जाएं, इन्हें बनवाने वाले नेता और अधिकारियों को भी नामजद किया जाए। क्योकि कोई अधिकारी बिना किसी नेता के संरक्षण मिले बिना इस काम को नहीं कर सकता।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों से सलोन ब्लॉक के कुल 11 गाँव बुरी तरह प्रभावित हैं। इन 11 गाँवों को मिला कर कुल 52,594 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। ये जन्म प्रमाण पत्र बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, केरल व पंजाब राज्यों के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल तक के नागरिकों के नाम पर बनाए गए थे। उप-निदेशक पंचायती राज सास्वत आनंद सिंह ने इन सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।

इसी के साथ जिले के DPRO को भविष्य में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में खास सावधानी बरतने के निर्देश मिले हैं। जाँच में पता चला है कि कई गाँवों में तो जालसाजों ने एक ही दिन के अंदर 500 से लेकर 1000 तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले थे जबकि एक कंप्यूटर से 24 घंटे में 100 प्रमाणपत्र से अधिक नहीं निकल सकते हैं। माना जा रहा है कि एक ही आईडी और पासवर्ड से एक दिन में इतने ज्यादा प्रमाण पत्र बनाने के लिए कई प्रदेशों में बैठे साजिशकर्ताओं ने मिल कर काम किया था।

जिन 11 गाँवों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पाए गए हैं जिसमें सबसे अधिक प्रभावित पाल्हीपुर है। यहाँ 13707 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए हैं। दूसरे नंबर पर नुरुद्दीनपुर है जहाँ मिले प्रमाण पत्रों की संख्या 10151 है। तीसरा नंबर पृथ्वीपुर का है। यहाँ 9393 फर्जी प्रमाण पत्र मिले हैं। इसके अलावा सांडा सैदन में 4897, माधौपुर निनैया में 3746, लहुरेपुर में 3780, गढ़ी इस्लामनगर में 2255, औनानीश में 1665, गोपालपुर उर्फ अनंतपुर में 225 और दुबहन में 2 फर्जी प्रमाण पत्र खोजे गए हैं।

इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित मोहम्मद जीशान है जो रायबरेली के ही सलोन का निवासी है। उसके साथ साजिश में शामिल रियाज, सुहेल खान और वीडीओ विजय सिंह यादव को भी दबोच लिया गया है। मामले की जाँच में ATS के साथ NIA को भी लगाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपितों की मिलीभगत की पड़ताल में जुटी हैं।

मामले का खुलासा तब हुआ जब जुलाई 2024 में कुछ गाँवों की आबादी से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बना डाले गए। शुरुआत में इस साजिश की भनक गाँवों के कई प्रधानों तक को नहीं लगी थी। खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए विजय यादव ने ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस की जाँच में यह आया कि विजय यादव ने अपना सरकारी CUG नंबर जीशान को दे रखा था। इसी नंबर पर हर जन्म प्रमाण को एप्रूवल देने वाली OTP आती थी। 

उत्तर प्रदेश : समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क के मोहल्ले में संभल पुलिस की रेड, महबर और ताजवर के घर से मिले तमंचे: मुल्ला के घर से स्मैक बरामद

संभल में हिंसा के बाद पुलिस की छापेमारी में घरों से बरामद हुए अवैध हथियार और नशीले पदार्थ (साभार- दैनिक भास्कर)
संभल में 24 नवंबर 2024 को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा पुलिस पर किए गए हमले के बाद दंगाइयों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने सोमवार (9 दिसंबर) को सांसद जियाउर्रहमान के मोहल्ले में दबिश दी। दबिश के दौरान अवैध हथियारों के साथ नशीले पदार्थों की भी खेप बरामद हुई है। इस दौरान 36 बाइकों का चालान किया गया और 4 को सीज कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल हिंसा में कार्रवाई के तहत पुलिस ने नखासा थाना क्षेत्र के तिमरदास सराय इलाके में सोमवार को करीब 3 बजे छापेमारी की। इस दौरान 13 घरों की सघन तलाशी ली गई। इनमें से मुल्ला आसिफ के घर से स्मैक की 93 पुड़िया बरामद हुईं। वहीं, ताजवर और महबर के घरों से 315 बोर के तमंचे बरामद किए गए। पुलिस ने महबर को हिरासत में लिया, जो 1999 में हत्या के एक मामले में जेल की सजा काट चुका है।

पुलिस का दावा है कि 315 बोर की गोलियाँ हिंसा के दौरान मारे गए उपद्रवियों के शवों से भी बरामद हुई थीं। फ़िलहाल महबर, मुल्ला आसिफ और ताजवर के घरों में मिले लोगों को पुलिस थाने ले कर गई। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है, और प्रशासन दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कह रहा है।

सपा सांसद जियाउर्रहमान के घर के आगे भी पुलिस ने दो बार पैदल मार्च किया। जिले भर में वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। सोमवार को ही कुल 36 बाइकों का चालान किया गया। इसमें से 4 को सीज कर दिया गया है।

संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि तलाशी अभियान जनपद में बाहरी लोगों की मौजूदगी की सूचना पर चलाया जा रहा है। बाहर से कौन लोग किस वजह से आए हैं इसकी तस्दीक करवाई जा रही है। बकौल SP तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। बरामद सामान सील कर जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

24 नवंबर को संभल की जामा मस्जिद का सर्वे करने के लिए न्यायालय के आदेश पर एक टीम पहुँची थी। इस टीम को मुस्लिम भीड़ घेरने लगी। पुलिस ने भीड़ को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उपद्रवियों ने पत्थरबाजी कर दी। हिंसा में डिप्टी कलेक्टर, DSP और लगभग 2 दर्जन अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने बल प्रयोग कर के भीड़ को तितर-बितर किया था। पूरे मामले की न्यायिक जाँच जारी है।

बहराइच : जहाँ हुई हिंसा वहाँ घरों पर लगे लाल निशान, रिपोर्ट में दावा- सुनियोजित था हिंदुओं पर हमला, अब्दुल हमीद ने कर रखी थी पूरी तैयारी

                     जिस जगह दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हुआ था हमला, वहाँ अब पसरा है सन्नाटा (फोटो: राहुल पाण्डेय)
हिन्दू त्योहारों पर जेहादियों द्वारा होती पत्थरबाज़ी और मौत का तांडव होने का मुख्य कारण है सारी हिन्दू स्वयंसेवी संस्थाओं और साधु-संतों द्वारा कमलेश तिवारी की हत्या को गंभीरता से नहीं लेना है। हिन्दू जेहादियों के मकरजाल में फंस गए। यदि कमलेश की हत्या को गंभीरता से लेकर अपराधियों और इनके समर्थकों की सरकारी सुविधाओं और फांसी देने की मांग को लेकर सड़क पर आये होते, शोभा यात्राओं पर पत्थरबाज़ी नहीं होती। दूसरे, पुलिस और अदालतों को उन जगहों को कम से कम 3 सालों के सील ही नहीं यह पूछना था किसके और कितने रूपए लेकर पत्थर जमा हुए थे। इन जेहादियों द्वारा बेगुनाह, मजलूम और भटक गया आदि victim card खेलना कोई नहीं बात नहीं, जिसे समझने के लिए अली सीना द्वारा लिखित Understanding  Mohammad And Muslim किताब को गंभीरता से पढ़ना ही नहीं बल्कि वितरण करना चाहिए ताकि छद्दम धर्म-निरपेक्षों और कट्टरपंथियों को मुंह तोड़ जवाब दिया जा सके।       

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के महराजगंज कस्बे के हिंसा प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने अब बुलडोजर एक्शन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन ने अवैध रूप से बने घरों पर निशान लगाया था, जहाँ एक्शन हो सकता है। वहीं, इस हिंसा के मामले में जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। बहराइच हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश का पता चला है, जिसमें मुख्य आरोपित अब्दुल हमीद और उसके सहयोगियों ने दहशत फैलाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। अब्दुल हमीद की छत पर पत्थर, ईंटें और कांच की बोतलें जमा थीं। यह हिंसा केवल आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसमें रामगोपाल मिश्रा की हत्या को अंजाम दिया गया था।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई: अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की तैयारी

बहराइच हिंसा के बाद योगी सरकार की ओर से बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बहराइच के महराजगंज कस्बे में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाने की योजना बनाई गई है। गुरुवार को राजस्व और लोक निर्माण विभाग की टीम ने अतिक्रमण चिह्नित कर लिया है। माना जा रहा है कि मुख्य आरोपितों समेत 30-40 मकान ध्वस्तीकरण की जद में आ सकते हैं।
महराजगंज कस्बे के कई दुकानदारों ने सड़क किनारे अतिक्रमण कर रखा है, जिससे रास्ते संकरे हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी अतिक्रमण के कारण शोभायात्रा के दौरान भीड़ और टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई थी। माना जा रहा है कि इस अव्यवस्था के कारण ही बवाल भड़का, जिसमें रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
ग्रामीणों की शिकायत पर कुछ समय पहले ही महसी के विभिन्न कस्बों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। अब प्रतिमा विसर्जन यात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद यह अभियान फिर से शुरू होने की संभावना है।

बहराइच हिंसा की तैयारी पहले से, छत पर मिले ईंट-पत्थर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपितों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। इस दौरान दो मुख्य आरोपितों—मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद तालिब—के साथ पुलिस की मुठभेड़ भी हुई। यह मुठभेड़ बहराइच के नानपारा बायपास पर हुई, जहाँ पुलिस ने आरोपितों को घेर लिया था। पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों आरोपित घायल हो गए। इन आरोपितों को नेपाल भागने की फिराक में पकड़ा गया।

हत्याकांड में इस्तेमाल हथियार बरामद

इस हत्याकांड में उपयोग किए गए हथियारों की भी बरामदगी हुई है। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद भी आरोपितों के इरादे खतरनाक थे। उन्होंने अपने पास एक अवैध असलहा छिपा रखा था ताकि जरूरत पड़ने पर फिर से दहशत फैलाई जा सके। इसका प्रमाण उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग करके दे दिया।
घायल आरोपितों को इलाज के लिए पहले नानपारा सीएचसी ले जाया गया, फिर गंभीर हालत देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया, जहाँ चारों तरफ भारी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात किए गए हैं।
मुठभेड़ के बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें एक पुलिसकर्मी आरोपियों से कहता है कि पुलिस पर हमला करना गलत था। इस पर एक आरोपी कहता है, “अब गलती नहीं करेंगे, हम लोग फायर करके भागना चाह रहे थे।” पुलिसकर्मी ने जवाब दिया, “पहले अपराध किया और फिर दूसरा अपराध कर रहे हो।” आरोपितों ने अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन यह स्पष्ट था कि उनके इरादे बेहद खतरनाक थे।
पुलिस ने आरोपितों के ठिकानों पर छापा मारा और पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों के नाम मोहम्मद फहीन, मोहम्मद तालिब, मोहम्मद सरफराज, मोहम्मद हमीद और मोहम्मद अफजल हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, जो लोग इन आरोपियों को संरक्षण दे रहे थे, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बहराइच में हिंसा की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि हिंसा के जिम्मेदार आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दू नामों से चलते होटल और ढाबों का खुलासा होना शुरू; सूरत में आदिल सलीम नूरानी का चर्चित रेस्टोरेंट "कंसार थाल'; 'चेलिया मुस्लिमों द्वारा हिन्दू नामों से चलने वाले होटल, किसी हिन्दू को नौकरी पर नहीं रखते

सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं यानि कांवर यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले होटलों के मालिकों को अपना नाम बताने पर हंगामा करना छद्दम सेक्युलरिस्ट्स को ही बेनकाब कर रहा है। हिन्दुओं को आंखें खोलनी होंगी कि सेकुलरिज्म के हिन्दुओं के साथ कितना बड़ा धोखा किया जा रहा है। क्या हिन्दुओं के विरुद्ध बहुत गहरा षड़यंत्र चल रहा है, जिसे चौपट करने क्या परमपिता परमेश्वर ने मोदी-योगी को भारतीय राजनीति में पदापर्ण करवाया है। हिन्दुओं को भी रेवड़ियों को त्याग कर इन छद्दम सेक्युलरिस्टों से दूरी बनानी चाहिए। एकतरफा धर्म-निपेक्षता चलाने वालों से होशियार और चौकन्ना रहना चाहिए। ये लोग कभी भी अपनी तिजोरी भरने के लिए हिन्दुओं को संकट में डाल सकते हैं। सनातन को अपमानित करने वालों को अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में वोट देने से परहेज नहीं किया। हिन्दुओं को लालच त्यागना होगा।
केंद्र और राज्य सरकारों को नाम छुपाकर कोई भी व्यापार करने वालों के विरुद्ध कानून लाकर इसे घिनौना अपराध घोषित करना चाहिए। दिल्ली में जवाहर होटल, करीम होटल, नूरी मसाले आदि मुस्लिम नाम से चल रहे हैं, हिन्दू भी खूब खरीदारी करते हैं, लेकिन नाम छुपाकर हिन्दू नाम से व्यापार करना क्या अपराध नहीं।
सूरत में एक बहुत बड़ा गुजराती रेस्टोरेंट है, जिसका नाम है "कंसार थाल"!

2020 तक लोगों को यही पता था कि यह रेस्टोरेंट किसी हिंदू का है, क्योंकि प्रवेश द्वार पर बड़ी सी गणेश जी की पीतल की प्रतिमा रखी थी।
2020 में दो करोड़ के ड्रग्स के साथ आदिल सलीम नूरानी नाम का एक शांतिदूत पकड़ा गया... तब गुजरात के लोगों को पता चला कि अहमदाबाद सूरत और बड़ोदरा में जो "कंसार थाल" के नाम से जो यह बहुत प्रसिद्ध गुजराती रेस्टोरेंट है उसका मालिक ये आदिल सलीम नूरानी है और आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि इसके हर रेस्टोरेंट में प्रवेश करते ही आपको गणेश जी की प्रतिमा नजर आएगी।
"कंसारा" गुजरात में हिंदुओं की एक जाति होती है जिसे शेष भारत के अलग अलग क्षेत्रों में "कसेरा" आदि उपनामों से भी जाना जाता है, जो कि पारंपरिक रूप से विभिन्न धातुओं को मिलाकर एक मिश्र धातु का निर्माण करती है जिसे "कांसा" कहते हैं, उस कांसे को हाथों से ही हथौड़े से पीट-पीटकर "थाली" या अन्य बर्तन बनाती है और उस "थाली" या कांसे के बर्तनों में भोजन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि शास्त्रों में भी "कंसार" अथवा "कसेरे" के द्वारा हाथों से बनाई गई मिश्र धातु "कांसे" की थाली में भोजन करना बहुत लाभप्रद बताया गया है।
"कंसार" एक तरह का पारंपरिक व्यंजन परोसने का पात्र होता है जिसे पारंपरिक रूप से सात्विक भोजन हेतु हिंदू प्रयोग में लाते हैं।
अब यह शांति धूर्त अपने रेस्टोरेंटस का नाम "कसाई थाल"या "हलाल थाल" इत्यादि न रखकर सात्विक सनातनी हिन्दुओं को भरमाने व धर्म भ्रष्ट करने के लिए अब हिंदुओं के नाम पर, हिंदू प्रतीक चिन्हों द्वारा बरगला कर हिंदू खान पान की सुचिता को भंग करने की भावना से अंधेरे में रखते हुए हिंदुओं से ही पैसा कमा रहे हैं।
लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि यह शांति धूर्त वैसे तो मूर्ति पूजा के विरूद्ध होते हैं,
लेकिन जब धंधे की बात आती हो या हिंदुओं को धोखा देने की बात आती हो, तब यह अल तकिया अपनाकर एक छद्म आवरण पहन लेते हैं ताकि हिंदू इनके रेस्टोरेंट में खाना खाने धोखे से आ जाएं ...!!
और धोखा खाते भी है … अपनी पहचान को छुपाकर कोई काम वही करता है जो कुछ अपराध करना चाहता है ..या लोगों को ठगना भ्रमित करना ….
यह अपराध की श्रेणी में होना चाहिए
"चेलिया मुस्लिम" द्वारा हिन्दू नामों से चलने वाले होटल 

आपको राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात के हाइवे पर तमाम ऐसे होटल मिलेंगे जिनका नाम भाग्योदय, तुलसी, बनास, डिनरवेल, अरुणोदय, आदि हिन्दू नाम वाला होगा | और राज्य में भी होगे चैन बहुत गहरी हैं  इन होटलों की चेन जिसमे हजारो होटल है उन्हें गुजरात के बनासकांठा के रहने वाले "चेलिया मुस्लिम" चलाते है ।

.इन होटलों में एक भी हिन्दू को नौकरी नही दी जाती..और इन के रखरखाव से भी पता नहीं लगता कि इनका संचालन किसी मुस्लिम द्वारा किया जा रहा है। चेलिया ग्रुप ऑफ़ होटल्स का हेड ऑफिस अहमदाबाद में है । इनका पूरा खरीद सेंट्रलाइज्ड होता है। ये डाइरेक्ट कोल्डड्रिंक, नमकीन आदि बनाने वाली कम्पनीज के साथ बल्क में डील करते है,.. फिर उसे हर एक होटल में सप्लाई करते है। जहाँ तक सम्भव हो ये खरीदारी मुस्लिम से ही करते है। इनके होटल्स में इनवर्टर, बैटरी, आरओ आदि सप्लाई करने वाला भी मुस्लिम ही होता है। चूँकि ये अपने होटलों का नाम हिन्दू नाम जैसा रखते है और "ओनली वेज" लिखते है। और इनके होटल साफ सुथरे दिखते है .. इसलिए हिन्दू इनके होटलों के तरफ आकर्षित होते है। इनका ये मानना है की हिन्दुओ से पैसा निकालो और उसे मुस्लिमो के बीच लाओ।

इनका पूरा बिजनस फ्रेंचाइजी माडल पर आधारित होता है। इनकी एक सहकारी कमेटी है जो अल्पसंख्यक आयोग में अल्पसंख्यक कमेटी के रूप में रजिस्टर्ड है .. इस कमेटी में देश विदेश के लाखो चेलिया मुस्लिम मेम्बर है और सब अपना अपना योगदान देते है। फिर ये हाइवे पर कोई अच्छा जगह देखकर उसे काफी ऊँची कीमत देकर खरीद लेते है। फिर उस होटल का एक खरीदी बिक्री का एकाउंट बनाते है.. और उस होटल को किसी चेलिया मुस्लिम को चलाने के लिए सौप देते है।

पुरे विश्व के चेलिया मुस्लिम सिर्फ मुहर्रम में अपने गाँव में इकठ्ठे होते है। फिर हर एक होटल के लाभ हानि का हिसाब करते है। इसलिए मुहर्रम के दौरान करीब 20 दिनों तक गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान के हाइवे पर के 90% होटल्स बंद रहते है।

ये बसों के स्टाफ को मुफ्त खाना और बेहद महंगे गिफ्ट देते है ताकि ड्राइवर इनके ही होटल पर बस रोके। और सवारियों से खाने का मोटा पैसा वसूलते हैं। 

.अहमदाबाद के सरखेज में इनका बहुत बड़ा सेंट्रलाइज्ड परचेज डिपो है। खुद का आलू प्याज आदि रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज है। ये सीजन पर सीधे किसानो से बेहद सस्ते दाम पर आलू, प्याज और अदरक आदि खरीद लेते है।

."इकोनोमिक्स टाइम्स अहमदाबाद" में छपे एक रिपोर्ट में इस चेलिया होटल्स की कुल पूंजी इस समय करीब 3000 करोड़ रूपये पहुंच चुकी है। और इनकी कुल परिसम्पत्तियों की कीमत इस समय 10,000 करोड़ रूपये होगी।

.हिन्दुओ के जेब से पैसा निकालकर उसे मुसलमानों में बांटने का ये चेलिया ग्रुप्स ऑफ़ होटल्स बेहद खतरनाक मोडल है।

.दुःख इस बात का है की अभी तक हिन्दू चेलिया मुस्लिमो के इस गंदे खेल को नही समझ सके और इनके होटलों में खाना खाकर इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करते है...या समझिए किसी का ध्यान ही नहीं गया था। और फिर इनका ये पैसा आतंकियों को जाता है। गजवा ऐ हिंद के लिए जाता है‌। इससे बड़ा खतरनाक ये है की इन की मार्केट इतनी मजबूत बन चुकी है। ये किसी हिन्दू के होटल को चलने ही नही देते।

उत्तर प्रदेश : YouTube पर नॉर्मल डिलीवरी सिखाने वाली ‘डॉक्टर’ सलमा का ही अस्पताल निकला फर्जी: जच्चा-बच्चा की मौत, पैथोलॉजी सेंटर सील

    डॉ सलमा नासिर का अस्पताल और पैथोलॉजी सेंटर सीज (फोटो साभार: जागरण/Instagram:Dr Salma Nasir)
यूट्यूब पर डॉ सलमा नासिर नाम की महिला गर्भवती महिलाओं की ‘नॉर्मल डिलीवरी’ पर वीडियो बनाती है। इंस्टाग्राम पर भी सलमा नासिर के 50 हजार से अधिक फॉलोवर्स हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में उसका अस्पताल सील कर दिया गया है। यहाँ जच्चा-बच्चा को गलत खून चढ़ाने से मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासनिक जाँच में सलमा का अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ट्रेंड स्टाफ के चलता पाया गया। यही नहीं, पैथोलॉजी सेंटर भी फर्जी तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसके बाद प्रशासन ने सबकुछ सील कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार (16 जुलाई) को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे डॉ. सलमा नासिर के हेल्थ केयर सेंटर को सील कर दिया । निरीक्षण के दौरान उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने यूट्यूबर और डॉक्टर सलमा नासिर के इस अस्पताल में अवैध लैब भी पाई। दोनों ‘दुकानों’ को सील करने के साथ ही टीम ने मझोला थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित शिकायत भी दर्ज कराई।

16 जुलाई को नोडल अधिकारी वैक्स/उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने रहमत नगर स्थित सलमा नासिर हेल्थ केयर का निरीक्षण किया। क्लीनिक पर जयंतीपुर निवासी आरिफ (18 वर्ष) खून के नमूने ले रहा था। आरिफ 11वीं का छात्र है, जो पिछले दो माह से नमूने एकत्र कर रहा है। इसके अलावा डिंगरपुर निवासी सना खान वहाँ खाना बनाती मिली। निरीक्षण के दौरान आठ बेड, एक एनआईसीयू बेड, एक फोटोथेरेपी मशीन और एक ऑपरेशन थियेटर संचालित पाया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने अधिकारियों को बताया कि डॉ. सलमा नासिर अस्पताल चलाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल में अवैध पैथोलॉजी लैब भी चलती मिली।

अस्पताल के लेटरहेड पर डॉ. मोहम्मद असीम, डीएमएलटी और डॉ. के कुमार, एमडी पैथोलॉजी दोनों का उल्लेख था, लेकिन उनमें से कोई भी अस्पताल में नहीं था। अवैध पैथोलॉजी लैब के अंदर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रक्त संग्रह बैग, एक माइक्रोस्कोप, एक सेंट्रीफ्यूज, एक ब्लड रोलर, एक सेल काउंटर और एक मॉनिटर मिला। जब सीएमओ और उनकी टीम ने निरीक्षण किया तो सलमा नासिर के अस्पताल में दो मरीज भर्ती थे।

नोडल अधिकारी-उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि जाँच के दौरान दवाइयाँ भी पाई गईं। इनमें मल्टीविटामिन, बीटामेथासोन सोडियम फॉस्फेट और रैनिटिडीन आदि शामिल हैं। डॉ. नरेंद्र कुमार ने कहा, “अस्पताल को सील करने के अलावा अस्पताल के संचालक और चिकित्सक के खिलाफ थाना मझोला में मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि संचालक के द्वारा आम लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ एवँ धोखाधड़ी की जा रही है।” उन्होंने बताया कि अस्पताल न तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में पंजीकृत है और न ही उन्होंने क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी के कार्यालय में पंजीकरण से संबंधित कोई रिकॉर्ड जमा किया है। स्वास्थ्य सेवा सुविधा में कोई पेशेवर डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। अस्पताल में आग से सुरक्षा या बायोमेडिकल कचरे के निपटान की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।

बंगाल : ‘खेला होबे’ का खूनी खेल शुरू : BJP नेता को गोली मार सर काटकर ले गए TMC के गुंडे

बीजेपी कार्यकर्ता की टीएमसी के गुंडों ने निर्ममता से की हत्या (फोटो में बाईं तरफ मृतक का भाई)
लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण के मतदान के दिन शनिवार (1 जून 2024) को पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने बताया कि राजनीतिक हत्याओं को कैसे अंजाम दिया जाता है। टीएमसी के नेता और गुंडे बीजेपी कार्यकर्ता के घर पहुँचे, उसे गोली मार दी और फिर उसका गला धड़ से अलग कर दिया और सिर उठाकर ले गए। बीजेपी कार्यकर्ता का शव पड़ा रहा, लोग चीखते रहे, लेकिन टीएमसी के गुंडों का दिल नहीं पसीजा। हत्यारों में कासिम, सोहोज, नसीम, सोबुज, अली, बंडू के साथ ही कई अन्य लोग भी थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात नादिया जिले के चाँदपुर गाँव की है, जहाँ टीएमसी नेता की अगुवाई में 10-12 गुंटे बीजेपी कार्यकर्ता के घर पहुँचे और उसकी हत्या कर दी। मृतक की पहचान हाफिजुल शेख के रूप में हुई है, उसने कुछ समय पहले ही बीजेपी ज्वॉइन की थी। टीएमसी के लोग इससे नाराज थे। ऐसे में उन्होंने हाफिजुल शेख की दिनदहाड़े हत्या कर दी।

मृतक के भाई ने बताया कि टीएमसी के लोगों ने पहले हाफिजुल शेख को 2 गोलियाँ मारी, फिर उसका गला काट दिया और सिर वाले हिस्से को अपने साथ लेकर चले गए।

मृतक के भाई ने टीएमसी के गुंडों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। हाफिजुल की हत्या करने वालों के नाम कासिम, सोहोज, नसीम, सोबुज, अली, बंडू है। इनके साथ टीएमसी के अन्य गुंडे भी थे। मृतक के भाई ने बताया कि मृतक हाफिजुल पहले सीपीआई-एम में थे, लेकिन वो कुछ समय पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग की है।

इस बार के लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में अकेले शनिवार को 2.5 हजार से ज्यादा शिकायतें सिर्फ पश्चिम बंगाल से मिली हैं। शनिवार को पश्चिम बंगाल की 9 लोकसभा सीटों दम दम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, माथुरपुर, डायमंड हार्बर, जादवपुर, कोलकाता दक्षिण और कोलकाता उत्तर पर मतदान हुआ था, जिसमें राजनीतिक पार्टियों की तरफ से 2500 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिसमें ईवीएम में गड़बड़ी, पोलिंग बूथ पर एजेंट्स को जाने से रोका जाना और वोटर्स को धमकाना शामिल था। बीजेपी ने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ता वोटर्स को धमका रहे हैं।


क्या मुख़्तार अंसारी के साथ आतंक के अध्याय का भी अंत हो गया? ऐसा सोचना गलत है बेशक योगी का प्रयास चल रहा है

 सुभाष चन्द्र

कुछ लोगों का मत है कि मुख़्तार अंसारी की मौत से आतंक के अध्याय का भी अंत हो गया लेकिन एक दूसरा मत यह भी है कि बेशक योगी जी का अभियान चल रहा है आतंकी और माफियाओं को ख़त्म करने के लिए पर आतंक और माफिया कमजोर हो सकते हैं ख़त्म होने में काफी समय लगेगा, क्योकि जब तक भारत में कुर्सी के भूखे नेता और उनकी पार्टियां मुस्लिम तुष्टिकरण करती रहेंगी, शायद ख़त्म न भी हो। मुख़्तार की मौत पर विधवा विलाप उस समय कहाँ मर गए थे, जब इसने गुंडागर्दी का आतंक मचा उत्तर प्रदेश को दहलाया हुआ था। कितनी गोदें सुनी कर दी थी, ना जाने कितनी महिलाओं का सिंदूर मिटा दिया था। 

लेखक 
अतीक अहमद और अशरफ की मौत के बाद उनके गैंग के गुर्गे फिर से एक्टिव हैं। 2 दिन पहले अतीक के बेटे अली अहमद समेत 8 लोगों पर बालू व्यापारी ने 10 लाख की रंगदारी मांगने का मामला दर्ज किया है।अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन फरवरी से गायब है। वो कहीं छुपी हुई कोई नेक काम तो कर नहीं रही होगी? अतीक गैंग के रहते आतंक कैसे ख़त्म माना जा सकता है। 

फिर, मुख़्तार अंसारी के परिवार के कई सदस्यों पर मुक़दमे चल रहे हैं - 

-बीवी अफ़सा पर 11 मुक़दमे दर्ज हैं -  (धोखाधड़ी और गैंगस्टर एक्ट में);

-भाई सिबगतुल्ला पर 3 मुक़दमे हैं - (जानलेवा मामले);

-भाई अफजल पर 7 मुक़दमे;

-बेटे अब्बास के खिलाफ 8 मुक़दमे और पुत्रवधु निखत पर भी एक मुकदमा है;

-बेटे उमर पर 6 आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं।

इसके अलावा मुख्तार अंसारी पर सुप्रीम कोर्ट भी मेहरबान रहा है। उसके एक केस में  वर्षों के बाद मिली 7 साल की सजा पर सुप्रीम कोर्ट में रोक लगा दी और सजा सुनाने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस दिनेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया था जबकि वो वरीयता में बहुत पीछे थे। यह भी याद रखना चाहिए कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में 12 जजों ने मुख़्तार के मामले में हाथ डालने से मना कर दिया था।

एक केस में मुख़्तार और उसके भाई अफजाल की 4 साल की सजा में “दोषसिद्धि” पर रोक लगा कर संसद सदस्यता बहाल कर दी। 

मुख़्तार अंसारी की मौत पर अखिलेश यादव बहुत बिलबिला रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि “सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में संदिग्ध मौतों की जांच होनी चाहिए। हर किसी को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। आज के समय में राज्य “सरकारी अराजकता” के दौर में चल रहा है”। 

अखिलेश को मुख़्तार अंसारी बहुत प्रिय इसलिए था क्योंकि वह अखिलेश के पिता मुलायम सिंह का लाड़ला था जो 29 अगस्त, 2003 से 13 मई, 2007 तक मुख्यमंत्री थे। मुलायम सिंह तो कारसेवकों पर गोलियां बरसाने वाले बदमाश CM थे, उन्होंने 2004 में डिप्टी एसपी शैलेन्द्र सिंह पर मुख़्तार के खिलाफ कार्रवाई करने पर मुकदमा दर्ज कर दिया था। इसके अलावा 14 अक्टूबर, 2005 को मऊ में मुलायम राज में भयंकर दंगे कराए थे।

अखिलेश और विपक्ष और मुख़्तार अंसारी के परिवार को योगी प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाने और मौत के लिए जिम्मेदार कहते हुए 10 बार सोचना चाहिए। योगी जी यदि किसी विरोधी के लिए कुछ बुरा करना चाहते तो कोरोना काल में आजम खान कोरोना के इलाज के दौरान निपटा दिया गया होता लेकिन 2 बार बीमार होने पर भी उसे कुछ नुकसान नहीं हुआ।

लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि मुख़्तार अंसारी की मौत का भी बखेड़ा खड़ा करके और उसे “शहीद’ साबित करते हुए अखिलेश और विपक्ष की नज़र “मुस्लिम वोटों” पर ही हैं।

उत्तर प्रदेश : अतीक और मुख़्तार की मौत पर मीडिया से लेकर वोट बैंक सियासत करते नेता बताएं कि दोनों की बीबियां कहाँ छुपी हैं और क्यों? अतीक की तरह ही फरार है मुख्तार अंसारी की भी बीवी, शौहर की मौत के बाद भी कोई अता-पता नहीं

मुख़्तार अंसारी की बीवी अफ़्शाँ (बाएँ) और अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन (दाएँ) - दोनों फरार
बाँदा जेल में बंद गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी की गुरुवार (28 मार्च, 2024) को हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। मुख़्तार अंसारी पर 60 से भी अधिक मामले दर्ज थे। उसका भाई अफजाल अंसारी भी कई मामलों में आरोपित है। उसका बेटा अब्बास अंसारी जेल में बंद है। वहीं उसकी बीवी अफ़्शाँ अंसारी भी फरार चल रही है, ठीक वैसे ही जैसे गैंगस्टर अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार है। बता दें कि अतीक अहमद की भी अप्रैल 2023 में हत्या कर दी गई थी। दोनों पूर्वांचल के सबसे बड़े गुंडे माने जाते थे।

अवैध जमीन कब्जा के मामले में फरार है मुख़्तार अंसारी की बीवी अफ़्शाँ

मुख़्तार अंसारी को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की तैयारी है लेकिन उसकी बीवी का कोई अता-पता नहीं है। उस पर पुलिस ने 75,000 रुपए का इनाम भी रखा हुआ है। उस पर 13 मुकदमे दर्ज हैं, गैंगस्टर एक्ट का भी मामला चल रहा है। अफ़्शाँ पर गाजीपुर और मऊ से लेकर लखनऊ तक अवैध जमीन कब्जे के आरोप हैं। जबरन रजिस्ट्री का मामला भी चल रहा है। ये सब निकाह के बाद दर्ज हुए हैं। 2005 में मुख़्तार अंसारी के जेल जाने के बाद बीवी अफ़्शाँ ने गिरोह में अपना दखल बढ़ा दिया था।
गाजीपुर स्थित यूसुफपुर मोहम्मदाबाद के दर्जी मोहल्ला की रहने वाली अफ़्शाँ पर आरोप है कि उसने मऊ के दक्षिणी टोला स्थित रैनि गाँव के पास ‘विकास कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्म बना कर जमीन ली थी। उस पर गोदाम बना दिया गया था। उस गोदाम को FCI को किराए पर दे दिया गया था। अफ़्शाँ के दोनों भाई अनवर शहजाद और आतिफ रज़ा समेत इस मामले में 5 आरोपित हैं। जाँच में पाया गया कि दलितों की जमीन जबरन कब्जाई गई। जून 2021 में इसे कब्ज़ा मुक्त कराया जा चुका है।
बाकी चारों आरोपित कोर्ट में पेश हो चुके हैं, लेकिन अफ़्शाँ अंसारी तभी से फरार है। गाजीपुर में उसके ठिकानों पर कई बार छापेमारी भी हुई, लेकिन वो नहीं मिली। गजल होटल लैंड डील और नंदगंज में सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप उस पर पहले से थे ही। मुख़्तार अंसारी का एक अन्य बेटा उमर भी जमानत पर बाहर है। उसकी बहू निकहत बानो भी शौहर अब्बास को जेल से भगाने के आरोप में जेल जा चुकी है। मुख़्तार अंसारी का परिवार अब तक 16 लोकसभा-विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुका है।

अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार

हाल ही में शाइस्ता परवीन का खास गुर्गा बल्ली पंडित को धर-दबोचने में प्रयागराज पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली, लेकिन अतीक अहमद की बीवी का कोई अता-पता नहीं चला। शाइस्ता परवीन का नाम उमेश पाल हत्याकांड में आया था, जो विधायक राजू पाल हत्याकांड में गवाह था। राजू पाल की जनवरी 2005 में हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था। फ़िलहाल कौशाम्बी के चैल से उनकी पत्नी पूजा पाल MLA हैं। उमेश पाल इसी हत्याकांड में गवाह थे।
फरवरी 2023 में उमेश पाल की हत्या हुई थी। इस मामले का एक अन्य अभियुक्त बमबाज गुड्डू मुस्लिम भी अब तक फरार है। शाइस्ता परवीन पर 50,000 रुपए का इनाम घोषित है। अशरफ की बीवी जैनब फातिमा भी फरार है। धूमनगंज के हटवा गाँव में इनके होने की सूचना के बाद इसी महीने छापेमारी भी हुई है, लेकिन पुलिस खाली हाथ रही। हटवा अशरफ का ससुराल है। शाइस्ता परवीन अपने शौहर के जनाजे में भी नहीं आई थी।

उत्तर प्रदेश : हलाल के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे मौलाना हबीब यूसुफ और मौलाना मुइदशीर, ताहिर और अनवर के साथ यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार (फोटो साभार : यूपी)
उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाला न कोई सामान बनाया जाएगा और न ही बेचा जाएगा, सिवाय बाहरी देशों में एक्सपोर्ट के लिए तैयार हो रहे माल के। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका ऐलान किया था। इसके बावजूद कुछ मौलाना एक गिरोह बनाकर उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे। उनके पास न कोई लैब थी, न वो किसी सामान की टेस्टिंग करते थे, बस 10 हजार लिया और दे दिया सर्टिफिकेट। मुंबई में बैठकर पैसे बना रहे ऐसे ही मौलानाओं की चौकड़ी को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने पहले तो पूछताछ के लिए बुलाया, और जब पूछताछ में उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, तो फिर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।
लेकिन कट्टरपंथी इसे मुस्लिम विरोधी बता देश का माहौल ख़राब करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इसका मुस्लिम खान-पान से दूर तक कोई सरोकार नहीं। केवल बिना किसी यंत्र-तंत्र के हलाल के नाम पर अपनी कमाई कर सभी धर्मों को पागल बनाया जा रहा था।  

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर वसूली करते थे। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के कुछ सदस्य कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। एसटीएफ ने इस मामले की जाँच शुरू की और पाया कि आरोपित कंपनियों को धमकाते थे कि अगर वे पैसे नहीं देंगे तो उन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह की अगुवाई में एसटीएफ की टीम ने चारों को गिरफ्तार किया। एसटीएफ को उनके पास से 4 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड, 3 मोबाइल फोन, 4 एटीएम कार्ड, 21 हजार 820 रुपये की नकदी, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, एक आरसी और 2 वोटर कार्ड भी मिले हैं। जानकारी मिली है कि सिर्फ 10 हजार रुपए लेकर ये किसी भी चीज को ‘हराम’ से ‘हलाल’ बना देते थे। जबकि इन लोगों को ये सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार ही नहीं है। यूपी एसटीएफ इस बात की भी जाँच कर रही है कि इस ‘हराम’ की कमाई को किस ‘हलाल’ काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हलाल सर्टिफिकेट क्या है?

हलाल सर्टिफिकेट एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह दर्शाता है कि कोई उत्पाद या सेवा इस्लामिक कानूनों के अनुसार तैयार किया गया है। यह प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे केवल हलाल उत्पादों का ही सेवन करते हैं। हलाल का मतलब है “जायज़” यानी इस्लाम में जिसकी अनुमति है। हराम का मतलब है जिसकी अनुमति नहीं है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रोडक्ट में इस तरह के किसी पदार्थ की मिलावट नहीं है जो हराम है और उसे बनाने की विधि भी जायज है, इस तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। हालाँकि यूपी में ऐसा करना जुर्म है।

उत्तर प्रदेश में पिछले साल बैन किया गया था ये सर्टिफिकेट

पिछले साल योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले सामान बेचने पर जेल भेजने का फैसला किया था। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।