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अहमदाबाद : इस्लाम के नाम पर लूट रहा मुसलमान; मस्जिद से गाजा के नाम पर किया जमकर चंदा, सीरियाई नागरिक सब हजम कर गए; अली मेघत अल-अजहर को एलिसब्रिज इलाके के एक होटल से गिरफ्तार

     गुजरात में गाजा राहत कोष घोटाले में एक सीरियाई नागरिक गिरफ्तार, पुलिस ने नकदी बरामद की(साभार - डैल-ई)
मुसलमान मजहब के इतना अंधा है कि इस्लाम के नाम पर पीड़ितों के लिए तिजोरियां खोल देता है। यूँ कहता है गरीब हैं। कट्टरपंथी अपनी तिजोरियां भरने के लिए मुसलमानों को पागल बना रहे हैं। याद है, गुजरात 2002 दंगों में क्या हुआ था, मोदी ने मुसलमानों को बर्बाद कर दिया, मरवा दिया उनकी मदद करने के लिए तीस्ता सीतलवाड़ ने करोड़ों रूपए जमा कर लाखों का पर्स ख़रीदा और ऐश कर रही है। इमदाद करने वाले किसी भी मुसलमान उससे और उसके आकाओं से नहीं पूछा कि पीड़ितों तक इमदाद क्यों नहीं पहुंचाई? आखिर मजहब के नाम पर मुसलमान कब तक अपने आपको लुटवाता रहेगा?  
   
गुजरात पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इसमें चार सीरियाई नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने गाजा पीड़ितों के नाम पर चंदा इकट्ठा किया और उस पैसे को अपनी आलीशान जिंदगी पर खर्च किया। पुलिस ने इनमें से दमिश्क के रहने वाले एक आरोपित अली मेघत अल-अजहर को अहमदाबाद के एलिसब्रिज इलाके के एक होटल से गिरफ्तार किया है। उसके पास से 3,600 अमेरिकी डॉलर और 25,000 रुपए नकद बरामद हुए हैं।

बाकी तीन आरोपित जकारिया हैथम अलजार, अहमद अलहबाश और यूसुफ अल-जहर फिलहाल फरार हैं। ये सभी उसी होटल में ठहरे हुए थे। पुलिस ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिए हैं ताकि वे भारत से भाग न सकें। संयुक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम ब्राँच) शरद सिंघल ने बताया कि जाँच जारी है और बाकी आरोपितों की तलाश की जा रही है।

कोलकाता के रास्ते प्रवेश और संदिग्ध गतिविधियाँ

जाँच में सामने आया है कि यह चारों टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। वे 22 जुलाई को कोलकाता उतरे और 2 अगस्त को अहमदाबाद पहुँच गए। यहाँ आरोपित ने मस्जिदों में जाकर गाजा में भूखे परिवारों के वीडियो दिखाकर चंदा इकट्ठा किया।

पुलिस को अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि यह पैसा गाजा भेजा गया हो। पीटीआई से बातचीत में शरद सिंघल ने कहा कि यह जाँच का विषय है कि वे पहले कोलकाता क्यों गए और फिर अहमदाबाद आए।

यह भी पता लगाया जा रहा है कि वे वास्तव में चंदा इकट्ठा कर रहे थे या किसी और मकसद से भारत आए थे। उन्होंने बताया कि अमेरिकी डॉलर की बरामदगी और कुछ डिजिटल लेन-देन भी शक पैदा करते हैं। पुलिस अब उनकी गतिविधियों और संपर्कों को समझने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। शुरुआती जाँच में यह भी सामने आया है कि आरोपित कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में थे।

आतंकवाद विरोधी एजेंसियाँ ​​जाँच में शामिल

गुजरात एंटी-टेररिज़्म स्क्वॉड (ATS) और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भी इस मामले की जाँच शुरू कर दी है, ताकि आरोपित के असली इरादों का पता लगाया जा सके और यह जाना जा सके कि इकट्ठा किया गया पैसा कहाँ भेजा गया।

पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि उनके नेटवर्क और संपर्कों का पता चल सके। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपित ने माना है कि यह पैसा उन्होंने अपनी शानो-शौकत वाली जिंदगी पर खर्च किया। पुलिस के मुताबिक, दान इकट्ठा कर उन्होंने अपने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। सरकार ने अब उन्हें ब्लैकलिस्ट और डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

गाजा में इजराइल-हमास युद्ध

आतंकवादी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया, जिसमें लगभग 1,300 इजरायली और विदेशी नागरिक मारे गए और सैकड़ों लोग घायल हुए। कई इजरायली और विदेशी नागरिकों को हमास बंधक बनाकर ग़ाज़ा ले आया था।  

इसके बाद इजराइल ने हमास को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। इस दौरान गाजा में हजारों लोगों की मौत हुई है। कहा जाता है कि हमास ने कई बार स्थानीय फिलिस्तीनियों को बाहर निकलने से रोका और दुनिया भर से भेजी गई खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी मानवीय मदद को भी बाधित किया। इससे हालात और बिगड़ गए।

विशेषज्ञों के अनुसार, हमास का मकसद यह दिखाना है कि गाजा में अकाल और संकट के लिए इजरायल जिम्मेदार है। अगर हमास बंधकों को रिहा कर देता तो युद्ध खत्म हो सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और यही वजह है कि इजरायल-हमास युद्ध लगभग दो साल से जारी है।

अहमदाबाद के ‘सेवेंथ डे स्कूल’ में पहले भी हो चुके हैं कई विवाद; विदेशी चर्च से कनेक्शन, धर्मांतरण, मीट खिलाने का आरोप और अब हिंदू छात्र की हत्या…

                                      अहमदाबाद के 'सेवेंथ डे स्कूल' की तस्वीर (फोटो साभार : The Hindu)
अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल में 19 अगस्त 2025 को एक बड़ा हादसा हुआ है। स्कूल में 10वीं कक्षा के एक हिंदू छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि हत्या एक मुस्लिम छात्र ने की। हमले के बाद घायल छात्र को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने आरोपित छात्र को हिरासत में ले लिया है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

घटना के बाद, 20 अगस्त 2025 को स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग स्कूल में जमा हुए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि स्कूल में सुरक्षा को लेकर लापरवाही हुई। मामले की जाँच जारी है और पुलिस स्थिति पर नजर रख रही है।

घटना के बाद स्कूल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल ने घायल छात्र की मदद नहीं की और छात्र को समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। यह भी कहा गया है कि स्कूल ने हादसे के तुरंत बाद सफाई शुरू कर दी।

स्कूल प्रशासन ने पानी का टैंकर मँगवाया और स्कूल परिसर की धुलाई करवाई। लोगों का आरोप है कि इससे सबूत मिटाने की कोशिश की गई। अब पुलिस इन आरोपों की जाँच कर रही है। मामला सबूत छिपाने की दिशा में भी देखा जा रहा है।

पहले भी विवादों में रहा है स्कूल

जिस स्कूल में हिंदू छात्र की हत्या हुई, वह पहले भी विवादों में घिर चुका है। 2016 में एक घटना सामने आई थी। उस समय स्कूल के एक शिक्षक ने कक्षा 4 के एक बच्चे की पिटाई कर दी थी। बच्चे की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने मौखिक परीक्षा के दौरान किसी से बात कर ली थी।

इस बात से गुस्साए शिक्षक ने बच्चे के बाल पकड़कर मारपीट की। आरोप है कि शिक्षक ने चेहरे पर घूंसा मारा, जिससे बच्चे के खून बहने लगा। इस घटना को लेकर भी स्कूल की काफी आलोचना हुई थी।

इस घटना के बाद कई अभिभावक स्कूल पहुँच गए। उन्होंने स्कूल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों के दबाव के बाद स्कूल प्रशासन ने शिक्षक को निलंबित कर दिया। निलंबित शिक्षक का नाम ‘मोसेस अदला‘ था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह शिक्षक पहले भी चार बच्चों की पिटाई कर चुका है। अभिभावकों ने इस मामले की शिकायत खोखरा थाने में की थी। पुलिस ने केस दर्ज कर शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की थी।

यह स्कूल अक्टूबर 2024 में भी विवादों में आया था। उस समय स्कूल का स्टाफ 200 छात्रों को मेहसाणा के एक वॉटर पार्क में लेकर गया थे। इस यात्रा के लिए जिला शिक्षा कार्यालय से कोई अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि सरकारी नियमों का उल्लंघन थी।

घटना सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने स्कूल प्रशासन को बकायदा नोटिस भेजा था। साथ ही, पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई गई थी।

स्कूल प्रशासन पर और भी गंभीर आरोप

हिंदू छात्र की हत्या के बाद स्कूल प्रशासन पर कई सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों ने स्कूल की भूमिका पर शक जताया है। मृतक छात्र के दादा ने ऑपइंडिया से बातचीत में बड़ा दावा किया। घटना वाले दिन कुछ मुस्लिम छात्रों ने चेहरे ढक रखे थे। उन्होंने पीड़ित छात्र पर चाकू से हमला कर दिया। मृतक के दादा ने कहा कि घटना से दो महीने पहले ही स्कूल में शिकायत दी गई थी। शिकायत में कहा गया था कि मुस्लिम छात्र हिंदू छात्रों को परेशान कर रहे हैं। लेकिन स्कूल ने कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके अलावा, दादा ने बताया कि उनका पूरा परिवार शाकाहारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम छात्र स्कूल में मटन लाते थे। उनके पोते को पनीर बताकर मटन खिलाया जाता था।

इतना ही नहीं, स्कूल कैब के मालिक ने भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्रों पर हमले किए हैं। अब इन आरोपों की पुलिस जाँच कर रही है।

पीड़ित छात्र के दादा ने बताया कि उन्होंने कई बार वीडियो बनाकर स्कूल को सबूत दिए। उन्होंने लगातार शिकायतें कीं, लेकिन स्कूल ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने धर्मांतरण का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि पहले हिंदू छात्रों पर ईसाई या मुस्लिम बनने का दबाव डाला जाता था।

अन्य अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने भी यही आरोप लगाए। उनका कहना है कि मुस्लिम छात्र लगातार हिंदू छात्रों को परेशान करते थे। इन घटनाओं की स्कूल में शिकायत की गई, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इसके अलावा एक और गंभीर आरोप सामने आया है। कहा गया कि स्कूल में नैतिक शिक्षा के नाम पर ईसाई मजहब का प्रचार किया जा रहा है। सिलेबस के जरिए छात्रों को ईसाई मजहब की ओर आकर्षित करने की कोशिश हो रही है।

इसके अलावा, एक महिला ने बड़ा दावा किया है। उसने कहा कि स्कूल संचालक अभिभावकों से ₹2 लाख माँग रहे थे। साथ ही, छात्रों से कहा जा रहा था कि वे बिना बोर्ड परीक्षा दिए पास हो जाएँगे। इन आरोपों की भी अब जाँच की जा रही है।

चर्च के जरिए चलता स्कूल

जाँच में पता चला कि यह स्कूल ‘सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट चर्च‘ नाम का एक विदेशी संगठन चलाता है। इस संगठन का मुख्यालय अमेरिका में है। अहमदाबाद में यह स्कूल एक स्थानीय ट्रस्ट, ‘एश्लॉक ट्रस्ट’ के जरिए चलाया जाता है। यह ट्रस्ट भी उसी चर्च का हिस्सा है। पूरी दुनिया में, यह चर्च संगठन 7,804 स्कूल और कॉलेज चलाता है।

स्कूल के मूल्य और नियम ईसाई मजहब के अनुसार बनाए गए हैं। चर्च के स्कूल अधिकतर चर्च के नियमों के अनुसार चलते हैं। दुनिया भर में, ‘सेवेंथ डे एडवेंटिस्ट चर्च संगठन’ सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के नियम बनाता है और फिर उन पर लागू करवाता है।

स्कूल का प्रिंसिपल जी इमैनुएल

अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल के प्रिंसिपल का नाम जी इमैनुएल है। जी इमैनुएल ईसाई मजहब को मानते हैं और पूरे स्कूल का प्रबंधन संभालते हैं। हत्या से पहले, स्थानीय लोग और अभिभावक प्रिंसिपल से कई बार शिकायत कर चुके थे। लेकिन प्रिंसिपल ने इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया और कोई कदम नहीं उठाया।

यह स्कूल ‘काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन’ (CISCE) से जुड़ा है। यह एक गैर-सरकारी संगठन है। यह संस्था 1990 से स्कूल की पढ़ाई की देखरेख करती है। खास बात यह है कि प्रिंसिपल जी इमैनुएल खुद इस संस्था का अध्यक्ष है।

सेवेंथ डे स्कूल CISCE और गुजरात बोर्ड दोनों से जुड़ा हुआ है। चूंकि स्कूल के प्रिंसिपल खुद CISCE के अध्यक्ष हैं, इसलिए कई आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर परिषद का अध्यक्ष ही स्कूल का प्रिंसिपल है, तो स्कूल के खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा?

अवलोकन करें:-

अहमदाबाद : सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्र की चाकू मारकर की हत्या, स्कूल प्रब
अहमदाबाद : सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्र की चाकू मारकर की हत्या, स्कूल प्रब
 

हालाँकि, प्रिंसिपल इमैनुएल की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। पुलिस फिलहाल मामले की जाँच कर रही है।

अहमदाबाद : सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्र की चाकू मारकर की हत्या, स्कूल प्रबंधन और पुलिस पर उठे सवाल: न एंबुलेंस बुलाई, न परिवार को किया रिपोर्ट, क्यों?

                                                                                                       (फोटो साभार - ऑपइंडिया गुजराती)
आज मीडिया के सामने सबसे बड़ा प्रश्नचिन्ह लग रहा है कि अहमदाबाद के 
सेवेंथ डे स्कूल में हो रहे विरोध का मुख्य आरोपी के मजहब क्यों छुपा रहा है? मीडिया कौन-सी सियासत खेल रहा है? मीडिया से ज्यादा खुलासे तो सोशल मीडिया पर हो रहे, जिसका किसी भी तरफ से खंडन नहीं किया जा रहा है। अगर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने इस दुर्घटना को अंजाम नहीं दिया होता और स्कूल की लापरवाही नहीं हुई होती, शायद इतना हंगामा नहीं होता। मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता था सियासतखोरों की तरह आज मीडिया भी अपने सिद्धांत से भटक चुका है। जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। क्यों नहीं स्कूल की लापरवाही के लिए तुरंत स्कूल को बंद कर किया जा रहा है? क्यों नहीं क़त्ल होने पर मृतक छात्र के घर वालों को सूचित किया? क्यों नहीं तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गयी? क्या स्कूल प्रिंसिपल इस लापरवाही के लिए दोषी करार कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए?       

अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल में मुस्लिम छात्रों ने एक हिंदू छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद स्कूल में भारी संख्या में अभिभावक और हिंदू संगठनों के लोग पहुँचे और गुस्सा जताया।

हालात बिगड़ते देख पुलिस बल तैनात करना पड़ा। मृतक छात्र के परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में ही उसका आठवीं कक्षा के कुछ छात्रों से मामूली बात पर झगड़ा हुआ था।

मृतक छात्र दसवीं कक्षा में पढ़ता था। मंगलवार (19 अगस्त 2025) को आरोपित छात्र स्कूल में उसके पास आए और चाकू मार दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए।

स्कूल ने समय पर नहीं की कार्यवाही

जानकारी के मुताबिक, मृतक छात्र के दादा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनका पोता स्कूल से छुट्टी के बाद सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था, तभी एक मुस्लिम छात्र से उसका झगड़ा हुआ था।

बाद में उस छात्र ने सॉरी कह दिया और मामला शांत हो गया। लेकिन घटना वाले दिन आठ-दस लड़के चेहरा ढक कर आए और उनके पोते पर चाकू से हमला कर दिया। दादा का आरोप है कि चाकू लगने के बाद भी स्कूल ने न तो उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाया और न ही एम्बुलेंस को खबर दी।

परिवार के पहुँचने पर ही छात्र को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने स्कूल की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए कि आखिर चाकू जैसे हथियार लेकर लड़के स्कूल में कैसे घुस आए और सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे।

मृतक के दादा ने बताया कि चाकू मारने वाले एक लड़के को पुलिस ने उसी रात शाह आलम इलाके से पकड़ लिया और तुरंत FIR दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल में मुस्लिम छात्र अक्सर उनके पोते को परेशान करते थे। यहाँ तक कि वे मटन की सब्जी को पनीर बताकर उसे खिलाने की कोशिश करते थे, जबकि उनका परिवार शाकाहारी है।

मृतक छात्र के कुछ सहपाठियों ने बताया कि स्कूल में असामाजिक तत्वों का आतंक फैला हुआ है। उनका कहना है कि आरोपित अक्सर निचली कक्षाओं के बच्चों का गला दबाते हैं और उन्हें चाकू दिखाकर डराते-धमकाते हैं। मृतक छात्र के माता-पिता ने भी इस बारे में दो महीने पहले स्कूल में शिकायत की थी, लेकिन स्कूल प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।

गुस्साए अभिभावकों ने कहा- यहाँ हिंदू-मुस्लिम कहाँ पढ़ेंगे? 

स्कूल के बाहर जमा गुस्साए अभिभावकों ने बताया कि यहाँ पहले भी कई शिकायतें हो चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। उनका कहना था कि मुस्लिम छात्रों के उत्पीड़न के कारण लोग पूछ रहे हैं “यहाँ हिंदू कहाँ पढ़ेंगे, मुसलमान कहाँ पढ़ेंगे?” अभिभावकों की बस एक ही माँग है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

एक महिला ने गंभीर आरोप लगाया कि स्कूल में पहले भी शराब और ड्रग्स पकड़े गए थे, लेकिन पैसे लेकर मामले दबा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस स्कूल में अगर पैसा हो, तो कुछ भी हो सकता है।

एक अन्य महिला ने बताया कि दो महीने पहले मुस्लिम छात्रों ने उसके बेटे से झगड़ा किया था। उस समय भी स्कूल ने केवल अभिभावकों को बुलाकर मामला सुलझा दिया, लेकिन किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं की।

अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि घायल बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया गया। उनका कहना था कि अगर एम्बुलेंस की व्यवस्था होती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

स्कूल पर ताला लगा देना चाहिए: एबीवीपी

सिंधी समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में स्कूल के बाहर इकट्ठा होकर न्याय की माँग करने लगे। सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष कमल मेहतानी ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।

एक छोटी सी बात पर बच्चे को चाकू मार दिया गया, यह किसी भी छात्र के साथ हो सकता है। उन्होंने माँग की कि आरोपितों को तुरंत पकड़ा जाए, उन्हें सख्त सजा मिले और स्कूल प्रबंधन की भी जिम्मेदारी तय हो।

उन्होंने कहा कि स्कूल का काम सिर्फ फीस वसूलना नहीं है, बच्चों की सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी है। एबीवीपी नेताओं ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब लाखों रुपए फीस लेने के बाद भी छात्र सुरक्षित नहीं हैं और असामाजिक तत्व स्कूल में चाकू लेकर घूम रहे हैं, तो ऐसे स्कूल पर ताला लगा दिया जाना चाहिए।

आखिर 11A सीट का क्या है रहस्य? 27 साल पहले भी एक विमान हादसे में ’11A’ सीट पर बैठा यात्री ही बचा था जिंदा, एयर इंडिया विमान क्रैश के बाद थाई हीरो को याद आई 1998 की वह घटना

                        11A सीट के जीवित यात्री जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक और विश्वास कुमार रमेश 

अहमदाबाद विमान में सवार 242 लोगों की हादसे में मौत हो गई। हादसे में केवल भारतीय मूल के ब्रिटेन निवासी विश्वास कुमार रमेश की जान बच गई, जो फ्लाइट की 11A सीट पर बैठा था। ऐसा ही दर्दनाक विमान हादसा 27 साल पहले थाईलैंड में एयरबस A310 में भी हुआ था। इसमें जीवित बचे जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक की सीट भी 11A ही थी।

अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की खबर जैसे ही दुनिया भर में फैली वैसे ही थाईलैंड थाई गायक और एक्टर जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक ने दुख जताने के साथ ही सीट नंबर 11A को लेकर चौंका देने वाला खुलासा भी किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में 27 साल पहले वाले विमान हादसे का जिक्र किया है जिसमें वे अकेले बच निकले थे और सभी यात्रियों की मौत हुई थी।रुआंगसाक दिसंबर 1998 में थाई एयरवेज की उड़ान TG 261 में सवार थे. उस समय वह विमान दक्षिणी थाईलैंड में उतरने का प्रयास कर रहा था और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस दुर्घटना में 101 लोग मारे गए थे. वह 101 यात्रियों में से अकेले व्यक्ति थे जो जीवित बच गए थे।
सोशल मीडिया पर बताया 27 साल पुराना किस्सा एक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने साथ हुए किस्से को शेयर किया है। भारत में विमान दुर्घटना में जीवित बचे व्यक्ति भी उसी सीट पर बैठे थे, जिस पर 27 साल पहले मैं बैठा था यानी 11A. इसके आगे उन्होंने लिखा कि इस खबर को सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने परिजन को खो दिया है।दूसरे देश में एक और व्यक्ति के बारे में जानना, जो उसी सीट पर एक अलग दुर्घटना में बच गया, उन यादों को एक ऐसे तरीके से वापस ले आया जिसे शायद ही कोई समझ पाए।

लोयचुसाक थाइलैंड के चर्चित अभिनेता और गायक हैं। अहमदाबाद में विमान हादसे की खबर पता चलते ही लोयचुसाक ने फेसबुक पर पोस्ट किया। उन्होंने थाई भाषा में लिखा, “भारत में एक विमान दुर्घटना के जीवित बचे शख्स के जैसे ही मैं अपनी सीट 11A पर ही बैठा था।” उन्होंने कहा कि यह जीवन उनके लिए ‘दूसरी जिंदगी’ है। हादसे के 10 साल बाद तक उन्होंने हवाई यात्रा नहीं की।

इधर, एयर इंडिया की AI-171 आपातकालीन एग्जिट के पास बैठे विशाल रमेश भी मौत के छूकर वापस आए हैं। फिलहाल वे अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता मैं कैसे बचा। जब मेरी आँखे खुलीं तो मैंने खुद को सीट से निकाला और भागने की कोशिश की।”

गौरतलब है कि 12 जून 2025 को एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद में उड़ान के कुछ मिनट बाद ही क्रैश हो गया। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों की मौत हो गई।

मेडिकल हॉस्टल में खाना खा रहे थे डॉक्टर, जब छत में घुसा एयर इंडिया का विमान: 240+ मौतें, पीड़ित परिजनों को 1-1 करोड़ रूपए देगा TATA; हादसा या साज़िश?

                                           अहमदाबाद प्लेन क्रैश (फोटो साभार : X_CISFHQrs)
गुजरात के लिए गुरुवार (12 जून 2025) का दिन एक काला दिन बन गया। अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेक-ऑफ के चंद मिनटों बाद ही क्रैश हो गई।

इस दुर्घटना से देश हिल गया। News18 पर एंकर रुबिका लियाकत के लाइव शो "गूंज" में इस विमान में दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचे आकाश वत्स ने बताया कि विमान का एयर कंडीशन ठीक से काम नहीं कर रहा था। यात्री मैगज़ीनों से हवा कर रहे थे। जो विमान में कुछ तकनीकी खराबियों की ओर संकेत दे रहा है। 

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अहमदाबाद में मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराया एयर इंडिया प्लेन, भोजन कर रहे थे छात्र: PM मोदी ने ज

चर्चा यह भी हो रही है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है, ये तो TATA ग्रुप ही बता सकता है कि मेंटेनेंस तुर्किश की किसी कंपनी को दिया हुआ है। 

अहमदाबाद विमान हादसे की जांच शुरू, हाई लेवल कमेटी बनाई गई

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि अहमदाबाद में हुए दुखद विमान हादसे के बाद आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक हो रही है।

 सरकार एक हाई लेवल कमेटी भी बना रही है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कमेटी हादसे की गहराई से जांच करेगी और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी कदम सुझाएगी।

इस विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स यानी कुल 242 लोग सवार थे। इनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के बड़े नेता विजय रूपाणी भी शामिल थे। विजय रूपाणी इस फ्लाइट में बिजनेस क्लास की 2D सीट पर सवार थे।

हादसा इतना भयानक था कि पूरा शहर सन्न रह गया। विमान मेघाणी नगर के रिहायशी इलाके में बीजे मेडिकल कॉलेज की मेस बिल्डिंग और अतुल्यम हॉस्टल से टकराया, और देखते ही देखते आग का गोला बन गया। चारों तरफ धुआँ, मलबा और चीख-पुकार फैल गई।

इस हादसे में सिर्फ एक यात्री रमेश विश्वास कुमार किसी चमत्कार से जिंदा बचा। बाकी 241 लोगों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। हालाँकि कई रिपोर्ट्स में दावा है कि बचने वालों की संख्या 2 है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 1:38 बजे हुआ। फ्लाइट बोइंग 787 ड्रीमलाइनर थी, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-ANB था। एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को ‘मेडे’ कॉल भेजी। ये कॉल तब दी जाती है, जब विमान में कोई बहुत बड़ी तकनीकी खराबी हो और जान का खतरा हो। लेकिन इसके बाद विमान से संपर्क टूट गया। विमान सिर्फ 625 फीट की ऊँचाई तक पहुँचा था और फिर अचानक नीचे आ गिरा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान हवा में डगमगाया और फिर जोरदार धमाके के साथ क्रैश हो गया। मेघाणी नगर में जहाँ विमान गिरा, वहाँ की इमारतें हिल गईं। आसपास के लोग दौड़े, लेकिन आग और धुएँ ने सबकुछ तबाह कर दिया। हादसे के समय मेडिकल कॉलेज में छात्र भोजन कर रहे थे।

हादसे की खबर मिलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जी.एस. मलिक ने बताया कि अब तक 204 शव बरामद हो चुके हैं। 41 लोग घायल हैं, जिनका सिविल और प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा है। मरने वालों की पहचान के लिए DNA टेस्ट किए जा रहे हैं। क्योंकि हादसा इतना भयानक था कि कई शवों को पहचान पाना मुश्किल हो गया है। राहत और बचाव के लिए NDRF, BSF और आर्मी की टीमें दिन-रात लगी हैं।

रैपिड एक्शन फोर्स और CRPF के 100 से ज्यादा जवान मलबा हटाने और लोगों को बचाने में जुटे हैं। दमकल की सात गाड़ियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत कुछ जलकर खाक हो चुका था।

हादसे में जिंदा बचे इकलौते यात्री रमेश विश्वास कुमार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। रमेश ने बताया, “विमान में धमाका हुआ, और चारों तरफ आग फैल गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया। एंबुलेंस में मुझे अस्पताल लाया गया। मुझे यकीन नहीं होता कि मैं जिंदा हूँ। ये किसी करिश्मे जैसा है।” रमेश का इलाज अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालत नाज़ुक है, लेकिन वो जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उनकी बातें सुनकर हर कोई हैरान है कि इतने बड़े हादसे में कोई कैसे बच सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक सवार थे। हादसे की खबर मिलते ही लोग अपने अपनों की खबर लेने के लिए अस्पतालों की ओर दौड़े। भावना पटेल नाम की एक महिला ने बताया कि उनकी बहन इस फ्लाइट में थी। वो रोते हुए अपनी बहन की हालत जानने की कोशिश कर रही थीं। ऐसे कई परिवार हैं जो अपनों को खोने के गम में डूबे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया, “अहमदाबाद का हादसा दिल दहलाने वाला है। मेरी संवेदनाएँ पीड़ित परिवारों के साथ हैं।” उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और नागरक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से बात की और राहत कार्य तेज करने को कहा। गृहमंत्री अमित शाह शाम के समय हादसे वाली जगह पर भी पहुँचे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक जताते हुए कहा, “ये हादसा दिल तोड़ने वाला है। पूरा देश पीड़ितों के साथ खड़ा है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी दुख जताया, क्योंकि विमान में कई ब्रिटिश नागरिक सवार थे।

एयर इंडिया ने हादसे की पुष्टि की और हेल्पलाइन नंबर 1800-5691-444 जारी किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कंट्रोल रूम बनाया, जिसके नंबर 011-24610843 और 9650391859 हैं।

एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “हम प्रभावित परिवारों को हर मुमकिन मदद दे रहे हैं।” विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की टीम हादसे की जाँच के लिए अहमदाबाद पहुँच चुकी है। DGCA के मुताबिक, विमान के दोनों पायलट अनुभवी थे। कप्तान के पास 8,200 घंटे और को-पायलट के पास 1,100 घंटे का उड़ान अनुभव था। लेकिन फिर भी ये हादसा कैसे हुआ, ये सवाल सबके मन में है।

हादसे के तुरंत बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें रोक दी गई थी, हालाँकि शाम तक सीमित संख्या में उड़ाने फिर से शुरू कर दी गईं। विमान ने दिल्ली से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी थी, और कुछ देर रुकने के बाद लंदन रवाना हुआ था। हादसे की वजह से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मची है। मेघाणी नगर के लोग अब भी सदमे में हैं। वहाँ की गलियाँ मलबे और दुख से भरी पड़ी हैं।

ये हादसा भारत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। विजय रूपाणी जैसे बड़े नेता का जाना और 241 लोगों की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। गुजरात ही नहीं, पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। लोग सोशल मीडिया पर शोक जता रहे हैं। बीजेपी के गुजरात अध्यक्ष सीआर पाटिल ने भी रूपाणी के निधन की पुष्टि की और कहा कि ये पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है।

अब सबकी नजरें जाँच पर टिकी हैं। आखिर इतना बड़ा हादसा हुआ कैसे? क्या तकनीकी खराबी थी या कोई और वजह? इन सवालों के जवाब मिलने में वक्त लगेगा। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर बता दिया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। जो लोग सुबह अपने घरों से निकले, उन्हें क्या पता था कि वो कभी लौटकर नहीं आएँगे। पूरा देश इस दुख में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। और उम्मीद है कि रमेश विश्वास जैसे लोग जिंदगी की इस जंग को जीत जाएँगे।

अमेरिका की NTSB की टीम जांच में सहयोग करने अहमदाबाद आएगी

अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) जानकारी दी कि NTSB की एक टीम अमेरिका से भारत आएगी और दुर्घटना की जांच में भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की मदद करेगी।

बोइंग के CEO बोले- जांच में पूरा सहयोग करेंगे

बोइंग के CEO केली ऑर्टबर्ग ने कहा, "हम यात्रियों और क्रू मेंबर्स के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। अहमदाबाद में हादसे से प्रभावित सभी लोगों के साथ हमारी सहानुभूति है।" उन्होंने बताया कि उन्होंने एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से बात की है और बोइंग की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बोइंग की एक टीम जांच में भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की पूरी मदद के लिए तैयार है।

भारत में रहकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के ही सरकारी वेबसाइटों को निशाना बना रहा था जसीम अंसारी, गुजरात ATS ने 2 साइबर आतंकियों को पकड़ा

                 गुजरात एटीएस ने संदिग्ध साइबर आतंकी जसीम अंसारी को पकड़ा। (साभार - नवभारतटाइम्स.कॉम)

पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड़ में हैं। वे तमाम संदिग्धों की जांच में जुटी हैं। इस बीच गुजरात एटीएस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। गुजरात एटीएस ने नाडियाद से दो युवकों को अरेस्ट किया है। एटीएस के अनुसार पकड़े गए युवकों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आधार कार्ड की वेबसाइट पर साइबर अटैक किया था। ऐसा करके उन्होंने इस अहम वेबसाइट को हैक करने की कोशिश की थी। एटीएस का इनपुट मिला है कि इन युवकों ने भारत सरकार की कई वेबसाइट को टार्गेट किया था।

ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद से देशभर में छिपकर रह रहे जासूसों और जिहादियों को पकड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में गुजरात ATS को बड़ी सफलता मिली है। गुजरात ATS ने दो साइबर आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक का नाम जसीम अंसारी बताया जा रहा है, जबकि उसके साथी की पहचान अभी नहीं हो पाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार (20 मई 2025) को जसीम अंसारी और उसके साथी को आतंकी जिहाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दोनों अहमदाबाद के नडियाद क्षेत्र में रहते थे। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, तब इन दोनों ने देशविरोधी ताकतों से मिलकर साइबर आतंक फैलाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही इन्होंने कई सरकारी वेबसाइटों को भी निशाना बनाया।

यूट्यूब से सीखी हैकिंग
एटीएस की गिरफ्त में आए शख्स की पहचा जसीम अंसारी के तौर पर हुई। एटीएस ने अंसारी और उसके भाई को अरेस्ट किया है। एटीएस के मुताबिक इन पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत विरोधी ग्रुप में जुड़कर सरकारी वेबसाइट टार्गेट करने का आरोप है। एटीएस के अनुसार यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मैट्रिक पास दोनों साइबर आतंकी ने हैकिंग सीखी थी। एटीएस अब यह पता लगाएगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का कोई डेटा पाकिस्तान से साझा किया गया है या फिर नहीं। दोनों आरोपी गुजरात के नडियाद के रहने वाले हैं।

जानकारी के मुताबिक, दोनों आतंकी सिर्फ 10वीं पास हैं, लेकिन उनकी सोच जिहादी है और वे भारत विरोधी संगठनों से जुड़े हुए हैं। यह भी पता चला है कि इन दोनों ने यूट्यूब और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से हैकिंग सीखी थी और फिर भारत में रहकर ही साइबर अपराधों को अंजाम देने लगे थे।

देश विरोधी कृत्य का आरोप
एटीएस के अनुसार जसीम अंसारी को हिरासत में लेने के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उसने और अपने दोस्त के साथ मिलकर देश विरोधी कृत्य को अंजाम दिया है। एटीएस के अनुसार तमाम गैजेट्स और तकनीकी जांच भी की जा रही हैं। इसमें पता किया जा रहा है अंसारी किस प्रकार के लोगों के संपर्क में था। गुजरात एटीएस की यह भी पता कर रही है कि इस गतिविधि में कितने लोग शामिल थे। क्या कोई बड़ा रैकेट देश विरोध गतिविधियों को संचालित कर रहा था?

अहमदाबाद की चंदोला झील से पूरी तरह हटाया जाएगा अवैध कब्जा, मुस्लिम पक्ष की याचिकाएँ हाई कोर्ट ने की खारिज: अवैध बांग्लादेशियों का गढ़ बन चुका है इलाका, एक्शन में 50 से ज्यादा बुलडोजर


गुजरात के अहमदाबाद में चंदोला झील के आसपास अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को गुजरात हाई कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो इस कार्रवाई को रोकना चाहते थे।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि झील क्षेत्र में बने अवैध निर्माण, खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों के अड्डे, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थे। कुछ लोगों के आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का भी खुलासा हुआ।

अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि लल्लू बिहारी नामक शख्स ने आलीशान फार्महाउस बनाकर अवैध बांग्लादेशियों को शरण दी थी। तीन दिन पहले 1,000 से ज्यादा घुसपैठियों को पकड़ा गया। कार्रवाई में 50 से अधिक बुलडोजर लगाए गए।

पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने बताया कि गुजरात में 450 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए और 6,500 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई झील को अतिक्रमण से मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी बताई जा रही है।

गुजरात : वक्फ संपत्ति घोटाला में सलीम, महमूद समेत 5 गिरफ्तार : उर्दू स्कूल के लिए मिली जमीन पर बनाई दुकानें, 20 साल तक वसूला लाखों का किराया

                वक्फ की 100 करोड़ की संपत्तियों पर 20 सालों से अवैध निर्माण (फोटो साभार : Opindia)
वक़्फ़ संशोधक बिल कानून बनने से सारे मुसलमानों में डर नहीं बल्कि डर सिर्फ उन्हीं को है जो वक़्फ़ की जमीन का दुरूपयोग कर किराया हज़ारों में देकर हर महीने करोड़ों कमा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले News18 पर एंकर लुबिका लियाकत मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पहुँच उनसे वक़्फ़ कानून के बारे में पूछा तो पूरे शो में यही बात निकल कर आयी कि आम मुसलमान को वक़्फ़ नाम से वाकिफ नहीं। अब सवाल यह पैदा होता है कि सड़क पर उतर कर दंगा करने वाले गुंडे कौन हैं और किसके हाथ बिकाऊ हैं?  

अहमदाबाद में पाँच मुस्लिमों ने वक्फ बोर्ड की जमीन पर अवैध रूप से दुकानें खड़ी कर दीं। इसके बाद उन्होंने खुद को वक्फ का ट्रस्टी घोषित कर 2 दशक से उनका किराया वसूला। यह जमीन अहमदाबाद नगर निगम ने वक्फ बोर्ड को उर्दू स्कूलों के लिए दी थी लेकिन इन पर करोड़ों की दुकाने चल रही थीं। इस मामले में अब FIR दर्ज हुई है।

यह दुकानें अहमदाबाद के जमालपुर में थीं। यह मामला काँच वाली मस्जिद के पास स्थित वक्फ बोर्ड की उस भूमि से जुड़ा है। दरअसल, 2001 में आए विनाशकारी भूकंप में यह स्कूल जर्जर हो गए थे और इन्हें तोड़ दिया गया था। इसके बाद यह जमीन खाली पड़ी थी।

इसी का फायदा उठाते हुए सलीम खान पठान नामक एक व्यक्ति ने उस जमीन पर 10 दुकानें बना लीं और उन्हें किराए पर उठा दिया। सलीम खान के साथ ही मोहम्मद यासर शेख, महमूद खान पठान, फैज मोहम्मद पीर मोहम्मद और शाहिद अहमद शेख ने ना केवल इन दुकानों से बल्कि वक्फ बोर्ड की लगभग 150 और संपत्तियों से भी पिछले 20 वर्षों से लगातार किराया वसूला।

यह सारा किराया वक्फ बोर्ड के आधिकारिक खाते में जमा होने के बजाय इन आरोपितों की निजी जेबों में जाता रहा, जिससे बोर्ड को करोड़ों रुपये का नुकसान भी झेलना पड़ा। इस व्यापक धोखाधड़ी की जानकारी वक्फ बोर्ड को तब हुई जब जमालपुर के एक रिक्शा चालक, मोहम्मद रफीक अंसारी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई।

ऑपइंडिया से बातचीत में अंसारी ने बताया कि उन्होंने खुद गुजरात वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन लोखंडवाला को इस अवैध कब्जे की सूचना दी, लेकिन बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाद में इस मामले की पुलिस में FIR दर्ज करवाई गई। पाँचों आरोपितों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। ऑपइंडिया के पास यह FIR कॉपी मौजूद है।

वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा वक्फ बोर्ड के सदस्यों और अधिकारियों की देखरेख में आता है। ऐसे में उनकी कार्यशैली पर प्रश्न उठ रहे हैं। इससे जुड़े लोगों ने पूछा है कि वक्फ की इतनी बेशकीमती जमीन पर अवैध निर्माण कैसे हो गया और कुछ बाहरी लोगों ने स्वयं को ट्रस्टी बताकर इतने लंबे समय तक किराया कैसे वसूला।

शिकायतकर्ता अंसारी ने यह भी आशंका जताई है कि इस गोरखधंधे में वक्फ बोर्ड के कुछ अंदरूनी लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिसके कारण उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई।अंसारी ने इस मामले में अहमदाबाद पुलिस की तत्परता की सराहना की है।

उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों, विशेष रूप से गोसाई साहब, ने उनकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान दिया और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

वक्फ कानून के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद: अंसारी

ऑपइंडिया से बातचीत में शिकायतकर्ता ने हाल ही में लागू हुए नए वक्फ अधिनियम का पुरजोर समर्थन किया है। उनका मानना है कि इस नए कानून के प्रावधानों के तहत सलीम खान पठान जैसे लोगों के लिए वक्फ की जमीन पर अवैध कब्जा करना और वक्फ बोर्ड के लिए ऐसी गतिविधियों पर आँख बंद करना अब संभव नहीं होगा।
अंसारी ने इस कानून के लिए भाजपा सरकार की प्रशंसा भी की। शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि नए वक्फ एक्ट के कारण सलीम खान पठान जैसे लोग अब वक्फ की जमीनों पर कब्जा नहीं कर पाएँगे और वक्फ बोर्ड भी इस पर आंख मूंदकर नहीं रह पाएगा।
उन्होंने कहा, “गांधीनगर जाकर गुजरात वक्फ बोर्ड के चेयरमैन से शिकायत करने के बावजूद उन्होंने कुछ नहीं किया। अब अगर नए कानून आ गए तो कोई भी जबरदस्ती वक्फ की जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा। मैं इस कानून के लिए भाजपा सरकार की बहुत सराहना करता हूँ।”
इसके अलावा, शिकायतकर्ता को यह भी संदेह है कि सलीम खान पठान के साथ-साथ वक्फ बोर्ड के कुछ कथित ठेकेदार भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं। इसीलिए वक्फ बोर्ड से शिकायत करने के बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद पुलिस से संपर्क किया और अहमदाबाद पुलिस की तारीफ करते हुए कहा, “पुलिस अधिकारी गोसाई साहब और अहमदाबाद पुलिस ने मेरी काफी मदद की है और ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।”

पहले कानून बनती तो नहीं होती गड़बड़ी

विडंबना है कि कुछ स्वार्थी तत्व वक्फ अधिनियम को लेकर मुस्लिमों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए उकसा रहे हैं। अहमदाबाद में सामने आया यह करोड़ों का घोटाला ऐसे ही लोगों के स्वार्थों को उजागर करता है। यदि नया वक्फ (संशोधन) अधिनियम पहले ही लागू हो गया होता, तो इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश बहुत पहले हो गया होता।
यदि पहले यह संशोधन लागू कर दिया गया होता तो इन मुस्लिम ठेकेदारों की दुकानें बंद हो जातीं और करोड़ों की अवैध कमाई रुक जाती। यही कारण है कि वे इस नए कानून से नाराज हैं और इसे मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार का एक साधन बता रहे हैं। लेकिन, कानून का असल उद्देश्य यह है कि वक्फ की जमीनों का असल फायदा गरीब मुस्लिमों को मिले।
यदि नया कानून लागू हो जाता तो संपत्तियों के सर्वेक्षण और रजिस्ट्रार में बदलाव होता, राज्य और केंद्र में वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव होता, पिछड़े वर्ग के मुसलमानों और महिलाओं को भी बोर्ड में सदस्यता दी जाती और वक्फ और भूमि नियंत्रण की प्रक्रिया से लेकर उसकी देखरेख और वक्फ ट्रिब्यूनल में बदलाव किए जाते।
अगर ऐसा होता तो इस तरह के घोटाले बंद हो जाते और वक्फ बोर्ड के नाम पर गरीब मुसलमानों के साथ अन्याय नहीं होता। केवल 5-7 अधिकारी ही वक्फ संपत्तियों का उपयोग बंद कर देते और बड़ी मुस्लिम आबादी को इसका सीधा लाभ मिलता।
कानून लागू होने के बाद जो लोग अवैध संपत्ति अर्जित कर रहे थे, वे रुक जाएँगे। इसीलिए आज वक्फ एक्ट का विरोध हो रहा है। ताकि वे दोनों हाथों से वक्फ संपत्तियों को लूट सकें और घोटाले करके अपनी जेबें भर सकें।
हकीकत यह है कि ऐसे लोग नए वक्फ कानून पर इसलिए आपत्ति जता रहे हैं क्योंकि यह उन्हें ऐसी सम्पत्तियाँ हड़पने से रोकेगा। उन्हें ना तो गरीब मुसलमानों की परवाह है और न ही उनके मजहब की संपत्तियों की। उनकी एकमात्र चिंता यह है कि यदि कानून लागू हुआ तो उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी।
अहमदाबाद की इस घटना का निष्कर्ष यह है कि जहाँ बहुत अधिक संपत्ति होगी, वहाँ केवल 5-7 लोग ही वक्फ की जमीनों पर शासन करेंगे और संपत्ति को अपने पास रख लेंगे। गरीब मुस्लिमों साथ हो रहे इस अन्याय को रोकने के लिए सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन किया है।

अहमदाबाद : कौन सी मस्जिद (अहमदिया या बिस्मिल्लाह) से पहले दिया जाएगा अजान- इस पर भिड़े शिया और अल अदीस मुस्लिम: रमजान में एक-दूसरे पर बरसाए पत्थर


गुजरात के अहमदाबाद में रमजान के महीने में मुस्लिमों के दो गुटों के बीच खूब पत्थर चले। अजान देने को लेकर हुए विवाद में मस्जिद के बाहर काफी देर तक मुस्लिमों के बीच लड़ाई होती रही। लड़ाई में कई लोग घायल हुए हैं। मामला मुस्लिमों के दो फिरकों से जुड़ा हुआ है। इस लड़ाई झगड़े का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस झगड़े की वीडियो बीते कुछ दिनों से वायरल हो रही थी और बताया जा रहा था कि यह कर्णावती अहमदाबाद की है। इसमें पथराव होता दिख रहा था। हालाँकि, इसके विषय में पक्की जानकारी नहीं सामने आ रही थी। ऑपइंडिया के पास भी यह वीडियो आई थी।

ऑपइंडिया ने इस वीडियो के विषय में पता लगाने का प्रयास किया और इस कड़ी में अहमदाबाद पुलिस से सम्पर्क किया। अहमदाबाद पुलिस ने बताया कि यह वीडियो मुस्लिमों के बीच झड़प की ही है और उसे इस घटना के विषय में जानकारी है।

अहमदाबाद पुलिस ने बताया, “यह वीडियो 2 मार्च 2025 यानी पिछले रविवार शाम 6:30 बजे का है। अहमदाबाद के शाहपुर थाना क्षेत्र में पहले अज़ान देने के मुद्दे पर अहमदिया मुसलमानों और बिस्मिल्लाह मस्जिद के बीच झड़प हो गई। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के दो कबीले अल अदीस और शिया आमने-सामने आ गए और दोनों में मारपीट शुरू हो गई।”

अहमदाबाद पुलिस ने आगे बताया, “बाद में दोनों गुटों के बीच समझौता हो गया।” अहमदाबाद पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वीडियो की प्रामाणिकता और इसका अहमदाबाद से होना भी सही साबित हुआ है। यह भी पता चला कि यह घटना इसी रमजान महीने की है।

गुजरात : चंदोला झील को कचरे से भरकर हिंदू बनकर बस गए बांग्लादेशी : पुलिस का शिकंजा कसते ही 70% घुसपैठिए घर छोड़ भागे, नर्मदा का पानी भी रोका

अहमदाबाद का चंदोला झील (साभार: देश गुजरात)
गुजरात के अहमदाबाद में पकड़ाए अवैध बांग्लादेशी चंदोला झील को कचरे से भरकर अपने लिए घर बना रहे थे। अपनी जाँच में सिटी क्राइम ब्रांच ने इसका खुलासा किया है। बता दें कि शुक्रवार (25 अक्टूबर 2024) को अहमदाबाद पुलिस क्राइम ब्रांच ने 51 अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों को गिरफ्तार किया था। अब उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। कार्रवाई के दौरान 250 व्यक्तियों से पूछताछ की गई थी।

इन अवैध बांग्लादेशियों ने झील को भरने के लिए ना सिर्फ उसमें कचरे डाल रहे थे, बल्कि झील में किसी तरह पानी ना पहुँचे इसका भी उन्होंने पूरा बंदोबस्त कर रखा था। घुसपैठियों ने झील में पानी ना जाए, इसके लिए पिराना डंपिंग साइट से कचरे लाकर नर्मदा पाइपलाइन को ब्लॉक कर दिया था। इसकी पुष्टि तब हुई जब क्राइम ब्रांच ने 1985, 2011 और 2024 की सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा की।

देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, इन घुसपैठियों ने चंदोला झील के कुछ हिस्सों को भरकर उन पर अवैध घर भी बना लिए हैं। हालाँकि, चार महीनों की पुलिस कार्रवाई में इनमें से 60 से 70% घर खाली हो गए हैं। इनमें रहने वाले अधिकांश घुसपैठिए या तो भाग गए हैं या फिर पकड़े गए हैं। ये लोग नकली हिंदू नामों का इस्तेमाल करके यहाँ रह रहे थे और उस नाम से फर्जी दस्तावेज भी बना लिए थे।

पुलिस के सामने यह सबसे बड़ी समस्या ये पता लगाना है कि यहाँ से भागे आखिर कहाँ गए। क्या वे गुजरात के अन्य हिस्सों में चले या देश के अन्य हिस्सों में चले गए या फिर वापस अपने देश बांग्लादेश चले गए। पुलिस दूसरे राज्यों के साथ खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही है और इसके बारे में उन्हें सूचित कर रही है। हालाँकि, भागे हुए बांग्लादेशियों के बारे में पता लगाना आसान नहीं है।

दरअसल, कुछ हफ्ते पहले फर्जी पहचान कागजात बनाने और बांग्लादेश से मानव तस्करी के जरिए महिलाओं को भारत लाने का मामला सामने आया था। इन महिलाओं से यहाँ वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। सहायक पुलिस आयुक्त भरत पटेल ने बताया कि इन दो मामलों में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के बयान पर ही पुलिस ने कार्रवाई की और 51 बांग्लादेशियों को पकड़ा।

पटेल ने बताया कि प्राथमिक जाँच में सामने आया कि ये लोग स्थानीय पहचान पत्र बनवा कर कारखानों में दिहाड़ी मजदूरी, बाँस से बनने वाले सामान बनाते और कुछ लोग भीम माँगने का काम करते थे। उन्होंने बताया कि कुछ लोग बांग्लादेश से विवाह करके युवतियों को यहाँ लाते हैं, और उनसे देह व्यापार कराते हैं। बड़े पैमाने पर राशि को हवाला से बांग्लादेश भेजने का भी पता चला है।

इससे पहले त्रिपुरा की राजधानी अगरतला रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा एजेंसियों ने 22 अक्टूबर 2024 की सुबह तीन रोहिंग्या मुस्लिम और दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के प्रभारी अधिकारी तपस दास ने कहा कि उन्हें सूचना मिली कि कुछ रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक त्रिपुरा से बाहर जाने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पर आएँगे।

तपस दास ने आगे बताया कि पूछताछ में पता चला कि रोहिंग्या नागरिक हैदराबाद जाने वाले थे, जबकि बांग्लादेशी नागरिक मुंबई जाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कहा, “हमने उनके पास से बांग्लादेशी मुद्रा, दस्तावेज और कुछ मोबाइल फोन जब्त किए हैं।” इससे पहले पुणे से भी 21 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया था।

महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने भी खुफिया सूचना के आधार पर रजनगाँव में 21 अक्टूबर 2024 को सर्च ऑपरेशन चलाकर 21 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस अधीक्षक पंकज देशमुख ने कहा था, “उनमें से नौ के पास फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड थे और उनमें से एक के पास वोटर आईडी कार्ड भी था। बांग्लादेशी नागरिक के पास वोटर आईडी कार्ड था, उसने इसे गुजरात से हासिल किया था।”

एसपी ने कहा कि ये सभी या तो पैदल चलकर सीमा पार करते हुए पश्चिम बंगाल में यहाँ आए या फिर नावों से समुद्री मार्ग से अवैध रूप से यहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “इनमें से कुछ के बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र तीन साल से पाँच साल के बीच है। भारत में घुसने के बाद ये गुजरात और मुंबई चले गए। कुछ दिन पहले ये पुणे आए हैं।” लंबे समय रह रहे इन लोगों के पास से फर्जी भारतीय पहचान पत्र आदि भी बरामद किए गए थे।

पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर मानव तस्करों का एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है, जो सिर्फ कुछ हजार रुपए में बांग्लादेशी लोगों को भारत में घुसपैठ कराता है। घुसपैठ करने वालों में बांग्लादेशी के साथ-साथ रोहिंग्या मुस्लिम भी शामिल हैं। इसके बाद घुसपैठियों को फर्जी पहचान देकर जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बसाया जाता है।