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9 बौद्ध भिक्षुओं को सेक्स जाल में फँसाया, ब्लैकमेल कर वसूले 100 करोड़, घर में जमा कर रखे थे 80000 फोटो-वीडियो: थाइलैंड पुलिस ने ‘मिस गोल्फ’ को पकड़ा

                   थाईलैंड में महिला ने बौद्ध भिक्षुओं को फँसाया, हुई गिरफ्तार ( फोटो साभार- एशियन एज )
थाईलैंड पुलिस ने 15 जुलाई 2025 को एक महिला को गिरफ्तार किया है। महिला पर कई बौद्ध भिक्षुओं को यौन संबंध बनाने के लिए उकसाने और फिर उसे ब्लैकमेल करने का आरोप है। उसके पास से चोरी का सामान भी बरामद हुए है।

पुलिस ने महिला को ब्लैकमेलिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस महिला को ‘मिस गोल्फ’ कह रही है।

पुलिस को मिले 80 हजार से ज्यादा वीडियो और तस्वीरें

पुलिस ने बताया कि उसके घर की तलाशी के दौरान भिक्षुओं को ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल की गई 80,000 से ज्यादा तस्वीरें और वीडियो मिले हैं। कई चैट लॉग मिले जिससे कई भिक्षुओं से उसके संबंधों का खुलासा हुआ है।

बौद्ध भिक्षुओं के ब्रह्मचर्य को पालन करने के नियम के उल्लंघन से बौद्ध संस्थानों में हलचल मच गई है। थाइलैंड में इस पर जबरदस्त बहस चल रही है। पिछले कुछ वर्षों में भिक्षुओं पर यौन अपराधों और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने के कई आरोप भी लगे थे।

रॉयल थाई पुलिस सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने बताया है कि इस मामले में करीब 9 बौद्ध भिक्षुओं को संलिप्त पाया गया है, जिन्हें मठ से निष्कासित कर दिया गया है।

महिला की ऐसे हुई गिरफ्तारी

बैंकॉक के उत्तर में नोंथबुरी प्रांत में रहने वाली 35 साल की विलावान एम्सावत को गिरफ्तार किया गया। चोरी के सामान भी उसके पास से मिले हैं। पुलिस को महिला विलावान के खाते से पता चला है कि थाईलैंड के एक बौद्ध मंदिर के बैंक खाते से एक वरिष्ठ भिक्षु ने उसे पैसे ट्रांसफर किए।

महिला ने ये स्वीकार किया बौद्ध भिक्षुओं से ऐंठे पैसे

थाई पुलिस ने बताया कि महिला विलावान को वरिष्ठ भिक्षुओं से पैसे मिले। पुलिस ने जाँच में पाया कि महिला ने बौद्ध भिक्षुओं को जब अपने प्रेम जाल में फँसाना शुरू किया तो पिछले 3 सालों में उसके खाते में 11.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 102.33 करोड़ रुपए आए। इनमें से ज्यादातर रकम बौद्ध भिक्षुओं ने ट्रांसफर किए हैं। जाँच में पता चला कि इनमें से अधिकांश पैसे ऑनलाइन खेली गई जुए वाली वेबसाइट पर खर्च कर दी गई।

मामले का ऐसे हुआ खुलासा

सेंट्रल इंवेस्टीगेशन ब्यूरो के उपायुक्त जारूनकियात पंकेव के मुताबिक जाँच पिछले महीने शुरू हुई और ये मामले तब सुर्खियों में आया जब बैंकॉक के एक प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर के वरिष्ठ भिक्षु पर गाज गिरी। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि महिला विलावन ने वरिष्ठ भिक्षु को अपने प्रेम जाल में फँसाया। उसने भिक्षु को बताया कि वह गर्भवती है और उसे 72 लाख थाई बाट की जरूरत है। ये रकम 222,000 अमेरिकी डॉलर या 1.85 करोड़ रुपए के बराबर है।
मामले के सामने आने के बाद थाइलैंड के मठ प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। देशभर में थेरवाद संप्रदाय के बौद्ध भिक्षुओं की संख्या काफी है जिन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। महिलाओं को छूने मात्र से इनके ब्रह्मचर्य पर सवाल उठने लगते हैं।
देश की बड़ी जनसंख्या बौद्ध धर्म को मानने वाली है और बौद्ध मठों को काफी दान दिया जाता है। ये पैसा बौद्ध भिक्षुओं, मठ के वरिष्ठ भिक्षुओं और दूसरे मद में खर्च होता है।
सेंट्रल इंवेस्टीगेशन ब्यूरो ने एक फेसबुक पेज बनाया है, जहाँ लोग किसी भिक्षुक की शिकायत कर सकते हैं। थाईलैंड में बड़े पैमाने पर बौद्ध भिक्षुओं की जाँच की जाएगी। जाँच के बाद कई बदलाव किये जाएँगे ताकि बौद्ध धर्म में लोगों की आस्था बनी रहे। मंदिर की वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कानून में भी संशोधन किया जा सकता है।
थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने अधिकारियों को आदेश दिये हैं कि जाँच में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाए और दोषी भिक्षुओं को हर हाल में सामने लाया जाए ताकि लोगों का विश्वास कायम रह सके।

आखिर 11A सीट का क्या है रहस्य? 27 साल पहले भी एक विमान हादसे में ’11A’ सीट पर बैठा यात्री ही बचा था जिंदा, एयर इंडिया विमान क्रैश के बाद थाई हीरो को याद आई 1998 की वह घटना

                        11A सीट के जीवित यात्री जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक और विश्वास कुमार रमेश 

अहमदाबाद विमान में सवार 242 लोगों की हादसे में मौत हो गई। हादसे में केवल भारतीय मूल के ब्रिटेन निवासी विश्वास कुमार रमेश की जान बच गई, जो फ्लाइट की 11A सीट पर बैठा था। ऐसा ही दर्दनाक विमान हादसा 27 साल पहले थाईलैंड में एयरबस A310 में भी हुआ था। इसमें जीवित बचे जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक की सीट भी 11A ही थी।

अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की खबर जैसे ही दुनिया भर में फैली वैसे ही थाईलैंड थाई गायक और एक्टर जेम्स रुआंगसाक लोयचुसाक ने दुख जताने के साथ ही सीट नंबर 11A को लेकर चौंका देने वाला खुलासा भी किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में 27 साल पहले वाले विमान हादसे का जिक्र किया है जिसमें वे अकेले बच निकले थे और सभी यात्रियों की मौत हुई थी।रुआंगसाक दिसंबर 1998 में थाई एयरवेज की उड़ान TG 261 में सवार थे. उस समय वह विमान दक्षिणी थाईलैंड में उतरने का प्रयास कर रहा था और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस दुर्घटना में 101 लोग मारे गए थे. वह 101 यात्रियों में से अकेले व्यक्ति थे जो जीवित बच गए थे।
सोशल मीडिया पर बताया 27 साल पुराना किस्सा एक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने साथ हुए किस्से को शेयर किया है। भारत में विमान दुर्घटना में जीवित बचे व्यक्ति भी उसी सीट पर बैठे थे, जिस पर 27 साल पहले मैं बैठा था यानी 11A. इसके आगे उन्होंने लिखा कि इस खबर को सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मेरी संवेदनाएं उन सभी के साथ हैं, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने परिजन को खो दिया है।दूसरे देश में एक और व्यक्ति के बारे में जानना, जो उसी सीट पर एक अलग दुर्घटना में बच गया, उन यादों को एक ऐसे तरीके से वापस ले आया जिसे शायद ही कोई समझ पाए।

लोयचुसाक थाइलैंड के चर्चित अभिनेता और गायक हैं। अहमदाबाद में विमान हादसे की खबर पता चलते ही लोयचुसाक ने फेसबुक पर पोस्ट किया। उन्होंने थाई भाषा में लिखा, “भारत में एक विमान दुर्घटना के जीवित बचे शख्स के जैसे ही मैं अपनी सीट 11A पर ही बैठा था।” उन्होंने कहा कि यह जीवन उनके लिए ‘दूसरी जिंदगी’ है। हादसे के 10 साल बाद तक उन्होंने हवाई यात्रा नहीं की।

इधर, एयर इंडिया की AI-171 आपातकालीन एग्जिट के पास बैठे विशाल रमेश भी मौत के छूकर वापस आए हैं। फिलहाल वे अहमदाबाद के एक अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता मैं कैसे बचा। जब मेरी आँखे खुलीं तो मैंने खुद को सीट से निकाला और भागने की कोशिश की।”

गौरतलब है कि 12 जून 2025 को एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद में उड़ान के कुछ मिनट बाद ही क्रैश हो गया। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों की मौत हो गई।

शासन परिवर्तन की नई लहर में थाईलैंड भी शामिल; क्या भारत अस्थिरता के बंधन से बच सकता है?


एक चौंकाने वाले फैसले से थाईलैंड में राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितता और बढ़ सकती है। संवैधानिक न्यायालय ने प्रधानमंत्री श्रेष्ठा थाविसिन को पद से हटा दिया है और कहा है कि उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है
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थाई प्रधानमंत्री श्रेष्ठा थाविसिन 14 अगस्त, 2024 को बैंकॉक, थाईलैंड में गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर मीडिया से बात करते हुए।© लिलियन सुवानरुम्फा/एएफपी/ गेटी इमेजेज

5-4 के फैसले ने श्रेष्ठा को कैबिनेट सदस्य की नियुक्ति से जुड़े मामले में तत्काल पद से हटा दिया। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि प्रधानमंत्री श्रेष्ठा ने जेल की सजा काट चुके वकील को कैबिनेट में नियुक्त करके नैतिकता नियमों का उल्लंघन किया है।

यह फैसला उसी अदालत द्वारा देश की लोकप्रिय प्रगतिशील मूव फॉरवर्ड पार्टी को भंग करने, जिसने पिछले वर्ष के चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीती थीं, तथा इसके नेताओं पर 10 वर्षों के लिए राजनीति से प्रतिबंध लगाने के एक सप्ताह बाद आया है।

प्रधानमंत्री श्रेष्ठा ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि वे "फैसले को स्वीकार करते हैं" और उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। उन्होंने कहा, "मुझे खेद है कि मुझे एक अनैतिक प्रधानमंत्री के रूप में माना जाएगा, लेकिन मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि मेरा मानना ​​है कि मैं ऐसा नहीं हूं।"

फिलहाल, मंत्रिमंडल बना रहेगा और संसद को नया प्रधानमंत्री चुनना होगा। शुक्रवार को मतदान होना है, लेकिन पद भरने के लिए कोई समय सीमा नहीं है। मंत्रिमंडल संसद को भंग करके नए चुनाव भी करवा सकता है।

अमेरिका कनेक्शन 

थाईलैंड के श्री श्रेष्ठा चीन के साथ अमेरिका की अपेक्षा से अधिक घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। श्री श्रेष्ठा एक स्वतंत्र विदेश नीति बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें वे थाईलैंड को उसके पारंपरिक सहयोगी अमेरिका से चीन की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि वे थाईलैंड के पड़ोसी के साथ केवल मधुर संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अमेरिका कथित तौर पर इससे नाखुश था।

अस्थिरता का हार

अजीब संयोगों की एक श्रृंखला में, हाल की घटनाओं ने भारत को एक अनिश्चित स्थिति में डाल दिया है। अस्थिर पड़ोसियों से घिरा भारत खुद को क्षेत्रीय अस्थिरता के एक जटिल जाल में पाता है। स्थिति की जांच करने पर सवाल उठते हैं: क्या यह पैटर्न महज संयोग है, या इसमें कोई गहरी साजिश है?

भारत के पड़ोस पर एक नज़र

  1. पाकिस्तान: आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक उथल-पुथल। अमेरिका और चीन दोनों का प्रतिनिधि।
  2. चीन: भारत को एक विपत्ति मानता है। अर्थव्यवस्था जैसी बढ़ती आंतरिक समस्याओं के साथ। मौजूदा नेतृत्व समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए किसी भी सैन्य कार्रवाई की तलाश कर सकता है।
  3. श्रीलंका: शासन परिवर्तन से पहले यह चीन का छद्म था, जो संभवतः सी.आई.ए. द्वारा संचालित किया गया था। आगामी चुनावों के मद्देनजर, यह देखना बाकी है कि नई सरकार कौन सी नीतियाँ अपनाएगी और वे देश के भविष्य को कैसे आकार देंगी।
  4. नेपाल: राजनीतिक अनिश्चितता। माना जाता है कि वर्तमान प्रधानमंत्री चीन का प्रतिनिधि है।
  5. बुटन: भारत का मित्र होने के बावजूद, चीनी आक्रामकता के कारण मोनार्क को चिकन नेक के पास अपनी कुछ ज़मीन छोड़नी पड़ी। यह एक जटिल स्थिति है जिससे भारत को सावधानीपूर्वक निपटना होगा।
  6. बांग्लादेश: शेख हसीना तक यह मित्र था। लेकिन अब जब चरमपंथी सत्ता में हैं और नई अंतरिम सरकार चरमपंथियों और भारत विरोधी राजनीतिक नेताओं को जेल से रिहा कर रही है, तो इसे मित्र मानना ​​मुश्किल है।
  7. म्यांमार: सैन्य अधिग्रहण के बाद, भारत के साथ सीमा पर स्थिति, जो अब विद्रोहियों के नियंत्रण में है, अनिश्चित बनी हुई है। भले ही कोई समूह वर्तमान में भारत के प्रति मित्रवत दिखाई दे, लेकिन संघर्ष की गतिशील प्रकृति का अर्थ है कि स्थिति जल्दी ही बदल सकती है, और एक नया, संभावित रूप से भारत विरोधी गुट नियंत्रण में आ सकता है।
  8. थाईलैंड: हालांकि यह भूमि पड़ोसी नहीं है, लेकिन यह भारत के साथ सांस्कृतिक संबंधों वाला समुद्री पड़ोसी है। अगर राजनीतिक उथल-पुथल जारी रही तो यह निश्चित रूप से भारत के लिए सिरदर्द बन जाएगा।

भविष्य का परिदृश्य

क्षेत्र में उथल-पुथल की बढ़ती जटिल प्रकृति को देखते हुए, निकट भविष्य में स्थिरता प्राप्त करना कठिन प्रतीत होता है।
यद्यपि पहली नजर में यह बात बेतरतीब लग सकती है, लेकिन व्यापक परिप्रेक्ष्य से पता चलता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देश अमेरिका और चीन के बीच भू-राजनीतिक संघर्ष में फंसे हुए हैं, जिनमें से प्रत्येक प्रभाव और नियंत्रण के लिए होड़ कर रहा है।
तेजी से विकसित हो रहे भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, भारत को दूसरों की कार्रवाइयों के नतीजों से बचने के लिए अधिक मुखर भूमिका अपनानी चाहिए। अब बस यही पूछना बाकी रह गया है कि क्या भारत अस्थिरता के बंधन से बच सकता है?