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बंगाल भी पहुंच गया योगी बुलडोज़र; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या, भीड़ ने TMC दफ्तर पर चलाया बुलडोजर: संदेशखाली में केंद्रीय बलों पर फायरिंग

                              कोलकाता में अवैध टीएमसी दफ्तर पर बुलडोजर एक्शन (साभार : Aajtak)
कोलकाता के न्यू मार्केट में मंगलवार (5 मई 2026) रात लोगों की भीड़ ने बुलडोजर चलाकर TMC का यूनियन ऑफिस ढहा दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह दफ्तर अवैध कब्जे की जमीन पर बना था। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है। न्यू मार्केट इलाके में TMC का ऑफिस जमींदोज कर दिया गया। 

स्थानीय लोगों के अनुसार यह दफ्तर एक दुकानदार से जबरन छीनी गई जमीन पर बना था। लंबे समय से लोग इस अवैध कब्जे से नाराज थे। चुनावी नतीजों के बाद उत्साहित लोगों की भीड़ ने बुलडोजर बुलाकर इसे हटा दिया। मौके पर मौजूद लोग इसे जनता का इंसाफ बता रहे हैं।

बंगाल में हो रहे उपद्रव को मुख्य चुनाव आयोग ने बंगाल गृह सचिव को उपद्रवियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। 

TMC का हंगामा और बीजेपी कार्यकर्ता की मौत

अचानक हुए इस एक्शन से न्यू मार्केट में भगदड़ मच गई। डर के मारे दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए। ऐतिहासिक हॉग मार्केट के पास व्यापारियों में काफी खौफ देखा गया। हालात बिगड़ते देख पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुँचीं। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और गश्त जारी है।

राज्य के अन्य हिस्सों में TMC समर्थकों पर हिंसा के आरोप लगे हैं। न्यू टाउन में BJP कार्यकर्ता मधु मंडल की कथित तौर पर TMC समर्थकों ने पिटाई कर दी, जिससे उनकी मौत हो गई। कई जगहों पर BJP कार्यकर्ताओं के घरों पर भी हमले हुए हैं। हावड़ा में भी एक कार्यकर्ता की मौत की खबर है, जिसकी पत्नी ने TMC समर्थकों पर आरोप लगाए हैं।

प्रशासन ने माँगी रिपोर्ट

TMC नेताओं ने इस बुलडोजर एक्शन को गलत बताया है। वहीं, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुई तोड़फोड़ और आगजनी पर चुनाव आयोग सख्त है। आयोग ने पुलिस से पूरी रिपोर्ट तलब की है। पुलिस ने साफ किया है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

अहमदाबाद की चंदोला झील से पूरी तरह हटाया जाएगा अवैध कब्जा, मुस्लिम पक्ष की याचिकाएँ हाई कोर्ट ने की खारिज: अवैध बांग्लादेशियों का गढ़ बन चुका है इलाका, एक्शन में 50 से ज्यादा बुलडोजर


गुजरात के अहमदाबाद में चंदोला झील के आसपास अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई को गुजरात हाई कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो इस कार्रवाई को रोकना चाहते थे।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि झील क्षेत्र में बने अवैध निर्माण, खासकर बांग्लादेशी घुसपैठियों के अड्डे, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थे। कुछ लोगों के आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का भी खुलासा हुआ।

अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि लल्लू बिहारी नामक शख्स ने आलीशान फार्महाउस बनाकर अवैध बांग्लादेशियों को शरण दी थी। तीन दिन पहले 1,000 से ज्यादा घुसपैठियों को पकड़ा गया। कार्रवाई में 50 से अधिक बुलडोजर लगाए गए।

पुलिस महानिदेशक विकास सहाय ने बताया कि गुजरात में 450 अवैध बांग्लादेशी पकड़े गए और 6,500 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई झील को अतिक्रमण से मुक्त करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी बताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश : अलीगढ में मंदिर में घुस कर सोहिल और इरफ़ान ने किया पेशाब : हिन्दू संगठन बोले – ये जिहादी हैं, इनके घरों पर चलाओ बुलडोजर

मंदिर में पेशाब करने वाले सोहिल और इरफ़ान अलीगढ़ में गिरफ्तार, घटनास्थल दिखाते हिन्दू संगठन के सदस्य (चित्र- FB/अलीगढ़ खबर)
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हिन्दू भावनाओं को आहत करने का मामला सामने आया है। यहाँ सोहिल और इरफ़ान नाम के 2 युवकों पर मंदिर में पेशाब करने का आरोप लगा है। नाराज हिन्दू संगठनों ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना मंगलवार (26 जून, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना अलीगढ़ के थाना क्षेत्र अकराबाद की है। यहाँ हिन्दू संगठन के सदस्य प्रशांत कुमार ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में प्रशांत ने बताया कि अकराबाद कस्बे के ही अंदर हिन्दुओं का भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में आसपास के अलावा काफी दूर के श्रद्धालु पूजा करने आते है। आरोप है कि बुधवार (26 जून) को सोहिल और इरफ़ान ने मंदिर परिसर में घुस कर पेशाब किया। स्थानीय हिन्दू संगठन पदाधिकारी विशाल शर्मा ने इस दोनों को लगभग 22 वर्ष का बताते हुए ‘जेहादी’ शब्द से सम्बोधित किया है।

हिन्दू संगठनों का आरोप है कि सोहिल और इरफ़ान ने यह हरकत जानबूझकर हिन्दू भावनाओं को आहत करने के लिए की है। दोनों का घर मंदिर के पीछे ही बताया गया है। दावा किया गया है कि हिन्दू संगठनों का आरोप है कि सोहिल और इरफ़ान ने यह हरकत जानबूझकर हिन्दू भावनाओं को आहत करने के लिए की है। दोनों का घर मंदिर के पीछे ही बताया गया है। इस घटना की सूचना पर पुलिस फ़ौरन ही मौके पर पहुँची। तहरीर ले कर सोहिल और इरफ़ान को FIR में नामजद आरोपित बना लिया गया है।

इस घटना पर डिप्टी एसपी राजेश द्विवेदी का बयान आया है। उन्होंने कहा कि दोनों नामजद आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने नाराज लोगों को समझाबुझा कर शाँत करवाया। मामले में जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल अकराबाद में हालत शांतिपूर्ण हैं। 

‘जिस दिन मुसलमान सड़कों पर आएगा तो फिर किसी के कब्जे में नहीं आने वाला’: बुलडोजर से बौखलाए मौलाना तौकीर रजा की धमकी

कांग्रेस नेता और अक्सर विवादों में रहने वाले मौलाना तौकीर रजा ने एक बार फिर भड़काऊ बयानबाजी की है। दिल्ली में अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलने से बौखलाए तौकीर रजा ने कहा है कि जिस दिन मुस्लिम सड़कों पर उतरेगा किसी के कब्जे में नहीं आएगा। तौकीर रजा ने पीएम मोदी को धृतराष्ट्र बताते हुए कहा है कि यदि उनका यही रुख रहा तो देश को महाभारत से कोई नहीं बचा सकता है।

तौकीर रजा ने कहा, “ईद के बाद इंशाल्लाह हमारी मीटिंग फाइनल होने वाली है और अगर इस दौरान हुकूमत ने अपने तरीके को दुरुस्त नहीं किया, एकतरफा कार्रवाई का अमल जारी रखा तो दिल्ली से ये ऐलान होगा कि हम देशव्यापी जेल भरो आंदोलन करेंगे। उसमें हिंदू-मुस्लिम तमाम लोग शामिल होंगे। इसमें हर जिले, हर सूबे से देश की एकता में विश्वास रखने वाले, खासकर मुस्लिम समाज के लोग शामिल होंगे। क्योंकि जब तुम हमारे साथ रहना नहीं चाहते, हम कहीं जा नहीं सकते। पाकिस्तान हमें कबूल नहीं करेगा, बांग्लादेश हमें कबूल नहीं करेगा, चीन हमें कबूल नहीं करेगा, हम कहाँ जाएँ?”

मौलाना ने आगे कहा, “हुकूमत हमारी बात सुनेगी नहीं, हमारी बात मानेगी नहीं, कोर्ट में अब हमें इंसाफ की उम्मीद नहीं रही। कोर्ट से जिस किस्म के फैसले आ रहे हैं, मैं देख रहा हूँ कोर्ट को नजरअंदाज किया जा रहा है। फैसला ऑन द स्पॉट हो रहा है। मुजरिम और मुलजिम में अंतर होता है। आरोपित और अपराधी में अंतर होता है। तो आरोपित के घर पर बुलडोजर चला देना अन्याय है। इस किस्म के अन्याय अगर इस हुकूमत में होते रहे तो इस देशव्यापी जेल भरो आंदोलन को रोकना हुकूमत के बस की बात नहीं रहेगी और जिस दिन मुसलमान सड़कों पर आएगा तो वह फिर किसी के कब्जे में नहीं आने वाला है। यह बात समझ लिया जाए।”

तौकीर रजा ने प्रधानमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा, “मैं हुकूमत को चेतावनी देता हूँ, खास तौर से नरेंद्र मोदी सरकार को। मैं उनको चेता देता हूँ कि अगर उन्होंने अपने इस तरीके को फौरी तौर पर दुरुस्त नहीं किया और तुम सबके प्रधानमंत्री हो। तुम्हारे मुल्क में इस किस्म की बेइमानी हो रही है और तुम खामोश हो, मूकदर्शक बने हुए हो, अंधे और बहरे बने हुए हो। ऐसा लगता है कि तुम महाभारत के धृतराष्ट्र हो। अगर धृतराष्ट्र अंधे और बहरे न बने रहे होते और वो तमाम बेईमानी न देख रहे होते तो महाभारत न हुई होती और अगर नरेंद्र मोदी धृतराष्ट्र की भूमिका से बाहर नहीं आए तो हिंदुस्तान में भी महाभारत होने से कोई बचा नहीं सकता।”

पहले भी दिया है विवादित बयान

ये मौलाना तौकीर रजा खान वही हैं जो पहले भी कई ऐसे ही भड़काऊ बयान दे चुके हैं। कांग्रेस  पार्टी को समर्थन देने का ऐलान करने वाले मौलाना तौकीर रजा का हिंदुओं के खिलाफ दिए गए भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में वो देश के हिंदुओं को धमकी देते सुनाई दे रहे थे। उनके इसी वायरल वीडियो पर एक चैनल पर जब बहस चल रही थी तो एंकर की तरफ से मौलाना रजा से इसे लेकर सवाल किया जाता है। एंकर का सवाल सुनते ही रजा भड़क जाते हैं और उन्हें मुँह तोड़ने की धमकी तक दे डालते हैं।
इससे पहले वह कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते नजर आए थे। चुनाव के वक्त में तौकीर रजा ने विवादित बयान देते हुए बाटला हाउस एनकाउंटर पर बोलते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला था और एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादियों को शहीद बता दिया था।

मध्य प्रदेश : खाना खाते-खाते गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बरखा दत्त को ऐसे धोया

                           बरखा दत्त को नरोत्तम मिश्रा का ये इंटरव्यू बना चर्चा का विषय (फोटो साभार: MOJO STORY)
पत्रकार बरखा दत्त को इंटरव्यू देने के दौरान मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के ‘स्वैग’ के लोग कायल हो गए हैं। जहाँ एक तरफ नरोत्तम मिश्रा अपने ही अंदाज़ में भोजन करते-करते सवालों के जवाब देते रहे वहीं दूसरी तरफ बरखा दत्त का चेहरा देखने लायक था। बरखा दत्त इस बात से नाराज़ थीं कि मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी पर इस्लामी भीड़ की हिंसा के बाद सरकार ने दंगाइयों के घरों पर आखिर बुलडोजर क्यों चलाया?

बरखा दत्त ने नरोत्तम मिश्रा से पूछा कि आपने ये बयान क्यों दिया कि जिन्होंने पत्थरबाजी की और घर जलाए, उनके खुद के घर भी खंडहर बन जाएँगे। उन्होंने पूछा कि ये किस तरह का कानून है? इस पर भोजन करते-करते नरोत्तम मिश्रा ने ‘जैसे को तैसा’ कहावत की याद दिलाते हुए कहा कि उनका मानना है कि दंगाइयों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने ऐसे लोगों को समाज का द्रोही बताते हुए कहा कि ये भले लोगों का जीना मुश्किल कर देते हैं।

नरोत्तम मिश्रा ने याद दिलाया कि कैसे दंगाइयों ने गरीबों के घर जलाए, बच्चों को निर्ममता से मारा और कई लोग ICU में भर्ती हो गए, कई पुलिसकर्मी अस्पताल में भर्ती हैं। नरोत्तम मिश्रा ने बरखा दत्त से सवाल पूछा कि ऐसे लोगों के साथ क्या करना चाहिए? इस पर बरखा दत्त कहने लगीं कि इसका फैसला पुलिस और कोर्ट करे, बुलडोजर का इसमें क्या रोल है? इस पर नरोत्तम मिश्रा ने सधा हुआ जवाब दिया कि दंगाइयों पर तात्कालिक कार्रवाई भी तो होनी चाहिए, सरकार नाम की कोई चीज भी तो दिखनी चाहिए।

नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “उत्तर प्रदेश में रामनवमी पर एक भी हिंसा की घटना नहीं हुई। हमारी जवाबदारी है, लेकिन हमारे एसपी को गोली लगी और पुलिस अधिकारी का सिर फटा – मतलब वो वहाँ थे। अब मध्य प्रदेश में भी तूतू-मैंमैं नहीं होगी।” बरखा दत्त इस दौरान ‘गुनहगार’ और ‘आरोपित’ का फर्क बताने लगीं, लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि सारी प्रक्रियाएँ कानूनी ढंग से पूरी की गई है। नरोत्तम मिश्रा ने दंगाइयों के घरों को पत्थर में तब्दील किए जाने वाले बयान पर कहा कि उनका बयान ऐसा था, आगे भी रहेगा।

नरोत्तम मिश्रा ने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें उनके बयान के लिए कोई दुःख नहीं है और वो इससे संतुष्ट हैं, क्योंकि सब कुछ कानून के दायरे में हो रहा है। इस पर बरखा दत्त कहने लगीं कि CAA विरोधी प्रदर्शनों में यूपी में हुई कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। इस पर नरोत्तम मिश्रा ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अक्षरशः पालन की बात कही। बरखा दत्त ने दावा किया कि सिर्फ मुस्लिमों के घर तोड़े जा रहे हैं, जिस पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘मुस्लिम’ समझ कर कुछ नहीं किया, ‘दंगाइयों’ पर कार्रवाई की।

‘हमला हमारे ही त्योहारों पर क्यों’: राजदीप सरदेसाई को मध्य प्रदेश गृहमंत्री की लताड़

मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के मौके पर हिंदुओं की शोभा यात्रा को जान-बूझकर निशाना बनाए जाने के बाद जो हिंसा भड़की, उसमें उपद्रवियों द्वारा कई दुकानों, मकानों को आग लगाया गया। इसके बाद मंदिरों में जो तोड़फोड़ हुई वो अलग और जो आधा दर्जन पुलिसकर्मी समेत 24 से ज्यादा लोग घायल हुए वो अलग…। छानबीन में सामने आया कि ये कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थी बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी। छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम इकट्ठा थे ताकि शोभा यात्रा पर फेंके जा सकें। जो इस बात को साबित करता है कि उपद्रवियों की मंशा देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की थी। वरना पत्थर और पेट्रोल बम जमा करने का क्या मतलब था। जब तक उत्तर प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में भी उपद्रवियों से सख्ती से निपटा नहीं जायेगा तब तक देश में बेगुनाह अकाल मौत के गाल में जाते रहेंगे। 

देश में उपद्रवियों पर कार्यवाही 2014 में सत्ता होने के बाद से शुरू हुई है, उससे पूर्व उपद्रवी ऐश करते थे और पीड़ित हिन्दू ही प्रताड़ित होता था। उसी को कसूरवार ठहराया जाता था। सरकार को केवल उपद्रवियों पर ही कार्यवाही नहीं, बल्कि इन्हे उकसाने वालों पर भी नकेल डालनी चाहिए। इनके बैंक खाते सील कर देने चाहिए। हर सरकारी सुविधा से वंचित कर देना चाहिए। 

प्रशासन को भी जब तथ्यों को पता चला तो उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और उपद्रवियों के घर बुलडोजर चलाया गया। अब पूरे घटनाक्रम को देखें तो मामला हिंदुओं पर हमला किए जाने से शुरू हुआ। मगर, जो वामपंथी लिबरल खेमा है उसे दिक्कत इस बात से नहीं है कि आखिर कैसे हिंसा को भड़काया गया। उन्हें मलाल इस बात का है कि प्रशासन आखिर उन उपद्रवियों की संपत्तियों पर कैसे बुलडोजर चला सकती है जो इस देश के अल्पसंख्यकों में आते हैं।

द वायर की आरफा खानुम शेरवानी को पढ़िए। उपद्रवियों के घर पर चलाए गए बुलडोजर से नाराज आरफा लिखती हैं कि ये बुलडोजर सिर्फ मुस्लिमों के घर तक नहीं रुकेगा बल्कि सबका नंबर आएगा। आरफा पूछती हैं, “किस कानून के तहत मुस्लिमों के घर खरगोन में गिराए जा रहे हैं? किस कानून ने ऐसा करने का अधिकार दिया है? क्या कोर्ट अब इस भारत में काम कर रहे हैं?”

सबा नकवी इस एक्शन से आहत होकर लिखती हैं, “तो संक्षेप में भारत में कानून की स्थिति ये है कि अगर मेरे पड़ोस में या इमारत में एक व्यक्ति या समूह दुर्व्यवहार करता है और वहाँ मुसलमान रहते हैं तो पूरे ब्लॉक को नीचे गिरा दिया जाएगा।” वह एनडीटीवी से बातचीत में कहती हैं, “ जब अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा से भरे भाषण दिए जाते हैं, तब तो कोई गिरफ्तारी नहीं होती।”

उपद्रवियों से हमदर्दी रखने वालों की लिस्ट में आरफा-सबा जैसे कई सेकुलरवादी हैं। स्वाति चतुर्वेदी ने भी अपने ट्वीट में शिवराज सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा है- मोदी और उनके मुख्यमंत्री अब कानून पर, प्रक्रिया पर और लोकतंत्र पर बुलडोजर चला रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अगर आप इन सेकुलरवादी, कट्टर विचारों वाले, या वामपंथी स्वभाव के लोगों के ट्विटर हैंडल खंगालेंगें तो आपको पता चलेगा कि इनके सवाल ये कहीं नहीं है कि आखिर हिंदुओं की यात्रा पर पथराव करके माहौल बिगाड़ने का क्या मतलब था बल्कि इनकी चिंता तो ये है कि आखिर कैसे प्रशासन उपद्रवियों के विरुद्ध इतनी सख्त कार्रवाई कर रहा है।

राजदीप को MP गृहमंत्री ने लताड़ा

राजदीप सरदेसाई, जो वामपंथी खेमे के वरिष्ठ माने जाते हैं उन्होंने हाल में अपने शो में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री से इस बाबत सवाल-जवाब करके अपनी खूब फजीहत कराई है। जैसे उनका सवाल देखिए- शिवराज सरकार मुस्लिम दंगाइयों को निशाना बना रही है पर हिंदू या हिंदुत्व दंगाइयों को कोई कुछ नहीं कह रहा?
मध्य प्रदेश के गृहमंत्री से लताड़ लगने के बाद राजदीप ने फिर अगला सवाल ओवैसी के कंधे पर रखकर पूछा। उन्होंने कहा “आप धर्म का इस्तेमाल करके राम नवमी पर नफरत फैलाना चाहते हैं, हिंदुत्व का राज करना चाहते हैं।” इस सवाल को सुन मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा, “ओवैसी जैसे लोगों के मन में हम प्रेम भी पैदा नहीं करना चाहते। हमने उनका प्रेम देखा है कैसा है। ये मैंने बताया न कि ये क्रोनोलॉजी है जो देश में चल रही है और आप जैसी चर्चाओं से कभी कभी गलत दिशा में चली जाती है। राम नवमी साल में एक दिन आती है और 12 जगह देश में दंगा हो जाता है। ये सब हमारे त्योहारों पर ही होता है न उनके त्योहारों पर नहीं होता कभी।”
राजदीप ने पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने आखिर क्यों कुछ नहीं किया जबकि अगर पुलिस चाहे तो कोई दंगा नहीं हो सकता। राजदीप का सवाल सुन नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “पुलिस अगर नहीं होती तो एसपी को गोली कैसे लगती, टाआई का सिर कैसे फटता, जवान घायल कैसे होते। मगर, ये लोग पहले से तैयारी किए हुए थे। उनके पास पत्थर थे, असला था, बंदूक थी, कट्टे थे। तभी तो गोली चली है।”
राजदीप ने प्रशासन कार्रवाई से आहत होकर कहा कि आखिर उनकी सरकार भाईचारा कैसे फैलाएगी अगर बार-बार इसी तरह डर बनाने का काम करेगी। इस पर राज्य गृहमंत्री ने कहा, “जब तक दंगाइयों के फन नहीं कुचले जाएँगे तब तक भाईचारा नहीं फैल पाएगा। इसलिए इन्हें सबक सिखाना जरूरी है।”
राजदीप ने गृहमंत्री के सामने ये मुद्दा उठाया कि बिहार में जैसे लोग मस्जिद के सामने जाकर नारेबाजी कर रहे हैं क्या आप धार्मिक जुलूस से अपनी ताकत का प्रदर्शन चाहते थे? यह सवाल सुन नरोत्तम मिश्रा भड़क गए। उन्होंने राजदीप की फजीहत करते हुए कहा, “आपको तो यही लगेगा।” उन्होंने पूछा कि आखिर धार्मिक जुलूस में कहाँ भाजपा या कॉन्ग्रेस का झंडा दिखाई दिया जो राजदीप को वो जूलूस राजनैतिक लग गया। नरोत्तम मिश्रा ने ये पूछे जाने पर कि क्या बुलडोजर पॉलिटिक्स का थोड़ा भी दुख है या नहीं, वह बोले जो गलती करेगा वो सजा को भुगतेगा।

रामनवमी पर अलग-अलग जगह हुआ माहौल बिगाड़ने का प्रयास

जानकर हैरानी होगी कि लिबरल और वामपंथियों में जितनी सुगबुगाहट उपद्रवियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलता देखकर हुई उतना उन्हें उस राम नवमी वाले दिन भी नहीं हुई जब केवल खरगोन में ही नहीं देश के विभिन्न राज्यों में राम नवमी की शोभा यात्रा को निशाना बनाया गया। आप देखें चाहे राजस्थान का करौली, बंगाल का हावड़ा, गुजरात का हिम्मतनगर, झारखंड का लोहारगढ़ या कर्नाटक का मुलबगल हो… हर जगह शोभा यात्रा को निशाना बनाकर यह सबूत दिया गया कि हिंदू त्योंहारों के लिए कितनी घृणा लोगों के मन में हैं मगर, इन सबके बाद भी लिबरलों की आँख बंद रही। ये नींद टूटी जब दंगाइयों पर कार्रवाई होनी शुरू हुई।
अब भी इन लोगों के जरिए या इनके अकॉउंट पर अगर संबंधित घटना या कार्रवाई पर बात हो रही है तो वो या तो मोदी सरकार की आलोचना के एंगल से हो रही है या फिर प्रशासन के एक्शन पर हो रही है। इनके लिए वो राजस्थान का करौली चर्चा का कारण नहीं है जहाँ 10-12 किलो के पत्थर छतों से हिंदुओं की शोभा यात्रा पर फेंके गए, मगर प्रशासन ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जगह हिंदू त्योहार के समय जगह-जगह धारा 144 लगा दी और वहीं दूसरी ओर रमजान के समय में दूसरे समुुदाय को पूरी-पूरी बिजली देने का वादा कर दिया।
ऐसे दोहरे रवैये वाले सेकुलरों के बीच रहते हुए मध्य प्रदेश के गृहमंत्री की तरह सवाल पूछना जरूरी हो जाता है कि हमारे ही धार्मिक आयोजनों पर हमले क्यों होते हैं? क्यों हिंदुओं की शोभा यात्रा को निशाना बनाया जाता है? क्यों वामपंथी ये मानते हैं कि हिंदुओं पर हमला हिंदुओं की गलती है कि आखिर वह मुस्लिम इलाके में अपना जुलूस लेकर गए कैसे?