मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी के मौके पर हिंदुओं की शोभा यात्रा को जान-बूझकर निशाना बनाए जाने के बाद जो हिंसा भड़की, उसमें उपद्रवियों द्वारा कई दुकानों, मकानों को आग लगाया गया। इसके बाद मंदिरों में जो तोड़फोड़ हुई वो अलग और जो आधा दर्जन पुलिसकर्मी समेत 24 से ज्यादा लोग घायल हुए वो अलग…। छानबीन में सामने आया कि ये कोई अचानक भड़की हिंसा नहीं थी बल्कि इसके लिए पहले से तैयारी की गई थी। छतों पर पत्थर और पेट्रोल बम इकट्ठा थे ताकि शोभा यात्रा पर फेंके जा सकें। जो इस बात को साबित करता है कि उपद्रवियों की मंशा देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की थी। वरना पत्थर और पेट्रोल बम जमा करने का क्या मतलब था। जब तक उत्तर प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में भी उपद्रवियों से सख्ती से निपटा नहीं जायेगा तब तक देश में बेगुनाह अकाल मौत के गाल में जाते रहेंगे।
देश में उपद्रवियों पर कार्यवाही 2014 में सत्ता होने के बाद से शुरू हुई है, उससे पूर्व उपद्रवी ऐश करते थे और पीड़ित हिन्दू ही प्रताड़ित होता था। उसी को कसूरवार ठहराया जाता था। सरकार को केवल उपद्रवियों पर ही कार्यवाही नहीं, बल्कि इन्हे उकसाने वालों पर भी नकेल डालनी चाहिए। इनके बैंक खाते सील कर देने चाहिए। हर सरकारी सुविधा से वंचित कर देना चाहिए।
प्रशासन को भी जब तथ्यों को पता चला तो उन्होंने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और उपद्रवियों के घर बुलडोजर चलाया गया। अब पूरे घटनाक्रम को देखें तो मामला हिंदुओं पर हमला किए जाने से शुरू हुआ। मगर, जो वामपंथी लिबरल खेमा है उसे दिक्कत इस बात से नहीं है कि आखिर कैसे हिंसा को भड़काया गया। उन्हें मलाल इस बात का है कि प्रशासन आखिर उन उपद्रवियों की संपत्तियों पर कैसे बुलडोजर चला सकती है जो इस देश के अल्पसंख्यकों में आते हैं।
द वायर की आरफा खानुम शेरवानी को पढ़िए। उपद्रवियों के घर पर चलाए गए बुलडोजर से नाराज आरफा लिखती हैं कि ये बुलडोजर सिर्फ मुस्लिमों के घर तक नहीं रुकेगा बल्कि सबका नंबर आएगा। आरफा पूछती हैं, “किस कानून के तहत मुस्लिमों के घर खरगोन में गिराए जा रहे हैं? किस कानून ने ऐसा करने का अधिकार दिया है? क्या कोर्ट अब इस भारत में काम कर रहे हैं?”
सबा नकवी इस एक्शन से आहत होकर लिखती हैं, “तो संक्षेप में भारत में कानून की स्थिति ये है कि अगर मेरे पड़ोस में या इमारत में एक व्यक्ति या समूह दुर्व्यवहार करता है और वहाँ मुसलमान रहते हैं तो पूरे ब्लॉक को नीचे गिरा दिया जाएगा।” वह एनडीटीवी से बातचीत में कहती हैं, “ जब अल्पसंख्यकों के विरुद्ध घृणा से भरे भाषण दिए जाते हैं, तब तो कोई गिरफ्तारी नहीं होती।”
उपद्रवियों से हमदर्दी रखने वालों की लिस्ट में आरफा-सबा जैसे कई सेकुलरवादी हैं। स्वाति चतुर्वेदी ने भी अपने ट्वीट में शिवराज सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा है- मोदी और उनके मुख्यमंत्री अब कानून पर, प्रक्रिया पर और लोकतंत्र पर बुलडोजर चला रहे हैं।
दिलचस्प बात ये है कि अगर आप इन सेकुलरवादी, कट्टर विचारों वाले, या वामपंथी स्वभाव के लोगों के ट्विटर हैंडल खंगालेंगें तो आपको पता चलेगा कि इनके सवाल ये कहीं नहीं है कि आखिर हिंदुओं की यात्रा पर पथराव करके माहौल बिगाड़ने का क्या मतलब था बल्कि इनकी चिंता तो ये है कि आखिर कैसे प्रशासन उपद्रवियों के विरुद्ध इतनी सख्त कार्रवाई कर रहा है।
राजदीप को MP गृहमंत्री ने लताड़ा
Bulldozers out in #Khargone: Deterrent or illegal? @drnarottammisra talks exclusively to India Today.#NewsToday pic.twitter.com/O5H5f5pybz
— IndiaToday (@IndiaToday) April 12, 2022
राजदीप सरदेसाई को अमेरिका में ऐसे ही थोड़े लपेटा था, इसने भी कारस्तानी की थी...??
— गोपाल सनातनी (@GopalSa22721269) April 13, 2022
So grihmantri's lob is not to control riots,rioters but to soread bhaichara 🥴 According to chordesai hindus should not take out procession on ram navmi . No colors on holi, no firecrackers on diwali,no ganga snan on purnima,no karwachauth,no raksha bandhan,no ganesutsav,nothing.
— basu (@baskodigama) April 13, 2022



No comments:
Post a Comment