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एअर इंडिया में हिन्दू कर्मियों के बिंदी-सिंदूर-तिलक-मंगल सूत्र पर रोक, वायरल हुआ ग्रूमिंग पॉलिसी का डॉक्यूमेंट


लेन्सकार्ट कंपनी में ड्रेस कोड को लेकर छिड़े विवाद के बाद अब एअर इंडिया की ड्रेसिंग पॉलिसी पर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एअर इंडिया के केबिन क्रू हैंडबुक में बिंदी, सिंदूर, तिलक और कलावा जैसे हिंदू धर्म के चिन्हों पर रोक लगाई गई। इसको लेकर इंटरनेट पर बहस तेज हो गई है और कई लोग इसे हिंदू पहचान छीनने से जोड़ रहे हैं।
वैसे अगर देखा जाए तो किसी भी एयर लाइन्स के किसी भी महिला क्रू को अपनी सनातनी पहचान में नहीं देखा। क्या कोई क्रू हिन्दू महिला विवाहित नहीं? अगर विवाहित है तो मांग में सिन्दूर और गले में मंगलसूत्र क्यों नहीं? दूसरे, एयरलाइन्स ही नहीं जितने भी सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय चैनल तक यही रोना है। सिन्दूर लगाया जाता है मांग में लेकिन लगाया जाता है छोटा-सा वह भी बालों में छिपा कर, क्यों? महिलाओं को मालूम होना चाहिए कि मांग में सिन्दूर का कितना बड़ा धार्मिक महत्व होता है। महिलाओं को इस कटु सच्चाई को जानना होगा।       
हिन्दू राष्ट्र या सेकुलरिज्म की बात करने वालों को इस गंभीर मुद्दे पर महिला आयोग, महिला वेलफेयर ओर्गनइजेशन्स और पुरोहितों से चर्चा करनी चाहिए।   

एक ‘एक्स’ यूजर ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिनमें ऐसे नियम बताए गए हैं। इसके बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर एक भारतीय एयरलाइन अपने कर्मचारियों की धार्मिक पहचान को क्यों सीमित कर रही है। कुछ यूजर्स ने इसे वेस्टर्न स्टैंडर्ड का असर बताया, तो कुछ ने कहा कि ज्यादातर कॉर्पोरेट में ऐसे नियम होते हैं।

हालाँकि, एअर इंडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि कर्मचारी बिंदी पहन सकते हैं और जो तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वे पुराने मैनुअल की हैं जो अब लागू नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बहस जारी है, जहाँ लोग धार्मिक स्वतंत्रता, कॉर्पोरेट नियम और समानता जैसे मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

बोइंग के ताबूत में आखिरी कील बन सकता है एअर इंडिया हादसा : 3 लाख करोड़ रूपए के घाटे, 4 लाख करोड़ रूपए का कर्ज और एयरबस से मिलती पटखनी

                                       बोइंग 787 अब सवालों के घेरे में हैं (फोटो साभार: ChatGPT AI)
अहमदाबाद में 12 जून, 2025 को हुए एअर इंडिया विमान हादसे में विदेशी मीडिया अपनी प्लेबुक पूरी कर चुका है। बोइंग को क्लीन चिट और भारतीय पायलट सुमीत सभरवाल को दोषी ठहराए जाने की कहानी को मूर्त रूप दिया जा चुका है। भले ही इस मामले में अभी अंतिम जाँच रिपोर्ट ना आई हो, लेकिन अमेरिकी मीडिया संस्थानों के लिए इस हादसे के दोषी कैप्टन सभरवाल हैं। 

बोइंग को अमेरिकी विमानन नियामक FAA ने भी शुरुआती तौर पर क्लीन चिट दी है और उसके विमान 787 ड्रीमलाइनर पर किसी जाँच या निर्देश जारी करने से इनकार किया है। हादसे की भारत में जाँच कर रही एजेंसी AAIB की अंतिम रिपोर्ट में अभी लम्बा समय लगने के कयास हैं। इस बीच सवाल उठे हैं कि क्या बोइंग को क्लीन चिट देने का प्रयास जल्दबाजी में इसलिए तो नहीं किया गया है कि उसकी पहले से जारी मुश्किलों में इजाफा ना हो और वह ड्रीमलाइनर की कोई गड़बड़ी उसके लिए और मुश्किलें ना खड़ी करे।

इस तर्क के पीछे कई कारण हैं। बोइंग की आर्थिक फ्रंट पर समस्याएँ, उसका वर्तमान में 787 ड्रीमलाइनर पर निर्भरता और एयरबस के मुकाबले में उसका पिछड़ता रिकॉर्ड इसी तरफ इशारा करते हैं। यह ट्रेंड स्पष्ट तौर पर दर्शाता है कि यदि 787 ड्रीमलाइनर शक के दायरे में आता है तो यह बोइंग के ताबूत में आखिरी कील होगी।

787 ही है इस समय बोइंग की लाइफलाइन 

787 ड्रीमलाइनर मॉडल इस समय बोइंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। बोइंग वर्तमान में 737 मैक्स, 787 और 777X की बिक्री करती है। जहाँ 737 मैक्स पहले से समस्याओं से जूझता रहा है, तो वहीं 777X की असल उड़ान में अभी समय है। इसके 2026 से बाजार में आने की संभावना है। 

787 अकेला बोइंग का ऐसा मॉडल है जो समस्याओं से नहीं घिरा है और जिसकी बाजार में माँग भी काफी अधिक है। एअर इंडिया हादसे में 787 ही शिकार बना है और अगर इसमें कोई तकनीकी दिक्कत सामने आई तो बोइंग के लिए अकेला कमाऊ मॉडल जमीन पर खड़ा हो जाएगा। 

रिपोर्ट्स बताती हैं कि जहाँ एक 737 मैक्स से बोइंग को 10-15 मिलियन डॉलर (लगभग 85-120 करोड़ रूपए) तक का फायदा होता है तो वहीं एक 787 ड्रीमलाइनर की बिक्री पर बोइंग 30 मिलियन डॉलर (250 करोड़ रूपए-500 करोड़ रूपए) तक का मुनाफा कमाती है। 

                                         बोइंग का 787-8 ड्रीमलाइनर मॉडल (फोटो साभार: Boeing)

787 ड्रीमलाइनर में तकनीकी खराबी निकलने पर बोइंग को इसका उत्पादन रोकना पड़ सकता है या फिर इनकी ग्राउंडिंग तक की नौबत आ सकती है। इससे बोइंग का घाटा कई गुना बढ़ जाएगा और साथ ही उससे विमान खरीदने वाली एयरलाइंस का विश्वास भी घटेगा। 

बोइंग के पास वर्तमान में लगभग 950 ड्रीमलाइनर डिलीवर करने के ऑर्डर हैं। एअर इंडिया हादसे में जो बोइंग 787 दुर्घटना ग्रस्त हुआ था, उसके फ्यूल कंट्रोल स्विच के मूवमेंट में समस्या बताई गई थी। इसका दोष पायलट सुमीत सभरवाल पर भले ही डाला गया हो, लेकिन अंतिम जाँच रिपोर्ट आना बाकी है।

यदि अंतिम जाँच रिपोर्ट में कहीं भी यह बात सामने आती है कि 787 ड्रीमलाइनर में तकनीकी खामियाँ हैं और उसके फ्यूल कंट्रोल स्विच या फिर अन्य किसी पुर्जे में खराबी है तो बोइंग को डिलीवरी रोकने के साथ उत्पादन तक रोकना पड़ सकता है जो बोइंग के लिए घातक सिद्ध होगा।

पहले से समस्याओं से घिरा है 787

ऐसा नहीं है कि बोइंग को 787 ड्रीमलाइनर को लेकर अब तक कोई समस्याएँ नहीं झेलनी पड़ रही हैं। इसके ऑर्डर की संख्या भले बड़ी हो लेकिन इसका उत्पादन बीते कुछ समय में धीमा रहा है क्योंकि कोविड की वजह से सप्लाई चेन में समस्याएँ आती रही हैं।

दूसरी तरफ से 787 को एयरबस का A350 कड़ी टक्कर दे रहा है। अभी तक बिक्री के मामले में भले ही 787 की संख्या A350 से अधिक रही हो लेकिन बीते 5 वर्षों में यह लगातार पिछड़ रहा है। 2020-25 के बीच जहाँ बोइंग ने लगभग 250 ड्रीमलाइनर बेचे हैं तो वहीं इस दौरान एयरबस 300 से अधिक A350 अपने ग्राहकों को देने में सफल रही है।

                                          एअरबस A350 (फोटो साभार: Airbus)

ऐसे में बोइंग पर दबाव बढ़ ही रहा है। 787 की छवि बिगड़ना इसकी बिक्री को गर्त में पहुँचाने के लिए एक उत्प्रेरक की तरह काम करेगा और बोइंग को तगड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है और साथ ही उसके हाथ से भविष्य के ऑर्डर भी छूट सकते हैं।

पाँच बरस से घाटा झेल रही है बोइंग

बोइंग ने अपना लेटेस्ट विमान मॉडल 737 मैक्स 2017 में एयरलाइंस को देना चालू किया था। बोइंग ने यह विमान पुराने 737 के डिजाइन पर बनाया था और इसे एयरबस के A320 नियो श्रेणी विमानों से प्रतिस्पर्धा के लिए डिजाइन किया गया था। बोइंग का वादा था कि यह विमान पुराने के मुकाबले कम तेल खपत करेगा और इसमें उससे सुविधाएं भी अधिक होंगी। 

बोइंग को इस विमान के हजारों ऑर्डर मिले थे। लेकिन 2018 और 2019 में दो नए नवेले बोइंग 737 मैक्स हादसे का शिकार हुए। यह हादसे इंडोनेशिया की लायन एयर और इथियोपिया की इथियोपियन एयरलाइंस के साथ हुए। इन हादसों में लगभग 350 लोग मारे गए। 

बोइंग ने पहले इन हादसों में पायलटों को दोषी बताने का प्रयास किया लेकिन जाँच में पता चला कि उसने इनमें एक नया MCAS नाम का सॉफ्टवेयर लगाया था, जिसके चलते यह हादसे हुए। इस सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते विमान नीचे की तरफ गोता लगाता रहा और हादसे का शिकार हुआ। 

बोइंग ने पायलटों को भी इस विषय में नहीं बताया था, इसलिए उसकी चोरी और संगीन हो गई। इन हादसों के चलते बोइंग को 737 मैक्स का 2019 में उत्पादन रोकना पड़ा। इसके अलावा जितने बोइंग 737 मैक्स डिलीवर हो चुके थे, उन्हें भी उड़ाने पर रोक लग गई। 

कंपनी को दोबारा इस विमान के लिए प्रमाणन लेने पड़े और मुकदमे झेलने पड़े और उसकी प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल गई। इसके चलते उसके नए ऑर्डर भी रुके और पुराने ऑर्डर्स पर भी असर पड़ा। बोइंग 2019 में ही नुकसान में चली गई। 2019 के बाद से एक डॉलर का मुनाफा कमाने में असफल रही है।

737 मैक्स पर हुए बवाल के अलावा बोइंग को कोविड महामारी और फिर सप्लाई चेन में समस्या के चलते उत्पादन पर असर के कारण भी मोटा नुकसान हुआ है जिससे वह अभी तक उबर नहीं पाई है। उसका उत्पादन भी वापस पटरी पर नहीं आ रहा। 

2019 से 2024 के बीच बोइंग लगभग 36 बिलियन डॉलर (3.09 लाख करोड़ रूपए) का घाटा झेल चुकी है। उसे सबसे तगड़ा घाटा 2020 और 2024 में उठाना पड़ा है। इन दोनों वर्ष में उसने लगभग 12 बिलियन डॉलर (1 लाख करोड़ रूपए) का घाटा उठाया है। यह सिलसिला 2025 में जारी है। 

अगर 787 को लेकर कोई बुरी खबर आती है तो बोइंग को और भी नुकसान झेलना पड़ेगा और उसका बचा खुचा राजस्व का रास्ता बंद होगा। ऐसे में उस पर दबाव और बढ़ जाएगा। 

कर्ज के पहाड़ में भी दबी है बोइंग 

बोइंग सिर्फ घाटे का ही पर्याय नहीं बनी है बल्कि उस पर लगातार कर्ज भी बढ़ता जा रहा है। बोइंग का यह कर्ज भी 2019 के बाद से लगातार बढ़ता गया है और बोइंग इसे चुकाने में भी असफल होती नजर आती है। बोइंग पर वर्तमान में 50 बिलियन डॉलर (4.25 लाख करोड़ रूपए) से अधिक का कर्ज है। 

बोइंग लगातार अपनी सप्लाई चेन सुधार और नए ऑर्डर्स के जरिए इस कर्ज को कम करने का प्रयास कर रही है लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। यह 2019 के बाद एक दो बार कम हुआ है लेकिन 2023 के बाद यह दोबारा बढ़ गया था 50 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया। 

एयरबस से पहले ही खा चुकी पटखनी

बोइंग की मुश्किलें कोई आज की नहीं हैं। वह बीते लगभग 15 वर्षों से प्रतिस्पर्धी एयरबस से दबाव झेल रही है। एयरबस एक के बाद एक उसका बाजार निगलती जा रही है। यूरोप से निकली एयरबस ने पहले A320 विमानों के जरिए बोइंग से नैरो बॉडी एयरक्राफ्ट्स का बाजार हथियाया। 

इसके बाद एयरबस ने A380 और A330 के जरिए बोइंग से वाइड बॉडी यानी बड़े एयरक्राफ्ट्स का बाजार भी हथिया लिया। एयरबस बीते कुछ वर्षों से बोइंग के 787 ड्रीमलाइनर को पछाड़ने के प्रयास में है। इसके लिए उसने A350 विकसित किया है जो बोइंग के मुकाबले कहीं अधिक यात्री ले जा सकता है। 

बोइंग के एयरबस के मुकाबले पिछड़ने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वर्ष 2010 तक लगभग दोनों ही कंपनियां 700-800 विमान की डिलीवरी प्रति वर्ष कर रहीं थी लेकिन 2010 के बाद यह खेल पलट गया और एयरबस ने बोइंग को पीछे छोड़ दिया।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2010 के बाद से बोइंग जहां लगभग 9600 एयरक्राफ्ट बेच पाई है, तो वहीं एयरबस इसी दौरान 10,700 से अधिक एयरक्राफ्ट अलग अलग एयरलाइंस को बेच चुकी है। एयरबस ने सबसे बड़ी बढ़त उसी दौर में हासिल की है जब बोइंग के साथ 737 मैक्स वाली समस्याएं चल रही थीं। 

बोइंग सिर्फ इसी मामले में नहीं पिछड़ी है। वह एयरबस से ऑर्डर्स के मामले में भी दबाव महसूस कर रही है। बोइंग को 2015 से 2024 के बीच लगभग 5000 विमानों के ऑर्डर मिले हैं जबकि इसी दौरान एयरबस को 8900 से अधिक एयरक्राफ्ट के ऑर्डर मिले हैं। ऐसे में वह बोइंग से लगभग दोगुना व्यापार कर रही है। 

787 में गड़बड़ी से ठप हो जाएगी कंपनी 

कर्ज, घाटा, 737 मैक्स प्रोग्राम के साथ समस्या और 777X प्रोग्राम में देरी के साथ ही यह स्पष्ट है कि बोइंग वर्तमान में 787 ड्रीमलाइनर पर ही निर्भर है। उसके राजस्व का बड़ा हिस्सा वर्तमान में 787 ड्रीमलाइनर से ही आता है। इसके अलावा वह एयरबस से लगातार मात खा रही है।

इन सब कारणों के चलते साफ़ हो जाता है कि एअर इंडिया हादसे में पायलट सुमीत सभरवाल को दोषी बताने का सिलसिला पहले दिन से क्यों चालू किया गया है। इसके लिए पटकथा हादसे के दिन से ही लिखी जा चुकी थी। 787 को साफ़ तौर बचाया जाए और बोइंग का धंधा चलता रहे, इसके लिए लगातार विदेशी मीडिया में पायलट पर खबरें चलती रहीं, इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मेडिकल हॉस्टल में खाना खा रहे थे डॉक्टर, जब छत में घुसा एयर इंडिया का विमान: 240+ मौतें, पीड़ित परिजनों को 1-1 करोड़ रूपए देगा TATA; हादसा या साज़िश?

                                           अहमदाबाद प्लेन क्रैश (फोटो साभार : X_CISFHQrs)
गुजरात के लिए गुरुवार (12 जून 2025) का दिन एक काला दिन बन गया। अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेक-ऑफ के चंद मिनटों बाद ही क्रैश हो गई।

इस दुर्घटना से देश हिल गया। News18 पर एंकर रुबिका लियाकत के लाइव शो "गूंज" में इस विमान में दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचे आकाश वत्स ने बताया कि विमान का एयर कंडीशन ठीक से काम नहीं कर रहा था। यात्री मैगज़ीनों से हवा कर रहे थे। जो विमान में कुछ तकनीकी खराबियों की ओर संकेत दे रहा है। 

अवलोकन करें:-

अहमदाबाद में मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराया एयर इंडिया प्लेन, भोजन कर रहे थे छात्र: PM मोदी ने ज

चर्चा यह भी हो रही है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है, ये तो TATA ग्रुप ही बता सकता है कि मेंटेनेंस तुर्किश की किसी कंपनी को दिया हुआ है। 

अहमदाबाद विमान हादसे की जांच शुरू, हाई लेवल कमेटी बनाई गई

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि अहमदाबाद में हुए दुखद विमान हादसे के बाद आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। यह जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रहा है और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक हो रही है।

 सरकार एक हाई लेवल कमेटी भी बना रही है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कमेटी हादसे की गहराई से जांच करेगी और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी कदम सुझाएगी।

इस विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स यानी कुल 242 लोग सवार थे। इनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के बड़े नेता विजय रूपाणी भी शामिल थे। विजय रूपाणी इस फ्लाइट में बिजनेस क्लास की 2D सीट पर सवार थे।

हादसा इतना भयानक था कि पूरा शहर सन्न रह गया। विमान मेघाणी नगर के रिहायशी इलाके में बीजे मेडिकल कॉलेज की मेस बिल्डिंग और अतुल्यम हॉस्टल से टकराया, और देखते ही देखते आग का गोला बन गया। चारों तरफ धुआँ, मलबा और चीख-पुकार फैल गई।

इस हादसे में सिर्फ एक यात्री रमेश विश्वास कुमार किसी चमत्कार से जिंदा बचा। बाकी 241 लोगों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। हालाँकि कई रिपोर्ट्स में दावा है कि बचने वालों की संख्या 2 है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 1:38 बजे हुआ। फ्लाइट बोइंग 787 ड्रीमलाइनर थी, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-ANB था। एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को ‘मेडे’ कॉल भेजी। ये कॉल तब दी जाती है, जब विमान में कोई बहुत बड़ी तकनीकी खराबी हो और जान का खतरा हो। लेकिन इसके बाद विमान से संपर्क टूट गया। विमान सिर्फ 625 फीट की ऊँचाई तक पहुँचा था और फिर अचानक नीचे आ गिरा।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान हवा में डगमगाया और फिर जोरदार धमाके के साथ क्रैश हो गया। मेघाणी नगर में जहाँ विमान गिरा, वहाँ की इमारतें हिल गईं। आसपास के लोग दौड़े, लेकिन आग और धुएँ ने सबकुछ तबाह कर दिया। हादसे के समय मेडिकल कॉलेज में छात्र भोजन कर रहे थे।

हादसे की खबर मिलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जी.एस. मलिक ने बताया कि अब तक 204 शव बरामद हो चुके हैं। 41 लोग घायल हैं, जिनका सिविल और प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा है। मरने वालों की पहचान के लिए DNA टेस्ट किए जा रहे हैं। क्योंकि हादसा इतना भयानक था कि कई शवों को पहचान पाना मुश्किल हो गया है। राहत और बचाव के लिए NDRF, BSF और आर्मी की टीमें दिन-रात लगी हैं।

रैपिड एक्शन फोर्स और CRPF के 100 से ज्यादा जवान मलबा हटाने और लोगों को बचाने में जुटे हैं। दमकल की सात गाड़ियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत कुछ जलकर खाक हो चुका था।

हादसे में जिंदा बचे इकलौते यात्री रमेश विश्वास कुमार की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। रमेश ने बताया, “विमान में धमाका हुआ, और चारों तरफ आग फैल गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया। एंबुलेंस में मुझे अस्पताल लाया गया। मुझे यकीन नहीं होता कि मैं जिंदा हूँ। ये किसी करिश्मे जैसा है।” रमेश का इलाज अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालत नाज़ुक है, लेकिन वो जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उनकी बातें सुनकर हर कोई हैरान है कि इतने बड़े हादसे में कोई कैसे बच सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक सवार थे। हादसे की खबर मिलते ही लोग अपने अपनों की खबर लेने के लिए अस्पतालों की ओर दौड़े। भावना पटेल नाम की एक महिला ने बताया कि उनकी बहन इस फ्लाइट में थी। वो रोते हुए अपनी बहन की हालत जानने की कोशिश कर रही थीं। ऐसे कई परिवार हैं जो अपनों को खोने के गम में डूबे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने ट्वीट किया, “अहमदाबाद का हादसा दिल दहलाने वाला है। मेरी संवेदनाएँ पीड़ित परिवारों के साथ हैं।” उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और नागरक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से बात की और राहत कार्य तेज करने को कहा। गृहमंत्री अमित शाह शाम के समय हादसे वाली जगह पर भी पहुँचे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी शोक जताते हुए कहा, “ये हादसा दिल तोड़ने वाला है। पूरा देश पीड़ितों के साथ खड़ा है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी दुख जताया, क्योंकि विमान में कई ब्रिटिश नागरिक सवार थे।

एयर इंडिया ने हादसे की पुष्टि की और हेल्पलाइन नंबर 1800-5691-444 जारी किया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कंट्रोल रूम बनाया, जिसके नंबर 011-24610843 और 9650391859 हैं।

एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, “हम प्रभावित परिवारों को हर मुमकिन मदद दे रहे हैं।” विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो की टीम हादसे की जाँच के लिए अहमदाबाद पहुँच चुकी है। DGCA के मुताबिक, विमान के दोनों पायलट अनुभवी थे। कप्तान के पास 8,200 घंटे और को-पायलट के पास 1,100 घंटे का उड़ान अनुभव था। लेकिन फिर भी ये हादसा कैसे हुआ, ये सवाल सबके मन में है।

हादसे के तुरंत बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सभी उड़ानें रोक दी गई थी, हालाँकि शाम तक सीमित संख्या में उड़ाने फिर से शुरू कर दी गईं। विमान ने दिल्ली से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी थी, और कुछ देर रुकने के बाद लंदन रवाना हुआ था। हादसे की वजह से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मची है। मेघाणी नगर के लोग अब भी सदमे में हैं। वहाँ की गलियाँ मलबे और दुख से भरी पड़ी हैं।

ये हादसा भारत के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। विजय रूपाणी जैसे बड़े नेता का जाना और 241 लोगों की मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। गुजरात ही नहीं, पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। लोग सोशल मीडिया पर शोक जता रहे हैं। बीजेपी के गुजरात अध्यक्ष सीआर पाटिल ने भी रूपाणी के निधन की पुष्टि की और कहा कि ये पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है।

अब सबकी नजरें जाँच पर टिकी हैं। आखिर इतना बड़ा हादसा हुआ कैसे? क्या तकनीकी खराबी थी या कोई और वजह? इन सवालों के जवाब मिलने में वक्त लगेगा। लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर बता दिया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। जो लोग सुबह अपने घरों से निकले, उन्हें क्या पता था कि वो कभी लौटकर नहीं आएँगे। पूरा देश इस दुख में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। और उम्मीद है कि रमेश विश्वास जैसे लोग जिंदगी की इस जंग को जीत जाएँगे।

अमेरिका की NTSB की टीम जांच में सहयोग करने अहमदाबाद आएगी

अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) जानकारी दी कि NTSB की एक टीम अमेरिका से भारत आएगी और दुर्घटना की जांच में भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की मदद करेगी।

बोइंग के CEO बोले- जांच में पूरा सहयोग करेंगे

बोइंग के CEO केली ऑर्टबर्ग ने कहा, "हम यात्रियों और क्रू मेंबर्स के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। अहमदाबाद में हादसे से प्रभावित सभी लोगों के साथ हमारी सहानुभूति है।" उन्होंने बताया कि उन्होंने एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से बात की है और बोइंग की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बोइंग की एक टीम जांच में भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की पूरी मदद के लिए तैयार है।

‘नमाज पढ़ने की छूट, टीका लगाने पर सजा’: एयर इंडिया की हिंदू कर्मचारी ने मुस्लिम अधिकारी पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, न्याय के लिए मोदी से लगाई गुहार

      चंचल त्यागी ने लगाए एयर इंडिया के सीनियर स्टाफ पर गंभीर आरोप (फोटो साभार: X_Chancha94737623)
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कार्यरत एयर इंडिया की महिला कर्मचारी चंचल त्यागी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने उत्पीड़न की शिकायत की है। चंचल का आरोप है कि एयर इंडिया की एक मुस्लिम अधिकारी महजबीन उन्हें माथे पर तिलक लगाने से रोक रही हैं। इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा, जब चंचल ने अपने इस उत्पीड़न के खिलाफ दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तहरीर भी दी, लेकिन वहाँ से कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने वीडियो जारी कर पीएम मोदी से लेकर अन्य नेताओं से न्याय की माँग की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सहारनपुर के जड़ौदा पांडा गाँव की निवासी चंचल त्यागी एयर इंडिया में ढाई साल से कार्यरत हैं। वो वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल नंबर 3 पर सहायक के पद पर काम कर रही हैं। चंचल का कहना है कि उन्होंने बचपन से ही सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिसमें रोज पूजा के बाद तिलक लगाना शामिल है। शुरूआती दिनों में कंपनी में किसी को उनके तिलक लगाने से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन जब मुस्लिम अधिकारी महजबीन आईं, तो उन्होंने तिलक लगाने पर आपत्ति जताई और चंचल को तिलक हटाने का दबाव डालने लगीं।

चंचल ने कहा कि वह नवरात्रि के समय से महजबीन के निशाने पर हैं। महजबीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि एयर इंडिया में काम करने के लिए तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और अगर चंचल तिलक लगाकर ऑफिस आती हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चंचल का दावा है कि उन्हें बार-बार तिलक न लगाने के लिए मजबूर किया गया, और जब उन्होंने इस दबाव को नजरअंदाज किया, तो उनके साथ अन्य तरीकों से उत्पीड़न शुरू हो गया।

चंचल त्यागी ने आरोप लगाया कि उनके काम में हस्तक्षेप किया जाने लगा, उन्हें बेवजह टोका-टोकी की जाने लगी। उन्होंने बताया कि वॉशरूम जाने तक पर उन्हें टोक दिया जाता था, और उनके काम की सही तरीके से एंट्री भी नहीं की जाती थी। 8 घंटे की ड्यूटी के बावजूद, आधे दिन की ही एंट्री की जाती थी। इसके अलावा, जब चंचल ने दिवाली की छुट्टी के लिए आवेदन किया, तो उसे भी निरस्त कर दिया गया। चंचल का मानना है कि उनके उत्पीड़न का मुख्य कारण उनका तिलक लगाना है।

चंचल त्यागी ने बताया कि महजबीन ने मुस्लिम स्टाफ को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने की अनुमति दी है, लेकिन जब चंचल अपनी सनातन परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर आती हैं, तो उन्हें इसके लिए सजा दी जाती है। चंचल ने वीडियो में कहा, “यह कोई पाकिस्तान नहीं है, जो हम तिलक नहीं लगा सकते। हिंदू संस्कार हमारे खून में हैं, और मैं इसे नौकरी के लिए नहीं छोड़ सकती।”

चंचल त्यागी ने अपने उत्पीड़न की शिकायत पहले एयरपोर्ट प्रशासन और फिर दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास की, लेकिन जब वहाँ से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी व्यथा व्यक्त की और पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि नौकरी छोड़ने के अलावा उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि महजबीन लगातार उनका उत्पीड़न कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब एयर इंडिया की मुस्लिम अधिकारी महजबीन से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि कंपनी के नियम और ड्रेस कोड सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। महजबीन ने कहा, “कंपनी में ड्रेस कोड के तहत हिंदू कर्मचारी को तिलक लगाने और मुस्लिम कर्मचारी को टोपी पहनने की अनुमति नहीं है। एयरपोर्ट पर विभिन्न धर्मों के यात्री आते हैं, और इसलिए यह नियम बनाए गए हैं ताकि किसी भी धार्मिक प्रतीक को दिखाने से बचा जा सके।”

महजबीन ने यह भी कहा कि कंपनी में सभी धर्मों के लोग काम करते हैं और उन पर समान नियम लागू होते हैं। लेकिन चंचल त्यागी ने इन नियमों का उल्लंघन किया, जिसके बाद उन्हें हिदायत दी गई थी।

चंचल त्यागी के वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया है। सोशल मीडिया पर कई लोग चंचल के समर्थन में आ गए हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, एयर इंडिया की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन महजबीन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया है।

केरल : एयर इंडिया की एयरहोस्टेस सुरभि खातून मलाशय(rectum) में छिपा कर लाई 1 किलो सोना

प्राइवेट पार्ट में सोना डालकर तस्करी कर रही थी एयर होस्टेस सुरभी खातून (फोटो साभार: इंडिया टुडे)

केरल के कन्नूर में एयर इंडिया की एक एयरहोस्टेस को सोना तस्करी करने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुरभि खातून नाम की एयरहोस्टेट अपने प्राइवेट पार्ट (मलाशय) में 1 किलो के करीब सोना छिपाकर भारत आ रहीं थीं, लेकिन इसकी सूचना किसी ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों को दे दी और सुरभि खातून गिरफ्तार हुई।

छानबीन में सामने आया कि सुरभि खातून पहले भी सोने की तस्करी के कई मामलों में शामिल रही है। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता पर पूछताछ की। पता लगाया गया कि कहीं केबिन क्रू के अन्य सदस्य भी सोने तस्करी की गतिविधियों में तो शामिल नहीं थे।

अभी तक पूछताछ से कथिततौर पर चालक दल के कुछ और सदस्यों की मिली-जुली भगत सामने आई है। ऐसे में सुरभि खातून के बाद कुछ और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि ये नाम सुरभि ने ही अधिकारियों को बताए हैं। उसने ये भी बताया है कि उसे तो तस्करी गथिविधियों के लिए काम पर रखा गया था, इसमें से उसे हर डिलीवरी का कमीशन आता था।

 डीआरआई अधिकारियों ने ओमान की राजधानी मस्कट से उड़ान भरकर भारत आने वाली एयर इंडिया एक्प्रेस की फ्लाइट में हो रही सोने तस्करी से जुड़ी जानकारी पाने के बाद ये कार्रवाई की। जाँच के बाद उसके शरीर से करीबन 960 ग्राम सोना बरामद हुआ। अधिकारियों ने उसे पूछताछ के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया और बाद में उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।


क्यों उड़ान नहीं भर पा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस? कर्मचारियों की बर्खास्तगी तक पहुँचा संकट: अब तक 100 फ्लाइट कैंसल

एयर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) में कर्मचारियों का संकट गहरा गया है। बताया जा रहा है कि विरोध प्रदर्शन करने के नाम पर एक साथ करीबन 200 स्टाफ मेंबर ने सिक लीव ले ली, जिसकी वजह से एयरलाइन की 100 उड़ानें बाधित हुईं। साथ ही पैसेंजर्स को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद एयरलाइन ने 25 स्टाफ मेंबर्स पर कार्रवाई की है। वहीं बाकी बचे स्टाफ को नोटिस भेजकर नौकरी पर आने को कहा है। साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि अगर वो बात नहीं मानते तो फिर एक्शन लिया जाएगा।

कहाँ की फ्लाइट हुई कैंसिल

जानकारी के मुताबिक, एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास अभी 70 प्लस एयरक्राफ्ट हैं। रोजाना ये एयरलाइन 300 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेट करती है। 1 हफ्ते में इस एयरलाइन्स से 2500 फ्लाइट्स ऑपरेट की जाती है। ये उड़ानें देश के 31 और विदेश के 14 शहरों में ऑपरेट होती हैं। मंगलवार को स्टाफ की कमी के कारण नई दिल्ली, श्रीनगर, गुवाहाटी, बेंगलुरु, गोवा, तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कालीकट, कुन्नूर, कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानें कैंसिल करनी पड़ी थीं, जिसकी वजह से काफी नुकसान हुआ था और पैसेंजर्स को दिक्कत भी हुई थी।

क्यों बिगड़े हालात

एयर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन की मानें तो 2022 में टाटा द्वारा टेकओवर के बाद हालत बिगड़े हैं। वेतन का बड़ा हिस्सा पोस्टर लाइफ इंश्योरेंस से जोड़ा गया है जिससे कर्मचारी नाराज हैं। इसके अलावा सीनियर्स पर भेदभाव का आरोप है। साथ ही ये भी बात हैं कि यहाँ प्रमोशन की नीति ठीक नहीं है। इसके अलावा ये इस प्रदर्शन का कारण एआईएक्स कनेक्ट और विस्तारा का एअर इंडिया में विलय करना, भी माना जा रहा है। कर्मचारी कह रहे हैं कि ऐसे निर्णय एअर इंडिया के मूल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।

मामला सुलझाने के लिए हो रही बात

एयरलाइन इस संकट को खत्म करने के लिए मैनेजमेंट वर्कर्स की यूनियन से बात कर रही हैं। कोशिश की जा रही हैं कि किसी भी तरह से उड़ानें प्रभावित न हों। मगर, हालात देख लगता है कि फिलहाल कर्मचारी काम पर लौटने के लिए तैयार नहीं हैं।
ऐसे में एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अचानक छुट्टी पर जाने वाले 200 में से 25 क्रू मेंबर्स को नौकरी से निकाल दिया है। बाकी बचे सभी सदस्यों को नौकरी ज्वाइन करने को कहा है। वहीं यात्रियों से उन्हें हो रही असुविधा के लिए माफी माँगी है।
मंगलवार को एयरलाइन के 200 से ज्यादा कर्मचारियों के एकसाथ छुट्टी जाने पर कंपनी की उड़ानों के परिचालन पर 100 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं थीं। इससे एयर इंडिया एक्सप्रेस का परिचालन लगभग ठप हो गया था, जिससे करीब 15 हजार यात्री प्रभावित हुए।

कभी जस्टिन ट्रूडो के पिता ने खालिस्तानी आतंकियों को दी थी पनाह, अब बेटा दोहरा रहा वही गलतियाँ

                                          जस्टिन ट्रूडो और उनके पिता पियरे ट्रूडो (चित्र साभार: सीबीसी)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो खुले तौर पर खालिस्तानी आतंकवादियों के पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने एक खालिस्तानी आतंकवादी की मौत का जिम्मेदार भारतीय एजेंसियों को बताया है। जस्टिन जैसी गलती आज कर रहे हैं वैसी ही गलती उनके पिता पियरे ट्रूडो (Pierre Trudeau) आज से लगभग 4 दशक पहले कर चुके हैं और इसके काफी भयानक परिणाम कनाडा को भी भुगतने पड़े थे।

जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो ने भी खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लिया था। जस्टिन के पिता पियरे वर्ष 1968 से लेकर 1979 और 1980 से 1984 के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री रहे थे। इस दौरान भारत में खालिस्तान का आतंक चरम पर था और खालिस्तानी आतंकी भारत से भागकर कनाडा में शरण ले लेते थे।

भारत ने बढ़ते हुए आतंकवाद को रोकने के लिए कनाडा से इन तत्वों पर कार्रवाई की माँग की थी। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान भारत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान ना ही कनाडा में संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को रोका और ना ही उन आतंकियों को भारत वापस भेजा जो कि लगातार कनाडा में बैठकर भारत को तोड़ने की साजिश कर रहे थे।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था।

तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी। तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे। उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

इसके लिए उसने वैंकुवर से उड़े एक विमान में रखे एक बैग में बम रखा था जो कि आगे जाकर टोक्यो में एयर इंडिया के विमान में हस्तांतरित किया जाना था। टोक्यो के एयरपोर्ट में यह बैग इस विमान से निकाले जाने और एयर इंडिया के विमान में रखे जाने से पहले ही स्टोरेज क्षेत्र में फट गया जिसमें 2 जापानी एयरपोर्ट कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

इस हादसे की जाँच भी आगे कहीं नहीं पहुँच सकी क्योंकि कनाडा की सरकार ने इसमें काफी ढील बरती और मात्र इंदरजीत सिंह रैयत ही मात्र आरोपी ठहराया जा सका। इंदरजीत को भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने 2017 में छोड़ दिया था और सामान्य जीवन बिताने को कह दिया था। यह भी दावा किया जाता है कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि तलविंदर सिंह ऐसा कोई बड़ा काण्ड करने वाला है लेकिन तब भी उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और इसके कारण इतना बड़ा हमला हुआ।

वहीं तलविंदर सिंह परमार को कॉमनवेल्थ नियमों का हवाला देकर भारत को नहीं सौंपा गया था। नियमों के अनुसार, 2 कॉमनवेल्थ देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए अलग से संधि नहीं करनीं पड़ती है। इसी आधार पर इंदिरा गाँधी की सरकार ने परमार को भारत वापस भेजने को कहा था लेकिन पियरे ट्रूडो की सरकार ने यह कारण दिया कि भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य तो है लेकिन वह ब्रिटेन की रानी को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानता, इसलिए परमिंदर को भारत नहीं भेजा जा सकता।

परमिंदर को भारत ना भेजने और खालिस्तानियों पर ढील बरतने के कारण कनाडा में उस समय खालिस्तानी आतंकवादियों के हौसले खूब बढ़ गए थे, उन्होंने ऐसे सिखों को निशाना बनाना चालू कर दिया था जो कि अलग देश की माँग का विरोध करते थे।

                                             पियरे ट्रूडो (बाएँ) के साथ जस्टिन ट्रूडो (दाएँ)

इसी कड़ी में वर्ष 1998 में इंडो-कैनेडियन अखबार के सम्पादक तारा सिंह हायेर को मार दिया गया था। तारा सिंह को 18 नवम्बर, 1998 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। वह सिख आतंकवाद के विरोधी थे और इस बारे में लिखते रहते थे। उन्होंने 1988 में एयर इंडिया विस्फोट के बारे में लिखते हुए बताया था कि इसमें तलविंदर का हाथ हो सकता है। तलविंदर सिंह परमार बाद में भारत में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। वह एयर इंडिया के इस विमान में बम धमाका करने के बाद भारत लौट आया था और यहाँ पर अपनी आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। उसे वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

कनाडा में लगातार हिन्दू मंदिरों पर हमले सहित भारतीय राजनयिकों को मारने की धमकियाँ सार्वजनिक रूप से दी जा रही है लेकिन कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने इन सब कामों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इसके अतिरिक्त, हाल ही में कनाडा में एक खालिस्तान रैली में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या वाली झाँकी निकाली गई थी।

जस्टिन ट्रूडो लगातार ऐसे तत्वों के साथ नजर आते हैं जो कि भारत को तोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जस्टिन, जसपाल अटवाल के साथ नजर आते रहे हैं जो कि एक खालिस्तानी आतंकवादी है। कनाडा में गुरवन्तपंत सिंह पन्नू पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह दिन भर भारत के विरुद्ध जहर उगलता है।

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घर में भी घिरे जस्टिन ट्रूडो, कनाडा के पत्रकार ने कहा- भारतीय राजनयिक को हटाना पागलपन

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर मढ़ा है। इस आर....

कनाडा सरकार के इस रवैये से भारत में सुरक्षा खतरों के साथ ही कनाडा में रहने वाले हिन्दुओं तथा खालिस्तान का विरोध करने वाले सिखों का जीवन खतरे में पड़ गया है। जस्टिन ने अपने पिता की गलितयों से नहीं सीख कर स्थितियों को और जटिल बना दिया है। उन्होंने भारत का सहयोग करने के बजाय विरोध करने निर्णय लिया है।

AirIndia के कर्मचारियों की करतूत, शाकाहारी बता जैन दंपत्ति को फ्लाइट में खिलाई मछली

एयर इंडिया स्टाफ ने जैन व्यक्ति को परोसा नॉन वेज
एयर इंडिया फ्लाइट में एक जैन दंपत्ति को शाकाहारी बताकर मछली खिलाने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि एयर इंडिया के दो मुस्लिम स्टाफ ने जैन पैसेंजर को कहा कि उन्हें जो दिया गया है वो वेज खाना है और वो बिन चिंता के वे इसका आनंद लें। हालाँकि, बाद में किसी अन्य स्टाफ से फिर कन्फर्म पर सामने आया कि उन्हें मछली परोसी गई है। जैन व्यक्ति ने इस घटना की वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला है जिसके बाद एयर इंडिया ने उनसे इस मामले की जाँच के लिए उनकी टिकेट आदि माँगी है।

इस वीडियो के साथ साझा जानकारी के अनुसार, राघवेंद्रं जैन ने अपने यूट्यूब पर लिखा कि टोक्यों से दिल्ली आने के दौरान उन्होंने AI 307 में सफर किया। इस यात्रा में उन्होंने ग्लूटन फ्री वेज, जैन खाना माँगा था। ये ऑर्डर प्री बुक और कन्फर्म था। लेकिन फातिमा मुन्नी और यमन खान ने उन्हें नॉन वेज खाना वेज बताकर दे दिया। जब उन्होंने ये खोला तो उन्हें मछली की बू आई। वे फातिमा के पास गए। जहाँ फातिमा और यमन दोनों ने वेरीफाई किया कि ये शाकाहारी खाना है और इस बारे में वे कोई चिंता न करें। उन लोगों ने हँस कर यात्री से खाना खाने को कहा।

वह लिखते हैं, “मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ निवाले गए पर जैसे ही कोई और स्टाफ सदस्य वहाँ से गुजरा हमने फिर कन्फर्म किया। उन्होंने सूँघकर कहा कि ये तो मछली है और ग्लूटन फ्री खाना बड़ी मुश्किल से शाकाहारी होता है। इसके बाद मैंने कैबिन क्रू से शिकायत करने की कोशिश की। पहली दोषी फातिमा मुन्नी है जिसने हँसकर बात टाली और दूसरा नाम विकास चोपड़ा है जिसने जवाब दिया- अब क्या नाक रगड़ें तुम्हारे सामने। सॉरी बोल तो दिया।”

आगे राघवेंद्र ने लिखा, “वो दिन हमारी जिंदगी का सबसे घटिया दिन था। मेरी पत्नी अब भी उस घटना की वजह से बीमार हैं और हम इमोशनल स्ट्रेस में हैं। हमने तमाम धमकियों के बाद पूरा मामला रिकॉर्ड करने की कोशिश की। यमन खान पूरी फ्लाइट में हमसे वीडियो डिलीट करने को कहता रहा। केवल सुपरवाइजर जोशी मैम ने हमसे संवेदना दिखाई और माफी माँगी।”

इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे जैन व्यक्ति लगातार फ्लाइट कर्मियों से उनके किए की शिकायत कर रहे हैं मगर वे लोग बार बार दोहरा रहे हैं कि क्या उनको लगता है कि वे ये सब जान कर करेंगे। फातिमा मुन्नी के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नहीं है। जैन आदमी बार बार कहता है, “मेरे पूछने के बाद भी आपने मुझे मीट खिला दिया। मैं जैन हूँ मैंने जिंदगी में नॉनवेज खाया नहीं। मुझे नहीं पता कि नॉन वेज दिखता कैसा है।” वह कहते हैं कि इतनी शिकायत करने के बाद भी फातिमा के चेहरे पर मुस्कान थी। उन्होंने बिलकुल गंभीर होकर माफी तक नहीं माँगी। बल्कि जब उन्होंने फातिमा से कहा कि अगर वो खुद मछली खाती हैं तो क्या उन्हें नहीं पता कि मछली कैसी दिखती है। इस पर फातिमा ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वो मछली खाती ही नहीं हैं। 

घटना पर अफसोस जताने की बजाय वो कहती हैं कि वो इस मामले में कंप्लेन करें और शांत बैठे। लेकिन राघवेंद्र कहते हैं, “शिकायत तो मैं करूँगा ही। आपने मेरा धर्म भ्रष्ट किया है। अगर कोई आपका करे आपको भी अच्छा नहीं लगेगा।” इसके बाद यमन खान ने माफी माँगने की बजाय उनसे ये कहना शुरू किया कि वो वीडियो डिलीट करें क्योंकि हवाई जहाज में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। जैन पूछते हैं कि नॉन वेज खिलाकर जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ वो कुछ नहीं। घटना की वीडियो लेकर नहीं बना सकते क्योंकि एयर इंडिया के नियमो के विरुद्ध है। इस वीडियो के कैप्शन में बताया गया है कि कैसे घटना के बाद राघवेंद्र की पत्नी ने दिन भर में 5 बार उलटी की और वे खुद पूरे दिन में कुछ नहीं खा पाए। उन्हें अब तक घिन आ रही है।