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रमजान (‘शांति’ का महीना) में नमाज कर निकली भीड़ ने बुद्ध-महावीर की तोड़ी थी मूर्तियाँ, अखिलेश सरकार ने कोर्ट को बताया था ‘मनोरंजन’ के लिए थीं प्रतिमाएँ

   बुद्ध महावीर की मूर्तियों पर हमलावर मुस्लिम भीड़ (फोटो साभार: ShrimadBhagvadGita/FB & @vjshg/X)
मुस्लिमों का एक कॉन्सेप्ट है। इसका नाम है ‘उम्माह’, वैसे तो इसका अर्थ होता है राष्ट्र, लेकिन इसका प्रैक्टिकल मतलब होता है कि पूरी दुनिया के मुस्लिम एक हैं। यानि सूडान का मुस्लिम बांग्लादेश के मुस्लिम का साथ देगा, क्योंकि वह उसका इस्लामी भाई है। इसी के चलते 1920 के दशक में जब तुर्की में खलीफा को हटाया गया, तो भारत में मुस्लिमों ने विद्रोह कर दिया। यह कोई अकेली ऐसी घटना नहीं है। भारत लगातार ऐसी घटनाएँ देखता आया है। ऑपइंडिया आपके लिए 2012 की ही एक ऐसी घटना की कहानी लाया है।

यह मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़ा हुआ है लेकिन इसके तार असम-म्यांमार तक जुड़े हुए हैं। घटना 2012 की है। इसकी शुरुआत होती है लखनऊ से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर असम और म्यांमार से। म्यांमार में रोहिंग्या और बौद्धों के बीच लड़ाई होती है। म्यांमार की फ़ौज रोहिंग्याओं को भागने पर मजबूर कर देती है। रोहिंग्याओं के गाँव जलाए जाते हैं। दूसरी तरफ असम में मुस्लिम 4 बोडो लड़कों को मार देते हैं। इससे दोनों समुदाय में दंगा भड़कता है। असम जल उठता है। कुछ मुस्लिम भी मारे जाते हैं।

इससे पूरे देश में रहने वाला मुस्लिम गुस्सा हो जाता है। रमजान के ‘पवित्र’ महीने के अंतिम जुमे की नमाज, यानि अलविदा की नमाज के बाद एक विरोध प्रदर्शन का ऐलान होता है। मुस्लिमों के जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द जैसे संगठन कहते हैं कि असम और म्यांमार में मुलिमों पर जुल्म हो रहा है जिसके खिलाफ हर एक मुस्लिम सड़क पर उतरेगा। यहाँ भी उम्मा का कॉन्सेप्ट लगाया जाता है। ये तारीख थी 17 अगस्त, 2024। दिन तो पहले ही बता दिया गया है कि शुक्रवार।

नमाज के बाद हजारों मुस्लिमों की भीड़ सड़कों पर उतरती है। यह पूरी कार्रवाई लखनऊ की टीले वाली मस्जिद से चालू हुई। मुस्लिम भीड़ ने इस मस्जिद से निकलने के बाद तोड़फोड़ चालू की। रोड पर जो दिखा, उसके साथ बदतमीजी की। इसके बाद ये भीड़ इसी इलाके में बने महावीर पार्क (जिसे हाथी पार्क के तौर पर जाना जाता है) में घुसी। यहाँ इसने महावीर स्वामी की मूर्ति क्षतिग्रस्त की। उनकी मूर्ति के साथ बर्बरता की गई।

भगवान महावीर की यह 9 फीट ऊँची पद्मासन प्रतिमा 25 अप्रैल, 2002 को स्थापित की गई थी। तब उत्तर प्रदेश सरकार ने भगवान महावीर की 2600वीं जयंती के अवसर पर यह प्रतिमा स्थापित की थी। पहले हाथी पार्क के नाम से मशहूर इस पार्क का नाम बदलकर भगवान महावीर पार्क कर दिया गया था। भगवान महावीर की प्रतिमा को आचार्य 108 श्री विवेकसागरजी महाराज और अन्य जैन साधुओं के नेतृत्व में जैन समुदाय के सदस्यों द्वारा जुलूस के रूप में लाया गया था। लेकिन जिन जैनों का इस हिंसा से कोई लेना-देना तक नहीं था उनको भी निशाना बनाया गया।

इसी के साथ भीड़ बुद्धा पार्क में भी घुसी। यहाँ इस भीड़ ने बुद्ध की मूर्ति पर हमला किया। टोपी लगे हुए युवाओं ने ध्यान की मुद्रा में बैठे बुद्ध की मूर्ति पर हमला किया। लोहे के डंडे और साइन बोर्ड से उनकी मूर्ति को तोड़ने की कोशिश की गई। इस पूरे वाकये की तस्वीरें आज भी जब तब सामने आती हैं। बुद्ध पर होते इस हमले को देखकर आपको अफगानिस्तान के बामियान की याद आ जाएगी। वहाँ भी तालिबान (वैसे तो तालिब का मतलब छात्र होता है, लेकिन यहाँ आतंकी से है) वालों ने बुद्ध की मूर्तियों को विस्फोटक लगा कर उड़ा दिया था।

ये सब काम वहाँ हो रहा था जहाँ पर इस देश के सबसे बड़े सूबे की सरकार बैठती है। लेकिन सरकार भला उन पर क्यों कर एक्शन लेने लगती। क्योंकि सरकार थी समाजवादी पार्टी की। उसके मुखिया थे अखिलेश यादव। ये वही अखिलेश यादव थे, जिनके राज में बरेली में कांवड़ यात्रा के डीजे बंद हो जाते थे। जब पूरे दिन मुस्लिम भी ने खूब तबाही मचा ली, तब जाकर कहीं पुलिस ने उनको तितर बितर किया। इस हिंसा के बाद जैन और बुद्ध समाज ने प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर उनके आराध्य का इसमें क्या दोष था।

लेकिन जैन समाज के साथ मजाक यहीं तक नहीं सीमित था। जब हाई कोर्ट में इस बात के लिए याचिका डाली गई कि सरकार उन लोगों पर कार्रवाई करे जिन्होंने महावीर स्वामी की मूर्ति तोड़ी और नई मूर्ति भी लगवाए तो अखिलेश सरकार ने चौंकाने वाला जवाब दिया। अखिलेश सरकार के नौकरशाह ने हाई कोर्ट को कहा कि साहब वो उन मूर्तियों का कोई ख़ास धार्मिक महत्त्व थोड़े था, वो तो हमें सैर-सपाटे के लिए आने वालों की मौज के लिए लगाई गईं थी। अखिलेश सरकार के दूसरे नौकर शाह ने यह तक कह दिया कि साहब मूर्ति टूटी ही नहीं।

इस पर कोई ने फटकार लगाई। इसके बाद कोर्ट को आदेश देना पड़ा कि मूर्तियाँ या तो रिपेयर करवाओ या फिर नई लगवाओ। सरकार ने भरोसा दिया कि लगवाएँगे लेकिन जब कई दिनों तक कार्रवाई नहीं हुई, तब फिर कोर्ट ने फटकारा। कोर्ट ने 2017 में सरकार को इस बात पर भी फटकार लगाई कि आखिर उन लोगों पर क्या कार्रवाई हुई है जिहोने यह मूर्तियाँ तोड़ी थी। इस पर भी तब की सरकार ने कोई साफ़ जवाब नहीं दिया।

लेकिन ये सब कहानी अब क्यों बताई जा रही है? दरअसल, इस मामले में जिन लोगों ने जनहित याचिका लगाई थी उनके वकील थे हरि शंकर जैन। हरि शंकर जैन के ही बेटे विष्णु शंकर जैन अब संभल में लड़ाई लड़ रहे हैं। उनको धमकियाँ दी जा रही हैं, मुस्लिमों से कहा जा रहा है कि उनका चेहरा पहचान लें। उन्होंने इस मामले में शिकायत भी दर्ज करवाई है। उन्होंने इस लखनऊ वाले मामले की याद भी लोगों को दिलाई है। उन्होंने कोर्ट का वह आदेश साझा किया है।

AirIndia के कर्मचारियों की करतूत, शाकाहारी बता जैन दंपत्ति को फ्लाइट में खिलाई मछली

एयर इंडिया स्टाफ ने जैन व्यक्ति को परोसा नॉन वेज
एयर इंडिया फ्लाइट में एक जैन दंपत्ति को शाकाहारी बताकर मछली खिलाने का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि एयर इंडिया के दो मुस्लिम स्टाफ ने जैन पैसेंजर को कहा कि उन्हें जो दिया गया है वो वेज खाना है और वो बिन चिंता के वे इसका आनंद लें। हालाँकि, बाद में किसी अन्य स्टाफ से फिर कन्फर्म पर सामने आया कि उन्हें मछली परोसी गई है। जैन व्यक्ति ने इस घटना की वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला है जिसके बाद एयर इंडिया ने उनसे इस मामले की जाँच के लिए उनकी टिकेट आदि माँगी है।

इस वीडियो के साथ साझा जानकारी के अनुसार, राघवेंद्रं जैन ने अपने यूट्यूब पर लिखा कि टोक्यों से दिल्ली आने के दौरान उन्होंने AI 307 में सफर किया। इस यात्रा में उन्होंने ग्लूटन फ्री वेज, जैन खाना माँगा था। ये ऑर्डर प्री बुक और कन्फर्म था। लेकिन फातिमा मुन्नी और यमन खान ने उन्हें नॉन वेज खाना वेज बताकर दे दिया। जब उन्होंने ये खोला तो उन्हें मछली की बू आई। वे फातिमा के पास गए। जहाँ फातिमा और यमन दोनों ने वेरीफाई किया कि ये शाकाहारी खाना है और इस बारे में वे कोई चिंता न करें। उन लोगों ने हँस कर यात्री से खाना खाने को कहा।

वह लिखते हैं, “मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ निवाले गए पर जैसे ही कोई और स्टाफ सदस्य वहाँ से गुजरा हमने फिर कन्फर्म किया। उन्होंने सूँघकर कहा कि ये तो मछली है और ग्लूटन फ्री खाना बड़ी मुश्किल से शाकाहारी होता है। इसके बाद मैंने कैबिन क्रू से शिकायत करने की कोशिश की। पहली दोषी फातिमा मुन्नी है जिसने हँसकर बात टाली और दूसरा नाम विकास चोपड़ा है जिसने जवाब दिया- अब क्या नाक रगड़ें तुम्हारे सामने। सॉरी बोल तो दिया।”

आगे राघवेंद्र ने लिखा, “वो दिन हमारी जिंदगी का सबसे घटिया दिन था। मेरी पत्नी अब भी उस घटना की वजह से बीमार हैं और हम इमोशनल स्ट्रेस में हैं। हमने तमाम धमकियों के बाद पूरा मामला रिकॉर्ड करने की कोशिश की। यमन खान पूरी फ्लाइट में हमसे वीडियो डिलीट करने को कहता रहा। केवल सुपरवाइजर जोशी मैम ने हमसे संवेदना दिखाई और माफी माँगी।”

इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे जैन व्यक्ति लगातार फ्लाइट कर्मियों से उनके किए की शिकायत कर रहे हैं मगर वे लोग बार बार दोहरा रहे हैं कि क्या उनको लगता है कि वे ये सब जान कर करेंगे। फातिमा मुन्नी के चेहरे पर किसी तरह का पछतावा नहीं है। जैन आदमी बार बार कहता है, “मेरे पूछने के बाद भी आपने मुझे मीट खिला दिया। मैं जैन हूँ मैंने जिंदगी में नॉनवेज खाया नहीं। मुझे नहीं पता कि नॉन वेज दिखता कैसा है।” वह कहते हैं कि इतनी शिकायत करने के बाद भी फातिमा के चेहरे पर मुस्कान थी। उन्होंने बिलकुल गंभीर होकर माफी तक नहीं माँगी। बल्कि जब उन्होंने फातिमा से कहा कि अगर वो खुद मछली खाती हैं तो क्या उन्हें नहीं पता कि मछली कैसी दिखती है। इस पर फातिमा ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वो मछली खाती ही नहीं हैं। 

घटना पर अफसोस जताने की बजाय वो कहती हैं कि वो इस मामले में कंप्लेन करें और शांत बैठे। लेकिन राघवेंद्र कहते हैं, “शिकायत तो मैं करूँगा ही। आपने मेरा धर्म भ्रष्ट किया है। अगर कोई आपका करे आपको भी अच्छा नहीं लगेगा।” इसके बाद यमन खान ने माफी माँगने की बजाय उनसे ये कहना शुरू किया कि वो वीडियो डिलीट करें क्योंकि हवाई जहाज में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। जैन पूछते हैं कि नॉन वेज खिलाकर जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ वो कुछ नहीं। घटना की वीडियो लेकर नहीं बना सकते क्योंकि एयर इंडिया के नियमो के विरुद्ध है। इस वीडियो के कैप्शन में बताया गया है कि कैसे घटना के बाद राघवेंद्र की पत्नी ने दिन भर में 5 बार उलटी की और वे खुद पूरे दिन में कुछ नहीं खा पाए। उन्हें अब तक घिन आ रही है।