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ईरान बम मार रहा है और भारत ने पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया, चुनाव में फिर मामला गोल हो गया; एटम बम कहां गए ?

सुभाष चन्द्र

दारुल उलूम देवबंद फतवा दे रहा है भारत को गज़वा-ए -हिंद बनाने का जबकि यह नहीं देखते कि 75 साल पहले गज़वा-ए-पाकिस्तान लेकर क्या उखाड़ लिया, आज लोगों को खाने के लाले पड़े हैं और पूरा मुल्क पाकिस्तान “कटोरा” हाथ में लिए भीख मांगता फिर रहा है। यही हालत भारत की भी करना चाहते हैं यहां के पाखंडी मुसलमान जो सब कुछ सुविधाएं मिलने पर भी कह रहे है कि बस किसी तरह मोदी को हराना है।

लेखक 
पाकिस्तान पर कल फिर ईरान ने सर्जिकल स्ट्राइक कर दी और जैश-ए-अदल के वरिष्ठ कमांडर इस्माइल शाहबख्श को पाकिस्तान के क्षेत्र में ही हमला कर उसके कई साथियों समेत 72 हूरों के पास भेज दिया। इसके पहले भी ईरान ने जनवरी में ऐसा ही हमला किया था। उधर अफगानिस्तान का TTP जब मर्जी पाकिस्तान को पेल देता है।

लेकिन पाकिस्तान की फितरत थी कि भारत को धमकी दिया करता था कि “हमारे पास एटम बम है” और वो किसी शबे बारात के लिए नहीं हैं लेकिन कभी भारत पर एटम बम चलाने की सोच भी नहीं सका पाकिस्तान क्योंकि बम फटने से पहले भारत का बम पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देता।

लेकिन सवाल यह उठता है कि आज पाकिस्तान ईरान को एटम बम की धमकी क्यों नहीं दे रहा? अरे रोज रोज के कलेश झेलने से बेहतर है एक बम मार दे ईरान पर और कहानी ख़त्म कर दे क्योंकि ईरान से तो किसी एटम बम पेलने की उम्मीद भी नहीं है जैसी भारत से है।

एक तरफ ईरान ने रगड़ा तो दूसरी तरफ भारत ने पाकिस्तान को रावी नदी का जाने वाला पानी पंजाब के शाहपुर कंडी बांध के गेट बंद करके रोक दिया और इसका फायदा अब जम्मू कश्मीर की 32 हज़ार हेक्टेयर और पंजाब की 5000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में होगा क्योंकि जम्मू कश्मीर को 1150 और पंजाब को 200 क्यूसेक पानी मिलेगा। यह है भारत की तरफ से छोड़ा हुआ “पानी बम” - लोग पानी पिला पिला के मारते हैं लेकिन हम प्यासा रख के मार देंगे। 

जिसे भारत में पाकिस्तान से हमदर्दी है वो पाकिस्तान चला जाए। वैसे भी ऐसे लोगों को भारत में उत्पात मचाने से बेहतर है पाकिस्तान के लिए जाकर ईरान और अफगानिस्तान और बलूच विद्रोहियों से लड़ना चाहिए।

पाकिस्तान की एक और मुसीबत खड़ी हो गई जो चुनाव के बाद भी सरकार का गठन नहीं हो पा रहा। नवाज़ शरीफ उछलता कूदता आया था लेकिन प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा होता नहीं लग रहा और अब उसका भाई शाहबाज़ शरीफ की प्रधानमंत्री बनेगा लेकिन कब तक सत्ता में रहेगा पता नहीं क्योंकि PPP कब तक साथ देगी कह नहीं सकते और बिलावल भुट्टो भी तो अपनी किस्म का पप्पू है। मजे की बात है शाहबाज़ शरीफ अपने पहले कार्यकाल में दुनिया भर के मुल्कों से “भीख” ही मांगता रहा था।

भारत में जो मुसलमान मोदी को हराने के लिए पागल हुए जा रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि मोदी विदेशों से मिले सभी उपहार नीलामी में बेच कर पैसा “नमामि गंगे प्रोजेक्ट” में लगा देता है जबकि इमरान खान को ऐसे ही उपहारों को चोरी से बेच खाने के आरोप में 14 साल की सजा हुई है। इतना फर्क भी न दिखाई दे तो आपसे बड़े अंधे कोई हो नहीं सकते।

कभी जस्टिन ट्रूडो के पिता ने खालिस्तानी आतंकियों को दी थी पनाह, अब बेटा दोहरा रहा वही गलतियाँ

                                          जस्टिन ट्रूडो और उनके पिता पियरे ट्रूडो (चित्र साभार: सीबीसी)
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो खुले तौर पर खालिस्तानी आतंकवादियों के पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने एक खालिस्तानी आतंकवादी की मौत का जिम्मेदार भारतीय एजेंसियों को बताया है। जस्टिन जैसी गलती आज कर रहे हैं वैसी ही गलती उनके पिता पियरे ट्रूडो (Pierre Trudeau) आज से लगभग 4 दशक पहले कर चुके हैं और इसके काफी भयानक परिणाम कनाडा को भी भुगतने पड़े थे।

जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो ने भी खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लिया था। जस्टिन के पिता पियरे वर्ष 1968 से लेकर 1979 और 1980 से 1984 के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री रहे थे। इस दौरान भारत में खालिस्तान का आतंक चरम पर था और खालिस्तानी आतंकी भारत से भागकर कनाडा में शरण ले लेते थे।

भारत ने बढ़ते हुए आतंकवाद को रोकने के लिए कनाडा से इन तत्वों पर कार्रवाई की माँग की थी। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान भारत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान ना ही कनाडा में संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को रोका और ना ही उन आतंकियों को भारत वापस भेजा जो कि लगातार कनाडा में बैठकर भारत को तोड़ने की साजिश कर रहे थे।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था।

तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी। तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे। उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

इसके लिए उसने वैंकुवर से उड़े एक विमान में रखे एक बैग में बम रखा था जो कि आगे जाकर टोक्यो में एयर इंडिया के विमान में हस्तांतरित किया जाना था। टोक्यो के एयरपोर्ट में यह बैग इस विमान से निकाले जाने और एयर इंडिया के विमान में रखे जाने से पहले ही स्टोरेज क्षेत्र में फट गया जिसमें 2 जापानी एयरपोर्ट कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

इस हादसे की जाँच भी आगे कहीं नहीं पहुँच सकी क्योंकि कनाडा की सरकार ने इसमें काफी ढील बरती और मात्र इंदरजीत सिंह रैयत ही मात्र आरोपी ठहराया जा सका। इंदरजीत को भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने 2017 में छोड़ दिया था और सामान्य जीवन बिताने को कह दिया था। यह भी दावा किया जाता है कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि तलविंदर सिंह ऐसा कोई बड़ा काण्ड करने वाला है लेकिन तब भी उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और इसके कारण इतना बड़ा हमला हुआ।

वहीं तलविंदर सिंह परमार को कॉमनवेल्थ नियमों का हवाला देकर भारत को नहीं सौंपा गया था। नियमों के अनुसार, 2 कॉमनवेल्थ देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए अलग से संधि नहीं करनीं पड़ती है। इसी आधार पर इंदिरा गाँधी की सरकार ने परमार को भारत वापस भेजने को कहा था लेकिन पियरे ट्रूडो की सरकार ने यह कारण दिया कि भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य तो है लेकिन वह ब्रिटेन की रानी को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानता, इसलिए परमिंदर को भारत नहीं भेजा जा सकता।

परमिंदर को भारत ना भेजने और खालिस्तानियों पर ढील बरतने के कारण कनाडा में उस समय खालिस्तानी आतंकवादियों के हौसले खूब बढ़ गए थे, उन्होंने ऐसे सिखों को निशाना बनाना चालू कर दिया था जो कि अलग देश की माँग का विरोध करते थे।

                                             पियरे ट्रूडो (बाएँ) के साथ जस्टिन ट्रूडो (दाएँ)

इसी कड़ी में वर्ष 1998 में इंडो-कैनेडियन अखबार के सम्पादक तारा सिंह हायेर को मार दिया गया था। तारा सिंह को 18 नवम्बर, 1998 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। वह सिख आतंकवाद के विरोधी थे और इस बारे में लिखते रहते थे। उन्होंने 1988 में एयर इंडिया विस्फोट के बारे में लिखते हुए बताया था कि इसमें तलविंदर का हाथ हो सकता है। तलविंदर सिंह परमार बाद में भारत में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। वह एयर इंडिया के इस विमान में बम धमाका करने के बाद भारत लौट आया था और यहाँ पर अपनी आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। उसे वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

कनाडा में लगातार हिन्दू मंदिरों पर हमले सहित भारतीय राजनयिकों को मारने की धमकियाँ सार्वजनिक रूप से दी जा रही है लेकिन कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने इन सब कामों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इसके अतिरिक्त, हाल ही में कनाडा में एक खालिस्तान रैली में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या वाली झाँकी निकाली गई थी।

जस्टिन ट्रूडो लगातार ऐसे तत्वों के साथ नजर आते हैं जो कि भारत को तोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जस्टिन, जसपाल अटवाल के साथ नजर आते रहे हैं जो कि एक खालिस्तानी आतंकवादी है। कनाडा में गुरवन्तपंत सिंह पन्नू पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह दिन भर भारत के विरुद्ध जहर उगलता है।

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घर में भी घिरे जस्टिन ट्रूडो, कनाडा के पत्रकार ने कहा- भारतीय राजनयिक को हटाना पागलपन

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कनाडा सरकार के इस रवैये से भारत में सुरक्षा खतरों के साथ ही कनाडा में रहने वाले हिन्दुओं तथा खालिस्तान का विरोध करने वाले सिखों का जीवन खतरे में पड़ गया है। जस्टिन ने अपने पिता की गलितयों से नहीं सीख कर स्थितियों को और जटिल बना दिया है। उन्होंने भारत का सहयोग करने के बजाय विरोध करने निर्णय लिया है।

गाजा सीमा पर अब इजरायली टैंक, एयर स्ट्राइक के बाद ग्राउंड पर एक्शन ; हथियारबंद टुकड़ी, 7000 रिजर्व सैनिक

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के युद्ध विराम की माँग को ठुकराने के बाद इजरायल अब ग्राउंड लेवल पर भी एक्शन में आ रहा है। खबर है कि इजरायल की ओर से जहाँ अब तक केवल एयर स्ट्राइक करके गाजा को जवाब दिया जा रहा था, वहीं अब जमीनी कार्रवाई के लिए सेना ने मोर्चा संभाला है। 

कथित तौर पर गाजा की सीमा के पास सेना की 2 टुकड़ियों के साथ एक हथियारबंद टुकड़ी को तैनात किया गया है। इसके अलावा कम से कम 7000 रिजर्व सैनिकों को भी बुलाया गया है। सीमा के आस-पास रहने वाले लोगों को बंकर में जाने के निर्देश दे दिए गए हैं, क्योंकि हो सकता है कि हमास की ओर से भी जवाबी कार्रवाई हो।

IDF की कार्रवाई

IDF ने अपने ट्वीट में गाजा पर की गई अब तक की कार्रवाई को साझा किया है। साथ ही ये भी बताया है कि अगर इजरायल में मरने वालों की संख्या कम है तो इसका मतलब ये नहीं है कि गाजा से हमले नहीं हो रहे। बल्कि इसका ये अर्थ है कि IDF अपने लोगों को प्रोटेक्ट कर रहा है।

IDF के मुताबिक, गाजा से इजरायल की तरफ अब तक 1750 रॉकेट छोड़े गए। जिनसे 7 इजरायली नागरिकों की मौत हुई है और 523 घायल हुए हैं। हमास और इस्लामी जिहादियों ने स्कूल, अस्पातल, बस और तमाम घरों को निशाना बनाया। इसके बदले IDF ने उनकी उस बिल्डिंग को तबाह किया, जहाँ से वह आतंकी दफ्तर चलाते थे।

अभी नहीं घुसी इजरायली सेना

इससे पहले ग्राउंड पर सेना भेजने को लेकर खबर आई थी कि इजरायल डिफेंस फोर्स चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अवीव कोहावी के पास ग्राउंड अटैक के लिए ड्राफ्ट तैयार कर भेजा गया है। जनरल से मँजूरी मिलने पर इसे नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और उसके बाद एक्शन होगा।
इसके बाद ग्राउंड लेवल पर इजरायली सेना के एक्शन पर आधिकारिक तौर पर अभी अधिक जानकारी नहीं आई। लेकिन सैन्य मामलों के संवाददाताओं जिन्हें सशस्त्र बलों द्वारा ब्रीफ किया गया, उन्होंने साफ किया कि अभी गाजा में जमीन पर आक्रमण नहीं हुआ। इजरायली सेना अपनी ही सीमा में रहकर तोपों से फायरिंग कर रही है।
वहीं गाजा सीमा के पास रहने वालों ने भी इस बात को नकारा कि इजरायली सेना के ग्राउंड हमले को लेकर उन्हें कोई साइन दिखा। लेकिन तोप से अटैक और एयर स्ट्राइक जरूर की गई।
कीमत वसूलेंगे गाज़ा से : इसरायली प्रधानमंत्री 
गुरुवार को IDF के ट्वीट के बाद ये अटकलें लगनी शुरू हुई थी कि IDF हवाई और जमीन से इस समय गाजा पट्टी पर हमला बोल रही है।  हालाँकि बाद में IDF ने इस बात का स्पष्टीकरण दिया कि अभी वह गाजा पट्टी में नहीं घुसे हैं जैसा कि पहले बयान से लग रहा था।
इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने बयान में कहा, “मैंने कहा था कि हम हमास से बहुत भारी कीमत वसूलेंगे। हम कर रहे हैं और भारी मात्रा में करते रहेंगे। अंतिम शब्द नहीं कहा गया है। जब तक जरूरी होगा, हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा।”
इधर, हमास इस्लामी गुट के प्रवक्ता अबू उमेदा ने साफ किया है कि उनका समूह जमीन पर आक्रमण से नहीं डरता। उनके लिए यह मौका उन्हें पकड़ने का होगा, जिन्होंने उनके सिपाहियों को मारा।
संघर्ष शुरू ​होने के बाद से इजरायल पर 1700 से ज्यादा रॉकेट दागे गए हैं। जवाब में गाजा में करीब 700 से ज्यादा ठिकानों को इजरायली सेना अब तक निशाना बना चुकी है। गाज़ा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, चार दिन की लड़ाई में अब तक कम-से-कम 103 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 27 बच्चे भी शामिल हैं।
दूसरी ओर अरब उपद्रवियों ने भी इजरायल के भीतर माहौल बिगाड़ना शुरू कर दिया है। हालातों के मद्देनजर इजरायल पुलिस ने कम से कम 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। गाजा पर सख्त रुख अपनाने का आह्वान कर चुके रक्षा मंत्री ने देश में हो रही झड़पों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने फलीस्तीनियों के लिए मई 12, 202 शाम को बयान जारी करके बताया कि वे ऐसे हमले तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक दुश्मन पूरी तरह शांत नहीं होते।
इजराइल ने शांति अपील को ठुकराया 
हमास के वरिष्ठ नेता मौसा अबू मरजूक ने गुट के 9 कमांडरों के मरने के बाद रूसी विदेश मंत्री (मध्य पूर्व के मुद्दों को देखने वाले) मिखाइल बोगदानोव से फोन पर युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था। लेकिन युद्ध विराम की अपील को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ठुकरा दिया है। इजरायल की सरकार ने कहा है कि आने वाले 6 महीने या साल भर में वे कुछ ऐसा करेंगे जो उन्होंने अब तक नहीं किया। 
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फलस्तीन के समर्थन में नारे लगा रही हीरोइन के इजरायली पुलिस ने टाँग में मारी गोली
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हमास पर किसी तरह की दया दिखाने की बात नामंजूर करने वाले इजरायल ने बुधवार को बमबारी में गाजा की कई जगहों को निशाना बनाया था। इस क्रम में कई बिल्डिंग तबाह हुई थीं और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को भी धमाके में उड़ा दिया गया था।  इसमें से एक 14 मंजिला इमारत थी जिसमें IDF के अनुसार हमास का मिलिट्रि इंटेलिजेंस का दफ्तर था।(एजेंसीज)