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हम फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं, क्योंकि वे हमारे मियाँ भाई हैं; सनातन धर्म को अपमानित करने वाले हिन्दू नेताओं अब तो आंखें और दिमाग खोल लो

भारत के कट्टरपंथी फिलिस्तीन के साथ, क्योंकि वे उनके 'मियाँ भाई' हैं (साभार: Facebook/Purvanchal Rajdharma)
कुर्सी की खातिर सनातन धर्म को अपमानित करने वाले हिन्दू नेताओं अपनी आंखें और दिमाग खोलो। धर्म सीखना है तो उनसे सीखो, जिनकी वोटों की खातिर तुम अपने ही गौरवशाली धर्म को अपमानित कर रहे हो। 

इस्लामी आतंकी संगठन हमास की बर्बरता ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। ज्यादातर देश इजरायल के साथ इस मुश्किल घड़ी में खड़े हैं। लेकिन एक तबका ऐसा भी है जो मजहबी कट्टरपंथ के कारण फिलिस्तीन और हमास का भी समर्थन कर रहा है। इनमें भारत के भी मुस्लिम कट्टरपंथी शामिल हैं।

फेसबुक पर ‘राजधर्म पूर्वांचल’ नाम के पेज पर यह वीडियो अपलोड किया गया है। करीब 13 मिनट का यह वीडियो है। वीडियो में एक पत्रकार कुछ लोगों से इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रिया पूछ रहा है। पत्रकार पूछता है कि इजरायल-फिलिस्तीन में आप किसके साथ खड़े हैं। यह सवाल आप वीडियो में 4:00 मिनट से सुन सकते हैं।

नारंगी टीशर्ट पहने हुए एक युवक तुरंत जवाब देता है कि हम तो फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं। इस युवक के साथ बाकी टोपी पहने एक युवा उसकी बात का समर्थन करता है। अन्य युवा भी उसका समर्थन करते हैं।

इस पर पत्रकार पूछता है कि आखिर आप फिलिस्तीन के साथ क्यों खड़े हैं? इस प्रश्न के उत्तर में टोपी वाला युवक कहता है, “वो हमारे मियाँ भाई हैं। हम तो अपने मियाँ भाइयों के साथ खड़े हैं। वहाँ पर जुल्म हो रहा है।” टोपी वाले युवक की इस बात का वहाँ मौजूद अन्य मुस्लिम युवक भी समर्थन करते हैं।

टोपी वाला युवक इसके बाद कहता है कि फिलिस्तीन में बच्चा जीने के लिए नहीं, बल्कि मरने के लिए पैदा होता है। वहाँ बच्चा अल्लाह के लिए शहीद होने के लिए पैदा होता है। वहाँ बच्चा-बच्चा क्रिकेट-गुल्ली डंडा नहीं खेलता, वहाँ शहीद-शहीद खेलता है कि शहीद कौन होगा, शहीद कौन होगा?

इजरायल पर हमास के हमले में अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2,800 से अधिक लोग घायल हैं। हमास ने बड़ी संख्या में इजरायलियों को बंधक भी बनाया हुआ है। हमास ने इस हमले में एक जर्मन महिला को मार कर उसका नग्न शव गाजा की गलियों में प्रदर्शित किया था।

हमास ने इजरायल के भीतर हमले के दौरान 40 बच्चों को भी मार दिया। उनकी लाशें इजरायली सुरक्षा बलों को बरामद हुई हैं। इस्लामी आतंकियों ने लकवाग्रस्त महिला तक को नहीं छोड़ा और उसकी भी हत्या कर दी।

इजरायल ने भी इसके जवाब में गाजा पट्टी पर हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 800 फिलिस्तीनियों की भी मौत हो चुकी है। कहा जा रहा है कि इजरायल जमीन के रास्ते अपनी सेना भेजने की तैयारी कर रहा है।


इजरायल का सनसनीखेज खुलासा : हमास आतंकियों के साथ एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने अल जला टावर में पी हर रोज कॉफी

   आईडीएफ चीफ ने कहा एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों के साथ हमास आतंकियों के अच्छे संबंध (साभार: एसेसिएट प्रेस)
फिलिस्तीन के साथ जारी विवाद के बीच 
इजरायल डिफेंस फोर्स के सीनियर लेवल अफसर ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि एसोसिएटेड प्रेस के गाजा में रहने वाले पत्रकारों के हमास के साथ अच्छे संबंध थे। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक जिस मीडिया बिल्डिंग को आईडीएफ ने उड़ा दिया था, वहाँ एपी के पत्रकार हमास के आतंकियों के साथ ‘सुबह की चाय-कॉफी’ पीते थे।

15 मई 2021 को हमास के खिलाफ आक्रामक हमला करते हुए आईडीएफ ने गाजा में स्थित अल जला टॉवर पर भीषण बमबारी कर उसे ध्वस्त कर दिया था, जिसमें अल जजीरा और एसोशिएटेड प्रेस समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट थे।

काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन के बाद आईडीएफ ने कहा था कि अल जला टॉवर, जिसमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स थे वह आतंकी संगठन हमास के इंटेलीजेंस यूनिट का हाउस था। यहीं से हमास आईडीएफ की गतिविधियों पर एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर डिवाइसेस के जरिए नजर रखता था।

 लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली डिफेंस फोर्स के चीफ अवीव कोहावी ने दावा किया है कि एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों ने जाने-अनजाने अल जला टॉवर के ग्राउंड-लेवल पर स्थित कैफेटेरिया में हमास के इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञों के साथ सुबह की कॉफी पी थी।

एसोसिएटेड प्रेस ने आईडीएफ के दावों को नकारा

हालाँकि, एसोसिएटेड प्रेस ने आईडीएफ के इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे “बिल्कुल झूठा” बताया और कहा कि इमारत में एक भी कैफेटेरिया नहीं था।
29 मई 2021 रात को एक बयान जारी कर एपी ने कोहावी के दावों को गलत बताया। न्यूज एजेंसी ने कहा, “इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ द्वारा लगाया गया यह आरोप पूरी तरह से झूठा और निराधार है। भवन में कैफेटेरिया भी नहीं था। इस तरह के निराधार दावे एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं।”
अपने बयान में एपी ने अल जला टॉवर को उड़ाने की घटना की स्वतंत्र जाँच की माँग की, ताकि फैक्ट का पता चल सके। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, “जैसा कि हमने बार-बार कहा है, हमें इमारत में हमास के पहले से होने की कोई जानकारी नहीं थी और न ही आईडीएफ ने हमले से पहले ऐसी किसी भी संभावित उपस्थिति की चेतावनी दी। हमें नहीं पता कि इजरायल क्या सबूत दिखाएगा, लेकिन हम इसके बारे में जानना चाहते हैं।”
सही थी एयर स्ट्राइक --आईडीएफ चीफ 
गाजा के अल जला टॉवर पर एयर स्ट्राइक को सही ठहराते हुए आईडीएफ प्रमुख अवीव कोहावी ने अल जला टॉवर पर एयर स्ट्राइक को लेकर कथित तौर पर अपने सहयोगियों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ वर्ग इजरायल की निंदा कर रहे हैं, लेकिन हमें इसका तनिक भी अफसोस नहीं है। उसे उचित ढंग से ध्वस्त किया गया है।
इजरायली मिलिट्री इंटेलीजेंस के अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इमारत पर हमले को सही बताया है। हमास जिस मंजिल पर काम कर रहा था, उस पर केवल सर्जिकल स्ट्राइक करने के बजाय पूरे ढाँचे को ही उड़ाना ज्यादा सही था, क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक से टॉवर की सभी क्षमताओं को नष्ट नहीं किया सकता।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अल जला टॉवर को “पूरी तरह से वैध लक्ष्य” बताते हुए कहा कि इजरायली इंटेलीजेंस के जरिए इस तरह के सबूत मिले हैं।
नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर आईडीएफ के अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल के रक्षा प्रतिष्ठान ने पेंटागन के अधिकारियों को हमास के मिलिट्री ऑपरेशन के बारे में खुफिया जानकारी दी थी।
इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत पहुंचा अल जला टॉवर 
इन सब के बीच इजरायल द्वारा नेस्तनाबूद किए गए अल जला मीडिया टॉवर के मालिक जवाद मेहदी ने इंटरनेशनल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि टॉवर को जमींदोज करना एक युद्ध अपराध था। यह शिकायत आईसीसी के मुख्य अभियोजक द्वारा इजरायल-फिलिस्तीन के हालिया संघर्ष को अपराध बताने के बाद आई है।
हमास के आतंकवादियों के साथ मिले होने के आरोपित मेहदी ने कहा कि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने 13 मंजिला इमारत पर हमले से पहले उसे खाली करने के लिए केवल एक घंटे का वक्त दिया था।
आईसीसी पहले से ही मार्च 2014 से इजरायली फोर्स और फिलिस्तीन के आतंकी गुटों के बीच संभावित युद्ध के मामलों की जाँच कर रहा है। हालाँकि, आईसीसी के पास इस तरह की जाँच करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि इजरायल अदालत का सदस्य नहीं है।

इजरायल का Iron Dome वाशिंगटन पोस्ट को खटका

         इजरायल का एंटी-मिसाइल सिस्टम 'आयरन डोम' ने बचाई है हजारों जानें (फाइल फोटो साभार: Reuters)
इजरायल और फिलिस्तीन के संघर्ष में जहाँ अधिकतर लोग आतंकवादियों के सफाई के लिए यहूदी मुल्क की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जो मान ही नहीं सकता है कि इस्लामी कट्टरता या आतंकवाद जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है और इसीलिए वो लगातार इजरायल को बदनाम करने में लगा हुआ है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के एक लेख में इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा करने वाले ‘आयरन डोम’ को इस हिंसा का कारण बताया गया है।

इजरायल का ‘आयरन डोम’ एक एरियल एंटी-मिसाइल सिस्टम है जो गाज़ा की तरफ से आने वाले रॉकेट हमलों की पहचान करता है और फिर उन्हें मार गिराया जाता है जिससे यहाँ के नागरिकों को नुकसान नहीं होता। पिछले एक दशक में इसने हमास के हजारों ऐसे रॉकेट्स को रोका है, जो इजरायल में तबाही मचा सकते थे। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इस के कारण इजरायल समस्या के समाधान में ‘उत्तेजना’ नहीं दिखा रहा।

ये ‘आयरन डोम’ सिस्टम किसी चमत्कार से कम नहीं है, जो शॉर्ट-रेन्ज रॉकेट्स का काल है। ये हमास की तरफ से आने वाले 90% रॉकेट्स को ब्लॉक करता है। विशेषज्ञ इसे इजरायल का ‘इन्सुरेंस पॉलिसी’ भी बताते हैं। हमास एक बार में दर्जनों रॉकेट्स छोड़ता है, इस उम्मीद में की संख्या ज्यादा होने पर एकाध अपने लक्ष्य पर लग जाए। अमेरिका का ‘पेट्रियट सिस्टम’ भी तुलनकतमक रूप से इसके पीछे है।

क्या मीडिया का ये वर्ग चाहता है कि कोई देश अपनी सुरक्षा न करे और अपने लोगों को सिर्फ इसीलिए मरने के लिए छोड़ दे, क्योंकि हमला इस्लामी कट्टरपंथियों व आतंकियों की तरफ से किया जा रहा है? अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करना भी अब पाप हो गया क्योंकि इससे ‘समाधान की उत्तेजना’ कम होती है? सोचिए, अगर ये तकनीक नहीं होती तो पिछले दो हफ़्तों से गाज़ा की तरफ से रॉकेट्स की जो बरसात की गई है उससे एक छोटे से देश में कितनी भीषण तबाही मचती!

‘ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इजरायल’ के प्रोफेसर और ‘राजनीतिक वैज्ञानिक’ यागिल लेवी द्वारा लिखे गए इस लेख में इस ‘आयरन डोम’ को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि ये इजरायल को गाज़ा के हमलों से बचाव के अलावा जवाबी कार्रवाई के लिए ताकत प्रदान करता है। लेख में लिखा गया है कि इससे गाज़ा पर बमबारी का खर्च कम हो जाता है, इजरायल को नागरिकों के जानमाल की क्षति की चिंता नहीं रहती और गाज़ा समस्या का राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाता।

लेख की भाषा पर गौर कीजिए, “इस संघर्ष से पहले तक पिछले एक दशक में इजरायल के मायर 18 नागरिक ही हमास के हमले में मारे गए हैं। इससे इजरायल पर एक घरेलू दबाव पैदा होता है कि वो गाज़ा के क्षेत्रों पर कब्ज़ा करे। हमास को उखाड़ फेंके। दक्षिणपंथी गुट की तरफ से ऐसा दबाव आता है। जब-जब हमास ने टनल का प्रयोग कर के इजरायल में घुसना चाहा, इजरायल ने जमीनी ऑपरेशन लॉन्च कर दिया।”

मीडिया संस्थान के कहने का मतलब ये है कि इजरायल को अपने लोगों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए और एकमात्र प्राथमिकता आतंकी संगठन हमास की माँगों को संतुष्ट करने को दिया जाना चाहिए। लेकिन, इस लेख में बड़ी चालाकी से इस बात की चर्चा तक नहीं की गई है कि ताज़ा संघर्ष हमास द्वारा रॉकेट्स छोड़ने के साथ शुरू हुआ। अगर हमास को समाधान चाहिए तो उसने हिंसा का रुख क्यों अख्तियार किया?

‘वाशिंगटन पोस्ट’ को इस बात से परेशानी है कि UN द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से इजरायल और ‘सावधान’ हो गया है। तोप, रॉकेट्स और ड्रोन्स के माध्यम से पश्चिमी देश भी अपने दुश्मनों पर दूर से हमले करते रहे हैं, फिर इजरायल ने क्या गलत किया? खुद बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते ‘आयरन डोम’ के लिए 2014 में 225 मिलियन डॉलर (आज की तारीख़ में 1642.95 करोड़ रुपए) की फंडिंग दी थी। अमेरिका ने इस पर गर्व जताया था।

2014 के युद्ध के बाद ये इजरायल-फिलिस्तीन सीमा पर सबसे खतरनाक स्थिति है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इसने इजरायल को ‘सुरक्षा का झूठा एहसास’ दे रखा है। लेवी ये चर्चा करना भी नहीं भूले हैं कि ये हमेशा के लिए नहीं रहेगा और तकनीक की ये सफलता की जगह ‘राजनीतिक समाधान’ निकलना चाहिए। सवाल ये है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने वाली तकनीक से किसी को क्यों कोई समस्या होनी चाहिए?

एक तो यहूदी पूरी दुनिया में काफी कम संख्या में बचे हुए हैं और सदियों से ‘Anti-Semitism’ का शिकार रहने, यूरोप/रोमन/इस्लामी ताकतों के हाथों नरसंहार झेलने और अपने मुल्क इजरायल के इस्लामी मुल्कों से घिरा होने के बावजूद अगर उन्होंने अपनी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर के जानमाल की क्षति से बचने की व्यवस्था की है तो इसमें समस्याजनक क्या है? लिबरल गिरोह अब इस बात से भी परेशान है कि इजरायल अब खुद की सुरक्षा में भी इतना आक्रामक है।

ये वही लोग हैं, जो जम्मू कश्मीर में भी आतंकियों द्वारा आम नागरिकों की हत्या पर चुप्पी साध लेते हैं लेकिन जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो मानवाधिकार का राग अलापने लगते हैं। इनकी चिरकाल की इच्छा ये रहती है कि कोई भी देश इस्लामी आतंकवाद से न तो अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करे और न ही हमलों के प्रत्युत्तर में वार करे। तो क्या यहूदी ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए खुद का गला काट लें ताकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे संस्थान संतुष्ट हों?

इजरायल ने 820 आतंकी ठिकाने तबाह करने के अलावा 163 फुटबॉल मैदान के बराबर हमास का सुरंग को भी किया ध्वस्त

इजरायल की सेना ने हमास के आतंकियों द्वारा किए जा रहे हमले के प्रत्युत्तर में और आक्रामक तरीके से पलटवार करना शुरू कर दिया है। इजरायली सेना ने एक 9.3 मील (14.96 किलोमीटर) लंबी सुरंग को ध्वस्त कर दिया, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसके लिए फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। इजरायल ने इसे ‘हमास का आतंकी मेट्रो टनल’ नाम दिया है।

‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF)’ ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी है कि इस सुरंग के क्षेत्रफल में 163 फुटबॉल के मैदान आ सकते हैं। या फिर यूँ कहें कि ये इसमें 46 एफिल टॉवर्स आ सकते हैं। इसमें 34 एम्पायर स्टेट बिल्डिंग्स समा सकते हैं। इस सुरंग की लम्बाई में दुनिया की सबसे ऊँची ईमारत बुर्ज खलीफा भी 18 की संख्या में आ सकते हैं। इजरायल ने कहा है कि अब इस 9.3 मील के क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसे रातोंरात ध्वस्त कर दिया गया।

इजरायल की सेना ने मई 18, 2021 बताया कि लेबनान की तरफ से उसके उत्तरी क्षेत्र की तरफ 6 रॉकेट्स फायर किए गए। हैरानी की बात तो ये है कि इनमें से एक भी रॉकेट इजरायल में नहीं पहुँच पाया और लेबनान में ही गिर गया। लेकिन, इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की और उन रॉकेट्स के स्रोत की तरफ जबरदस्त हमला बोला। IDF ने उत्तरी गाज़ा में हमास के मुख्य ऑपरेशन सेंटर पर भी धावा बोला।

इसी सेंटर से हमास के आंतरिक सुरक्षा बलों को संचालित किया जाता रहा है। इजरायल का कहना है कि ये फिलिस्तीन का ‘आतंकी केंद्र’ है। यहूदी मुल्क ने कहा कि उसने इसे ध्वस्त करने से पहले वहाँ से लोगों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय दिया। अब तक 820 से भी अधिक आतंकी केंद्रों पर इजरायल ने हमला किया है। साथ ही 21 बड़े आतंकी सरगनाओं को मार गिराया गया है। इन सबके पीछे हुस्सम अबू हर्बीद का हाथ बताया गया है।

उसने ही इजरायल पर एक हफ्ते पहले पहली बार रॉकेट से हमला किया, जिसके बाद हिंसा शुरू हुई। वो पिछले 15 वर्षों से इजरायल पर हमला करता आ रहा था। वो ‘नॉर्दर्न डिवीजन’ में इस्लामी जिहादी कमांडर के रूप में कार्यरत था। इजरायल ने उसे मार गिराया है। इजरायल का कहना है कि उसने अब तक ‘Operation Guardian of the Walls’ के तहत 130 आतंकियों को मार गिराया है। हमास के 460 रॉकेट्स मिसफायर हो गए। इजरायल की तरफ 3150 रॉकेट्स दागे गए, जिनमें 10 नागरिकों की मौत हो गई।

1971 में भारतीय नौसेना, 2021 में इजरायली सेना: ट्रिक वही-नतीजे भी वैसे, हमास ने ‘Metro’ में खुद भेज दिए शिकार

                         हमास के टनल को इजरायल ने किया तबाह (साभार: The Times of Israel)
इजरायल और फलस्तीन के संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच इजरायल ने एक ऐसी रणनीतिक युद्धकला का प्रदर्शन किया है, जिसने 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की ताजा कर दी है। उस समय इस रणनीति से जिस तरह के नतीजे भारतीय नौसेना ने हासिल किए थे, अब उसी तरह के परिणाम इजरायल को भी मिले हैं।

द येरुशलम पोस्ट के अनुसार इजरायल ने इस रणनीति की सहायता से गाजा पट्टी में फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास के ‘मेट्रो’ को निशाना बनाया। कई किलोमीटर में फैले इस टनल को तबाह कर उसे भारी नुकसान पहुँचाया है। हमास सुरंगों के इस नेटवर्क का उपयोग गाजा पट्टी में आवागमन के दौरान इजरायली वायुसेना के हमले से बचने और हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए करता रहा है।

हाल ही में इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि इजरायल की वायुसेना इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए हमास पर लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन जमीनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी गुरुवार को कहा कि हमास के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई चलती रहेगी और आगे आने वाले समय यह और भी कड़ी होगी।

इसी क्रम में इजरायल डिफेंस फोर्स के ट्विटर हैन्डल से कहा गया, “IDF की वायु और थल सेना गाजा पट्टी पर हमला कर रही है।” IDF के इस ट्वीट के बाद वाशिंगटन पोस्ट और ABC समेत विश्व भर के मीडिया समूहों ने यह खबर चलाना प्रारंभ कर दिया कि इजरायल की जमीनी सेना गाजा पट्टी में घुस चुकी है और अब इस संघर्ष के और अधिक बढ़ने के आसार हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इजरायल की जमीनी सेना के द्वारा हमला करने की खबर तेजी से आने के बाद हमास ने अपने फर्स्ट लाइन डिफेंस फोर्स को गाजा पट्टी में बनी सुरंगों में भेज दिया, जहाँ इजरायल की जमीनी सेना से लड़ने के लिए हथियार सुरक्षित रखे गए थे। इन हथियारों में एंटी-टैंक मिसाइल और मोर्टार स्क्वाड भी शामिल थे।

यहाँ इजरायल की रणनीति काम कर गई। इजरायल की सेना गाजा पट्टी के बॉर्डर पर अवश्य थी, लेकिन उसने गाजा पट्टी की बॉर्डर को क्रॉस नहीं किया था। मीडिया की भ्रामक खबर के झाँसे में आकर हमास के आतंकी भूमिगत सुरंगों में जाने के बाद इजरायली वायु सेना के निशाने पर आ गए और कुछ ही मिनटों के अंदर इजरायल के विमानों ने सुरंगों को निशान बनाते हुए बड़ा हमला कर दिया।

द येरुशलम पोस्ट के अनुसार हमास की ‘मेट्रो’ कही जाने वाली ये सुरंगें 2014 में इजरायल और हमास के बीच हुए संघर्ष के बाद बनाई गई थीं। गाजा पट्टी में कई किलोमीटर तक फैली इन सुरंगों को बनाने का उद्देश्य था इजरायल के विमानों को चकमा देना और हथियारों को सुरक्षित रखना।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी भारत द्वारा ऐसी ही एक रणनीति अपनाई गई थी। पाकिस्तान ने अपने सबमरीन ‘गाजी’ को बंगाल की खड़ी में तैनात किया था। उसका मकसद था भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर ‘विक्रांत’ को नष्ट करना। लेकिन भारतीय नौसेना ने आईएनएस राजपूत का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को चकमा दे दिया। उसे यह एहसास कराया गया कि ‘विक्रांत’ विशाखापट्टनम में है।

अवलोकन करें:-

गाजा पर 1000 बम, 160 विमानों से 150 टारगेट पर 450 मिसाइल दागने के बाद, बोले नेतन्याहू- हमास को बहुत भारी कीम

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गाजा पर 1000 बम, 160 विमानों से 150 टारगेट पर 450 मिसाइल दागने के बाद, बोले नेतन्याहू- हमास को बहुत भारी कीम

विशाखापट्टनम में भारी मात्रा में राशन, माँस और ताजी सब्जियों के ऑर्डर भी दिए गए ताकि पाकिस्तानी जासूसों को लगे कि वहाँ कोई बड़ा भारतीय नौसेनिक बेड़ा मौजूद है। पाकिस्तान इस झाँसे में आ गया और उसका सबसे खतरनाक सबमरीन गाजी नष्ट हो गया।(एजेंसीज इनपुट्स)

गाजा सीमा पर अब इजरायली टैंक, एयर स्ट्राइक के बाद ग्राउंड पर एक्शन ; हथियारबंद टुकड़ी, 7000 रिजर्व सैनिक

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के युद्ध विराम की माँग को ठुकराने के बाद इजरायल अब ग्राउंड लेवल पर भी एक्शन में आ रहा है। खबर है कि इजरायल की ओर से जहाँ अब तक केवल एयर स्ट्राइक करके गाजा को जवाब दिया जा रहा था, वहीं अब जमीनी कार्रवाई के लिए सेना ने मोर्चा संभाला है। 

कथित तौर पर गाजा की सीमा के पास सेना की 2 टुकड़ियों के साथ एक हथियारबंद टुकड़ी को तैनात किया गया है। इसके अलावा कम से कम 7000 रिजर्व सैनिकों को भी बुलाया गया है। सीमा के आस-पास रहने वाले लोगों को बंकर में जाने के निर्देश दे दिए गए हैं, क्योंकि हो सकता है कि हमास की ओर से भी जवाबी कार्रवाई हो।

IDF की कार्रवाई

IDF ने अपने ट्वीट में गाजा पर की गई अब तक की कार्रवाई को साझा किया है। साथ ही ये भी बताया है कि अगर इजरायल में मरने वालों की संख्या कम है तो इसका मतलब ये नहीं है कि गाजा से हमले नहीं हो रहे। बल्कि इसका ये अर्थ है कि IDF अपने लोगों को प्रोटेक्ट कर रहा है।

IDF के मुताबिक, गाजा से इजरायल की तरफ अब तक 1750 रॉकेट छोड़े गए। जिनसे 7 इजरायली नागरिकों की मौत हुई है और 523 घायल हुए हैं। हमास और इस्लामी जिहादियों ने स्कूल, अस्पातल, बस और तमाम घरों को निशाना बनाया। इसके बदले IDF ने उनकी उस बिल्डिंग को तबाह किया, जहाँ से वह आतंकी दफ्तर चलाते थे।

अभी नहीं घुसी इजरायली सेना

इससे पहले ग्राउंड पर सेना भेजने को लेकर खबर आई थी कि इजरायल डिफेंस फोर्स चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल अवीव कोहावी के पास ग्राउंड अटैक के लिए ड्राफ्ट तैयार कर भेजा गया है। जनरल से मँजूरी मिलने पर इसे नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा और उसके बाद एक्शन होगा।
इसके बाद ग्राउंड लेवल पर इजरायली सेना के एक्शन पर आधिकारिक तौर पर अभी अधिक जानकारी नहीं आई। लेकिन सैन्य मामलों के संवाददाताओं जिन्हें सशस्त्र बलों द्वारा ब्रीफ किया गया, उन्होंने साफ किया कि अभी गाजा में जमीन पर आक्रमण नहीं हुआ। इजरायली सेना अपनी ही सीमा में रहकर तोपों से फायरिंग कर रही है।
वहीं गाजा सीमा के पास रहने वालों ने भी इस बात को नकारा कि इजरायली सेना के ग्राउंड हमले को लेकर उन्हें कोई साइन दिखा। लेकिन तोप से अटैक और एयर स्ट्राइक जरूर की गई।
कीमत वसूलेंगे गाज़ा से : इसरायली प्रधानमंत्री 
गुरुवार को IDF के ट्वीट के बाद ये अटकलें लगनी शुरू हुई थी कि IDF हवाई और जमीन से इस समय गाजा पट्टी पर हमला बोल रही है।  हालाँकि बाद में IDF ने इस बात का स्पष्टीकरण दिया कि अभी वह गाजा पट्टी में नहीं घुसे हैं जैसा कि पहले बयान से लग रहा था।
इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपने बयान में कहा, “मैंने कहा था कि हम हमास से बहुत भारी कीमत वसूलेंगे। हम कर रहे हैं और भारी मात्रा में करते रहेंगे। अंतिम शब्द नहीं कहा गया है। जब तक जरूरी होगा, हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा।”
इधर, हमास इस्लामी गुट के प्रवक्ता अबू उमेदा ने साफ किया है कि उनका समूह जमीन पर आक्रमण से नहीं डरता। उनके लिए यह मौका उन्हें पकड़ने का होगा, जिन्होंने उनके सिपाहियों को मारा।
संघर्ष शुरू ​होने के बाद से इजरायल पर 1700 से ज्यादा रॉकेट दागे गए हैं। जवाब में गाजा में करीब 700 से ज्यादा ठिकानों को इजरायली सेना अब तक निशाना बना चुकी है। गाज़ा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, चार दिन की लड़ाई में अब तक कम-से-कम 103 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 27 बच्चे भी शामिल हैं।
दूसरी ओर अरब उपद्रवियों ने भी इजरायल के भीतर माहौल बिगाड़ना शुरू कर दिया है। हालातों के मद्देनजर इजरायल पुलिस ने कम से कम 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। गाजा पर सख्त रुख अपनाने का आह्वान कर चुके रक्षा मंत्री ने देश में हो रही झड़पों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने फलीस्तीनियों के लिए मई 12, 202 शाम को बयान जारी करके बताया कि वे ऐसे हमले तब तक नहीं रोकेंगे, जब तक दुश्मन पूरी तरह शांत नहीं होते।
इजराइल ने शांति अपील को ठुकराया 
हमास के वरिष्ठ नेता मौसा अबू मरजूक ने गुट के 9 कमांडरों के मरने के बाद रूसी विदेश मंत्री (मध्य पूर्व के मुद्दों को देखने वाले) मिखाइल बोगदानोव से फोन पर युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था। लेकिन युद्ध विराम की अपील को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ठुकरा दिया है। इजरायल की सरकार ने कहा है कि आने वाले 6 महीने या साल भर में वे कुछ ऐसा करेंगे जो उन्होंने अब तक नहीं किया। 
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फलस्तीन के समर्थन में नारे लगा रही हीरोइन के इजरायली पुलिस ने टाँग में मारी गोली
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हमास पर किसी तरह की दया दिखाने की बात नामंजूर करने वाले इजरायल ने बुधवार को बमबारी में गाजा की कई जगहों को निशाना बनाया था। इस क्रम में कई बिल्डिंग तबाह हुई थीं और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को भी धमाके में उड़ा दिया गया था।  इसमें से एक 14 मंजिला इमारत थी जिसमें IDF के अनुसार हमास का मिलिट्रि इंटेलिजेंस का दफ्तर था।(एजेंसीज) 

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती का फतवा : इजरायल के गेट से अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले मुसलमान गद्दार

अल-अस्का मस्जिद
अल-अस्का मस्जिद (साभार: Wikimedia Commons image)
फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा है कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समझौते के बाद अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना यूएई वालों के लिए हराम है। अल-अक्सा मस्जिद में केवल उन्हीं मुसलमानों के लिए नमाज की इजाजत है, जो इस्लामिक सीरिया से होकर आते हैं।
फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा है कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समझौते के बाद अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना यूएई वालों के लिए हराम है। अल-अक्सा मस्जिद में केवल उन्हीं मुसलमानों के लिए नमाज की इजाजत है, जो इस्लामिक सीरिया से होकर आते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने घोषणा की है कि संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से इज़राइल की ओर से अल अक्सा मस्जिद में आने वाला कोई भी मुसलमान गद्दार और ‘अवांछित’ हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही इस तरह की यात्राओं को प्रतिबंधित करने का फतवा जारी कर रखा है।
फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि जो मुसलमान अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना चाहते हैं, उन्हें ईमानदारी से फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करना चाहिए और अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के लिए काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जो लोग इजरायल के दोस्त हैं, वे अल-कुद्स और अल-अक्सा मस्जिद को दुश्मन के कब्जा में देने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में समझते हैं, वे कैसे अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के बारे में बात कर सकते हैं?
फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मुहम्मद हुसैन ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद और उसके संपत्ति के संरक्षक केवल मुसलमान हैं। इजरायल की मदद करने वाले का कोई अधिकार नहीं है।
फतवा में इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच इजरायल की यात्रा और यरुशलम अल-अक्सा मस्जिद में प्रार्थना करने के बीच मुसलमानों के सामान्यीकरण का लाभ लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।
यूएई-इजरायल शांति समझौते के तहत यरुशलम में सभी मुसलमानों के लिए अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल को खोलने की अनुमति देता है। हालाँकि, फिलिस्तीनी प्राधिकरण इस समझौते को विश्वासघात मानता है। इसलिए साइट पर आने वाले किसी भी मुस्लिम को देशद्रोही माना जाता है।
मीडिया से बात करते हुए, शरिया जस्टिस के लिए पीए सुप्रीम काउंसिल के अध्यक्ष महमूद अल-हबश ने कहा, “जो कोई भी फिलिस्तीन के द्वार के माध्यम से अक्सा मस्जिद का दौरा करना चाहता है, उनका स्वागत है, हम खुशी मनाएँगे। लेकिन जो कोई भी इजरायल के द्वार से आना चाहता है, वह अवांछित है, और उसे यरूशलेम के लोगों के जूते और उसके चेहरे पर यरूशलेम के लोगों के थूक के अलावा और कुछ नहीं मिलेगा।”
अल-हबश ने कहा कि इजरायल / यहूदियों के साथ सामान्यीकरण का मतलब पैगंबर मुहम्मद के दुश्मनों के साथ सामान्य संबंधों के लिए सहमत होना था।
सुप्रीम शरिया न्यायाधीश महमूद अल-हबश ने आगे कहा, “हम (यूएई) के देशद्रोह को स्वीकार नहीं करते। पवित्र फिलिस्तीन की मिट्टी और अल-अक्सा मस्जिद की मिट्टी से रेत का एक एक दाना हमारे खून और हमारे जीवन से अधिक कीमती है।”
इस बीच, फिलिस्तीन प्राधिकरण ग्रैंड मुफ्ती और फिलिस्तीनी सुप्रीम फतवा परिषद के अध्यक्ष मुहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा, “एक मुसलमान के लिए बेन-गुरियन एयरपोर्ट स्थित अल-अस्का मस्जिद तक पहुँचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के विमान में प्रवेश करना वर्जित है।”
हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक आश्चर्यजनक घोषणा करते हुए कहा कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने वेस्ट बैंक में भूमि के अधिग्रहण को रोकने के लिए एक समझौते के हिस्से के रूप में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी।
इस बीच फिलिस्तीन स्थित आतंकवादियों ने गाजापट्टी से इजराइल पर 12 रॉकेट दागे। रात भर चले इस हमले के नौ रॉकेट को इजराइल ने विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में हमास आतंकवादी संगठन के ठिकानों पर तीन हवाई हमले किए। इजराइल की सेना ने शुक्रवार ( अगस्त 21, 2020) तड़के यह जानकारी दी। 
वहीं इजराइली सेना की जवाबी कार्रवाई में एयर स्ट्राइक के दौरान आतंकवादी संगठन हमास के ठिकानों पर 3 हवाई हमले हुए। पिछले कुछ महीनों में गाजा सीमा के पास होने वाली यह सबसे बड़ी झड़प है, हालाँकि हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।