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इजरायल का Iron Dome वाशिंगटन पोस्ट को खटका

         इजरायल का एंटी-मिसाइल सिस्टम 'आयरन डोम' ने बचाई है हजारों जानें (फाइल फोटो साभार: Reuters)
इजरायल और फिलिस्तीन के संघर्ष में जहाँ अधिकतर लोग आतंकवादियों के सफाई के लिए यहूदी मुल्क की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जो मान ही नहीं सकता है कि इस्लामी कट्टरता या आतंकवाद जैसी किसी चीज का अस्तित्व भी है और इसीलिए वो लगातार इजरायल को बदनाम करने में लगा हुआ है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के एक लेख में इजरायल के नागरिकों की सुरक्षा करने वाले ‘आयरन डोम’ को इस हिंसा का कारण बताया गया है।

इजरायल का ‘आयरन डोम’ एक एरियल एंटी-मिसाइल सिस्टम है जो गाज़ा की तरफ से आने वाले रॉकेट हमलों की पहचान करता है और फिर उन्हें मार गिराया जाता है जिससे यहाँ के नागरिकों को नुकसान नहीं होता। पिछले एक दशक में इसने हमास के हजारों ऐसे रॉकेट्स को रोका है, जो इजरायल में तबाही मचा सकते थे। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इस के कारण इजरायल समस्या के समाधान में ‘उत्तेजना’ नहीं दिखा रहा।

ये ‘आयरन डोम’ सिस्टम किसी चमत्कार से कम नहीं है, जो शॉर्ट-रेन्ज रॉकेट्स का काल है। ये हमास की तरफ से आने वाले 90% रॉकेट्स को ब्लॉक करता है। विशेषज्ञ इसे इजरायल का ‘इन्सुरेंस पॉलिसी’ भी बताते हैं। हमास एक बार में दर्जनों रॉकेट्स छोड़ता है, इस उम्मीद में की संख्या ज्यादा होने पर एकाध अपने लक्ष्य पर लग जाए। अमेरिका का ‘पेट्रियट सिस्टम’ भी तुलनकतमक रूप से इसके पीछे है।

क्या मीडिया का ये वर्ग चाहता है कि कोई देश अपनी सुरक्षा न करे और अपने लोगों को सिर्फ इसीलिए मरने के लिए छोड़ दे, क्योंकि हमला इस्लामी कट्टरपंथियों व आतंकियों की तरफ से किया जा रहा है? अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करना भी अब पाप हो गया क्योंकि इससे ‘समाधान की उत्तेजना’ कम होती है? सोचिए, अगर ये तकनीक नहीं होती तो पिछले दो हफ़्तों से गाज़ा की तरफ से रॉकेट्स की जो बरसात की गई है उससे एक छोटे से देश में कितनी भीषण तबाही मचती!

‘ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ इजरायल’ के प्रोफेसर और ‘राजनीतिक वैज्ञानिक’ यागिल लेवी द्वारा लिखे गए इस लेख में इस ‘आयरन डोम’ को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, क्योंकि ये इजरायल को गाज़ा के हमलों से बचाव के अलावा जवाबी कार्रवाई के लिए ताकत प्रदान करता है। लेख में लिखा गया है कि इससे गाज़ा पर बमबारी का खर्च कम हो जाता है, इजरायल को नागरिकों के जानमाल की क्षति की चिंता नहीं रहती और गाज़ा समस्या का राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाता।

लेख की भाषा पर गौर कीजिए, “इस संघर्ष से पहले तक पिछले एक दशक में इजरायल के मायर 18 नागरिक ही हमास के हमले में मारे गए हैं। इससे इजरायल पर एक घरेलू दबाव पैदा होता है कि वो गाज़ा के क्षेत्रों पर कब्ज़ा करे। हमास को उखाड़ फेंके। दक्षिणपंथी गुट की तरफ से ऐसा दबाव आता है। जब-जब हमास ने टनल का प्रयोग कर के इजरायल में घुसना चाहा, इजरायल ने जमीनी ऑपरेशन लॉन्च कर दिया।”

मीडिया संस्थान के कहने का मतलब ये है कि इजरायल को अपने लोगों को मरने के लिए छोड़ देना चाहिए और एकमात्र प्राथमिकता आतंकी संगठन हमास की माँगों को संतुष्ट करने को दिया जाना चाहिए। लेकिन, इस लेख में बड़ी चालाकी से इस बात की चर्चा तक नहीं की गई है कि ताज़ा संघर्ष हमास द्वारा रॉकेट्स छोड़ने के साथ शुरू हुआ। अगर हमास को समाधान चाहिए तो उसने हिंसा का रुख क्यों अख्तियार किया?

‘वाशिंगटन पोस्ट’ को इस बात से परेशानी है कि UN द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से इजरायल और ‘सावधान’ हो गया है। तोप, रॉकेट्स और ड्रोन्स के माध्यम से पश्चिमी देश भी अपने दुश्मनों पर दूर से हमले करते रहे हैं, फिर इजरायल ने क्या गलत किया? खुद बराक ओबामा ने राष्ट्रपति रहते ‘आयरन डोम’ के लिए 2014 में 225 मिलियन डॉलर (आज की तारीख़ में 1642.95 करोड़ रुपए) की फंडिंग दी थी। अमेरिका ने इस पर गर्व जताया था।

2014 के युद्ध के बाद ये इजरायल-फिलिस्तीन सीमा पर सबसे खतरनाक स्थिति है। ‘वाशिंगटन पोस्ट’ का कहना है कि इसने इजरायल को ‘सुरक्षा का झूठा एहसास’ दे रखा है। लेवी ये चर्चा करना भी नहीं भूले हैं कि ये हमेशा के लिए नहीं रहेगा और तकनीक की ये सफलता की जगह ‘राजनीतिक समाधान’ निकलना चाहिए। सवाल ये है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने वाली तकनीक से किसी को क्यों कोई समस्या होनी चाहिए?

एक तो यहूदी पूरी दुनिया में काफी कम संख्या में बचे हुए हैं और सदियों से ‘Anti-Semitism’ का शिकार रहने, यूरोप/रोमन/इस्लामी ताकतों के हाथों नरसंहार झेलने और अपने मुल्क इजरायल के इस्लामी मुल्कों से घिरा होने के बावजूद अगर उन्होंने अपनी सुरक्षा के तगड़े इंतजाम कर के जानमाल की क्षति से बचने की व्यवस्था की है तो इसमें समस्याजनक क्या है? लिबरल गिरोह अब इस बात से भी परेशान है कि इजरायल अब खुद की सुरक्षा में भी इतना आक्रामक है।

ये वही लोग हैं, जो जम्मू कश्मीर में भी आतंकियों द्वारा आम नागरिकों की हत्या पर चुप्पी साध लेते हैं लेकिन जब भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो मानवाधिकार का राग अलापने लगते हैं। इनकी चिरकाल की इच्छा ये रहती है कि कोई भी देश इस्लामी आतंकवाद से न तो अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करे और न ही हमलों के प्रत्युत्तर में वार करे। तो क्या यहूदी ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए खुद का गला काट लें ताकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ जैसे संस्थान संतुष्ट हों?

वाशिंगटन पोस्ट के कॉलमनिस्ट ने दिखाया केजरीवाल के मोहल्ला क्लिनिक का असली चेहरा

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब राजनीति में आए तो उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ी और बड़े-बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। लेकिन वह किसी भी आरोप को साबित करने में नाकाम रहे और उन्हें कोर्ट के भी चक्कर लगाने पड़े।
यहां तक कि जिन नेताओं पर उन्होंने आरोप लगाए थे, उनसे उन्हें माफी भी मांगनी पड़ी। सत्ता में आते ही अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के दलदल में धंसते चले गए। अब केजरीवाल सरकार के नए-नए घोटाले सामने आ रहे हैं और घोटालों की फ़ेहरिस्त भी लंबी होती जा रही है। जिससे दिल्ली की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। यदि फरवरी 11 को पुनः सत्ता में वापसी हुई, लगता है, केजरीवाल सरकार भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड स्थापित कर देंगे। इसी बीच वॉशिंगटन पोस्ट के लेखक ने केजरीवाल सरकार पर मोहल्ला क्लिनिक को लेकर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया है।
विज्ञापन के जरिये केजरीवाल सरकार ने की बेईमानी
दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी स्वास्थ्य के मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है, जिसके लिए ‘मोहल्ला क्लिनिक’ को एक क्रांतिकारी योजना बताकर कहा जा रहा है कि केवल देश में ही नहीं, बल्कि अमेरिका भी इसकी सराहना करता है और इससे सीखना चाहता है।
आम आदमी पार्टी के ट्विटर अकॉउंट से एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पहले लोग कहते थे अमरीका से सीखो, लेकिन अब अमरीका वाले कहते हैं भारत से सीखो, दिल्ली से सीखो, केजरीवाल सरकार से सीखो। इसके साथ ही वीडियो में ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ अखबार का एक स्क्रीनशॉट भी लगाया गया है। वहीं वॉशिंगटन पोस्ट पर ये पोस्ट लिखने वाले लेखक ने इस विज्ञापन के बेईमानी बताया है।
कॉलमनिस्ट विवेक वाधवा ने किया भांडाफोड़
शेयर किए जा रहे वीडियो में वॉशिंगटन पोस्ट अखबार का जो स्क्रीनशॉट दिखाया जा रहा है उसके लेखक विवेक वाधवा का कहना है कि आम आदमी पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे इस मामले में साफ झूठ बोला है।
उन्होंने खुद इस ट्वीट को शेयर करते हुए केजरीवाल सरकार के झूठ का पर्दाफाश किया और दिल्ली सरकार द्वारा शेयर विज्ञापन को बेईमानी बताया और कहा कि उनके पोस्ट को गलत तरह से पेश किया गया है।

मंत्री सत्येंद्र जैन ने दी झूठी जानकारी
कॉलमनिस्ट विवेक वाधवा के अनुसार दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने उनसे कहा था कि मोहल्ला क्लीनिक प्रोग्राम से लोगों की पीड़ा कम होने के साथ बीमारी के खर्चे में भी कमी आएगी। इस योजना से लोगों को टाइमली केयर मिलेगी और अस्पतालों का बोझा भी कम होगा।
सुविधाएं देने के बारे में ये सभी बाते आदर्श है लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो मालूम होगा कि सत्येंद्र जैन ने केवल अपनी वाह-वाही के लिए ही वॉशिंगटन पोस्ट से सिर्फ़ झूठ बोला। जबकि वास्तविकता में मोहल्ला क्लिनिक दिल्ली में स्वास्थ्य दिशा में कोई क्रांति लेकर नहीं आया है।
दस हजार करोड़ का बिजली घोटाला
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिजली कंपनियों को 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट बिजली सब्सिडी देने के नाम पर में बड़े घोटाले को अंजाम दिया है जिसकी सीबीआई जांच जरूरी है। केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने बताया कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एख बड़ा घोटाला है।
सब्सिडी घोटाले का आरोप
पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे उनके खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं दी जा रही है?
मास्क की खरीद में घोटाला
दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर मास्क खरीद में घोटाले का आरोप लगा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि दिल्ली सरकार ने स्कूली बच्चों को मास्क बांटने के लिए 10 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन बच्चों को मास्क नहीं मिला। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने 40 करोड़ रुपये विज्ञापन पर खर्च किए, अगर उस पैसे से मास्क खरीदा गया होता तो दिल्ली वालों को राहत मिली होती। कांग्रेस ने इस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि दिल्ली की रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के जो लोग खड़े रहते हैं वे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता हैं, जिन्हें 600 रुपए दिया जाता है।
2000 करोड़ रुपये का स्कूल घोटाला
दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर शिक्षा के नाम पर 2000 करोड़ रुपये के स्कूल घोटाले का आरोप है। केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि 5 लाख का कमरा 25 लाख रुपये में बनवाया गया। वहीं कई स्कूलों में बिना बनाए ही कमरों का भुगतान कर दिया गया। इस सिलसिले में एसीबी ने विजिलेंस विभाग से शिकायत भी की और जांच के लिए इजाजत मांगी। जिसके बाद स्कूलों में कमरों के निर्माण में हुए घोटालों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) को सौंपी गई। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला है कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं।
 
इलेक्ट्रिक बस प्रोजेक्ट में घोटाला
दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर बस खरीदने के ठेके में 6 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा। आरोप है कि यह घोटाला 1000 बसों की खरीद के लिए जारी टेंडर में हुआ है। बीजेपी ने बसों की खरीद पर सवाल उठाते हुए पूछा कि एक साथ 1000 बसों के टेंडर का क्या मतलब है, पहले 100 मंगाते उसके बाद अगली खरीद की जाती। बीजेपी ने केजरीवाल सरकार को चुनौती देते हुए कहा, इस बस सौदे में डीटीसी को शामिल क्यों नहीं किया गया ?
CCTV प्रोजेक्ट में घोटाला 
दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर सीसीटीवी लगाने के नाम पर 571 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे। दिल्ली सरकार की ओर से चीन की कंपनी को सीसीटीवी लगाने का ठेका देने के मामले में सारे नियमों को ताक पर रखा गया और कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ये करार किया गए।
टिकट के बदले करोड़ों रुपये लेने का आरोप
केजरीवाल पर आरोप लगा है कि आम आदमी पार्टी ने पश्चिम दिल्ली संसदीय सीट पर बलवीर जाखड़ को उम्मीदवार बनाने के लिए 6 करोड़ रुपए लिए। यह आरोप खुद बलबीर जाखड़ के बेटे उदय जाखड़ ने लगाया है। उदय का दावा है कि आम आदमी पार्टी और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने उनके पिता से टिकट के बदले 6 करोड़ रुपये लिए थे। उदय जाखड़ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में बताया, ‘मेरे पिता ने पश्चिमी दिल्‍ली संसदीय सीट से टिकट हासिल करने के लिए 6 करोड़ रुपये अरविंद केजरीवाल को दिए। कुछ समय पहले जब मैंने उन्‍हें (बलबीर) कहा था कि मुझे पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत है, तो उन्‍होंने मना कर दिया। उन्‍होंने सोचा कि वो पैसा इलेक्‍शन में लगा पाएंगे।’ उदय ने कहा कि ‘मेरे पास पक्‍के सबूत हैं कि उन्‍होंने इस टिकट के लिए पैसे दिए हैं।’
खुद केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप
सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप उनके अपने ही कैबिनेट सहयोगी कपिल मिश्रा ने लगाया था। सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। जैसे इतने गंभीर आरोप पर न तो उन्होंने ठीक से सफाई देने की जरूरत समझी और न ही कपिल मिश्रा के विरोध में किसी कानूनी कार्रवाई की ही हिम्मत जुटा पाए।

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप
दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार
घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप है। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
सीबीआई ने हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। मामले में अहम बात यह है कि रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर हैं। जागरण के अनुसार रजिस्ट्रार के लॉकर से सत्येंद्र जैन की तीन संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली है। इसके जरिये वर्ष 2011 में रुपये जमा कराये गए थे। यह डिपॉजिट स्लिप जैन, उनके परिवार व उन कंपनियों के नाम हैं, जिनमें जैन निदेशक थे। इसके अलावा, सत्येंद्र जैन व उनकी पत्नी के नाम की 41 चेक बुक भी मिली हैं। आयकर विभाग ने पहले से ही बाहरी दिल्ली में सत्येंद्र जैन की कथित 220 बीघा जमीन बेनामी संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त कर रखी है। साथ ही भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई में उनके खिलाफ पहले ही मामला दर्ज है। जांच एजेंसी उनके खिलाफ हवाला ऑपरेटरों से संबंधों और काले धन को सफेद करने के लिए बोगस कंपनियां बनाने के मामले में भी जांच कर रही है।

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है.दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।
संसदीय सचिव घोटाला ?
13 मार्च, 2015 को आप सरकार ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। ये जानते हुए भी कि यह लाभ का पद है, उन्होंने ये कदम उठाया। दरअसल उनकी मंशा अपने सभी साथियों को प्रसन्न रखना था। उनका इरादा अपने विधायकों को लालबत्ती वाली गाड़ी, ऑफिस और अन्य सरकारी सुविधाओं से लैस करना था, ताकि उनके ये भ्रष्ट साथी ऐश कर सकें। लेकिन कोर्ट में चुनौती मिली तो इनकी हेकड़ी गुम हो गई। हालांकि केजरीवाल सरकार ने ऐसा कानून भी बनाने की कोशिश कि जिससे संसदीय सचिव का पद संवैधानिक हो जाए। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से मजबूर होकर ये फैसला निरस्त करना पड़ा। अब इन विधायकों की सदस्यता खत्म की जा चुकी है। 

स्ट्रीट लाइट घोटाला
आम आदमी पार्टी नेता राखी बिड़लान पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार उन्होंने मंगोलपुरी में 15 हजार की सोलर स्ट्रीट लाइट को एक लाख रुपये और 10 हजार में लगने वाली सीसीटीवी कैमरों पर सरकार के 6 लाख रुपये उड़ा दिए। जब आम आदमी पार्टी में केजरीवाल की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता है तो फिर राखी पर लगे आरोपों की सही जांच होने देने से किसने रोका है ?

बीआरटी कॉरीडोर तोड़ने का घोटाला
केजरीवाल सरकार पर दिल्ली में बीआरटी कॉरीडोर को तोड़ने के लिए दिए गए ठेके में भी धांधली का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार इस मामले में दिल्ली सरकार ने ठेकेदार को तय रकम के अलावा कंक्रीट और लोहे का मलबा भी दे दिया, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में थी। इस मामले में पिछले साल एसीबी छापेमारी करके कुछ दस्तावेज भी जब्त कर चुकी है।


अयोध्या पर फैसले से पहले राणा अयूब ने उगला जहर

राणा अयूबवाशिंगटन पोस्ट की ग्लोबल ओपिनियंस राइटर राणा अयूब ने अयोध्या मामले को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद यूपी पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी। हिन्दुओं व भारत के ख़िलाफ़ अक्सर बयान देने वाली राणा अयूब जम्मू-कश्मीर को लेकर भी ज़हर उगलती रहती हैं। अयोध्या विवाद पर फैसला आने से पहले उन्होंने ट्वीट किया:

“शनिवार (नवंबर 9, 2019) का दिन भारत के लिए बहुत बड़ा दिन होगा। बाबरी मस्जिद भारतीय मुस्लिमों की आस्था का स्मारक था। इसे दिसंबर 6, 1992 को उन्हीं लोगों ने ध्वस्त कर दिया, जो आज सत्ता में हैं। इसने मेरी ज़िंदगी बदल दी। इस घटना ने मेरे जैसी करोड़ों मुस्लिमों की ज़िंदगी बदल दी, जिन्हें रातोंरात बेदखल कर दिया गया। मुझे उम्मीद है कि मेरा देश फ़ैसले के दिन मुझे निराश नहीं करेगा।”
राणा अयूब ने इस ट्वीट में सीधा-सीधा आरोप लगाया कि आज जो लोग सत्ता में हैं, उन्होंने ही मस्जिद को ध्वस्त किया था। इसके बाद अमेठी पुलिस ने उन्हें तुरंत अपना ट्वीट डिलीट करने को कहा। अमेठी पुलिस ने राणा अयूब से कहा कि उन्होंने एक राजनीतिक टिप्पणी की है। साथ ही पुलिस ने कहा कि अगर अयूब ने तुरंत अपना ट्वीट डिलीट नहीं किया तो उनके ख़िलाफ़ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राणा अयूब अक्सर अपने भारत-विरोधी रुख का प्रदर्शन करते रहती हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों बच्चों को गिरफ़्तार कर रखा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि सुरक्षा बलों ने एक 92 वर्षीय वृद्ध महिला पर हमला किया। राणा अयूब गैंग के अन्य पत्रकारों ने आरोप लगाया कि अयूब के उपर्युक्त ट्वीट के कारण अमेठी पुलिस एक पत्रकार को धमकाने का कार्य कर रही है। जॉय अयूब ने लिखा कि राणा अयूब के इस ट्वीट के जवाब में नरसंहारक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।

वहीं, फ़ाय डिसूजा ने पुलिस से पूछा कि उक्त ट्वीट के माध्यम से राणा अयूब ने आईपीसी की कौन सी धारा का उल्लंघन किया है? उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अयोध्या पर फ़ैसले के दिन डिबेट करने वाले सभी पत्रकारों को सावधान रहना चाहिए। ‘फॉरेन पॉलिसी’ के मैनेजिंग एडिटर रवि अग्रवाल ने लिखा कि पुलिस राणा अयूब को चुप कराने की कोशिश कर रही है। रेबेका विन्सेंट ने तो ट्विटर के सीईओ जैक को टैग कर के उन्हें यूपी पुलिस को रोकने को कहा।अयोध्या विवाद में आज (9 नवंबर 2019) सुबह 10:30 बजे सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पाँच सदस्यीय पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन इस मामले की सुनवाई की थी। पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।