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उत्तर प्रदेश : अतीक और मुख़्तार की मौत पर मीडिया से लेकर वोट बैंक सियासत करते नेता बताएं कि दोनों की बीबियां कहाँ छुपी हैं और क्यों? अतीक की तरह ही फरार है मुख्तार अंसारी की भी बीवी, शौहर की मौत के बाद भी कोई अता-पता नहीं

मुख़्तार अंसारी की बीवी अफ़्शाँ (बाएँ) और अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन (दाएँ) - दोनों फरार
बाँदा जेल में बंद गैंगस्टर मुख़्तार अंसारी की गुरुवार (28 मार्च, 2024) को हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। मुख़्तार अंसारी पर 60 से भी अधिक मामले दर्ज थे। उसका भाई अफजाल अंसारी भी कई मामलों में आरोपित है। उसका बेटा अब्बास अंसारी जेल में बंद है। वहीं उसकी बीवी अफ़्शाँ अंसारी भी फरार चल रही है, ठीक वैसे ही जैसे गैंगस्टर अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार है। बता दें कि अतीक अहमद की भी अप्रैल 2023 में हत्या कर दी गई थी। दोनों पूर्वांचल के सबसे बड़े गुंडे माने जाते थे।

अवैध जमीन कब्जा के मामले में फरार है मुख़्तार अंसारी की बीवी अफ़्शाँ

मुख़्तार अंसारी को सुपुर्द-ए-ख़ाक करने की तैयारी है लेकिन उसकी बीवी का कोई अता-पता नहीं है। उस पर पुलिस ने 75,000 रुपए का इनाम भी रखा हुआ है। उस पर 13 मुकदमे दर्ज हैं, गैंगस्टर एक्ट का भी मामला चल रहा है। अफ़्शाँ पर गाजीपुर और मऊ से लेकर लखनऊ तक अवैध जमीन कब्जे के आरोप हैं। जबरन रजिस्ट्री का मामला भी चल रहा है। ये सब निकाह के बाद दर्ज हुए हैं। 2005 में मुख़्तार अंसारी के जेल जाने के बाद बीवी अफ़्शाँ ने गिरोह में अपना दखल बढ़ा दिया था।
गाजीपुर स्थित यूसुफपुर मोहम्मदाबाद के दर्जी मोहल्ला की रहने वाली अफ़्शाँ पर आरोप है कि उसने मऊ के दक्षिणी टोला स्थित रैनि गाँव के पास ‘विकास कंस्ट्रक्शन’ नामक फर्म बना कर जमीन ली थी। उस पर गोदाम बना दिया गया था। उस गोदाम को FCI को किराए पर दे दिया गया था। अफ़्शाँ के दोनों भाई अनवर शहजाद और आतिफ रज़ा समेत इस मामले में 5 आरोपित हैं। जाँच में पाया गया कि दलितों की जमीन जबरन कब्जाई गई। जून 2021 में इसे कब्ज़ा मुक्त कराया जा चुका है।
बाकी चारों आरोपित कोर्ट में पेश हो चुके हैं, लेकिन अफ़्शाँ अंसारी तभी से फरार है। गाजीपुर में उसके ठिकानों पर कई बार छापेमारी भी हुई, लेकिन वो नहीं मिली। गजल होटल लैंड डील और नंदगंज में सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप उस पर पहले से थे ही। मुख़्तार अंसारी का एक अन्य बेटा उमर भी जमानत पर बाहर है। उसकी बहू निकहत बानो भी शौहर अब्बास को जेल से भगाने के आरोप में जेल जा चुकी है। मुख़्तार अंसारी का परिवार अब तक 16 लोकसभा-विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुका है।

अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन भी फरार

हाल ही में शाइस्ता परवीन का खास गुर्गा बल्ली पंडित को धर-दबोचने में प्रयागराज पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली, लेकिन अतीक अहमद की बीवी का कोई अता-पता नहीं चला। शाइस्ता परवीन का नाम उमेश पाल हत्याकांड में आया था, जो विधायक राजू पाल हत्याकांड में गवाह था। राजू पाल की जनवरी 2005 में हत्या कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था। फ़िलहाल कौशाम्बी के चैल से उनकी पत्नी पूजा पाल MLA हैं। उमेश पाल इसी हत्याकांड में गवाह थे।
फरवरी 2023 में उमेश पाल की हत्या हुई थी। इस मामले का एक अन्य अभियुक्त बमबाज गुड्डू मुस्लिम भी अब तक फरार है। शाइस्ता परवीन पर 50,000 रुपए का इनाम घोषित है। अशरफ की बीवी जैनब फातिमा भी फरार है। धूमनगंज के हटवा गाँव में इनके होने की सूचना के बाद इसी महीने छापेमारी भी हुई है, लेकिन पुलिस खाली हाथ रही। हटवा अशरफ का ससुराल है। शाइस्ता परवीन अपने शौहर के जनाजे में भी नहीं आई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट की MCD को फटकार : पब्लिक पार्क वापस लो, पुलिस चाहिए तो देंगे: सरकारी जमीन पर जामा मस्जिद ने कर रखा है कब्जा; जामा मस्जिद को हो रही लाखों की कमाई पर कार्यवाही कब?

जामा मस्जिद ने कर रखा है आसपास के पार्कों पर कब्जा
दिल्ली के जामा मस्जिद ने पास के एक पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। अब मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है। कोर्ट ने कहा है- “हम ऐसी सदी में नहीं रह रहे हैं जहाँ कानून का शासन नहीं है फिर आखिर क्यों MCD ये कब्जा वापस नहीं ले पाई।”

सुनवाई के दौरान MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि पब्लिक पार्क पर जामा मस्जिद की अथॉर्थी और शाही इमाम ने कब्जा कर रखा है। उन लोगों ने अवैध रूप से उसे अपने कब्जे में किया हुआ है और उस पर वे ताला भी लगा देते हैं। एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि वजूखाने के पास बने पार्क में वह लोग एमसीडी अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देते और दिल्ली वक्फ बोर्ड भी पार्क को अपनी संपत्ति बताता है।

MCD की ओर से पेश वकील की बात सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मिनी पुष्कर्ण ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि आखिर कैसे पब्लिक पार्क पर कब्जा कर लिया गया और अब एमसीडी इतनी मजबूर है कि उसे वापस भी नहीं ले पा रही। पीठ ने कहा- “सार्वजनिक पार्कों पर कैसे भी कब्जा नहीं हो सकता…आप हमें 21वीं सदी में क्या बताने की कोशिश कर रहे हो? ये सब कैसे हो सकता है। हम हर दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कह रहे हैं। हम साँस नहीं ले पा रहे हैं, और आप पार्कों पर कब्ज़ा खो रहे हैं?आप इस पर कब्ज़ा नहीं खो सकते यदि आप पार्क के मालिक हैं, तो आप पार्क को दिल्ली के नागरिकों के लिए सार्वजनिक ट्रस्ट में रखते… ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी किसी और दुनिया में रह रहे हैं… आप इस तरह सार्वजनिक पार्क का कब्जा नहीं खो सकते। हम ऐसे देश में नहीं रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन नहीं है…हम 21वीं सदी में रह रहे हैं।”

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करने के बाद कहा है कि MCD कानून के अनुसार सार्वजनिक पार्क पर कब्जा वापस पाने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जरूरत होगी तो उनकी सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस तरह पब्लिक पार्क पर प्रशासन पर अपना अधिकार नहीं छोड़ सकता।

जिस पार्क पर जामा मस्जिद के प्रशासन ने कब्जा किया हुआ है। वो नॉर्थ पार्क है। जहाँ एमसीडी को घुसने तक नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक साउथ पार्क को भी लेकर विवाद है लेकिन वहाँ वह आ जा पाते हैं और पार्क की देख रेख कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी।

कोर्ट के इस कदम से जनता में अब यह प्रश्न पूछा जा रहा है कि जामा मस्जिद को होने वाली लाखों/करोड़ों की कमाई का कब हिसाब माँगा जाएगा? जबकि इसके रख-रखाव पर सरकारी धन खर्च किया जाता है। दूसरे, सर्विस लेन और सीढ़ियों पर लगने वाली दुकानों की कमाई किसकी जेब में जा रही है, जबकि कई बार कोर्ट के आदेश के बाद इनको हटाया जाता रहा है, फिर किसके इशारे पर दुकाने लग जाती हैं? नीचे मीना बाजार में भी अतिक्रमण हुआ है।