
सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं यानि कांवर यात्रा के रास्ते में पड़ने वाले होटलों के मालिकों को अपना नाम बताने पर हंगामा करना छद्दम सेक्युलरिस्ट्स को ही बेनकाब कर रहा है। हिन्दुओं को आंखें खोलनी होंगी कि सेकुलरिज्म के हिन्दुओं के साथ कितना बड़ा धोखा किया जा रहा है। क्या हिन्दुओं के विरुद्ध बहुत गहरा षड़यंत्र चल रहा है, जिसे चौपट करने क्या परमपिता परमेश्वर ने मोदी-योगी को भारतीय राजनीति में पदापर्ण करवाया है। हिन्दुओं को भी रेवड़ियों को त्याग कर इन छद्दम सेक्युलरिस्टों से दूरी बनानी चाहिए। एकतरफा धर्म-निपेक्षता चलाने वालों से होशियार और चौकन्ना रहना चाहिए। ये लोग कभी भी अपनी तिजोरी भरने के लिए हिन्दुओं को संकट में डाल सकते हैं। सनातन को अपमानित करने वालों को अभी संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में वोट देने से परहेज नहीं किया। हिन्दुओं को लालच त्यागना होगा।
केंद्र और राज्य सरकारों को नाम छुपाकर कोई भी व्यापार करने वालों के विरुद्ध कानून लाकर इसे घिनौना अपराध घोषित करना चाहिए। दिल्ली में जवाहर होटल, करीम होटल, नूरी मसाले आदि मुस्लिम नाम से चल रहे हैं, हिन्दू भी खूब खरीदारी करते हैं, लेकिन नाम छुपाकर हिन्दू नाम से व्यापार करना क्या अपराध नहीं।
सूरत में एक बहुत बड़ा गुजराती रेस्टोरेंट है, जिसका नाम है "कंसार थाल"!
2020 तक लोगों को यही पता था कि यह रेस्टोरेंट किसी हिंदू का है, क्योंकि प्रवेश द्वार पर बड़ी सी गणेश जी की पीतल की प्रतिमा रखी थी।
2020 में दो करोड़ के ड्रग्स के साथ आदिल सलीम नूरानी नाम का एक शांतिदूत पकड़ा गया... तब गुजरात के लोगों को पता चला कि अहमदाबाद सूरत और बड़ोदरा में जो "कंसार थाल" के नाम से जो यह बहुत प्रसिद्ध गुजराती रेस्टोरेंट है उसका मालिक ये आदिल सलीम नूरानी है और आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि इसके हर रेस्टोरेंट में प्रवेश करते ही आपको गणेश जी की प्रतिमा नजर आएगी। "कंसारा" गुजरात में हिंदुओं की एक जाति होती है जिसे शेष भारत के अलग अलग क्षेत्रों में "कसेरा" आदि उपनामों से भी जाना जाता है, जो कि पारंपरिक रूप से विभिन्न धातुओं को मिलाकर एक मिश्र धातु का निर्माण करती है जिसे "कांसा" कहते हैं, उस कांसे को हाथों से ही हथौड़े से पीट-पीटकर "थाली" या अन्य बर्तन बनाती है और उस "थाली" या कांसे के बर्तनों में भोजन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि शास्त्रों में भी "कंसार" अथवा "कसेरे" के द्वारा हाथों से बनाई गई मिश्र धातु "कांसे" की थाली में भोजन करना बहुत लाभप्रद बताया गया है।
"कंसार" एक तरह का पारंपरिक व्यंजन परोसने का पात्र होता है जिसे पारंपरिक रूप से सात्विक भोजन हेतु हिंदू प्रयोग में लाते हैं।
अब यह शांति धूर्त अपने रेस्टोरेंटस का नाम "कसाई थाल"या "हलाल थाल" इत्यादि न रखकर सात्विक सनातनी हिन्दुओं को भरमाने व धर्म भ्रष्ट करने के लिए अब हिंदुओं के नाम पर, हिंदू प्रतीक चिन्हों द्वारा बरगला कर हिंदू खान पान की सुचिता को भंग करने की भावना से अंधेरे में रखते हुए हिंदुओं से ही पैसा कमा रहे हैं।
लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि यह शांति धूर्त वैसे तो मूर्ति पूजा के विरूद्ध होते हैं,
लेकिन जब धंधे की बात आती हो या हिंदुओं को धोखा देने की बात आती हो, तब यह अल तकिया अपनाकर एक छद्म आवरण पहन लेते हैं ताकि हिंदू इनके रेस्टोरेंट में खाना खाने धोखे से आ जाएं ...!!
और धोखा खाते भी है … अपनी पहचान को छुपाकर कोई काम वही करता है जो कुछ अपराध करना चाहता है ..या लोगों को ठगना भ्रमित करना ….
यह अपराध की श्रेणी में होना चाहिए
"चेलिया मुस्लिम" द्वारा हिन्दू नामों से चलने वाले होटल
आपको राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात के हाइवे पर तमाम ऐसे होटल मिलेंगे जिनका नाम भाग्योदय, तुलसी, बनास, डिनरवेल, अरुणोदय, आदि हिन्दू नाम वाला होगा | और राज्य में भी होगे चैन बहुत गहरी हैं इन होटलों की चेन जिसमे हजारो होटल है उन्हें गुजरात के बनासकांठा के रहने वाले "चेलिया मुस्लिम" चलाते है ।
.इन होटलों में एक भी हिन्दू को नौकरी नही दी जाती..और इन के रखरखाव से भी पता नहीं लगता कि इनका संचालन किसी मुस्लिम द्वारा किया जा रहा है। चेलिया ग्रुप ऑफ़ होटल्स का हेड ऑफिस अहमदाबाद में है । इनका पूरा खरीद सेंट्रलाइज्ड होता है। ये डाइरेक्ट कोल्डड्रिंक, नमकीन आदि बनाने वाली कम्पनीज के साथ बल्क में डील करते है,.. फिर उसे हर एक होटल में सप्लाई करते है। जहाँ तक सम्भव हो ये खरीदारी मुस्लिम से ही करते है। इनके होटल्स में इनवर्टर, बैटरी, आरओ आदि सप्लाई करने वाला भी मुस्लिम ही होता है। चूँकि ये अपने होटलों का नाम हिन्दू नाम जैसा रखते है और "ओनली वेज" लिखते है। और इनके होटल साफ सुथरे दिखते है .. इसलिए हिन्दू इनके होटलों के तरफ आकर्षित होते है। इनका ये मानना है की हिन्दुओ से पैसा निकालो और उसे मुस्लिमो के बीच लाओ।
इनका पूरा बिजनस फ्रेंचाइजी माडल पर आधारित होता है। इनकी एक सहकारी कमेटी है जो अल्पसंख्यक आयोग में अल्पसंख्यक कमेटी के रूप में रजिस्टर्ड है .. इस कमेटी में देश विदेश के लाखो चेलिया मुस्लिम मेम्बर है और सब अपना अपना योगदान देते है। फिर ये हाइवे पर कोई अच्छा जगह देखकर उसे काफी ऊँची कीमत देकर खरीद लेते है। फिर उस होटल का एक खरीदी बिक्री का एकाउंट बनाते है.. और उस होटल को किसी चेलिया मुस्लिम को चलाने के लिए सौप देते है।
पुरे विश्व के चेलिया मुस्लिम सिर्फ मुहर्रम में अपने गाँव में इकठ्ठे होते है। फिर हर एक होटल के लाभ हानि का हिसाब करते है। इसलिए मुहर्रम के दौरान करीब 20 दिनों तक गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान के हाइवे पर के 90% होटल्स बंद रहते है।
ये बसों के स्टाफ को मुफ्त खाना और बेहद महंगे गिफ्ट देते है ताकि ड्राइवर इनके ही होटल पर बस रोके। और सवारियों से खाने का मोटा पैसा वसूलते हैं।
.अहमदाबाद के सरखेज में इनका बहुत बड़ा सेंट्रलाइज्ड परचेज डिपो है। खुद का आलू प्याज आदि रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज है। ये सीजन पर सीधे किसानो से बेहद सस्ते दाम पर आलू, प्याज और अदरक आदि खरीद लेते है।
."इकोनोमिक्स टाइम्स अहमदाबाद" में छपे एक रिपोर्ट में इस चेलिया होटल्स की कुल पूंजी इस समय करीब 3000 करोड़ रूपये पहुंच चुकी है। और इनकी कुल परिसम्पत्तियों की कीमत इस समय 10,000 करोड़ रूपये होगी।
.हिन्दुओ के जेब से पैसा निकालकर उसे मुसलमानों में बांटने का ये चेलिया ग्रुप्स ऑफ़ होटल्स बेहद खतरनाक मोडल है।
.दुःख इस बात का है की अभी तक हिन्दू चेलिया मुस्लिमो के इस गंदे खेल को नही समझ सके और इनके होटलों में खाना खाकर इन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करते है...या समझिए किसी का ध्यान ही नहीं गया था। और फिर इनका ये पैसा आतंकियों को जाता है। गजवा ऐ हिंद के लिए जाता है। इससे बड़ा खतरनाक ये है की इन की मार्केट इतनी मजबूत बन चुकी है। ये किसी हिन्दू के होटल को चलने ही नही देते।
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