आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जामिया, JNU से चले आजादी के नारे शाहीनबाग़ तक आते-आते इस्लामिक नारों, हिन्दू विरोधी नारों और गृह युद्ध की धमकियों में तब्दील हो गए और तुरंत इस पूरे अभियान की पोल खुल गई। यही वजह है कि NRC और CAA के विरोध में बताए जा रहे इस पूरे विरोध और हंगामे को अब किसी ने भी गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन का तरीका और इसकी रणनीतियाँ बिलकुल भी नजरअंदाज कर देने लायक नहीं लगती हैं।
ये वामपंथी, कांग्रेस और इनके समर्थक पार्टियां विरोध को इस्लामिक उन्माद का रंग देने पर समझ बैठे थे, कि इस्लामिक रंग देखकर सरकार और हिन्दू डर जाएंगे। इन उन्मादियों और इनके समर्थक नेताओं को नहीं मालूम कि दूसरे लोगों ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं। आ रहे हैं वो भी इन्हे जिन्ना वाली आज़ादी देने सड़क पर आने प्रारम्भ हो चुके हैं। और जिस दिन नागरिकता कानून के विरोधियों की भांति बदजुबान होगी, देखना "गंगा-यमुना की तहजीब", #metoo, #moblynching, #award vapsi, #intolerance, #not in my name आदि जितने भी गैंगस्टर हैं, सब अपने बिलों से निकल इधर-उधर भागते नज़र आएंगे। इनको जवाब में अभी केवल दो ही वीडियो नीचे प्रस्तुत हैं। लाल कुआँ दिल्ली में किए उन्माद से शायद किसी ने सबक नहीं लिया?
जहाँ तक शाहीन बाग़ में जमा उन्मादियों की बात है, इस बिकाऊ जमाओरों की सच्चाई मोदी विरोधी मीडिया ने भी उजागर करना शुरू कर दिया। आखिरकार, सच्चाई को लम्बे समय तक छुपाकर नहीं रखा जा सकता। दूसरे, यह उन्माद केवल मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ही है। लिबरल होने का अभिनय करते आ रही यह भीड़ अब बच्चों के जरिए अपने वामपंथ के जहर और अपने प्रोपेगेंडा को हवा दे रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जो शाहीन बाग़ में चल रहे कथित CAA-NRC विरोध प्रदर्शन के दौरान बनाए गए हैं। कथित इसलिए क्योंकि CAA-NRC का विरोध तो बस बहाना है। इन वीडियो में ‘लिबरल्स’ की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर और उनके पास माइक देकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ ऐसे लोगों का सत्ता में होना है जिनके हाथ में देश की कमान देखकर बुर्जुआ कॉमरेड को आपत्ति है। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- ‘हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।’ जो विचारधारा इस देश में कॉन्ग्रेस का नमक खाकर तंदुरुस्त हुई है वो उसकी भक्तिधारा में चंद नारे तो लगा ही सकती है। वहीं, एक दूसरे वीडियो में हरे लिबास में एक मौलवी किसी सार्वजानिक सभा को भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह को आटे का थैला बताते हुए धमकी दे रहा है। इस वीडियो में मौलवी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ ही उनके समर्थकों को डंडे से पीटने की बात कही है जिस पर एक उन्मादी भीड़ भी खूब तालियाँ बजा रही है और वाह-वाही दे रही है।
"Tera baap bhi dega - Azadi! Teri maa bhi degi - Azadi!"
मौलवी का कहना है कि अगर मुसलमान को भगाने की बात कही तो तिरंगे के डंडे से वो यहाँ मौजूद लोगों को पीटेंगे। वीडियो में हरे लिबास पहने मौलवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिन्दुओं से वो मुसलमान भी नहीं डरता है जिसका कि अभी तक ख़तना भी नहीं हुआ है। CAA-NRC के विरोध के नाम पर हिन्दुओं की महिलाओं को बुर्का पहनाए जाने से लेकर स्वस्तिक के चिन्हों को कुचलने और फ़क़ हिंदुत्व जैसे सन्देश सार्वजानिक रूप से दिए जा रहे हैं। मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही अक्सर मीडिया और कुछ उदारवादी विचारकों ने स्टूडियो में बैठकर ‘डर का माहौल’ जैसे नारे दिए। इन्हीं का एक बड़ा समर्थक वर्ग है जो इस नारे पर यकीन करता हुआ इसे आगे बढ़ाता रहा।
अब इनको जवाब देने वाली वीडियो का भी आनंद लें:- क्या उस वर्ग को ये वीडियो और सार्वजानिक सभाएँ शांति का संदेश नजर आती होंगी? या सिर्फ वो इसलिए इस पर चुप रह जाते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि वास्तव में डर किन लोगों से होना चाहिए? अपने विरोध प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल मजहबी और अश्लील नारे लगाने तक के लिए यह शाहीन बाग़ की भीड़ तैयार हो चुकी है। नैतिकता के मामले में तो वामपंथ से कभी कोई उम्मीद थी भी नहीं लेकिन अब वो अपने ही उस आवरण से बाहर आ चुके हैं जिस ‘उदारवादी’ नक़ाब के पीछे वो खुद को वर्षों तक छुपाते आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के पूरे किस्से ने बता दिया है कि वामपंथ और कट्टरपंथियों की इस मिलीभगत का वास्तविक मर्म जनता नहीं बल्कि इस विचारधारा की लाश कंधे पर ढो रहे कुछ चुनिंदा लोग ही हैं। लेकिन अब हम देख सकते हैं कि कि एक भीड़ ऐसी भी है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही हो सकता है। क्योंकि यही तो उनके अस्तित्व का कारण भी है। ‘मस्जिदों से ऐलान हुआ, पहले से पता था कि क्या करना है’ – दिल्ली में उपद्रव और दंगों के पीछे मुल्ला-मौलवी? भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने एक वीडियो शेयर कर बताया है कि किस तरह संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर मजहबी उन्माद फैलाने की साज़िश रची जा रही है। यहाँ तक कि मस्जिदों से घोषणा की गई ताकि उपद्रवी सड़क पर उतर कर हिंसा करें। मालवीय ने दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर मस्जिदों से हुई भड़काऊ घोषणाओं को जिम्मेदार ठहराया है।
अमित मालवीय ने कहा कि इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में वहाँ के अल्पसंख्यकों का क्या होता होगा। बता दें कि सीएए भी उन्हीं अल्पसंख्यकों के लिए है, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में प्रताड़ित किया गया और उस प्रताड़ना से तंग आकर वो पिछले 5 वर्षों या इससे अधिक समय से भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। मालवीय ने मस्जिदों से भड़काऊ घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये सारी घटनाएँ बताती हैं कि सीएए ज़रूरी है। अवलोकन करें:-
इसी तरह जब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में देश-विरोधी नारे लगते हैं, विपक्ष उनके साथ खड़ा हो जाता है, क्यों? ऐसे नेता एवं उनकी पार्टी क्या कभी देशहित कर सकती हैं? आखिर कौन-सी आज़ादी की मंशा है? क्या इस तरह के नारे लगाने वाले और उनको समर्थन देने वाली पार्टियां किसी गुलाम देश में रह रहे हैं? जब प्रदर्शनकारियों द्वारा "हिन्दू से चाहिए आज़ादी", "हिन्दुत्व की कब्र खुदेगी", "मोदी-योगी की कब्र खुदेगी" आदि आदि उत्तेजक नारे लग रहे हैं, 'गंगा-यमुना तहजीब' की बात करने वाले किस बिल में घुसकर बैठे हैं? क्यों नहीं इन हिन्दू भावनाओं को भड़काने वाले नारों का विरोध करते? ये सब तभी बाहर निकलेंगे, जब दूसरी तरफ से पलटवार होगा। अभी सब कुम्भकरण की नींद में सोये हुए हैं।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जब से नागरिकता कानून बना है, मोदी-विरोधी विरोध में इतने अंधे और पागल हो चुके हैं, लगता ह...
अमित मालवीय ने ‘इंडिया टुडे’ के एक वीडियो को शेयर किया, जिसमें लोग बता रहे हैं कि वो क्यों सड़कों पर उतरे। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट में आप मालवीय का बयान और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो को देख सकते हैं:
दिल्ली की सड़कों पर दंगाइयों को उतरने के लिए सूचना मस्जिदों के loud speakers से दी गयी थी...
अगर ये हाल देश की राजधानी में है तो हम सिर्फ़ अन्दाज़ लगा सकते हैं की पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में वहाँ के अल्प संख्यकों का क्या होता होगा।
दिल्ली में हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की, जैसा जम्मू कश्मीर में वर्षों से होता आ रहा है। जम्मू कश्मीर में भी कश्मीरी पंडितों को निकाले जाने के बाद से लेकर अब तक, कई बार विभिन्न मस्जिदों से भड़काऊ ऐलान होने की ख़बरें आती रहती हैं। ‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में दिल्ली एक एक उपद्रवी ने कहा: “हमारे क्षेत्र में कई दिनों से अनाउंसमेंट हो रही थी कि कि मंगलवार को इतने बजे एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन होगा। कई लोगों को पहले से ही पता था और जिन्हें नहीं पता था, उन्होंने मस्जिदों से अनाउंस कर के कहा गया कि आप सड़क पर उतरो।” उक्त उपद्रवी की बातों से साफ़ हो जाता है कि मस्जिदों से ऐलान कर लोगों को सड़क पर उतरने को कहा गया। इसके बाद हिंसा भड़की और पुलिस व दंगाइयों के बीच झड़प हुई। पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आज देश में जिस प्रकार #CAA को लेकर शांति के नाम पर उग्र एवं हिंसात्मक प्रदर्शन हो रहे हैं, देखिए कोई #metoo, #intolerance, #award vapsi, #moblynching और #not in my name आदि गैंग बाहर नहीं आया। क्यों? क्या उनके घर कोई शोक है? ऐसा नहीं है, उपद्रव करने वाले यही सब गैंग है। इनको CAA या NRC से कोई शिकायत नहीं, क्योकि अगर शिकायत होती तो CAA बिल राज्यसभा में पारित नहीं हुआ होता। लोक सभा में माना भाजपा का बहुमत है, लेकिन राज्य सभा में नहीं और जब राज्य सभा में भाजपा के बहुमत न होते हुए, बिल पारित होने का स्पष्ट मतलब है कि विरोध करने वाली पार्टियां सदन में कुछ और सदन से बाहर कुछ चेहरा लिए घूमते हैं। दूसरे, CAA के विरोध में हिन्दू विरोधी नारे क्यों लग रहे हैं? जामिया में हिन्दू विरोधी नारे लगने के बाद बंगलुरु में हिन्दू विरोधी आवाज़, क्यों? कौन है ऐसे नारे लगवाने वाला? आखिर किसके इशारे पर हिन्दू विरोधी नारे लग रहे हैं? चैनल भी अपनी TRP बढ़ाने प्रदर्शन का उग्र एवं हिंसात्मक चेहरा दिखाते हैं, लेकिन उपरोक्त प्रदर्शन नहीं, क्यों? लगभग सभी चैनल ने जामिया में लगे हिन्दू विरोधी नारों को छुपा लिया, जिस कारण आम नागरिक के सामने विरोध का असली चेहरा छुप गया। 2014 में मोदी सरकार से पूर्व "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" के नाम पर खूब हिन्दू धर्म को अपमानित किया गया, किसी आतंकवादी घटना पर आतंकवादियों को बचाने के हिन्दू साधु-संत और साध्वियों को गिरफ्तार करने पर उस समय हर चैनल चौपाल बैठा लेते थे, परन्तु आज फिर CNN की आड़ में हिन्दू धर्म को निशाने बनाने पर सब खामोश हैं, क्यों?
इस नागरिक संशोधक कानून का विरोध करने वाले समस्त राजनीतिक दल क्या राष्ट्र को बताएंगे की 2024 में सत्ता में आने पर निरस्त करेंगे? क्या ये विरोधी भारत में भारतवासियों की बजाए घुसपैठियों और आतंकवादियों को पनाह देंगी? #CAA
के खिलाफ बंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान जिस बैनर का प्रयोग किया जा रहा
था उसे देखकर भी क्या आप समझ नहीं सकते कि दर्द CAA का नहीं है किसी और
बात का है। एक हिन्दू राष्ट्र में ये कैसे स्वीकार्य हो सकता है?
जिनके ज्यादा दर्द उठ रहा है उन्हें अच्छे से समझा दिया जाए कि उनको 1947 विभाजन में उनके हिस्से का टुकड़ा खैरात में मिल चुका है।
देश को हिंसा में झोंकना कांग्रेस पार्टी की पुरानी चाल
कांग्रेस पार्टी ने हमेशा देशहित से ऊपर गांधी परिवार के हित को रखा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपना जनाधार बढ़ाने के लिए समाज को बांटा है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा अपनी राजानित जमकाने के लिए हिंसा का सहारा लिया है। आजादी के बाद से हमेशा कांग्रेस पार्टी ने इन्हीं हथकंडों से देश पर शासन किया है। नेहरू-गांधी खानदान का रुतबा बरकरार रखने के लिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। आज देश में कांग्रेस का क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली, पूर्वोत्तर आदि इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर कांग्रेस पार्टी यह खेल खेलने में जुटी है। शनिवार यानि 14 दिसंबर को कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भारत बचाओ रैली का आयोजन किया था। इसी रैली में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार के खिलाफ जमकर उगला। इन लोगों ने अपने जहरीले भाषण से रैली में आए लोगों को भड़काने का भी काम किया। इनके नेताओं को उकसावे का ही नतीजा था कि रविवार को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हिंसा भड़क गई और उग्र भीड़ ने कई वाहनों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया।
कांग्रेसियों ने जामिया के छात्रों को भड़का कर हिंसा फैलाई दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बहाने कांंग्रेसी नेताओं शनिवार और रविवार को जामिया मिलिया विवि के छात्रों को भड़काने का काम किया। शनिवार की रैली में ही शायद इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी। ऐसा इसलिए, जामिया इलाके में आगजनी और हिंसा की वारदातों के बाद एक बार भी कांग्रेस की तरफ से शांति की अपील नहीं की गई, बल्कि भड़काऊ बयानों सो हिंसा को उकसाया गया। रविवार देर रात को जब जामिया समेत दूसरे विश्वविद्यालयों के छात्र आईटीओ के पुलिस मुख्यालय पर मौजूद थे, तो उनकी अगुवाई में कई कांग्रेसी नेता वहां थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद भी रात को हंगामा कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। इतना ही नहीं रविवार की आधी रात को ही कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर जहर उगला। यानि कांग्रेस को कतई इसकी चिंता नहीं थी हंगामा कर रहे छात्रों को शांत किया जाए, बल्कि वो उन्हें भड़काने में लगी थी।
#WATCH: Jignesh Mevani says, 'Biggest role of Karnataka's youth should be to enter PM's campaign program in Bengaluru on 15th, hurl chairs in the air & disrupt it, then ask him what happened to 2 cr jobs? If he can't answer ask him to go to Himalayas' #Chitradurga#Karnatakapic.twitter.com/3rykIfOFsp
पूर्वोत्तर के राज्यों में कांग्रेस ने आग लगाई कांग्रेस पार्टी ने नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी की आड़ में पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अपने मंसूबों को फैलाने का काम किया है। पिछले कई दिनों से पूर्वोत्तर के कई राज्यों में हिंसा का माहौल है और इसके पीछे भी कांग्रेस का हाथ बताया जा रहा है। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषणों में पूर्वोत्तर की हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। हिंसा और खौफ का खेल : कांग्रेस ने कराया लाखों करोड़ का नुकसान पिछले वर्ष कांग्रेस पार्टी ने सितंबर के महीने में भारत बंद के दौरान हिंसा और लूट का खेल खेला था। इस दौरान जहानाबाद में एक बच्ची की जान चली गई तो कई जगहों पर ट्रेनों पर पथराव किए गए। लोगों की गाड़ियां तोड़ी गईं, किसानों को मारा गया और स्कूल बसों पर हमला किया गया। सरकारी संपत्ति के साथ निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। FICCI के एक अनुमान के अनुसार एक दिन के भारत बंद से 20 हजार करोड़ का नुकसान होता है। वर्ष 2018 में कांग्रेस और विरोधी दलों ने सितंबर महीने तक पांच बार भारत बंद बुलाया है। एक बंद में 20 हजार करोड़ के नुकसान के हिसाब से अब तक एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ जाहिर है यह किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि देश का नुकसान हुआ है। मूर्ति तोड़ने वालों के कांग्रेस कनेक्शन का हुआ पर्दाफाश त्रिपुरा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद देश में कई जगहों पर महापुरुषों की मूर्ति तोड़ने की घटनाएं सामने आईं। इसका एक पहलू ये है कि जितनी भी घटनाएं हो रही हैं वह भाजपा शासित राज्यों में हो रही हैं। इन घटनाओं को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट से भी समझा जा सकता है। जिस कांग्रेस ने बाबा साहेब को भारत रत्न नहीं दिया वह आज डॉ. आंबेडकर को अपना बता रही है। हकीकत तो ये है कि मूर्ति तोड़ने वाले जितने भी पकड़ा रहे हैं उनके कांग्रेस या विपक्ष से कनेक्शन सामने आ रहा है। आजमगढ़ में बाबा साहेब की जो मूर्ति तोड़ने वाला बसपा का एक दलित है, जो मूर्ति वाली जमीन पर कब्जा करना चाहता था। राजस्थान के अकरोला में गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले तीनों आरोपी कांग्रेस के सदस्य हैं। कांग्रेस का कुर्सी फेंको अभियान कांग्रेस पार्टी लगातार हिंसा के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है इसकी एक बानगी गुजरात विधानसभा में कांग्रेस समर्थित विधायक जिग्नेश मेवाणी के ‘कुर्सी फेंको’ आह्वान से भी समझा जा सकता है। मेवाणी ने 15 अप्रैल को कर्नाटक में होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की रैली में लोगों को कुर्सी फेंकने के लिए उकसाया है। जिग्नेश मेवाणी ने गुजरात में भी कई बार हिंसा फैलाने की कोशिश की है और महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में भी उन्होंने ही दलित और मराठा के बीच संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार की थी। कांग्रेस समर्थित हार्दिक पटेल ने फैलाई थी गुजरात में हिंसा गुजरात में पटेल आरक्षण को लेकर जिस तरह से आंदोलन किया गया था वह किसी राजनीतिक दल के समर्थन के बगैर नहीं हो सकता था। बाद में हार्दिक पटेल और कांग्रेस के संबंधों और सौदेबाजी का खुलासा भी हुआ था। कांग्रेस से करोड़ों रुपये की डील कर गुजरात को हिंसा की आग में धकेल दिया गया और 14 लोगों की जान गंवानी पड़ी। हिंदू देवी-देवताओं का सरेआम अपमान कर रहे कांग्रेसी 02 अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान जिस तरीके से हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया वह देश में आग लगाने की मंशा से ही किया गया। मध्य प्रदेश में हनुमान जी का जो अपमान किया गया था वह ईसाई मिशनरियों से ताल्लुक रखते थे और तमिलनाडु में जिन 2 लोगों को शिवलिंग पर पैर रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है जिसका नाम सद्दाम और सईद है। जाहिर है कि इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ है। मंदसौर में किसानों को भड़काने में कांग्रेस का हाथ मध्य प्रदेश के मंदसौर में जून, 2017 को जब मंदसौर में किसानों का आंदोलन चल रहा था। इसकी आगुआई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद कर रहे थे। कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने किसानों को इतना भड़काया कि छह लोगों की जान चली गई। एक सच्चाई ये है कि राहुल गांधी आंदोलन को बीच में ही छोड़कर विदेश भाग गए।
सहारनपुर में जातीय तनाव फैलाने की कांग्रेसी साजिश फरवरी, 2017 के विधानसभा चुनाव में सामाजिक समरसता की मिसाल बने यूपी में अप्रैल 2017 में आग लगाने की कोशिश की गई। सहारनपुर में दलितों और ठाकुरों को आमने-सामने लाने की कोशिश की गई। मामले की जांच हुई तो पता लगा कि हिंसा फैलाने वाली ‘भीम आर्मी’ कांग्रेस के नेताओं के सहयोग से खड़ा हुआ संगठन है। इसमें कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं के हाथ भी सामने आए। सर्वसमाज की समरसता पसंद नहीं करती कांग्रेस दरअसल आजादी के 70 वर्षो बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि पूरे देश का बहुसंख्यक समाज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जातीय बेड़ियां तोड़कर एकता के गठबंधन में बंधकर एकता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है। समाज एकता के सूत्र में बंधकर विकास के रास्ते चलना चाहता है। लेकिन कांग्रेस को शायद ये एकता पसंद नहीं आ रही।
कांग्रेस ने लगातार 60 साल से हिन्दू विरोधी ही काम किये है … और हिन्दूओ के साथ अन्याय पर अन्याय किये है*
फिर भी कुछ हिन्दू, सिक्ख कैसे कांग्रेसी चोरो का साथ दे रहे है ये समझ नहीं आता के कोई हिन्दू कैसे कांग्रेस का समर्थन कर सकता है जबकि कांग्रेस नंबर 1 हिन्दू विरोधी पार्टी है।
ये रहा कॉंग्रेस का शर्मनाक पराक्रम कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान और बंगलादेश बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त सिया चीन बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त कश्मीर बनवाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त पाकिस्तान कब्जे वाला कश्मीर बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त केरल और असम बनवा रहा है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दू मुक्त नार्थ ईस्ट बनवाया।
कांग्रेस ने ही बलूचिस्तान को हिंदुस्तान से नहीं जुड़ने दिया।
कांग्रेस ने ही चीन युद्ध हरवाया और अक्साई चीन खो दिया।
कांग्रेस के नेहरू ने कहा था सियाचिन बंजर है चीन पाकिस्तान ले जाये कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कांग्रेस ने ही १९७१ की लड़ाई में फ़ौज के बलिदान से जो आधा पाकिस्तान कब्ज़े कर लिया था वो वापस कर दिया पर कब्ज़े हुआ कश्मीर भी वापिस नहीं लिया।
कांग्रेस की वजह से ही हिंदुस्तान फ़ौज के लाखो सैनिक शहीद हो गए और फिर भी हिंदुस्तान जमीन खोता रहा।
कांग्रेस ने ही पंजाब - कश्मीर - बंगाल के 2 टुकड़े कर दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में कश्मीरी हिन्दू औरतो के बलात्कार होने दिए।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सीखो का नरसंहार करवाया अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
*कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सिख औरतो के बलात्कार किये अपने कार्यकर्ता और नेताओ से।
कांग्रेस ने सभी कश्मीरी हिन्दुओ के हत्यारों और बलात्कारीओ की सजा माफ़ की।
*कांग्रेस ने ही एक भी सिख औरतो के कांग्रेसी हत्यारे और बलात्कारी को सजा नहीं दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में असम, केरल, बंगाल में हिन्दुओ का नरसंहार होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू मुस्लिम दंगो में सेकड़ो हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को मदद की और मुसलमानो को चार बिविया रखने दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को जितने चाहे उतने बच्चे पैदा करने दिए।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी ओवैसी के साथ गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम कट्टरपंथी और हिन्दू विरोधी जिहादी अब्दुल्लाह और मुफ़्ती सईद का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हैदराबाद का जिहादी कासिम रिज़वी को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही जूनागढ़ का गद्दार नवाब को पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही दाउद को बनाया बड़ा किया और पाकिस्तान भगाया।
कांग्रेस ने ही कश्मीरी जिहादियो का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को कायदे से विरुद्ध जा कर सहूलियत दी।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुसलमानो को हिन्दुओ से लूट कर मस्जिद बनाने के लिए रुपए दिए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दुओ के मंदिरो पर टैक्स लगाये और एक भी रूपया नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में सैकड़ो मस्जिदे बनाने में मदद की लेकिन राम मंदिर का विरोध किया।
कांग्रेस ने ही मुसलमानो को हज के लिए पैसे दिए लेकिन अमरनाथ पर टैक्स लगाये।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में हिन्दू विरोधी शरीया कानून लाया जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ कहते है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में से हिन्दूओ का कानून हिन्दू कोड बिल नाबूद किया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में २ कानून लाये धारा ३७० कश्मीर में जो सरासर हिन्दू विरोधी है।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गौहत्या का धंधा शुरू करवाया।
कांग्रेस ने ही पाकिस्तान को 400 करोड़ दिए उसने उसी पैसे से कश्मीर पर हमला किया और आधा कश्मीर खा गया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में ईसाई मिशनरिओ की मदद की और पैसे दिए।
कांग्रेस ने हिन्दुओ की जमीन को ईसाईओ को मुफ्त में दे दी और बड़े बड़े चर्च बनवाने में मदद की।
कांग्रेस ने ही आज़ादी के 14 साल तक गोवा को ईसाई पुर्तगाल का गुलाम रहने दिया और धर्म परिवर्तन होने दिए।
कांग्रेस ने ही हिन्दू समाज को तोड़ ने का काम किया जाती आरक्षण ला कर।
कांग्रेस ने ही मुस्लिम आरक्षण की शुरुआत की लेकिन हिन्दुओ को कुछ नहीं दिया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में झूठा आपातकाल लगवाया और निर्दोष हिन्दूओ की हत्या करवाई।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में जबरजस्ती हिन्दूओ की नसबंदी करवाई।
कांग्रेस ने ही हिन्दू पंडितो को घर से बेघर किया और रिफ्यूजी बना दिया कोई मदद नहीं की।
कांग्रेस ने ही खालिस्तान की आग लगायी और सेकड़ो बेगुनाह मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिद्नुस्तान में कोने कोने पर मुस्लिम डॉन बनाये और मदद की।
कांग्रेस ने ही हमेशा से देश के गद्दारो और हिन्दू विरोधिओं का साथ दिया।
कांग्रेस ने ही आज तक एक भी मस्जिद को नहीं गिराया लेकिन सैकड़ो मंदिर तोड़े।
कांग्रेस ने ही हरमंदिर साहेब में गोलाबारी की उसको नुकसान किया और सैकड़ो सिख मारे गए।
कांग्रेस ने ही राम मंदिर आंदोलन में गोलीबारी की और सेकड़ो हिन्दू मारे गए।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में मुस्लिम तुस्टीकरण की नीव रखी और उसे बड़ा बनाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में लव जिहाद को बढ़ावा दिया और पूरी मदद की जिहादियो की।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी ओवैसी के खिलाफ हिन्दुओ का कत्लेआम करने की बात पर कोई कार्यवाही नहीं की उल्टा उससे गठबंधन किया।
कांग्रेस ने ही देश विरोधी AIMIM को बढ़ावा दिया और ओवैसी को सांसद बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दूओ के जिहादी हत्यारों को हीरो बनाया अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के जिहादी हत्यारों के नाम पर सड़के, बगीचे बनाये अकबर, औरंगज़ेब, बाबर।
कांग्रेस ने ही हिन्दुओ के रक्षक को इतिहास से ही मिटा दिया शिवाजी, राणा प्रताप, गोबिंद सिंह।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुस्तान का इतिहास मिटा कर एक झूठा इतिहास पढ़ाया और बताया।
कांग्रेस ने ही दुनिया का सबसे बड़ा नरसंहार हिन्दू नरसंहार जो मुसलमानो ने किया था उसे इतिहास से ही मिटा दिया।
कांग्रेस ने हिंदुस्तान की स्कूलों और यूनिवर्सिटियो में गलत और झूठा इतिहास का पाठ्यक्रम पढ़ाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को लगातार लूटा और खुद का पेट भरती रही।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में गरीबी बढ़ाई।
कांग्रेस ने ही कुछ मुसलमानो का हिन्दू धर्म में वापस आने पर बबाल किया।
कांग्रेस ने ही लगातार लाखो हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन होने में मदद की।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान को हिन्दू राष्ट्र में से एक झूठा सेक्युलर मुस्लिम तुस्टीकरण देश बनाया।
कांग्रेस ने ही हिन्दू विरोधी बड़े बड़े नेताओ को जन्म दिया।
कांग्रेस ने ही असली हिंदुत्व नेताओ की हत्या करवाई मुख़र्जी उपाध्याय को मरवाया।
कांग्रेस ने ही देशभक्त हिन्दुओ को अंग्रेज़ो से मरवा दिया भगत सिंह, आज़ाद, बोस।
कांग्रेस ने ही सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ को मजबूर किया डकैत, नक्सली, माओवादी बनने के लिए।
कांग्रेस ने ही गरीब आदिवासिओ पर अत्याचार किये उन्हें गरीब और पिछड़ा रखा।
कांग्रेस ने ही दलित प्रथा को देश में चालू रखा और उनके साथ अत्याचार किये।
कांग्रेस ने ही देश के किशानो को गरीब रखा और आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
इंदिरा ने असली कांग्रेसी सेनानिओ को कांग्रेस से निकाला।
कांग्रेस ने ही भोपाल का हत्यारा एंडरसन को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही इटली का दलाल क्वॉटरोची को देश से भगाया। कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार काज़िम रिज़वी को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार जूनागढ़ का नवाब को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान का गद्दार दाउद को देश से भगाया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तान में रहने दिया।
कांग्रेस ने ही गैरकानूनी बांग्लादेशिओ को हिंदुस्तानी नागरिक बनाया।
कांग्रेस ने ही बांग्लादेश से आ रहे हिन्दुओ को हिंदुस्तान में नहीं रहने दिया।
कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेशी हिन्दुओ का कत्लेआम होने दिया। कांग्रेस ने ही लगातार बांग्लादेश से हिंदुस्तान की जमीं खोती रही है और देखती रही।
कांग्रेस ने ही क़ानूनी पाकिस्तानी हिन्दुओ को शरण नहीं दी लेकिन तिबत्तिओं को दी।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ को अहिंसा के नाम पर चुना लगाया और कायर रहने पर मजबूर किया।
कांग्रेस और गांधी ने हिन्दुओ के हत्याओ पर खुद हिन्दुओ को ही जिम्मेदार ठहराया और मुसलमानो को निर्दोष बताया।
कांग्रेस और नेहरू ने ही हिंदुस्तान को आज़ादी मिलने के बाद तोड़ ने का ही काम किया था।
कांग्रेस ने आज़ादी के बाद भी अंग्रेज़ो की गुलामी नहीं छोड़ी थी और जैसा वे कहते वो करते।
कांग्रेस ने सिवाय कोंग्रेसी स्वंतंत्र सेनानिओ के सब को भुला दिया। कांग्रेस ने ही हिंदुस्तान में राजकीय घराना शाही शुरू की और देश को भरपूर लूटा।
कांग्रेस ने ही जान बुझकर अमरीका से रिश्ते ख़राब रखे। कोंग्रेसी संजय गांधी कोई पद पर ना होने के बावजूद वो ही देश चलाता था।
कांग्रेस ने ही नेहरू गांधी परिवार को देश का मालिक बना दिया नेहरू इंदिरा राजीव संजय सोनिआ राहुल प्रियंका वाड्रा।
हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े गला रेत कर, गोली मार कर हत्या कर दी जाती है। हत्या करने वाले जितने भी आरोपित अब तक पुलिस की पकड़ में आए हैं, उनकी मंशा भी स्पष्ट हो चुकी है कि वो किस तरह से पूरी घटना को वीडियो में कैद कर उसे वायरल करना चाहते थे, एक संदेश देना चाहते थे। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कहा कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे। जमीयत के इस फैसले से #metoo, #not in my name, #award vapsi, #intolerance, और #moblynching आदि गैंगों के दुष्प्रचार से जनता को सावधान रहना चाहिए। जब सरकार द्वारा जमीयत के खिलाफ कोई कार्यवाही की जाएगी, ये प्रायोजित गैंग जब अपने बिलों से बाहर निकलें, इनके दुष्प्रचार में आने की बजाए इन गैंगों के विरुद्ध ही मोर्चा खोल इनको बेनकाब करने की जरुरत है। ये बिकाऊ गैंग देश का सौहार्द बिगाड़ने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई, गंगा-यमुना तहजीब की बात करने पर इनसे पूछा जाए : जब एम.एफ. हुसैन हिन्दू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक चित्र बना रहा था, जब कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की महिलाओं का बलात्कार हो रहा था, उनका कत्लेआम हो रहा था, बंगाल में हिन्दुओं पर अत्याचार होने पर, दिल्ली में लाल कुआँ स्थित हिन्दू मन्दिर को खण्डित करने और घर में घुसकर हिन्दू महिलाओं को प्रताड़ित करने पर ये नारे कहाँ थे? आखिर कब तक इन भ्रमित नारों से देश को गुमराह किया जाता रहेगा? सरकार को भी इन गैंगों के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए।
History repeats. Swami Shraddhanand of Arya Samaj was killed by Abdul Rashid, who walked into Swamiji’s home to ‘discuss a problem’. When Swamiji’s aide went to get water, he took out a revolver and shot Swamiji. Gandhi called him ‘Brother Abdul’ n wanted Hindus to forgive him!
जमीयत उलेमा-ए-हिंद देगा कमलेश के हत्यारों को कानूनी मदद, मतलब स्पष्ट है- समुदाय को कोई आपत्ति नहीं! इस बीच एक और खबर सामने आ रही है, जो कि और भी हैरान करने वाली है। इस तरह की नृशंस हत्या का विरोध करने और हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करने के बजाय जमीयत उलेमा-ए-हिंद हत्यारों के बचाव में सामने आया है। कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने अब तक पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तिवारी की पत्नी और माँ ने इनके लिए मृत्युदंड की माँग की है। वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हत्यारों को बचाने में जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे। इस्लामी विद्वानों की संस्था जमीयत ने लोगों से अपील की है कि वो हत्यारों की कानूनी लड़ाई लड़ने में उनका साथ दें, क्योंकि वो (हत्यारे) गरीब हैं। बता दें कि आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पाँचों आरोपितों के परिवार से मुलाकात की और जब उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ने में असमर्थता जताई तो जमीयत ने अपने खर्चे पर वकील और अन्य सहायता करने का भरोसा दिलाया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव हकीमुद्दीन काशमी और महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वो पाँचों आरोपितों की हर संभव मदद करेंगे। जमीयत उलेमा-ए-हिंद यह कह कर नहीं बच सकता कि भारतीय संविधान और कानून के तहत हर अपराधी को स्वतंत्र न्याय प्रणाली के तहत अपने बचाव में कानूनी सहायता लेने का अधिकार है। वो तो है ही! वो तो कसाब जैसे मास मर्डरर को भी मिली थी। लेकिन सवाल यह है कि आप खुद क्यों दे रहे कानूनी सहायता? क्योंकि इसी भारतीय कानून के अनुसार तय यह भी है कि अपराधी चाहे जो भी हो, जैसा भी हो और उसने अपराध कैसा भी किया हो, उसे राज्य अपनी ओर से कानूनी सहायता मुहैया (वकील देना) तो कराती ही है। फिर आप बजाय इस नृशंस हत्या के विरोध करने हत्यारों की ‘गरीबी का झुनझुना’ लेके मैदान में क्यों कूद गए? शायद इसलिए क्योंकि आप उसे अपने समुदाय का मानते हैं। ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ के नारे लगाने वाले आप ‘हत्यारों का धर्म होता है, और वह हमारे समुदाय से है’ का गाना क्यों गाने लगे? जमीयत उलेमा-ए-हिंद के इस कदम ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वो इस तरह के कुकृत्य और नृशंस हत्या करने वालों के साथ है। इस समुदाय को अभी भी ये हत्यारे सही लग रहे हैं। इस समुदाय के लिए यह एक मौका था, जब इनकी शीर्ष संस्थाएँ सामने आ कर कहतीं कि जो हुआ वो सही नहीं हुआ, मगर जिस तरह से समाज में इसे मौन और मुखर, दोनों तरह से, स्वीकृति मिल रही है, लगता नहीं है कि समुदाय को इससे कोई आपत्ति है। अवलोकन करें:-
नागपुर से गिरफ़्तार आसिम अली (दाएँ) कमेलश तिवारी के दोनों हत्यारों अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन को गुजरात एटीएस ने शामलाजी इ...
इस स्थिति में जब समुदाय को सामूहिक तौर पर हत्यारों का बहिष्कार कर के भाईचारे का संदेश देना चाहिए था, इनकी सबसे पढ़ी-लिखी संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद खुलकर उनके बचाव में उतर रही है। यह बताता है कि यह कैंसर कितना भयावह हो चुका है और ऐसी सोच ऊपर से नीचे तक भारतीय समाज को खोखला कर रही है।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पिछले कुछ वर्षों से बलात्कार, जाति एवं धर्म के नाम पर जो देश का माहौल ख़राब किया जा रहा है, इसे हर जनमानस को भलीभांति समझना होगा, जिसका पटापेक्ष किया है जुलाई 2 को जयपुर में एक मस्जिद से हिन्दू सम्पत्ति और वाहनों की तोड़फोड़ कर रहे मुस्लिमों को दिए "इन नेताओं के कहने पर तुम लोग जो काम कर रहे हो, पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये जाने पर कोई नेता तुम्हें बचाने नहीं आएगा" सन्देश ने। वास्तव में वह इमाम अथवा उत्घोषित करने वाला व्यक्ति प्रशंसा का पात्र है। वास्तव में इस सन्देश ने बलात्कार और धर्म/जाति के नाम पर जनमानस में द्वेष की भावना को जन्म देने वालों का पर्दाफाश किया है। क्या अब तक हुए दंगों में किसी नेता के पक्षी या परिन्दे तक को नुकसान पहुँचते देखा है, शायद नहीं। मरता कौन है, आम जनमानस। भूख से कौन तड़पता है, आम जनमानस; किसके बच्चे कर्फ्यू लगने पर दूध के लिए तरसते हैं, आम जनमानस के, फिर क्यों हम सियासतखोरों के इशारे पर उन लोगों के दुश्मन बन रहे, जिनके साथ कभी बचपना बिताया था, घर-परिवार का दुःख-सुख बाँटा था, उसी को दुश्मनी निगाह से देखने लगते हैं। इतना ही नहीं, आम जनमानस को #metoo, #not in my name, #award vapsi, #moblynching, #intolerance आदि गैंगों से भी सतर्क रहना होगा। ये साम्प्रदायिक और जनविरोधी लोगों के प्रायोजित गैंग हैं, जिन्हे केवल एक ही धर्म/मजहब की तकलीफ दिखाई देती है, जबकि उसी समस्या से अन्य धर्म भी प्रभावित होते हैं, इस गैंग के प्रायोजक और अनुयायी तुष्टिकरण के पुजारी हैं। जो रसगुल्ला बन जनता में विष फ़ैलाने का काम करते हैं। अभी दो/तीन वर्ष पूर्व भारत में पुरस्कार वापस करने का दौर देखा, जनता ने पुरस्कार वापस करने का समाचार तो सुना, लेकिन यह नहीं सुना होगा कि पुरस्कार के साथ मिली धन-राशि भी वापस की है। किसी ने उनसे यह नहीं पूछा "पुरस्कार वापस कर दिया, कोई बात नहीं, पुरस्कार के साथ जो धन-राशि मिली थी, उसे क्यों नहीं किया वापस? अब इसे पाखंड नहीं कहा जाये तो क्या नाम दिया जाए? आखिर कब तक बलात्कार और धर्म/जाति के नाम पर दंगे होते रहेंगे? जैसाकि पुरानी दिल्ली के लाल कुआँ क्षेत्र में मन्दिर को क्षति पहुँचाने और घरों में घुसकर हिन्दू महिलाओं को प्रताड़ित करने की घटना पर जो माहौल ख़राब होने पर जुलाई 2 की सुबह केन्द्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन के दौरा करने पर कुछ स्थानीय मुस्लिम नेताओं द्वारा हर्षवर्धन को भाईचारे की बात कहने पर मिली फटकार ने सारा वातावरण ही बदल दिया। इससे पूर्व परदे के पीछे बैठ जून 30 की रात्रि से सियासत खेल रहे थे, सरकार के सख्त रवैये ने उन सबको बाहर आकर बिगड़े माहौल को सामान्य करने बाहर आ गए, फतेहपुरी मस्जिद में इमाम गंगा-यमुना संस्कृति की शिक्षा देते नज़र आये। यदि केन्द्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने सख्त रुख अख्तियार नहीं किया होता, साम्प्रदायिक तत्व चारों खाने चित नहीं हुए होते। अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि "क्या गंगा-यमुना संस्कृति की दुहाई देने वाले और वर्षों से भाईचारे की बात करने वाले नेता वास्तविक गुंडों को पुलिस के हवाले करेंगे? एक कॉल पर हज़ारों का हुजूम जमा करवाने वाले को पुलिस के सुपुर्द करवाकर सख्ती से पेश आने के लिए कहेंगे? यदि नहीं, तो सब पाखण्ड से अधिक और कुछ नहीं।" जयपुर: पिता का दोस्त बताकर 7 साल की बच्ची को ले जाकर दुष्कर्म किया दिल्ली का माहौल शान्त हुआ भी नहीं था कि जयपुर में सात साल की बच्ची के साथ रेप के विरोध में लोगों ने जुलाई 2 को यहां जमकर प्रदर्शन किया। यहां मुसलमानों की भीड़ ने, दिल्ली की भाँति, एक पुलिस स्टेशन को घेर कर प्रदर्शन किया और कई वाहनों में तोड़फोड़ की, जिसके बाद से इलाके में तनाव व्याप्त हो गया है। पुलिस ने जुलाई 2 को यह जानकारी देते हुए बताया कि खुद को बच्ची के पिता का दोस्त बताकर एक व्यक्ति मासूम को अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह बच्ची को सड़क पर लहूलुहान हालत में छोड़कर चला गया। जुलाई 1 की रात बच्ची के परिजन उसे कनवतिया अस्पताल ले गए, जहां से उसे जेके लोन अस्पताल रेफर किया गया। लड़की को सर्जिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया है। मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके सीने पर खरोंच और माथे पर चोट के निशान हैं।उसके निजी भाग में खरोंच के निशान है और उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।घटना के बाद, जुलाई 2 की सुबह जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में तनाव बढ़ गया क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने जुलाई 1 की रात कई कारों के शीशे तोड़ दिए थे। संभागीय आयुक्त के.सी. वर्मा ने 3 जुलाई सुबह 10 बजे तक शहर के 13 क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है। पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और पुलिस आरोपी की तलाश कर रही है।आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर कंवतिया अस्पताल के पास भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने कहा, "लड़की खतरे से बाहर है।वरिष्ठ डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं।हम आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसे कठोरतम सजा दिलाने का प्रयास करेंगे।"उन्होंने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने का आग्रह किया। अवलोकन करें:-
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जुलाई 2 को लड़की का हाल जानने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा, "आरोपी को पकड़ने की हम कोशिश कर रहे हैं।इस तरह का अपराध करने वाले लोगों की हमारे समाज में कोई जगह नहीं है।" उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस मामले का राजनीतिकरण न किया जाए।स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने बच्ची के मुफ्त इलाज का आदेश दिया है। (इनपुट-आएएएनएस)