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धरना देकर पहलवान खेल संघ के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करवा सकते: भारत सरकार का सीमित दायरा, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति तय करती है नीतियाँ

                                             खेल महासंघ (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार- हिंदुस्तान)
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। महिला पहलवानों ने WFI चीफ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अब वे उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद POCSO ऐक्ट तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। इसलिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पहलवानों ने उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग की है। उन्होंने सरकार पर भाजपा सांसद सिंह को बचाने का आरोप लगाया है।

सरकार खेल मामलों में और उसके प्रबंधन में कितनी शामिल है, इसको लेकर हम कुछ तथ्य आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे वर्तमान स्थिति को समझने में मदद मिलेगी कि खेलों में सरकार की कितनी भूमिका है।

सरकार खेलों के प्रबंधन में शामिल नहीं 

भारत में खेलों का प्रबंधन संबंधित राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा किया जाता है, जो स्वतंत्र निकाय होते हैं। ये प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, विभिन्न स्तरों पर राज्य या देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों का चयन करते हैं और विभिन्न हिस्सों में खेलों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

सरकार देश के इन खेल संघों की मदद करती है, ताकि उनके आयोजनों और संचालन को सुगम बनाया जा सकते। इसके अलावा, खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और खेल पुरस्कार देना सरकार की भूमिका के तहत आता है। इसके अलावा, सरकार का विशेष हस्तक्षेप नहीं रहता है।

खेल संघ स्वायत्त गैर-सरकारी निकाय

संबंधित राष्ट्रीय खेल संघ स्वायत्त निकाय हैं, जो आमतौर पर BCCI की तरह ही भारत में सोसायटी के रूप में पंजीकृत होते हैं। इन संघों के प्रशासन या सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। सिर्फ संपर्क अधिकारियों को खेल मंत्रालय नियुक्त करता है, जो परामर्श से नियुक्त किए जाते हैं।

इन राष्ट्रीय संघों के बाद राज्य स्तर के खेल संघ आते हैं, जिनमें से सभी के अपने नियम, उप-कानून होते हैं। इन राज्य खेल संघों के अपने स्वयं के खेल संविधान या चार्टर होते हैं, जो उनके कामकाज और प्रबंधन में मार्गदर्शन का काम करते हैं।

कोई भी बना सकता है खेल महासंघ

यदि आप ऐसे लोगों के समूह हैं, जो किसी खेल से जुड़े हैं और आपको लगता है कि यह खेल भारत में प्रचार के लायक है तो आप एक महासंघ बना सकते हैं। हालाँकि, यह स्वचालित रूप से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं देता है। कुछ विशेषाधिकार प्राप्त करने के लिए इसे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल महासंघ से संबद्ध होना जरूरी है।

जैसे कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ फीफा (FIFA) से संबद्ध है। यदि संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ IOC (अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति) से संबद्ध है तो आपका संघ IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) का सदस्य बनने और सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल संघ के रूप में मान्यता प्राप्त करने के योग्य हो जाता है।

मान्यता प्राप्त खेल संघों को सरकार से मिलती है सहायता

सरकार खेलों के प्रचार और विकास के लिए काम करती है। खेल मंत्रालय विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के खेल संघों के आवेदन का आकलन करता है और उन्हें मान्यता देता है। इसके बाद वे वित्तीय अनुदान (विभिन्न योजनाओं के तहत) और अन्य सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इसके तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और विकास के लिए स्टेडियम उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेल उपकरण जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति शामिल है। समय-समय पर इन खेल संघों को सरकार अन्य प्रकार की सुविधाएँ भी प्रदान करती है।

गैर-ओलंपिक खेल संघों को भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो सकती है

यदि राष्ट्रीय खेल संघ IOA से संबद्ध हैं तो उसे सरकार से मान्यता प्राप्त करना आसान होता है। हालाँकि, यह अनिवार्य शर्त नहीं है। गैर-ओलंपिक खेल संघ भी मान्यता ले सकते हैं।

साल 2016 में 49 राष्ट्रीय खेल संघों को मान्यता दी गई। इनमें ‘रस्साकशी’ और ‘बॉडी बिल्डिंग’ जैसे गैर-ओलंपिक खेल भी शामिल हैं। खो-खो और कबड्डी गैर-ओलंपिक खेलों के लोकप्रिय उदाहरण हैं, जिन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और वे सरकार से सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।

BCCI ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ बनने के लिए आवेदन नहीं किया

क्रिकेट अन्य गैर-ओलंपिक खेलों से अलग है। क्रिकेट के लिए राष्ट्रीय खेल संघ के तौर पर BCCI ने कभी भी सरकार से मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। यही कारण है कि वह तर्क देता है कि उसे RTI के दायरे से बाहर रखा जाए।

BCCI का तर्क है कि वह उसे सीधे सरकारी सहायता नहीं मिलती है। इसलिए RTI में दायरे में नहीं आने चाहिए। साल 2011 में तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में पंजीकरण कराने के लिए कहा था, लेकिन BCCI ने ऐसा नहीं किया।

IOA से संबद्ध खेल महासंघों को खिलाड़ियों और अधिकारियों को आयोजनों में भेजने का अधिकार

कई लोगों के विचारो के विपरीत, सरकार खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में न तो चुनती है और न ही भेजती है। भारत में IOA खेल आयोजनों के सरकार और स्थानीय संघों के साथ मिलकर काम करता है।

IOA एक गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय है जो राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों या ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों के लिए खिलाड़ियों को चुनने के लिए सदस्य खेल महासंघ के साथ काम करता है। भारतीय ओलंपिक संघ IOC का सदस्य है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वायत्त निकाय है।

खेलों का आयोजन और प्रबंधन विभिन्न स्टेक होल्डर द्वारा किया जाता है

चाहे ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल जैसे खेल, इसमें एक आयोजन समिति होती है। इस समिति में IOA या IOC जैसे शीर्ष निकायों के सदस्य शामिल होते हैं।

इसके अलावा, स्थानीय सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए नगरपालिका जैसे स्थानीय प्राधिकरण, सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार और मंजूरी एवं बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्राधिकरण के सदस्य इसमें शामिल होते हैं। अनुदान सरकारी और गैर सरकारी स्रोतों से आता है। संबंधित खेल संघ भाग लेने वाले खिलाड़ियों और दल के मामलों का प्रबंधन करते हैं।

सरकार खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती

भले ही संघों को सरकार से सहायता प्राप्त हो, लेकिन सरकार के पास उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती है। हालाँकि, वास्तव में इसके विपरीत होता है।

उदाहरण के लिए जब IOC को पता चला कि भारत सरकार IOA के चुनाव में हस्तक्षेप कर रही है तो साल 2012 में उसने IOA को निलंबित कर दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर निलंबन वापस नहीं लिया जाता तो भारत ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाता।

खेल महासंघों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं IOA या अंतरराष्ट्रीय महासंघ

अगर कोई खेल महासंघ सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, क्योंकि वे स्वतंत्र निकाय हैं। हालाँकि, सरकार चाहे तो उन्हें सहायता और अनुदान से वंचित कर सकती है।

दूसरी तरफ, IOA या उस खेल का अंतरराष्ट्रीय महासंघ संबंधित खेल महासंघ पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था।

सरकार खेलों के लिए नियम और कानून बना सकती है

सरकार खेल संघों के कामकाज या प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। हालाँकि, वह ऐसे नियम और कानून बना सकती है, जिनका पालन करने के लिए इन संघों को कहा जा सकता है।

हालाँकि, ये संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संघों के नियमों और उप-नियमों के विपरीत नहीं होने चाहिए, अन्यथा राष्ट्रीय संघों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से निलंबित होने का जोखिम बना रहेगा। उदाहरण के लिए, फीफा ने कुवैत पर उस वक्त प्रतिबंध लगा दिया, जब उसे लगा कि इसके द्वारा पारित कानून खेल संघों की स्वायत्तता के लिए अच्छा नहीं है।

कई खेल निकाय और संघ राजनेताओं द्वारा नियंत्रित होते हैं 

सरकार भले ही खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, लेकिन यह भी सच है कि हर राजनीतिक दल के नेता किसी न किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ या उससे संबद्ध निकायों के सदस्य होते हैं। कई नेता तो कई खेल संघों के सदस्य होते हैं।

1982 से पहले भारत के पास नहीं था युवा मामले एवं खेल मंत्रालय

युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय की स्थापना भारत ने साल 1982 के एशियाई खेलों की मेजबानी मिलने के बाद की थी। सरकार ने इन खेलों के लिए कुछ नए स्टेडियमों का निर्माण किया और कुछ पुराने का जीर्णोद्धार किया।

इसके बाद इन स्टेडियमों का प्रबंधन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) नामक संगठन बनाकर उसे स्थानांतरित कर दिया। खेल मंत्रालय और SAI को खेल महासंघों और ‘अखिल भारतीय खेल परिषद’ जैसे सलाहकार निकायों के परामर्श से विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढाँचे की निर्माण का काम सौंपा गया है।

रियो ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष पर रहने वाले USA में खेल मंत्रालय नहीं  

अमेरिका में कोई खेल मंत्रालय या केंद्रीय निकाय नहीं है। वहाँ खेलों के विकास की देखरेख करने का काम स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग है।

अमेरिका का यह विभाग स्थानीय निकायों और स्कूलों को खेलों पर खर्च करने की सलाह देता है। खेल भी अमेरिका में शिक्षा के साथ महत्वपूर्ण रूप से से जुड़ा हुआ है। वहाँ संगठित खेल आयोजन अधिकांश हाई स्कूलों और कॉलेजों का हिस्सा हैं।

केरल : यौन शोषण की शिकायत करने वाली कॉलेज छात्राओं पर दबाव के बाद उनका साथ देने वाले शिक्षकों पर एक्शन

                                                                      प्रतीकात्मक 
केरल में उन कॉलेज प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई है, जिन्होंने यौन शोषण की शिकायत करने वाली छात्राओं का समर्थन किया था। मामला तिरुवनंतपुरम के चेम्पाझांथी (Chempazhanthy) स्थित एसएन कॉलेज का है। रिपोर्टों के अनुसार 6 छात्राओं ने इसी साल जुलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर टी अभिलाष पर यौन शोषण और आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। कोई कार्रवाई नहीं होने उन्होंने अगस्त में राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान से भी इसकी शिकायत की थी।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अब उन 5 प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई जिन्होंने इस मामले में छात्राओं का समर्थन किया था। इनमें से तीन का ट्रांसफर कर दिया गया है जबकि दो को सस्पेंड किया गया है। कार्रवाई कॉलेज का संचालन करने वाली श्री नारायण ट्रस्ट कोल्लम की ओर से की गई है। जिन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है उनके नाम हैं, मनु रेमाकांत, लक्ष्मी एजे, रेम्या सीआर, लेखा एनबी और संगीता हरिहरन। आरोपित टी अभिलाष राजनीति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर है।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़ितों का साथ देना कॉलेज मैनेजमेंट को नागवार गुजरा। कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए मनु रेमाकांत को एसएन कॉलेज चेरथला, रेम्या को नाग्यारकुलंगारा और संगीता का तबादला कोल्लम में कर दिया। कार्रवाई से पहले इन शिक्षकों को एक मेमो जारी किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें 8 नवंबर को मिली। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जानबूझकर शिक्षकों को मेमो का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

खास बात यह है कि आरोपित शिक्षक अभिलाष के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। छात्राओं का साथ देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। कॉलेज छात्रों ने 9 नवंबर को इस पर आपत्ति जताते हुए प्रबंधन से इसका कारण पूछा। इस मामले में प्रिंसिपल ने कहा कि शिक्षकों के तबादले में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि ​छात्राओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया था कि शिकायतकर्ता छात्राओं की पहचान तक उजागर कर दी गई। इतना ही नहीं मामले की जाँच के लिए इंटरनल कंप्लेन कमिटी के गठन में भी यूजीसी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।

ब्रिटेन : ड्रामा स्कूलों में यौन शोषण की शिकायतों का अंबार; ‘टीचर छाती दबाते, कहते- नंगे या सिर्फ अंडरवियर में रिहर्सल करो’

                                               ब्रिटेन के ड्रामा स्कूलों में यौन शोषण
हाल में चेन्नई के पद्म शेषाद्री बाला भवन (PSBB) के पूर्व और वर्तमान छात्रों ने एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद इस दक्षिण भारतीय शहर के कई स्कूलों, स्पोर्ट्स एकेडमी, यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों ने इसी तरह की आपबीती साझा की थी। ऐसे ही मामले ब्रिटेन से भी सामने आए हैं। वहाँ के कई कई नामी ड्रामा स्कूलों के पूर्व छात्रों ने शिक्षकों पर यौन शोषण के गंभीर इल्जाम लगाए हैं।

डेलीमेल की खबर के अनुसार, ब्रिटेन के ड्रामा स्कूल के पूर्व छात्रों ने बताया है कि स्कूल में टीचर उनकी छाती दबाते थे, उनसे नंगे होकर परफॉर्म करने को कहते थे और क्लास में अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे। ड्रामा स्कूलों में यौन शोषण की ये शिकायतें एक्टर और डायरेक्टर नोल क्लार्क पर लगे गंभीर इल्जामों के बाद कुछ हफ्ते बाद ही आई हैं। क्लार्क पर 20 महिलाओं के साथ गलत ढंग से बर्ताव के आरोप हैं, जिसे वे खारिज कर चुके हैं।

अब एकेडमी ऑफ लाइव एंड रिकॉर्ड आर्ट्स (ALRA) के पूर्व स्टाफ पर दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। इस मामले में एक पूर्व शिक्षक जाँच के दायरे में हैं। वहीं एसेक्स विश्वविद्यालय और सरे यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि वे अपने संस्थानों पर लगे आरोपों पर गौर करेंगे। इन यूनिवर्सिटी की गिल्डफोर्ड स्कूल ऑफ एक्टिंग (GSA) और ईस्ट 15 एक्टिंग स्कूल को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें मिली है।

वो ड्रामा स्कूल हैं जहाँ से बड़े-बड़े कलाकार निकले हैं। ALRA की बात करें तो यहाँ से एक्टर-कॉमेडियन मिरांडा हार्ट पास होकर निकले हैं। गिल्डफोर्ड स्कूल से एमा बार्टम और सीलिया इमरी निकली हैं। हालाँकि किसी नामचीन शख्सियत के साथ यौन शोषण की बात फिलहाल सामने नहीं आई है।

ब्रिटिश एक्टर्स नेटवर्क का कहना है कि उन्हें कम से कम 300 ऐसी शिकायतें मिली हैं जिसमें प्रताड़ना, यौन शोषण के पीड़ितों ने बताया कि उन्हें या तो ड्रामा स्कूल या इंडस्ट्री में में ये सब झेलना पड़ा।

लंदन के ALRA का कहना है कि इस मामले में वह जाँच कर रहे थे और कई लोगों से इस विषय में जानकारी देने की अपील की गई थी। स्कूल के बयान के मुताबिक छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने इस संबंध में सभी स्टाफ और छात्रों को मेल किया है कि वह इसमें समर्थन दें।

स्कूल की ओर से ऐसी शिकायतों के लिए एक ऐसा ऑनलाइन पोर्टल चलाया रहा है जहाँ अपनी पहचान उजागर किए बिना लोग शिकायत कर सकते हैं। स्कूल का कहना है कि वह कोई भी जानकारी होते ही संबंधित अधिकारियों से उसे साझा करेंगे और उचित लोगों से बात करेंगे। स्कूल ने यौन उत्पीड़न पर अपनी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी बताई है।

इसी तरह गिल्डफोर्ड स्कूल पर भी एक पूर्व छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने कहा था कि एक टीचर ने उसका घर पर यौन उत्पीड़न किया। दावा था टीचर ने उसे नंगे होकर या फिर सिर्फ अंडरवियर में रिहर्सल करने को कहा था। जब लड़की ने इस पर हिचक दिखाई तो दोबारा उसे वही करने को कहा गया।

टेलीग्राफ को एक पीड़िता ने बताया, “पढ़ाई के दौरान मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। नंगा होना आम था। मुझे नहीं लगता हम में से किसी को वो अलग लगा हो।” एसेक्स यूनिवर्सिटी के ईस्ट 15 ड्रामा स्कूल के बच्चों ने कहा है कि उन पर क्लास के दौरान सेक्सुअल कमेंट किए जाते थे। वहीं द पूअर स्कूल में जो 3 वर्ष पहले बंद हो चुका है, वहाँ लड़कियों की ब्रेस्ट को दबाया जाता था और बड़े लोग उनका उत्पीड़न करते थे। 

‘नंगी तस्वीरें माँगता, ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती’: हिंदूफोबिक कॉमेडियन संजय राजौरा की करतूत को महिला ने किया उजागर

मोदी के राजनीति में आने के बाद से देश में हिन्दू फोबिया इतना अधिक हो गया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। और इनको प्रभावशाली बनाने का काम कर रहे इनके प्रशंसक। हिन्दू होते हुए हिन्दुत्व को अपमानित कर रहे हैं। कोई इनसे यह नहीं पूछता कि मोदी का विरोध क्या हिन्दू और हिन्दुत्व को अपमानित करने से होगा? इन्हीं लोगों के आज देशवासी अपने वास्तविक इतिहास से अज्ञान हैं। वास्तविक इतिहास की बात करने वाले को ये और इनके प्रशंसक उसे संघी, बजरंगी, भाजपाई और फिरकापरस्त आदि नामों से बदनाम करते हैं। यमुना को जमुना बना दिया और मूर्ख हिन्दू शिक्षित होते हुए भी यमुना को जमुना बोलता है। अरे भाई, यमुना जमुना कब से हो गयी? 
लगभग 20 साल के उम्र वाली एक लड़की ने कॉमेडियन संजय राजौरा पर यौन उत्पीड़न का आरोप मढ़ा है। महिला ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए राजौरा पर इल्जाम लगाए। कॉमेडियन इस समय कॉमेडी कलेक्टिव ‘ऐसी तैसी डेमोक्रेसी’ का सदस्य है।’

23 सितंबर को लड़की ने अपनी पहचान तारा बताते हुए राजौरा के विरुद्ध पोस्ट लिखा। उसने बताया कि कैसे राजौरा ने मना करने के बाद भी उसे ओरल सेक्स के लिए जबरदस्ती की, वो भी सार्वजनिक स्थल पर। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे नग्न तस्वीरें माँगता था। 

                                                                                                                          पोस्ट के स्क्रीनशॉट

पीड़िता ने बताया कि वो इन सब चीजों को नजरअंदाज कर रही थी क्योंकि वह कॉमेडियन को उसके काम के लिए सराहती थी। लड़की मानती है कि कॉमेडियन की पब्लिक छवि ने उसके फैसले को प्रभावित किया था। उसको लगता था कि राजौरा तो कई प्रभावशाली लोगों को जानता है।

पोस्ट में पीड़िता इस बात को बताती है कि वह अपने साथ होते शोषण को नजरअंदाज करती रही क्योंकि वह राजौरा को एक नारीवादी पुरुष के तौर पर देखती थी। लड़की ने बताया कि राजौरा उसे “असुरक्षित (Unsafe)” और नग्न तस्वीरें भेजने के लिए कहता था। उसके मुताबिक, “मैंने उन्हें कहा भी कि ये बहुत जल्दी है और बहाने बनाकर अपनी हिचक दर्शायी, लेकिन वह लगातार ऐसा कर रहे थे और मेरे बहाने में खामियाँ ढूँढ देते थे।”

पीड़िता ने खुलासा किया कि कैसे कॉमेडियन ने उसे सार्वजनिक स्थान पर ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर किया। तारा ने लिखा, “उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे घुटनों पर बैठा कर मुझे एक्ट (ओरल सेक्स) करने के लिए गाइड किया।”

तारा ने आगे बताया कि इस घटना के अगले दिन राजौरा अपनी कार को पार्किंग से बाहर निकालते समय अपने भवन के गेट पर किसी ऐसे व्यक्ति से मिला, जिससे वह पेशेवर रूप से जुड़ा था। लड़की के मुताबिक राजौरा ने बेहद अजीब ढंग से हाथ मिलाया और चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसका मिलना और बात कहना (You’re man has been having fun with this young lady) ऐसा था जैसे कह रहा हो, “आज मैं करके आया हूँ।”

पीड़िता कहती है कि घटना के बाद भी उसने राजौरा से मिलना और बात करना नहीं छोड़ा था। उसे बहुत महीने लगे ये दर्दनाक एहसास होने में कि जो कुछ भी दोनों के बीच हुआ वो घातक, प्रबल और समस्याग्रस्त था। उसने बताया कि वह राजौरा के प्रभाव और ताकत को देख इतना डरती थी कि वह इन सबसे बाहर नहीं निकल पा रही थी।

लड़की लिखती हैं, “मैं अब ये सब क्यों लिख रही हूँ? ये मैं अपने लिए कर रही हूँ ताकि जो भार मैंने लंबे समय से झेला है उसे कम किया जा सके। ये जिम्मा मेरे ऊपर है कि दुनिया को अपना अनुभव से मना पाऊँ, इसलिए मैं कोई प्रूफ नहीं लगा रही। मैं ये सब समाप्त करने के लिए कर रही हूँ।”

अपने पोस्ट के आखिर में उसने लिखा, “मैंने जिन उदाहरणों का उल्लेख किया है, वे मेरे दर्दनाक अनुभव के चट्टान के सिरे मात्र हैं। कई बार ब्रेकडाउन और एंग्जाइटी अटैक आने के बाद से मैंने अपने सभी दोस्तों को खो दिया है। जिन चीज़ों से मैं गुज़री, उसने मेरी माँ को लगभग पागलपन की हद तक पहुँचा दिया। इस समय औपचारिक शिकायत शुरू करने के लिए मेरे पास भावनात्मक मजबूती नहीं है। मैं एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ना चाहता हूँ, यह यहीं समाप्त होता है।”

राजौरा ने अभी इन आरोपों की बाबत कोई बयान नहीं दिया है। मगर, इससे पहले वो हिंदू देवी देवताओं का मखौल उड़ाने के कारण चर्चा में आया था। राजौरा ने भगवान गणेश और भगवान शिव पर टिप्पणी की थी। इसके बाद रमेश सोलंकी की शिकायत पर उसके विरुद्ध शिकायत दर्ज हुई थी।

हैदराबाद : 10 साल में 5000 बार बलात्कार, 139 आरोपित; दर्ज कराई 42 पन्नों की FIR

25 साल की पीड़िता से 5000 बार रेप
25 वर्षीय पीड़ित महिला --प्रतीकात्मक चित्र 
भारत में रोजाना औसतन 90 से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज किए जाते हैं। पर इस तरह का मामला शायद ही कभी सामने आया हो। हैदराबाद के पंजागुट्टा थाने में 25 साल की पीड़िता ने खुद के साथ करीब 5000 बार रेप किए जाने की शिकायत गुरुवार (20 अगस्त 2020) को दर्ज कराई।
42 पन्नों की एफआईआर में 139 आरोपितों का जिक्र है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह संख्या 143 बताई गई है। इनमें से 138 आरोपित नामजद और 5 अज्ञात हैं। कुछ म​हिलाओं के भी नाम हैं। आरोपितों में वामपंथी छात्र संगठन के नेता, मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग, कारोबारी और पीड़िता के पूर्व पति के कुछ रिश्तेदार भी हैं।
पीड़िता की शादी काफी कम उम्र में जून 2009 में ही हो गई थी। शादी के करीब तीन महीने बाद ही ससुराल वाले उसे यौन और शारीरिक प्रताड़ना देने लगे। इससे तंग आकर दिसंबर 2010 में उसने तलाक ले लिया। इसके बाद वह अपने पिता के घर चली गई और पढ़ाई शुरू की।
प्रभासाक्षी की रिपोर्ट के अनुसार मायके में एक व्यक्ति से धोखा खाने के बाद पीड़िता हैदराबाद आ गई। यहॉं अलग-अलग इलाकों में उसके साथ रेप किया गया।
इस दुःखद और हैरानी भरे समाचार में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ होने की आशंका व्यक्त की जा रही है, जैसाकि ANI के ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं। बलात्कार जो वास्तव में अपने आपमें ही किसी ग्लानि से कम नहीं। परन्तु इतने वर्षों तक किस कारण पीड़िता बर्दाश्त कर रही थी? 10 वर्ष में 5000 बार बलात्कार वाकई चौकाने वाला समाचार है। अपराध आखिर अपराध ही होता है।


यौन शोषण के दौरान कुछ लोगों ने आपत्तिजनक स्थिति में उसका वीडियो बनाकर पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल किया। इस दौरान उसे प्रताड़ित करते हुए मारने की धमकी भी दी गई। यहॉं तक कि एसिड अटैक और पेट्रोल डालकर जलाने की धमकी भी दी गई।
पीड़िता के मुताबिक, “ये लोग ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाते हैं। उसकी तरह ही कई लड़कियॉं इनके द्वारा प्रताड़ित की गई हैं।” डेक्कन हेराल्ड ने पंजागुट्टा थाने के एसएचओ के हवाले से बताया है कि पीड़िता का बयान दर्ज कर मेडिकल जॉंच करवाया गया। उसके दावों की पुष्टि के लिए जॉंच जारी है।
पीड़िता के अनुसार कई बार उसके साथ गैंगरेप भी किया गया। उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। ड्रग्स दिया गया। नग्न नाचने को विवश किया गया और उसके शरीर को सिगरेट से दाग दिया गया। इनकार करने पर आरोपितों ने हथियारों से भी उसे धमकाया।
पीड़िता का दावा है कि डर की वजह से वह शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। उसने अपनी आपबीती एक गैर सरकारी संगठन (NGO) को बताई। इसके बाद उनकी मदद से पुलिस से शिकायत की।
28 नवंबर 2019 की सुबह हैदराबाद के बाहरी इलाके से एक महिला वेटनरी डॉक्टर की जली हुई लाश मिली थी। स्कूटी खराब होने पर मदद के नाम पर चार लोगों ने गैंगरेप के बाद उन्हें जला दिया था। बाद में पुलिस ने आरोपितों को एक मुठभेड़ में मार गिराया था।
हाल ही में इजरायल से भी रेप की एक खौफनाक घटना सामने आई थी। यहॉं के इलट (Eilat) शहर स्थित एक होटल में 30 लोगों ने लाइन लगाकर एक 16 साल की लड़की का रेप किया और वीडियो बना ली। आरोपित एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे और लड़की की मदद के बहाने उसके साथ रेप किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था।

झूठा है महिलाओं को सम्मान देने का दावा, ‘आप’ में दुशासनों की भरमार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल महिलाओं को सम्मान देने का दावा भले ही कर रहे हैं लेकिन हकीकत ये है कि पिछले पांच सालोंं से दौरान अरविंद केजरीवाल के नेताओं ने अपने कुकृत्यो से पूरे समाज को शर्मशार किया है। आम आदमी पार्टी के कई नेतााओं पर महिलाओं से यौन शोषण के आरोप लगे। दिल्ली सरकार के मंत्री संदीप सिंह पर राशन कार्ड बनवाने के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करने का मामला सामने आया। इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस की बार-बार मांग के बावजूद केजरीवाल सरकार संदीप सिंह के खिलाफ चार्टशीट दायर करने की अनुमति नहीं दे रही है। आप आदमी पार्टी के विधायक कर्नल सहरावत ने पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह पर पंजाब चुनाव में महिलाओ के यौन शोषण के आरोप लगाए। इसके अलावा आप आदमी पार्टी के अमानतुल्लाह खान और मोहिंदर गोयल के खिलाफ यौन शोषण मामले के दर्ज हुए। वीडियो में देखिए पूरी खबर-

(साभार)

SP नेता आफाक़ अहमद ख़ान ने बंदूक के बल पर 5 साल तक किया महिला का यौन शोषण

SP नेता आफाक़ ख़ान, यौन शोषण
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
समाजवादी पार्टी नेताओं के कार्यकलापों का मंथन करने पर अधिकतर कार्यकर्ता से लेकर नेताओं का चरित्र आपराधिक रहा है, समझ में नहीं आता क्यों जनता इस पार्टी को वोट देती है। अखिलेश यादव के कार्यकाल में प्रदेश में जब बलात्कार की घटनाएं होने पर मुलायम सिंह ने कहा था "बच्चों से गलती हो जाती है।" 
फिर मायावती के साथ हुए गेस्ट हाउस कांड(नीचे दिए लिंक को क्लिक करें) को कौन भुला सकता है। उसके बावजूद जब मायावती स्वयं भाजपा को सत्ता से दूर करने समाजवादी पार्टी से समझौता कर ले, ऐसे में दोनों पार्टियों की मानसिकता को भी समझा जा सकता।  
समाजवादी पार्टी के एक नेता पर एक महिला का यौन शोषण करने और उसे ब्लैकमेल करने का मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता ने कहा, “आफाक़ ख़ान एक शादीशुदा व्यक्ति है जिसके आठ बच्चे हैं, लेकिन 2014 से वह मेरा यौन शोषण कर रहा है और मेरी प्रतिष्ठा को ख़राब करने की धमकी देता है। वह मुझे बंदी बना लेता है और मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है। वह मुझे सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी भी दे रहा है।”
ख़बर के अनुसार, 36 वर्षीय पीड़िता ने कहा,
“मैं अब गंभीर रूप से बीमार हूँ और उसके चंगुल से मुक्त होना चाहती हूँ। आफाक़ ख़ान अपने साथ बन्दूक रखता है और उसने मुझे किसी भी तरह का विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी है।”
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समाजवादी पार्टी के इस पदाधिकारी ने अखिलेश यादव
के मुख्यमंत्री रहते अपने साथियों
के साथ मिलकर दलित के मुँह में पेशाब कर पीने
को विवश किया था। 
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में 4 दिसंबर को FIR दर्ज की गई थी और उसके बाद से ही मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।
कन्नौज़ ज़िले के छिबरामऊ पुलिस स्टेशन में आफाक़ अहमद ख़ान के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-342 (ग़लत तरीके से कारावास), 376 (बलात्कार), 500 (मानहानि की सज़ा) और 508 (जो किसी व्यक्ति को ऐसा कार्य करने के लिए कहता है जिसके लिए वो व्यक्ति क़ानूनी रूप से बाध्य नहीं है) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता के अनुसार, वह समाजवादी युवजन सभा के नेता आफाक़ ख़ान के सम्पर्क में तब आई थी जब उनके पति की मृत्यु हो गई थी और उन्हें नौकरी की तलाश थी। महिला के साथ परिवार का कोई अन्य सदस्य नहीं था।
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गेस्ट हाउस कांड के दौरान मायावती को बीजेपी के तत्कालीन विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बचाया था आर.बी.एल.निगम, वरिष्...
इस मामले पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जैसे ही जाँच एक निर्णायक चरण में पहुँचेगी, हम तुरंत कार्रवाई करेंगे।” कन्नौज, 2019 के लोकसभा चुनाव तक, समाजवादी पार्टी का गढ़ था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने कन्नौज से 2012 में और फिर 2014 में उपचुनाव जीता था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा भाजपा से हार गई थी।

पादरियों के कुकर्म : ‘घंटों नंगी खड़ी रखी जाती हैं ननें, पादरी बनाते हैं यौन सम्बन्ध’

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केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। उनकी पुस्तक लॉन्च होने के बाद केरल के चर्चों में हड़कंप मचनी तय है क्योंकि इसमें पादरियों के कुकर्मों को लेकर कई खुलासे होंगे। सिस्टर लूसी के बारे में बता दें कि इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। मुलक्कल की पैठ न सिर्फ़ चर्चों में है बल्कि कई राजनेताओं से भी उसके ख़ासे अच्छे सम्बन्ध हैं। अपने इन्हीं सबंधों का फ़ायदा उठा कर उसने पीड़ित ननों की आवाज़ दबाने के लिए कई प्रयास किए। उन ननों को वेटिकन तक से भी राहत नहीं मिली।
सिस्टर लूसी की पुस्तक के कुछ अंश एक मलयालम पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि साइरो-मालाबार चर्च में उनका कैसा अनुभव रहा? ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूलों में पादरियों द्वारा क्या गुल खिलाए जाते हैं, सिस्टर लूसी की पुस्तक में इसके कई उदाहरण मिलेंगे। पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती कर यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।

सिस्टर लूसी ने एक घटना का जिक्र किया है, जिसे जानना ज़रूरी है। जब वो मालाबार चर्च में थीं, तब वहाँ एक पादरी हुआ करता था। वो कॉलेज में पढ़ाता था और पास ही कॉन्वेंट में रहता था। कॉन्वेंट में उसने अपने लिए एक प्राइवेट कक्ष रखा था। उस पादरी को सुरक्षित सेक्स के लिए काउंसलिंग देने का कार्य सौंपा गया था। वह छात्रों को सेफ सेक्स के बारे में बताता था और सलाह देता था। लेकिन दिक्कत इससे नहीं थी। समस्या तब शुरू हुई, तब उक्त पादरी ने सेफ सेक्स के लिए ‘प्रैक्टिकल क्लास’ आयोजित करना शुरू किया।
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उसने अपने कक्ष में ननों को बुला कर ‘सुरक्षित सेक्स’ का प्रैक्टिकल क्लास लगाना शुरू कर दिया। इस दौरान वह ननों के साथ यौन सम्बन्ध बनाता था। ऐसा नहीं था कि उसके ख़िलाफ़ शिकायत नहीं की गई। उसके ख़िलाफ़ लाख शिकायतें करने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ा। उसके हाथों ननों पर अत्याचार का सिलसिला तभी थमा, जब वह रिटायर हुआ। सिस्टर लूसी लिखती हैं कि उनके कई साथी ननों ने अपने साथ हुई अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया और वो सभी भयावह हैं।
सिस्टर लूसी ने लिखा कि कॉन्वेंट्स में जवान ननों को पादरियों के पास उनके ‘यौन सुख’ के लिए भेजा जाता था। वहाँ वो सभी ननें घंटों नंगी खड़ी रखी जाती थीं। वो लगातार गिड़गिड़ाती रहती थीं लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया जाता था। कई ऐसे भी मामले हैं, जहाँ सीनियर ननों ने जूनियर ननों के साथ समलैंगिक सम्बन्ध बनाए। कई ऐसे मामले हैं, जहाँ नए पादरियों ने काम छोड़ देना ही उचित समझा क्योंकि पुराने पादरी उन्हें समलैंगिक सम्बन्ध बनाने को मज़बूर करते हैं। सिस्टर लूसी की आत्मकथा जल्द ही प्रकाशित होगी।
जब हिन्दू साधुओं के आश्रमों में इस तरह की घटनाएं होती है, खोजी पत्रकारों की भीड़ निकल आती है, लेकिन जब चर्चों में इस तरह की घटनाएं होती हैं, कोई खोजी पत्रकार नहीं बोलता। सबको केवल हिन्दू धर्म के विरुद्ध प्रचार कर अपनी TRP की चिंता होती है, परन्तु चर्चों पर चुप्पी साध लेते हैं, क्यों? नन गर्भ धारण कर लेती है,  कारणों पर मीडिया के मुंह में दही जम जाती है, मीडिया भी पता नहीं कौन-सी धर्म-निरपेक्षता निभाती है? 

#METOO: एमजे अकबर पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर पहली बार बोले अमित शाह

इन दिनों देश भर में  #metoo अभियान बड़े ही जोरों-शोरो से चल रहा है. #MeToo की चपेट में सिर्फ बॉलीवुड के कलाकार ही नहीं बल्कि राजनेता भी आए हैं. केंद्रीय मंत्री और विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर पर भी कई महिलाओं ने यौन शोषण आरोप लगाया है और अब उनके आरोपों का मामला तूल पकड़ रहा है. खुद बीजेपी की महिला मंत्रियों ने भी अकबर के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा कि सभी पीड़िताओं को न्याय जरूर मिलना चाहिए. हालांकि अकबर अभी विदेश दौरे पर हैं और ऐसे में बीजेपी पर उनके आरोपों को लेकर जवाब देने का दबाव बन रहा है.
हाल ही में स्मृति ईरानी ने इस मामले पर अपना बयान दिया था और अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस मामले पर अपनी टिप्पणी दी है. अमित शाह ने कहा कि ‘एम जे अकबर के खिलाफ लगे सभी आरोपों पर जांच होगी. इस मामले पर सत्यता से जांच करनी पड़ेगी. उन्हें पद की सत्यता और जिस व्यक्ति ने ये पोस्ट किया है उसकी भी जांच करनी पड़ेगी.’
एमजे अकबर पर लगे आरोपों के बाद पहली बार बीजेपी के किसी बड़े नेता का इस पर बयान आया है. अमित शाह ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए किसी पर भी आरोप लगाए जा सकते हैं. ऐसे में इसकी सत्यता की जांच जरूरी है.
कई महिलाओं ने एमजे अकबर पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने अपने पत्रकारिता की नौकरी के दौरान एमजे अकबर ने कई महिला सहकर्मियों का यौन शोषण किया था. करीब नौ महिला पत्रकार सोशल मीडिया पर एमजे अकबर पर गंभीर आरोप लगा चुकी हैं.
इस पर भाजपा वरिष्ठ नेता डॉ सुब्रमण्यन भी एम जे अकबर पर अपनी प्रक्रिया दे चुके हैं कि इन घटनाओं के घटित होने जाँच की माँग उठाने पर मुझे चुप करवा दिया गया था। 
शाह ने अपनी बातचीत में आगे कहा कि ‘आप मेरे नाम का इस्तेमाल करते हुए भी कुछ लिख सकते हैं. तो मुझे ऐसा लगता है कि इसकी सत्यता की जांच होनी चाहिए. सोशल मीडिया पर किसी पर भी आरोप लगा देना आसान है इसलिए इस पर जरूर सोचेंगे.’
शाह का ऐसा मानना है कि अकबर पर लगे आरोपों से नकारात्मक संदेश जा रहा है और पार्टी इसे लेकर चिंतित है. वैसे शाह का ऐसा बयान राजनीति के क्षेत्र में बहस का एक नया मुद्दा भी बन सकता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें एम जे अकबर पर कई महिला पत्रकारों ने यौन शोषण आरोप लगाया है. ये तब का मामला है जब वह कई मीडिया पब्लिकेशंस में एडिटर थे.
एमजे अकबर पर आरोप लगने के बाद बीजेपी के कुछ नेता उनके पक्ष में बयान दे रहे हैं तो कुछ उनके खिलाफ बोल रहे हैं. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि एमजे अकबर पर लगे आरोप अगर सही हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. वहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा है कि यह महिलाओं और एमजे अकबर के बीच का मामला है. इसपर उनका कुछ भी कहना गलत होगा.
उधर, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने #Metoo कैंपेन के तहत महिलाओं की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए रिटायर्ड जजों की एक कमेटी बनाने की बात कही है. इसी बीच एक विदेशी महिला पत्रकार ने आरोप लगाए हैं कि 2007 में इंटर्नशिप के दौरान एमजे अकबर ने उसका यौन उत्पीड़न किया था.
मेनका गांधी ने मंगलवार को एक समाचार चैनल को यहां बताया, ‘ताकतवर पदों पर बैठे पुरूष अक्सर ऐसा करते हैं. यह बात मीडिया, राजनीति और यहां तक कि कंपनियों में वरिष्ठ अधिकारियों पर भी लागू होती है.’ उन्होंने कहा कि अब जब महिलाओं ने इस बारे में बोलना शुरू किया है तो उनके आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘महिलाएं इस बारे में बोलने से डरती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनका मजाक बनाएंगे, उनके चरित्र पर उंगलियां उठाएंगे. लेकिन अब जब उन्होंने बोलना शुरू किया है तो हर एक आरोप के बारे में कार्रवाई की जानी चाहिए.’ 

#MeToo : फिर वायरल हो रहा एक झूठ - अमिताभ ने 41 साल छोटी एक्ट्रेस का सेक्शुअल हैरेसमेंट किया

सयाली भगत और अमिताभ बच्चन।
इस षड्यंत्र में जो शंका व्यक्त की जा रही है, वास्तव में सच हो रही है। सरकार का चुनाव में असली मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास है, जो मतदान समाप्त होते ही कोई #MeToo पर अपना दर्द बांटने नहीं आएगी। दरअसल मोदी विरोधियों के पास विरोध के लिए कुछ नहीं है, इसीलिए मोदी सरकार की उपलब्धियों को नजरअंदाज करवाने के लिए महिलाओं के सम्मान को चोटिल कर यह खेल खेला जा रहा है। जैसाकि पिछले चुनावों में होता रहा है। कभी जेएनयू मुद्दा, कभी दादरी काण्ड, तो कभी वेमुला काण्ड आदि आदि, चुनाव संपन्न होते ही, सब नदारद।
प्रारम्भ के दिनों में कोई वैश्य तक फिल्मों में काम करने को तैयार नहीं होती थी  
पत्रकारिता से पूर्व और बाद तक फिल्म व्यवसाय से जुड़े होने के कारण इस चकाचौंध के पीछे क्या होता है, शायद ही कोई फिल्म समीक्षक अज्ञान हो। शायद यही कारण था, कि पूर्व में कोई महिला फिल्मों में काम करने को तैयार नहीं होती थी। ज्ञात हो, फ़िल्मी दुनियाँ के पितामाह दादा साहब फाल्के जब अपनी फिल्म में महिला का अभिनय कोई महिला ही करे, तो महिला की तलाश में वैश्यालय तक पहुँच गए थे, लेकिन वहाँ पहुँचने पर भी निराशा ही मिली, क्योकि उन्हें कहा गया था, "फिल्म में वही वैश्या काम करने को तैयार होगी, यदि तुम अपने किसी बच्चे से शादी करने को तैयार हो।" समय परिवर्तन के साथ, आज जिसे देखो फ़िल्मी नगरी की ओर खींचा जा रहा है।खैर, अब सब इतिहास बन चूका है। 
पढ़िए दैनिक भास्कर की निम्न रपट:      
#MeToo कैंपेन ने सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकार महिलाओं को अपनी आपबीती सुनाने का एक मौका दिया है। सोशल मीडिया पर सेलेब्स की हैरेसमेंट की कहानियां सुनने को मिल रही हैं। इसी कड़ी में अमिताभ बच्चन ने पूर्व मिस इंडिया और नायिका सयाली भगत का सेक्शुअल हैरेसमेंट किया था। इस संबंध में सयाली भगता का एक स्टेटमेंट सर्कुलेट किया जा रहा है। लेकिन इस स्टेटमेंट की सच्चाई कुछ और है। खुद सयाली ने सामने आकर कहा है कि प्लीज मुझे और अमिताभ बच्चन को बदनाम मत कीजिए।
क्या झूठ फैलाया जा रहा है?
दरअसल एक ट्वीटर यूजर ने 7 साल पुरानी खबर को ट्वीट किया है। इसे कई बार री-ट्वीट किया जा रहा है। ट्वीट में सयाली भगत का एक स्टेटमेंट है। इसमें कहा गया है कि टीनू वर्मा की फिल्म 'द वीकेंड' की लॉन्चिंग के दौरान अमिताभ चीफ गेस्ट थे। जब सयाली अमिताभ से आशीर्वाद लेने झुकीं तो उन्होंने गलत तरीके से छुआ था। स्टेटमेंट में ये भी लिखा है कि सयाली शाइनी आहूजा, आर्य बब्बर, साजिद ख़ान और कई बड़े कलाकारों की हरकतों से भी परेशान हैं औऱ दुखी होकर इंडस्ट्री छोड़ रही हैं।
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आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक भारतीय सिनेमा के पितामाह कहे जाने वाले दादासाहेब फाल्के की आज 74वीं पुण्यतिथि है। दादा....




PROFILE SINCE the Indian films came into existence, so many film distributors,producers and directors came and will come on the scene but...
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हैरानी की बात तो यह है कि अब जो अलोक नाथ पर तीर फेंका है, वह अपना नाम गुप्त रखे हुए हैं, क्यों? इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि इस चकाचौंध रौशनी के पीछे अँधेरे में क्या है? लेकिन अभिनय क्षमता भी होनी चाहिए, परन्तु अपनी कमी के कारण असफल होने पर दूसरों पर कीजड़ फेंक फिल्म जगत तो क्या शायद में किसी धारावाहिक में भी स्थान मिल सके, क्योकि इन्होने सबके दिल में एक डर उत्पन्न जो कर दिया है।
चर्चित गायक अभिजीत भट्टाचार्य भी लगभग वही बात कह रहे हैं, जिन पर मैं भी अपने लेखों में शंका व्यक्त कर रहा हूँ। इन पर भी एक पब में एक महिला ने कान कुतरते किस करने का प्रयास करने के लगे आरोपों पर इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि "वह कभी पब ही नहीं गए।आप मुझे कभी page 3 या फ़िल्मी पार्टियों में नहीं पाओगे। मेरा नाम बिकता है। .... इस समय कुछ लोग डर्टी वे में बाहर आ रहे हैं। "

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फिल्म "हम साथ साथ हैं" के एक दृश्य में रीमा लागु के साथ अलोक नाथ जैसे ही मी टू कैम्पेन शुरू हुआ, रोजाना फिल्म इंडस्ट्र...

क्या है सच्चाई?

2011 में मामला कोर्ट तक पहुंचा तब पता चला किसकी शैतानी थी

जब DainikBhaskar.com ने सयाली भगत से बात की तो उन्होंने ऐसी किसी घटना से इंकार कर दिया। सयाली ने कहा- मैं सेक्सुअल हैरेसमेंट की शिकार नहीं हुई। मैं साइबर क्राइम की शिकार जरूर हुई हूं। झूठे प्रेस नोट को मेरा स्टेटमेंट बताकर फैलाया गया था और उसे फिर से ट्वीट किया जा रहा है। प्लीज इस खबर को मत चलाइए। प्लीज अमिताभ बच्चन और मुझे बदनाम मत कीजिए। दरअसल 2011 में 'द ट्रेन', और 'जेल' जैसी फ़िल्मों में काम कर चुकी पूर्व मिस इंडिया सयाली भगत का ये स्टेटमेंट सामने आने के बाद अमिताभ ने पुलिस का सहारा लिया। जांच के बाद ये मामला साइबर क्राइम का निकला। सयाली ने खुद को साइबर क्राइम का शिकार बताते हुए सभी सेलेब्स से माफी मांगी और कहा कि उनके पूर्व पब्लिसिस्ट ने बिना उनकी सहमति के ये बयान जारी कर दिया था, जिससे वे बहुत शर्मिंदा हैं। इसके बाद सयाली ने अपने पूर्व पब्लिसिस्ट के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
2011 की वो खबर जिसे दोबारा ट्वीट किया गया और वायरल हो रही है।
ट्वीट पर आ रहे सोशल मीडिया पर कमेंट।

सोशल मीडिया पर आए कमेंट।