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पॉर्नहब के मालिकों ने सेक्स ट्रैफिकिंग से कमाए पैसे, अब भरना पड़ेगा 18 करोड़ रूपए का जुर्माना: धोखे से बनाए गए कई महिलाओं के अश्लील वीडियो

                         पॉर्नहब की मूल कंपनी के ऊपर से हट जाएंगे सारे आरोप (फोटो साभार : आजतक)
पोर्नहब (PornHub) की मूल कंपनी आइलो (Aylo) सेक्स ट्रैफिकिंग से मुनाफा कमाने के आरोपों का सामना कर रही है। इसे सुलझाने के लिए कंपनी अमेरिकी सरकार को 1.8 मिलियन डॉलर यानी 15 करोड़ रुपए का भुगतान करने पर सहमत हो गई है। इसके अलावा, यौन तस्करी की शिकार पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति देगी। इसके बदले उसे तीन साल निगरानी में रहना होगा और फिर उसके खिलाफ चल रहा ये मामला वापस ले लिया जाएगा।

आइलो पर आरोप है कि पॉर्नहब के मालिकों ने एक ऐसी प्रोडक्शन कंपनी से पैसे लिए, जो उसके शूट किए गए वीडियो को सेक्स ट्रैफिकिंग का हथियार बना रहा था। गर्ल्स डू पोर्न (जीडीपी) नाम की प्रोडक्शन कंपनी ने उन महिलाओं के भी वीडियो बनाए थे, जिन्हें सेक्स ऐक्ट के लिए मजबूर किया गया था। आइलो ने इन आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि आयलो ने उन रिपोर्टों पर आँखें मूंद लीं, जिनमें कहा गया था कि साइट पर दिखाई देने वाले वीडियो में महिलाओं को धोखा देकर और जबरदस्ती कर वीडियो बनाए गए थे। यह आरोप पॉर्नहब पर पॉर्न वीडियो की होस्टिंग करने और प्रोडक्शन कंपनी से पैसे लेने से जुड़ा है। आयलो ने कहा कि उसे इस सामग्री को होस्ट करने का ‘गहरा अफसोस’ है।

सीएनएन ने बताया कि प्रोडक्शन कंपनी ने साल 2017 से साल 2019 तक खुद के द्वारा शूट किए गए पॉर्न वीडियो को स्ट्रीम करने के लिए वेबसाइट को भुगतान किया, जिसके बारे में आयलो को पता था कि इसमें उन महिलाओं के वीडियो भी शामिल थे, जिन्होंने इसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर होस्ट करने की अपनी सहमति नहीं दी थी।

इस मामले में आयलो से शिकायत की गई तो कंपनी ने वीडियो हटाना शुरू कर दिया। हालाँकि, ये वीडियो फिर से पॉर्नहब पर पोस्ट कर दिए गए और पूरी दुनिया में उपलब्ध रहे। अब आयलो ने कहा कि ऐसा कभी न हो, इसके लिए वो जरूरी सावधानियाँ बरेगी। हालाँकि, अभी कनाडाई कंपनी आयलो को 1.8 मिलियन डॉलर का जुर्माना देना होगा।

संयुक्त राज्य अमेरिका के अटॉर्नी ब्रॉन पीस ने कहा कि इस समझौते के मुताबिक, अब आयलो को हर हाल में पीड़ितों को भी मुआवजा देना होगा। समझौते के मुताबिक, आयलो को तीन साल तक निगरानी का भी सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कंपनी समझौते का पूरी तरह से पालन करती है तो उसके खिलाफ आरोप हटा दिए जाएँगे।

आयलो कंपनी को निजी इक्विटी फर्म एथिकल कैपिटल पार्टनर्स चलाते हैं, जिन्होंने पॉर्नहब की मूल कंपनी माइंडगीक को ही खरीद लिया था। इस कंपनी के खिलाफ कुछ साल पहले 40 पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि पॉर्नहब की पैरेंट कंपनी माइंडगीक को 2009 से ही ‘गर्ल्स डू पॉर्न’ की गैरकानूनी कामों की जानकारी थी।

साल 2016 आते-आते कई पीड़िताओं ने आगे आकर गलत तरीकों से सहमति हासिल करने या धोखे से अश्लील वीडियो शूट करने के आरोप लगाए थे। अब इन सभी मामलों का निपटारा हो गया है। दरअसल, अमेरिकी सरकार ने आयलो पर किसी भी तरह के यौन तस्करी कानून का उल्लंघन करने का आरोप नहीं लगाया, लेकिन कहा कि कंपनी को पता होना चाहिए था कि वह एक ऐसे समूह के साथ व्यापार कर रही थी, जो यौन तस्करी में शामिल था।

The Kashmir Files : कश्मीरी पंडितों से नेहरू ने कहा था – शेख अब्दुल्ला का साथ दो, या जहन्नुम में जाओ

‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ फिल्म अगर देखी है तो जरा इसे बनाने के पीछे लगी मेहनत और की गई रिसर्च को भी समझ लीजिए। अगर नहीं देखी है, तो ये सब जानने के बाद आप खुद देख आएँगे। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री पल्लवी जोशी, निर्माता अभिषेक अग्रवाल और ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ के अध्यक्ष सुरिंदर कौल की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के पीछे की मेहनत और रिसर्च को एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में पेश किया गया।

इसमें बताया गया है कि तमाम फतवों के बावजूद कैसे इस फिल्म के निर्माण को पूरा किया गया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि जब कश्मीर में पंडितों के नरसंहार से जुड़ी मानवीय कहानियों से उनका परिचय हुआ, तब जाकर उन्होंने इस विषय पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया। वीडियो में विवेक अग्निहोत्री अपनी पत्नी पल्लवी जोशी से ये चर्चा भी करते दिख रहे हैं कि ऐसा क्या है, जो अभी तक लोगों तक नहीं पहुँचा है और रिपोर्ट नहीं किया गया है।

कश्मीरी पंडित राजेंद्र कौल ने बताया कि ‘कश्मीर’ नाम इतना प्राचीन है कि महाभारत के समय में भी इसका उल्लेख मिलता है। वहीं सुरिंदर कौल का कहना है कि 1100-1200 ईस्वी तक वहाँ केवल हिन्दू ही रहा करते थे। भारत के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक ललितादित्य का शासनकाल था, जब भारत के अधिकतर हिस्सा उनके अंतर्गत आता था – ये भी बताया गया है। वहीं डॉक्टर राकेश कौल ने बताया कि कैसे कश्मीर के शाही राजा लोग हिन्दू थे, जिन्होंने अफगानिस्तान में शासन किया।

इसके बाद आक्रांता लोग आने लगे, जिन्होंने पहले मदद का दिखावा किया और फिर वहाँ कब्ज़ा करने लगे। इसी तरह शम्सुद्दीन ऐराकी भी ईराक से आया और उसने न सिर्फ जबरन धर्मांतरण किया, बल्कि कई मंदिरों को भी तोड़ा। उसने अपने आत्मकथा में भी लिखा है कि कैसे उसने कश्मीर में लोगों को मुस्लिम बनाया। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये एक निरंतर नरसंहार है, जो कई वर्षों से हो रहा है और लगातार होता रहा। नब्बे के दशक से पहले भी ये हो रहा था।

इसी तरह एक विशेषज्ञ ने बताया कि कैसे कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला ने भाषण दिया था कि कश्मीरी पंडित स्वाभाविक रूप से ‘मुस्लिमों के दुश्मन’ हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की तुलना शैतान से कर दी। विशेषज्ञ के अनुसार, और जब कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने पहुँचा, जब नेहरू ने कहा – ‘ये तो शेख अब्दुल्ला का साथ दो, या जहन्नुम में जाओ।’ कश्मीरी समस्या के लिए ब्रिटिश को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है, क्योंकि वो जहाँ भी गए वहाँ दिक्कतें खड़ी हो गईं।

इसी तरह जीवन ज़ुत्शी ने बताया कि पुराने कश्मीर के निवासी अथवा कश्मीरी पंडितों ने 1947 से ही घाटी को छोड़ना शुरू कर दिया था। इसी तरह बंसी पंडित ने बताया कि 1967 में वो कॉलेज में थे और तब एक लड़की थी, जिसका नाम परमेश्वरी था। उस नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण कर के इस्लामी धर्मांतरण करा दिया गया था और ‘परवीन अख्तर’ नाम दे दिया गया। इसके बाद उसकी शादी एक मुस्लिम से कर दी गई। राज्य और केंद्र सरकार शांत रही।

वीडियो में बताया गया कि कैसे 700 पीड़ितों से विवेक अग्निहोत्री ने बातचीत की। वो खुद कार ड्राइव कर-कर के वहाँ पहुँचे और उनसे बातचीत की। पीड़ितों ने बताया कि कैसे मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ उग्र हो जाती थी। मुस्लिम लड़कों के दिमाग में हिन्दू घृणा भरी जाती थी। वो दाढ़ी बढ़ाने लगे। एक महिला ने बताया कि ये कश्मीरी लड़के भगवान शिव की प्रतिमा पर पेशाब कर देते थे। मोहन लाल रैना ने बताया कि एक पुजारी की हत्या हुई और उसके बाद उनके होठ सिल कर उन्हें एक पेड़ पर लटका दिया गया था।

वहीं सुनंदा वशिष्ठ ने बताया कि मुस्लिम परिवारों के 16-25 उम्र के बच्चे कट्टरपंथी बनने लगे थे। कश्मीर के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि उस समय ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि 100 कश्मीरी युवकों को पाकिस्तान ले जाकर ‘प्रशिक्षण’ दिया गया था। वहीं अंजलि रैना ने बताया कि रात के अँधेरे में बंदूक चलाने की प्रैक्टिस करते लोग दिखते थे। अनुपम खेर ने बताया कि कश्मीर में पंडितों से कहा जाता था कि अपनी कंट्री में जाओ, जबकि भारत के अंदर ही कश्मीर है।

इसी तरह एक पीड़िता मंजू काक कौल ने एक पुरानी घटना याद की, जब वो 7वीं-8वीं कक्षा में थीं। उन्होंने बताया कि तब एक कट्टरवादी ने उन्हें पकड़ के दीवार से टकरा दिया और अपने हाथ उनके शरीर पर फेरते हुए कहा – बहुत बकवास करती हो। इसी तरह सुनीता दरवेश कौल ने बताया कि कैसे एक लड़के ने उनसे कहा था कि हिन्दुओं को यहाँ मार डाला जाएगा। ये 1988 की घटना है। पाकिस्तान में कई आतंकी ट्रेनिंग कैम्प्स थे।

सुरिंदर कौल का कहना है कि 1988 आते-आते माहौल बदलने लगा था और JKLF की एक नोटिस में लिखा था कि हिन्दू इलाका छोड़ कर चले जाएँ। मधुसूदन कौल के एक हाथ की एक उँगली ही चली गई, आतंकियों की गोली से। ये भी याद दिलाया गया है कि कैसे जस्टिस गंजू की हत्या में यासीन मलिक ने अपना हाथ कबूल किया था। नवीन धार ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे पेट्रोल बम मार रहे थे और पत्थरबाजी कर रहे थे।

मस्जिदों से घोषणा की जाती थी – मुस्लिम बन जाओ, इलाका छोड़ दो या मरो। एक महिला ने बताया कि जब कश्मीर में उनके परिवार को पता चला कि मारने आ रहे हैं तो उनके दादा ने कहा कि अगर वो लोग आते हैं तो वो सबसे पहले अपनी ही पोती को मार देंगे। कश्मीर में उस समय महिलाओं के लिए डर का ये आलम था। बिट्टा कराटे ने कबूला भी था कि वो अपनी सगी बहन या माँ को भी मार देता, इस मकसद के लिए।

एक पीड़ित ने बताया कि उनके पिता को मार कर उनके शरीर के साथ ईंटें बाँध कर नदी में फेंक दिया गया था। अनुराधा नाम की एक महिला ने बताया कि किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा, उन्होंने देखा है। उनके पिता के शरीर में कई गोलियाँ मारी गई थीं और पोस्टमॉर्टम के बाद ठीक से सिला भी नहीं गया था। नीरज साधु नामक एक महिला ने बताया कि उनका घर कश्मीर में था और माँ इसे काफी साफ़-सुथरा रखती थीं, ऐसे में वो दोबारा उस घर को गलत हालत में देख कर रो पड़ेंगी।

रेणु रैना नाम की महिला ने बताया कि एक सरदार जी जब कुछ लोगों को जा रहे थे, जब उनके पिता ने कहा था कि मुझे नहीं जाना है लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटी यहाँ से निकल जाए। अभिनव रैना का कहना है कि अधिकतर टेंट में पड़े हुए थे। इसी तरह एक अन्य युवक ने बताया कि उनकी माँ ने अपने बचे-खुचे गहने बेच कर बच्चों को पढ़ाया। विशेषज्ञों की मानें तो 1 लाख घर वीरान हो गए, जो 35 बिलियन डॉलर (2.68 लाख करोड़) की संपत्ति होते हैं। इसी तरह, 3.3 लाख करोड़ रूपए की जमीनें वहाँ कश्मीरी पण्डितों से छीन ली गईं।

शिवानी नाम की एक लड़की का कहना है कि हमलोग अपने माता-पिता से पूछते हैं कि हमारा अपना शहर कहाँ है। उस समय आज़ादी के नारे लगते थे। पाकिस्तान से लेकर कश्मीर तक इन कट्टरवादियों के कई आका बैठे थे। इसी तरह जनवरी 1989 का एक वाकया विजय कुमार गंजू ने सुनाया। उन्होंने बताया कि तब तत्कालीन प्रधानमंत्री से किसी पत्रकार ने कश्मीर को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि स्थिति अच्छी नहीं है और हम भी चिंतित हैं, लेकिन हम क्या कर सकते हैं क्योंकि वो (फारूक अब्दुल्लाह) मेरे दोस्त हैं।

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‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है’ – The Kashmir Files यही पूछता है – सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की र

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‘जब कोई जलता है तो मवाद निकलता है’ – The Kashmir Files यही पूछता है – सच को स्वीकार करोगे या पर्दा डालने की र

इस डॉक्यूमेंट्री में इस पर भी ध्यान दिलाया गया कि कैसे भारत की GDP कभी दुनिया का 40% हुआ करती थी, लेकिन आज़ादी आते-आते वो 2% पर आ गई। इसी तरह UN ने कश्मीर में हुई घटना को ‘Near Genocide (नरसंहार के करीब)’ बताया, जबकि ये नरसंहार की हर परिभाषा को पूरा करता है। कश्मीरी पंडितों को आशा है कि वो जल्द ही अपने घर जाएँगे। वो कहते हैं कि अनुच्छेद-370 को हटाने का मोदी सरकार का फैसला भारत की स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा फैसला है।

राजस्थान : अजमेर में 100+ छात्राओं का बलात्कार: कांग्रेसियों और दरगाह के खादिमों की करतूत की सज़ा कब? 30 साल हो गए, कई अब भी फरार

 राजस्थान (Rajasthan) के अजमेर शहर में आज से 30 साल पहले 1992 में एक वीभत्स सेक्स स्कैंडल हुआ था, जिसे ‘अजमेर सेक्स स्कैंडल’ के नाम से जाना जाता है। इस घटना ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना में एक गर्ल्स स्कूल की 100 से अधिक स्कूली लड़कियों की अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण किया गया था। इस कांड का असली गुनाहगार कांग्रेस नेता और अजमेर शरीफ दरगाह का खादिम था। मास्टरमाइंड था अजमेर शहर के यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपितों ने सबसे पहले एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म कर उसकी अश्लील तस्वीर उतारी और उसे अपनी गर्लफ्रेंड को लाने के लिए बाध्य किया। उसकी गर्लफ्रेंड से रेप करने के बाद उसकी भी अश्लील तस्वीर उतारी गई और उसे भी अपनी सहेलियों या दूसरी लड़कियों को लाने के लिए बाध्य किया गया। इसी तरह मजबूर होकर आने वाली हर लड़की का रेप किया जाता और उसे अपनी सहेली को लाने के लिए ब्लैकमेल किया जाता। इस तरह एक चेन बनाते हुए 100 से अधिक रसूखदार घरानों की हिंदू लड़कियों का यौन शोषण किया गया।

पीड़ितों में कई बड़े-बड़े अधिकारियों और शहर के नामचीन घरानों की लड़कियाँ थीं। बताया जाता है कि इस दौरान बदनामी के डर से कई लड़कियों ने आत्महत्या कर ली थी। 30 साल पुराने इस केस में संपूर्ण न्याय मिलना अभी भी बाकी है। हालाँकि, इस कांड से जुड़े 10 दोषी तो जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, लेकिन कई अभी भी बाहर घूम रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत की सरकार ने इसकी जाँच सीबी-सीआईडी को सौंप दी। शुरुआत में 18 आरोपितों, जिनमें फारूक चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष), हरीश दोलानी, अनवर चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस का ज्वाइंट सेक्रेटरी), नफीस चिश्ती (तत्कालीन यूथ कांग्रेस का वाइस प्रेसीडेंट), पुरुषोत्तम उर्फ बबली, इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहैल गनी, अल्मास महाराज, जमीर हुसैन, इशरत अली, मोइजुल्लाह उर्फ पूतन इलाहाबादी, परवेज अंसारी, नसीम उर्फ टारजन, महेश लोदानी, शम्शू उर्फ माराडोना, जऊर चिश्ती के खिलाफ जाँच शुरू की गई थी। इस केस में 12 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें से 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद एक आरोपित पुरुषोत्तम उर्फ बबली ने आत्महत्या कर ली। नसीम उर्फ टारजन तो जमानत पर बाहर आते ही फरार हो गया था। 2010 में पुलिस ने उसे फिर से पकड़ा। मास्टरमाइंड फारूक चिश्ती को 2007 में सजी सुनाई गई थी, लेकिन उसे सिजोफ्रेनिया की बीमारी के बाद मेंटल घोषित कर दिया गया।

नफीस को 2003 में अरेस्ट किया गया था, लेकिन अब वो बेल पर बाहर घूम रहा है। इकबाल भाटी भी बेल पर बाहर है। सलीम चिश्ती को उस घटना के 20 साल बाद 2012 में गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान वह बुर्के में पकड़ा गया था, लेकिन बेल पर वह भी बाहर है। सोहेल गनी चिश्ती ने साल 2018 में आत्मसमर्पण किया था और अब बेल पर बाहर है, जबकि अल्मास महाराज के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है।

पुलिस ने इस केस की जाँच के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश नहीं किया था। इस कारण गवाहों को बार-बार कोर्ट में गवाही देने के लिए आना पड़ा। इसी गलती के कारण यह केस आज भी खींच रहा है।

90 के दशक में अजमेर यूथ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती ने यह घिनौना कुकृत्य किया था। ये लोग तब राजनीतिक और धार्मिक रूप से इतने प्रभावशाली थे कि इनके खिलाफ कोई मुँह खोलने को तैयार नहीं होता था। जानकारी होने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से इसलिए बच रही थी कि शहर में दंगा ना भड़क जाए। ये खुद को अजमेर शरीफ के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम थे और खुद को चिश्ती का वंशज बताते थे। खास बात ये थी कि पीड़िताओं में हिंदू लड़कियाँ ही थीं, जबकि अधिकांश आरोपित मुस्लिम थे।

केरल : यौन शोषण की शिकायत करने वाली कॉलेज छात्राओं पर दबाव के बाद उनका साथ देने वाले शिक्षकों पर एक्शन

                                                                      प्रतीकात्मक 
केरल में उन कॉलेज प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई है, जिन्होंने यौन शोषण की शिकायत करने वाली छात्राओं का समर्थन किया था। मामला तिरुवनंतपुरम के चेम्पाझांथी (Chempazhanthy) स्थित एसएन कॉलेज का है। रिपोर्टों के अनुसार 6 छात्राओं ने इसी साल जुलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर टी अभिलाष पर यौन शोषण और आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। कोई कार्रवाई नहीं होने उन्होंने अगस्त में राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान से भी इसकी शिकायत की थी।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अब उन 5 प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई जिन्होंने इस मामले में छात्राओं का समर्थन किया था। इनमें से तीन का ट्रांसफर कर दिया गया है जबकि दो को सस्पेंड किया गया है। कार्रवाई कॉलेज का संचालन करने वाली श्री नारायण ट्रस्ट कोल्लम की ओर से की गई है। जिन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है उनके नाम हैं, मनु रेमाकांत, लक्ष्मी एजे, रेम्या सीआर, लेखा एनबी और संगीता हरिहरन। आरोपित टी अभिलाष राजनीति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर है।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़ितों का साथ देना कॉलेज मैनेजमेंट को नागवार गुजरा। कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए मनु रेमाकांत को एसएन कॉलेज चेरथला, रेम्या को नाग्यारकुलंगारा और संगीता का तबादला कोल्लम में कर दिया। कार्रवाई से पहले इन शिक्षकों को एक मेमो जारी किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें 8 नवंबर को मिली। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जानबूझकर शिक्षकों को मेमो का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

खास बात यह है कि आरोपित शिक्षक अभिलाष के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। छात्राओं का साथ देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। कॉलेज छात्रों ने 9 नवंबर को इस पर आपत्ति जताते हुए प्रबंधन से इसका कारण पूछा। इस मामले में प्रिंसिपल ने कहा कि शिक्षकों के तबादले में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

इससे पहले यह बात सामने आई थी कि ​छात्राओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया था कि शिकायतकर्ता छात्राओं की पहचान तक उजागर कर दी गई। इतना ही नहीं मामले की जाँच के लिए इंटरनल कंप्लेन कमिटी के गठन में भी यूजीसी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।