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साला, ब&नचो#, हरा&जा$, कुत्ता, माद&चो$… राहुल गाँधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ से पत्रकार के लिए निकली भाषा सुनी आपने? वीडियो वायरल

         भारत जोड़ो यात्रा में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी संग पूर्व RAW प्रमुख AS दुलत (फाइल फोटो, साभार: ANI)
निकालो इसको साले को, हटा…बहन चो% कौन? कौन साला हरामजा#$ बोल रहा था? कौन कुत्त& बोल रहा था? कौन था वो? मालूम है मैं कौन हूँ? कौन कह रहा था? मादरचो% तुम समझते क्या हो अपने आप को, मादरचो% सिंधी…पागल समझ रहे हो? तेरी माँ चो% दूँगा मैं, बहनचो%…

ये शब्द रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत के हैं। ‘भारत रफ्तार टीवी’ के पत्रकार जितेश जेठानंदानी ने हाल में उनका पॉडकास्ट किया। इस दौरान उनसे उनके पाकिस्तान जाने को लेकर भी प्रश्न हुआ, जिसे सुन दुलत विफर गए।

 नाराजगी इतनी बढ़ गई कि ऑन कैमरा उन्होंने हाथापाई और गाली-गलौच शुरू कर दिया। वीडियो अब चैनल पर मौजूद है। देख सकते हैं कि पत्रकार ने दुलत से पाकिस्तान के अलावा POK समेत अन्य मुद्दों पर भी सवाल पूछे, जिसे देते हुए वह हिचकते दिखे और पाकिस्तान जाने वाली बात पर भड़क गए।

पॉडकास्ट में पत्रकार ने एएस दुलत से पहला सवाल पूछा, “आप राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई दिए, कैसे आप उस यात्रा में जुड़े थे, क्या कारण थे?” इस पर दुलत जवाब देते हैं, “राहुल गाँधी जी का फोन आया था। मैं यात्रा में गया था। हाँ, मेरा विचार कॉन्ग्रेस से मिलता है। कॉन्ग्रेस राज के अंदर ही मैंने नौकरी की है। हम तो हमेशा कॉन्ग्रेस के साथ थे।”

अगला सवाल पूछा जाता है, “90 के दशक में कट्टपंथियों ने कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया था, उस पर आपका क्या कहना है?” दुलत कहते हैं, “वो यही लोग थे, जो दिल्ली से खफा थे और सिर्फ पंडितों को नहीं मारा है। मुसलमान ज्यादा मारे गए थे तब।” जवाब से लगता है कि उनकी नजर में मारने वाले इस्लामी कट्टरपंथी नहीं थे।

POK के मुद्दे पर सवाल किया जाता है तो दुलत कहते हैं, “कोई मुद्दा नहीं, क्या मुद्दा है?” फिर पत्रकार विस्तारित करते हैं, तब एएस दुलत जवाब देते हैं, “अगर कोई हल है तो वही है, LOC पर समझौता कर लो। जो आपके पास है, वो आपका है। जो हमारे पास है वो हमारा है।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन बढ़ने के सवाल पर दुलत कहते हैं, “हाँ-हाँ… पर्यटन बढ़ा है, मैंने तो कहा था कि कश्मीर के स्थानीय नेताओं की बात सुननी चाहिए थी।” बताया जाए कि उस समय कश्मीर के स्थानीय नेता अनुच्छेद 370 हटने का विरोध कर रहे थे। दुलत अपने जवाब में इसका समर्थन करते हैं और कहते हैं कि पर्यटन बढ़ना परेशानी है।

हाल ही में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी पत्रकार ने सवाल किए। पूछा गया “10-15 दिन पहले भारत-पाकिस्तान में तनाव थे”…इतने में दुलत कहते हैं, “मैं तो कहता हूँ। लाहौर ले लेना चाहिए था। मुझे तो लाहौर पसंद है।”

इससे अगला सवाल दुलत के पाकिस्तान में संपर्क को लेकर होता है। दुलत जवाब में कहते हैं कि उनके संपर्क तो हैं। कुछ दिन पहले पाकिस्तान जाने के सवाल पर दुलत विफर जाते हैं और मारपीट शुरू कर देते हैं। पत्रकार का यह सवाल एएस दुलत की हाल ही की किताब ‘स्पाय क्रॉनिकल्स रॉ ISI’ के संबंध में पूछा गया था। यह किताब दुलत ने पूर्व पाकिस्तानी जासूस असद दुर्रानी संग मिलकर लिखी है।

जब कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को प्रोपेंगेडा करार दिया

दुलत हमेशा देश में गलत कारणों से जाने जाते रहे हैं। उन्होंने अक्सर कॉन्ग्रेस के बीजेपी विरोधी और पाकिस्तान समर्थक प्रचार का समर्थन किया है। साल 2023 में कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी के हाथों में हाथ डालकर फोटो भी खिंचवाई।
इसके अलावा साल 2019 में निर्मित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’, जिसमें कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दिखाया गया। दुलत ने फिल्म को प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन को धो-पोंछने का काम किया था। यह कहते हुए कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन की लोकप्रिय धारणा वास्तविकता से अलग है।
एएस दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर बीजेपी पर सवाल उठाए थे। साल 2019 में आम चुनावों से पहले दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए तोहफा बताया। इसके बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी।

‘कश्मीर समस्या का इजरायल जैसा समाधान’ वाले आनंद रंगनाथन का मुस्लिम कट्टरपंथी कर रहे विरोध ; क्या कट्टरपंथी जनता के खून की होली पर खुश होते हैं?

                                     इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर जेएनयू के प्रो आनंद रंगनाथन
जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए ‘इजरायल जैसे समाधान’ की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। एएनआई के पॉडकास्ट में आनंद रंगनाथन ने ये सलाह दी थी, जिसके बाद जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने ऐलान किया था कि वो 13 जून की शाम 6 बजे जेएनयू कैंपस में आनंद रंगनाथन का पुतला फूँकेगा और मार्च निकालेगा। इसके बाद कश्मीरी हिंदुओं के संगठन Youth4PanunKashmir ने JNUSU को कानूनी नोटिस भेजा है। यूथ 4 पनुन कश्मीर कश्मीरी हिंदू युवाओं का वैश्विक संगठन है, जो कश्मीर से विस्थापित हुए हिंदुओं की आवाज उठाता है।

संगठन के वकील मुकेश शर्मा द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में लिखा है, “व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से एक सुनियोजित प्रयास किया गया है, जिसमें आपके संगठन (JNUSU) से जुड़े छात्र और बाहरी पक्ष शामिल हैं। जेएनयू कैंपस में प्रोफेसर रंगनाथन के लैब के बाहर प्रो. रंगनाथन का पुतला दहने करने का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को खराब करना है। ऐसा करना मेरे मुवक्किल (यूथ फॉर पनुन कश्मीर) के साथ-साथ प्रो. रंगनाथन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।”

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़े पोस्टों में रंगनाथन की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है। ऐसा करके प्रो रंगनाथन और मेरे मुवक्किल के खिलाफ दुश्मनीपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के विरोध प्रदर्शन बदनाम करने, उत्पीड़न और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे हैं, जो कानूनी रूप से गलत है। इसलिए यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन जेएनयूएसयू से आनंद रंगनाथन का पुतला जलाने या किसी अन्य तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की अपील करता है।

 इस नोटिस में छात्र संगठन से रंगनाथन के खिलाफ सभी अपमानजनक बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने तथा कश्मीरी हिंदुओं और रंगनाथन के बारे में आगे से झूठे और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा गया है।

कानूनी नोटिस पोस्ट करते हुए, यूथ 4 पनुन कश्मीर समूह ने कहा कि कश्मीरी हिंदू नरसंहार के शिकार हैं। कश्मीरियों द्वारा पास साल 1991 के रिजोल्यूशन के मुताबिक, कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नोटिस के मुताबिक, ‘हम न तो डरेंगे और न ही किसी को हमारी मातृभूमि पनुन कश्मीर में वापसी की हमारी उचित माँग का समर्थन करने वाली आवाज को चुप कराने की अनुमति देंगे।’

रंगनाथन ने यह टिप्पणी एएनआई संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा आयोजित पॉडकास्ट में की थी, जिसमें अभिजीत अय्यर-मित्रा, सुशांत सरीन और तहसीन पूनावाला भी शामिल थे। चर्चा के दौरान रंगनाथन ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने भारतीयों, खासकर कश्मीरी हिंदुओं को निराश करने के लिए हर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों की आलोचना की थी।

रंगनाथन ने कहा था, “आपने 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास नहीं किया है। पर्यटकों से आने वाला सारा पैसा आतंकवादियों के पास जा रहा है। यह आतंकवाद/उग्रवाद और आप इसे जो भी कहें, जारी रहेगा।” सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कश्मीर के लिए इज़रायल जैसा समाधान चाहिए। इज़राइल इसे हल करने में असमर्थ है, इसका कारण यह नहीं है कि इज़रायल इसे हल करने के लिए काम नहीं कर रहा है। इज़राइल ने अपने लोगों की ज़रूरतों को पूरा किया है, लेकिन हमने नहीं किया है।”

हालाँकि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जाने लगा, जिसमें बताया गया कि रंगनाथन इजरायल की तरह कश्मीर में लड़ाई की वकालत कर रहे हैं। बाद में 11 जून को उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट डालकर सफाई भी दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा कि ‘वो कश्मीर में हिंदुओं के पुनर्वास की माँग कर रहे थे, जैसे यहूदियों को इजरायल में फिर से बसाया गया। ये नरसंहार का आह्वान नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।’

उन्होंने लिखा, “इजरायल जैसे समाधान की माँग करना – पीड़ितों का पुनर्वास करना, बस्तियाँ बनाना, आतंकवाद से लड़ना, सीमाओं को सुरक्षित करना – नरसंहार की माँग नहीं है, बल्कि यह एक और नरसंहार को रोकने की माँग है। मैं इजराइल के साथ खड़ा हूँ। मैं कश्मीरी हिंदुओं के साथ खड़ा हूँ। और मैं हर एक शब्द के साथ खड़ा हूँ।”

जेएनयूएसयू को भेजे गए कानूनी नोटिस को लेकर रंगनाथन ने संगठन को धन्यवाद कहा और लिखा, “ये मेरे बारे में नहीं है और न ही इसके बारे में कि वो मुझे टारगेट कर रहे हैं और मार देंगे, बल्कि उन इस्लामिक कट्टरपंथियों के बारे में है, जो 7 लाख कश्मीरियों के पुनर्वास को नरसंहार बताने का काम साबित कर रहे हैं। वो आपको और 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।”

केजरीवाल की हिंदूफोबिया पुरानी : हनुमान जी ‘दंगाई’, स्वस्तिक को झाड़ू, छठ-दीवाली पर लिबरल राग : कश्मीरी पंडित नए शिकार

जहाँ एक तरफ पूरे देश की जनता कश्मीरी पंडितों के नरसंहार के सच्चे इतिहास पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को देख कर बर्बर इस्लामी इतिहास से परिचित हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने इसे एक ‘झूठी पिक्चर’ बताते हुए दिल्ली में फिल्म को टैक्स फ्री करने से इनकार कर दिया ये दिल्ली के मुख्यमंत्री के हिन्दू विरोधी रवैया को दिखाता है। जिस तरह वो और उनकी पार्टी के नेता हिन्दुओं के नरसंहार पर ठहाके लगाते हुए देखे गए, वो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।

अरविंद केजरीवाल ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर लगाव ठहाके

अरविंद केजरीवाल ने इस भाषण में कहा था, “निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को इतना ही शौक है तो बोलो यूट्यूब पर डाल देगा, वहाँ सब कुछ फ्री है और सारे लोग देख लेंगे एक ही दिन के अंदर। टैक्स फ्री कराने की ज़रूरत ही क्या है?” AAP विधायकों ने अपनी पार्टी के सुप्रीमो के इस बयान का स्वागत करते हुए विधानसभा में मेज थपथपाए। केजरीवाल सहित AAP विधायक ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर ठहाके लगाते हुए देखे गए।
हालाँकि, उनका ये हिन्दू विरोधी या देश विरोधी रवैया नया नहीं है। अब तो उनके इस बयान के सामने आने के बाद कश्मीरी शरणार्थियों ने भी उनकी पोल खोल दी है। उन्होंने 233 कश्मीरी पंडितों को नौकरी देने का दावा किया था। लेकिन, ‘गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (माइग्रेंट)’ ने बताया है कि कैसे इन शिक्षकों के खिलाफ उन्होंने दिल्ली उच्च-न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। प्रवासी शिक्षक संघ ने उनके बयान को झूठा बताया। इससे साफ़ है कि वो इससे पहले भी कश्मीरी पंडितों के खिलाफ ही रहे हैं।

भारतीय सेना से माँग चुके हैं सबूत, देश के जवानों की करते रहे हैं बेइज्जती

अरविंद केजरीवाल के राष्ट्र विरोधी रवैये की भी बात कर लेते हैं अब जरा। क्या आपको ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ याद है? उस समय भारत की सेना ने ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK)’ में घुस कर आतंकियों के ठिकाने तबाह किए थे और कई दहशतगर्दों को मौत के घाट उतार दिया था। उरी हमले के बाद हुई इस कार्रवाई के बाद देश जहाँ अपने जवानों की पीठ थपथपा रहा था, अरविंद केजरीवाल भारतीय सेना से सबूत माँग रहे थे।
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सितंबर 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो को जारी करने की माँग की थी और कहा था कि विदेशी मीडिया पाकिस्तान के दावे को सही ठहरा रही है। उन्होंने ये तक दावा कर दिया था कि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जगह भारत ही अलग-थलग पड़ रहा है। अपने वीडियो संदेश में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था, “ऐसी खबरों को देखकर मेरा खून खौल रहा है।”
इतना ही नहीं, अरविंद केजरीवाल ने फरवरी 2016 में हुए बालाकोट एयर स्ट्राइक को लेकर भी राजनीति की थी। पुलवामा हमले के बाद हुई भारतीय वायुसेना की इस कार्रवाई को लेकर उन्होंने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर झूठ बोलने का आरोप लगा दिया था। जब अमित शाह ने उस कार्रवाई में 250 आतंकियों के मारे जाने की बात कही, तब केजरीवाल ने उन पर झूठ बोलने का आरोप लगा दिया। उलटा उन्होंने भाजपा पर ही सेना को झूठा बोलने के आरोप लगा दिए थे।
उन्होंने मोदी सरकार पर पाकिस्तान समर्थित होने का आरोप लगा दिया था। ये भी याद कीजिए कि 2021 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के जवानों के लिए, खिलाड़ियों के लिए, सुरक्षाकर्मियों के लिए ताली बजवा रहे थे, उस समय वहाँ बैठे सब लोग तालियाँ बजाकर सम्मान दे रहे थे, लेकिन केजरीवाल को हाथ बाँधे देखा गया था। ऐसी हरकतों पर भला लोग उन्हें क्यों न देश विरोधी कहें?

हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों का भी अपमान कर चुके हैं दिल्ली के CM

अब अरविंद केजरीवाल के हिन्दू विरोध का आलम देखिए कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हनुमान मंदिर में दर्शन करने और हनुमान चालीसा पढ़ने वाले अरविंद केजरीवाल कभी भगवान हनुमान का भी अपमान कर चुके हैं। उन्होंने साथ-साथ स्वस्तिक का भी अपमान किया था। उन्होंने एक ट्वीट किया था, जिसमें एक प्रतीकात्मक चित्र में झाड़ू लिया हुआ व्यक्ति ‘स्वस्तिक’ चिह्न को खदेड़ कर भगा रहा है। हिन्दू संस्कृति में मांगलिक कार्यों में प्रयोग होने वाले स्वस्तिक का इस तरह से अपमान कर के वो किस तरह की राजनीति करना चाहते थे?
इसी तरह उन्होंने हनुमान जी का अपमान करते हुए उन्हें ‘दंगाई’ के रूप में चित्रित किया था। उन्होंने रामायण में वर्णित लंका दहन की दर्ज पर एक कार्टून शेयर किया था, जिसमें पूँछ वाला एक व्यक्ति आग लगा कर आ रहा है और पीएम मोदी से कह रहा है कि काम हो गया, अब सबका ध्यान JNU पर ही हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने ‘Make In India’ का भी मजाक बनाया था, जिसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था।
इसी तरह राजनीति के लिए अयोध्या का दौरा करने वाले अरविंद केजरीवाल ने अपनी नानी की बात करते हुए कभी राम मंदिर का भी अपमान किया था। अरविंद केजरीवाल ने एक रैली में कहा था, “जब बाबरी मंदिर का ध्वंस हुआ तब मैंने अपनी नानी से पूछा कि नानी आप तो अब बहुत खुश होंगी? अब तो आपके भगवान राम का मंदिर बनेगा। नानी ने जवाब दिया – ना बेटा, मेरा राम किसी की मस्जिद तोड़ कर ऐसे मंदिर में नहीं बस सकता।”

हिन्दू धर्म-ग्रंथों को लेकर झूठ, हिन्दू प्रव-त्योहारों से भी AAP को दिक्कत

अरविंद केजरीवाल सिर्फ हिन्दू देवी-देवताओं और प्रतीक चिह्नों तक ही सीमित नहीं रहे, उन्होंने हमारे धर्म-ग्रंथों को लेकर भी झूठी बातें की हैं। उन्होंने कहा था, “गीता में लिखा है कि एक सच्चा हिन्दू बहादुर होता है वो कभी मैदान छोड़कर भागता नहीं। मैंने अमित शाह को खुली बहस की चुनौती दी लेकिन वो मैदान छोड़कर भाग गए।” जबकि भगवद्गीता में ऐसा कोई श्लोक है ही नहीं। वहीं उसी दौरान असम में पीएम मोदी ने गीता के सही श्लोक का जिक्र कर के लोगों को अपने धर्म-ग्रंथों की बातों से परिचित कराया था।
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कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर ठहाके लगाने वाली राखी बिड़ला की फैमिली फाइल्स : पिता पर रेप केस, भ
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दीवाली में पटाखे को प्रतिबंधित करना हो या लोक आस्था के महापर्व छठ पर बैन लगाना हो, अरविंद केजरीवाल इन सब में आगे रह कर हिन्दुओं को अपमानित करते रहे हैं। यमुना नदी की सफाई के नाम पर 2000 करोड़ रुपए कहाँ गए, ये आज तक किसी को पता नहीं चला। नवंबर 2021 में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने श्रद्धालुओं को यमुना नदी के घाट पर छठ पूजा करने से मना कर दिया और घाट पर बैरिकेडिंग कर दी गई।

The Kashmir Files : ज़हर उगलने वाले मौलाना फ़ारूक़ ने माफ़ी मांगी

                                                               साभार- JK मीडिया
ज़हर उगल कर माफ़ी मांगने वाले मौलानाओं की वजह से कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार नहीं बल्कि देश में साम्प्रदायिक दंगे होते हैं। और जब कोई कपिल मिश्रा या अनुराग बोलता है, इनके समर्थक victim card खेलते हुए सारा दोष कपिल और अनुराग पर डाल मज़लूम, गरीब और नादान साबित करने की कोशिश करते हैं। सरकार को ऐसे मौलानाओं पर माफ़ी मांगने के बावजूद सख्त कार्यवाही करनी चाहिए, क्योकि माफ़ी से पहले ज़हर तो फैला चुके होते हैं। 
जम्मू कश्मीर के राजौरी के एक मौलवी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुदा की कसम खाते हुए हिंदुओं के मिट जाने का ऐलान करता है। मौलवी फारूक कश्मीरी पंडितों पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फ़ाइल्स (The Kashmir Files)’ नाम की फिल्म को बैन करने की माँग करता है। इस वीडियो के वायरल होने और उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग होने पर उसने प्रतिक्रिया है। मौलवी का कहना है कि वह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के खिलाफ बोला है।

कानूनी कार्रवाई को देखते हुए एक अन्य वीडियो में सफाई देते हुए मौलवी फारूक ने कहा, “आज से दो रोज पहले जुमे की खुतबे (धार्मिक भाषण) में ये कश्मीर फाइल्स के नाम से एक मूवी बनाई गई है, जिसमें हमारे कश्मीरी पंडित भाइयों के ऊपर जुल्म दिखाया गया है, उस सिलसिले में हमने मौजूदा हुकूमत से एक मुतालबा (अनुरोध) किया था कि इस तरह की फिल्में समाज में इंतसार का सबब होती हैं।”

उन्होंने कहा, “उसमें (खुतबे में) हमने मौजूदा हुकूमत से मुतालबा किया था कि वो ऐसी ‘फिलम’ पर पाबंदी लगाए। हमारा न किसी मजहब को, ना किसी तबके को टारगेट करना है, बल्कि मैं तो ये कहता हूँ कि कश्मीरी पंडित हमारे जम्मू-कश्मीर की शान हैं, आन हैं, बान हैं और उनके बगैर जम्मू-कश्मीर अधूरा है। मेरे बयान को शायद किसी के समझने में, क्योंकि मेरी तकरीर में किसी जात से कोई मतलब नहीं है। मेरा हुकूमत से इस बात का मुतालबा था।”

मौलवी कश्मीरी पंडितों को भाई बताते हुए माफी के दौरान भी फिल्म को एकतरफा करार दिया और कहा, “इसमें एक रूख दिखाया गया है। कश्मीरी पंडित हमारी भाई हैं, इसलिए उनके खिलाफ वाली कोई बात नहीं है।”

उन्होंने कहा कि अगर उनका जुमला कि किसी के समझ में ना आया हो तो वे एक ‘वसी उल कल्बी’ (बड़े दिल का) आदमी हैं, इसलिए माफी माँग रहे हैं। मौलवी कहा कि वे अमन का ही पैगाम देते हैं। उन्होंने किसी मजहब या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार से सवाल किया था।

जुमे की तकरीर में क्या था मौलाना ने

सामने आए वीडियो में राजौरी के जामा मस्जिद का मौलवी फारुक भारत पर 800 साल राज करने की बात करता है। इसके बाद वो खुदा की कसम खाते हुए हिंदुओं (जो सिर्फ 70 साल से राज कर रहे हैं) के मिट जाने का ऐलान कर रहा। जब फारूक जहर उगल रहा होता है, उस समय उसके सामने बैठी भीड़ ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाती है।
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The Kashmir Files बैन हो : ‘हमने 800 साल भारत पर हुकूमत की… खुदा कसम तुम मिट जाओगे’
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The Kashmir Files बैन हो : ‘हमने 800 साल भारत पर हुकूमत की… खुदा कसम तुम मिट जाओगे’
द कश्मीर फ़ाइल्स (The Kashmir Files) के निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा, “राजौरी के मौलवी साहब का कहना है कि यह फ़िल्म बंद होनी चाहिए। हमने 800 साल तुम पर हुकूमत की। तुम 70 साल की हुकूमत में हमारा निशान मिटाना चाहते हो? दोस्तों, बिलकुल इसी तरह कश्मीर से कश्मीरी हिंदुओं का नाम-ओ-निशान मिटा दिया गया था।”

The Kashmir Files : ‘दोबारा शुरू हो कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार की जाँच’: राष्ट्रपति को पहुँची याचिका

                            कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं
‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म ने हिंसा और पलायन के शिकार कश्मीरी हिंदुओं का मामला उठाकर मामले को मुख्यधारा के बहस में ला दिया है। अब इस पूरे मामले की जाँच नए सिरे की कराने की माँग की जा रही है।

दिल्ली के वकील विनीत जिंदल ने साल 1990 में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की दोबारा जाँच के लिए रामनाथ कोविंद (Ram Nath kovind) के पास याचिका भेजी है। अपनी याचिका में जिंदल ने इस पूरे नरसंहार की जाँच एसआईटी (SIT) कराने की माँग की है।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता जिंदल ने अपनी याचिका में कहा कि उस साल कश्मीर में हिंदुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ। इस हत्याकांड के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने कश्मीरी पंडितों को न्याय का भरोसा दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि इस नरसंहार को लेकर 215 प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन मामलों की जाँच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, लेकिन वह आतंकवादियों को दंडित करने के लिए कोई उपाय करने में विफल रही।

जिंदल ने कहा कि अगर सिखों के नरसंहार के 33 साल बाद केस को ओपन किया जा सकता है और उसकी दोबारा जाँच हो सकती है तो 27 साल पहले कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा के केस को खोला जा सकता है और इसकी दोबारा जाँच कराई जा सकती है। अधिवक्ता ने कहा कि यह एक भयानक घटना थी जब कश्मीरी पंडितों के साथ सामूहिक बलात्कार, हत्या, अपहरण ने उन्हें हमेशा के लिए सदमे में धकेल दिया।

वहीं, भरत गुप्ता नाम के एक यूजर ने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इस मामले वह स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे। उन्होंने लिखा, “मैं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अपील करता हूँ कि वे 1990 में कश्मीर घाटी में हुए हिंदू नरसंहार का स्वत: संज्ञान लेते हुए आरोपितों की पहचान का आदेश दें। इतने सारे सबूतों के बीच नूरेमबर्ग ट्रायल की तरह आदेश देना उनका कर्तव्य है।”

इसका जवाब देतेे हुए कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “अगला कदम यह होना चाहिए। क्या कोई कानूनी विशेषज्ञ सलाह दे सकता है कि इस मसले को हम कैसे आगे बढ़ा सकते हैं?” इस पर सुप्रीम कोर्ट में वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने रास्ता बताया। उपाध्याय ने कहा, “पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से NIA जाँच की सिफारिश करने का अनुरोध करना चाहिए। अगर उपराज्यपाल सिफारिश नहीं करते हैं तो पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। यदि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय याचिका को खारिज करता है तो मैं उच्चतम न्यायालय में उपलब्ध हूँ।”

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जब जगमोहन ने कर दिया था जुमे पर कश्मीर में इस्लामी फतह की प्लानिंग को नेस्तनाबूद : वो तारीख जिसक

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जब जगमोहन ने कर दिया था जुमे पर कश्मीर में इस्लामी फतह की प्लानिंग को नेस्तनाबूद : वो तारीख जिसक

कश्मीर फाइल्स रिलीज होने के बाद से चर्चा में है। यह फिल्म 7 दिन में 100 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई कर चुकी है।

The Kashmir Files : कश्मीरी पंडितों से नेहरू ने कहा था – शेख अब्दुल्ला का साथ दो, या जहन्नुम में जाओ

‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ फिल्म अगर देखी है तो जरा इसे बनाने के पीछे लगी मेहनत और की गई रिसर्च को भी समझ लीजिए। अगर नहीं देखी है, तो ये सब जानने के बाद आप खुद देख आएँगे। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री पल्लवी जोशी, निर्माता अभिषेक अग्रवाल और ‘ग्लोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा’ के अध्यक्ष सुरिंदर कौल की मौजूदगी में नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के पीछे की मेहनत और रिसर्च को एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में पेश किया गया।

इसमें बताया गया है कि तमाम फतवों के बावजूद कैसे इस फिल्म के निर्माण को पूरा किया गया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री का कहना है कि जब कश्मीर में पंडितों के नरसंहार से जुड़ी मानवीय कहानियों से उनका परिचय हुआ, तब जाकर उन्होंने इस विषय पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया। वीडियो में विवेक अग्निहोत्री अपनी पत्नी पल्लवी जोशी से ये चर्चा भी करते दिख रहे हैं कि ऐसा क्या है, जो अभी तक लोगों तक नहीं पहुँचा है और रिपोर्ट नहीं किया गया है।

कश्मीरी पंडित राजेंद्र कौल ने बताया कि ‘कश्मीर’ नाम इतना प्राचीन है कि महाभारत के समय में भी इसका उल्लेख मिलता है। वहीं सुरिंदर कौल का कहना है कि 1100-1200 ईस्वी तक वहाँ केवल हिन्दू ही रहा करते थे। भारत के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक ललितादित्य का शासनकाल था, जब भारत के अधिकतर हिस्सा उनके अंतर्गत आता था – ये भी बताया गया है। वहीं डॉक्टर राकेश कौल ने बताया कि कैसे कश्मीर के शाही राजा लोग हिन्दू थे, जिन्होंने अफगानिस्तान में शासन किया।

इसके बाद आक्रांता लोग आने लगे, जिन्होंने पहले मदद का दिखावा किया और फिर वहाँ कब्ज़ा करने लगे। इसी तरह शम्सुद्दीन ऐराकी भी ईराक से आया और उसने न सिर्फ जबरन धर्मांतरण किया, बल्कि कई मंदिरों को भी तोड़ा। उसने अपने आत्मकथा में भी लिखा है कि कैसे उसने कश्मीर में लोगों को मुस्लिम बनाया। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये एक निरंतर नरसंहार है, जो कई वर्षों से हो रहा है और लगातार होता रहा। नब्बे के दशक से पहले भी ये हो रहा था।

इसी तरह एक विशेषज्ञ ने बताया कि कैसे कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला ने भाषण दिया था कि कश्मीरी पंडित स्वाभाविक रूप से ‘मुस्लिमों के दुश्मन’ हैं। उन्होंने कश्मीरी पंडितों की तुलना शैतान से कर दी। विशेषज्ञ के अनुसार, और जब कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने पहुँचा, जब नेहरू ने कहा – ‘ये तो शेख अब्दुल्ला का साथ दो, या जहन्नुम में जाओ।’ कश्मीरी समस्या के लिए ब्रिटिश को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है, क्योंकि वो जहाँ भी गए वहाँ दिक्कतें खड़ी हो गईं।

इसी तरह जीवन ज़ुत्शी ने बताया कि पुराने कश्मीर के निवासी अथवा कश्मीरी पंडितों ने 1947 से ही घाटी को छोड़ना शुरू कर दिया था। इसी तरह बंसी पंडित ने बताया कि 1967 में वो कॉलेज में थे और तब एक लड़की थी, जिसका नाम परमेश्वरी था। उस नाबालिग हिन्दू लड़की का अपहरण कर के इस्लामी धर्मांतरण करा दिया गया था और ‘परवीन अख्तर’ नाम दे दिया गया। इसके बाद उसकी शादी एक मुस्लिम से कर दी गई। राज्य और केंद्र सरकार शांत रही।

वीडियो में बताया गया कि कैसे 700 पीड़ितों से विवेक अग्निहोत्री ने बातचीत की। वो खुद कार ड्राइव कर-कर के वहाँ पहुँचे और उनसे बातचीत की। पीड़ितों ने बताया कि कैसे मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ उग्र हो जाती थी। मुस्लिम लड़कों के दिमाग में हिन्दू घृणा भरी जाती थी। वो दाढ़ी बढ़ाने लगे। एक महिला ने बताया कि ये कश्मीरी लड़के भगवान शिव की प्रतिमा पर पेशाब कर देते थे। मोहन लाल रैना ने बताया कि एक पुजारी की हत्या हुई और उसके बाद उनके होठ सिल कर उन्हें एक पेड़ पर लटका दिया गया था।

वहीं सुनंदा वशिष्ठ ने बताया कि मुस्लिम परिवारों के 16-25 उम्र के बच्चे कट्टरपंथी बनने लगे थे। कश्मीर के एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि उस समय ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि 100 कश्मीरी युवकों को पाकिस्तान ले जाकर ‘प्रशिक्षण’ दिया गया था। वहीं अंजलि रैना ने बताया कि रात के अँधेरे में बंदूक चलाने की प्रैक्टिस करते लोग दिखते थे। अनुपम खेर ने बताया कि कश्मीर में पंडितों से कहा जाता था कि अपनी कंट्री में जाओ, जबकि भारत के अंदर ही कश्मीर है।

इसी तरह एक पीड़िता मंजू काक कौल ने एक पुरानी घटना याद की, जब वो 7वीं-8वीं कक्षा में थीं। उन्होंने बताया कि तब एक कट्टरवादी ने उन्हें पकड़ के दीवार से टकरा दिया और अपने हाथ उनके शरीर पर फेरते हुए कहा – बहुत बकवास करती हो। इसी तरह सुनीता दरवेश कौल ने बताया कि कैसे एक लड़के ने उनसे कहा था कि हिन्दुओं को यहाँ मार डाला जाएगा। ये 1988 की घटना है। पाकिस्तान में कई आतंकी ट्रेनिंग कैम्प्स थे।

सुरिंदर कौल का कहना है कि 1988 आते-आते माहौल बदलने लगा था और JKLF की एक नोटिस में लिखा था कि हिन्दू इलाका छोड़ कर चले जाएँ। मधुसूदन कौल के एक हाथ की एक उँगली ही चली गई, आतंकियों की गोली से। ये भी याद दिलाया गया है कि कैसे जस्टिस गंजू की हत्या में यासीन मलिक ने अपना हाथ कबूल किया था। नवीन धार ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे पेट्रोल बम मार रहे थे और पत्थरबाजी कर रहे थे।

मस्जिदों से घोषणा की जाती थी – मुस्लिम बन जाओ, इलाका छोड़ दो या मरो। एक महिला ने बताया कि जब कश्मीर में उनके परिवार को पता चला कि मारने आ रहे हैं तो उनके दादा ने कहा कि अगर वो लोग आते हैं तो वो सबसे पहले अपनी ही पोती को मार देंगे। कश्मीर में उस समय महिलाओं के लिए डर का ये आलम था। बिट्टा कराटे ने कबूला भी था कि वो अपनी सगी बहन या माँ को भी मार देता, इस मकसद के लिए।

एक पीड़ित ने बताया कि उनके पिता को मार कर उनके शरीर के साथ ईंटें बाँध कर नदी में फेंक दिया गया था। अनुराधा नाम की एक महिला ने बताया कि किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा, उन्होंने देखा है। उनके पिता के शरीर में कई गोलियाँ मारी गई थीं और पोस्टमॉर्टम के बाद ठीक से सिला भी नहीं गया था। नीरज साधु नामक एक महिला ने बताया कि उनका घर कश्मीर में था और माँ इसे काफी साफ़-सुथरा रखती थीं, ऐसे में वो दोबारा उस घर को गलत हालत में देख कर रो पड़ेंगी।

रेणु रैना नाम की महिला ने बताया कि एक सरदार जी जब कुछ लोगों को जा रहे थे, जब उनके पिता ने कहा था कि मुझे नहीं जाना है लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरी बेटी यहाँ से निकल जाए। अभिनव रैना का कहना है कि अधिकतर टेंट में पड़े हुए थे। इसी तरह एक अन्य युवक ने बताया कि उनकी माँ ने अपने बचे-खुचे गहने बेच कर बच्चों को पढ़ाया। विशेषज्ञों की मानें तो 1 लाख घर वीरान हो गए, जो 35 बिलियन डॉलर (2.68 लाख करोड़) की संपत्ति होते हैं। इसी तरह, 3.3 लाख करोड़ रूपए की जमीनें वहाँ कश्मीरी पण्डितों से छीन ली गईं।

शिवानी नाम की एक लड़की का कहना है कि हमलोग अपने माता-पिता से पूछते हैं कि हमारा अपना शहर कहाँ है। उस समय आज़ादी के नारे लगते थे। पाकिस्तान से लेकर कश्मीर तक इन कट्टरवादियों के कई आका बैठे थे। इसी तरह जनवरी 1989 का एक वाकया विजय कुमार गंजू ने सुनाया। उन्होंने बताया कि तब तत्कालीन प्रधानमंत्री से किसी पत्रकार ने कश्मीर को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि स्थिति अच्छी नहीं है और हम भी चिंतित हैं, लेकिन हम क्या कर सकते हैं क्योंकि वो (फारूक अब्दुल्लाह) मेरे दोस्त हैं।

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इस डॉक्यूमेंट्री में इस पर भी ध्यान दिलाया गया कि कैसे भारत की GDP कभी दुनिया का 40% हुआ करती थी, लेकिन आज़ादी आते-आते वो 2% पर आ गई। इसी तरह UN ने कश्मीर में हुई घटना को ‘Near Genocide (नरसंहार के करीब)’ बताया, जबकि ये नरसंहार की हर परिभाषा को पूरा करता है। कश्मीरी पंडितों को आशा है कि वो जल्द ही अपने घर जाएँगे। वो कहते हैं कि अनुच्छेद-370 को हटाने का मोदी सरकार का फैसला भारत की स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा फैसला है।