Showing posts with label #Anand Ranganathan. Show all posts
Showing posts with label #Anand Ranganathan. Show all posts

‘दो कौड़ी का आदमी… 10 वोट नहीं ले पाया’ : लाइव शो में आनंद रंगनाथन ने लगाई पूर्व आप नेता ‘पत्रकार’ आशुतोष को फटकार, बोले- चिल्लाओ मत, मैं तुम्हारा पिता नहीं; खेरा ने कहा :कांग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे

       आशुतोष गुप्ता और आनंद रंगनाथन में तीखी बहस (फोटो साभार: Youtube/TIMES NOW Navbharat)
‘टाइम्स नाउ नवभारत चैनल’ पर एक लाइव डिबेट के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राजनेता आशुतोष और लेखक आनंद रंगनाथन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर चर्चा के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे बहस एक अलग दिशा में चली गई।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच डिबेट का मुख्य मुद्दा अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने से संबंधित था। दोनों पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे थे। इस बीच, बहस का विषय अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गणेश उत्सव के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के घर पूजा करने जाने पर आ गया।

लेखक आनंद रंगनाथन ने आशुतोष की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पत्रकार के तौर पर वह जहाँ चाहें, जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आनंद रंगनाथन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर पत्रकार के रूप में आशुतोष स्वतंत्र हैं, तो यह नियम अन्य लोगों, खासकर चीफ जस्टिस पर भी लागू होना चाहिए।

इस दौरान बीजेपी की प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने आशुतोष से जुड़ा एक प्रसंग सामने रखा, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आँखों से देखा था, जब आप आम आदमी पार्टी में रहते हुए कांग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे।” दरअसल, आशुतोष ने दावा किया था कि वो अभी भी पत्रकार हैं। उन्होंने कहा ये भी कहा कि वो राजनीति भले छोड़ चुके हैं, लेकिन दलबदलू नहीं हैं। उनके इस दावे पर राधिका खेड़ा ने उन्हें एक्सपोज कर दिया, जिसके बाद वो चिल्लाने लगे। इस पूरी बहस को 3 मिनट के बाद देखा जा सकता है।

बहस के दौरान आशुतोष को आनंद रंगनाथन के लहजे और व्यक्तिगत टिप्पणी पर आपत्ति हुई, जिससे बहस और अधिक गर्म हो गई। आनंद रंगनाथन ने आशुतोष से कहा, “चिल्लाना बंद करो, मैं तुम्हारा पिता नहीं हूँ।” इस टिप्पणी के बाद आशुतोष नाराज हो गए और स्टूडियो में ही आनंद रंगनाथन की ओर बढ़ गए। इस बीच, रंगनाथन ने आशुतोष को बुरी तरह से झिड़क दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘दो कौड़ी का आदमी’ और ’10 वोट भी नहीं ला पाया’ जैसे तमगों के साथ संबोधित किया।

यही नहीं, जब आशुतोष ने हाथापाई की कोशिश की, तो रंगनाथन ने उन्हें ऐसा करके देखने के लिए भी ललकार दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘फर्जी जर्नलिस्ट’ कहकर भी एक्सपोज किया। इसके बाद आशुतोष ने माफी की माँग की, हालाँकि किसी भी पक्ष ने माफी नहीं माँगी।

स्थिति को बिगड़ते देख, शो को होस्ट कर रहीं सीनियर एंकर नाविका कुमार को बीच-बचाव करना पड़ा। उन्होंने दोनों को शांत करने की कोशिश की और स्थिति को संभाला।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच की इस तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस बहस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

आशुतोष कभी टीवी इंडस्ट्री के शीर्ष पत्रकारों में शामिल रहे थे। शुरुआत में उन्हें बहुजन राजनीति के जनक माने जाने वाले मान्यवर कांशीराम से मिले थप्पड़ ने खूब चर्चा दिलाई थी। वो कई बार टीवी डिबेट में बुरी तरह से रो भी चुके हैं। आशुतोष ने बाद में राजनीति ज्वॉइन कर ली थी और लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें बुरी तरह से हार मिली थी। चुनाव के दौरान आशुतोष अपना नाम आशुतोष गुप्ता लिखते थे। फिलहाल वो एक स्वतंत्र न्यूज पोर्टल से जुड़कर काम कर रहे हैं और टीवी चैनलों पर आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस का पक्ष लेकर बोलते सुने जाते हैं।

‘कश्मीर समस्या का इजरायल जैसा समाधान’ वाले आनंद रंगनाथन का मुस्लिम कट्टरपंथी कर रहे विरोध ; क्या कट्टरपंथी जनता के खून की होली पर खुश होते हैं?

                                     इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर जेएनयू के प्रो आनंद रंगनाथन
जेएनयू के प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक आनंद रंगनाथन ने कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए ‘इजरायल जैसे समाधान’ की बात कही थी, जिसके बाद से वो लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। एएनआई के पॉडकास्ट में आनंद रंगनाथन ने ये सलाह दी थी, जिसके बाद जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने ऐलान किया था कि वो 13 जून की शाम 6 बजे जेएनयू कैंपस में आनंद रंगनाथन का पुतला फूँकेगा और मार्च निकालेगा। इसके बाद कश्मीरी हिंदुओं के संगठन Youth4PanunKashmir ने JNUSU को कानूनी नोटिस भेजा है। यूथ 4 पनुन कश्मीर कश्मीरी हिंदू युवाओं का वैश्विक संगठन है, जो कश्मीर से विस्थापित हुए हिंदुओं की आवाज उठाता है।

संगठन के वकील मुकेश शर्मा द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में लिखा है, “व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से एक सुनियोजित प्रयास किया गया है, जिसमें आपके संगठन (JNUSU) से जुड़े छात्र और बाहरी पक्ष शामिल हैं। जेएनयू कैंपस में प्रोफेसर रंगनाथन के लैब के बाहर प्रो. रंगनाथन का पुतला दहने करने का उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को खराब करना है। ऐसा करना मेरे मुवक्किल (यूथ फॉर पनुन कश्मीर) के साथ-साथ प्रो. रंगनाथन की गरिमा और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।”

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़े पोस्टों में रंगनाथन की टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है। ऐसा करके प्रो रंगनाथन और मेरे मुवक्किल के खिलाफ दुश्मनीपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के विरोध प्रदर्शन बदनाम करने, उत्पीड़न और हिंसा को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे हैं, जो कानूनी रूप से गलत है। इसलिए यूथ 4 पनुन कश्मीर संगठन जेएनयूएसयू से आनंद रंगनाथन का पुतला जलाने या किसी अन्य तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की अपील करता है।

 इस नोटिस में छात्र संगठन से रंगनाथन के खिलाफ सभी अपमानजनक बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी माँगने तथा कश्मीरी हिंदुओं और रंगनाथन के बारे में आगे से झूठे और भड़काऊ बयान देने से बचने को कहा गया है।

कानूनी नोटिस पोस्ट करते हुए, यूथ 4 पनुन कश्मीर समूह ने कहा कि कश्मीरी हिंदू नरसंहार के शिकार हैं। कश्मीरियों द्वारा पास साल 1991 के रिजोल्यूशन के मुताबिक, कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में वापसी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नोटिस के मुताबिक, ‘हम न तो डरेंगे और न ही किसी को हमारी मातृभूमि पनुन कश्मीर में वापसी की हमारी उचित माँग का समर्थन करने वाली आवाज को चुप कराने की अनुमति देंगे।’

रंगनाथन ने यह टिप्पणी एएनआई संपादक स्मिता प्रकाश द्वारा आयोजित पॉडकास्ट में की थी, जिसमें अभिजीत अय्यर-मित्रा, सुशांत सरीन और तहसीन पूनावाला भी शामिल थे। चर्चा के दौरान रंगनाथन ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर अपना असंतोष व्यक्त करते हुए पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने भारतीयों, खासकर कश्मीरी हिंदुओं को निराश करने के लिए हर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों की आलोचना की थी।

रंगनाथन ने कहा था, “आपने 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास नहीं किया है। पर्यटकों से आने वाला सारा पैसा आतंकवादियों के पास जा रहा है। यह आतंकवाद/उग्रवाद और आप इसे जो भी कहें, जारी रहेगा।” सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कश्मीर के लिए इज़रायल जैसा समाधान चाहिए। इज़राइल इसे हल करने में असमर्थ है, इसका कारण यह नहीं है कि इज़रायल इसे हल करने के लिए काम नहीं कर रहा है। इज़राइल ने अपने लोगों की ज़रूरतों को पूरा किया है, लेकिन हमने नहीं किया है।”

हालाँकि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जाने लगा, जिसमें बताया गया कि रंगनाथन इजरायल की तरह कश्मीर में लड़ाई की वकालत कर रहे हैं। बाद में 11 जून को उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट डालकर सफाई भी दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा कि ‘वो कश्मीर में हिंदुओं के पुनर्वास की माँग कर रहे थे, जैसे यहूदियों को इजरायल में फिर से बसाया गया। ये नरसंहार का आह्वान नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया जा रहा है।’

उन्होंने लिखा, “इजरायल जैसे समाधान की माँग करना – पीड़ितों का पुनर्वास करना, बस्तियाँ बनाना, आतंकवाद से लड़ना, सीमाओं को सुरक्षित करना – नरसंहार की माँग नहीं है, बल्कि यह एक और नरसंहार को रोकने की माँग है। मैं इजराइल के साथ खड़ा हूँ। मैं कश्मीरी हिंदुओं के साथ खड़ा हूँ। और मैं हर एक शब्द के साथ खड़ा हूँ।”

जेएनयूएसयू को भेजे गए कानूनी नोटिस को लेकर रंगनाथन ने संगठन को धन्यवाद कहा और लिखा, “ये मेरे बारे में नहीं है और न ही इसके बारे में कि वो मुझे टारगेट कर रहे हैं और मार देंगे, बल्कि उन इस्लामिक कट्टरपंथियों के बारे में है, जो 7 लाख कश्मीरियों के पुनर्वास को नरसंहार बताने का काम साबित कर रहे हैं। वो आपको और 7 लाख कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।”