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पहलगाम हमले में बलिदान हुए विनय नरवाल की पत्नी का AI से अश्लील वीडियो बनाकर किया वायरल, बिहार से मोहिबुल हक और गुलाम जिलानी गिरफ्तार; इनके आकाओं को भी गिरफ्तार किया जाए

                               इस मामले में पिता पुत्र गिरफ्तार किए गए (साभार : आजतक ) 
पहलगाम में हुई नवविवाहित हिन्दू विधवा के गम के घाव अभी हरे ही हैं कि हिन्दू विरोधी कहा जाए या पाकिस्तान sleeper cell द्वारा उस बेचारी का
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अश्लील वीडियो बनाना किस गिरी हुई मानसिकता को जाहिर करता है? किसी भी मुल्ला/मौलाना ने कुछ नहीं बोला, अगर स्थिति विपरीत होती सारे चील कौए की चीख रहे होते। केंद्र सरकार, कोर्ट, पुलिस और सतर्कता विभाग को ऐसे लोगों की गंभीरता से जाँच इनके आकाओं को भी गिरफ्तार करना चाहिए।     

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए मेजर विनय नरवाल की पत्नी का चेहरा मॉर्फ कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी अश्लील वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करने के मामले में हरियाणा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। गुरुग्राम साइबर थाना की टीम ने बिहार के गोपालगंज पुलिस की मदद से मांझा थाना क्षेत्र के धोबवलिया गांव में छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में पिता-पुत्र शामिल

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मोहिबुल हक और उसके बेटे गुलाब जिलानी के रूप में हुई है. दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 'S S REAL POINT' नामक यूट्यूब चैनल पर शहीद की पत्नी का चेहरा मॉर्फ कर वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो को लेकर हरियाणा के गुरुग्राम साइबर थाना में कांड संख्या 195/25 दर्ज किया गया था।

पुलिस के अनुसार दोनों मांझा थाना क्षेत्र के धोबवलिया गाँव के रहने वाले हैं। दोनों ने विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल का AI की सहायता से अश्लील वीडियो बनाकर SS Real point नाम के यूट्यूब चैनल पर अप्लोड किया था।

वीडियो का स्रोत और लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने दोनों को मांझा थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया। दोनों के लैपटॉप और मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए गए हैं। पूछताछ में पता चला कि उन्होंने कई और लोगों के भी ऐसे वीडियो बनाए हैं।

हरियाणा पुलिस ने कोर्ट से रिमांड लिया

हरियाणा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गोपालगंज से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें अपने साथ ले गई। पूछताछ में पता चला है कि आरोपियों ने इस तरह के कई और वीडियो बनाकर शेयर किए हैं और कई लोगों को निशाना बनाया है। 

डिजिटल फॉरेंसिक से नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए आरोपियों के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और यह एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का हिस्सा हो सकता है। 

गोपालगंज पुलिस ने जारी की प्रेस रिलीज

गोपालगंज एसपी अवधेश दीक्षित की ओर से जारी प्रेस रिलीज में इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। प्रेस रिलीज में बताया गया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यूट्यूब चैनल को ट्रैक किया गया और फिर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की गई।

गिरफ्तारी से इलाके में हड़कंप

इस मामले में गिरफ्तारी के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है। लोगों में इस बात को लेकर चर्चा है कि किस तरह AI का दुरुपयोग कर शहीद परिवारों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

‘गाय’ दिखाकर आरफा खानम ने बकरीद की मुबारकबाद दी, गिरफ्तारी की माँग उठते ही पोस्ट किया डिलीट: Video जारी कर माफी के लिए गिड़गिड़ाई; CAA विरोध दिनों में भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने की बात कही थी


बकरीद के मौके पर हिंदुओं की भावनाओं को भड़काना इस्लामी कट्टरपंथियों की आदत हो गई है। इन इस्लामी कट्टरपंथियों में एक कॉन्ग्रेस की आरफा खानम भी हैं। आरफा खानम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें ईद की मुबारकबाद देते हुए एक चित्र था।

इस चित्र में एक मुस्लिम लड़का कुर्बानी के लिए गाय ले जाता दिख रहा है। पोस्ट को आरफा खानम ने सोशल मीडिया से डिलीट कर दिया है, लेकिन इसके स्क्रीनशॉट वायरल है। लोग अब आरफा की गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इसे शर्मिष्ठा मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी तो करवा दी। अब की इसे भी गिरफ्तार करो।

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद आरफा खानम ने सोशल मीडिया पर माफी माँगी है। उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए कि उन्होंने ये पोस्ट किसी की भावना आहत करने के लिए नहीं लिखा था।

अवलोकन करें:-

 https://nigamrajendra.blogspot.com/.../blog-post_34.html...

आगे उसने कहा, “मैं सभी धर्मों और मान्यताओं का पूरा सम्मान करती हूँ। जैसे ही मुझे मेरी गलती का एहसास हुआ, मैंने उसे तुरंत हटा लिया। मेरा उद्देश्य केवल त्योहार की शुभकामनाएं साझा करना था, ना की किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना। आइए हम सभी मिलकर सौहार्द, शांति और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें।”

भारत को बदनाम करने के लिए पाक ने दुनिया को दिखा रहा खरगे, टिकैत, नेहा, राठी के वीडियो; पाकिस्तान और पाकिस्तानपरस्त भूल रहे हैं भारत ने अभी अंगड़ाई लेनी है

             इन लोगों के बयान दिखाकर दुनिया से सहानुऊूति बटोरने का काम (साभार- सभी के X/FB अकाउंट)
किसी भी युद्ध, आतंकी घटना या संकट की घड़ी में देश के सभी लोगों से उम्मीद की जाती है कि वे एकजुट होकर उस संकट की घडी में सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। पाकिस्तानपरस्त नेताओं की नींद, रोटी और पानी हराम हो गया है। लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं के साथ ही देश में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो क्षणिक फायदे के लिए देश विरोधी बयान देने लगते हैं। कुछ लोग तो तु्ष्टिकरण और वोट की राजनीति के लिए बाहरी शक्तियों को मजबूत करने का काम करते हैं। इतना ही नहीं कुछ लोग तो सिर्फ वीडियो पर दो-चार हजार ज्यादा व्यूज आ जाए, इसके लिए फेक न्यूज फैलाने के साथ देश विरोधी भावनाओं के बढ़ावा देने लगते हैं। इसी सब का फायदा देश विरोधी तत्व उठाने लगते हैं। 

इजराइल द्वारा हमास पर हमला करने पर खूब इजराइल को कोसते रहते थे कि स्कूलों, हॉस्पिटल और निर्दोष लोगों को मार रहा है। लेकिन किसी ने हमास से यह नहीं पूछा कि क्यों स्कूलों और हॉस्पिटल में ठिकाने बनाए जा रहे हैं? दूसरे अब इन पाकिस्तानपरस्तों को नहीं दिख रहा कि इनका लाडला मंदिरों और गुरुद्वारों पर बमबारी कर रहा है। इतिहास साक्षी है कि सनातन विरोधियों का कभी कोई नामलेवा नहीं रहा।    

अभी जब पाकिस्तान के साथ संघर्ष जारी है, तब वहां की सेना कुछ भारतीय नेताओं और लोगों के बयान को दुनिया के सामने रख भारत को बदनाम करने की कोशिश में लगी है। पाकिस्तान की सेना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी के करीबी महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार, किसान नेता राकेश टिकैत, सपा प्रमुख अखिलेश यादव की करीबी नेहा सिंह राठौर, यूट्यूबर ध्रुव राठी, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान को वर्ल्ड मीडिया और विदेशी राजनयिकों के सामने रख अपने को सही बताने में लगी है। 

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार किया। इस कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तानी फौज ने अब भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें भारत के कुछ नेताओं, इन्फ्लुएंसर्स और आम लोगों के बयानों को शामिल किया गया है। यह वीडियो 60 देशों के राजदूतों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने पेश किया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमलों के बाद सरकार पर शिकंजा कसने के लिए पूरी मोदी विरोधी टोली एक साथ आ गई। एक्शन लेने के लिए बड़े बड़े सवाल किए गए, सरकार पर ताने मारे गए। कईयों ने तो ये तक कह डाला कि सरकार ने ही अपने लोगों पर हमला करवाया है। अब जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए भारत ने पाकिस्तान पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है तो इस टोली को साँप सूँघ गया है।

पाकिस्तानी फौज का दावा है कि यह वीडियो भारत की ‘असली तस्वीर’ दिखाता है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तथाकथित किसान नेता राकेश टिकैत, यूट्यूबर ध्रुव राठी, गायिका नेहा सिंह राठौर और शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद के बयान शामिल हैं। ये बयान पहलगाम हमले के बाद सरकार की आलोचना में दिए गए थे। कुछ ने सरकार पर सवाल उठाए, तो कुछ ने यह तक कहा कि हमला सरकार की साजिश था। पाकिस्तानी फौज ने इन बयानों को भारत के खिलाफ हथियार बनाकर दुनिया के सामने पेश किया है।

पहलगाम हमले के बाद भारत में सरकार से जवाबदेही की माँग उठी थी। विपक्षी नेताओं और कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने सरकार पर तीखे हमले किए। लेकिन जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, तो इन आलोचकों की बोलती बंद हो गई। पाकिस्तानी फौज ने मौके का फायदा उठाते हुए इन बयानों को वीडियो में जोड़ा और दावा किया कि भारत के अपने लोग ही सरकार के खिलाफ हैं।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों में गुस्सा है। यूजर्स का कहना है कि सरकार की आलोचना करना अलग बात है, लेकिन देश की एकता और सुरक्षा के समय इस तरह के बयान देना गलत है। कई लोगों ने ध्रुव राठी, नेहा सिंह राठौर और राकेश टिकैत पर देश को कमजोर करने का आरोप लगाया। एक यूजर ने लिखा, “ये लोग देश के मुश्किल वक्त में दुश्मन को ताकत दे रहे हैं।”

इसी बात का फायदा पाक फौज भी दुनिया के सामने उठाना चाहती है। फौजी अधिकारी वीडियो में कहते हुए सुने जा सकते हैं कि ये सभी भारतीय लोग हैं जो मुल्क की असलियत सामने रख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश : मुलायम सरकार ने वापस लिए संभल दंगों से जुड़े केस? आदेश की कॉपी सोशल मीडिया में वायरल, पीड़ित बोले- दोबारा हो जाँच

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने से पहले राज्य में कब दंगा हो जाए कुछ पता नहीं होता था। राज्य में सरकार चाहे कांग्रेस की हो या समाजवादी पार्टी की, दंगों में पीड़ित हिन्दू ही होता था। मुसलमान और मुस्लिम कट्टरपंथी 2002 गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को पानी पी-पीकर कोसते हैं। लेकिन दंगे की जड़ को भूल जाते हैं। दूसरे, 2002 से पहले गुजरात भी दंगों में उत्तर प्रदेश से पीछे नहीं था। लेकिन 2002 दंगों में नरेंद्र मोदी ने दंगाइयों को नहीं बख्शा, यही असली वजह है कि मुस्लिम कट्टरपंथी और छद्दम धर्म-निरपेक्ष की चादर ओढे ढोंगी मोदी को कोसते रहते हैं। दंगाइयों को ठिकाने की वही नीति योगी आदित्यनाथ ने अपनाई हुई है, जिसने गंगा-जमुना तहजीब और सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दुओं को प्रताड़ित करने वालों की नींद, रोटी और पानी पीना तक हराम हो गया है। हिन्दू खुलकर अपना कोई त्यौहार तक नहीं मना पाते थे। पास में मुसलमानों का मौहल्ला होने के कारण होली तक खेलना दुष्कर था। 

दूसरे, गुजरात दंगों पर मोदी को कोसने वाले अक्ल से पैदल मुसलमानों को कांग्रेस राज में हुए ईद-उल-फितर के दिन मलियाना दंगों को क्यों भूल जाते हैं? गुजरात दंगों को कट्टरपंथियों साबरमती ट्रेन में जिन्दा राम कारसेवकों को जिन्दा जलाये जाने पर हुए थे, लेकिन मलियाना में जो भयानक दंगा हुआ उसे अक्ल से पैदल नहीं भूलते। फिर भी ये कांग्रेस के तलवे चाटते रहते हैं।              
साल 1978 में उत्तर प्रदेश के संभल में हुए दंगों के मामले एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उस समय की मुलायम सिंह यादव सरकार ने कथित तौर पर दंगों से जुड़े आठ केस वापस ले लिए थे, जिसके बाद अब एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। 

2024 चुनावों में संविधान बचाने की दुहाई देने वालों जवाब दो कि "क्या दंगाइयों के केस वापस लेने की संविधान इजाजत देता है? संविधान की धज्जियाँ किसने उड़ाई? यानि चोर मचाये शोर।  

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पत्र 1993 में तत्कालीन विशेष सचिव (जस्टिस) आरडी शुक्ला द्वारा मुरादाबाद डीएम को भेजा गया था, जिसमें 16 मामलों में से आठ को वापस लेने का आदेश था। हालाँकि, मुरादाबाद प्रशासन ने पत्र की पुष्टि नहीं की है।

                                     संभल 1978 दंगों से जुड़ा कथित पत्र वायरल (फोटो साभार: न्यूज18)

इन मामलों में रिजवान, मुनाजिर, मिंजार और इरफान जैसे लोग मुख्य आरोपित थे। इन दंगों में आरोप था कि मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदू व्यापारियों को लूटा और कई हिंदुओं की हत्या की। मामले में मुआवजे को लेकर भी पीड़ितों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें जो मुआवजा मिला था, वह बहुत कम था।

अब दंगा पीड़ित हिंदू समुदाय के लोग मुलायम सिंह यादव सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं और योगी सरकार से इन दंगों की फिर से जाँच करने की माँग कर रहे हैं। वे न्याय की उम्मीद में हैं कि दोषियों को सजा मिल सके।

क्या जॉर्जिया मेलोनी को डेट कर रहे एलन मस्क? क्यों कहा- ये जितनी बाहर से सुंदर, उससे कहीं अधिक भीतर से…

        फोटो पर दोनों के डेटिंग करने की बात कही गई (फोटो साभार: X/@SawyerMerritt/@iam_smx)
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की हाल ही में अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क ने काफी प्रशंसा की। इटली की प्रधानमंत्री की प्रशंसा एलन मस्क ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में की। इसका एक वीडियो भी जॉर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया।

इस वीडियो में एलन मस्क मस्क, मेलोनी के इटली में किए गए कामों और उससे आए परिणामों को बताते हैं। इसके बाद मस्क ने यह भी कहा कि मेलोनी जितनी बाहर से सुंदर हैं, उससे ज्यादा अंदर से सुंदर हैं। दोनों की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

इस तस्वीर में दोनों एक डिनर में एक साथ बैठे हैं और एक दूसरे की तरफ देख रहे हैं। यह फोटो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। इस तस्वीर के बाद लोगों ने इस बात को लेकर चर्चा की क्या एलन मस्क और जॉर्जिया मेलोनी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

एलन मस्क ने डेटिंग के इस सवाल का खुद ही जवाब दे दिया है। उन्होंने डेटिंग के कयास को लेकर एक्स पर की गई एक पोस्ट के जवाब में साफ किया कि वह डेट नहीं कर रहे। उन्होंने लिखा, “हम डेट नहीं कर रहे हैं।” उनका यह जवाब भी अब वायरल है। यह ऐसा पहला मौका नहीं है जब जॉर्जिया मेलोनी चर्चाओं में बनी हुई हैं, इससे पहले भी वह कई बार कई मामलों को लेकर इंटरनेट पर छाई रही है।

जॉर्जिया मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी का जन्म 15 जनवरी 1977 को हुआ। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह एक इतालवी पत्रकार और पॉलिटिशियन थीं। सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के समर्थकों ने एक आंदोलन शुरू किया था। इसे इटालियन सोशल मूवमेंट नाम दिया गया था। 15 साल की उम्र में मेलोनी ने इसके यूथ विंग में काम किया। मेलोनी के पिता अकाउंटेंट थे। रोम में जन्मीं मेलोनी अंग्रेजी, स्पेनिश और फ्रेंच बोलती हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2006 में हुआ।

इटली की पहली दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री

जॉर्जिया मेलोनी साल 2008 में 31 साल की उम्र में इटली की सबसे युवा मंत्री बनी थीं। वहीं साल 2012 में उन्होंने ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की स्थापना की। इसके बाद 2021 में मेलोनी की किताब आई ‘आइ एम जॉर्जिया’, जिसमें उनके विजन और विचारों पर खूब बात हुई है। 
जॉर्जिया मेलोनी के बारें में एक तथ्य ये भी है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद इटली में ये पहली बार हुआ है जब राइट विंग कि कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठी हों। ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की नेता मेलोनी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मुस्लिम अप्रवासियों को शरण देने का खुलकर विरोध किया था और इसके साथ ही समलैंगिकों (LGBT) का भी उन्होंने जमकर विरोध किया था।

कट्टरपंथी इस्लाम, आतंकवाद और समलैंगिकता की मुखर विरोधी 

25 सितंबर, 2022 को अपनी जीत के बाद से ही मेलोनी समर्थक जहाँ खुश हैं वहीं उनके आलोचक उनकी दक्षिणपंथी ब्रदर्स ऑफ़ इटली पार्टी के उदय के बाद से ही लगातार हमले कर रहे हैं। मेलोनी जिन मुद्दों पर चुनाव जीतकर आईं थीं, उन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही स्पष्ट कर दिया है कि वह एलजीबीटी लॉबी, जेंडर आइडियोलॉजी और कट्टरपंथी इस्लाम का विरोध करती हैं, इसके साथ अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप की वह नव-फासीवादी हैं, उन्होंने साफ़ मना कर दिया था।

‘दो कौड़ी का आदमी… 10 वोट नहीं ले पाया’ : लाइव शो में आनंद रंगनाथन ने लगाई पूर्व आप नेता ‘पत्रकार’ आशुतोष को फटकार, बोले- चिल्लाओ मत, मैं तुम्हारा पिता नहीं; खेरा ने कहा :कांग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे

       आशुतोष गुप्ता और आनंद रंगनाथन में तीखी बहस (फोटो साभार: Youtube/TIMES NOW Navbharat)
‘टाइम्स नाउ नवभारत चैनल’ पर एक लाइव डिबेट के दौरान वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राजनेता आशुतोष और लेखक आनंद रंगनाथन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर चर्चा के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे बहस एक अलग दिशा में चली गई।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच डिबेट का मुख्य मुद्दा अरविंद केजरीवाल को जमानत मिलने से संबंधित था। दोनों पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे थे। इस बीच, बहस का विषय अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गणेश उत्सव के अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय चंद्रचूड़ के घर पूजा करने जाने पर आ गया।

लेखक आनंद रंगनाथन ने आशुतोष की उस टिप्पणी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पत्रकार के तौर पर वह जहाँ चाहें, जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आनंद रंगनाथन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर पत्रकार के रूप में आशुतोष स्वतंत्र हैं, तो यह नियम अन्य लोगों, खासकर चीफ जस्टिस पर भी लागू होना चाहिए।

इस दौरान बीजेपी की प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने आशुतोष से जुड़ा एक प्रसंग सामने रखा, जिसमें उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आँखों से देखा था, जब आप आम आदमी पार्टी में रहते हुए कांग्रेस के कम्युनिकेशन हेड रणदीप सुरजेवाला से मिलने पिछले दरवाजे से चोरों की तरह जाते थे।” दरअसल, आशुतोष ने दावा किया था कि वो अभी भी पत्रकार हैं। उन्होंने कहा ये भी कहा कि वो राजनीति भले छोड़ चुके हैं, लेकिन दलबदलू नहीं हैं। उनके इस दावे पर राधिका खेड़ा ने उन्हें एक्सपोज कर दिया, जिसके बाद वो चिल्लाने लगे। इस पूरी बहस को 3 मिनट के बाद देखा जा सकता है।

बहस के दौरान आशुतोष को आनंद रंगनाथन के लहजे और व्यक्तिगत टिप्पणी पर आपत्ति हुई, जिससे बहस और अधिक गर्म हो गई। आनंद रंगनाथन ने आशुतोष से कहा, “चिल्लाना बंद करो, मैं तुम्हारा पिता नहीं हूँ।” इस टिप्पणी के बाद आशुतोष नाराज हो गए और स्टूडियो में ही आनंद रंगनाथन की ओर बढ़ गए। इस बीच, रंगनाथन ने आशुतोष को बुरी तरह से झिड़क दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘दो कौड़ी का आदमी’ और ’10 वोट भी नहीं ला पाया’ जैसे तमगों के साथ संबोधित किया।

यही नहीं, जब आशुतोष ने हाथापाई की कोशिश की, तो रंगनाथन ने उन्हें ऐसा करके देखने के लिए भी ललकार दिया। उन्होंने आशुतोष को ‘फर्जी जर्नलिस्ट’ कहकर भी एक्सपोज किया। इसके बाद आशुतोष ने माफी की माँग की, हालाँकि किसी भी पक्ष ने माफी नहीं माँगी।

स्थिति को बिगड़ते देख, शो को होस्ट कर रहीं सीनियर एंकर नाविका कुमार को बीच-बचाव करना पड़ा। उन्होंने दोनों को शांत करने की कोशिश की और स्थिति को संभाला।

आशुतोष और आनंद रंगनाथन के बीच की इस तीखी नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर लोग इस बहस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

आशुतोष कभी टीवी इंडस्ट्री के शीर्ष पत्रकारों में शामिल रहे थे। शुरुआत में उन्हें बहुजन राजनीति के जनक माने जाने वाले मान्यवर कांशीराम से मिले थप्पड़ ने खूब चर्चा दिलाई थी। वो कई बार टीवी डिबेट में बुरी तरह से रो भी चुके हैं। आशुतोष ने बाद में राजनीति ज्वॉइन कर ली थी और लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें बुरी तरह से हार मिली थी। चुनाव के दौरान आशुतोष अपना नाम आशुतोष गुप्ता लिखते थे। फिलहाल वो एक स्वतंत्र न्यूज पोर्टल से जुड़कर काम कर रहे हैं और टीवी चैनलों पर आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस का पक्ष लेकर बोलते सुने जाते हैं।

सोनिया गाँधी के लिए मदर टेरेसा का संत होना भारत के लिए ‘गौरव’: लेकिन पुरुषोत्तम श्रीराम काल्पनिक

                                                                                    साभार: India Today/Quotage Biography
कांग्रेस ने 11 जनवरी 2024 को एक पत्र जारी करके अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से मना कर दिया। इस समारोह का आयोजन 22 जनवरी 2024 को होना है, जिसमें देश-दुनिया भर से लोग शामिल होंगे। इस समारोह के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को निमंत्रण पत्र भेजा गया था।

कांग्रेस ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया है और एक पत्र जारी करके प्राण प्रतिष्ठा में ना जाने की वजह बताई है। पत्र में लिखा गया है, “भगवान राम की पूजा-अर्चना करोड़ों भारतीय करते हैं। धर्म मनुष्य का व्यक्तिगत विषय होता आया है, लेकिन बीजेपी और आरएसएस ने वर्षों से अयोध्या में राम मंदिर को एक राजनीतिक परियोजना बना दिया है।”

जहाँ कांग्रेस ने इस पत्र में धर्म को निजी विषय बताया है, वहीं सोशल मीडिया पर साल 2016 में लिखा गया सोनिया गाँधी का एक अन्य पत्र वायरल हो रहा है। यह पत्र सोनिया गाँधी ने वेटिकन के पोप फ्रांसिस को लिखा था, जिसमें भारत में दशकों तक रहीं ईसाई नन मदर टेरेसा के संत घोषित करने की प्रक्रिया से संबंधित था। इस पत्र को कांग्रेस  के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से साझा किया गया था।

इस पत्र में सोनिया गाँधी ने लिखा था कि मदर टेरेसा के संतीकरण से भारत में रहने वाले 2 करोड़ ईसाइयों सहित सभी नागरिक इस बात से बहुत गर्वित और प्रसन्न हैं कि पोप और कैथोलिक चर्च द्वारा मदर टेरेसा की आत्मा की पवित्रता, उद्देश्य की पवित्रता और मानवता की सेवा के माध्यम से ईश्वर की सेवा की।

उन्होंने आगे लिखा कि मदर टेरेसा का संत घोषित किया जाने वाला समारोह सभी भारतीयों के लिए उन्हें धन्यवाद देने का अवसर है, क्योंकि उन्होंने भारत में बिताए गए अपने समय में ‘देश के सबसे गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा’ की। उन्होंने आगे लिखा है कि टेरेसा ने अपना जीवन निस्वार्थ सेवा में बिताया और हर किसी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और सीखना चाहिए कि ‘हमारे रोजमर्रा के जीवन में करुणा और प्रेमपूर्वक रहने और दयालुता कैसे दिखाई जाए’।

सोनिया गाँधी ने भी टेरेसा के संतीकरण के इस पवित्र आयोजन के लिए वेटिकन जाने की इच्छा जताई थी। हालाँकि, उन्होंने कहा था वह बीमारी के कारण इस पवित्र आयोजन में नहीं शामिल हो पाएँगी। अपनी जगह उन्होंने कांग्रेस के दो नेताओं- मारग्रेट अल्वा और लुइज़िन्हो फलेइरो को वेटिकन सिटी में आयोजित समारोह में भेजा था।

जो सोनिया गाँधी कल तक पूरे देशवासियों की तरफ से मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने पर ख़ुशी जता रही थीं और ईसाइयों के सबसे बड़े पद पोप को पत्र लिख रहीं थीं, वहीं अब उनकी पार्टी हिन्दुओं के आराध्य के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को निजी मामला बताकर जाने से मना कर रही हैं।

कांग्रेस ने इस पूरे आयोजन को भाजपा और आरएसएस का कार्यक्रम बताया है। अब यह भी प्रश्न उठ रहा है कि यदि सोनिया गाँधी को धार्मिक मामले में राजनीतिक संगठनों का जुड़ा होना पसंद नहीं है तो वह एक ईसाई नन के संतीकरण के आयोजन पर इतना ख़ुशी क्यों थीं और अपनी पार्टी की तरफ से पत्र क्यों लिख रही थीं?

अवलोकन करें:-

मदर टेरेसा की वास्तविकता

मदर टेरेसा को लेकर भी भारतीय जनमानस में कई प्रश्न उठते रहे हैं। मदर टेरेसा पर आरोप है कि वह गरीबों को ईसाइयत में धर्मान्तरित करने का चक्र चलाती थीं। इसके साथ ही वह इलाज के ऐसे तरीकों को बढ़ावा देती थीं, जो कि सही नहीं थे। दरअसल, मदर टेरेसा एक धार्मिक मिशन पर भारत में थीं और उनके काम को कैथोलिक ईसाइयों द्वारा समर्थन मिलता था।

कर्नाटक : केले का बागान, साड़ी में टीचर, जींस-कुर्ते में छात्र… गोद में उठाकर चुम्मा चाटी: स्कूल का ‘एजुकेशनल टूर’ वाला वीडियो वायरल

टीचर और छात्र का रोमैंटिक फोटोशूट वायरल (तस्वीर साभार: X @satya_AmitSingh)
कर्नाटक के एक सरकारी स्कूल की टीचर का उसके स्टूडेंट के साथ कराया गया रोमांटिक फोटोशूट सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है। फोटोज में स्टूडेंट-टीचर दोनों एक दूसरे को चूमते हुए और गले लगते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ये कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के मुरुगमल्ला गाँव के स्कूल से जुड़ी खबर है। स्टूडेंट-टीचर दोनों निजी तस्वीरों में किसी फिल्मी सीन की तरह पोज देने की कोशिश कर रहे हैं। फोटो में टीचर ने साड़ी पहनी हुई है और छात्र ने जींस-कुर्ता। देख सकते हैं कि फोटो में स्टूडेंट अपनी टीचर को गुलाब देकर उनको पल्लू पकड़ता है। एक में उन्हें चूमता है। अगले में टीचर उसे चूमती हैं और फिर वो अपनी टीचर को गोद में भी उठाए दिखता है।

हैरान करने वाली बात तो यह है कि फोटोशूट में नजर आ रही टीचर, स्कूल की प्रधानाध्यापिका है। वहीं छात्र कक्षा 10 का छात्र है। इन दोनों की फोटोज देख बवाल मच गया है। छात्र के माता-पिता हैरान परेशान हैं। वहीं अन्य अभिभावकों ने प्रधानाध्यापिका के पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

इस संबंध में एजुकेशन ऑफिसर के पास भी शिकायत पहुँचीं। शिकायत में प्रधानाध्यापिका के व्यवहार की जाँच कराने की माँग की गई। अभिभावक इस टीचर पर कड़ी कार्रवाई चाहते थे, जिसके बाद उन्होंने शिकायत की और फिर बीईओ के स्कूल पहुँचने की बात भी सामने आई। कहा जा रहा है कि बीईओ की जाँच में पता चला कि प्रधानाध्यापिका ने कुछ तस्वीरों को डिलीट कर दिया था। वहीं वायरल तस्वीर तब खींची गई थी जब स्कूल स्टाफ और छात्र एजुकेशनल ट्रिप पर गए थे। ये तस्वीरें अन्य छात्र द्वारा क्लिक करवाई गई थीं।