कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं
‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म ने हिंसा और पलायन के शिकार कश्मीरी हिंदुओं का मामला उठाकर मामले को मुख्यधारा के बहस में ला दिया है। अब इस पूरे मामले की जाँच नए सिरे की कराने की माँग की जा रही है।
दिल्ली के वकील विनीत जिंदल ने साल 1990 में हुए कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार की दोबारा जाँच के लिए रामनाथ कोविंद (Ram Nath kovind) के पास याचिका भेजी है। अपनी याचिका में जिंदल ने इस पूरे नरसंहार की जाँच एसआईटी (SIT) कराने की माँग की है।
I appeal to judges of Supreme Court of India to order suo moto identification & trial of executers of Hindu Genocide Kashmir Valley 1990. So much evidence now public ordering trial like Nuremberg is their duty.#PMModi #AmirKhan #VivekRanjanAgnihotri
— Bharat Gupt (@bharatgupt) March 19, 2022
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता जिंदल ने अपनी याचिका में कहा कि उस साल कश्मीर में हिंदुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ। इस हत्याकांड के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने कश्मीरी पंडितों को न्याय का भरोसा दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि इस नरसंहार को लेकर 215 प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इन मामलों की जाँच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की थी, लेकिन वह आतंकवादियों को दंडित करने के लिए कोई उपाय करने में विफल रही।
जिंदल ने कहा कि अगर सिखों के नरसंहार के 33 साल बाद केस को ओपन किया जा सकता है और उसकी दोबारा जाँच हो सकती है तो 27 साल पहले कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा के केस को खोला जा सकता है और इसकी दोबारा जाँच कराई जा सकती है। अधिवक्ता ने कहा कि यह एक भयानक घटना थी जब कश्मीरी पंडितों के साथ सामूहिक बलात्कार, हत्या, अपहरण ने उन्हें हमेशा के लिए सदमे में धकेल दिया।
Victims should request LG J&K to recommend NIA Investigation
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniUpadhyay) March 19, 2022
if LG dont recommend, then victims should approach J&K High Court
If J&K High Court dismiss the petition, I am available in SC.
वहीं, भरत गुप्ता नाम के एक यूजर ने ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इस मामले वह स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करे। उन्होंने लिखा, “मैं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से अपील करता हूँ कि वे 1990 में कश्मीर घाटी में हुए हिंदू नरसंहार का स्वत: संज्ञान लेते हुए आरोपितों की पहचान का आदेश दें। इतने सारे सबूतों के बीच नूरेमबर्ग ट्रायल की तरह आदेश देना उनका कर्तव्य है।”
इसका जवाब देतेे हुए कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “अगला कदम यह होना चाहिए। क्या कोई कानूनी विशेषज्ञ सलाह दे सकता है कि इस मसले को हम कैसे आगे बढ़ा सकते हैं?” इस पर सुप्रीम कोर्ट में वकील और भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने रास्ता बताया। उपाध्याय ने कहा, “पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से NIA जाँच की सिफारिश करने का अनुरोध करना चाहिए। अगर उपराज्यपाल सिफारिश नहीं करते हैं तो पीड़ितों को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। यदि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय याचिका को खारिज करता है तो मैं उच्चतम न्यायालय में उपलब्ध हूँ।”
अवलोकन करें:-
कश्मीर फाइल्स रिलीज होने के बाद से चर्चा में है। यह फिल्म 7 दिन में 100 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई कर चुकी है।
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