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ब्रिटेन : प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा दीवाली मनाने पर कट्टरपंथी बोले- एक और मोदी आ गया

ब्रिटेन प्रधानमंत्री ने मनाई आधिकारिक निवास पर दीवाली (तस्वीर साभार: यूके पीएम का एक्स हैंडल)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपने आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली से पहले हिंदू समुदाय के लोगों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करवाया। इस दौरान पीएम सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ कई हिंदू लोग दिखाई दिए।

कार्यक्रम की तस्वीरें एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई हैं। इन तस्वीरों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति दीप प्रज्वलित करती दिख रही हैं। इस दौरान उनके आसपास कई सारे लोग हैं जिन्होंने भारतीय परिधान धारण किए हुए हैं।

पोस्ट में लिखा गया है- आज प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने दीवाली- (अंधकार पर प्रकाश की विजय) के शुभ अवसर पर हिंदू समुदाय के लोगों का स्वागत किया। आगे पोस्ट में लिखा गया- ब्रिटेन या फिर विश्व में सबको शुभ दीवाली।

दीवाली इस वर्ष 12 नवंबर को मनाई जानी है। ऐसे में सुनक के आवास पर ये आयोजन 9 नवंबर को हुआ। कई भारतीय यूजर्स ने उनके द्वारा आयोजित करवाए गए इस आयोजन पर खुशी जाहिर की। वहीं कुछ कट्टरपंथियों ने इस पर भी सवाल उठाए और घृणा दिखाते हुए लिखा कि आखिर गाजा पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक क्यों नहीं बोलते। जबकि हमास और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध पर सुनक स्पष्ट रूप से आतंकवाद के विरुद्ध अपना समर्थन दे चुके हैं। कोई गाज़ा से यह नहीं कहता कि अपने यहाँ से आतंकियों को बाहर करो, इनकी लड़ाई में बेगुनाहों को अपनी जान खोनी पड़ रही। क्यों स्कूलों, मस्जिद और हॉस्पिटलों में अपने अड्डे बना रहे हैं। इजराइल अड्डों पर हमला कर रहा है, जिस कारण बेगुनाह मारे जा रहे हैं। 

एक ने कहा- शायद ये ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने संसद की और उसके लोगों की न सुनकर इनका अपमान किया है। ब्रिटेन ने एक और मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया है जो अपने देश में अल्पसंख्यकों को नहीं देखना चाहता। ये सबसे गंदा दौर है।

भारतीय मूल के ऋषि सुनक जब से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं तभी से वो अक्सर पूजा-पाठ करने, मंदिर जाने, गौसेवा करने, जय श्रीराम का नारा लगाने आदि के लिए चर्चा में आते रहते हैं। एक बार उन्होंने बताया था कि उनके डेस्क पर हमेशा गणेश भगवान रहते हैं।

इसके अलावा जी20 के वक्त जब वो अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ नई दिल्ली आए थे तब भी उन्होंने अक्षरधाम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी और उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। उन्होंने बिना हिचकिचाए ये भी कहा था कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व हैं, उनकी परवरिश इसी तरह हुई है और वो भी ऐसे ही हैं। हिंदू त्योहारों को धूमधाम से मनाने की बात भी उन्होंने बताई थी।

G7-SUMMIT: अमेरिकी राष्ट्रपति खुद चलकर मोदी की सीट तक आए और गर्मजोशी से गले लगाया


भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आन्दोलनजीवियों के माध्यम से 
विरोधी लाख विरोध करें, लेकिन विश्व में मोदी का जलवा देखते ही बनता है। वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कद और महत्ता निरंतर बढ़ रही है। भारत दुनिया के सात विकसित और अमीर देशों के समूह G7 का सदस्य नहीं है। लेकिन जापान के हिरोशिमा में जारी G7 की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘विशेष मेहमान’ के तौर पर आमंत्रित किया गया है। हिरोशिमा में G7 की बैठक शुरू होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान वो वर्ल्ड लीडर्स के बीच बैठे मोदी से मिलने उनकी सीट तक चलकर आए और उन्हें पीएम मोदी को गले लगाया।इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। हालांकि 15 महीने से जारी जंग के दौरान मोदी और जेलेंस्की फोन पर बात कर चुके हैं।

बाइडेन चलकर मोदी की सीट तक आए, मोदी को गले लगाया

हिरोशिमा में G7 की बैठक शुरू होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान वो वर्ल्ड लीडर्स के बीच बैठे मोदी से मिलने उनकी सीट तक चलकर आए और उन्हें पीएम मोदी को गले लगाया। हिरोशिमा में G7 की बैठक के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति छटवीं बार मिले। इससे पहले पांच विभिन्न अवसरों पर दोनों वैश्विक नेताओं की मुलाकत हो चुकी है।

  • PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन की पहली मुलाकात सितंबर 2021 में अमेरिका में हुई थी। तब दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक बातचीत की थी।
  • इसके बाद मोदी और बाइडेन अक्टूबर में इटली में G-20 समिट के दौरान मिले थे।
  • विश्व के दोनों बड़े नेताओं की अगली मुलाकात मई 2022 में QUAD समिट के दौरान हुई थी।
  • जर्मनी में चौथी बार फिर दोनों जून 2022 में G-7 समिट के दौरान मिले थे।
  • मोदी-बाइडेन की पिछली मुलाकात नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में G-20 समिट के दौरान हुई थी।

मोदी और ब्रिटेन के पहले भारतवंशी पीएम सुनक गर्मजोशी से मिले

जापान के हिरोशिमा शहर में G7 समिट चल रहा है। यह दुनिया के सात देशों अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, इटली, जापान और ब्रिटेन का ताकतवर ग्रुप है। इसे ग्रुप ऑफ सेवन भी कहा जाता है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक को गले लगाया। हिरोशिमा में प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन के भारतीय मूल के पीएम ऋषि सुनक से भी मुलाकात हुई। दोनों वैश्विक नेता बेहद गर्मजोशी से मिले और बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के डेलिगेशन भी मौजूद थे। सुनक ब्रिटेन के पहले भारतवंशी और गैर श्वेत प्रधानमंत्री हैं। वे भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति के दामाद भी हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम मोदी और जेलेंस्की की पहली बार मुलाकात

यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। ये मुलाकात जापान के हिरोशिमा में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच दोनों देशों के नेताओं की यह पहली बार मुलाकात है। हालांकि दोनों नेता फोन पर बातचीत कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की से कहा- यूक्रेन जंग इकोनॉमी और पॉलिटिक्स का नहीं, इंसानियत का मुद्दा है। भारत इस जंग को खत्म करने के लिए हर कदम उठाने तैयार है। यहां से प्रधानमंत्री मोदी पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर जाएंगे।

जापान के पीएम, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और जर्मन चांसलर से भी मिले
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिरोशिमा में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने G7 की मीटिंग से पहले जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज से भी मुलाकात की। इस द्विपक्षीय मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने जर्मन चांसलर के साथ अपनी फोटो शेयर करते हुए उन्हें अपना दोस्त बताया। मोदी ने लिखा- दोस्त से मिलकर अच्छा लगा। इससे पहले PM मोदी ने दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री यून सुक यिओल से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। इसके अलावा वे समिट को होस्ट कर रहे जापान के प्रधानमंत्री से भी मिले। मोदी ने कहा कि जापानी PM फुमियो किशिदा के साथ बेहतरीन बातचीत हुई। हमने भारत-जापान के रिश्तों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया।

ब्रिटेन का सबसे बड़े फ्रॉड : 15 अरब रूपए की टैक्स चोरी, आरिफ पटेल और जफर अली दोषी करार

                                     आरिफ पटेल और जफर अली (तस्वीर साभार: Blog Preston)
जाली कपड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड भारतीय मूल के आरिफ पटेल (Arif Patel) को ब्रिटेन में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी 150 मिलियन पाउंड (15 अरब से अधिक रुपए) का दोषी ठहराया गया है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेस्टर क्राउन कोर्ट में 14 सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को पटेल को गलत बही खाता पेश करने, सरकारी राजस्व में धोखाधड़ी करने के लिए साजिश रचने, ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया।

प्रेस्टन के सॉक्स निर्माता 55 वर्षीय आरिफ पटेल पर एक आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर कपड़ा और मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात पर वैट भुगतान का दावा कर £97m (9 अरब से अधिक रुपए) का टैक्स चोरी करने का आरोप है। इन पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन और लंदन में संपत्ति खरीदने के लिए किया। बताया जा रहा है कि वह बहुत पहले प्रेस्टन से भाग गया है और अभी वह दुबई में रह रहा है।

इस मामले में आरिफ के सह आरोपित दुबई के 58 वर्षीय मोहम्मद जफर अली को भी राजस्व में धोखाधड़ी करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया है। आरिफ और अली को अगले महीने सजा सुनाई जाएगी।

आरिफ पटेल ने कैसे रचा 150 मिलियन पाउंड का फ्रॉड?

आरिफ पटेल और Faisaltex ग्रुप की कंपनियों ने 2004 में नकली कपड़ों के थोक आयात की ओर रुख किया था। अगले तीन वर्षों के दौरान नकली डिजाइनर कपड़ों वाले दर्जनों कंटेनरों को पूरे ब्रिटेन में बंदरगाहों पर रोक दिया गया था। यूके के व्यापारियों को इसकी पुष्टि तब हुई जब ग्लासगो थोक व्यापारी को होने वाली एक डिलीवरी पुलिस द्वारा रोक दी गई। इसके बाद जाँच में ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने का मामला सामने आया था।
इस घोटाले को Carousel Fraud के रूप में जाना जाता है, जहाँ माल वास्तविक खरीदारों को बेचा जाता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया अपराधियों द्वारा कंट्रोल होती है। आरिफ पटेल अक्सर मोहम्मद जफर अली से मिलने के लिए दुबई जाता था। इसके अलावा वह ब्रांड के नाम पर जाली कपड़े बनाने वाले निर्माताओं के साथ डील करने के लिए चीन और तुर्की भी जाया करता था। आरिफ पटेल के बारे में कहा जाता है कि वह शानदार जीवन जीने का शौकीन था। इस पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन में संपत्ति खरीदने के लिए किया था, जिसमें लंकाशायर सिटी की मेन शॉपिंग स्ट्रीट फिशरगेट पर कमर्शियल प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।

UK की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन का बड़ा बयान : ‘गोरी लड़कियों का पीछा करते हैं, ड्रग्स देकर उनका बलात्कार करते हैं पाकिस्तानी’: कम उम्र की लड़कियाँ निशाना

ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन
ब्रिटेन में युवा लड़कियों का शोषण करने वाले गैंंग की कई रिपोर्ट सामने आने के बाद होम सेक्रेटरी सुएला ब्रेवरमैन ने बाल यौन शोषण को समाप्त करने से जुड़े नए कानून का खुलासा किया। इसके तहत बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। मंत्री ने रविवार (2 अप्रैल, 2023) को ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों में ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुष शामिल होते हैं। ये ब्रिटेन की लड़कियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ब्रिटिश पाकिस्तानियों का गैंग है, जो ड्रग्स देता है और ब्रिटेन की लड़कियों का रेप करता है।

ब्रिटिश चैनल ‘स्काई न्यूज’ से बात करते हुए सुएला ब्रेवरमैन ने कहा, “कुछ ब्रिटिश-पाकिस्तानी यूके में बाल शोषण गिरोह चला रहे हैं। हम जो देख रहे हैं, अब वो एक प्रैक्टिस बन चुका है, जिसमें कमजोर, गोरी लड़कियों का ब्रिटिश पाकिस्तानियों के गिरोहों द्वारा पीछा किया जाता है और उनका बलात्कार किया जाता है। बाल शोषण गिरोह या नेटवर्क के लिए काम करने वाले पुरुष बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं।”

ब्रिटेन की गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि वह एक कानून लेकर आई हैं, जिसमें कहा गया कि बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। क्योंकि ऐसे अपराधों में शामिल पाकिस्तानी पुरुष गिरोहों को लेकर चुप्पी की संस्कृति बन गई है। वो आधुनिक समय में ब्रिटेन में देखे गए सबसे बड़े अन्यायों में से एक को ठीक करने की कसम खाती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “हमने संस्थानों और देश की एजेंसियों को देखा है, चाहे वह सामाजिक कार्यकर्ता हों, शिक्षक हों, पुलिस हो, सब डर के कारण, नस्लवादी कहलाने के डर से, इन अपराधों पर आँखें मूँद लेते हैं। इसकी वजह से हजारों बच्चों का बचपन तबाह हो गया और अपराध करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इस कदम का स्वागत किया है और उन्हें उम्मीद है कि नया कानून लोगों को कानूनी रूप से बाल शोषण को रिपोर्ट करने के लिए मजबूर करेगा।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने ग्रूमिंग गैंग के आतंक को खत्म करने के लिए टास्क फोर्स का ऐलान किया है। सुनक ने कहा है कि वह ग्रूमिंग गैंग का आतंक खत्म करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बच्चों और लड़कियों के साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। दरअसल, मुस्लिमों का यह गिरोह गैर मुस्लिम लड़कियों को टारगेट करता है। डॉ. एला हिल नाम की एक पीड़िता ने 2020 में खुलासा किया था कि यह गैंग 40 साल में कम से कम 5 लाख लड़कियों से रेप कर चुका है।


ISIS की कुख्यात ‘जेहादी बेगम’ शमीमा बेगम को ब्रिटेन में वापस नहीं आने दिया जा सकता : ब्रिटेन कोर्ट

भारत में आतंकवादियों की फांसी रुकवाने आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवाने वाले  ISIS की हसीन ‘जेहादी बेगम’ शमीमा बेगम की छिनी नागरिकता को वापस दिलवाने ब्रिटेन क्यों नहीं जाते? संभव हो, भारत में किसी आतंकवादी की पैरवी करने से ज्यादा रूपए मिल जाएं? ब्रिटेन जाकर ‘जेहादी बेगम’ शमीमा बेगम को 'गरीब', 'मजलूम' और 'बेकसूर' आदि नामों से सम्बोधित कर victim card क्यों नहीं खेलते? आतंकवादियों की  अय्याशी से तीन बच्चों(जीवित एक भी नहीं) की माँ बनने को जवानी का भटकाओ कहकर ब्रिटेन की नागरिकता वापस दिलवाते? अक्सर ऐसे भी समाचार आते रहे हैं कि आतंकवादियों के कैंप में लड़की की ब्रेस्ट निकलते ही हवस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर ऐसा करते हैं विश्व में नाम होगा। लेकिन वहां उनको victim card यानि मुस्लिम होने की सजा कहने का साहस नहीं, क्योकि वहां देशहित सर्वोपरि है। 
‘जेहादी बेगम’ नाम से दुनिया भर में कुख्यात शमीमा बेगम को ब्रिटेन की नागरिकता नहीं मिलेगी। आतंकी शमीमा कोर्ट में यह केस हार गई है। ईराक-सीरिया में अत्याचारों के दौरान विश्व के सबसे क्रूर आतंकवादी संगठन IS (ISIS) के साथ जुड़ने के कारण ब्रिटेन की उसकी नागरिकता छिनी थी। शमीमा के पक्ष में BBC का प्रोपगेंडा डॉक्यूमेंट्री भी काम नहीं आया।

ISIS की तरफ से लड़ने के लिए ब्रिटेन छोड़कर भागने वाली शमीमा अब कभी ब्रिटेन नहीं लौट पाएगी। शमीमा की अपील पर सुनवाई करने वाली ब्रिटेन की कोर्ट ने कहा कि वह ब्रिटेन में वापस आने के काबिल नहीं है। ऐसे में उसे ब्रिटेन में नहीं आने दिया जा सकता है।

सुनवाई के दौरान विशेष आव्रजन अपील आयोग (सियाक) ने इस बार पर संदेह जताया कि शमीमा बेगम की यौन शोषण के लिए तस्करी की गई थी। सियाक पैनल की ओर से बुधवार (22 फरवरी 2023) को प्रकाशित फैसले को लिखने वाले जस्टिस रॉबर्ट जय ने लिखा। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति को देखते हुए ही गृह सचिव ने उनकी नागरिकता छिनी होगी।

शमीमा बेगम साल 2015 में अपने दो स्कूली दोस्तों के साथ पूर्वी लंदन स्थित अपने घर निकलकर सीरिया चली गई थी। उस समय उसकी उम्र 15 साल थी। सीरिया में रहते हुए बेगम ने एक ISIS आतंकी से निकाह किया और कई साल तक रक्का में बिताए। इस दौरान वह गर्भवती हुई। उसके दो बच्चे कुपोषण और बीमारी से मर गए।

इसके बाद बेगम 2019 में 39,000 लोगों के सीरियाई शरणार्थी शिविर अल-हवल में प्रकट हुई। यहाँ उसने ब्रिटेन से अपील की कि उसे वापस आने दिया जाए, ताकि वह अपने बच्चे को जन्म दे सके और उसका पालन पोषण कर सके। उसी साल फरवरी में उसने अपने बेटे जर्राह को जन्म दिया। बाद में उसकी भी मौत हो गई।

शमीमा बेगम अभी 23 साल की है और वह सीरिया की एक शरणार्थी कैंप में रह रही है। उत्तर-पूर्वी सीरिया के शरणार्थी शिविर अल-हवल में मिलने और ब्रिटेन आने की अपील के बाद ब्रिटेन ने उस पर कार्रवाई की। ब्रिटेन के तत्कालीन गृह सचिव साजिद जाविद ने 19 फरवरी 2019 में उसकी ब्रिटिश नागरिकता छीन ली थी।

रेप्रीव की निदेशक माया फोआ ने कहा, “अदालत ने स्वीकार किया कि यह मानने का अच्छा कारण है कि शमीमा बेगम तस्करी की शिकार थीं। उसे एक बच्चे के रूप में ऑनलाइन तैयार किया गया था और ब्रिटेन को उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि यह किसी भी ब्रिटिश किशोरी की तस्करी है।

पिछले महीने स्पेन सीरियाई शरणार्थी शिविरों से IS लड़ाकों के परिवारों को वापस लाया था। जिन्हें वापस लाया गया, उनमें दो स्पेनिश महिलाएँ और 13 स्पेनिश बच्चे हैं। इन्हें मैड्रिड के पास टोरेजोन सैन्य हवाई अड्डे पर लाया गया था।

अभी कुछ दिन पहले लोगों में सहानुभूति पैदा करने के लिए बीबीसी ने ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से शमीमा बेगम पर 90 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री जारी की थी। इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए बीबीसी ने शमीमा बेगम का ‘चरित्र चित्रण’ की कोशिश की गई। डॉक्यूमेंट्री के पॉडकास्ट ‘आई एम नॉट ए मॉन्स्टर’ के 10 एपिसोड में शमीमा बेगम की ब्रिटेन से सीरिया तक की यात्रा के बारे में बताया गया है। साथ ही उसके प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश गई है।

बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में शमीमा बेगम ने कहा है कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया पहुँची थी, तब वहाँ ISIS का एक आतंकी बस लेकर उसका इंतजार कर रहा था। उसने दावा किया कि जब वह ब्रिटेन से भागकर सीरिया गई तो उसे आईएसआईएस के आतंक के बारे में नहीं पता था, लेकिन,बाद में उसने ISIS की भयानक करतूतों के वीडियो देखे थे। इसके बाद भी उसने पीछे न हटने का फैसला किया।

‘जिहादी बेगम’ ने यह भी कहा है कि वह उत्तरी सीरिया के एक शरणार्थी शिविर में रह रही है। वहाँ रहना जेल में रहने से भी बदतर है। उसने यह भी कहा है कि कम से कम जेल की सजा के बारे में यह पता होता है कि सजा कब खत्म होगी, लेकिन शरणार्थी शिविर में जो हो रहा है यह सब कब खत्म होगा पता नहीं।

बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन में जमकर विरोध हो हुुआ। बीबीसी द्वारा बार-बार प्रोपेगैंडा डॉक्यूमेंट्री बनाने को लेकर लोगों ने कहा कि वे अब बीबीसी को पैसे नहीं देंगे। लोग बीबीसी के सब्सक्रिप्शन को रिन्यू न कराने की भी बात कही। ट्विटर पर बीबीसी के खिलाफ #DeFundTheBBC का हैशटैग भी चला।

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पहले नरेंद्र मोदी को बदनाम किया, अब ISIS की 'जेहादी दुल्हन' शमीमा बेगम BBC के लिए बनी ‘महान काम करने वा

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ब्रिटेन के लोगों के पैसे से चलने वाला प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थान बी

एक यूजर ने लिखा था, “बीबीसी ने बकवास डॉक्यूमेंट्री बनाई। बीबीसी ने उसे अपने फैसलों को सही और उचित बताने के लिए एक मंच दिया। बीबीसी, ब्रिटेन में रहने वाले लोगों का हितैषी नहीं है। वह हम पर हँसी उड़ाते हुए हमारा अपमान कर रहा है। अब समय आ गया है हम बीबीसी को पैसे नहीं देंगे।”

पहले नरेंद्र मोदी को बदनाम किया, अब ISIS की 'जेहादी दुल्हन' शमीमा बेगम BBC के लिए बनी ‘महान काम करने वाली सेलेब्रिटी’

ब्रिटेन के लोगों के पैसे से चलने वाला प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थान बीबीसी एक बार फिर विवादों में है। बीबीसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। मीडिया कंपनी ने गुजरात दंगों का सारा दोष प्रधानमंत्री मोदी पर मढ़ने की कोशिश की थी। यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि बीबीसी ने 7 फरवरी, 2023 की रात अपनी इच्छा से आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) में शामिल होने वाली शमीमा बेगम (Shamima Begum) की डॉक्यूमेंट्री प्रसारित कर दी।

क्या कारण है कि बीबीसी ने ISIS की हसीन दुल्हन शमीमा बेगम को निर्दोष साबित करने डॉक्यूमेंट्री बनाई? डॉक्यूमेंट्री प्रसारित करने से ब्रिटेन में ही बीबीसी की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगना शुरू हो गया है। जिस कारण अब ब्रिटेन में #boycott BBC ट्रेंड होने लगा है। सूत्रों की माने तो जब शमीमा बेगम ISIS कैंप से बाहर आई थी, तब 'ISIS की हसीन दुल्हन' के नाम से चर्चित हुई थी और ब्रिटेन सरकार ने इसे वापस लेने से इंकार करने के कारण सीरिया के शरणार्थी कैंप में रह रही है। साल 2015 में अपने दो साथियों से साथ शमीमा आईएसआईएस में शामिल हो गई थी। इसने आतंकी कैंप में जाने पर किसी तरह का अफ़सोस नहीं था। 

बीबीसी ने अपने एजेंडे के तहत इस आतंकवादी महिला को किसी सेलिब्रिटी की तरह दिखाने की कोशिश की है, मानो आईएसआईएस में शामिल होकर उसने कोई महान काम किया था। बीबीसी की इस हरकत को लोगों ने बिल्कुल भी पसंद नहीं किया है और इसे देखने वाले कई लोग अब दोबारा बीबीसी का लाइसेंस नहीं लेने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में टीवी पर बीबीसी के कार्यक्रम को देखने के लिए सालाना कुछ निश्चित राशि का भुगतान करना होता है।

एक यूजर ने शो प्रसारित होने से पहले ट्वीट कर कहा, “शमीमा बेगम की कहानी बीबीसी पर रात 9 बजे… मैं उस गंदगी के ढेर को नहीं देख पाऊँगी। जब वह वहाँ गई तो उसे पता था कि वह क्या कर रही है। चकित हूँ कि बीबीसी इसे एयरटाइम दे रहा है।”

The Shamima Begum Story on @BBC2 at 9pm…I for one wont be watching that pile of shit 😡She knew what she was doing when she signed up for it!! Astounded the BBC are giving it airtime 🤦🏻‍♀️ #BBC2 #wasteofmytvlicence #shamimabegum

— MrsAhmed 💋 (@Samahmed1973) February 7, 2023

एक और यूजर ने कहा, “बीबीसी ने शमीमा बेगम को ‘कमजोर युवा लड़की’ के रूप में दिखाया है। एक म्यूजिक ट्रैक, मूडी शॉट्स, कैमरे के लिए आँसू को खूबसूरती से गिरते दिखाया गया है। इससे बेहतर होता उन्हें उसके आईएसआईएस साथियों द्वारा मारे गए और प्रताड़ित लोगों के परिवारों में से कुछ को दिखाना चाहिए था?”

वहीं शमीमा बेगम ने BBC को बताया, “मैं ISIS के साथ प्यार में थी और इसमें शामिल होने के लिए बेताब थी। मैंने गैटविक से इस्तांबुल के लिए उड़ान भरी, जहाँ एक ISIS हैंडलर बस के साथ मेरा इंतजार कर रहा था। जब मैं देश से भागी थी, तो मुझे आतंकवादी समूह से जुड़े ‘अत्याचारों’ के बारे में नहीं पता था।”

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सीरिया जाकर ISIS में शामिल होने वाली जिहादी शमीमा बेगम से नागरिकता छीनेगा ब्रिटेन

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सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होने वाली 19 साल की शमीमा बेगम से ब्रिटेन नागरिकता वापस लेगा। ये जानकारी शमीमा बेगम ....

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ शमीमा बेगम बिना बुर्के के आई नजर, ब्रिटेन के लोगों से माँगी माफी

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ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ शमीमा बेगम बिना बुर्के के आई नजर, ब्रिटेन के लोगों से माँगी माफी

उसने कहा कि आईएसआईएस के भयानक वीडियो देखने के बाद भी उसने अपना विचार नहीं बदला था। उसने कहा कि वह ब्रिटेन लौटना चाहती है और अपनी ब्रिटिश नागरिकता छीनने के फैसले के खिलाफ अपील की है। बेगम ने कहा, “मैं उत्तरी सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में रह रही हूँ। यह ‘जेल से भी बदतर’ है।  मैं अंदर ही अंदर खुद से नफरत करती हूँ… कम से कम जेल की सजा के बारे में आप जानते हैं कि इसका अंत होने वाला है।’ लेकिन यहाँ, आप नहीं जानते कि इसका अंत होने वाला है या नहीं।”

प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज की फैक्ट्री बीबीसी, विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर ब्रिटेन में जबरदस्त विरोध; घट रहा तेजी से सब्सक्रिप्शन

BBC द्वारा निर्मित विवादित फिल्म का भारत में कांग्रेस, वामपंथियों और अन्य विरोधियों द्वारा समर्थन किये जाने पर अब एक ज्वलंत प्रश्न पर भी चर्चा होनी शुरू हो गयी है कि 1. मोदी विरोधी सिर्फ गुजरात दंगे 2002 के ही पीछे क्यों पड़े हैं, जबकि मोदी के मुख्यमंत्री बनने से पूर्व इतने अधिक दंगे हुए हैं, उन पर क्यों नहीं बनाई फिल्म? 2. उत्तर प्रदेश के मलियाना और मुज़फ्फरनगर में हुए दंगों पर फिल्म कब? 3. कश्मीर में हुए कश्मीरी पंडितों की हत्या और उनकी महिलाओं के हुए बलात्कार पर कब फिल्म क्यों नहीं बनी? 4. कश्मीर में मस्जिदों से हिन्दुओं के विरुद्ध हो रहे एलानों पर क्यों नहीं बनाई फिल्म? 5. जगह-जगह हिन्दुओं की हो रही मॉब लिंचिंग पर क्यों नहीं बनाई फिल्म? आदि बहुत लम्बी सूची है, जो स्पष्ट सिद्ध करता है कि यह मोदी विरोध नहीं बल्कि सच्चाई यह है कि सनातन धर्म विरोधी है। 

ब्रिटेन की मीडिया कंपनी बीबीसी की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर भारत सहित पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ है। प्रोपेगेंडा के लिए तैयार की गई इस डॉक्यूमेंट्री का ना सिर्फ भारत में विरोध हो रहा है, बल्कि ब्रिटेन में इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। इस डॉक्यूमेंट्री को लेकर ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग इसे बड़ी साजिश का हिस्सा बता रहे हैं। साथ ही बीबीसी के प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज पर सवाल उठा रहे हैं।

बीबीसी के खिलाफ ऑनलाइन याचिकाएं, सब्सक्रिप्शन हो रहे कैंसिल

ब्रिटेन में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग खुलकर अब बीबीसी का विरोध कर रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीय लोगों ने ऑनलाइन याचिकाएं दायर की हैं। यहां तक कि ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अब बीबीसी के सब्सक्रिप्शन को भी कैंसिल करवा रहे हैं। ब्रिटिश संस्थानों ने बीबीसी के मैनेजमेंट और संपादक को पत्र लिखकर भी आपत्ति जताई है। लोगों का कहना है कि बीबीसी जानबूझकर भारत और ब्रिटेन को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। बीबीसी की सोच पक्षपातपूर्ण है।

बीबीसी के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन की चेतावनी

‘द रीच इंडिया’ ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष गायत्री ने 24 जनवरी को पीएम मोदी से जुड़ी इस डॉक्यूमेंट्री का दूसरा पार्ट रिलीज करने पर सड़क पर प्रदर्शन की चेतावनी दी है। गायत्री ने कहा कि बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। इस समय हिंदू और भारत विरोधी ताकतें किसी न किसी तरह से ऋषि सुनक की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का ब्रिटेन की संसद में मुद्दा उठाने वाला पाकिस्तानी मूल का सांसद लेबर पार्टी से है। ऐसे में साफ है कि लेबर पार्टी और बीबीसी के इस डॉक्यूमेंट्री का निशाना भारतीय प्रधानमंत्री के साथ ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी हैं।

मोदी के खिलाफ बीबीसी का नया प्रोपेगैंडा

बीबीसी ने India: The Modi Question शीर्षक से दो पार्ट में एक नई सीरीज बनाई है। इस डॉक्यूमेंट्री को ब्रिटिश विदेश विभाग की अप्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित बताया गया है। ब्रिटिश विदेश विभाग की रिपोर्ट का दावा है कि नरेन्द्र मोदी साल 2002 में गुजरात में हिंसा का माहौल बनाने के लिए ‘प्रत्यक्ष रूप से ज़िम्मेदार’ थे। इस रिपोर्ट के बारे में बीबीसी ने ख़बर भी की थी। उसमें बताया गया कि कूटनयिकों की ये रिपोर्ट उस समय के ब्रिटिश विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ द्वारा ऑर्डर की गई जांच का हिस्सा थी। रिपोर्ट कहती है कि हिंसा का विस्तार, मीडिया में आई रिपोर्टों से कहीं अधिक था और दंगों का उद्देश्य हिंदू इलाक़ों से मुसलमानों को खदेड़ना था। जबकि भारत का सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रधानमंत्री मोदी को गुजरात हिंसा में किसी भी तरह की संलिप्तता से बरी कर चुका है। ऐसे में यह साफ हो जाता है कि उन्होंने एजेंडे के तहत यह डॉक्यूमेंट्री बनाई। भारत और ब्रिटेन में इस विवादित डॉक्यूमेंट्री का जमकर विरोध हो रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री का किस तरह विरोध हो रहा है और प्रधानमंत्री मोदी को समर्थन मिल रहा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता की गूंज विदेशों में भी सुनाई दे रही है। उनकी लोकप्रियता देश की सीमा को लांघ कर दूसरे देशों में भी पहुंच रही है। इसकी झलक ब्रिटिश संसद में देखने को मिली। बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री को लेकर ब्रिटिश सांसद में प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाने वाले को इसी संसद में करारा जवाब मिल गया। लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने हाउस ऑफ लार्ड्स में प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में एक हैं। उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भी बताया।

ब्रिटिश संसद में पीएम मोदी के समर्थन में गूंजी आवाज

सांसद लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने 19 जनवरी को हाउस ऑफ लार्ड्स में एक बहस के दौरान कहा, ”एक लड़के के रूप में, नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के एक रेलवे स्टेशन पर अपने पिता की चाय की दुकान पर चाय बेची। आज वह भारत के प्रधानमंत्री के रूप में इस धरती पर सबसे शक्तिशाली लोगों में से एक हैं। आज भारत के पास G20 की अध्यक्षता है। आज भारत के पास अगले 25 वर्षों में 32 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का विजन है।”

लॉर्ड बिलिमोरिया ने एक्सप्रेस ट्रेन से की भारत की तुलना

लॉर्ड बिलिमोरिया ने भारत की अर्थव्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि भारत अब यूके से आगे निकल गया है और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसके अलावा भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती एक बड़ी अर्थव्यवस्था भी है। उन्होंने कहा कि भारत हर पहलू में मजबूत होता जा रहा है। उन्होंने भारत की तुलना एक्सप्रेस ट्रेन से करते हुए कहा कि इंडियन एक्सप्रेस अब स्टेशन से निकल चुकी है। यह अब दुनिया की सबसे तेज ट्रेन है। सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। यूके को इसका सबसे करीबी मित्र और भागीदार होना चाहिए। बिलिमोरिया ने यूके-भारत मुक्त व्यापार समझौता का समर्थन किया। 

लॉर्ड रामी रेंजर ने विवादित डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ लिखा पत्र

ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने अपने ट्वीट में ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन को निशाने पर लिया। बीबीसी के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए रामी रेंजर ने शिकायत की कि डॉक्यूमेंट्री न केवल दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के दो बार लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री का अपमान करती है, बल्कि न्यायपालिका और संसद का भी अपमान करती है, जिसने नरेन्द्र मोदी की कड़ी जांच की और उन्हें बरी कर दिया। लॉर्ड रामी रेंजर ने अपने ट्वीट में लिखा कि “बीबीसी न्यूज, आपने भारत के करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत किया है और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित भारत के प्रधानमंत्री, भारतीय पुलिस और भारतीय न्यायपालिका की भी बेइज्जती की है। हम दंगों और लोगों की मौत की निंदा करते हैं लेकिन हम आपकी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की भी निंदा करते हैं।”

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ब्रिटिश पीएम सुनक ने प्रधानमंत्री मोदी का किया समर्थन

इससे पहले ब्रिटिश संसद में पाकिस्तानी मूल के इमरान हुसैन ने बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के विचार पूछे थे। इसके जवाब में सुनक ने कहा था कि वह ऐसे चरित्र चित्रण से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस पर यूके सरकार की स्थिति स्पष्ट और लंबे समय से चली आ रही है और बदली नहीं है। आगे सुनक ने कहा, ‘निश्चित रूप से हम उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करते हैं, चाहे यह कहीं भी हो, लेकिन मैं उस चरित्र-चित्रण से बिल्कुल सहमत नहीं हूं, जो नरेन्द्र मोदी को लेकर सामने रखा गया है।’