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नेपाल : जिस अवैध मस्जिद का पाकिस्तानी राजदूत ने किया उद्घाटन सरकार ने गिरा दी

जापान के अवैध मस्जिद के उदघाटन में पहुँचा पाकिस्तान (फोटो साभार-NDTV)
पाकिस्तान ने जापान में मस्जिद का उद्घाटन किया। इसे जापान ने गैर-कानूनी कहा और ध्वस्त करने का आदेश दिया। जापान में बढ़ रही मुस्लिम आबादी, डेमोग्राफी में बदलाव, सार्वजनिक नमाज और कब्रिस्तान की बढ़ती माँग, जन्मदर में कमी और मस्जिदों की बढ़ती संख्या के बीच इस मुद्दे ने इसलिए ध्यान खींचा है, क्योंकि जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद इस साल की शुरुआत में मस्जिद के उद्घाटन में शामिल हुए थे।

क्या है कोवागो विवाद

कावागो में गैरकानूनी तरीके से मस्जिद बनाई गई थी, जिसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने आवाज भी बुलंद की थी। ‘जापान जामे मस्जिद रमजान’ नाम की यह मस्जिद 4500 स्क्वेयर मीटर के प्लॉट पर बनी है, जिसे पहाड़ पर मौजूद ‘वनभूमि’ माना जाता है। यह साइट अर्बनाइजेशन कंट्रोल एरिया में आती है, जहाँ लोकल अधिकारियों से इजाजत लिए बिना कंस्ट्रक्शन पर आम तौर पर रोक होती है।

द असाही शिंबुन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड से पता चलता है कि मार्च 2025 में जमीन का मालिकाना हक बदला गया। पहले यह फुजीमी की एक रियल एस्टेट कंपनी की थी, जिसे कावागो पर रजिस्टर्ड एक फर्म को दे दी गई। कावागो शहर के अधिकारियों ने कहा कि मस्जिद जरूरी मंजूरी के बिना बनाई गई थी। यहाँ 2000 में एक फैक्ट्री बनी थी, 2007 में इसका मालिकाना हक बदल गया था और रियल एस्ट्रेट कॉर्पोरेशन बन गया। इसके बाद 2025 में स्थिति में बदलाव आया, लेकिन मस्जिद बनाने की अनुमति यहाँ नहीं थी।

जापान में सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत बिल्डिंग बनाने पर सख्त पाबंदियाँ हैं। हालाँकि, जैसा कि दुनिया भर के इस्लामिस्टों के साथ होता है, इस्लामी विस्तार और कब्जे के मामलों में उनके लिए स्थानीय कानूनों का कोई मतलब नहीं होता है। मस्जिद को एक पाकिस्तानी कंपनी की जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया था। जापानी मीडिया की रिपोर्ट है कि रियल एस्टेट रजिस्ट्री ने उस जमीन को ‘वन भूमि’ बताया है।

अक्टूबर 2024 में स्थानीय निवासियों ने लगभग पूरी हो चुकी मस्जिद के ढाँचे का विरोध किया। शहर के प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार काम रोकने के आदेश जारी किए। लेकिन, मुस्लिम समुदाय ने बात नहीं मानी और कंस्ट्रक्शन का काम जारी रखा। शुरुआत में कहा जाता है कि मजदूरों ने कहा कि वे जापानी भाषा नहीं समझ सकते, इसलिए काम नहीं रोका। चाहे जो भी हो मस्जिद बनकर तैयार भी हो गई और इस मस्जिद के उद्घाटन में पाकिस्तान के राजदूत भी शामिल हुए, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चित हो गया। बाद में पाकिस्तान दूतावास को सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

पाकिस्तान दूतावास ने जापानी कानून मानने की सलाह दी

जापान स्थित पाकिस्तान दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि जापान में रहने वाले सभी पाकिस्तानियों को जापानी कानूनों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। मस्जिद या मदरसे का निर्माण स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेने के बाद ही किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी दूतावास का उन परियोजनाओं से कोई संबंध नहीं है, जो स्थानीय कानूनों का पालन नहीं करती।

इसमें कहा गया है कि कावागो की मस्जिद के उद्घाटन में राजदूत इसलिए गए थे, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि कानून के मुताबिक जरूरी अनुमति ले ली गई है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तानी समुदाय को स्थानीय निवासियों और प्रशासन के साथ पारदर्शिता रखनी चाहिए और अधिकारियों के साथ सहयोग करना चाहिए।

                                                        (साभार-एक्स)

पाकिस्तानी एम्बेसी ने कहा, “ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए कानूनी नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी जापान में रहने वाले सभी पाकिस्तानियों और आस-पास के लोगों के साथ ट्रांसपेरेंट तरीके से शेयर की जानी चाहिए। इसके अलावा, प्लानिंग के दौरान और उसके बाद भी, हर हाल में जापानी कानूनों और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।”

                                                                                      (साभार-एक्स)

कावागो जापान का पहला मामला नहीं है। इससे पहले मई 2026 में फुजिसावा शहर में एक मस्जिद बनाने को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। 440000 लोगों वाले इस शहर में मुस्लिम आबादी में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। जिस मस्जिद की बात हो रही है, उसे एक श्रीलंकाई बिजनेसमैन मोहम्मद खलील ने बनाया था। उसका कहना था कि वह एक मस्जिद बनाना चाहते हैं, क्योंकि 20 किलोमीटर दूर एबिना मस्जिद फुजिसावा में बढ़ती मुस्लिम आबादी के लिए काफी नहीं है।

खास बात यह है कि खलील भी 2021 में फुजिसावा के उत्तरी बाहरी इलाके में एक बंद पड़ी फैक्ट्री की 980-स्क्वायर मीटर की जगह पर ही बस गए थे। उन्होंने फटाफट फुजिसावा मस्जिद NPO बनाया। पैसे जमा किए और जमीन खरीदी और मस्जिद बनाने के लिए मंजूरी ले ली।

ये इतनी तेजी से हुआ कि 4 साल के अंदर ही एक मस्जिद बना दी। जापानी भी इससे परेशान हैं कि कैसे मुस्लिम इमिग्रेंट्स पूरे जापान में अपनी धार्मिक पहचान बढ़ा रहे हैं। ये बता रहे हैं कि जानबूझकर साजिश के तहत ये किया जा रहा है। एक तरफ तो बड़ी संख्या में प्रवासी मुस्लिम यहाँ आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें इस्लाम कबूल करवाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी जापानियों ने अपनी बात रखी है। इनका कहना है कि तब्लीगी जमात से संबंध रखने वाले इस अवैध मस्जिद के उद्घाटन में पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद का शामिल होना ये बताता है कि इसे पाकिस्तानी शासन का समर्थन है।

सोशल मीडिया पर जापानियों का विरोध

सोशल मीडिया पर कई जापानी लोगों ने इस्लामी संगठन तब्लीगी जमात से कथित संबंध वाले मस्जिद के उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद पर गुस्सा हुए।

एक्स पर उन्होंने लिखा, “जापानी भाषा के बयान के 12 घंटे बाद उर्दू में एक बयान पोस्ट किया गया। भले ही राजदूत इस बात से अनजान थे कि यह अवैध है। बात यह है कि उन्होंने इस मस्जिद के उद्घाटन समारोह में भाग लिया, जहाँ सऊदी अरब जैसे देशों द्वारा प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन ‘तबलीगी जमात’ से जुड़े लोग भी आते-जाते हैं। राजदूत को तो सतर्क रहना ही चाहिए था, इतना बिजी रहने के बावजूद भी वो इसमें क्यों शामिल हुए? क्या वह केवल इस बात से खुश थे कि जापान में मस्जिदें बढ़ रही हैं? क्या वह जापान के मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला इसे मान रहे थे?”

एक और जापानी यूजर ने लिखा कि हो सकता है इस मस्जिद को पाकिस्तानी मदद मिल रही हो। इसे जापान के बारे में जानकारी इक्ट्ठा कर चीन को देने के मिशन पर लगाया गया हो। मीडिया में इस एंगल से रिपोर्टिंग क्यों नहीं हो रही है।

जापानी X यूजर ने लिखा, “साइतामा प्रीफेक्चर, कावागो सिटी, ओजा शिमोशिमोआकासाका, जहाँ कावागो सिटी में एक गैर-कानूनी तरीके से बनी मस्जिद है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के इन्फॉर्मेशन हेडक्वार्टर ओई रेडियो स्टेशन के पास है। स्पेशल ऑब्जर्वेशन जोन को ‘इम्पॉर्टेंट लैंड सर्वे एक्ट’ के तहत बनाया गया है, ताकि जरूरी सिक्योरिटी सुविधाओं के काम में रुकावट डालने वालों को रोका सके।”

पाकिस्तानी फर्जी फुटबॉल टीम भी पहुँच गई थी जापान

पाकिस्तानी अवैध तरीके से जापान जाने के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान की फर्जी फुटबॉल टीम जापान पहुँच गई थी। इसके लिए बाकायदा फर्जी फुटबॉल क्लब बनाया गया, जिसे पाकिस्तानी फुटबॉल एसोसिएशन से संबद्ध दिखाया गया। जापान पहुँचे पाकिस्तानियों से 40-40 लाख लिए गए थे।

जापान पहुँचने पर एयरपोर्ट पर इनका फर्जीवाड़ा सामने आ गया और पाकिस्तानी दूतावास से बात कर इन लोगों को वापस भेजा गया। इसी तरह 2024 में 17 पाकिस्तानियों को जापानी क्लब बोविस्टा एफसी के फर्जी आमंत्रण पत्र के जरिए जापान भेजा गया था। 15 दिनों का वीजा था, लेकिन ये लोग जापान जाकर आज तक वापस नहीं लौटे।

15 सालों में 4 गुणा बढ़ी मुस्लिम आबादी, 149 बने मस्जिद

ये सिर्फ एक शहर की बात नहीं है जापान में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है। जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी इस्लाम को मानने वालों की है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, जापान में मुस्लिम आबादी करीब 1.30 लाख थी। इनमें से 1.20 लाख विदेशी मुस्लिम और 10 हजार जापानी मुस्लिम रहते थे। लेकिन अब इस्लाम को माननेवालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिमों की कुल आबादी जापान की आबादी का 0.33 फीसदी है, जो साल-दर-साल बढ़ रही हैं। हाल ही में कब्रिस्तान को बनाने के लिए जगह देने को लेकर जापानी संसद में सवाल पूछे गए। इसके बाद मुस्लिम आबादी का मामला सुर्खियों में आ गया।

मुस्लिमों की बढ़ी आबादी मजदूरी करती है। इसके अलावा बिजनेस, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ लोग योगदान दे रहे हैं। जापान में मुसलमानों पर स्टडी करने वाले वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तनाडा के एक सर्वे में सामने आया कि देश में इनकी जनसंख्या 200000 से ज्यादा है।

मार्च 2021 तक यहाँ 113 मस्जिद बन चुके थे, जो 1999 में मात्र 15 थे। 2024 की बात करें तो यहाँ मस्जिदों की संख्या 149 हो गई थी, जो एक साल बाद यानी 2025 में 164 हो गई। इनमें से कई मस्जिदें बहुमंजिला हैं।

2024 के आखिर तक, जापानी मीडिया और रिसर्चर्स ने अंदाजा लगाया कि देश में विदेशी मुसलमानों की संख्या 360000 थी, जबकि मुसलमानों की कुल संख्या लगभग 420000 थी। इनमें करीब 55000 जापानी लोगों ने इस्लाम कबूला था। 2010-2020 के बीच ऐसे इस्लामी जापानियों की संख्या 110000 से बढ़कर 230000 हो गई। आसान शब्दों में कहें तो, जापान में मुस्लिम आबादी सिर्फ 15 से 20 सालों में चार गुना बढ़ गई है।

जापान में घटती आबादी और बढ़ता ‘इस्लाम’

जापान इन दिनों आबादी में कमी की समस्या से जूझ रहा है। यहाँ दुनिया में सबसे कम फर्टिलिटी रेट है और जन्म दर में रिकॉर्ड-कमी आई है। जापान का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 2024 में घटकर 1:15 हो गया, जो लगातार नौवें साल गिरावट का संकेत है। 2023 में यह 1.0 से नीचे चला गया था।
जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी डेटा का हवाला देते हुए, जापान में 2025 में 705,809 जन्म दर्ज किए गए, जो 2024 में लगभग 721000 से कम है। कुल मिलाकर जापान दशकों से कम जन्मदर की वजह से ‘बूढा’ होता जा रहा है।
इस संकट की वजह से मजदूरों की हर क्षेत्र में कमी हो गई है, जिसका असर इकोनॉमिक ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पड़ रहा है।
गाँवों से आबादी कम होने, स्कूल बंद होने और यहाँ तक ​​कि ‘घोस्ट टाउन’ या ‘मरते हुए गाँव’ बनने की भी खबरें आई हैं। इन इलाकों में बूढ़ी होती आबादी की वजह से वीरान होते जा रहे हैं। कई इंडस्ट्रियल हब पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
जापानी सरकार कई फाइनेंशियल इंसेंटिव स्कीम देकर नौजवानों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वर्क-लाइफ रिफॉर्म किया जा रहा है, लेकिन देर से शादियाँ, बच्चों को पालने का बढ़ता खर्च और आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से उत्साहजनकर परिणाम नहीं आए हैं।
साफ है, जापान की घटती आबादी इस्लामिक माइग्रेंट्स के लिए काफी फायदेमंद है। मजदूरों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों से लाया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं। बहुत सारे मुस्लिम जापान की इमिग्रेशन पॉलिसी का फायदा उठाकर वहीं बसते जा रहे हैं।
ऐसी खबरें आई हैं कि मुस्लिम माइग्रेंट वर्कर इस्लाम का प्रचार कर रहे हैं, जापानी लोकल लोगों का धर्म बदल रहे हैं, स्थानीय लोगों से निकाह कर रहे हैं, ताकि इस्लाम को फैला सके और अपनी आबादी बढ़ा सकें।

दुनिया के कई देश जूझ रहे हैं इस्लामी संकट से

मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि इस्लाम का फैलाव और काफिरों या गैर-इस्लामिक लोगों का धर्मांतरण करना उनका ‘इस्लामी फर्ज’ है। पहले युद्ध के जरिए जीत कर इस्लाम को बढ़ाया करते थे, अब बहलाकर, फुसलाकर, लालच देकर या धमकी देकर ये काम करते हैं। इसके लिए दूसरे देशों में बसना भी पड़े तो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। इनका ‘मिशन’ चलता रहता है।
एक धर्मनिरपेक्ष देश जापान में शिंटो-बौद्ध परंपराएँ मानने वाले लोग सबसे ज्यादा हैं। यहाँ दाह संस्कार की परंपरा है। शवों को दफनाने और कब्रिस्तान को लेकर यहाँ हंगामा भी हुआ है, क्योंकि इस्लामिक परंपरा लोकल जापानियों की परंपरा से मेल नहीं खाती है। लेकिन, मुस्लिम कट्टरपंथियों को लोकल कल्चर को अपनाना और उसका सम्मान तो कभी आया ही नहीं।
इस्लामी कट्टरपंथियों का एक पैटर्न है, पहले कुछ मुस्लिम आबादी को बसाओ, आसपास वैध-अवैध तरीके से मस्जिद बनाओ और फिर आबादी बढ़ा बढ़ा कर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने लगो और स्थानीय लोगों पर अपना दबदबा बनाने लगो और धर्मांतरण के लिए सारे साम-दाम- दंड-भेद अपनाओ।
इन लोगों को लोकल कानूनों को तोड़ने और इस्लामी दबदबा बनाने के लिए नियम कानून तोड़ने में कोई हिचक नहीं होती। यही काम इन लोगों ने यूरोप में भी किया है। यूरोप के विकसित सहिष्णु देशों के कानून का फायदा उठाकर वहाँ पहुँचे और धीरे-धीरे अपना दावा करने लगे।
यूरोप में अपराध काफी बढ़ गए हैं। अपने रीति-रिवाज और परंपरा को ये लोग उन पर थोप रहे हैं और लगातार खूनखराब, आतंकवाद की घटनाएँ बढ़ रही हैं। यहाँ डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। यही वजह है कि अनुमान लगाया गया है कि अगले 200 सालों में 6 यूरोपीय देशों- फ्रांस, बेल्जियम, बुल्गारिया,साइप्रस,स्वीडन और ब्रिटेन इस्लाम बहुल देश हो जाएगा।

जापान में तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी से मुस्लिमों को दफनाने की जगह नहीं, 40 वर्ष में 38 गुना बढ़ी मस्जिदों की संख्या

                                     जापानी में बढ़ रही मुस्लिम आबादी ( फोटो साभार- waseda.jp)
जापान में मुस्लिम आबादी की बेतहाशा वृद्धि दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यहाँ बड़े-बड़े मस्जिद बन गए हैं। यहाँ तक कि विश्वविद्यालय में भी मस्जिद देखा जा सकता है। जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी इस्लाम को मानने वालों की है। हाल ही में कब्रिस्तान को बनाने के लिए जगह देने को लेकर जापानी संसद में सवाल पूछे गए। इसके बाद मुस्लिम आबादी का मामला सुर्खियों में आ गया।

जापान में हजार से लाखों में पहुँची मुस्लिम आबादी

दुनियाभर में मुस्लिम आबादी बेहताशा बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, इस सदी के अंत तक ईसाइयों को पीछे छोड़ते हुए इस्लाम मानने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा होगी।
दुनिया में 200 से ज्यादा देशों में इनकी अच्छी खासी आबादी है। इन देशों में इस्लामी गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। 2013 में विश्व जनसंख्या में मुस्लिम आबादी 1.6 अरब थी और 2050 तक 2.9 अरब यानी विश्व जनसंख्या का करीब 26% तक पहुँचने का अनुमान है। यही वजह से की विश्व के छोटे-छोटे देशों में भी इनकी संख्या दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है।

छोटा सा एशियाई देश जापान भी इससे अछूता नहीं है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, जापान में मुस्लिम आबादी करीब 1.30 लाख थी। इनमें से 1.20 लाख विदेशी मुस्लिम और 10 हजार जापानी मुस्लिम रहते थे। लेकिन अब इस्लाम को माननेवालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी है। मुस्लिमों की कुल आबादी जापान की आबादी का 0.18 फीसदी से 0.33 फीसदी है, जो साल-दर-साल बढ़ रही हैं।

 ये लोग ज्यादातर प्रवासी कामगार हैं, जो टेक्नोलॉजी, बिजनेस और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। जापान में मुसलमानों पर स्टडी करने वाले वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तनाडा के एक सर्वे के मुताबिक, इनकी संख्या 200,000 से ज़्यादा होने का अनुमान है। मार्च 2021 तक, देश भर में मस्जिदों, यानी पूजा की जगहों की संख्या 1999 में 15 से बढ़कर 113 हो गई है।

जापानी की अधिकांश मुस्लिम आबादी (लगभग 80%) ग्रेटर टोक्यो क्षेत्र, चुक्यो महानगरीय क्षेत्र और किन्ही क्षेत्र में रहते हैं। अब इनका विस्तार दूसरे क्षेत्रों में भी हो रहा है।

जापान में तेजी से बन रहे हैं बहुमंजिला मस्जिद

ईरान और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों से मजदूरों के बढ़ते इमिग्रेशन और धर्मांतरण की वजह से जून 2024 तक यहाँ 149 मस्जिदें बन गई हैं। यानी इनकी संख्या 10 गुणा बढ़ गई हैं। कई मस्जिदों को बड़ा बनाया गया है।
टोक्यो में टोक्यो कैमी मस्जिद को हाल ही में बहुमंजिला बनाया गया है और समय-समय पर आम जनता को लुभाने के लिए इस्लामिक गतिविधियाँ चलाई जाती हैं। दिसंबर 2012 के मध्य में एक शुक्रवार को दोपहर के आसपास, टोक्यो के शिबुया वार्ड में टोक्यो कैमी मस्जिद में एक खास आवाज में आदमी ने अज़ान दिया और नमाज का समय बताया। उसने कहा, “मस्जिद घर जैसी है। अल्लाहु अकबर।”
यहाँ तक कि विश्वविद्यालय में भी मस्जिद बन चुकी है। जैसे- वासेदा विश्वविद्यालय के टोकोरोजावा परिसर के पास एक इमारत बनी थी, जिसे मस्जिद के रूप में उपयोग करने के लिए पुनर्निर्मित किया गया है।

90 के दशक में बनी बेतहाशा मस्जिदें

1990 के दशक में यहाँ मस्जिदों की संख्या तेजी से बढ़ी। 1980 में जहाँ सिर्फ 4 मस्जिदें थी, वहीं 1990 के दशक में ये बढ़ कर 90 से ज्यादा हो गई। इन वर्षों में इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए बाहरी देशों से कई लोग आए और मस्जिदों में कार्यक्रम आयोजित कर जापानियों को लुभाने की कोशिश की गई यानी जापानियों के धर्मांतरण में इन कार्यक्रमों की अहम भूमिका रही।
अब हालात ये हैं कि न सिर्फ प्रवासी मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, बल्कि जापान की मूल आबादी का धर्मांतरण तेजी से हुआ है। जापान में प्रवासी मुस्लिमों के बसने और परिवार बसाने की वजह से एक ‘हाइब्रिड मुस्लिम’ आबादी तैयार हो गई है। नमाज पढ़ना और रोजा रखना जैसे रीति रिवाज का पालन बड़ी आबादी करती है। इनमें कट्टरता भी देखी जाती है।

सांसद मिजुहो ने कब्रिस्तान बनाने पर प्रतिबंध लगाने की माँग की

जापान में हाल ही में ये खबर भी सामने आई कि सरकार ने शव दफनाने के लिए कब्रिस्तान बनाने के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है और प्रवासी मुस्लिमों को शव अपने देश लेकर दफनाने को कहा है। हालाँकि सरकार ने जापानी संसद में इसको लेकर स्पष्टीकरण दिया है।
दरअसल हाउस ऑफ काउंसिलर्स की प्रतिनिधि उमेमुरा मिजुहो ने कहा कि जापान में छोटा भू भाग है। प्राकृतिक आपदाएँ यहाँ होती रहती हैं, ऐसे में किसी बड़ी आपदा की स्थिति में दफनाने पर शवों के बाहर निकलने की संभावना है। साथ ही 99 फीसदी आबादी यहाँ दाह संस्कार करती है, इसलिए जापान की स्थिति को देखते हुए दफनाने से जुड़े नियम कड़े किए जाने चाहिए।
इसको लेकर सरकार ने स्थानीय सरकार को इसके बारे में विचार करने को कहा है। साथ ही स्थानीय रीति रिवाजों, नियमों और पर्यावरण को भी ध्यान में रखने को कहा है। क्योडो न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के बाद जापानी मुस्लिमों को दफनाने के लिए नई जगहों की जरूरत है।
एजेंसी का कहना है कि कुछ लोकल सरकारें बढ़ती मुस्लिम आबादी के लिए नए कब्रिस्तानों के लिए ज़मीन अलग रखने को तैयार हैं, जबकि दूसरी सरकारें इतनी मदद नहीं कर रही हैं।
जापान में दाह संस्कार आम बात है और 99.9% शवों का दाह संस्कार किया जाता है। इससे मुसलमान अपने दफ़नाने के तरीकों को लेकर परेशान हैं।
उत्तर-पूर्वी जापान में मौजूद मियागी प्रांत के गवर्नर ने दिसंबर में कहा था कि 2023 में इंडोनेशिया के साथ लोकल इलाकों के लिए मज़दूर देने के लिए मेमोरेंडम साइन करने के बाद एक नए कब्रिस्तान पर जापान शांति पसंद देश माना जाता है। अनुशासन प्रिय इस देश की बड़ी आबादी बुजुर्ग हो चुकी है। ऐसे में कामगार की जरूरत को पूरा करने के लिए विदेशों से लोग यहाँ आकर बस रहे हैं। इनमें मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है। खासकर ईरान, पाकिस्तान, इंडोनेशिया जैसे देशों से कामगार आकर यहाँ स्थायी रूप से बस रहे हैं। इसका असर जापान में दिखने लगा है।विचार किया जा रहा है।

ये कैसा गड़बड़झाला है : विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति “चीन” विकासशील देश है विकसित देश नहीं

सुभाष चन्द्र

फरवरी, 2024 में विश्व की पहली आर्थिक महाशक्ति IMF के अनुसार 27,974 बिलियन डॉलर की GDP के साथ अमेरिका है और 2nd largest आर्थिक महाशक्ति 18566 बिलियन डॉलर की GDP के साथ चीन है, जबकि जर्मनी, जापान और भारत की GDP क्रमशः 4730, 4291 और 4112 बिलियन डॉलर है। ब्रिटेन 6th, फ्रांस 7th और कनाडा 10th नंबर पर हैं।

परंतु अमेरिका, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा को विकसित देशों की श्रेणी में रखा गया लेकिन 2nd largest economy होने के बावजूद चीन को विकासशील देशों (Developing Nation) की श्रेणी में रखा गया है जिसका कोई औचित्य समझ नहीं आता। 

World Bank के अनुसार चीन के 85 करोड़ लोग (850 million) Extreme Poverty से बाहर लाए जा चुके है। चीन का Poverty Rate 1981 के 88% से गिर कर 2015 में मात्र 0.7 % रह गया था।

चीन को विकासशील देश कहने का कोई कारण समझ नहीं आता। जो देश 18 राष्ट्रों को वर्षों से किसी न किसी तरह के सीमा विवाद में उलझा कर रख सकता है; जो अनेक देशों को कर्ज के  मकड़जाल में फंसा कर blackmail कर सकता है; जो देश Veto Power से UN Security council में हर विषय में रोड़े अटका सकता है; जो देश हर लोकतांत्रिक देश में पैसे के दम पर अस्थिरता पैदा कर सकता है; जो देश विश्व के किसी देश में एटोमिक ताकत के बल पर अशांति पैदा कर सकता और पाकिस्तान एवं उत्तरी कोरिया को विश्व के लिए खतरा बना सकता है; जो अमेरिका जैसे शक्तिशाली मुल्क को हर समय युद्ध के लिए ललकार सकता है और जो भारत की हजारों एकड़ भूमि पर कब्ज़ा किये बैठा है, वह देश किस मायने से Developing Nation कहलाया जा सकता है। 

लेखक 

यह विकासशील देश चीन, पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को कोरोना देकर चौपट करने की ताकत रखता है और अपनी capital market से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को अस्थिर कर सकता है, वह किसी तरह से भी विकासशील देश नहीं हो सकता बल्कि वह तो सम्पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र है।

चीन के पास अमेरिका के 5244 और रूस के 5889 Nuclear Warheads के बाद सबसे अधिक 500 Nuclear Weapons हैं और आज यह देश नेहरू से वरदान में मिली Veto Power के बल पर भारत के Veto Power के अधिकार को रोके बैठा है।

कोई ऐसा वैश्विक संगठन नहीं है जिसमे चीन अपनी दादागिरी न दिखाता हो। चीन ने 2016 में 48 सदस्यों के Nuclear Supplier Group में प्रवेश को रोक दिया था और भारत के इस प्रवेश को रोकने वाला NSG में वह अकेला देश था।

WTO ने विकसित और विकासशील देशों की कोई परिभाषा तय नहीं की है लेकिन जो भी विकासशील देश माने जाते हैं उन्हें WTO में कुछ सुविधाएं मिलती है। लिहाजा चीन हर तरफ से मौज में रहना चाहता है, एक विकसित देश की तरह दुनिया पर रौब भी दिखाना चाहता है और विकासशील देश की तरह सुविधाएं भी लेना चाहता है।

IMF और World Bank को इस पर पुनर्विचार जरूर करना चाहिए।

जापान में 90 मिनट में 21 बार आया भूकंप, 35000 घरों में अँधेरा: सुनामी का खतरा, उठ सकती हैं 5 मीटर ऊँची लहरें; भारत ने नागरिकों के लिए जारी किए नंबर

जापान में भूकंप के बाद सुनामी की आशंका (फोटो साभार: इंडिया टुडे)
2024 की पहली ही तारीख जापान के लिए भारी विपदा लेकर आई है। जोरदार भूकंप के बाद सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। दुनिया के सबसे बड़े परमाणु उर्जा संयंत्र को भी खतरा है। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए हैं।

नए साल पर जापान के मध्य और तटीय क्षेत्र में 90 मिनट के भीतर 4.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के 21 झटके महसूस किए गए। इनमें से एक की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.6 की मापी गई है। इसके कारण समुद्र में 5 मीटर ऊँची लहरें उठने और सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है।

जानकारी के अनुसार, मध्य जापान के इशिकावा प्रांत में सोमवार दोपहर तेज भूकंप आया। इसके बाद इस इलाके से लोगों को निकाला जा रहा है। भूकंप के बाद बड़ी सुनामी की भी आशंका है। जापान के मौसम विभाग का कहना है कि सुनामी की लहरें पाँच मीटर तक ऊँची हो सकती है।

जापान की सरकार ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से तुरंत ऊँचाई वाली जगहों पर जाने को कहा है। भूकंप के कई वीडियो भी सामने आए हैं। वीडियो में धरती तेजी से हिलती हुई दिखती है और लोग बचने के लिए मेजों के नीचे शरण ले रहे हैं।

भूकम्प के कारण कुछ इलाकों में बिजली सुविधाएँ प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान में 35,000 घरों को इस समय बिना बिजली के गुजारा करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में ट्रेन सुविधाओं को भी बंद कर दिया गया है। कुछ घरों के गिरने की सूचना भी है। कई जगह पर जमीन में बड़ी दरारें भी देखने को मिली है।

भूकंप के बाद बड़ी चिंता जापान के परमाणु संयत्रों को लेकर जताई जा रही है। हालाँकि सरकार का कहना कहा है कि अभी स्थिति सामान्य है और कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई है।

7.6 तीव्रता वाले भूकंप के बाद लगातार और भी झटके जापान में महसूस किए गए हैं। जापान झटकों से पैदा हुई आपात स्थिति के लिए अमूमन तैयार रहता है, क्योंकि वहाँ साल में कई बार छोटे बड़े भूकंप आते हैं। लेकिन उसे असली खतरा सुनामी से है क्योंकि इससे पानी अनियंत्रित तरीके से शहरों में घुसता है।

भूकंप और सुनामी के खतरे के बीच जापान की सरकार लगातार लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकाल रही है। जापान में भूकंप आने के बाद से पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया और रूस ने भी सुनामी को लेकर चेतावनी जारी की है। यहाँ भी सरकार लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील कर रही है।

भूकंप के बाद जापान में स्थित भारतीय दूतावास ने भी एक्शन में आ गया है। टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने एक कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। अपने नागरिकों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। इसकी जानकारी एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा की है।


G7-SUMMIT: अमेरिकी राष्ट्रपति खुद चलकर मोदी की सीट तक आए और गर्मजोशी से गले लगाया


भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आन्दोलनजीवियों के माध्यम से 
विरोधी लाख विरोध करें, लेकिन विश्व में मोदी का जलवा देखते ही बनता है। वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कद और महत्ता निरंतर बढ़ रही है। भारत दुनिया के सात विकसित और अमीर देशों के समूह G7 का सदस्य नहीं है। लेकिन जापान के हिरोशिमा में जारी G7 की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘विशेष मेहमान’ के तौर पर आमंत्रित किया गया है। हिरोशिमा में G7 की बैठक शुरू होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान वो वर्ल्ड लीडर्स के बीच बैठे मोदी से मिलने उनकी सीट तक चलकर आए और उन्हें पीएम मोदी को गले लगाया।इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। हालांकि 15 महीने से जारी जंग के दौरान मोदी और जेलेंस्की फोन पर बात कर चुके हैं।

बाइडेन चलकर मोदी की सीट तक आए, मोदी को गले लगाया

हिरोशिमा में G7 की बैठक शुरू होने से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान वो वर्ल्ड लीडर्स के बीच बैठे मोदी से मिलने उनकी सीट तक चलकर आए और उन्हें पीएम मोदी को गले लगाया। हिरोशिमा में G7 की बैठक के दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति छटवीं बार मिले। इससे पहले पांच विभिन्न अवसरों पर दोनों वैश्विक नेताओं की मुलाकत हो चुकी है।

  • PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन की पहली मुलाकात सितंबर 2021 में अमेरिका में हुई थी। तब दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक बातचीत की थी।
  • इसके बाद मोदी और बाइडेन अक्टूबर में इटली में G-20 समिट के दौरान मिले थे।
  • विश्व के दोनों बड़े नेताओं की अगली मुलाकात मई 2022 में QUAD समिट के दौरान हुई थी।
  • जर्मनी में चौथी बार फिर दोनों जून 2022 में G-7 समिट के दौरान मिले थे।
  • मोदी-बाइडेन की पिछली मुलाकात नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में G-20 समिट के दौरान हुई थी।

मोदी और ब्रिटेन के पहले भारतवंशी पीएम सुनक गर्मजोशी से मिले

जापान के हिरोशिमा शहर में G7 समिट चल रहा है। यह दुनिया के सात देशों अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, इटली, जापान और ब्रिटेन का ताकतवर ग्रुप है। इसे ग्रुप ऑफ सेवन भी कहा जाता है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक को गले लगाया। हिरोशिमा में प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन के भारतीय मूल के पीएम ऋषि सुनक से भी मुलाकात हुई। दोनों वैश्विक नेता बेहद गर्मजोशी से मिले और बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के डेलिगेशन भी मौजूद थे। सुनक ब्रिटेन के पहले भारतवंशी और गैर श्वेत प्रधानमंत्री हैं। वे भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति के दामाद भी हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पीएम मोदी और जेलेंस्की की पहली बार मुलाकात

यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की। ये मुलाकात जापान के हिरोशिमा में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच दोनों देशों के नेताओं की यह पहली बार मुलाकात है। हालांकि दोनों नेता फोन पर बातचीत कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने जेलेंस्की से कहा- यूक्रेन जंग इकोनॉमी और पॉलिटिक्स का नहीं, इंसानियत का मुद्दा है। भारत इस जंग को खत्म करने के लिए हर कदम उठाने तैयार है। यहां से प्रधानमंत्री मोदी पापुआ न्यू गिनी और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा पर जाएंगे।

जापान के पीएम, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति और जर्मन चांसलर से भी मिले
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिरोशिमा में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने G7 की मीटिंग से पहले जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज से भी मुलाकात की। इस द्विपक्षीय मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने जर्मन चांसलर के साथ अपनी फोटो शेयर करते हुए उन्हें अपना दोस्त बताया। मोदी ने लिखा- दोस्त से मिलकर अच्छा लगा। इससे पहले PM मोदी ने दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री यून सुक यिओल से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। इसके अलावा वे समिट को होस्ट कर रहे जापान के प्रधानमंत्री से भी मिले। मोदी ने कहा कि जापानी PM फुमियो किशिदा के साथ बेहतरीन बातचीत हुई। हमने भारत-जापान के रिश्तों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया।

US मीडिया का दावा : चीन का जासूसी गुब्बारा भारत में भी… पता लगाया रक्षा और सैन्य जानकारी

चीन के जासूसी गुब्बारे का टार्गेट भारत भी?
चीन ने भारत और जापान सहित कई देशों को निशाना बनाते हुए जासूसी गुब्बारों को हवा में छोड़ा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ दिन पहले चीन के जासूसी गुब्बारे देश के संवेदनशील प्रतिष्ठानों के ऊपर उड़ रहे थे। 4 फरवरी 2023 को अमेरिका की सेना ने अटलांटिक महासागर के ऊपर दक्षिण कैरोलिना के तट के ऊपर उड़ रहे इन गुब्बारों को मिसाइल के जरिए नष्ट कर दिया था।

अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने 6 फरवरी 2023 को करीब 40 दूतावासों के अधिकारियों को इस जानकारी से अवगत कराया। इस जानकारी को भारत समेत अन्य सभी सहयोगी और मित्र देशों के साथ साझा किया गया।

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने 7 फरवरी 2023 को दावा करते हुए कहा कि चीन ने गुब्बारे के जरिए निगरानी अभियान के तहत जापान, भारत, वियतनाम, ताइवान और फिलीपीन समेत कई देशों की सैन्य संपत्तियों संबंधी जानकारी एकत्रित की। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की यह रिपोर्ट कई अनाम रक्षा एवं खुफिया अधिकारियों के साक्षात्कार पर आधारित है।

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि चीन की पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) वायु सेना द्वारा संचालित इन जासूसी करने वालों गुब्बारों को पाँच महाद्वीपों में देखा गया है। हाल के वर्षों में फ्लोरिडा, टेक्सास और गुआम में कम से कम चार गुब्बारे देखे गए हैं, जो पिछले हफ्ते नष्ट किए गए गुब्बारों के अलावा हैं।

एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया, “ये गुब्बारे पीआरसी (People’s Republic of China) के गुब्बारों के बेड़े का हिस्सा हैं, जिन्हें निगरानी अभियान चलाने के लिए विकसित किया गया है। इसके ​जरिए इन्होंने अन्य देशों की संप्रभुता का उल्लंघन किया है।”

कहा जा रहा है कि अमेरिकी में डोनल्ड ट्रंप के शासन के दौरान चार में से तीन घटनाएँ हुई थीं, लेकिन इनकी पहचान चीनी निगरानी एयरशिप के रूप में हाल ही में की गई। इस संबंध में अमेरिकी रक्षा संस्थान ने गुब्बारे की तस्वीरें जारी की थी।

अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के निर्देश के बाद एफ-22 फाइटर जेट से मिसाइल दागकर कैरोलिना तट के पास चीन के जासूसी गुब्बारे को गिरा दिया था। इस जासूसी बैलून को लेकर अमेरिका और चीन के रिश्तों में खटास आ गई है। बाइडेन पाँच दिन पहले ही इस काम को करना चा​हते थे, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें सलाह दी थी कि इसके लिए सबसे उपयुक्त समय तब होगा, जब यह पानी के ऊपर आ जाए।

जापान के पूर्व PM शिंजो आबे को मारी गोली, हालत नाजुक: भाषण देते वक्त हुआ हमला, 2021 में भारत ने पद्म विभूषण से किया था सम्मानित

                                                                                                                           फाइल फोटो
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर हमला हुआ है। उन्हें गोली मारी गई है। शिंजो आबे पश्चिमी जापान के नारा शहर में भाषण दे रहे थे, इसी दौरान उन पर हमला हुआ। उनके सीने में गोली लगी है। जापान के NHK वर्ल्ड न्यूज के मुताबिक, आबे घायल हैं। संदिग्ध हमलावर को मौके से पकड़ लिया गया है।

 

आबे पर हमला 8 जुलाई 2022 को स्थानीय समयानुसार दिन में 11:30 बजे हुआ। आबे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। NHK वर्ल्ड न्यूज ने कहा कि गोली चलने जैसी आवाज सुनी गई और एक संदिग्ध को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया। मौके पर मौजूद NHK वर्ल्ड न्यूज के एक रिपोर्टर ने कहा कि आबे के भाषण के दौरान उन्हें लगातार दो धमाके की आवाज सुनाई दी। जापान टाइम्स के अनुसार, शिंजो आबे पर शुक्रवार को नारा की एक सड़क पर भाषण देने के दौरान पीछे से एक व्यक्ति ने हमला किया।

जापान में उच्च सदन के चुनाव होने हैं। इसके लिए शिंजो आबे वहाँ कैंपेनिंग कर रहे थे। हमले के बाद के कुछ वीडियो भी अब सामने आने लगे हैं। इसमें वहाँ भगदड़ की स्थिति साफ देखी जा सकती है। शिंजो आबे सबसे लंबे समय तक जापान के प्रधानमंत्री रहे। आबे ने अगस्त 2020 में खराब स्वास्थ्य के कारण पद छोड़ दिया था। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास दोस्त हैं। कई मौकों पर पीएम और शिंजो एक-दूसरे को याद कर चुके हैं। पिछले साल ही भारत ने शिंजो आबे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।