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नेपाल : जिस अवैध मस्जिद का पाकिस्तानी राजदूत ने किया उद्घाटन सरकार ने गिरा दी

जापान के अवैध मस्जिद के उदघाटन में पहुँचा पाकिस्तान (फोटो साभार-NDTV)
पाकिस्तान ने जापान में मस्जिद का उद्घाटन किया। इसे जापान ने गैर-कानूनी कहा और ध्वस्त करने का आदेश दिया। जापान में बढ़ रही मुस्लिम आबादी, डेमोग्राफी में बदलाव, सार्वजनिक नमाज और कब्रिस्तान की बढ़ती माँग, जन्मदर में कमी और मस्जिदों की बढ़ती संख्या के बीच इस मुद्दे ने इसलिए ध्यान खींचा है, क्योंकि जापान में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद इस साल की शुरुआत में मस्जिद के उद्घाटन में शामिल हुए थे।

क्या है कोवागो विवाद

कावागो में गैरकानूनी तरीके से मस्जिद बनाई गई थी, जिसके खिलाफ स्थानीय लोगों ने आवाज भी बुलंद की थी। ‘जापान जामे मस्जिद रमजान’ नाम की यह मस्जिद 4500 स्क्वेयर मीटर के प्लॉट पर बनी है, जिसे पहाड़ पर मौजूद ‘वनभूमि’ माना जाता है। यह साइट अर्बनाइजेशन कंट्रोल एरिया में आती है, जहाँ लोकल अधिकारियों से इजाजत लिए बिना कंस्ट्रक्शन पर आम तौर पर रोक होती है।

द असाही शिंबुन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड से पता चलता है कि मार्च 2025 में जमीन का मालिकाना हक बदला गया। पहले यह फुजीमी की एक रियल एस्टेट कंपनी की थी, जिसे कावागो पर रजिस्टर्ड एक फर्म को दे दी गई। कावागो शहर के अधिकारियों ने कहा कि मस्जिद जरूरी मंजूरी के बिना बनाई गई थी। यहाँ 2000 में एक फैक्ट्री बनी थी, 2007 में इसका मालिकाना हक बदल गया था और रियल एस्ट्रेट कॉर्पोरेशन बन गया। इसके बाद 2025 में स्थिति में बदलाव आया, लेकिन मस्जिद बनाने की अनुमति यहाँ नहीं थी।

जापान में सिटी प्लानिंग एक्ट के तहत बिल्डिंग बनाने पर सख्त पाबंदियाँ हैं। हालाँकि, जैसा कि दुनिया भर के इस्लामिस्टों के साथ होता है, इस्लामी विस्तार और कब्जे के मामलों में उनके लिए स्थानीय कानूनों का कोई मतलब नहीं होता है। मस्जिद को एक पाकिस्तानी कंपनी की जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया था। जापानी मीडिया की रिपोर्ट है कि रियल एस्टेट रजिस्ट्री ने उस जमीन को ‘वन भूमि’ बताया है।

अक्टूबर 2024 में स्थानीय निवासियों ने लगभग पूरी हो चुकी मस्जिद के ढाँचे का विरोध किया। शहर के प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार काम रोकने के आदेश जारी किए। लेकिन, मुस्लिम समुदाय ने बात नहीं मानी और कंस्ट्रक्शन का काम जारी रखा। शुरुआत में कहा जाता है कि मजदूरों ने कहा कि वे जापानी भाषा नहीं समझ सकते, इसलिए काम नहीं रोका। चाहे जो भी हो मस्जिद बनकर तैयार भी हो गई और इस मस्जिद के उद्घाटन में पाकिस्तान के राजदूत भी शामिल हुए, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चित हो गया। बाद में पाकिस्तान दूतावास को सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

पाकिस्तान दूतावास ने जापानी कानून मानने की सलाह दी

जापान स्थित पाकिस्तान दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि जापान में रहने वाले सभी पाकिस्तानियों को जापानी कानूनों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। मस्जिद या मदरसे का निर्माण स्थानीय प्रशासन से आवश्यक अनुमति लेने के बाद ही किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी दूतावास का उन परियोजनाओं से कोई संबंध नहीं है, जो स्थानीय कानूनों का पालन नहीं करती।

इसमें कहा गया है कि कावागो की मस्जिद के उद्घाटन में राजदूत इसलिए गए थे, क्योंकि उन्हें बताया गया था कि कानून के मुताबिक जरूरी अनुमति ले ली गई है। इसमें कहा गया कि पाकिस्तानी समुदाय को स्थानीय निवासियों और प्रशासन के साथ पारदर्शिता रखनी चाहिए और अधिकारियों के साथ सहयोग करना चाहिए।

                                                        (साभार-एक्स)

पाकिस्तानी एम्बेसी ने कहा, “ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए कानूनी नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी जापान में रहने वाले सभी पाकिस्तानियों और आस-पास के लोगों के साथ ट्रांसपेरेंट तरीके से शेयर की जानी चाहिए। इसके अलावा, प्लानिंग के दौरान और उसके बाद भी, हर हाल में जापानी कानूनों और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।”

                                                                                      (साभार-एक्स)

कावागो जापान का पहला मामला नहीं है। इससे पहले मई 2026 में फुजिसावा शहर में एक मस्जिद बनाने को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। 440000 लोगों वाले इस शहर में मुस्लिम आबादी में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। जिस मस्जिद की बात हो रही है, उसे एक श्रीलंकाई बिजनेसमैन मोहम्मद खलील ने बनाया था। उसका कहना था कि वह एक मस्जिद बनाना चाहते हैं, क्योंकि 20 किलोमीटर दूर एबिना मस्जिद फुजिसावा में बढ़ती मुस्लिम आबादी के लिए काफी नहीं है।

खास बात यह है कि खलील भी 2021 में फुजिसावा के उत्तरी बाहरी इलाके में एक बंद पड़ी फैक्ट्री की 980-स्क्वायर मीटर की जगह पर ही बस गए थे। उन्होंने फटाफट फुजिसावा मस्जिद NPO बनाया। पैसे जमा किए और जमीन खरीदी और मस्जिद बनाने के लिए मंजूरी ले ली।

ये इतनी तेजी से हुआ कि 4 साल के अंदर ही एक मस्जिद बना दी। जापानी भी इससे परेशान हैं कि कैसे मुस्लिम इमिग्रेंट्स पूरे जापान में अपनी धार्मिक पहचान बढ़ा रहे हैं। ये बता रहे हैं कि जानबूझकर साजिश के तहत ये किया जा रहा है। एक तरफ तो बड़ी संख्या में प्रवासी मुस्लिम यहाँ आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का ब्रेनवॉश करके उन्हें इस्लाम कबूल करवाया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी जापानियों ने अपनी बात रखी है। इनका कहना है कि तब्लीगी जमात से संबंध रखने वाले इस अवैध मस्जिद के उद्घाटन में पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद का शामिल होना ये बताता है कि इसे पाकिस्तानी शासन का समर्थन है।

सोशल मीडिया पर जापानियों का विरोध

सोशल मीडिया पर कई जापानी लोगों ने इस्लामी संगठन तब्लीगी जमात से कथित संबंध वाले मस्जिद के उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले पाकिस्तानी राजदूत अब्दुल हमीद पर गुस्सा हुए।

एक्स पर उन्होंने लिखा, “जापानी भाषा के बयान के 12 घंटे बाद उर्दू में एक बयान पोस्ट किया गया। भले ही राजदूत इस बात से अनजान थे कि यह अवैध है। बात यह है कि उन्होंने इस मस्जिद के उद्घाटन समारोह में भाग लिया, जहाँ सऊदी अरब जैसे देशों द्वारा प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन ‘तबलीगी जमात’ से जुड़े लोग भी आते-जाते हैं। राजदूत को तो सतर्क रहना ही चाहिए था, इतना बिजी रहने के बावजूद भी वो इसमें क्यों शामिल हुए? क्या वह केवल इस बात से खुश थे कि जापान में मस्जिदें बढ़ रही हैं? क्या वह जापान के मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला इसे मान रहे थे?”

एक और जापानी यूजर ने लिखा कि हो सकता है इस मस्जिद को पाकिस्तानी मदद मिल रही हो। इसे जापान के बारे में जानकारी इक्ट्ठा कर चीन को देने के मिशन पर लगाया गया हो। मीडिया में इस एंगल से रिपोर्टिंग क्यों नहीं हो रही है।

जापानी X यूजर ने लिखा, “साइतामा प्रीफेक्चर, कावागो सिटी, ओजा शिमोशिमोआकासाका, जहाँ कावागो सिटी में एक गैर-कानूनी तरीके से बनी मस्जिद है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि यह मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के इन्फॉर्मेशन हेडक्वार्टर ओई रेडियो स्टेशन के पास है। स्पेशल ऑब्जर्वेशन जोन को ‘इम्पॉर्टेंट लैंड सर्वे एक्ट’ के तहत बनाया गया है, ताकि जरूरी सिक्योरिटी सुविधाओं के काम में रुकावट डालने वालों को रोका सके।”

पाकिस्तानी फर्जी फुटबॉल टीम भी पहुँच गई थी जापान

पाकिस्तानी अवैध तरीके से जापान जाने के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में पाकिस्तान की फर्जी फुटबॉल टीम जापान पहुँच गई थी। इसके लिए बाकायदा फर्जी फुटबॉल क्लब बनाया गया, जिसे पाकिस्तानी फुटबॉल एसोसिएशन से संबद्ध दिखाया गया। जापान पहुँचे पाकिस्तानियों से 40-40 लाख लिए गए थे।

जापान पहुँचने पर एयरपोर्ट पर इनका फर्जीवाड़ा सामने आ गया और पाकिस्तानी दूतावास से बात कर इन लोगों को वापस भेजा गया। इसी तरह 2024 में 17 पाकिस्तानियों को जापानी क्लब बोविस्टा एफसी के फर्जी आमंत्रण पत्र के जरिए जापान भेजा गया था। 15 दिनों का वीजा था, लेकिन ये लोग जापान जाकर आज तक वापस नहीं लौटे।

15 सालों में 4 गुणा बढ़ी मुस्लिम आबादी, 149 बने मस्जिद

ये सिर्फ एक शहर की बात नहीं है जापान में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ी है। जापान के 47 प्रांतों में 2.3 लाख से 4.2 लाख आबादी इस्लाम को मानने वालों की है। 2016 के आंकड़ों के मुताबिक, जापान में मुस्लिम आबादी करीब 1.30 लाख थी। इनमें से 1.20 लाख विदेशी मुस्लिम और 10 हजार जापानी मुस्लिम रहते थे। लेकिन अब इस्लाम को माननेवालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिमों की कुल आबादी जापान की आबादी का 0.33 फीसदी है, जो साल-दर-साल बढ़ रही हैं। हाल ही में कब्रिस्तान को बनाने के लिए जगह देने को लेकर जापानी संसद में सवाल पूछे गए। इसके बाद मुस्लिम आबादी का मामला सुर्खियों में आ गया।

मुस्लिमों की बढ़ी आबादी मजदूरी करती है। इसके अलावा बिजनेस, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ लोग योगदान दे रहे हैं। जापान में मुसलमानों पर स्टडी करने वाले वासेदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस हिरोफुमी तनाडा के एक सर्वे में सामने आया कि देश में इनकी जनसंख्या 200000 से ज्यादा है।

मार्च 2021 तक यहाँ 113 मस्जिद बन चुके थे, जो 1999 में मात्र 15 थे। 2024 की बात करें तो यहाँ मस्जिदों की संख्या 149 हो गई थी, जो एक साल बाद यानी 2025 में 164 हो गई। इनमें से कई मस्जिदें बहुमंजिला हैं।

2024 के आखिर तक, जापानी मीडिया और रिसर्चर्स ने अंदाजा लगाया कि देश में विदेशी मुसलमानों की संख्या 360000 थी, जबकि मुसलमानों की कुल संख्या लगभग 420000 थी। इनमें करीब 55000 जापानी लोगों ने इस्लाम कबूला था। 2010-2020 के बीच ऐसे इस्लामी जापानियों की संख्या 110000 से बढ़कर 230000 हो गई। आसान शब्दों में कहें तो, जापान में मुस्लिम आबादी सिर्फ 15 से 20 सालों में चार गुना बढ़ गई है।

जापान में घटती आबादी और बढ़ता ‘इस्लाम’

जापान इन दिनों आबादी में कमी की समस्या से जूझ रहा है। यहाँ दुनिया में सबसे कम फर्टिलिटी रेट है और जन्म दर में रिकॉर्ड-कमी आई है। जापान का टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) 2024 में घटकर 1:15 हो गया, जो लगातार नौवें साल गिरावट का संकेत है। 2023 में यह 1.0 से नीचे चला गया था।
जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी डेटा का हवाला देते हुए, जापान में 2025 में 705,809 जन्म दर्ज किए गए, जो 2024 में लगभग 721000 से कम है। कुल मिलाकर जापान दशकों से कम जन्मदर की वजह से ‘बूढा’ होता जा रहा है।
इस संकट की वजह से मजदूरों की हर क्षेत्र में कमी हो गई है, जिसका असर इकोनॉमिक ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पड़ रहा है।
गाँवों से आबादी कम होने, स्कूल बंद होने और यहाँ तक ​​कि ‘घोस्ट टाउन’ या ‘मरते हुए गाँव’ बनने की भी खबरें आई हैं। इन इलाकों में बूढ़ी होती आबादी की वजह से वीरान होते जा रहे हैं। कई इंडस्ट्रियल हब पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं।
जापानी सरकार कई फाइनेंशियल इंसेंटिव स्कीम देकर नौजवानों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। वर्क-लाइफ रिफॉर्म किया जा रहा है, लेकिन देर से शादियाँ, बच्चों को पालने का बढ़ता खर्च और आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से उत्साहजनकर परिणाम नहीं आए हैं।
साफ है, जापान की घटती आबादी इस्लामिक माइग्रेंट्स के लिए काफी फायदेमंद है। मजदूरों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों से लाया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं। बहुत सारे मुस्लिम जापान की इमिग्रेशन पॉलिसी का फायदा उठाकर वहीं बसते जा रहे हैं।
ऐसी खबरें आई हैं कि मुस्लिम माइग्रेंट वर्कर इस्लाम का प्रचार कर रहे हैं, जापानी लोकल लोगों का धर्म बदल रहे हैं, स्थानीय लोगों से निकाह कर रहे हैं, ताकि इस्लाम को फैला सके और अपनी आबादी बढ़ा सकें।

दुनिया के कई देश जूझ रहे हैं इस्लामी संकट से

मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि इस्लाम का फैलाव और काफिरों या गैर-इस्लामिक लोगों का धर्मांतरण करना उनका ‘इस्लामी फर्ज’ है। पहले युद्ध के जरिए जीत कर इस्लाम को बढ़ाया करते थे, अब बहलाकर, फुसलाकर, लालच देकर या धमकी देकर ये काम करते हैं। इसके लिए दूसरे देशों में बसना भी पड़े तो इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। इनका ‘मिशन’ चलता रहता है।
एक धर्मनिरपेक्ष देश जापान में शिंटो-बौद्ध परंपराएँ मानने वाले लोग सबसे ज्यादा हैं। यहाँ दाह संस्कार की परंपरा है। शवों को दफनाने और कब्रिस्तान को लेकर यहाँ हंगामा भी हुआ है, क्योंकि इस्लामिक परंपरा लोकल जापानियों की परंपरा से मेल नहीं खाती है। लेकिन, मुस्लिम कट्टरपंथियों को लोकल कल्चर को अपनाना और उसका सम्मान तो कभी आया ही नहीं।
इस्लामी कट्टरपंथियों का एक पैटर्न है, पहले कुछ मुस्लिम आबादी को बसाओ, आसपास वैध-अवैध तरीके से मस्जिद बनाओ और फिर आबादी बढ़ा बढ़ा कर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने लगो और स्थानीय लोगों पर अपना दबदबा बनाने लगो और धर्मांतरण के लिए सारे साम-दाम- दंड-भेद अपनाओ।
इन लोगों को लोकल कानूनों को तोड़ने और इस्लामी दबदबा बनाने के लिए नियम कानून तोड़ने में कोई हिचक नहीं होती। यही काम इन लोगों ने यूरोप में भी किया है। यूरोप के विकसित सहिष्णु देशों के कानून का फायदा उठाकर वहाँ पहुँचे और धीरे-धीरे अपना दावा करने लगे।
यूरोप में अपराध काफी बढ़ गए हैं। अपने रीति-रिवाज और परंपरा को ये लोग उन पर थोप रहे हैं और लगातार खूनखराब, आतंकवाद की घटनाएँ बढ़ रही हैं। यहाँ डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। यही वजह है कि अनुमान लगाया गया है कि अगले 200 सालों में 6 यूरोपीय देशों- फ्रांस, बेल्जियम, बुल्गारिया,साइप्रस,स्वीडन और ब्रिटेन इस्लाम बहुल देश हो जाएगा।

2000+ हिरासत में, 8 आतंकियों के घर जमींदोज, ब्लास्ट से उड़ाए गए ‘जिहादी ठिकाने’: पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन, आतंक समर्थकों-OGW से हो रही पूछताछ

            सेना और प्रशासन लगातार आतंकियों के घर जमींदोज कर रहा है (साभार: Deshgujarat/X & @KashmirExclusi1 /X)
जम्मू
कश्मीर के पहले गेम में आतंकवादी हमलों के बाद सेना का एक्शन रिलीज़ हुआ है। सेना संस्थान-ए-तैयबा से जुड़े एक-एक अपराधी का घर उड़ रही है। इसी के साथ ही बड़ी संख्या में कश्मीर से लोग भी संविधान के लिए जा रहे हैं। डिज़ायंट में जाने वालों में ओवर ग्राउंड स्मारक और पूर्व अपराधी भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना की कार्रवाई में शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को 4 और साइंटिस्ट के घर जमींदोज हो गए। यह कार्रवाई शोपियां, कुलगाम और कूप वेव में की गई। शोपियां में शैतान तानाशाह मोहम्मद अहमद कुट्टे का घर बनाया गया। कुट्टे 2023 से ही गायब हो गया है और विश्विद्यालय में शामिल हो गया है।  

कुलगाम में एक और अपराधी जाकिर का घर बदल गया। जाकिर भी 2023 से गायब हैं और उनकी भी ऑफिस वास्टहाउस या टी से जुड़ी बात सामने आई है। उनका घर भी एक आभूषण के रूप में खुला है। इन दोनों के साथ ही एक और कट्टर अपराधी फारूक तिवड़ा का भी घर गिर गया है।

फारूक के 1990 में पाकिस्तान जाने की बात कही जाती है। वह तब से कहीं और रह रही है और भारत के अत्याचारी कारवाइयों को अंजाम दे रही है। उसका घर कूप में था, जहां से सोना नक्षत्र है। ज़्यादातर घर पूरी तरह से तहस-नहस हो गए हैं। बांदीपोरा में भी एक आंतकी जमील अहमद के घर जाने की जानकारी है।

अहसान उल शेख नाम के एक हत्यारे का भी घर स्पिरिट ने शुरुआती गेम में अपराधी हमले के बाद  विस्फोट किया है  । इन सबके साथ ही हमलावर एहसान उल शेख का भी दिल टूट गया है। अदनान शफ़ी नाम के एक दोस्त का घर भी जमींदोज़ हो गया है।

इससे पहले गेम के खुलासे में 2 नौकरानी के घर के टुकड़े शामिल थे, जो नीचे दिए गए थे। अब तक 8-9 बिजनेसमैन के घर पर ये एक्शन हो चुका है। रेज़िस्टेंस का कहना है कि उन्हें संत के घर में पहले से IED मिल रहे हैं, जिसमें डिफ्यूज़ करने के लिए ब्लास्ट करना शामिल है। इसी के चलते ये घर गिर गए हैं।

परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के घर गिराने के साथ ही स्टॉल ने पहलगाम में आकर मशगूल होकर भी कार्रवाई तेज कर दी है। कश्मीर से लगभग 2000 लोग शासन में चले गये। इनमे नौकरानी से हमदर्दी होटल वाले, पूर्व कामगार और श्रमिक श्रमिक शामिल हैं। आपकी पूछताछ चल रही है।

पुलिस ने 2 साजिस्टरों को भी गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले इलेक्शन की फोटो और सेक्रेटरी जारी की जा चुकी हैं। फर्स्टगाम मराठा के विषय में ₹20 लाख के प्रोत्साहन की भी घोषणा की गई है। ऑनलाइन सर्च में लगातार सर्च ऑपरेशन हो रहे हैं।

22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में एक टूरिस्ट स्पॉट पर इस्लामिक ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। संत की हत्या से पहले ये पुष्टि हुई थी कि मरने वाले हिंदू हैं या नहीं। इस हमले में एक बदमाश से भी कई लोग घायल हो गए।