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कांग्रेस पर बृजभूषण के 11 आरोप : मेरे बाबा को मार डाला, घर गिरा दिया, एनकाउंटर की कोशिश

जब से सोनिया गाँधी को परिवार भक्तों ने पार्टी अध्यक्ष बनाया कांग्रेस का ग्राफ निरंतर नीचे गिरता जा रहा है। और इस गिरते ग्राफ को आगे बढ़ा है राहुल गाँधी और प्रियंका वाड्रा(गाँधी), जिसे मंद बुद्धि परिवार भक्त नहीं समझ रहा है। जिस परिवार भक्त इस कटु सच्चाई को समझ परिवार से दूरी बना ले लेंगे, कांग्रेस सत्ता तो नहीं, हाँ एक मजबूत विपक्ष जरूर बनकर उभरेगी, अन्यथा वह दिन भी अब अधिक दूर नहीं, जब कांग्रेस से कहीं अधिक वर्चस्व क्षेत्रीय पार्टियों का होगा और कांग्रेस को उनसे गठबंधन कर अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ना पड़ेगा। 

बृजभूषण पर महिला पहलवान के जिस यौन शोषण को मुद्दा बनाकर उस महिला पहलवान के कंधे बन्दूक चलाई गयी, अब प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस को ही नुकसान देने जा रही है। अब देखना यह है कि बृजभूषण कांग्रेस पर लगाए आरोपों को किस तरह भुनाते है? और जंतर मंतर पर हुए जमावड़े का हिस्सा बने कितने लोग बृजभूषण के पीछे खड़े होकर कांग्रेस पर ही पलटवार करते हैं। कांग्रेस को नहीं मालूम कि यौन शोषण के पुराने मुद्दे को उछाल कर समाज में उस महिला को बेइज्जत किया है। देग में बहुत चावल होते है, लेकिन एक ही चावल को लेकर देखा जाता है कि पका है या नहीं। यानि जब India TV पर परिचर्चा के दौरान एंकर सौरव शर्मा ऐसे प्रश्न करते हैं जैसे वह कोई एंकर न होकर कोई वकील या जज हैं। बेशर्मों की तरह सौरव ऐसे प्रश्न कर रहे थे जो कोर्ट की चार दीवारी में किए जाते हैं, ऐसे खुले में नहीं। क्या उस पीड़ित महिला का कोई सम्मान नहीं? 
कैसरगंज से भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को खुली चुनौती दी है। बता दें कि दिल्ली पुलिस द्वारा न्यायालय में दायर आरोप-पत्र में WFI अध्यक्ष द्वारा महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का मामला चलाए जाने की बात कही गई है, जिसके बाद उन्हें समन किया गया। इसके बाद प्रियंका गाँधी ने ट्वीट कर इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप रहने का आरोप लगाया था। अब भाजपा सांसद ने एक नोट के जरिए निशाना साधा है।

उन्होंने प्रियंका गाँधी के ट्वीट को देश को गुमराह करने का षड्यंत्र बताते हुए कहा कि पुलिस की जाँच रिपोर्ट किसी को अपराधी नहीं बनाता, ये अधिकार न्यायालय का है और वहाँ अपनी बात रखने का अधिकार संविधान देता है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी और कांग्रेस पार्टी को न्यायपालिका में भरोसा नहीं है, इसीलिए वो मीडिया ट्रायल चाहती हैं। उन्होंने इतिहास की कई घटनाएँ गिनाते हुए बड़ा आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा उनके और उनके परिवार के खिलाफ साजिश रची है।

महिला पहलवानों द्वारा यौन शोषण के आरोपों से पहले की 10 घटनाएँ उन्होंने उदाहरण के रूप में गिनाई हैं। पहली घटना उन्होंने अपने दादा चंद्रभान सिंह का उदाहरण देते हुए बताया है कि वो कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे, लेकिन रहस्यमयी परिस्थितियों में अस्पताल में उनकी मौत कांग्रेस की साजिश थी। इसी तरह उन्होंने 1974 में कांग्रेस सरकार द्वारा उनका घर गिराए जाने और उनके परिवार वालों को जेल में बंद करने का आरोप भी लगाया।

सांसद ने तीसरी घटना का जिक्र किया है आपातकाल के दौरान का। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पूर्वांचल में उनके वजूद को अपने लिए चुनौती मानती है, इसीलिए पार्टी नेताओं के दबाव में उन पर गैंगस्टर एक्ट और IPC की धाराओं में 3 दर्जन से अधिक केस इसीलिए कर दिए गए क्योंकि उन्होंने इमरजेंसी का विरोध किया था। उन्होंने 1980 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उन पर ऑटोमैटिक हथियारों से प्राणघातक हमला हुआ था, जिसमें वो तो बच गए लेकिन उनके सहयोगी की मौत हो गई।

उन्होंने याद दिलाया है कि तब केंद्र और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ही सत्ता में थी। उन्होंने दावा किया है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के आदेश के बाद उनका एनकाउंटर करने का प्रयास भी किया गया था, लेकिन भारी जनसमर्थन के कारण ये साजिश विफल हो गई। उन्होंने छठा आरोप लगाया है कि 1989 के विधानसभा चुनाव में वो हारे नहीं थे, बल्कि कांग्रेस ने साजिश कर के 4 वोटों से उन्हें हरवाया था और उनके राजनीतिक सफर को रोकने का प्रयास किया था।

1989 में राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी पहली गिरफ़्तारी का ठीकरा भी उन्होंने कांग्रेस पर ही फोड़ा है। 8वीं घटना का जिक्र उन्होंने 1992 का किया है, जब बाबरी का ढाँचा गिराया गया और उन्हें भी केंद्र सरकार के इशारे पर गिरफ्तार किया गया था। साथ ही 1995 में टाडा लगा कर उन्हें देशद्रोही साबित करने की कोशिश की गई, ये आरोप भी उन्होंने लगाया है। उन्होंने बताया है कि 2004 में एक दुर्घटना को हत्या बता कर उन्हें उसमें फँसाया गया, लेकिन CBI ने उन्हें क्लीन-चिट दी।

झूठ की तारीफ
सच का मज़ाक
कुछ ऐसा है आजकल
कांग्रेस का मिजाज.....
मेरे जीवन का सच.......
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बृजभूषण शरण सिंह ने इन 10 घटनाओं के अलावा 11वें बिंदु के रूप में ताजा प्रकरण की बात की है। उन्होंने पहलवानों वाले प्रकरण में प्रियंका गाँधी और कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा के शामिल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो देश की कानून व्यवस्था पर यकीन रखते हैं। उन्होंने चुनौती दी है कि प्रियंका गाँधी ट्विटर-ट्विटर खेलना बंद करें और उनके खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ कर दिखाएँ। उन्होंने लिखा कि जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है।

धरना देकर पहलवान खेल संघ के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं करवा सकते: भारत सरकार का सीमित दायरा, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति तय करती है नीतियाँ

                                             खेल महासंघ (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार- हिंदुस्तान)
भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवान दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं। महिला पहलवानों ने WFI चीफ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। अब वे उनकी गिरफ्तारी की माँग कर रहे हैं।

पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद POCSO ऐक्ट तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। इसलिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पहलवानों ने उन्हें संसद की सदस्यता छोड़ने की भी माँग की है। उन्होंने सरकार पर भाजपा सांसद सिंह को बचाने का आरोप लगाया है।

सरकार खेल मामलों में और उसके प्रबंधन में कितनी शामिल है, इसको लेकर हम कुछ तथ्य आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे वर्तमान स्थिति को समझने में मदद मिलेगी कि खेलों में सरकार की कितनी भूमिका है।

सरकार खेलों के प्रबंधन में शामिल नहीं 

भारत में खेलों का प्रबंधन संबंधित राष्ट्रीय खेल संघों द्वारा किया जाता है, जो स्वतंत्र निकाय होते हैं। ये प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, विभिन्न स्तरों पर राज्य या देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए खिलाड़ियों का चयन करते हैं और विभिन्न हिस्सों में खेलों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

सरकार देश के इन खेल संघों की मदद करती है, ताकि उनके आयोजनों और संचालन को सुगम बनाया जा सकते। इसके अलावा, खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण करना और खेल पुरस्कार देना सरकार की भूमिका के तहत आता है। इसके अलावा, सरकार का विशेष हस्तक्षेप नहीं रहता है।

खेल संघ स्वायत्त गैर-सरकारी निकाय

संबंधित राष्ट्रीय खेल संघ स्वायत्त निकाय हैं, जो आमतौर पर BCCI की तरह ही भारत में सोसायटी के रूप में पंजीकृत होते हैं। इन संघों के प्रशासन या सदस्यों की नियुक्ति में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। सिर्फ संपर्क अधिकारियों को खेल मंत्रालय नियुक्त करता है, जो परामर्श से नियुक्त किए जाते हैं।

इन राष्ट्रीय संघों के बाद राज्य स्तर के खेल संघ आते हैं, जिनमें से सभी के अपने नियम, उप-कानून होते हैं। इन राज्य खेल संघों के अपने स्वयं के खेल संविधान या चार्टर होते हैं, जो उनके कामकाज और प्रबंधन में मार्गदर्शन का काम करते हैं।

कोई भी बना सकता है खेल महासंघ

यदि आप ऐसे लोगों के समूह हैं, जो किसी खेल से जुड़े हैं और आपको लगता है कि यह खेल भारत में प्रचार के लायक है तो आप एक महासंघ बना सकते हैं। हालाँकि, यह स्वचालित रूप से आपको कोई विशेषाधिकार नहीं देता है। कुछ विशेषाधिकार प्राप्त करने के लिए इसे संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल महासंघ से संबद्ध होना जरूरी है।

जैसे कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ फीफा (FIFA) से संबद्ध है। यदि संबंधित अंतर्राष्ट्रीय खेल संघ IOC (अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति) से संबद्ध है तो आपका संघ IOA (भारतीय ओलंपिक संघ) का सदस्य बनने और सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेल संघ के रूप में मान्यता प्राप्त करने के योग्य हो जाता है।

मान्यता प्राप्त खेल संघों को सरकार से मिलती है सहायता

सरकार खेलों के प्रचार और विकास के लिए काम करती है। खेल मंत्रालय विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के खेल संघों के आवेदन का आकलन करता है और उन्हें मान्यता देता है। इसके बाद वे वित्तीय अनुदान (विभिन्न योजनाओं के तहत) और अन्य सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

इसके तहत खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और विकास के लिए स्टेडियम उपलब्ध कराने के साथ-साथ खेल उपकरण जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का उपयोग करने की अनुमति शामिल है। समय-समय पर इन खेल संघों को सरकार अन्य प्रकार की सुविधाएँ भी प्रदान करती है।

गैर-ओलंपिक खेल संघों को भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो सकती है

यदि राष्ट्रीय खेल संघ IOA से संबद्ध हैं तो उसे सरकार से मान्यता प्राप्त करना आसान होता है। हालाँकि, यह अनिवार्य शर्त नहीं है। गैर-ओलंपिक खेल संघ भी मान्यता ले सकते हैं।

साल 2016 में 49 राष्ट्रीय खेल संघों को मान्यता दी गई। इनमें ‘रस्साकशी’ और ‘बॉडी बिल्डिंग’ जैसे गैर-ओलंपिक खेल भी शामिल हैं। खो-खो और कबड्डी गैर-ओलंपिक खेलों के लोकप्रिय उदाहरण हैं, जिन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और वे सरकार से सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।

BCCI ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ बनने के लिए आवेदन नहीं किया

क्रिकेट अन्य गैर-ओलंपिक खेलों से अलग है। क्रिकेट के लिए राष्ट्रीय खेल संघ के तौर पर BCCI ने कभी भी सरकार से मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया। यही कारण है कि वह तर्क देता है कि उसे RTI के दायरे से बाहर रखा जाए।

BCCI का तर्क है कि वह उसे सीधे सरकारी सहायता नहीं मिलती है। इसलिए RTI में दायरे में नहीं आने चाहिए। साल 2011 में तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में पंजीकरण कराने के लिए कहा था, लेकिन BCCI ने ऐसा नहीं किया।

IOA से संबद्ध खेल महासंघों को खिलाड़ियों और अधिकारियों को आयोजनों में भेजने का अधिकार

कई लोगों के विचारो के विपरीत, सरकार खिलाड़ियों और सहायक कर्मचारियों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में न तो चुनती है और न ही भेजती है। भारत में IOA खेल आयोजनों के सरकार और स्थानीय संघों के साथ मिलकर काम करता है।

IOA एक गैर-सरकारी स्वायत्त निकाय है जो राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों या ओलंपिक जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों के लिए खिलाड़ियों को चुनने के लिए सदस्य खेल महासंघ के साथ काम करता है। भारतीय ओलंपिक संघ IOC का सदस्य है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वायत्त निकाय है।

खेलों का आयोजन और प्रबंधन विभिन्न स्टेक होल्डर द्वारा किया जाता है

चाहे ओलंपिक हो या राष्ट्रमंडल जैसे खेल, इसमें एक आयोजन समिति होती है। इस समिति में IOA या IOC जैसे शीर्ष निकायों के सदस्य शामिल होते हैं।

इसके अलावा, स्थानीय सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए नगरपालिका जैसे स्थानीय प्राधिकरण, सुरक्षा के लिए स्थानीय सरकार और मंजूरी एवं बुनियादी सुविधाओं के लिए स्थानीय प्राधिकरण के सदस्य इसमें शामिल होते हैं। अनुदान सरकारी और गैर सरकारी स्रोतों से आता है। संबंधित खेल संघ भाग लेने वाले खिलाड़ियों और दल के मामलों का प्रबंधन करते हैं।

सरकार खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती

भले ही संघों को सरकार से सहायता प्राप्त हो, लेकिन सरकार के पास उनके प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती है। हालाँकि, वास्तव में इसके विपरीत होता है।

उदाहरण के लिए जब IOC को पता चला कि भारत सरकार IOA के चुनाव में हस्तक्षेप कर रही है तो साल 2012 में उसने IOA को निलंबित कर दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि अगर निलंबन वापस नहीं लिया जाता तो भारत ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाता।

खेल महासंघों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं IOA या अंतरराष्ट्रीय महासंघ

अगर कोई खेल महासंघ सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती, क्योंकि वे स्वतंत्र निकाय हैं। हालाँकि, सरकार चाहे तो उन्हें सहायता और अनुदान से वंचित कर सकती है।

दूसरी तरफ, IOA या उस खेल का अंतरराष्ट्रीय महासंघ संबंधित खेल महासंघ पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। उदाहरण के लिए, भारतीय मुक्केबाजी महासंघ को साल 2012 में उसके अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने निलंबित कर दिया था। वहीं, IOA ने साल 2008 में भारतीय हॉकी महासंघ को निलंबित कर दिया था।

सरकार खेलों के लिए नियम और कानून बना सकती है

सरकार खेल संघों के कामकाज या प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। हालाँकि, वह ऐसे नियम और कानून बना सकती है, जिनका पालन करने के लिए इन संघों को कहा जा सकता है।

हालाँकि, ये संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संघों के नियमों और उप-नियमों के विपरीत नहीं होने चाहिए, अन्यथा राष्ट्रीय संघों को अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों से निलंबित होने का जोखिम बना रहेगा। उदाहरण के लिए, फीफा ने कुवैत पर उस वक्त प्रतिबंध लगा दिया, जब उसे लगा कि इसके द्वारा पारित कानून खेल संघों की स्वायत्तता के लिए अच्छा नहीं है।

कई खेल निकाय और संघ राजनेताओं द्वारा नियंत्रित होते हैं 

सरकार भले ही खेल संघों के प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है, लेकिन यह भी सच है कि हर राजनीतिक दल के नेता किसी न किसी राष्ट्रीय खेल महासंघ या उससे संबद्ध निकायों के सदस्य होते हैं। कई नेता तो कई खेल संघों के सदस्य होते हैं।

1982 से पहले भारत के पास नहीं था युवा मामले एवं खेल मंत्रालय

युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय की स्थापना भारत ने साल 1982 के एशियाई खेलों की मेजबानी मिलने के बाद की थी। सरकार ने इन खेलों के लिए कुछ नए स्टेडियमों का निर्माण किया और कुछ पुराने का जीर्णोद्धार किया।

इसके बाद इन स्टेडियमों का प्रबंधन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) नामक संगठन बनाकर उसे स्थानांतरित कर दिया। खेल मंत्रालय और SAI को खेल महासंघों और ‘अखिल भारतीय खेल परिषद’ जैसे सलाहकार निकायों के परामर्श से विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढाँचे की निर्माण का काम सौंपा गया है।

रियो ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष पर रहने वाले USA में खेल मंत्रालय नहीं  

अमेरिका में कोई खेल मंत्रालय या केंद्रीय निकाय नहीं है। वहाँ खेलों के विकास की देखरेख करने का काम स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग है।

अमेरिका का यह विभाग स्थानीय निकायों और स्कूलों को खेलों पर खर्च करने की सलाह देता है। खेल भी अमेरिका में शिक्षा के साथ महत्वपूर्ण रूप से से जुड़ा हुआ है। वहाँ संगठित खेल आयोजन अधिकांश हाई स्कूलों और कॉलेजों का हिस्सा हैं।

‘FIR हो गई, सुरक्षा मिल गई’: सुप्रीम कोर्ट ने बंद की जंतर-मंतर वाले पहलवानों की फाइल, बजरंग पुनिया बोले- मेडल/अवॉर्ड लौटा देंगे; दिल्ली की सीमाओं पर अलर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 मई, 2023) को 3 महिला पहलवानों द्वारा दायर की गई याचिका को ये नोट करने के बाद बंद कर दिया कि दिल्ली पुलिस ने ‘भारतीय कुश्ती संघ (WFI)’ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़, जस्टिस PS नरसिम्हा और जस्टिस JB पार्डीवाला की पीठ ने कहा कि FIR दर्ज करने के लिए याचिका दायर की गई थी और अब जब ये हो गया है, प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

आगे किसी भी प्रकार की शिकायत या माँग के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जाने की सलाह भी दी है। पहलवानों की तरफ से पेश वकील नरेंद्र हुड्डा ने पूरी जाँच प्रक्रिया की निगरानी करने का अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे नकारते हुए कहा कि अन्य मुद्दों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट या मजिस्ट्रेट के समक्ष जाइए। दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ पीड़िताओं का बयान दर्ज किया है, बल्कि उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की है।

एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में जाँच आगे बढ़ रही है। उधर दिल्ली की सीमाओं पर फिर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। सभी सीमावर्ती जिलों के DCP को निर्देश दिया गया है कि वो विष सतर्कता बरतें। सेन्ट्रल दिल्ली की तरफ जाने वाली सड़कों पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं। सूत्रों से खबर मिली है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर पहलवानों का समर्थन करने पहुँच सकते हैं।

उधर प्रदर्शनकारी पहलवानों ने अब अपने मेडल्स लौटाने की भी घोषणा कर दी है। बजरंग पूनिया ने कहा कि अगर पहलवानों के साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा तो फिर हमे इन मेडल्स का क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है कि हम इन मेडल्स को लौटा कर एक सामान्य ज़िन्दगी जिएँ। उन्होंने सारे मेडल्स और अवॉर्ड्स भारत सरकार को लौटाने की घोषणा कर डाली। पहलवानों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उन्हें बुलाने की माँग की और कहा कि ये राजनीतिक मुद्दा नहीं है। उन्होंने IT सेल पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया।

खेल मंत्रालय के साथ पहलवानों की बैठक बेनतीजा, कहा – जब तक नहीं हटेंगे WFI अध्यक्ष, जारी रहेगा धरना


दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर बैठे पहलवानों के डेलीगेशन ने खेल मंत्रालय में बातचीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। पहलवान विनेश फोगाट ने मीडिया से कहा कि हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। बजरंग पुनिया ने कहा है कि हम सरकार से सकारात्मक आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। जब तक संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया जाता हमारा धरना जारी रहेगा। बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन के खिलाफ है, राज्य या केंद्र की सरकार से नहीं।

देश के कई बड़े पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ धरना दे रहे हैं। विनेश फोगाट ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। महिला खिलाड़ियों और महिला कोचों के साथ बदसलूकी और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जा रहा है।

मीडिया से बात करते हुए विश्व चैंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बातचीत में हमें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हम सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं और जब तक माँगे पूरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। विनेश फोगाट ने कहा कि हमारे पास लगाए गए आरोपों के सबूत हैं। विनेश ने आगे कहा कि फेडरेशन के अध्यक्ष ने गलत किया है। यदि उनपर कार्रवाई नहीं हुई तो हमें मजबूरन एफआईआर करवानी पड़ेगी।

विनेश ने कहा कि यौन शोषण के कारण यूपी की कुश्ती खत्म हुई है। पहलवान साक्षी मलिक ने कहा कि शोषित लड़कियों के फोन आ रहे हैं। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में दखल देकर न्याय की अपील करते हैं।

पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि हमारी लड़ाई फेडरेशन से है और हम इसे भंग करना चाहते हैं। बजरंग ने कहा कि राज्यों के कुश्ती संघ में भी उन्हीं के लोग बैठे हैं, हम चाहते हैं फेडरेशन भंग कर के नए सिरे से इसे बनाया जाए। बजरंग ने कहा कि खेल मंत्रालय के साथ बैठक में दिए गए आश्वासन से हम खुश नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि हमें हरियाणा की सरकार और देश की सरकार से कोई शिकायत नहीं है। सरकार हमें सपोर्ट करती है।

उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार से नहीं व्यक्ति विशेष है। हम तब तक धरने पर बैठे रहेंगे, जब तक फेडरेशन के अध्यक्ष को हटा कर इसे भंग करने की घोषणा नहीं कर दी जाती। बजरंग ने कहा कि अब तक 6 लड़कियों ने अपने साथ गलत होने का दावा किया है।

आपको बता दें कि बृजभूषण सिंह ने पहलवानों पर ही मनमानी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “ये चाहते हैं कि हम ओलंपिक विजेता हैं, हमारा ट्रायल ना कराया जाए और ट्रायल कराया भी जाए तो पहले नेशनल के विजेता का ट्रायल हो, फिर जो जीत कर आए उनके साथ फाइनल इनका कराया जाए। इससे इन्हें दिक्कत हो रही है। वहीं गुस्सा इनका आज फूटा है।”

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जहाँ तक इन खिलाड़ियों का सवाल हैं ये ओलंपिक पदक विजेता हैं। उसमें हमारा भी सहयोग है। ओलंपिक के बाद इन्होंने एक भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया और सब सरकार की स्कीमों का फायदा ले रहे हैं। जब राष्ट्रीय प्रतियोगिता की बात आती है तो इनकी तबीयत खराब हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इनकी तबीयत ठीक हो जाती है। अभी फेडरेशन ने निर्णय लिया कि कोई भी विजेता हो उसे नेशनल खेलना होगा, अगर वे बीमार है तो उसका मेडिकल दे।”