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दिल्ली : लॉ छात्र से सड़क पर बदसलूकी करने वाले AAP विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी कोर्ट में दोषी करार

दिल्ली के मॉडल टाउन से आम आदमी पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को साल 2020 में एक लॉ छात्र को परेशान व बदसलूकी करने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अखिलेश पर आरोप था कि उन्होंने छात्र पर जातिगत टिप्पणियाँ की थीं।

विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने कहा, “अभियोजन ने आईपीसी की धारा 323 के तहत त्रिपाठी के अपराध को साबित कर दिया है और उन्हें उसी के लिए दोषी ठहराया गया है, जबकि उन्हें धारा 341/506 (1) आईपीसी और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम), 1989 की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत बरी किया गया है।”

इस मामले में अदालत ने इसी साल 16 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था और 10 दिना बाद यानी कि 26 मार्च को इस पर फैसला सुनाया गया। अब कोर्ट में आप नेता की सजा पर सुनवाई 13 अप्रैल 2023 को होगी। इस दौरान कोर्ट ने त्रिपाठी को 10 दिनों के भीतर अपनी संपत्ति और आय का हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।

यह पूरा मामला साल 2020 में हुए दिल्ली चुनाव से एक दिन पहले का है। शिकायतकर्ता संजीव कुमार ने कहा था कि 7 फरवरी 2020 की रात करीब 11:30 बजे वह अपने दोस्त राज किशोर के साथ कूड़ा फेंककर अपने घर जा रहे थे तभी अखिलेश त्रिपाठी ने उन्हें अपने समर्थकों के साथ उन्हें झंडेवालान चौक पर रोका और उसके बाद उनकी स्कूटी की चाबी छीन, बुरी तरह पीटा। संजीव का कहना था कि इस दौरान उनपर जातिगत टिप्पणियाँ भी हुईं। हालाँकि कोर्ट ने अखिलेश को इस मामले में दोषी नहीं पाया और सिर्फ धारा 323 के तहत उन्हें दोषी पाया।

हैदराबाद : 10 साल में 5000 बार बलात्कार, 139 आरोपित; दर्ज कराई 42 पन्नों की FIR

25 साल की पीड़िता से 5000 बार रेप
25 वर्षीय पीड़ित महिला --प्रतीकात्मक चित्र 
भारत में रोजाना औसतन 90 से अधिक बलात्कार के मामले दर्ज किए जाते हैं। पर इस तरह का मामला शायद ही कभी सामने आया हो। हैदराबाद के पंजागुट्टा थाने में 25 साल की पीड़िता ने खुद के साथ करीब 5000 बार रेप किए जाने की शिकायत गुरुवार (20 अगस्त 2020) को दर्ज कराई।
42 पन्नों की एफआईआर में 139 आरोपितों का जिक्र है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह संख्या 143 बताई गई है। इनमें से 138 आरोपित नामजद और 5 अज्ञात हैं। कुछ म​हिलाओं के भी नाम हैं। आरोपितों में वामपंथी छात्र संगठन के नेता, मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग, कारोबारी और पीड़िता के पूर्व पति के कुछ रिश्तेदार भी हैं।
पीड़िता की शादी काफी कम उम्र में जून 2009 में ही हो गई थी। शादी के करीब तीन महीने बाद ही ससुराल वाले उसे यौन और शारीरिक प्रताड़ना देने लगे। इससे तंग आकर दिसंबर 2010 में उसने तलाक ले लिया। इसके बाद वह अपने पिता के घर चली गई और पढ़ाई शुरू की।
प्रभासाक्षी की रिपोर्ट के अनुसार मायके में एक व्यक्ति से धोखा खाने के बाद पीड़िता हैदराबाद आ गई। यहॉं अलग-अलग इलाकों में उसके साथ रेप किया गया।
इस दुःखद और हैरानी भरे समाचार में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ होने की आशंका व्यक्त की जा रही है, जैसाकि ANI के ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं। बलात्कार जो वास्तव में अपने आपमें ही किसी ग्लानि से कम नहीं। परन्तु इतने वर्षों तक किस कारण पीड़िता बर्दाश्त कर रही थी? 10 वर्ष में 5000 बार बलात्कार वाकई चौकाने वाला समाचार है। अपराध आखिर अपराध ही होता है।


यौन शोषण के दौरान कुछ लोगों ने आपत्तिजनक स्थिति में उसका वीडियो बनाकर पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल किया। इस दौरान उसे प्रताड़ित करते हुए मारने की धमकी भी दी गई। यहॉं तक कि एसिड अटैक और पेट्रोल डालकर जलाने की धमकी भी दी गई।
पीड़िता के मुताबिक, “ये लोग ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाते हैं। उसकी तरह ही कई लड़कियॉं इनके द्वारा प्रताड़ित की गई हैं।” डेक्कन हेराल्ड ने पंजागुट्टा थाने के एसएचओ के हवाले से बताया है कि पीड़िता का बयान दर्ज कर मेडिकल जॉंच करवाया गया। उसके दावों की पुष्टि के लिए जॉंच जारी है।
पीड़िता के अनुसार कई बार उसके साथ गैंगरेप भी किया गया। उसे गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। ड्रग्स दिया गया। नग्न नाचने को विवश किया गया और उसके शरीर को सिगरेट से दाग दिया गया। इनकार करने पर आरोपितों ने हथियारों से भी उसे धमकाया।
पीड़िता का दावा है कि डर की वजह से वह शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। उसने अपनी आपबीती एक गैर सरकारी संगठन (NGO) को बताई। इसके बाद उनकी मदद से पुलिस से शिकायत की।
28 नवंबर 2019 की सुबह हैदराबाद के बाहरी इलाके से एक महिला वेटनरी डॉक्टर की जली हुई लाश मिली थी। स्कूटी खराब होने पर मदद के नाम पर चार लोगों ने गैंगरेप के बाद उन्हें जला दिया था। बाद में पुलिस ने आरोपितों को एक मुठभेड़ में मार गिराया था।
हाल ही में इजरायल से भी रेप की एक खौफनाक घटना सामने आई थी। यहॉं के इलट (Eilat) शहर स्थित एक होटल में 30 लोगों ने लाइन लगाकर एक 16 साल की लड़की का रेप किया और वीडियो बना ली। आरोपित एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे और लड़की की मदद के बहाने उसके साथ रेप किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया था।

'ये मोदी सरकार का छलावा है' : सवर्ण आरक्षण पर मायावती

BSP Chief Mayawati
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सवर्ण आरक्षण पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा, उनकी पार्टी आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल का समर्थन करेगी। साथ ही उन्होंने कहा, ये मोदी सरकार का छलावा है। सरकार ने पहले ये फैसला क्यों नहीं लिया। मायावती ने कहा, बीएसपी चीफ ने एएनआई से कहा, लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया ये फैसला हमें सही नीयत से लिया गया फैसला नहीं लगता है। चुनावी स्टंट लगता है। राजनीतिक छलावा लगता है। अच्छा होता अगर बीजेपी अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले नहीं बल्कि और पहले ले लेती।
केंद्रीय कैबिनेट ने आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में 10% आरक्षण देने को जनवरी 7 को मंजूरी दे दी।  सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट ने ईसाइयों व मुस्लिमों सहित 'अनारक्षित श्रेणी' के लोगों को नौकरियों व शिक्षा में 10% आरक्षण देने का फैसला लिया। इसका फायदा 8 लाख रुपए वार्षिक आय सीमा और करीब 5 एकड़ भूमि की जोत वाले गरीब सवर्णो को मिलेगा।View image on Twitter

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BSP chief Mayawati to ANI: Lok Sabha chunaav se pehle liya gaya ye faisla humein sahi niyat se liya gaya faisla nahi lagta hai, chunavi stunt lagta hai, rajnitik chalaava lagta hai, acha hota agar BJP apna karyakaal khatam hone se thik pehle nahi balki aur pehle le leti.
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित कदम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मौजूदा 50% आरक्षण में दिक्कत नहीं पैदा करेगा। सूत्रों के अनुसार, 'इस कोटा में किसी भी आरक्षण के प्रावधान के तहत नहीं आने वाले वर्गो जैसे ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर, जाट, गुज्जर, मुस्लिम और ईसाई शामिल होंगे।'
कांग्रेस ने आरक्षण की मंजूरी देने के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया और जानना चाहा कि नौकरियां कहां हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि इस फैसले के पीछे का इरादा जनता का वास्तव में कल्याण करने के बदले राजनीति ज्यादा है।
नेता समाज समझता है की जनता पागल और मुर्ख है। लेकिन सवर्ण इतना मुर्ख नहीं, जितना समझा जा रहा है। मतदान में NOTA का प्रयोग पहले से अधिक होगा, क्योकि केवल10% आरक्षण देकर जिस आग को बुझाने का प्रयास किया गया है, वह और अधिक भड़केगी। देखिए आयकर की क्या सीमा है, और 8 लाख वार्षिक आय वालों को आरक्षण? है ना कितना हास्यप्रद? अभी सम्पन्न हुए राज्यों में मिली हार से सरकार इतनी विचलित हो गयी है की उचित अथवा अनुचित का चिंतन करने का भी समय नहीं। 
लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का बड़ा दांव, गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने का प्रस्ताव
लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से ऊपर और अधिक होगा। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक कल संसद में ला सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 50% से बढ़कर 60% हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता। अभी तक 22.5% अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%), ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% है।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आरक्षण नाग इतना भयंकर और खतरनाक है, जिसने…
मोदी सरकार का यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। समझा जाता है कि सरकार आरक्षण का मरहम लगा गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है। भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

भारत से आरक्षण की आग कब बुझेगी?

Reservation for upper caste
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आरक्षण नाग इतना भयंकर और खतरनाक है, जिसने 56 इंच सीने को भी डस लिया। विश्व में भारत ही शायद एकमात्र देश है, सम्भव है मेरा ज्ञान अपरिपक्व हो, जहाँ आरक्षण और जातियों को आधार बनाकर चुनाव लड़े जाते हैं। समझ नहीं आता भारत से आरक्षण की आग कब बुझेगी?
नेता समाज समझता है की जनता पागल और मुर्ख है। लेकिन सवर्ण इतना मुर्ख नहीं, जितना समझा जा रहा है। मतदान में NOTA का प्रयोग पहले से अधिक होगा, क्योकि केवल10% आरक्षण देकर जिस आग को बुझाने का प्रयास किया गया है, वह और अधिक भड़केगी। देखिए आयकर की क्या सीमा है, और 8 लाख वार्षिक आय वालों को आरक्षण? है ना कितना हास्यप्रद? अभी सम्पन्न हुए राज्यों में मिली हार से सरकार इतनी विचलित हो गयी है की उचित अथवा अनुचित का चिंतन करने का भी समय नहीं। 
लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का बड़ा दांव, गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण देने का प्रस्ताव
लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से ऊपर और अधिक होगा। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कोटा पर संविधान संशोधन विधेयक कल संसद में ला सकती है। ऐसे में आरक्षण का कोटा 50% से बढ़कर 60% हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार 50% से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता। अभी तक 22.5% अनुसूचित जाति (दलित) और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं (अनुसूचित जातियों के लिए 15%, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7.5%), ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% है।
मोदी सरकार का यह फैसला 2019 के लोकसभा चुनावों में उसके लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में मिली भाजपा की हार की एक वजह एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी भी बताई जा रही है। समझा जाता है कि सरकार आरक्षण का मरहम लगा गरीब सवर्णों को अपने पाले में करने का दांव खेला है। भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के सरकार के फैसले का स्वागत किया है।
जानें आखिर सवर्णों में किसे-किसे ये आरक्षण मिल सकता है:
  • जिसकी सलाना इनकम 8 लाख रुपए या इससे कम है
  • जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है
  • जिसका 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है
  • कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को
  • राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा 
  • आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा
  • इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा
  • आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है
लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट में फैसला किया है कि आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस आरक्षण की खास बात यह है कि यह  50 फीसदी आरक्षण की सीमा के ऊपर होगा और इसके लिए मंगलवार को संविधान संशोधन लाया जाएगा। ध्यान देने वाली बात यह कि मंगलवार को ही शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है। इस मामले पर तमाम राजनीतिक दलों  की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। 
See last two tweets re reservation 4forwards? Qs—did u nt think of this for 4 yrs 8 mths? so obviously thought of as election gimmick 3mths b4 model code! (3) u know u cannot exceed 50% maxima so it is done only to posture tht u tried unctal thing (4) do u hv majority 4ctal am?
कैबिनेट के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस की तरफ से पहली प्रतिक्रिया वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की आई है। सिंघवी ने कहा, 'सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने का फैसला किया है। आपने इसके लिए 4 साल 8 महीने का इंजार किया? तो यह निश्चित रूप से एक चुनावी छलावा है वो भी ऐसे समय में जब आचार संहिता लगने में केवल 3 महीने बचे हैं। आप जानते हैं कि आप सीमा को अधिकतम 50 फीसदी ही बढ़ा सकते हैं।'
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा,  'केंद्र सरकार का यह कदम सराहनीय है। इसकी मांग काफी लंबे समय से चल रही थी। यह सवर्णों के  लिए एक ऐतिहासिक कदम है।' 
Reservation for General Categoryभाजपा सांसद और दलित नेता उदित राज ने कहा कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे। हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो साफ़ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है।'
शिवसेना ने भी इस पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह इस बिल का समर्थन करेगी। शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने कहा, 'हम इस बिल का पूरा समर्थन करते हैं। यह बाल ठाकरे का विचार था कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी आरक्षण मिले।' पाटीदारों को आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले हार्दिक पटेल ने कहा,  'मोदी सरकार ने चुनाव से पहले एक लॉलीपॉप दिया है।'
एआईएएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'दलितों के साथ ऐतिहासिक अन्याय को सही करना आरक्षण का मतलब है। गरीबी उन्मूलन के लिए कोई भी विभिन्न योजनाएं चला सकता है लेकिन आरक्षण न्याय के लिए है। संविधान आर्थिक आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है।'
आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि भारत सरकार को पहले जातिगण जनगणना के आंकड़े सामने लाने चाहिए जिससे पता चल सकेगा कि कौन सी जातियां क्या काम करती हैं।
सीपीआई के डी राजा ने सुप्रीम कोर्ट ने पहले से आरक्षण पर एक कैप लगाई है,  राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से भाजपा को जो रिपोर्ट्स मिल रही थी उसके आधार पर भाजपा ने यह फैसला लिया है। लोकसभा चुनाव में विधानसभा चुनाव की भरपाई करने के लिए यह कदम उठाया गया है।View image on Twitter

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Harish Rawat,Congress on 10% reservation approved by Cabinet for economically weaker upper castes: 'Bohot der kar di meherbaan aate aate', that also when elections are around the corner. No matter what they do, what 'jumlas' they give, nothing is going to save this Govt
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, 'बहुत देर कर मेहरबॉं आते-आते। वो भी तब, जब चुनाव नजदीक है। सरकार कुछ भी कर ले, कोई भी फैसला इनको नहीं बचा सकता।
एनसीपी ने सशर्त समर्थन देने का ऐलान किया है, एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, 'हम बिल का समर्थन करेंगे लेकिन शर्त ये है कि सरकार में संशोधन लाए।' जिनको पहले से आरक्षण मिला हुआ है उनको दिया जा रहा है।
भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'इसकी आवश्यकता पहले से थी, गरीब और सवर्णों को आरक्षण मिल रहा है  मेरी नजर में यह सरकार का क्रांतिकारी कदम है।'

संसद में SC-ST कानून में संशोधन न्यायसंगत नहीं--राजा भैया

बतौर निर्दलीय विधायक 25 वर्ष पूरा करने पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपना अलग दल बना लिया है। लखनऊ में 30 नवंबर को अपनी पार्टी जनसत्ता दल की रैली की तैयारी में लगे राजा भैया ने आज मीडिया से कहा कि एससी-एसटी एक्ट का विरोध करने के लिए उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली है।
प्रतापगढ़ के कुंडा से पिछले लगातार पांच चुनाव से निर्दलीय विधायक के रूप सदन में पहुंचने वाले पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने आज अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया। इस अवसर पर उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद में एससी-एसटी एक्ट में संशोधन न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रमोशन में भी आरक्षण प्रतिभाओं के साथ अन्याय है। अगर एक बार किसी को आरक्षण का लाभ मिला तो आगे उसको लाभ नही मिलना चाहिए। हमारी पार्टी इसके खिलाफ मोर्चा खोलेगी।
उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी जातीय आधार पर प्रमोशन के खिलाफ है। हम मानते हैं कि योग्यता प्रमोशन का आधार होनी चाहिए। दलित और गैर दलित के बीच मिलने वाली सरकारी सुविधाओं में भेदभाव हो रहा है, जिसका हम विरोध करेंगे। दलित और गैर दलित के बीच भेदभाव हो रहा। राजा भैया ने कहा कि कुछ मुद्दे ऐसे है जिसपर सियासी पार्टिया सदन और बाहर कही भी नही बोलते। ऐसा ही एक मुद्दा है एससी-एसटी एक्ट। एक्ट। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के समय एससी-एसटी एक्ट बना और समय के साथ इसमे जटिलता आती गई।
प्रदेश में 25 वर्ष से राजनीतिक पारी खेल रहे राजा भैया के मुताबिक पार्टी के 80 फीसदी समर्थक चाहते थे कि नई पार्टी का ऐलान हो इसलिए उन्होंने ये बड़ा कदम उठाया है। राजा भैया अब 30 नवंबर को लखनऊ के रमाबाई मैदान में अपनी पार्टी की रैली अयोजित करेंगे। 30 नवंबर को राजा भैया के राजनीति में 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस रैली में अपने समर्थकों के बीच ही वो अपनी पार्टी के गठन करेंगे। इसी साल मार्च में राज्य सभा की दस सीटों के लिए चुनाव हुए थे। बीजेपी ने 9, एसपी और बीएसपी ने एक एक उम्मीदवार उतारे थे। दबंग रघुराज प्रताप सिंह और उनके समर्थक विधायक विनोद सरोज ने बीजेपी की लाज बचा ली। समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ कर दोनों विधायकों ने बीजेपी के लिए वोट किया। बीएसपी का उम्मीदवार हार गया।
लोकसभा चुनाव में उतार सकते हैं कैंडिडेट
माना जा रहा है कि राजा भैया लोकसभा चुनाव 2019 में अपने उम्मीदवार खड़े कर सकते हैं। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 26 वर्ष की उम्र में 1993 में पहली बार कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। इसके बाद से वे लगातार इसी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल करते आ रहे हैं। वह तो सिर्फ एक सीट से ही चुनाव लड़ते हैं लेकिन आसपास की आधा दर्जन सीटों पर उनकी दखल है। ऐसे में उनके अलग पार्टी बनाने के फैसले के उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े मायने हैं।
उन्होंने कहा कि भले ही हमारी पार्टी नई है, लेकिन हमारी पार्टी नई है लेकिन भरोसा है कि हम अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच जगह बनाएंगे। उन्होंने कहा कि वह लगातार जीतते आए हैं। जाहिर है कि जनता को उन पर विश्वास है इसलिए वह उन्हें चुन रही है। इस लिए अब वह चाहते है कि पार्टी बनाकर जनता की सेवा करें। उन्होंने बताया कि पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए वह जल्द ही चुनाव आयोग के पास जाएंगे। उन्होंने बताया कि जनसत्ता पार्टी, जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी व जनसत्ता दल, तीन नाम चुनाव आयोग को भेजे गए हैं। पार्टी सिंबल के लिए चुनाव आयोग को लेटर लिखा गया है। राजा भैया का अच्छा खासा प्रभाव प्रतापगढ़ और इलाहाबाद जिले के कुछ हिस्से में हैं। उनका छवि एक दबंग और क्षत्रिय नेता के तौर पर है। ऐसे में अलग पार्टियों के क्षत्रिय विधायकों से उनके रिश्ते काफी बेहतर हैं।
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सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मियों के पदोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने सितम्....


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सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने सितम्बर 26 को फैसला सुनाया....

राजाभैया 30 नवंबर को लखनऊ में अपने सम्मान समारोह के दौरान अलग दल की घोषणा करेंगे। एमएलसी कुंवर अक्षय प्रताप सिंह ने चित्रकूट में कहा कि नई पार्टी का नाम जनसत्ता दल होगा। उन्होंने कहा यह दल गरीबों, मजलूमों व आम जन की आवाज बनेगा। रजत जयंती समारोह में भारी जनसैलाब जुटाकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने में जुटे राजा भैया के करीबी विधान परिषद के सदस्य अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी धर्मनगरी चित्रकूट के दौरे पर पहुंचे। यहां अक्षय प्रताप ने कहा कि आम जनता के स्वाभिमान व सम्मान के लिए राजा भैया नई पार्टी का गठन कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में किसी दल के साथ गठबंधन से उन्होंने इंकार किया।

कथावाचक देवकीनदंन ठाकुर की सियासत में एंट्री, 29 को पार्टी

MP: कथावाचक देवकीनदंन ठाकुर की सियासत में एंट्री, 29 को पार्टी, चिह्न का करेंगे ऐलानहाल में एससी/एसटी एक्‍ट में हुए संशोधन के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर महाराज के नेतृत्‍व वाले अखंड भारत मिशन ने सूबे की सभी 230 सीटों पर प्रत्‍याशी उतारने का ऐलान किया है. एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने के लिए 'अखंड भारत मिशन' नाम का एक संगठन बनाया गया है और देवकीनंदन ठाकुर को इस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है.
दैनिक भास्‍कर की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव लड़ने के फैसले के साथ ही देवकीनंदन ठाकुर 29 अक्‍टूबर को नई पार्टी के नाम और उसके चिह्न की घोषणा करेंगे. उल्‍लेखनीय है कि अखंड भारत मिशन एससी/एसटी एक्‍ट में हुए किए गए संशोधन का विरोध करता है. इसकी मांग है कि बिना जांच के तुरंत गिरफ्तारी का जो प्रावधान एक्‍ट में है, उसे हटाया जाए.
देवकीनंदन ठाकुर
इस सिलसिले में एक्‍ट के विरोध के चलते पिछले‍ दिनों 11 सितंबर को आगरा में देवकीनंदन ठाकुर को गिरफ्तार भी किया गया था. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर देवकीनंदन ठाकुर के कई संदेश वायरल हो रहे हैं. जिनमें वह सवर्ण जातियों को एससी/एसटी समुदाय के लोगों के सामाजिक कार्यों का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं. हालांकि इन संदेशों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. इन संदेशों को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति दर्ज की जा रही है.
एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ देवकीनंदन ठाकुर ने आगरा के खंदौली में सवर्ण समाज की एक सभा का आयोजन किया था. प्रशासन ने कथा वाचक को इस आयोजन की अनुमति नहीं दी और उनके खंदौली में प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी.
उसके बाद 11 सितंबर की सुबह देवकीनंदन ठाकुर अपने समर्थकों के साथ आगरा के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस वहां पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले लाई. देवकीनंदन ठाकुर की गिरफ्तारी पर उनके समर्थकों में आक्रोश फैल गया और सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. देवकीनंदन ठाकुर ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कहा कि पुलिस ने खंदौली में उनके प्रवेश पर रोक लगाई थी और वे कानून का पालन करते हुए खंदौली नहीं गए, लेकिन आगरा में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, यह सरासर लोकतंत्र की हत्या है.
उसी दिन दोपहर बाद पुलिस ने देवकीनंदन ठाकुर को रिहा कर दिया. पुलिस ने उन्हें धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था और निजी मुचलका भरवाकर उन्हें रिहा कर दिया.
मिल रही जान से मारने की धमकियाँ 
अनुसूचित जाति-जनजाति (संशोधन) विधेयक का विरोध कर रहे भागवत कथावाचक देवकीनन्दन ठाकुर को अनजान नंबरों से फोन पर जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और सोशल मीडिया पर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. उनके ‘शांति सेवाधाम’ आश्रम के प्रबंधक गजेंद्र सिंह ने वृन्दावन कोतवाली में तहरीर देकर पुलिस से इस मामले की जांच करने और ठाकुर की सुरक्षा का आग्रह किया है. पुलिस ने इस संबंध में गत सितम्बर 13 को मामला दर्ज कर लिया. 
पुलिस अधीक्षक (नगर) श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि देवकीनन्दन ठाकुर के व्यवस्थापक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अनजान फोन कॉल और सोशल मीडिया के जरिए भागवताचार्य को गोली मारने तथा शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर देने जैसी धमकियां दी जा रही हैं. धमकी के कुछ ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड उनके पास हैं. उन्होंने बताया कि कोतवाली प्रभारी स्वयं इस मामले में जांच कर रहे हैं. गजेंद्र सिंह द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो-वीडियो क्लिप तथा फोन रिकॉर्ड के माध्यम से धमकी देने वालों के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है. जल्द ही वे लोग सलाखों के पीछे होंगे.
इससे पूर्व सितम्बर 12 को विदेश यात्रा पर रवाना होने से पूर्व देवकीनन्दन ठाकुर ने कहा, ‘‘मैं अब पीछे नहीं हटूंगा. इसी मुद्दे के लिए ‘अखण्ड भारत मिशन’ का गठन किया गया है. वस्तुतः हम व्यक्ति विशेष अथवा किसी समाज के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन यदि एक वर्ग का भला करने के चक्कर में दूसरों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, समाज को बांटने की कोशिश की जाती है तो उसका विरोध अवश्य किया जाएगा.’’ 

प्रमोशन में हो आरक्षण, हमारा संवैधानिक अधिकार हैं--रामदास अठावले, केंद्रीय मंत्री

सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने सितम्बर 26 को फैसला सुनाया। इस फैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट ने नागराज मामले में फैसले को सही बताया और उस फैसले पर फिर से विचार की जरूरत को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण देना जरूरी नहीं है, हालांकि अगर राज्य सरकार चाहे तो आरक्षण दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मामले को लेकर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करूंगा। अठावले ने कहा कि प्रमोशन में हो आरक्षण, यह हमारा संवैधानिक अधिकार हैं। जिसको लेकर मैं पीएम मोदी से मुलाकात कर प्रमोशन में आरक्षण की मांग करूंगा। संविधान पीठ इस बात को तय करना था कि करीब 12 साल पुराने नागराग के फैसले पर पुर्नविचार की जरूरत है या नहीं।
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वहीं बीएसपी सुप्रीमों मायावती की प्रतिक्रिया आई हैं। बहन मायावती ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक एससी/एसटी के प्रमोशन के मामले में कुछ नहीं किया हैं, लेकिन अब सरकार को इस ओर कदम उठाना चाहिए। मायावती ने कहा कि सरकार चाहे तो एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है। इसलिए हर राज्य की सरकार को इस ओर सोचने और विचार कर कदम उठाने की जरूरत हैं।
इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने साल 2006 के अपने फैसले में SC/ST के कर्मचारियों की नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर कुछ शर्ते लगाई थी। जानकारी के लिए आपको बता दे, सरकारी नौकरियों में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई का फैसला 30 अगस्त को सुरक्षित कर दिया है. इस दौरान केंद्र और राज्य की सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण की वकालत करते हुए कहा कि, ‘1000 साल से झेल रहा है यह तबका’ , इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि 2006 के नागराज जजमेंट के चलते SC-ST के लिए प्रमोशन में आरक्षण रुक गया है।
केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या गलत इसपर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह तबका 1000 से अधिक सालों से झेल रहा है। उन्होंने कहा कि नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को फैसले की समीक्षा की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई सवाल किए।
शीर्ष अदालत ने पूछा कि यदि एक आदमी रिजर्व कैटिगरी से आता है और राज्य का सेक्रटरी है, तो क्या ऐसे में यह तार्किक होगा कि उसके परिजन को रिजर्वेशन के लिए बैकवर्ड माना जाए? दरअसल, सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस बात का आंकलन कर रही है कि क्या क्रीमीलेयर के सिद्धांत को एससी-एसटी के लिए लागू किया जाए, जो फिलहाल सिर्फ ओबीसी के लिए लागू हो रहा है।
प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि आखिर देश में कब तक आरक्षण चलता रहेगा? विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ दलगत और आरक्षण की राजनीती आधारित पार्टियों का अम्बार है। पार्टी बनाने वालों की जाति का भला हो या न हो, पार्टी के कर्णधारों और पदाधिकारियों की तिजोरियों का जरूर भला हो रहा है और होता भी रहेगा।   

सवर्ण और दलित टकराव के मुहाने पर मध्य प्रदेश की राजनीति

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एससी एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दलित संगठनों द्वारा तीखा विरोध किया गया था. इसके खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया था, जिस दौरान सबसे ज्यादा हिंसा मध्य प्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में हुई थी. इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में करीब आधे दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. दलित संगठनों की प्रतिक्रिया और आगामी चुनावों को देखते हुए कानून को पूर्ववत रूप में लाने के लिए केंद्र सरकार ने संसद में एससी-एसटी संशोधन बिल पेश किया, जिसे दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया गया. इसके बाद से लगातार स्वर्ण संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ 6 सितंबर को सवर्ण संगठनों द्वारा भारत बंद का ऐलान किया गया.
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आरक्षण समर्थक 
मध्य प्रदेश में इस बंद को भी अच्छा-ख़ासा असर देखने को मिला. इसके बाद से मध्य प्रदेश में अगड़े बनाम पिछड़े की बहस हावी है और इससे सियासी जमातें उलझन में हैं. चुनावी साल में होने वाली इस उठापटक से प्रदेश के सियासी मिजाज में बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां की राजनीति में कभी भी उत्तर प्रदेश और बिहार की तरह जातिगत मुद्दे हावी नहीं रहे हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों के चलते इस बार इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है. दरअसल, एससी-एसटी संशोधन विधेयक पारित होने का सबसे तीखा विरोध मध्य प्रदेश में ही देखने को मिल रहा है, जिसके घेरे में कांग्रेस और भाजपा दोनों हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर चप्पल फेंके जाने और उनके जनआशीर्वाद रथ पर पथराव जैसी घटनाएं तेजी से बदलते हुए माहौल को दर्शाती हैं.
Related imageसवर्णों की प्रतिक्रिया
चुनाव के मुहाने पर खड़े मध्य प्रदेश में सवर्ण संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया से सियासी दल हैरान हैं. भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं को जगह-जगह सवर्णों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान शिवराज सिंह चौहान की बस पर पथराव और एक सभा के दौरान उन पर जूता फेंकने जैसी घटनाएं हो चुकी हैं. भाजपा द्वारा इसे लेकर पहले कांग्रेस पर आरोप लगाया गया था कि ये हमला कांग्रेस ने कराया है. खुद शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कांग्रेस मेरे ख़ून की प्यासी हो गई है. लेकिन बाद में करणी सेना ने ऐलान किया कि सीधी की सभा में सीएम शिवराज सिंह पर जो जूता फेंका गया वो किसी कांग्रेसी ने नहीं बल्कि ‘माई के लाल’ ने फेंका था. दरअसल, शिवराज ने कहा था कि ‘कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता.’
‘यह सामान्य वर्ग का गांव है, कृपया वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें
उनके इस बयान के जवाब में करणी सेना ने खुद को ‘माई का लाल’ घोषित कर लिया. इसी तरह से मुरैना में भाजपा नेता प्रभात झा का घेराव किया गया और उनके ऊपर चूड़ियां फेंकी गईं. टीकमगढ़ में भाजपा की बैठक में घुसकर हंगामा किया गया और वहां मौजूद भाजपा नेता  प्रह्लाद पटेल को काले झंडे दिखाए गए. कांग्रेस को भी इस विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. मुरैना में कमलनाथ को काले झंडे दिखाए जा चुके हैं और रतलाम में  ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफिले का घेराव किया जा चुका है. प्रदेश के ग्वालियर, चंबल व मालवा जिले के कई गावों में लोगों ने पोस्टर लगाए हैं, जिसमें लिखा है, ‘यह सामान्य वर्ग का गांव है, कृपया वोट मांगकर शर्मिंदा ना करें.
हम नोटा को वोट देंगे.’ प्रदेश में इन दिनों यह नारा भी काफी चर्चा में है कि ‘अपना सिक्का निकला खोटा, वोट फॉर नोटा.’ सवर्ण आंदोलन के दौरान कई धर्म गुरु भी खुलकर सामने आए हैं. कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. पिछले दिनों वे अपने एक विवादित बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘दो महीने का समय हमने लिया है, अगर हमें हल मिल गया तो हम कुछ नहीं करेंगे, अगर नहीं मिला तो वो करेंगे जो भारत के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं.’ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी बयान दिया है कि भाजपा को सिर्फ वोट की चिंता है. एससी-एसटी एक्ट में संशोधन तो समाज को बांटने का षड्यंत्र है.’
Image result for सवर्ण आंदोलनबैकफुट पर भाजपा
भाजपा बुनियादी तौर पर सवर्णों की पार्टी मानी जाती रही है और यही उसका मूल वोटबैंक भी है, लेकिन आज उसका मूल वोटर ही खार खाए बैठा है. देश और प्रदेश में भाजपा ही सत्ता में है, इसलिए एससी-एसटी अत्याचार निरोधक कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने का सबसे ज्यादा विरोध भी भाजपा और उसके नेताओं को ही झेलना पड़ रहा है. हालांकि केवल एससी-एसटी अत्याचार निरोधक कानून ही नहीं है, जो भाजपा के गले की हड्‌डी बना हुआ है. मध्य प्रदेश में सवर्णों के इस गुस्से की एक पृष्ठभूमि है. दरअसल, दिग्विजय सिंह की सरकार द्वारा 2002 में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण देने को लेकर कानून बनाया गया था, जिसे बाद में  शिवराज सरकार द्वारा भी लागू रखा गया. बाद में इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर 30 अप्रैल 2016 को जबलपुर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और मध्य प्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 को निरस्त कर दिया. साथ ही 2002 से 2016 तक सभी को रिवर्ट करने के आदेश दिए.
इसके बाद इस नियम के तहत करीब 60 अजा-जजा के लोकसेवकों की पदोन्नति पर सवालिया निशान लग गया.
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Related imageक्या है SC-ST Act?
Protest over SC/ST Act Amendment: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार द्वारा SC/ST एक्ट में संशोधन कर उसे मूल स्वरूप में बहाल करने के विरोध में सवर्ण समुदाय के लोगों ने 6 सितंबर को भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया है. देश के कई इलाकों में बंद को सफल कराने के लिए प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे हैं. मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि राज्यों में भारत बंद कराने के लिए सवर्ण समुदाय के लोग सड़क पर हैं. कहीं दुकानें बंद कराई जा रही हैं, तो कहीं टायर जलाकर आगजनी की जा रही है. बिहार के मोकामा जिले में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन किया. पिछली बार भारत बंद एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को बुलाया था. 
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SC/ST Act के खिलाफ भारत बंद 
एसएसी-एसटी एक्ट के विरुद्ध में सवर्णों के भारत बंद को लेकर मध्य प्रदेश के करीब 35 जिलों को अलर्ट पर रखा गया है. मध्य प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरे इंतजाम किये गये हैं. साथ ही भारत बंद को देखते हुए मध्य प्रदेश के करीब 10 जिलों में एहतियात के तौर पर धारा 144 लगा दी गई है. धारा 144 भारत बंद के अगले दिन यानी 7 सितंबर तक प्रभावी रहेगी. इसके अलावा, आज सुबह दस बजे से लेकर शाम 4 बजे तक पेट्रोल पंप बंद रहेंगे. यानी आज पूरे देश भर में सवर्ण एसएसी-एसटी के खिलाफ में प्रदर्शन कर रहे हैं. 
मगर यहां समझने की जरूरत है कि आखिर यह एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) क्या है और क्यों इसके खिलाफ में भारत के सवर्ण लामबंद होकर भारत बंद कराने की पूरजोर कोशिश कर रहे हैं. दरअसल, सवर्ण समुदाय के लोग एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ में हैं. उनका मानना है कि इस कानून की वजह से उन्हें प्रताड़ित होना पड़ता है और इस कानून का गलत इस्तेमाल किया जाता है. दरअसल, सवर्ण संगठनों और जातियों की मांग है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश के मुताबिक, ही कानून रहने दे. यानी केंद्र एसएसी-एसटी एक्ट के पुराने स्वरूप को बहाल न करे.
क्या है SC-ST Act?
अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के मकसद से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम, 1989 बनाया गया था. जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया. इसके तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए और इनकी हरसंभव मदद के लिए जरूरी उपाय किए गए. इन पर होनेवाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि ये अपनी बात खुलकर रख सके. हाल ही में एससी-एसटी एक्ट को लेकर उबाल उस वक्त सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के प्रावधान में बदलाव कर इसमें कथित तौर पर थोड़ा कमजोर बनाना चाहा. 

सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में किया था यह बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के बदलाव करते हुए कहा था कि मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. कोर्ट ने कहा था कि शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा. शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद डीएसपी स्तर के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी और जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा समय तक नहीं होगी. डीएसपी शुरुआती जांच कर नतीजा निकालेंगे कि शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या फिर किसी तरीके से झूठे आरोप लगाकर फंसाया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा था कि इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं.

संशोधन के बाद अब ऐसा होगा SC/ST एक्ट
एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18A जोड़ी जाएगी. इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया जाएगा. इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए प्रावधान रद्द हो जाएंगे. मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है. इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिल सकेगी. आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी. मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे. जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा. एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी. सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी.

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जातिगत पेंच से पशोपेश में कांग्रेस-भाजपा     

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अजा-जजा वर्ग के संगठन अजाक्स ने भोपाल में एक बड़ा सम्मेलन किया था, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बिना बुलाए पहुंच गए थे. उन्होंने वहा मंच से हुंकार भरा था कि हमारे होते हुए कोई माई का लाल आरक्षण समाप्त नहीं कर सकता. इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन लगा दिया और साथ ही शिवराज सिंह ने ऐलान भी किया था कि सुप्रीम कोर्ट में केस नहीं जीत पाए, तो भी प्रमोशन में आरक्षण जारी रखेंगे भले ही इसके लिए विधानसभा में नया कानून बनाना पड़े. फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.
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बिहार के पटना में सवर्ण एकता मंच के सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर सितम्बर 21 को पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाई। इस घटना में क...

2016 में शिवराज सरकार के दलितों को पुरोहित बनाने के फैसले को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी थी, जिसमें अनुसूचित जाति, वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि अनुसूचित जाति की आर्थिक व सामाजिक उन्नति और समरसता के लिए युग पुरोहित प्रशिक्षण योजना शुरू किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें दलित युवाओं को अनुष्ठान, कथा, पूजन और वैवाहिक संस्कार का प्रशिक्षण दिया जाएगा. ब्राह्मण समाज द्वारा इसका प्रदेशभर में तीखा विरोध किया गया, जिसके बाद मध्य प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा को बयान देना पड़ा था कि ‘मध्य प्रदेश में दलितों को कर्मकांड सिखाने की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है.’
सपाक्स बनाम अजाक्स
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों का जाति के आधार पर विभाजन हो गया है, जिसमें एक तरफ सपाक्स (सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था) के बैनर तले सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारी हैं, तो दूसरी तरफ अजाक्स (अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) के बैनर तले अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कर्मचारी हैं. प्रदेश में करीब 7 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिसमें अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कर्मचारियों की संख्या करीब 35 फीसदी और सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों की संख्या 65 फीसदी बताई जाती है, यानि सपाक्स से जुड़े कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है. हालांकि पिछड़ा वर्ग के कर्मचारी किसके साथ हैं, इसे लेकर अभी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. सपाक्स और अजाक्स दोनों दावा कर रहे हैं कि पिछड़ा वर्ग उनके साथ है, जबकि दूसरी तरफ पिछड़ा वर्ग के सामाजिक संगठनों में इसे लेकर एकराय देखने तो नहीं मिल रही है. पिछड़ा वर्ग के कुछ लोग सपाक्स को समर्थन दे रहे हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो अजाक्स के साथ होने की बात कह रहे हैं.
बहरहाल, सपाक्स शिवराज सरकार के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है, जबकि अजाक्स को शिवराज सिंह की सरकार का संरक्षण मिला हुआ है. सपाक्स के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि अजाक्स से जुड़े अफसरों का गुट महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जे.एन. कंसाटिया और वरिष्ठ आईएएस अफसर इकबाल सिंह बैस के संरक्षण में जातिगत भेदभाव फैलाने का काम कर रहा है. इसी तरह से इस साल जुलाई माह में अजाक्स के पूर्व प्रान्तीय अध्यक्ष एव स्थायी सदस्य डॉ. जगदीश सूर्यवंशी ने वर्तमान में अजाक्स के प्रान्तीय अध्यक्ष जे.एन. कंसोटिया पर शिवराज सरकार के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए समानान्तर अजाक्स का गठन कर लिया था. बहरहाल, सपाक्स की नाराजगी शिवराज और भाजपा पर भारी पड़ सकती है. सपाक्स चित्रकूट, मुंगावली और कोलारस विधानसभा के उपचुनाव में सरकार के खिलाफ अभियान चला चुका है. इन तीनों जगहों पर भाजपा की हार हुई थी, जिसमें सपाक्स अपनी भूमिका होने का दावा कर रहा है. सपाक्स ने प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान करते हुए प्रदेश की जनता को तीसरा राजनैतिक विकल्प देने का दावा किया है. इसकी घोषणा करते हुए सपाक्स के प्रवक्ता विजय वाते ने कहा है कि हमने चुनाव आयोग में अर्जी देकर राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मांगी है. मान्यता और चुनाव चिन्ह मिलने के बाद सपाक्स प्रदेश की सभी 230 विधानसभा और 29 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा, हम अपने दम पर लड़ेंगे और जीतेंगे. जानकार मानते हैं कि अगर सपाक्स चुनाव लड़ता है, तो इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सपाक्स उस सवर्ण तबके के वोटरों में ही सेंध लगाएगा, जिसे भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है.
किस पर कितना असर का पेंच
सर्वणों के गुस्से का सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा का ही होना है. भले ही वे कांग्रेस को वोट न दें और नोटा का विकल्प चुनें, वोट तो भाजपा का ही कटेगा. हालांकि कांग्रेस के लिए भी यह कोई राहत वाली स्थिति नहीं है. पिछले कुछ महीनों से वो जिन मुद्दों पर शिवराज सरकार को घेरने की कोशिश कर रही थी, वो पीछे छूटते हुए नजर आ रहे हैं. किसान, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी और कुपोषण जैसे मुद्दे फिलहाल नेपथ्य में चले गए हैं. ऐसे में कांग्रेस को नए सिरे से सियासी बिसात बिछाने की जरूरत महसूस हो रही है. शायद इसी वजह से कांग्रेस द्वारा बहुत सधे हुए तरीके से सवर्णों के साथ सहानुभूति का संदेश दिया जा रहा है.
इस संबंध में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ का हालिया बयान काबिले गौर है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘कांग्रेस किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी, जहां एक्ट का दुरुपयोग हुआ है, कांग्रेस उसका विरोध करती है, हमारा प्रयास सवर्णों को मनाने का है, पार्टी चाहती है कि सबके साथ न्याय हो.’ भाजपा की तरफ से भी सर्वणों  को मनाने की कवायद शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि ‘हमारी संस्कृति समरसता की रही है, हमारी जड़ों में सामाजिक समरसता है, हमें इसे किसी भी तरह टूटने या बिखरने नहीं देना है.’ इस संबंध में भाजपा सांसद आलोक संजर ने बयान दिया है कि सवर्णों की नाराजगी को दूर किया जाएगा.