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केरल : SFI ने हिंदुओं द्वारा पोषित केरल के कॉलेज में लगाए आपत्तिजनक पोस्टर : राष्ट्रवाद को गाली, जिहाद का महिमामंडन, चुंबन लेते नग्न तस्वीरें

                              केरल के कॉलेज में SFI द्वारा लगाए गए पोस्टर (साभार: सोशल मीडिया)
केरल के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने त्रिशुर स्थित श्री केरल वर्मा कॉलेज में आपत्तिजनक और अश्लील पोस्टर लगाकर ना भारतीय परंपरा और कानून की धज्जियाँ उड़ाई है। एसएफआई एक पोस्टर में ‘सेक्सुअल लिबरेशन’ के नाम पर अश्लीलता प्रदर्शित किया है। इन पोस्टरों में ना सिर्फ राष्ट्रवाद को गाली दी गई है, जेहाद को महिमामंडित किया गया है। पोस्टर में हिंदुबोफिया भी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र लिखा है।

कॉलेज में पोस्टर के रूप में लगाए गए एक पेंटिंग में दो देशों की सीमा को दर्शाया गया है, जिसकी रखवाली एक सैनिक कर रहा है। इसमें सैनिक सीमा की दूसरी तरफ की महिला को चूमते हुए दिख रहा है। पोस्टर पर लिखा हुआ है, ‘फ* नेशनलिज्म। हम पृथ्वीवासी हैं’। इस गाली को अगर मर्यादित भाषा में राष्ट्रवाद की ऐसी-तैसी कह सकते हैं। एसएफआई के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर कहा जा सकता है, बाड़ के दोनों तरफ देश भारत और पाकिस्तान हैं।

दूसरे पोस्टर में इस कट्टरपंथी छात्र संगठन ने ‘यौन स्वतंत्रता’ की वकालत की है। पोस्टर में एक महिला और एक पुरुष को नग्न होकर उत्तेजक अवस्था में चुंबन लेते हुए दिखाया गया है। साथ ही कैप्शन में लिखा है- ‘द प्लेनेट नीड सेक्सुअल लिबरेशन’ यानी धरती पर यौन स्वतंत्रता की जरूरत है।

कॉलेज परिसर में लगाए गए एक अन्य पोस्टर में एक मुस्लिम व्यक्ति को अमेरिकी झंडे की पैंट पहने कुर्सी पर बैठे हुए दिखाया गया है। उसके बगल AK-47 राइफल रखी हुई है। यह पोस्टर संभवत: अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के देश छोड़ने और वहाँ तालिबान शासन के स्थापित होने का जश्न के रूप में दिखाता है। वहीं, एक अन्य पोस्टर में हाथ में पत्थर लिए हुए एक व्यक्ति को सुरक्षाबलों के सामने खड़ा दिखाया गया है।

इस तरह की कट्टरपंथी सोच और भारतीय परंपरा एवं कानून को गाली देने वाली पोस्टर को लेकर एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग पत्र लिखकर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है। पत्र में अधिवक्ता अरोड़ा ने कहा है कि यौन क्रिया वाले इस तरह के पोस्टर लगाना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि संवैधानिक रूप से भी गलत है। उन्होंने कहा, “एसएफआई ने अपने पोस्टर में ऐसी तस्वीरों और वाक्यों को लिखा है, जो महिलाओं के शरीर को सार्वजनिक रूप से ग्लैमराइज कर अश्लीलता, नग्नता और यौनिक क्रिया को बढ़ावा देते हैं।”

अपने पत्र में अधिवक्ता अरोड़ा ने लिखा है कि IPC की धारा 294 अश्लील क्रिया के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अश्लील तस्वीर, पोस्टर, ईमेल, मैसेज आदि को यौन शोषण माना जाता है। इसको देखते हुए उन्होंने महिला आयोग से इन पोस्टरों को हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया है।

श्री केरल वर्मा कॉलेज का स्वामित्व और प्रबंधन कोचीन देवस्वम बोर्ड द्वारा किया जाता है। देवस्वम बोर्ड हिंदुओं द्वारा वित्त पोषित है और हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्ति की देखरेख के साथ-साथ यह हिंदुओं की पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड के सदस्यों को केरल सरकार और राज्य के हिंदू समुदाय दोनों द्वारा नामित किया जाता है।

सोनिया गाँधी से चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम पद से हटाने की माँग : राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्षा रेखा शर्मा

संविधान का जितना अधिक मजाक हमारे राजनीतिक दल बना रहे हैं, उसे देख लगता है, संविधान केवल शांतिप्रिय लोगों के लिए है, इन सियासतखोरों के लिए नहीं। जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता हैं फिर आधार पर जात-पात की गन्दी सियासत खेल खेलकर चुनाव में जनता के धन का दुरूपयोग किया जा रहा है। जातों पर आधारित इतनी पार्टियां हैं, फिर भी उनका उत्थान नहीं हुआ, विपरीत इसके नेताओं का जरूर उत्थान हो गया। आरक्षण भी और चुनाव में भी आरक्षण, क्या है ये सब तमाशा? 
कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद जब कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को चुना तो इसे चुनावों से पहले शिअद-बसपा के दलित कार्ड की हवा निकालने के तौर पर देखा गया। लेकिन, दलित संगठनों ने इस फैसले को कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता नकार दिया है। दूसरी तरफ ‘मीटू’ (#MeToo) के आरोप भी चन्नी और कांग्रेस दोनों की मुसीबत बढ़ाते दिख रहे हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने इसे उठाते हुए सोनिया गाँधी से उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की माँग की है।

कांग्रेस का ‘चुनावी स्टंट’ बता दलित संगठनों ने दुत्कारा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चरणजीत सिंह चन्नी को चुनने के कांग्रेस के फैसले की आलोचना करते हुए दलित यूनियनों ने कहा कि पार्टी एक तीर से दो निशाना साधने कर रही है, क्योंकि चन्नी दलित और सिख दोनों हैं। दलित यूनियनों का मानना है कि अगले साल राज्य में चुनाव होने से पहले बँटे हुए दलित वोट को एक ब्लॉक में मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने यह रणनीति चली है।

पंजाब खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली ने इस पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “यह महज एक चुनावी स्टंट है। चन्नी दलित होने के साथ-साथ सिख भी हैं। पंजाब में अगले चार से पाँच महीने में चुनाव होंगे और चुनाव से 40 दिन पहले आचार संहिता लागू कर दी जाएगी। तो नया चेहरा क्या कर सकता है? वह कहेंगे कि मैं अभी नया हूँ और चीजों को समझने की कोशिश कर रहा हूँ।”

मंडी बोर्ड के महासचिव तरसेम सिंह सेवेवाला ने कहा, “जब तक नीतियाँ नहीं बदली जातीं, तब तक एक दलित सीएम या जाट सिख सीएम को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अब हम नए चुने गए सीएम को अपने सांझा मोर्चा के साथ 23 सितंबर की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए कहेंगे। यह उनके लिए लिटमस टेस्ट होगा और बताएगा कि वह दलितों का कितना ध्यान रखते हैं। हालाँकि, पंजाब में पहले से ही 34 निर्वाचित दलित विधायक हैं। इससे हमारी हालत पर क्या फर्क पड़ा है? दलित को मुख्यमंत्री बनाना हमारे वोट बैंक को निशाना बनाना है। हर राजनीतिक दल हमें निशाना बना रहा है, कांग्रेस भी।”

चुनावी हथकण्डा : मायावती 

दलित नेता और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी चुनाव से ठीक पहले चन्नी को पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शामिल करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का चुनावी हथकंडा बताया।

मायावती ने कहा, “मुझे मीडिया के माध्यम से भी पता चला है कि पंजाब का अगला विधानसभा चुनाव एक गैर-दलित के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस को अभी भी दलितों पर पूरा भरोसा नहीं है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-बसपा गठबंधन से भी कांग्रेस  डरी हुई है।”

दलित वोट-बैंक राजनीति खेलने के लिए कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए, पंजाब के मजदूर मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भगवंत समो ने कहा, “शिरोमणि अकाली दल ने दलित वोट बैंक को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था। उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि वे दलित को डिप्टी सीएम बनाएँगे। AAP ने भी इसी तरह की घोषणा की थी। भाजपा ने भी घोषणा की कि वे दलित को मुख्यमंत्री बनाएँगे। इसलिए, कांग्रेस ने अपने आंतरिक कलह को निपटाने के लिए कुछ महीनों के लिए दलित सीएम बनाया है। वे यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि जहाँ अन्य दल घोषणा कर रहे हैं वे पहले ही दलित सीएम बना चुके हैं। यह दलित वोट बैंक की राजनीति है। अगर चन्नी इतने चिंतित थे, तो क्या वे कभी किसी ऐसे धरने पर गए जहाँ दलित विरोध कर रहे हैं? यह हमारे लिए शायद ही मायने रखता है कि सीएम कौन है।”

वहीं जमीं प्रपति संघर्ष समिति के एक सक्रिय सदस्य गुरमुख सिंह ने कहा, “2015 में, चन्नी ने संगरूर जिले के हमारे गाँव घ्राचोन का दौरा किया था, जहाँ दलित वार्षिक पट्टे पर खेती के लिए पंचायती भूमि का अपना हिस्सा पाने के लिए विरोध कर रहे थे। उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह हमें 5,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन देंगे। लेकिन जब कांग्रेस सत्ता में आई तो उन्होंने इस मुद्दे पर कभी बात नहीं की। अब हम उनके चमकौर साहिब आवास पर जाकर उनसे पूछेंगे कि वह अब सीएम के रूप में क्या कर सकते हैं। सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।”

#Metoo का आरोप 

चन्नी पर ‘मीटू’ को लेकर आरोप लग चुका है जिसे लेकर वह कह चुके हैं कि यह तत्कालीन मुख्यमंत्री की शह पर किया गया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा था क्योंकि उन्होंने राज्य में दलित मुद्दों को उठाया था। हालाँकि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने दलित कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की थी।

इस मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने ANI से बात करते हुए कहा है, “2018 में मीटू आंदोलन के दौरान उनके (चरणजीत सिंह चन्नी) के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और अध्यक्ष उन्हें हटाने की माँग को लेकर धरने पर बैठ गई थीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “आज उन्हें एक महिला के नेतृत्व वाली पार्टी ने पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया है। यह विश्वासघात है। यह महिला सुरक्षा के लिए खतरा है। उनके खिलाफ जाँच होनी चाहिए। वह सीएम बनने लायक नहीं है। मैं सोनिया गाँधी से उन्हें सीएम पद से हटाने का आग्रह करती हूँ।”

मामला 2018 का है और चन्नी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी को आपत्तिजनक मैसेज भेजा था। तब इस मामले ने खासा तूल पकड़ा था। हालाँकि महिला अधिकारी ने उस समय शिकायत दर्ज नहीं की थी और अमरिंदर सिंह ने भी कहा था कि मामला सुलझा लिया गया है। 18 मई 2021 को पंजाब महिला आयोग की चीफ मनीषा गुलाटी ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। अब एक बार फिर से ट्विटर पर अरेस्ट चन्नी ट्रेंड कर रहा है।

महिलाओं के सोने के स्थान पर केजरीवाल ने सीसीटीवी कैमरे लगावाए




दिल्ली में आप सरकार के बारे में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगा है कि उन्होंने महिलाओं के सोने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगावाए है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मंगलवार, 15 दिसंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से जवाब मांगा है।

इसके पहले सोमवार को दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष योगिता सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से मुलाकात कर केजरीवाल के खिलाफ निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई करने का आग्रह किया। योगिता सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने निगम की महिला नेताओं पर नजर बनाए रखने लिए जिस हथकंडे का इस्तेमाल किया, वह सरासर अशोभनीय और अनैतिक है। अगर मुख्यमंत्री में थोड़ी-सी भी नैतिकता बाकी है, तो उन्हें धरने पर बैठी निगम की महिला नेताओं से माफी मांगनी चाहिए।

दिल्ली में नगर निगम के नेता मुख्यमंत्री आवास के बाहर निगम के नेता फंड जारी करने की मांग को लेकर पिछले एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए केजरीवाल महिला पार्षदों के बैठने और सोने के स्थान पर कैमरे लगवा दिए हैं, जिससे धरने पर बैठी महिला नेता असहज महसूस कर रही हैं।

कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता: अजान की आवाज कम करने की बात पर फरदीन ने रेप की धमकी दी

मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान बजाए जाने को लेकर अब एक और सेलेब्रिटी ने आवाज उठाई है। ‘बिग बॉस 8’ से लोकप्रियता पाने वाले प्रीतम सिंह ने सोनू निगम की राह पर चलते हुए मस्जिद में तेज आवाज में अजान के विरुद्ध आवाज उठाई है।
सोमवार (जुलाई 13, 2020) की सुबह प्रीतम सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिख कर अपना दर्द साझा किया। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने अपने पेज को डीऐक्टिवेट कर दिया है।
प्रीतम सिंह, अजान, मस्जिद
 ‘4 मस्जिद तेज आवाज में अजान बजा कर कॉम्पिटिशन कर रहे कि किसकी आवाज अल्लाह तक जाएगी’
प्रीतम सिंह के खिलाफ कई इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी टिप्पणी की। बता दें कि कुछ इसी तरह का वाकया सोनू निगम के साथ भी हुआ था। प्रीतम सिंह ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट मे लाउड्स्पीकर पर अजान पर तंज कसते हुए लिखा:
“ये समझने वाली बात है कि एक जगह पर चार मस्जिद हैं, इनसे 5 बजे अजान की तेज आवाज आनी शुरू हो जाती है। बात ये है कि आपस में ही इन सब के बीच प्रतियोगिता चल रही है कि कौन कितनी जोर से अजान बजाएगा। सोचने वाली बात तो ये है कि किसकी आवाज अल्लाह तक जाएगी। आप भी सोचिए और मैं भी सोचता हूँ। आपका दिन शुभ हो! सबका मालिक एक।”
सिर्फ सेलेब्रिटीज ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया में कई अन्य लोग भी अजान के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। आशी चौधरी नामक एक युवती ने एक प्लाकार्ड के जरिए अजान के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि अजान करो लेकिन आवाज़ कम करो। साथ ही उन्होंने पूछा कि लाउडस्पीकर से क्या प्रूव करना चाहते हो? इसके बाद उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियाँ मिलीं।





हाल ही में लाउडस्पीकर से अजान और गाजीपुर जिले में डीएम द्वारा लॉकडाउन के दौरान अजान पर लगाई गई पाबंदी को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।
अदालत ने कहा था कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान करना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है।
गीतकार जावेद अख्तर ने भी लाउडस्पीकर पर अजान देने का विरोध किया था। कट्टरपंथियों और AIMIM के नेताओं के अलावा देवबंदी उलेमा ने इस पर नाराजगी जाहिर की थी।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा था कि संविधान इसकी इजाजत देती है तो फिर किसी को बयानबाजी कर सुर्खियाँ बटोरने का कोई मतलब नहीं है। उनका कहना था कि जावेद अख्तर जो माँग कर रहे हैं, यह पहले पहले भी होती आई है। देश के लोगों को इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
आशी चौधरी का पोस्ट और फरदीन मोडल की प्रोफाइल का स्क्रीनशॉटकट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता: अजान की आवाज कम करने की बात पर फरदीन ने रेप की धमकी दी
सोशल मीडिया पर आए दिन कट्टरपंथियों का असली चेहरा उजागर होता रहता है। दीन और ईमान के नाम पर ये लोग खुलेआम अपराध की धमकियाँ देते हुए मिलते हैं। इन्हीं की भीड़ का एक युवक जो खुद को कट्टर मुस्लिम बताता है, वो आशी चौधरी नाम की हिंदू लड़की को रेप की धमकी देता पाया गया है। अब उसके मैसेज के स्क्रीनशॉट ट्विटर पर वायरल हो रहे हैं।
कुछ दिनों पहले आशी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक फोटो शेयर की थी। इस तस्वीर में उन्होंने एक प्लेकार्ड लिया हुआ था। जिसमें लिखा था, “अजान करो पर आवाज कम करो। लाउडस्पीकर से क्या प्रूव करना चाहते हो?”
इसी फोटो पर फरदीन नाम के इंस्टा यूजर ने आशी को धमकी दी। फरदीन ने पहले आशी के साथ आपत्तिजनक भाषा में बात की और फिर लिखा, “फरदीन मोडल नाम है मेरा। उखाड़ लेना जो कुछ भी उखाड़ना हो तुझे। समझी। धंधा करने वाली।” आगे फरदीन अपने मजहब का हवाला देकर लिखता है,”कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता।”
ये तस्वीर आशी ने ट्विटर पर भी 28 जून को शेयर की थी। इस ट्वीट पर भी सुहेल खान नाम के लड़के ने आशी के साथ बहुत अभद्रता से बात की थी। आशी ने इस तस्वीर को करिश्मा भोसले के समर्थन में अपलोड किया था।

आशी ने इसके साथ लिखा था, “मैं करिश्मा को उसके अधिकारों के लिए खड़े होने पर सराहती हूँ। अजान को लाउडस्पीकर पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। या साउंड की फ्रीक्वेंसी में कोई न कोई नियमन किए जाने चाहिए। ये बहुत परेशान करने वाला होता है। इससे हमारी धार्मिक मानसिक दोनों शांति पर प्रभाव पड़ता है।”
इसी पोस्ट के बाद उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलनी शुरू हुई। अब लोग इन्हीं स्क्रीनशॉट्स को शेयर करते हुए आशी चौधरी के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। कई पत्रकार और कई सोशल मीडिया यूजर्स इस मामले के मद्देनजर इंदौर पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग को फरदीन की रिपोर्ट कर रहे हैं। इन सभी का कहना है कि फरदीन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।