Showing posts with label Farmers' Protest. Show all posts
Showing posts with label Farmers' Protest. Show all posts

लखीमपुर खीरी में आठ-आठ लाशें बिछाने वाले तथाकथित किसानो को सबक देना जरूरी

विष्णुगुप्त , उगता भारत 
अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की तथाकथित किसान आंदोलन के प्रति नरम नीति काल बन रही है, देश की सुरक्षा, मानवता की सुरक्षा, निर्दोष लोगों की जान की सुरक्षा पर आंच आ रही है, आने-जाने के अधिकार का हनन जैसे गुनाह सामने आ रहे हैं। इसी का दुष्परिणाम है कि लखीमपुर खीरी में तथाकथित किसानों ने कोई एक-दो नहीं बल्कि आठ-आठ लाशें बिछा दी। अखिलेश यादव के घर पर पुलिस की गाड़ी सरेआम जला दी गयी, कानून और संविधान को बंधक बनाया जा रहा है। विपछी दल और राष्ट्र विरोधी शक्तियां की करतूत अब निर्दोष लोगों की जानें ले रही हैं।
लखीमपुर में हंगामा करने वाले राजस्थान और पंजाब में प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए लाठीचार्ज पर क्यों चुप्पी साधे रहे? केवल इसलिए कि वहां भाजपा विरोधी सरकारें हैं। ये दोहरा मापदंड क्यों?

इतना ही देश को जानने के लिए जरुरी है कि क्या ये वास्तव में किसान हैं या फिर किसान की खोल में गुंडे? जहाँ तक राकेश टिकैत की बात है, उसके लिए आगे कुआँ पीछे खाई वाली स्थिति है। वह मोदी सरकार के विरुद्ध अराजक तत्वों के हाथ कठपुतली तो बन गया, क्योकि 26 जनवरी को हुए हंगामे से टिकैत खुद पशोपेश में आ गए थे, जिस कारण उसी दिन इस आंदोलन को समाप्त करने का मन बना चुके थे, लेकिन अराजक तत्वों ने उन्हें ऐसा नहीं करने का दबाव बनाया जिस कारण उन्हें रोते हुए मीडिया के सामने आने पड़ा था। इस कटु सच्चाई को राकेश टिकैत को ही बताना होगा। दुनियांभर की औरतें, बच्चे आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं लेकिन राकेश का परिवार गायब है, क्यों?हकीकत यह है कि अराजक तत्व मोदी विरोधी पार्टियों के संरक्षण में इस आंदोलन को लोक सभा 2024 चुनाव तक बनाए रखना चाहते हैं। 2024 तक देश में किसी न किसी बहाने उपद्रव कर जनता में भाजपा के विरुद्ध माहौल बनाओ।  

किसान खोल में गुंडे और देशद्रोहियों को हिंसा की छूट क्यों मिली है ?

जब आप किसी चालक के उपर लाठियां बरसायेंगे, पत्थर बरसायेंगे तो फिर वाहन पर से चालक का नियंत्रण कैसे रह पायेगा? चालक अपने आप को कैसे बचा पायेंगे। जब किसी के उपर अचानक आफत आती है तो फिर वह बचने की कोशिश करता ही है। चालक ने भी बचने की कोशिश की थी, बचने की कोशिश में उसने अपने वाहन को भगाने की कोशिश की थी, सामने हिंसक किसान आ गये। किसान क्या यह नहीं जानते थे कि हम किसी वाहन पर पत्थर फेंकेगे और वाहन चालक पर सरेआम लाठियां बरसायेगें तो फिर वह बचने के लिए अपने वाहन को दोड़ाने का प्रयास नहीं करेगा? हर व्यक्ति को अपनी जान प्यारी होती है। किसानों की लड़ाई सरकार से है। उस वाहन चालक से आपकी लड़ाई थोडेे थी? फिर आपने उस वाहन चालक पर पत्थर क्यों बरसाने लगे, उस वाहन चालक पर लाठियां क्यों बरसाने लगे? क्या आपको कानून हाथ में लेने का अधिकार है, क्या आपको कानून और संविधान को बंधक बना कर रखने का अधिकार है,क्या आपको सड़कों को घेर कर बैठने का अधिकार है, क्या आपको तिरंगे को रौंदने का अधिकार है, क्या आपको तिरंगे को उतार फेंक कर अपना मजहबी झंडा लगाने का अधिकार है? क्या आपको भिडरावाले की प्रशंसा में कसिदे पढ़ने का अधिकार है, क्या आपको दुश्मन देश की वकालत करने का अधिकार है, क्या आपको विदेशी पैसे लेने का अधिकार है, क्या आपको किसी एक पार्टी के कार्यकर्ताओं को बंधक बनाने का अधिकार है? क्या आपको महिलाओं के साथ बदसूलकी का अधिकार है, क्या आपको महिलाओं के साथ बलात्कार करने का अधिकार है, क्या आपको मीडिया कर्मियों के साथ बदतमीजी करने का अधिकार है, क्या आपको मीडिया कर्मियों को धमकी देने का अधिकार है, क्या आपको मीडियाकर्मियों को सरेआम पिटने का अधिकार है? आखिर किसान के नाम पर ऐसी गुंडागर्दी कब तक चलती रहेगी?
चोरी और सीनाजोरी इसी को कहते हैं, पहले इन्होनंे परस्थिति जन्य घटना को अंजाम देने के लिए बाध्य किया और यह कहना गलत नहीं होगा कि वाहन चालक को इन्होंने वाहन भगाने के लिए मजबूर किया। फिर इन्होंने ही हिंसा फैलायी। हिंसा किस तरह से फैलायी वह भी स्पष्ट है। इनकी हिंसा डराने वाली थी, इनकी हिंसा देश को अस्थिर करने वाली थी, इनकी हिंसा मानवता का खून करने वाली थी। इन्होने न केवल गाडि़यों को पलट दिया और उसमें आग भी लगायी। इन्होंने वाहन चालक सहित पांच भाजपा कार्यकर्ताओं को मौत का घाट उतार दिया। मृत शरीर पर अंधाधुंध लाठियां बरसाते रहे। क्या भाजपा के कार्यकर्ताओं की जानें प्यारी नहीं थी, क्या भाजपा के मारे गये कार्यकर्ताओं के परिजनों के सामने पहाड़ नहीं टूट आया है। मारे गये सभी भाजपा कार्यकर्ता कोई धनाढ़य वर्ग के तो थे नहीं, ये भी मध्यम वर्ग के थे। अगर इसी तरह आपके खिलाफ भी भाजपा के कार्यकर्ता हथियार उठा लेंगे तो फिर आपकी स्थिति क्या होगी?
केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अनिल मिश्र टेनी ने सही कहा है कि किसानों के नाम पर उपद्रवी तत्वों ने हिंसा फैलायी है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अनिल मिश्र टेनी चूकि जिम्मेवार पद पर बैठे हैं, इसलिए उन्होंने संयमित प्रतिक्रिया दी है, अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने अन्य तत्वों के नाम का उल्लेख नहीं किया। पर लखीमपुर खीरी की घटना में कई प्रकार के तत्व पर पहले से ही उपस्थित थे। तत्वों के प्रकार जानेंगे तो आप हैरानी में पड़ जायेंगे? यह सोचने के लिए मजबूर हो जायेंगे कि हमारे राष्ट के खिलाफ इतने बड़े-बड़ते तत्व खड़े हैं और साजिश में लगे हुए हैं। एक तत्व भिंडरावाले का है, वही भिंडरावाले जो भारत की एकता और अखंड़ता को तोड़कर खालिस्तान का निर्माण करना चाहता था, वही भिंडरावाले जिसने हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान और आईएसआई के इसारे पर लट्टू की तरह नाचता था, वही भिंडरावाले जिसे राजीव गांधी ने आतंकवादी मानने से इनकार कर कहा था कि वे एक महान संत हैं और जिसे इन्दिरा गांधी ने राजनीतिक संरक्षण दे रखा था, वही भिंडरावाले जिसे मारने के लिए इन्दिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर मे सेना भेजकर ब्लू स्टार आपरेशन की थी। जानना यह भी जरूरी है कि जो किसान वाहन पर पत्थर बरसा रहे थे और भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसा कर उनकी जान ली थी वे सभी भिंडरावाले लिखे हुए टीशर्ट पहने हुए थे और साथ ही साथ भिड़रावाले का नारा भी लगा रहे थे। वीडीओ फूटेज की अगर गहनता के साथ जांच होगी तो फिर इस तथ्य की सत्यता सामने आ जायेगी।
साजिश वाले तत्व समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के थे। कांग्रेस और अन्य राजनीतिक पार्टियां किसानों को भरमाने , किसानों को उपद्रवी, किसानो को हिंसक बनाने में कितने सहयोगी रहे है, यह स्पष्ट है। कांग्रेस का मुख्यमंत्री सरेआम कहता है कि मेरे राज्य में नहीं भाजपा राज्य और दिल्ली में जाकर आंदोलन करो। पहले किसानों को उकसाया, हिंसक बनाया और अब उन पर आंसू बहाने का कार्य भी कांग्रेस और अन्य राजनीतिक पार्टियां कर रही है। लखनउ की घटना तो नोटिस मे लिया ही जाना चाहिए। लखनउ की घटना में अखिलेश यादव ने किस प्रकार से हिंसा का सहारा लिया है, यह भी स्पष्ट हो गया। अखिलेश यादव के घर के सामने सपा के कार्यकर्ताओं ने एक पुलिस गाड़ी को सरेआम जला दिया, पुलिस वालों पर बल का प्रयोग किया। अखिलेश यादव अपने घर पर नजरबंद हैं। उन्हें लखीमपुर खीरी जाकर हिंसा फैलाने की स्वीकृति नहीं मिली। इसी कारण अखिलेश यादव के इसारे पर पुलिस की गाड़ी में आग लगायी गयी। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में बलात्कार और मुस्लिम लोमहर्षक हिंसा की दर्जनों घटनाएं हुई हैं, राजस्थान में मुस्लिम उग्रपंथियों और सांप्रदायिक तत्वो ने कई दलितों की हत्याएं की है पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उन हताहत दलितों के घर नहीं गये। पर राजनीतिक लाभ के लिए लखीमपुर खीरी तक दौड़ लगा रहे है और हिंसा करने वाले और देश विरोधी तत्वों का उत्साह भी बढ़ा रहे हैं।
राकेश टिकैत की मुस्लिम परस्त मानसिकता कौन नहीं जानता है। राकेश टिकैत को कौन सा जन समर्थन है? इस तथ्य को हमेशा नकारा क्यो जाता है कि राकेश टिकैत का नजरिया और सक्रियता राजनीतिक है। वे विधानसभा का एक नहीं बल्कि दो-दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। दोनों बार विधान सभा चुनाव में जमानत जब्त करा चुके हैं। ये अजित सिंह की पार्टी के सदस्य हैं। हरियाणा में एक खास लोगों के वर्चस्व टूटना इन्हें पंसद नहीं है। क्या कोई यह बतला सकता है कि अल्ला हू अकबर किसानों का नारा हो सकता है? अगर नही ंतो फिर अल्ला हू अकबर का नारा राकेश टिकैत किस एजेंडे के तहत लगाते हैं, क्या हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए राकेश टिकैत अल्ला हू अकबर का नारा नहीं लगाता है? पंजाब और हरियाणा में भी क्या हिन्दुओ को निशाना नहीं बनाया गया है, हिन्दुओं को अपमानित नहीं गया है? क्या आप क्रिकेटर युवराज सिंह के बाप का बयान भूल गये जिसमें उन्होंने किसान बिल को लेकर हिन्दुओं को धमकाया था और अपमानित किया था?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की अन्य सरकारों की तारीफ होनी चाहिए। दस महीनो से इनका आंदोलन चल रहा है। दस महीनों तक दिल्ली में नरेन्द्र मोदी, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने कोई बल प्रयोग नहीं किया, बलप्रयोग होता तो निश्चित तौर पर किसानों के वेश में हिंसा कर रहे देश द्रोहियों को आठ-आठ लाशें बिछाने का अवसर नहीं मिलता? इनकी साजिश तो पहले दिन से ही हिंसा कराने की थी और नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने की थी। यह सबको पता है कि यह तथाकथित आंदोलन उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव तक चलना है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार निशाने पर है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में देशद्रोहियों का जो संहार किया है, अपराधियो को सही जगह पर रखा है उससे कांग्रेस, सपा और अन्य दलो की नींद उड़ी हुई है और तथाकथित किसानों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में भाजपा का सफाया करना चाहते हैें। पर अब कड़े कदम की आवश्यकता है। तथाकथित किसानों को आठ-आठ लाशें बिछाने जैसी छूट नहीं मिलनी चाहिए।

‘गणतंत्र किसी के बाप की जागीर है, ट्रैक्टर रोके तो बकल उतार दिए जाएँगे, बैरिकेड्स तोड़ेंगे’: टिकैत और चढूनी ने खुलेआम दी थी धमकी

                                      राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी ने दी थी खुलेआम धमकियाँ
दीप सिंह सिद्धू तो खालिस्तानी समर्थक है ही और वो उस गिरोह का भी सदस्य है, जो ‘किसान आंदोलन’ के पीछे है और जिसे गणतंत्र दिवस के दिन ‘किसानों’ की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिन भर हिंसा की। एक दीप सिद्धू ही नहीं, बल्कि इसी गिरोह के कई नेता हैं जिन्होंने हिंसा की धमकी दी थी। किस-किस से पल्ला झाड़ेंगे? यहाँ हम 2 किसान नेताओं राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी के 2 धमकी भरे बयानों के बारे में बताएँगे, जिनसे पता चलता था कि गणतंत्र दिवस को क्या होने वाला है।

नीचे संलग्न किए गए वीडियो में टिकैत कहते सुनाई दे रहे हैं, “देश को गणतंत्र दिवस मनाने का अधिकार है। किसी के बाप की जागीर है गणतंत्र दिवस। ये गणतंत्र दिवस दुनिया का किसान मनाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी परेड होगा। कौन रोकेगा किसान को। अगर ट्रैक्टर को रोका गया तो उसका इलाज होगा। अगर किसी ने रोका तो उसकी बकल उतार दी जाएगी। कौन रोकेगा ट्रैक्टर को? कोई नहीं रोकेगा। खबरदार जो किसी ने भी ट्रैक्टर को रोका। आप बकवास कर रहे हैं।”

वहीं एक बयान है गुरनाम सिंह चढूनी का। इसमें वो कहते हैं, “हमें बुलाने का मकसद क्या है? खाली तारीख देने के लिए बैठक बुलाती है सरकार। उन्होंने 15 तारीख को आने को कहा और 7 लोगों को ही लाने के लिए बोला। अब 7 जाएँगे कि 60, ये तो हम फैसला कर के ही बताएँगे। लेकिन, बात ये है कि सरकार कुछ मानने को तैयार नहीं है। सरकार जिद पर अड़ गई है। हम 26 तारीख को सरकार को चेतावनी देने वाले हैं।”

मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को प्रस्तावित हिंसा को लेकर उन्होंने तभी कहा था, “उस दिन हमने सभी किसानों से कहा है कि वो तैयारी कर के अपने ट्रैक्टरों के साथ आ जाएँ और हम सब जबरदस्ती पुलिस की बैरिकेड्स तोड़ कर दिल्ली में घुसेंगे। सरकार गोली मारे, लाठी मारे या जो करना है करे। लेकिन, ये फाइनल मैच होगा। उस दिन जो भी होगा, वो सरकार की जिम्मेदारी होगी। ये हमारी बात नहीं सुन रहे।”

यह ट्वीट कांग्रेस ने तुरंत डिलीट किया यह किसी के पास नहीं मिलेगा सिर्फ 40 से 42 सेकंड था कांग्रेस का गद्दारी भरा ट्वीट

अवलोकन करें:-

26 जनवरी परेड वाले मंदिर ‘केदारनाथ’ और ‘राम मंदिर’ पर किसान दंगाइयों का आतंक, गुंबद तोड़ा

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
26 जनवरी परेड वाले मंदिर ‘केदारनाथ’ और ‘राम मंदिर’ पर किसान दंगाइयों का आतंक, गुंबद तोड़ा

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि फ़रवरी 1, 2021 को जब देश की संसद में बजट पेश किया जा रहा होगा, तब वो फिर से संसद की तरफ मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को हुई जबरदस्त हिंसा के बावजूद ये योजना स्थगित नहीं की गई है। किसान नेता राकेश टिकैत ने खालिस्तानी समर्थक दीप सिद्धू से पल्ला झाड़ते हुए उसे भाजपा का कार्यकर्ता बता दिया है। हिंसा पर उन्होंने कहा कि गलती पुलिस की है। 

26 जनवरी के दिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘कश्मीर वापस लेंगे’ के नारे: अरशद, इमरान समेत 4 गिरफ्तार

                                                 वी़डियो से लिए गए स्क्रीनशॉट

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जहाँ पूरे देश में 26 जनवरी को लेकर खुशी का माहौल था, उस समय जयपुर-भोपाल ट्रेन में पाकिस्तान जिंदाबाद और कश्मीर वापस लेंगे जैसे नारे लगाए गए। इस घटना के बाद पुलिस ने 4 युवकों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए चारों युवक उज्जैन से अजमेर जा रहे थे।

आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153(ख)(1)(क) के अंतर्गत कार्रवाई हुई है। इसके तहत 3 साल की सजा का प्रावधान है। चारों आरोपितों की ट्रेन के अंदर बैठे एक वीडियो भी सामने आई है। हालाँकि इसमें वह नारे लगाते नहीं दिखाई दे रहे।

दैनिक भास्कर के अनुसार, सोमवार रात जयपुर-भोपाल एक्सप्रेस उज्जैन जंक्शन से 8.20 पर छूटी थी। इसके बाद कोच नंबर डी-2 में कुछ युवकों को राष्ट्रविरोधी बातें करते सुना गया। जब अन्य यात्रियों ने इस पर आपत्ति जताई, तो चारों युवक व उनके साथ के लोग मारपीट पर आमादा हो गए।

बात बढ़ी तो अन्य यात्रियों ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। लेकिन तब तक सभी आरोपित फरार होने की कोशिश करने लगे। जब ट्रेन रात 9:20 पर नागदा जंक्शन पहुँची, तो वहाँ जीआरपी ने चार युवकों को हिरासत में ले लिया। वहीं इनके कुछ साथी फरार हो गए।

टीआई ने घटना के संबंध में बताया कि पकड़े गए युवकों में शाजापुर का अरशद और इमरान खान और उज्जैन के आगर रोड सम्राट नगर निवासी जैदखान व खंदार मोहल्ला निवासी साहेबुद्दीन हैं। चारों और फरार हुए उनके साथी अजमेर जा रहे थे।

इस पूरे मामले में उज्जैन के अंकपात मार्ग निवासी सूरज सेन ने शिकायत करवाई है। सूरज ने आरोपितों पर इल्जाम लगाया कि वह, देश विरोधी बातें कर रहे थे, इसलिए पहले उन्होंने उन सबको ऐसा करने से मना किया। लेकिन बात मानने की बजाय युवकों ने उन्हीं के साथ मारपीट शुरू कर दी।

इससे पहले पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का मामला दिल्ली के खान मार्केट से सामने आया था। स्थानीय लोगों की शिकायत पर पुलिस ने मौके पर पहुँच कर घटना में शामिल दो पुरुषों, एक नाबालिग और तीन महिलाओं को पकड़ा था। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने यहाँ किराए पर बाइक्स लीं और एक-दूसरे से रेस लगाने लगे। इस दौरान उन्होंने एक-दूसरे का नाम देशों के नाम पर रखा, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था।

किसानों के आंदोलन में माओवादियों ने प्रवेश कर लिया : पंजाब बीजेपी नेता

आज होने वाली किसानों से वार्ता निष्फल होगी, क्योकि जब किसान नेता अपनी बुद्धि से नहीं अराजकों की बुद्धि से चल रहे हों, समाधान की उम्मीद करना ठीक वैसे है जैसाकि चील के घोंसले में मांस ठूंठना। राकेश टिकैत जिसने पहले बिल का समर्थन किया, अब वापस लेने की बात कर रहा है, दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी जो सबसे पहले कानूनों को लागु करने वाले मुख्यमंत्री हैं, अब पंजाब चुनाव को ध्यान में रख विरोध कर रहे हैं। और भी अनेकों नेता और पार्टियां हैं, जो कृषि कानून को किसानों के हित में मानते हैं, लेकिन अराजक तत्वों के कारण विरोध कर रहे हैं। प्रमाण के लिए किसी भी पार्टी के घोषणा-पत्र को देख लो, सब ने इन्ही प्रावधानों को लागु करने की बात कही है, अब इनसे पूछो, "फिर किस कारण आंदोलन को हवा दे रहे हो।"  
तीन कृषि कानूनों के विरोध में कई किसान संगठन पिछले लगभग छह सप्ताह से दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले हुए है, वहीं इन कानूनों को किसान संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। कई किसान संगठन केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलकर अपना समर्थन पत्र सौंप चुके हैं। उधर मोदी सरकार भी कानून को लेकर चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए लगातार अपनी पार्टी के नेताओं से भी संवाद कर रही है। इसी क्रम में
 मंगलवार को पंजाब के बीजेपी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की।

प्रधानमंत्री मोदी से मिलने वाले पंजाब के बीजेपी नेताओं में पूर्व मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी और हरजीत सिंह ग्रेवाल शामिल थे। लगभग दो घंटे की मुलाकात के बाद बीजेपी नेताओं ने कहा कि किसान यूनियन के नेताओं से अधिक प्रधानमंत्री मोदी किसानों को लेकर चिंतित हैं। प्रधानमंत्री पंजाब को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। उनसे पंजाब से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा हुई।

पूर्व मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा, “मैं प्रभावित हूं कि वह (प्रधानमंत्री) पंजाब के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। हमने किसान के मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्होंने उनके लिए चिंता व्यक्त की है। न तो हमारे पास कोई ऐसा प्रधानमंत्री होगा जो इतना बुद्धिमान हो और न ही हमारे पास कभी था। प्रधानमंत्री पंजाब को बेहतर तरीके से समझते हैं और किसानों को अहमियत देते हैं।”

बीजेपी नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि किसानों के आंदोलन में माओवादियों ने प्रवेश कर लिया है वे इस मुद्दे को हल नहीं होने दे रहे। वहीं बीजेपी नेता सुरजीत कुमार ज्याणी ने कहा कि किसानों को अड़ना नहीं चाहिए, उन्हें कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग छोड़ देनी चाहिए।

गौरतलब है कि ज्याणी को पिछले साल तीन कृषि विधेयकों पर पंजाब के किसानों से चर्चा के लिए बीजेपी की ओर से गठित किसान समन्वय समिति की अध्यक्षता सौंपी गई थी। उस समय ये विधेयक संसद से पारित नहीं हुए थे। ग्रेवाल भी इस समिति के सदस्य थे। पंजाब बीजेपी के इन नेताओं की प्रधानमंत्री से मुलाकात सरकार और किसानों के बीच संपन्न हुई सातवें दौर की वार्ता के ठीक एक दिन बाद हुई है।

किसानों के आंदोलन में माओवादियों के प्रवेश की बात की पुष्टि विभिन्न मीडिया और खुफिया रिपोर्टों से हुई हैं।

किसान नेता सरदार वीएम सिंह का कांग्रेस से संबंध

न्यूज एजेंसी IANS ने उन रिपोर्टों की एक श्रृंखला प्रकाशित की है, जिसमें ‘किसान प्रदर्शनकारी’ नेताओं के राजनीतिक संबंधों का खुलासा किया गया है। प्रदर्शन में शामिल अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के प्रमुख सरदार वीएम सिंह कांग्रेस नेता हैं। दिसंबर 2015 में इन्होंने पॉलिटिकल पार्टी राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ पार्टी बनाई थी। इससे यह चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा 2007 और 2012 में एआईटीसी से टिकट लेकर भी चुनाव लड़े हैं। उनके पास करोड़ों की संपत्ति भी है और 8 अलग-अलग मामलों में आरोपित हैं।

कांग्रेस का समर्थन करता है भारतीय किसान यूनियन मान

भारतीय किसान यूनियन मान के जनरल सेक्रेटरी बलवंत सिंह बहराम हैं। राजनीतिक तौर पर यह संगठन कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। इस संगठन का सिर्फ मोगा जिले के कुछ इलाकों में ही प्रभाव है। बाकी यह काफी छोटा संगठन है लेकिन मीडिया में अपना काफी प्रभाव रखता है।

AAP से जुड़ा है भारतीय किसान यूनियन गुरनाम

भारतीय किसान यूनियन गुरनाम के संस्थापक गुरनाम सिंह चादूनी हैं। गुरनाम सिंह कुरुक्षेत्र के एक मशहूर किसान नेता हैं। हरियाणा में कई बार यह किसानों के लिए रैली कर चुके हैं। भारतीय किसान यूनियन गुरनाम की स्थापना 2004 में इन्होंने किया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इनके अच्छे संबंध हैं।

नक्सलियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों से बीकेयू (उग्रहा) का संबंध

दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसान प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन एकता उग्रहा के सबसे अधिक सदस्य मौजूद है। इसके मुख्य फाउंडर और प्रेसिडेंट जोगिंदर सिंह उग्रहा हैं। जोगिंदर सिंह उग्रहा ने 2002 में बीकेयू उग्रहा किसान संगठन बनाया था। IANS के मुताबिक उग्रहा के प्रदर्शन में शामिल किसान ही एलगार परिषद मामले में शामिल ‘अर्बन नक्सलियों’ और दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार इस्लामिक कट्टरपंथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

बीकेयू (उग्रहा) के वकील और समन्वयक एनके जीत ने कहा कि पूरे भारत में नक्सल आंदोलन हमेशा से किसानों का आंदोलन रहा है। नक्सलवाद ने आदिवासियों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने में मदद की है। इसलिए जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार को जो मांग-पत्र सौंपा था, उसमें भी यह मांग शामिल था।

माकपा से जुड़ा है क्रांतिकारी किसान यूनियन

क्रांतिकारी किसान यूनियन के संस्थापक और स्टेट प्रेसिडेंट डॉक्टर दर्शन पाल हैं। इस संगठन की स्थापना 2016 में हुई थी। यह संगठन राजनीतिक तौर माकपा की तरफ झुकाव रखता है। दर्शन पाल पर एलडब्ल्यूई एक्टिविटीज के चलते आरोप लगते रहे हैं। यही नहीं इनके कई सीपीआई (मोओविस्ट) नेताओं से संपर्क रहे हैं, जिसे लेकर इनके ऊपर बड़े सवाल उठे हैं।

PDFI का संस्थापक सदस्य है दर्शन पाल

दर्शन पाल कथित तौर पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PDFI) के संस्थापक सदस्य भी हैं। अन्य सदस्यों में वरवरा राव, कल्याण राव, मेधा पाटकर, नंदिता हक्सर, एसएआर गिलानी और बीडी सरमा हैं। PDFI माओवादियों द्वारा अपनी स्थिति को मजबूत और विस्तार करने के लिए गठित किए गए टैक्टिकल यूनाइटेड फ्रंट (टीयूएफ) का एक हिस्सा है। 

माकपा से जुड़ा है भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी

प्रदर्शन में शामिल भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के संस्थापक सुरजीत सिंह फूल हैं। इस किसान संगठन की 2004 में स्थापना की गई थी। इस संगठन का राजनीतिक झुकाव माकपा की तरफ है। सुरजीत सिंह फूल के ऊपर कई बार पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है। यही नहीं पंजाब सरकार ने 2009 में इन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था क्योंकि इनके संबंध कई नक्सलियों से बताए गए थे। ‘गहन पूछताछ’ के लिए फूल को अमृतसर की जेल में रखा गया था।

माकपा से जुड़ा है कीर्ति किसान यूनियन

कीर्ति किसान यूनियन के संस्थापक निर्भय सिंह दूधीके हैं। 1972 में इस किसान संगठन की स्थापना की गई थी। यह किसान संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट डेमोक्रेटिक से राजनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा जम्हूरी किसान सभा के प्रेसिडेंट सतनाम सिंह अजनाला हैं। इस संगठन की स्थापना 2004 में हुई थी। इस संगठन की भी राजनीतिक संपर्क हैं। रिवॉल्यूशनरी मार्कसिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से इसके राजनीतिक संबंध बताए जाते हैं।

अपने-अपने एजेंडे को पूरा करने की लगी है होड़

किसानों के नाम पर हो रहे प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों और देश विरोधी ताकतों की भारी भागीदारी देखी जा रही है। प्रदर्शन में खालिस्तानी झंडे, विवादित पोस्टरों और बयानों की भरमार है। प्रदर्शन स्थलों पर मसाज पार्लर, जिम की व्यवस्था, पिज्जा की सुविधा से पता चलता है कि इनका कृषि कानून से कोई लेनादेना है। इनका एकमात्र मकसद अपने एजेंडे को लागू करना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश को बदनाम कर सरकार पर दबाव बनाना है। 

समर्थन के नाम पर वाशिंगटन में महात्मा गांधी का अपमान

किसान आंदोलन के समर्थन में विदेशों में भी प्रदर्शन एवं संयुक्त रैलियां की जा रही हैं लेकिन अब इन आंदोलनों को खालिस्तानी संगठनों ने हाईजैक कर लिया है। कनाडा के बाद अब ब्रिटेन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में किसानों के समर्थन में प्रदर्शन के नाम पर अधिकतर खालिस्तानी और पाकिस्तानी समर्थक शामिल हो रहे हैं। अमेरिका के वाशिंगटन में किसान आंदोलन के समर्थन में किए गए प्रदर्शन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर खालिस्तान का तथाकथित झंडा लपेट दिया गया। ये प्रदर्शन सिख अमेरिकन यूथ संस्था द्वारा आयोजित किया गया था।

हरियाणा में हथियारों संग गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकी SFJ से जुड़े तार

                                   खालिस्तानी आतंकी समूह सिख फॉर जस्टिस (साभार: zee news)
हरियाणा पुलिस ने हाल ही में करनाल से दो हथियारबंद खालिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के लिए काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह अमेरिकी मूल के गुरमीत सिंह के संपर्क में थे। खालिस्तानी गुरमीत सिंह ने इनके खाते में मनीग्राम (MoneyGram) के ज़रिए लाखों रुपए भेजे थे। 

किसान प्रदर्शन के शुरू होते ही, प्रदर्शन पर अराजक तत्वों द्वारा कब्जे के समाचार आने लगे थे, वह शंका अब दूर हो चुकी है। यदि वह अपने मकसद में सफल हो जाते निश्चित रूप से देश में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से कहीं अधिक भयानक दंगे हो रहे होते। जो 1984 से कहीं अधिक गाँधी हत्या के बाद हुए चितपावन ब्राह्मणों के हुए भयंकर नरसंहार से भी अधिक भयानक हो सकते थे। और इस प्रदर्शन को समर्थन दे रहे सियासतखोर नेता और पार्टियां विधवा विलाप कर रहे होते। केंद्र सरकार के साथ-साथ किसानों के दायित्व है कि आंदोलन में सम्मिलित ऐसे अराजक तत्वों को तुरंत पुलिस के हवाले करें, इसी में उनका और देश का हित है।  

पूछताछ में दोनों आरोपितों ने यह भी बताया कि गुरमीत सिंह ने उन्हें हथियार खरीदने और दो ऐसे लोगों की हत्या करने का आदेश दिया था जिन्होंने कथित तौर पर सिख धर्म के विरुद्ध बोला था। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ गिरफ्तार किए गए खालिस्तानियों का नाम तेजप्रकाश (काका) और आकाशदीप सिंह (सोनू) है। दोनों लुधियाना के रहने वाले हैं। हरियाणा की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने इनके पास से कई हथियार और ज़िंदा कारतूस बरामद किए हैं।

 

हरियाणा पुलिस ने इन खालिस्तानी आतंकियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वे हथियार खरीदकर वापस लौट रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दो शिवसेना नेताओं (सुधीर सूरी और गुरशरणमंद) पर हमले की योजना बना रहे थे। वह फेसबुक के ज़रिए SFJ के गुरमीत सिंह से लगातार संपर्क में थे। गुरमीत सिंह ने इन दोनों को उनके कट्टरपंथी विचारों की वजह से योजना में शामिल किया था। गुरमीत सिंह ने दोनों को हथियार खरीदने के लिए MoneyGram से पैसे भेजे थे। दोनों खालिस्तानी आतंकियों को यूएपीए की धारा 10 और 13, आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54, 59 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

 SFJ के इन दो आतंकियों की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब किसान आंदोलन में इस प्रतिबंधित संगठन की घुसपैठ को लेकर लगातार आशंकाएँ जताई जा रही है।

किसान आंदोलन पर खालिस्तानियों का कब्ज़ा 

पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे जिससे यह स्पष्ट था कि किसान आंदोलन पर खालिस्तानी तत्वों का कब्ज़ा हो चुका है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।कई खालिस्तानी आतंकी किसानों के भेस में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और इंदिरा गाँधी की हत्या के मुद्दे पर अपनी पीठ थपथपाते हुए नज़र आए। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी धमकी देते हुए नज़र आए और कहा कि किसानों की माँग पूरी नहीं हुई तो उनका भी वही हाल होगा। किसान आंदोलन के बीच तमाम अराजक तत्वों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और कट्टरपंथियों को रिहा करने की माँग उठाई थी।

इसके बाद पंजाब के किसानों को भड़काने के आरोप में SFJ की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। फ़िलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ SFJ की संदिग्ध भूमिका को लेकर जाँच कर रही हैं। इसी बीच ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि खालिस्तान समर्थक तत्वों ने किसान आंदोलन को हाइजैक कर लिया है। पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तानी संगठन SFJ ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि पंजाब और हरियाणा के जो किसान खालिस्तान का समर्थन करेंगे उन्हें 1 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। 

‘किसान’ आंदोलन में भीड़ बढ़ाने का तरीका: लालच देकर लाई गई 3 महिलाओं ने खोला काला चिट्ठा, लौटना चाहती हैं घर

                         किसान आंदोलन में परेशान घूम रही महिलाएँ (साभार: दैनिक जागरण)

जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून को मुसलमानों के विरुद्ध बताकर धन, बिरयानी और बढ़िया नाश्ता देकर तमाशा किया गया था, उसी तर्ज़ पर वर्तमान में किसान आंदोलन के समाचार आने शुरू हो चुके हैं। दोनों में अंतर केवल इतना ही पात्र बदल गए हैं, लेकिन पटकथा लेखक वही है।नारों में भी लगभग समानता है, देखिए : 

नागरिकता संशोधक विरोध                                 किसान आंदोलन 

योगी तेरी कब्र खुदेगी, मोदी तेरी                            मोदी को भी ठोकेंगे 

कब्र खुदेगी 

हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी                                     खालिस्तान 

बिरयानी, नाश्ता और चाय-पानी                            पिज़्ज़ा, मेवा, टीवी, बंध टेंट, मशीनों से                                                                रोटियां, ट्रैक्टर वैनिटी, ट्रैक्टर वैनिटी                                                                 (ब्यूटी पार्लर) मोबाइल बाथरूम टॉयलेट

,बॉडी मसाज पार्लर, पिज़्ज़ा पार्लर, जिम

,धोबी और कपड़ों को प्रेस करने 

की सुविधा,ऑटोमेटिक जूता पोलिश मशीनें

मोदी हमारे पास आकर बात करें                        मोदी आये बात करे 

CAA रद्द करो                                            तीनो कानून रद्द करों 

‘किसान’ आंदोलन के नाम पर प्रदर्शन स्थल पर बैठी 3 महिलाओं की पीड़ा जानने के बाद अब इस प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठना लाज़मी हो गया है। इन महिलाओं के नाम वीनू, सुनीता और पप्पी हैं। तीनों का आरोप है कि इन्हें एक व्यक्ति बरेली के फरीदपुर से यूपीगेट तक लाया और फिर वहाँ इन्हें बैठा कर गायब हो गया।

दैनिक जागरण में दिसंबर 19, 2020 को प्रकाशित हुई खबर के मुताबिक, यूपीगेट पर भीड़ बढ़ाने के लिए इन लोगों को लालच दिया गया और अब तीनों महिलाओं को इस लालच में फँसने का अफसोस हो रहा है।

महिलाएँ आपबीती सुनाते हुए उस व्यक्ति को कोसती हैं, जो उन्हें यूपी गेट तक लाया। वह कहती हैं कि इससे अच्छी तो वह फरीदपुर में ही थीं। सरकार ने उन्हें रहने के लिए घर दिया था। हर महीने राशन मिल रहा था। फैक्ट्री में नौकरी भी चल रही थी। लेकिन अब यूपीगेट में कुछ भी नही हैं।

महिलाओं के अनुसार उन्हें इलाज के लिए पैसे चाहिए थे, इसलिए जब उन्हें पैसे देने को कहा गया तो वह उस व्यक्ति के साथ चल दीं। हालाँकि अब उनके पास सर्दी में ठिठुरने की बजाय कोई रास्ता नहीं है। खबर के अनुसार, महिलाओं के पास न कंबल है और न उन्हें गर्म कपड़े मिले हैं।

तीनों महिलाओं की अलग-अलग परेशानियाँ हैं, जिसका इस्तेमाल उन्हें यूपीगेट तक लाने के लिए किया गया। जैसे सुनीता के अनुसार, एक हादसे में उनके शरीर के कुछ हिस्से जल गए थे, जिस वजह से वह काफी परेशान हैं। वहीं पप्पी को पथरी हो गई थी और उन्होंने हाल में अपना ऑपरेशन करवाया था। वीनू कहती हैं कि उनके पति के हाथ में फ्रैक्चर है, जिसकी वजह से वह कई दिन से चारपाई पर पड़े हैं।

महिलाएँ बताती हैं कि उन्हें इलाज और रुपया दोनों का लालच दिया गया। इसी कारण वह बरेली से यूपीगेट आ गईं। वह कहती हैं कि जब इस आंदोलन से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनकी कोई मदद भी नहीं हो रही तो आखिर उनको यहाँ क्यों लाया गया। तीनों महिलाएँ सुरक्षित अपने घरों को वापस लौटना चाहती हैं। वहाँ जाकर वह अपना वही जीवन फिर से जीना चाहती हैं।

उल्लेखनीय है कि वीनू, सुनीता और पप्पी नाम की तीनों महिलाएँ एक ओर जहाँ इस आंदोलन के नाम पर ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ ने आज (दिसंबर 21, 2020) से सभी धरना स्थलों पर 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।

‘किसानों’ ने कहा है कि वो 25-27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाकों को मुफ्त कर देंगे और दो दिनों तक हरियाणा के नाकों पर टोल नहीं वसूलने दिया जाएगा। जबकि, पंजाब में पहले से ही कई नाकों पर टोल की वसूली नहीं हो रही है। 

पिज़्ज़ा और मेवा खाने वाले किसानों को केजरीवाल ने भेजा एक-एक केला

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी को एक आम आदमी पार्टी (AAP) नेता/कार्यकर्ता को धिक्कारते और वहाँ से बाहर निकालते हुए देखा जा सकता है। दरअसल, AAP कार्यकर्ता ने प्रति व्यक्ति एक केला देकर कहा था कि ये केजरीवाल सरकार ने दिया है। जिसके बाद भड़के प्रदर्शनकारियों ने उसे बाहर निकाल दिया। बीजेपी नेता प्रीति गाँधी और कांग्रेस कार्यकर्ता गौरव पाँधी ने इसका वीडियो ट्विटर पर शेयर किया था।

वायरल वीडियो में एक प्रदर्शनकारी कहता है, “तुमने मुझे एक केला दिया और कहा कि ये केजरीवाल सरकार ने दिया है। क्या सरकार एक केला देगी?” प्रदर्शनकारियों ने AAP कार्यकर्ता को घेर लिया अपने पार्टी प्रमुख को प्रमोट करने के लिए उसे आड़े हाथों लिया। जिसके बाद उसने डरी हुई आवाज में कहा, “नहीं, सरकार ने एक केला नहीं दिया। यहाँ कई लोग हैं।”

इसने कृषि विरोधी कानून के प्रदर्शनकारी को और अधिक उत्तेजित कर दिया। उन्होंने गुस्से भरे लहजे में पूछा, “क्या तू हमें एक केला देकर वोट हासिल करने की कोशिश कर रहा है? तेरी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की?” AAP कार्यकर्ता ने स्थिति को शांत करने के प्रयास करते हुए यह समझाने की कोशिश की कि वह वोट नहीं माँग रहा है। इसके बाद प्रदर्शनकारी ने उसे वहाँ से बाहर निकलने के लिए कहा और पास में खड़े कुछ प्रदर्शनकारियों ने उसे धक्का देकर बाहर निकाल दिया।

वायरल वीडियो पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस वीडियो को शेयर करते हुए बीजेपी नेता प्रीति गाँधी ने ट्वीट किया, “खुद देखें कि आम आदमी पार्टी के स्वयंसेवक प्रदर्शनकारी किसानों के साथ भिखारियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”

कांग्रेस पार्टी के गौरव पाँधी ने लिखा, “डिअर अरविंद केजरीवाल, किसानों के पास आपके और आपकी घिनौनी राजनीति के लिए ये एक संदेश है। AAP कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध स्थलों पर उपहास किया जा रहा है, लेकिन फिर से, मीडिया ने आपको यह नहीं दिखाया क्योंकि केजरीवाल ने उन्हें विज्ञापन राजस्व खिलाया है।”

हालाँकि, AAP सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में कृषि विरोधी प्रदर्शनकारियों के लिए अपना समर्थन दिखाया है। यहाँ तक कि वे पंजाब के किसानों के साथ ‘एकजुटता’ में धरने पर बैठ गए थे। जबकि उनके साथी पार्टी कार्यकर्ता को प्रदर्शन स्थल पर प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने किसानों के साथ ‘एकजुटता’ व्यक्त की

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने एक दिन के उपवास पर जाने का फैसला किया था। उन्होंने AAP कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एक दिन का उपवास करने के लिए कहा था और साथ ही जनता से आग्रह किया था कि वे ‘किसानों के समर्थन’ में एक दिन के लिए उपवास करें। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता पंजाब के किसानों के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने में लगे हुए हैं, जबकि दिल्ली में उनकी सरकार ने कृषि कानूनों में से एक को अधिसूचित किया था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके विधायक जहाँ पंजाब से आए ‘किसान आंदोलनकारियों’ के समर्थन में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मनोज तिवारी ने खुलासा किया है कि AAP सरकार ने तो मोदी सरकार द्वारा पारित कराए गए 3 कृषि कानूनों में से एक कानून को नवंबर 23, 2020 को ही प्रदेश में लागू कर दिया है। उन्होंने ‘दिल्ली राजपत्र’ के दस्तावेज की तस्वीरें शेयर कर सबूत भी दिखाया।

इस दस्तावेज के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद-123 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में, भारत के राष्ट्रपति ने ‘कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा)’ नामक अध्यादेश, 2020 प्रख्यापित किया है, जिसे विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार का राजपत्र असाधारण भाग-2, खंड-1 में प्रकाशित किया गया है।

आगे लिखा है कि यह किसी भी राज्य की APMC अधिनियम या अन्य कानून के लागू होने के समय प्रवृत्त या प्रलेख के प्रभाव में आने वाले समय में लागू होगा। इस राजपत्र का गौर करने लायक हिस्सा वो है, जिसमें लिखा है, “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली की विधानसभा ने ‘दिल्ली कृषि उपज विपणन अधिनियम, 1998’ (1999 का दिल्ली अधिनियम, संख्या-7) को अधिनियमित किया है, जो जून 2, 1999 से लागू है।”

महिलाओं के सोने के स्थान पर केजरीवाल ने सीसीटीवी कैमरे लगावाए




दिल्ली में आप सरकार के बारे में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगा है कि उन्होंने महिलाओं के सोने के स्थान पर सीसीटीवी कैमरे लगावाए है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मंगलवार, 15 दिसंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से जवाब मांगा है।

इसके पहले सोमवार को दिल्ली बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष योगिता सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से मुलाकात कर केजरीवाल के खिलाफ निजता के अधिकार का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई करने का आग्रह किया। योगिता सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने निगम की महिला नेताओं पर नजर बनाए रखने लिए जिस हथकंडे का इस्तेमाल किया, वह सरासर अशोभनीय और अनैतिक है। अगर मुख्यमंत्री में थोड़ी-सी भी नैतिकता बाकी है, तो उन्हें धरने पर बैठी निगम की महिला नेताओं से माफी मांगनी चाहिए।

दिल्ली में नगर निगम के नेता मुख्यमंत्री आवास के बाहर निगम के नेता फंड जारी करने की मांग को लेकर पिछले एक हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन को खत्म कराने के लिए केजरीवाल महिला पार्षदों के बैठने और सोने के स्थान पर कैमरे लगवा दिए हैं, जिससे धरने पर बैठी महिला नेता असहज महसूस कर रही हैं।

क्या इस किसान आंदोलन के पीछे हनी ट्रैप है? कौन-कौन इस हनी ट्रैप में लिप्त है?

   क्या इस आंदोलन के पीछे हनी ट्रैप का खेल है? सोशल मीडिया पर वायरल फोटो 
प्रदर्शनकारी किसान जहां नए कृषि कानूनों को हर हाल में वापस लेने की मांग पर अड़े हैं, वहीं मोदी सरकार कानूनों को किसानों के हित में बताकर उन्हें समझाने की कोशिश कर रही है। सरकार की दलील है कि नए कानून के तहत किसान मंडियों की गुलामी से मुक्त हो सकेंगे और अपनी इच्छा के अनुसार अपनी कीमत पर अपना कृषि उत्पाद बेच सकेंगे। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। दिल्ली की सीमाओं पर जमे आंदोलनकारी किसानों में बड़ी संख्या पंजाब के किसानों की है, जहां की मंडियों का कुल शुल्क सबसे ज्यादा है।

किसान आंदोलन से अधिक चर्चा इस गंभीर बात को लेकर हो रही है कि आखिर पंजाब मुख्यमंत्री किस आधार पर पाकिस्तानी डिफेंस पत्रकार के साथ लिवइन रिलेशन में हैं? इसके अलावा किस-किस पार्टी के कितने नेता हनी ट्रैप में लिप्त हैं? क्योकि नागरिकता संशोधक कानून विरोध से लेकर चल रहे किसान आंदोलन में वही सब मुद्दे यानि मांगें उठ रही हैं, जिन्हे लेकर पाकिस्तान भारत के विरुद्ध प्रचार करता रहता है। सरकार को इस हनी ट्रैप की गंभीरता से जाँच कर इस ट्रैप में लिप्त नेताओं पर नकेल डालनी पड़ेगी। 

किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार कानून में आवश्यक संशोधन का आश्वासन दे रही है। इसके बावजूद किसान अपनी जिद पर अड़े हुए और हंगामा हर रोज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि देश विरोधी ताकतें किसानों को बहकाने का कोई मौका नहीं चूक रहीं। ये ताकतें आंदोलन की आड़ में अपना हित साधने में लगी है। इसकी पुष्टि इस ‘आंदोलन’ में दिख रही उमर खालिद, शरजील इमाम, वरवरा राव जैसे लोगों की तस्वीरों से होती है।

मंडी लॉबी की मार का सबसे बड़ा भुक्तभोगी केंद्र सरकार

केंद्र सरकार को होता है बड़ा नुकसान जीएसटी से पहले एफसीआई अनाज खरीद के लिए जो मंडियों को विभिन्न लेवी का भुगतान करती थी, वह कई बार एमएसपी का औसतन 13 प्रतिशत तक होता था। पंजाब में तब यह 14.5 प्रतिशत तक था। मंडी लॉबी की इस मार का सबसे बड़ा भुक्तभोगी केंद्र सरकार ही रही है। मसलन, 2019-20 में केंद्र ने एफसीआई और दूसरी एजेंसियों के जरिए जो सिर्फ धान और गेहूं की खरीद की थी, उसकी एवज में उसे 7,600 करोड़ रुपये सिर्फ मंडी टैक्स और आढ़तियों के कमीशन के रूप में देने पड़ गए।

प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने अपने स्टेज पर एक कार्यक्रम किया और इसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव और आनंद तेलतुंबडे जैसे लोगों के पोस्टर-बैनर नजर आए। ये कार्यक्रम टिकरी बॉर्डर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हो रहा था। पोस्टर-बैनर के जरिए मांग की जा रही थी कि गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए। गौरतलब है कि इनमें से कई लोगों पर संगीन मामलों के तहत केस दर्ज हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिन पर UAPA के तहत केस दर्ज है। जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोग शामिल हैं। 

इन पोस्टरों को देखकर लगता है कि किसानों को गुमराह कर जहां सियासी दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, वहीं टुकड़े-टुकड़े गैंग अपने एजेंडे को लागू करने में लगा है। सरकार द्वारा कई मांगों को माने जाने के बावजूद किसान सरकार की सुनने को तैयार नहीं है। वह सिर्फ कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि इस प्रदर्शन के पीछे बड़ी साजिश है। टुकड़े-टुकड़े गैंग चाहता है कि नए कृषि कानूनों के रद्द होने पर सीएए को रद्द करने की मांग तेज की जाएगी।

जिस तरह से इस प्रदर्शन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उससे धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटी जिसे शाहीन बाग के दौरान नजरअंदाज किया जाता रहा और अंत में उसका भीषण रूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला। इसी तरह किसानों की आड़ में भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। 

उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ गौतम नवलखा और वरवरा राव की तस्वीरें इस ओर इशारा करती है कि शाहीन बाग का वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह सक्रिय है। महिला किसानों के हाथों में इनके पोस्टर देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इनका किसानों के आंदोलन से क्या लेनादेना है। अब लोग आंदोलन की असल मंशा पर ही प्रश्न उठाने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि उस शरजील इमाम को रिहा क्यों करवाना चाहेगी जो अपने भाषण में असम को भारत से काटने की बात कह रहा था? दिल्ली में दंगे करवाने के लिए गुपचुप ढंग से बैठकें करने वाले और जाकिर नाइक से मिलने वाले  उमर खालिद से आखिर किसान प्रदर्शन का क्या लेना-देना? अर्बन नक्सलियों से कृषि कानून का क्या संबंध ?