किसान आंदोलन में परेशान घूम रही महिलाएँ (साभार: दैनिक जागरण)
जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून को मुसलमानों के विरुद्ध बताकर धन, बिरयानी और बढ़िया नाश्ता देकर तमाशा किया गया था, उसी तर्ज़ पर वर्तमान में किसान आंदोलन के समाचार आने शुरू हो चुके हैं। दोनों में अंतर केवल इतना ही पात्र बदल गए हैं, लेकिन पटकथा लेखक वही है।नारों में भी लगभग समानता है, देखिए :
नागरिकता संशोधक विरोध किसान आंदोलन
योगी तेरी कब्र खुदेगी, मोदी तेरी मोदी को भी ठोकेंगे
कब्र खुदेगी
हिन्दुत्व तेरी कब्र खुदेगी खालिस्तान
बिरयानी, नाश्ता और चाय-पानी पिज़्ज़ा, मेवा, टीवी, बंध टेंट, मशीनों से रोटियां, ट्रैक्टर वैनिटी, ट्रैक्टर वैनिटी (ब्यूटी पार्लर) मोबाइल बाथरूम टॉयलेट
,बॉडी मसाज पार्लर, पिज़्ज़ा पार्लर, जिम
,धोबी और कपड़ों को प्रेस करने
की सुविधा,ऑटोमेटिक जूता पोलिश मशीनें
मोदी हमारे पास आकर बात करें मोदी आये बात करे
CAA रद्द करो तीनो कानून रद्द करों
‘किसान’ आंदोलन के नाम पर प्रदर्शन स्थल पर बैठी 3 महिलाओं की पीड़ा जानने के बाद अब इस प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठना लाज़मी हो गया है। इन महिलाओं के नाम वीनू, सुनीता और पप्पी हैं। तीनों का आरोप है कि इन्हें एक व्यक्ति बरेली के फरीदपुर से यूपीगेट तक लाया और फिर वहाँ इन्हें बैठा कर गायब हो गया।
दैनिक जागरण में दिसंबर 19, 2020 को प्रकाशित हुई खबर के मुताबिक, यूपीगेट पर भीड़ बढ़ाने के लिए इन लोगों को लालच दिया गया और अब तीनों महिलाओं को इस लालच में फँसने का अफसोस हो रहा है।
महिलाएँ आपबीती सुनाते हुए उस व्यक्ति को कोसती हैं, जो उन्हें यूपी गेट तक लाया। वह कहती हैं कि इससे अच्छी तो वह फरीदपुर में ही थीं। सरकार ने उन्हें रहने के लिए घर दिया था। हर महीने राशन मिल रहा था। फैक्ट्री में नौकरी भी चल रही थी। लेकिन अब यूपीगेट में कुछ भी नही हैं।
लोगों को बरगलाकर भी लाया गया है किसान आंदोलन में! #FarmersProtests pic.twitter.com/pDI2xcBjnH
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) December 20, 2020
आज कृषि बिल व केंद्र सरकार द्वारा किसानो के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों के समर्थन में मेरठ से ग़ाज़ियाबाद तक ट्रेक्टर रैली निकली गयी। हज़ारों ट्रेक्टर में बड़ी संख्या में किसान भाइयों रैली में भाग लिया। pic.twitter.com/utVO5dgqrn
— Anil Baluni (@anil_baluni) December 20, 2020
आज मेरठ उ प्र से आये "हिन्द मजदूर किसान समिति" के प्रतिनिधियों ने नए कृषि सुधार बिलों के समर्थन में ज्ञापन दिया और प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार व्यक्त किया।
— Narendra Singh Tomar (@nstomar) December 20, 2020
उन्होंने कहा कि ये सभी बिल किसानों के हित में हैं व इन्हें वापस नहीं लिया जाना चाहिए।#FarmersWithModi pic.twitter.com/MjvWtMpJZO
Kanwar Singh Tanwar(BJP) got 5,28,880 votes and Rakesh Tikait( RLD) lost deposits 9,539(0.87%) votes on Amroha seat in LS 2014.
— Dhaval Patel (@dhaval241086) December 20, 2020
Today he claims to represent all India Farmers 👏👏 https://t.co/rNmDs4QbdW
पहला सवाल- कृषि क़ानून के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग अगर किसान हैं तो क्या कृषि क़ानून के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोग किसान नहीं हैं?
— Anuraag Muskaan (@anuraagmuskaan) December 20, 2020
दूसरा सवाल- कृषि क़ानून के समर्थन में सड़कों पर उतरे किसानों की संख्या अगर विरोध में उतरे किसानों से ज़्यादा हुई तो इसके क्या मायने होंगे?
दिल्ली वालों दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों के लिए पिज़्ज़ा पार्टी चल रही है, आप भी पहुंचो और मज़ा लो 😂
— दिवेश सिंह (@DiveshS43893953) December 12, 2020
पंजाब का गरीब किसान बेचारा रोटी नहीं खा सकता इसलिए पिज़्ज़ा खाकर गुजारा कर रहा है 😂😜
pic.twitter.com/yXx5Hc1Xck
महिलाओं के अनुसार उन्हें इलाज के लिए पैसे चाहिए थे, इसलिए जब उन्हें पैसे देने को कहा गया तो वह उस व्यक्ति के साथ चल दीं। हालाँकि अब उनके पास सर्दी में ठिठुरने की बजाय कोई रास्ता नहीं है। खबर के अनुसार, महिलाओं के पास न कंबल है और न उन्हें गर्म कपड़े मिले हैं।
तीनों महिलाओं की अलग-अलग परेशानियाँ हैं, जिसका इस्तेमाल उन्हें यूपीगेट तक लाने के लिए किया गया। जैसे सुनीता के अनुसार, एक हादसे में उनके शरीर के कुछ हिस्से जल गए थे, जिस वजह से वह काफी परेशान हैं। वहीं पप्पी को पथरी हो गई थी और उन्होंने हाल में अपना ऑपरेशन करवाया था। वीनू कहती हैं कि उनके पति के हाथ में फ्रैक्चर है, जिसकी वजह से वह कई दिन से चारपाई पर पड़े हैं।
महिलाएँ बताती हैं कि उन्हें इलाज और रुपया दोनों का लालच दिया गया। इसी कारण वह बरेली से यूपीगेट आ गईं। वह कहती हैं कि जब इस आंदोलन से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनकी कोई मदद भी नहीं हो रही तो आखिर उनको यहाँ क्यों लाया गया। तीनों महिलाएँ सुरक्षित अपने घरों को वापस लौटना चाहती हैं। वहाँ जाकर वह अपना वही जीवन फिर से जीना चाहती हैं।
उल्लेखनीय है कि वीनू, सुनीता और पप्पी नाम की तीनों महिलाएँ एक ओर जहाँ इस आंदोलन के नाम पर ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ ने आज (दिसंबर 21, 2020) से सभी धरना स्थलों पर 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।
‘किसानों’ ने कहा है कि वो 25-27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाकों को मुफ्त कर देंगे और दो दिनों तक हरियाणा के नाकों पर टोल नहीं वसूलने दिया जाएगा। जबकि, पंजाब में पहले से ही कई नाकों पर टोल की वसूली नहीं हो रही है।
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