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राजस्थान : 8 महीने में पाकिस्तानी हनीट्रैप के 17 मामले: ISI हायर करता है गरीब घर की सुंदर युवतियाँ

प्रतीकात्मक चित्र साभार: Themes.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पाकिस्तान को चारों खाने चित कर भारतीय जनता से उसका डर निकालने में सफल हुए, लेकिन भारत में पल रहे पाकिस्तान परस्त नेता उनकी पार्टियां और समर्थक ही पाकिस्तान को शक्तिशाली साबित करने का प्रयत्न कर जनता को भयभीत करने का प्रयास कर रहे हैं। ये लोग अगर किसी विदेश में होते, कभी के जेल में बैठे होते, लेकिन ये भारत है जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर जनता को पागल बना सियासती रोटियां सेकी जाती हैं।  
राजस्थान में पिछले 8 महीनों में हनीट्रैप के 17 मामले सामने आए हैं। इसके जरिए ISI की खूबसूरत लड़कियों को भारतीय नागरिकों और जवानों के पीछे लगाया जाता है। सोशल मीडिया के सहारे अपने झाँसे में लेकर भारतीय सेना व सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े राज़ जुटाए जाते हैं और फिर उसे पाकिस्तान पहुँचाया जाता है। कई वर्षों से पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI इस तरह की करतूतों को अंजाम देती रही है। सेना के मूवमेंट और हथियारों के बारे में जानकारियाँ इकट्ठा करना उनकी मुख्य मंशा होती है।

इस सम्बन्ध में ‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी पड़ताल में बताया है कि जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, और श्रीगंगानगर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों पर पाकिस्तान की नजर रहती है। इन सभी जिलों की सीमाएँ पाकिस्तान से लगती हैं। राजस्थान की 1037 किलोमीटर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। भारत इन सीमाओं पर आतंकवाद रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती अपनाता है। पाकिस्तान अब तक स्ट्राइक के डर से अपने 15 गाँवों को खाली करा चुका है।

साथ ही वो पश्चिमी सीमा पर आतंकी कैंपों के तबाह होने से भी घबराया हुआ है। भारत की तरफ से कभी भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है, इसकी पूर्व जानकारी के लिए पाकिस्तान अब हनीट्रैप का सहारा ले रहा है। सेना में नौकरी करने करने वाले, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों और उनकी मूवमेंट पर नजर रखने वालों को फँसाया जाता है। इसके जरिए बंकरों और नई तकनीकों के बारे में सूचना जुटाई जाती है। इसके लिए खूबसूरत युवतियों को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है।

ये सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार के लोगों को फँसाती हैं। खासकर जिन लोगों ने सेना की वर्दी में तस्वीरें डाल रखी होती हैं, उन्हें निशाना बनाया जाता है। इसके बाद चैटिंग की प्रक्रिया शुरू की जाती है। उनके साथ घूमने-फिरने से लेकर शादी तक का झाँसा दिया जाता है। उनके अश्लील वीडियो बना कर के ब्लैकमेल का तरीका भी आजमाया जाता है। अश्लील बातें कर के अकेले मिलने के लिए बुलाया जाता है। कई मामलों में चीनी कंपनी के गैजेट्स या मोबाइल का प्रयोग कर रहे जवानों को ज्यादा निशाना बनाया गया है।

भारतीय सेना के अधिकारियों के गैजेट्स को ट्रैक करने के लिए भी कई तरीके आजमाए जा रहे हैं। उनकी इंटरनेट हैबिट्स और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है और फिर साजिश रची जाती है। सीमा पर कितनी चौकियाँ हैं और जवानों को क्या-क्या नए आदेश मिले हैं, ये जानने में पाकिस्तान की ज्यादा दिलचस्पी है। जवानों से बात कर कैसे उन्हें ब्लैकमेल करना है, इसका प्रशिक्षण इन महिलाओं को ISI देती है। उस हिसाब से उन्हें प्रमोशन मिलता है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय ख़ुफ़िया व सुरक्षा एजेंसियों को इसका पता नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों व सेना के जवानों को हिदायत दी है कि वो ऐसी किसी भी अजान लड़कियों से बातचीत न करें। समय-समय पर उन्हें सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह भी दी जाती रही है। जिन महिलाओं को उनके पीछे लगाया जाता है, उनके परिवारों की जिम्मेदारी ISI ही उठाता है। उन्हें टेक्नोलॉजी की भी पूरी ट्रेनिंग देकर भेजा जाता है। इसके लिए सुंदर और गरीब तबके की महिलाओं को चुना जाता है।

नेपाल में लड़कियों संग पकड़ाए बि​हार के 3 जज बर्खास्त: होटल रजिस्टर के फटे पन्ने और फर्जी बिल से भी नहीं बचे

                                                                                       प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: The Swaddle
बिहार सामान्य प्रशासन विभाग ने निचली अदालतों के तीन न्यायाधीशों को बर्खास्त करने को मँजूरी दे दी है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इन तीनों न्यायाधीशों का नाम 2013 के नेपाल सेक्स स्कैंडल में सामने आया था।

दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इनकी बर्खास्तगी 12 फरवरी, 2014 से ही प्रभावी होगी। बर्खास्त किए गए तीनों न्यायाधीश समस्त लाभों से वंचित रहेंगे। इन तीनों जजों को अब रिटायरमेंट के बाद का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

बिहार सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार समस्तीपुर परिवार न्यायालय के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश हरिनिवास गुप्ता, तदर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश (अररिया) जितेंद्र नाथ सिंह और अररिया के अवर न्यायाधीश सह मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोमल राम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 2015 की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और बिहार सरकार को न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दी थी।

जिन तीन न्यायिक अधिकारियों को बर्खास्त किया गया, उन्हें पुलिस छापेमारी में नेपाल के एक होटल में लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था। घटना 26 जनवरी 2013 की है। न्यायिक अधिकारी होने के कारण नेपाल की पुलिस ने तीनों को छोड़ दिया था। ये सभी विराटनगर स्थित मैट्रो गेस्ट हाउस के अलग-अलग कमरों में ठहरे थे।

विराटनगर से प्रकाशित नेपाली भाषा के अखबार ‘उदघोष’ के 29 जनवरी 2013 के अंक में यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इस मामले की जाँच पूर्णिया के जिला जज ने की और अपनी सिफारिश पटना हाई कोर्ट को भेजी थी। बिहार राज्य बार काउंसिल की ओर से घटना के एक सप्ताह के बाद मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर इस घटना की जानकारी दी गई थी। हालाँकि, जाँच के दौरान पता चला कि मैट्रो गेस्ट हाउस के रजिस्टर के पन्ने को भी फाड़ दिया गया था, जिसमें इन तीनों की एंट्री थी।

मामला सामने आने के बाद पटना हाईकोर्ट ने पूर्णिया के तत्कालीन जिला जज संजय कुमार से मामले की जाँच कराई। जाँच रिपाेर्ट में मामला सत्य पाए जाने के बाद हाई कोर्ट की स्टैंडिंग कमेटी ने तीनों को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इस मामले में गृह मंत्रालय के उप सचिव एसएम कंडवाल ने पटना उच्च न्यायालय के तत्कालीन रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर मामले की जाँच करने के लिए कहा। 

पटना उच्च न्यायालय ने पूर्णिया जिले और सत्र न्यायाधीश को मामले की जाँच करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में लिखा गया कि तीनों न्यायाधीशों ने कहा कि जिस समय घटना हुई, उस समय वे नेपाल में नहीं बल्कि भारत में थे। पूर्णिया जिला और सत्र न्यायाधीश, संजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया कि नेपाली दैनिक ‘उद्घोष’ ने गलत स्टोरी प्रकाशित करने के लिए माफी माँगी थी।

हालाँकि, संजय कुमार द्वारा की गई जाँच से असंतुष्ट पटना उच्च न्यायालय ने गृह मंत्रालय को हस्तक्षेप करने के लिए कहा। गृह मंत्रालय की एक एजेंसी ने आरोपित जजों के मोबाइल फोन के हिस्ट्री को ट्रैक किया और पाया कि उनके फोन 26-27 जनवरी, 2013 को एक साथ ऑफ कर दिए गए थे और जब यह फिर से एक्टिव हुआ तो नेपाल के फोर्ब्सगंज शहर के पास कहीं ट्रेस किया गया था। यह दर्शाता है कि तीनों जज नेपाल में थे, न कि भारत में, जैसा कि उनके द्वारा दावा किया गया था।

गृह मंत्रालय द्वारा दायर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है आरोपित जजों ने होटल के बिल भी पेश किए थे, ताकि यह साबित किया जा सके कि घटना के दिन वे बिहार के पूर्णिया में थे, नेपाल में नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि होटल के बिल तैयार किए गए थे और एक आरोपित न्यायाधीश ने खुद हस्ताक्षर किए थे। निष्कर्षों के आधार पर, तीनों जजों की बर्खास्तगी को मँजूरी देते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया।

इस बीच फरवरी 2014 में, तीनों आरोपित न्यायाधीशों ने बर्खास्तगी के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इसके बाद न्यायिक अधिकारियों यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट गए कि अनुशासनात्मक जाँच के बिना उन्हें बर्खास्त नहीं किया जा सकता है।

इस बीच, पटना HC की पूर्ण अदालत ने HC के आदेश के अनुपालन में उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश के आदेश पारित किए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में राज्य सरकार को सिफारिश पर कार्रवाई करने से रोकते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

हालाँकि, 2019 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा और संजीव खन्ना की पीठ ने आरोपित न्यायिक अधिकारियों की याचिका को खारिज कर दिया और उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसने राज्य सरकार को उनकी बर्खास्तगी पर हाई कोर्ट की सिफारिश पर निर्णय लेने की अनुमति दी। इसमें कहा गया है कि न्यायाधीश राज्य सरकार द्वारा पारित किए गए बर्खास्तगी आदेशों को चुनौती दे सकते हैं।

चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग : विदेशी नेताओं से सेक्स करती है फिर उगलवाती है इन्फॉर्मेशन


                          क्रिस्टीन फेंग के कई नेताओं से जिस्मानी रिश्ते के दावे किए जा रहे हैं (साभार: heavy.com)

क्या चीन महिलाओं को हथियार बनाकर दूसरे देश की सरकारों में घुसपैठ कर रहा है? यह सवाल खड़ा हुआ है एक मीडिया खुलासे से। इसके मुताबिक चीनी जासूस क्रिस्टीन फेंग उर्फ फेंग फेंग (Fang Fang) ने अमेरिकी नेताओं से जिस्मानी रिश्ते बनाकर उनसे गोपनीय सूचनाएँ निकालने की कोशिश की।

इससे पहले नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर खबरें आईं थी कि उन्होंने वहाँ की सरकार में जबर्दस्त प्रभाव बना रखा है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और आर्मी चीफ जनरल पूर्ण चंद्र थापा उनकी कठपुतली हैं। यांगी की दखल आर्मी हेडक्वार्टर से पीएमओ तक बराबर बताई जाती है।

Axios डॉटकॉम ने खुलासा किया है कि चीन की जासूस मानी जाने वाली क्रिस्टीन फेंग ने कैलिर्फोनिया के नेताओं को निशाना बनाया था। इनमें प्रतिष्ठित डेमोक्रेटिक सांसद और संसद की इंटेलीजेंस कमिटी के सदस्य एरिक स्वैलवेल (Eric Swalwell) भी हैं। बताया जा रहा है कि फेंग के 2015 में अमेरिका छोड़ने से पहले स्वैलवेल के साथ अंतरंग संबंध थे। हालाँकि स्वैलवेल लगातार इस सवाल से बच रहे हैं कि क्या सेक्स के बदले उन्होंने फेंग के साथ ‘गोपनीय जानकारी’ साझा की थी या नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार फेंग ने फंड रेजिंग कैंपेन, अपने व्यापक नेटवर्क, आकर्षक व्यक्तित्व और रोमांटिक तथा जिस्मानी रिश्ते स्थापित कर राजनेताओं से संपर्क स्थापित किए थे। स्वैलवेल उसके प्रमुख निशाने में से एक बताए जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2014 में उनके चुनाव के वक्त उसने फंड रेजिंग कैंपेन चलाए। हालाँकि इसमें उसने स्वयं किसी तरह का योगदान नहीं किया और न ही कुछ गैर कानूनी काम हुआ। स्वैलवेल को 2015 में संघीय जाँचकर्ताओं ने उसकी गतिविधियों को लेकर सतर्क किया था।

Axios को दिए बयान में स्वैलवेल के कार्यालय ने बताया है कि फेंग से वे आठ साल पहले मिले थे और करीब 6 साल से देखा भी नहीं है। यह जानकारी वे एफबीआई को दे चुके हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि सतर्क किए जाने के बाद स्वैलवेल ने पेंग के साथ सभी तरह के रिश्ते खत्म कर लिए थे।

यह भी कहा जा रहा है कि फेंग के अमेरिका के कम से कम दो मेयर से भी रोमांटिक अथवा जिस्मानी रिश्ते थे। एक ओहियो के मेयर बताए जा रहे हैं।एक अभी भी फेंग को अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ बताते हैं। फेंग 2015 में अमेरिका छोड़कर चली गई थी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर अभी भी वह स्वैलवेल के परिवार की फ्रेंड लिस्ट में है।

स्वैलवेल का यह भी मानना है कि अमेरिकी चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका लगने के बाद पैदा हुई स्थिति के के मद्देनजर यह मामला उछाला जा रहा है। स्वैलवेल के अलावे एक और प्रतिष्ठित डेमोक्रेट नेता रो खन्ना के भी फेंग के निशाने पर होने की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि वे भी फेंग के शिकार बने थे या नहीं। जैसा कि वह इंटर्न के तौर पर स्वैलवेल के दफ्तर में जगह बनाने में कामयाब रही थी। वैसे स्वैलवेल का दावा है कि उन्होंने किसी तरह की संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की थी।

क्या इस किसान आंदोलन के पीछे हनी ट्रैप है? कौन-कौन इस हनी ट्रैप में लिप्त है?

   क्या इस आंदोलन के पीछे हनी ट्रैप का खेल है? सोशल मीडिया पर वायरल फोटो 
प्रदर्शनकारी किसान जहां नए कृषि कानूनों को हर हाल में वापस लेने की मांग पर अड़े हैं, वहीं मोदी सरकार कानूनों को किसानों के हित में बताकर उन्हें समझाने की कोशिश कर रही है। सरकार की दलील है कि नए कानून के तहत किसान मंडियों की गुलामी से मुक्त हो सकेंगे और अपनी इच्छा के अनुसार अपनी कीमत पर अपना कृषि उत्पाद बेच सकेंगे। सरकार और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। दिल्ली की सीमाओं पर जमे आंदोलनकारी किसानों में बड़ी संख्या पंजाब के किसानों की है, जहां की मंडियों का कुल शुल्क सबसे ज्यादा है।

किसान आंदोलन से अधिक चर्चा इस गंभीर बात को लेकर हो रही है कि आखिर पंजाब मुख्यमंत्री किस आधार पर पाकिस्तानी डिफेंस पत्रकार के साथ लिवइन रिलेशन में हैं? इसके अलावा किस-किस पार्टी के कितने नेता हनी ट्रैप में लिप्त हैं? क्योकि नागरिकता संशोधक कानून विरोध से लेकर चल रहे किसान आंदोलन में वही सब मुद्दे यानि मांगें उठ रही हैं, जिन्हे लेकर पाकिस्तान भारत के विरुद्ध प्रचार करता रहता है। सरकार को इस हनी ट्रैप की गंभीरता से जाँच कर इस ट्रैप में लिप्त नेताओं पर नकेल डालनी पड़ेगी। 

किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए सरकार कानून में आवश्यक संशोधन का आश्वासन दे रही है। इसके बावजूद किसान अपनी जिद पर अड़े हुए और हंगामा हर रोज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि देश विरोधी ताकतें किसानों को बहकाने का कोई मौका नहीं चूक रहीं। ये ताकतें आंदोलन की आड़ में अपना हित साधने में लगी है। इसकी पुष्टि इस ‘आंदोलन’ में दिख रही उमर खालिद, शरजील इमाम, वरवरा राव जैसे लोगों की तस्वीरों से होती है।

मंडी लॉबी की मार का सबसे बड़ा भुक्तभोगी केंद्र सरकार

केंद्र सरकार को होता है बड़ा नुकसान जीएसटी से पहले एफसीआई अनाज खरीद के लिए जो मंडियों को विभिन्न लेवी का भुगतान करती थी, वह कई बार एमएसपी का औसतन 13 प्रतिशत तक होता था। पंजाब में तब यह 14.5 प्रतिशत तक था। मंडी लॉबी की इस मार का सबसे बड़ा भुक्तभोगी केंद्र सरकार ही रही है। मसलन, 2019-20 में केंद्र ने एफसीआई और दूसरी एजेंसियों के जरिए जो सिर्फ धान और गेहूं की खरीद की थी, उसकी एवज में उसे 7,600 करोड़ रुपये सिर्फ मंडी टैक्स और आढ़तियों के कमीशन के रूप में देने पड़ गए।

प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने अपने स्टेज पर एक कार्यक्रम किया और इसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव और आनंद तेलतुंबडे जैसे लोगों के पोस्टर-बैनर नजर आए। ये कार्यक्रम टिकरी बॉर्डर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हो रहा था। पोस्टर-बैनर के जरिए मांग की जा रही थी कि गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए। गौरतलब है कि इनमें से कई लोगों पर संगीन मामलों के तहत केस दर्ज हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिन पर UAPA के तहत केस दर्ज है। जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोग शामिल हैं। 

इन पोस्टरों को देखकर लगता है कि किसानों को गुमराह कर जहां सियासी दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, वहीं टुकड़े-टुकड़े गैंग अपने एजेंडे को लागू करने में लगा है। सरकार द्वारा कई मांगों को माने जाने के बावजूद किसान सरकार की सुनने को तैयार नहीं है। वह सिर्फ कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि इस प्रदर्शन के पीछे बड़ी साजिश है। टुकड़े-टुकड़े गैंग चाहता है कि नए कृषि कानूनों के रद्द होने पर सीएए को रद्द करने की मांग तेज की जाएगी।

जिस तरह से इस प्रदर्शन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उससे धीरे-धीरे यह प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगने से ज्यादा खतरे की घंटी नजर आने लगा है। वही खतरे की घंटी जिसे शाहीन बाग के दौरान नजरअंदाज किया जाता रहा और अंत में उसका भीषण रूप उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के रूप में देखने को मिला। इसी तरह किसानों की आड़ में भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। 

उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ गौतम नवलखा और वरवरा राव की तस्वीरें इस ओर इशारा करती है कि शाहीन बाग का वामपंथी-कट्टरपंथी गिरोह सक्रिय है। महिला किसानों के हाथों में इनके पोस्टर देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इनका किसानों के आंदोलन से क्या लेनादेना है। अब लोग आंदोलन की असल मंशा पर ही प्रश्न उठाने लगे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि उस शरजील इमाम को रिहा क्यों करवाना चाहेगी जो अपने भाषण में असम को भारत से काटने की बात कह रहा था? दिल्ली में दंगे करवाने के लिए गुपचुप ढंग से बैठकें करने वाले और जाकिर नाइक से मिलने वाले  उमर खालिद से आखिर किसान प्रदर्शन का क्या लेना-देना? अर्बन नक्सलियों से कृषि कानून का क्या संबंध ?

नेपाल : सेक्स टेप की चर्चा के बीच जा सकती है प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी

केपी ओली, होऊ यांगी
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के भविष्य का फैसला आज हो सकता है। सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की होने वाली बैठक में इस संबंध में फैसला होने की उम्मीद है।
भारत विरोधी रुख और चीन के बढ़ते दखल को लेकर ओली के खिलाफ पार्टी के भीतर काफी नाराजगी है। पिछले हफ्ते नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने साफ शब्दों में ओली से प्रधानमंत्री पद या पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को कहा था।
इसके बाद ओली ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। ऐसे में उनके इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए बीते गुरुवार(2जुलाई 2020)  को पार्टी की शीर्ष ईकाई स्थायी समिति की बैठक होनी थी, जिसे बाद में शनिवार (4 जुलाई 2020) तक के लिए टाल दिया गया था।
पार्टी के भीतर अपने इस्तीफे की मॉंग उठने के बाद ओली ने इसका ठीकरा भारत पर फोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन प्रचंड ने उनकी इस टिप्पणी को अनुचित करार दिया था।
हाल में नेपाल ने एक नया नक्शा पास किया है। इसमें भारत के कुछ इलाकों को शामिल कर लिया गया है। दूसरी ओर, नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई है।
कोने-कोने में होऊ यांगी की घुसपैठ
नेपाल के भारत विरोधी एजेंडे के लिए होऊ यांगी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। होऊ यांगी नेपाल में चीन की राजदूत हैं। पहले नेपाल के नए नक्शे के पीछे उनका ही हाथ बताया गया था। अब कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि होऊ यांगी की दखल नेपाल के आर्मी हेडक्वार्टर से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक है।
नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा का दफ्तर हो या पीएम ओली का कार्यालय, बताया जाता है कि चीनी राजदूत नेपाल के किसी भी क्षेत्र में बेरोकटोक आ-जा सकती हैं।
मॉडल की तरह दिखने वाली होऊ यांगी के रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी उनके लिए विशेष भोज की मेजबानी करती हैं। ओली कैबिनेट के सदस्य उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर खुद को धन्य समझते हैं। होऊ यांगी भी नेपाल के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें आए दिन सोशल मीडिया में शेयर करती रहती हैं।
यहॉं तक कि ओली और प्रचंड के बीच तनाव की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने भी सुलह की कोशिशें की थी। इस क्रम में उन्होंने प्रचंड से भेंट कर उन्हें आपस में नहीं लड़ने की सलाह दी थी। कुर्सी बचाने की कोशिशों के बीच प्रचंड और ओली ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात की है।
बताया जाता है कि चीन के साथ-साथ पाकिस्तान भी ओली की कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय है। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस क्रम में ओली मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के संपर्क में भी हैं। दिलचस्प यह है कि नेपाल में तैनाती से पहले होऊ यांगी तीन साल पाकिस्तान में भी काम कर चुकी हैं।

हालॉंकि जानकारों का मानना है कि शायद ही ओली कुर्सी बचाने में कामयाब रहें। बताया जाता है कि 44 सदस्यीय स्थायी समिति में केवल 13 सदस्य ही ओली के पक्ष में हैं। पिछले सप्ताह हुई बैठक में प्रचंड ने ओली पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे नेपाल को पाकिस्तान नहीं बनने देंगे।
उन्होंने कहा था, “हमने सुना है कि सत्ता में बने रहने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश मॉडल पर काम चल रहा है। लेकिन इस तरह के प्रयास सफल नहीं होंगे। भ्रष्टाचार के नाम पर कोई हमें जेल में नहीं डाल सकता है। देश को सेना की मदद से चलाना आसान नहीं है और ना ही पार्टी को तोड़कर विपक्ष के साथ सरकार चलाना संभव है।”
तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच ओली को चीन द्वारा हनी ट्रै​पिंग में फॅंसाने की अफवाहें भी पिछले कई दिनों से चल रही है। मेजर गौरव आर्या ने भी पिछले दिनों इस संबंध में ट्वीट किया था। हालॉंकि ओली के सेक्स टेप को लेकर सोशल मीडिया में अब तक किए गए दावे निराधार ही साबित हुए हैं।

हनी ट्रैप : महिला ठीक हो तो गुंडा-मवाली पुरुष भी गलती नहीं करता-- इमरती देवी, महिला एवं बाल विकास मंत्री, मध्य प्रदेश

इमरती देवी
अपने विवादित बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाली मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने हनी ट्रैप मामले में अजीबोगरीब बयान दिया है। हनीट्रैप मामले में शामिल महिलाओं पर हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक महिला गलती नहीं करती कोई पुरुष गलती नहीं कर सकता। चाहे वह कोई गुंडा या मवाली ही क्यों न हो।
इस तरह का बयान देकर वो एक तरह से पुरुषों का समर्थन करती नज़र आईं। रविवार (अक्टूबर 13, 2019) को इंदौर में इमरती देवी ने कहा कि ऐसे मामलों में महिलाओं की गलती होती है और पुरुषों को दोषी मान लिया जाता है। मैं ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करती। इस मामले में पुरुषों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, बल्कि महिलाओं के खिलाफ ही कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अक्सर इन मामलों में महिलाओं की गलती होती है, लेकिन तब भी पुरुषों को ही दोषी माना जाता है। उन्होंने कहा कि अगर पुरुष को गलत तरीके से फँसाया जाए तो हमें ऐसी महिलाओं की तरफदारी नहीं करनी चाहिए।
मध्य प्रदेश के हनी ट्रैप कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इस मामले की जाँच में एक के बाद एक परतें उघड़ती जा रही हैं और जो तस्वीर उभर रही है, वह और ज्यादा चौंकाने वाली है। इस मामले में पकड़ी गईं महिलाओं के मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित बड़ी संख्या में वीडियो क्लिपिंग मिली हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जब हम पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की बात करते हैं, तो कई कांग्रेसी कहते हैं कि वह ....

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भोपाल हनी ट्रैप रैकेट: (बाएँ से) श्वेता विजय, बरखा और श्वेता स्वप्निल जैन (साभार-मनोरमा) आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार...

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पिछले कुछ सालों से नेताओं पर रेप और यौन शोषण के आरोपों की बाढ़ सी आ गई है. सितम्बर 20 को पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मया...

उल्लेखनीय है कि इमरती देवी इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुकी हैं। अभी कुछ दिन पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा था कि डॉक्टर्स के ट्रांसफर में पैसे लगते हैं इसलिए उनका ट्रांसफर न कराकर सस्पेंड कर देते हैं। इससे पहले शिवपुरी के एक स्कूल में शौचालय के अंदर बच्चों के लिए खाना पकाए जाने के मामले में उन्होंने कहा था कि इसमें समस्या क्या है। शौचालय की सीट और चूल्हे के बीच पार्टिशन है।

हनी ट्रैप कांड का घिनौना सच : नेता, बॉलीवुड की हीरोइनें, कॉलेज की लड़कियाँ, लगभग 40 काल गर्ल्स

श्वेता विजय, बरखा और श्वेता स्वप्निल जैन
भोपाल हनी ट्रैप रैकेट: (बाएँ से) श्वेता विजय, बरखा और श्वेता स्वप्निल जैन (साभार-मनोरमा)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
मध्यप्रदेश में हनी ट्रैप कांड के खुलासे के बाद जाँच टीम को इस मामले में हर सिरे पर नई जानकारी मिल रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे कांड में 40 काल गर्ल्स के शामिल होने की खबर है, जिनमें बॉलीवुड की कुछ हिरोइनों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन अब गिरोह को चलाने वाली श्वेता जैन ने एसआइटी के सामने खुलासा किया है कि उसने करीब 2 दर्जन कॉलेज जाने वाली लड़कियों को सेक्स जाल का हिस्सा बनाया, जिसमें अधिकतर मिडिल क्लास परिवार की लड़कियाँ शामिल थीं।
इस हनी ट्रैप रैकेट में गिरफ्तार महिलाओं में श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी, श्वेता स्वप्निल जैन, आरती दयाल, और एक 18 वर्षीय लड़की शामिल है। आरती दयाल के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया गया है।
इंदौर की पहली महिला एसएसपी रुचि वर्धन सिंह ने इस संबंध में बताया कि श्वेता और उसकी साथी आरती ने कॉलेज जाने वाली लड़कियों को फँसाकर, उन्हें मॉडर्न लाइफस्टाइल का लालच दिखाकर हनी ट्रैप गैंग में घसीटा था।
वहीं, श्वेता ने अपने मनसूबों के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि हनी ट्रैप का मकसद वीआईपी लोगों को इसमें फँसाकर उनसे करोड़ों रुपए के आकर्षक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट की खरीद करना था। जिनमें से कई कॉन्ट्रैक्ट श्वेता जैन और उनकी साथी आरती दयाल की कंपनियों को कमीशन के आधार पर दिए गए थे। हनी ट्रैप में फँसाकर कॉन्ट्रैक्ट खरीदने के अलावा श्वेता मध्यप्रदेश में आईएस और आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग भी मैनेज करती थीं।
पूछताछ में श्वेता ने एसआईटी को बताया कि अधिकारियों की डिमांड पर वह आर्थिक रूप से कमजोर कॉलेज जाने वाली छात्राओं को रैकेट में फँसाती थी और बाद में नामी हस्तियों के साथ बिस्तर पर जाने के लिए मजबूर करती थी। जिन लोगों के साथ लड़कियों को रात गुजारने के लिए कहा जाता था, उनमें अधिकतर लोग लड़कियों की पिता के उम्र के होते थे।
एसआईटी के सामने पेश हुई एक लड़की ने खुलासा किया कि प्रतिष्ठित कॉलेज में एडमिशन लेने की मंशा से वह श्वेता के संपर्क में आई थी। लेकिन श्वेता ने किसी तरह लड़की को इस गिरोह का हिस्सा बना लिया और उसे भोपाल ले गई। वहाँ उसकी पहचान तीन अधिकारियों से करवाई गई, जहाँ शुरू में लड़की ने ये काम करने से मना कर दिया और अपने घर लौट आई। किंतु बाद में श्वेता की साथी आरती दयाल उसके घर गई और लड़की के पिता से बताया कि अगर वह अपनी बच्ची को भोपाल भेजेंगे तो उनका एनजीओ लड़की की पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाएगा।
लड़की के मुताबिक आरती ने उसे श्वेता का एक एमएमएस भी दिखाया, जिसमें वो एक अधिकारी के साथ शारीरिक संबंध बना रही थी। आरती ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के लिए ये सब करना पड़ता है।
इसके बाद आरती और श्वेता लड़की को एक लग्जरी कार में इंदौर लेकर चली गईं, वे वहाँ पॉश इंफिनिटी होटल में ठहरे। अगले दिन शाम को 60 वर्षीय इंजिनियर हरभजन सिंह की पहचान लड़की से कराई गई और पूरी रात लड़की को अपने पिता की उम्र के व्यक्ति के साथ रुककर सेक्स करना पड़ा। इस बीच आरती ने हरभजन का लड़की के साथ चुपके से वीडियो बना लिया। जिसे बाद में दिखाकर श्वेता ने हरभजन से 3 करोड़ रुपए माँगे और लड़की को भी धमकी मिली थी कि अगर उसने अपने पैरेंट्स को कुछ भी बताया तो वह उसकी वीडियो इंटरनेट पर डाल देंगे।
जाँच में खुलासा हुआ कि लोअर मिडिल क्लास परिवारों की लड़कियों को नौकरी का लालच देकर पहले फँसाया जाता था, फिर फाइव स्टार होटल का ग्लैमर और लग्जरी कल्चर दिखाया जाता था। बाद में उन्हें बहला-फुसला कर अधिकारियों को हनी ट्रैप में फँसाने के लिए बड़ी कीमत दी जाती थी।
इस पूरे कांड में बता दें कि आज जाँच टीम को एक हिट लिस्ट हाथ लगी है, जिसमें 13 आइएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें लड़कियों ने प्रेम में फँसा लिया था और उनकी सेक्स वीडियो दिखाकर उनसे पैसे माँगने वाले थे। पुलिस को इस ब्लैकमेल करने वाले गिरोह से अभी तक 90 वीडियो मिल चुके हैं। जिनमें सियासत से जुड़े लोगों से लेकर कई ब्यूरोक्रेट्स के चेहरे उजागर हुए हैं। गिरोह में शामिल महिलाओं के पास से 8 सिम कार्ड भी मिले हैं, बाकी रिकॉर्ड अभी खंगाले जा रहे हैं।
हनीट्रैप सेक्स कांड: पुलिस के हाथ लगे 100 से ज्यादा वीडियो, कई नेताओं पर मंडराया खतरा
पुलिस के हाथ लगे 100 से ज्यादा वीडियो, कई नेताओं पर मंडराया खतरा
मध्य प्रदेश का हनीट्रैप सेक्स कांड छह साल पहले उजागर हुए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की याद ताजा कराने वाला है इस कांड की सूई भी व्यापमं की तरह नौकरशाहों-सफेदपोशों के आसपास ही घूमती नजर आ रही है पुलिस के हाथ 100 से ज्यादा वीडियो और 200 से ज्यादा ऐसे फोन नंबर लग गए हैं, जो सियासी तूफान खड़ा कर सकते हैं पिछले दिनों में हनीट्रैप सेक्स कांड से जुड़ी महिलाओं की तमाम बड़े नेताओं के साथ आई तस्वीरें और एक अफसर के साथ वीडियो यह तो साबित कर ही रहा है कि इस गिरोह का राज्य की सियासत और नौकरशाही में पर्याप्त दखल रहा है
इस कांड को देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहा जा रहा है। इस मामले में जाँच में जुटी एसआईटी की टीम अब तक 4 हजार से ज्यादा फाइलें जुटा चुकी हैं और बाकी के मिलने का सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है गिरोह के शिकंजे में कई शीर्ष नेता, आईएस अधिकारी, इंजिनियर और बड़े व्यापारी फँस चुके हैं। जिनकी सेक्स वीडियो और अश्लील चैट, ब्लैकमेलिंग के सबूत गिरोह के सदस्यों के लैपटॉप और मोबाइल से बरामद हुए हैं।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस जाँच के दौरान SIT को जो लिस्ट मिली है उसमें 13 ऐसे अधिकारियों के नाम हैं, जो अलग-अलग समय पर कृषि, संस्‍कृति, उद्योग, जल संसाधन, जन संपर्क, शहरी प्रशासन, मत्‍स्‍य पालन, श्रम, वन, और प्रशासनिक विभागों में काम कर चुके हैं। जिनके नामों को इस गिरोह के संचालक ने एक सरकारी डायरी के पन्नों पर लिखा हुआ था।
जाँच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार इस हिट लिस्ट में शामिल अफसरों के नामों के आगे टिक का निशान लगाकर कोड भाषा में कुछ लिखा हैं। इसके अलावा इस डायरी में कुछ लोगों के नाम के आगे घेरा भी बनाया हुआ और कुछ के नाम के आगे महत्वपूर्ण एवं ओके जैसी चीजें लिखी हैं। मामले में जाँच में जुटी टीम अब फिलहाल कोड वर्ड में लिखी बातों का मतलब पता लगा रही है।
मध्यप्रदेश, आईएस, हनी ट्रैप
एक सप्ताह पहले इंदौर की पुलिस ने दो महिलाओं और उनके वाहन चालक को गिरफ्तार किया था ये महिलाएं नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह का वीडियो बनाने के बाद उसे ब्लैकमेल कर उससे तीन करोड़ रुपए मांग कर रही थीं मांगी गई रकम की पहली किश्त के तौर पर 50 लाख रुपए जब वह लेने आईं तो पकड़ी गई बीते सात दिनों में इस कांड से जुड़ी जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली है. साथ ही इस बात का एहसास करा रही है कि राज्य में बीते कई वर्षों में करोड़ों के ठेके उन लोगों के हाथ लग गए, जिन्होंने महिलाओं का भरपूर इस्तेमाल किया
कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के नेताओं के नाम जुड़ने लगे
इस मामले की जांच अब एसआईटी (विशेष जांच टीम) को सौंप दी गई है इसके साथ ही सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के नेताओं के नाम इस हनीट्रैप सेक्स कांड से जुड़ने लगे हैं अभी तक किसी भी नेता पर पुलिस ने तो उंगली नहीं उठाई है, मगर गलियारों में चर्चा यही है कि हनीट्रैप सेक्स कांड की महिलाओं से नेताओं के रिश्ते रहे हैं
व्यापमं घोटाले की जांच का दायरा कुछ ऐसे ही बढ़ा था
व्यापमं घोटाले पर गौर करें तो एक बात साफ होती है कि इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों और कई नेताओं को जेल जाना पड़ा है इस मामले की एसटीएफ, एसआईटी के बाद सीबीआई जांच कर रही है इस मामले से जुड़े लगभग 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक न्यूज चैनल के संवाददाता अक्षय सिंह का भी नाम शामिल है इस घोटाले में 1,450 छात्रों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए और परिजनों को भी आरोपी बनाया गया लगभग 3000 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से बड़ी संख्या में लोगों को जेल जाना पड़ा


हनीट्रैप सेक्स कांड के तार महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से जुुुड़ने लगे
अब हनीट्रैप सेक्स कांड की कहानी व्यापमं की तरह राज्य की सीमाओं को लांघकर दूसरे राज्यों की ओर बढ़ रही है महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से तार जुड़ने लगे हैं नौकरशाहों और सफेदपोशों के बीच इस गिरोह की महिलाओं की घुसपैठ की बात सामने आने लगी है कुछ दिन पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का वीडियो वायरल हो ही चुका है वहीं पुलिस के हाथ कई वीडियो और ऑडियो क्लिपिंग भी लगी हैं, जो अफसरों और नेताओं के इनके जाल में फंसने की ओर इशारा कर रहे हैं
व्यापमं का पार्ट-2 -कारोबारी, नौकरशाह, राजनेता, मीडिया का गठजोड़ 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.के. मिश्रा ने कहा, “हनीट्रैप सेक्स कांड पूरी तरह चारित्रिक पतन से जुड़ा हुआ है, यह घोटाला व्यापमं का पार्ट-2 है, जिसमें बड़े कारोबारी, नौकरशाह, राजनेता, मीडिया जगत के लोग जुड़े हुए हैं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह जांच सक्षम अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजीव शमी को सौंपी है, उनकी जांच के बाद दूसरी किसी जांच की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि सारे चेहरे बेनकाब हो जाएंगे

भाजपा ने की सीबीआई जांच की मांग
भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर चुके हैंभाजपा के मुख्य प्रवक्ता डॉ. दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी व निष्पक्ष होनी चाहिए, मगर सरकार जांच को अपनी मर्जी के अनुसार दिशा देने का प्रयास कर रही है
भाजपा के लोग व्यापमं की तरह जांच को प्रभावित करना चाहते हैं
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भाजपा की सीबीआई जांच की मांग पर यह कहकर तंज कस चुके हैं कि भाजपा के लोग व्यापमं की तरह सीबीआई के जरिए इस मामले की जांच को प्रभावित करना चाहते हैं

ऐसे काम करता था ये ग‍िरोह
सिंह ने कहा कि पुलिस के हाथ जो सुराग हाथ लगे हैं, वे इस बात का खुलासा करते हैं कि हनीट्रैप सेक्स कांड में सिर्फ पांच महिलाएं नहीं हैं, बल्कि उनके गिरोह के सदस्य छोटे जिलों तक फैले हुए हैं, जिनका समय-समय पर अपने तरह से उपयोग किया जाता था पहले संबंधित नेता अथवा अफसर को खुश करके ठेका या दूसरे काम मंजूर कराए जाते थे और जिससे यह काम नहीं हो पाता था उसे ब्लेकमैल करने की धमकी देकर रकम वसूली जाती थी इतना ही नहीं बड़े अफसरों की पोस्टिंग में भी ये महिलाएं बड़ी भूमिका निभाती थीं

कई नेताओं और अफसरों के चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
सूत्रों का दावा है कि अगर जांच सही हुई और राजनीतिक दखल नहीं रहा, तो कई ऐसे नेताओं और अफसरों के चेहरे बेनकाब होंगे, जिनका अपने-अपने क्षेत्र में करियर अभी बहुत लंबा है और वे वर्तमान में भी प्रमुख पद पर हैं जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से जुड़े नेता बड़ी संख्या में हैं
पुलिस के हाथ 100 से ज्यादा वीडियो, सियासी तूफान आ सकता है 
पुलिस के हाथ 100 से ज्यादा वीडियो और 200 से ज्यादा ऐसे फोन नंबर लग गए हैं, जो सियासी तूफान खड़ा कर सकते हैं पिछले दिनों में हनीट्रैप सेक्स कांड से जुड़ी महिलाओं की तमाम बड़े नेताओं के साथ आई तस्वीरें और एक अफसर के साथ वीडियो यह तो साबित कर ही रहा है कि इस गिरोह का राज्य की सियासत और नौकरशाही में पर्याप्त दखल रहा है इसी के चलते कई लोग यह भी आशंका जता रहे हैं कि इस कांड का हाल भी कहीं व्यापमं जैसा न हो जाए पहले कई नेता-अफसर पकड़े जाएं और फिर सभी रिहा होते जाएं
। (एजेंसीज इनपुट्स सहित)

IB का खुलासा : फेसबुक पर संगीता मिश्रा, आयशा राय, नीता सिंह आदि नामों से सावधान

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ये लड़कियां फेसबुक पर वीडियो कॉल करके उसे रिकॉर्ड कर
 लेती थीं.(फाइल फोटो)प्रतीकात्मक फोटो 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  
पाकिस्तान अक्सर पूर्व में भी Honeytrap का सहारा लेकर, भारत के गोपनीय दस्तावेज आदि हासिल करने का प्रयास करता रहा है, लेकिन ऐसा समाचार आते ही तुरन्त उस पर पर्दा डाल दिया जाता था। अब बदलते परिवेश में, भारतीय ख़ुफ़िया विभाग ने आम जनमानस को भी इस Honeytrap से सचेत रहने से आगाह किया है। क्योकि इस जाल में कोई भी पुरुष आसानी से फंस कर मुसीबत में पड़ सकता है। 
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक ऐसे कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है जिसका इस्तेमाल भारतीय सेना व सुरक्षा बलों के जवानों व अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाने के लिए किया जाता था यह कॉल सेंटर इस्लामाबाद से 116 किलोमीटर दूर झेलम शहर में है इस कॉल सेंटर को चलाने वाली कंपनी कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन कंपनी लिमिटेड (पीटीसीएल) है इंटर-सर्विसेज इंटेलीजेंस (आईएसआई) के सहयोग से चलने वाला यह कॉल सेंटर भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था ये वही सिमकार्ड होते थे जो अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए पाकिस्तान जाने वाले भारत के लोगों, खासतौर से महिलाओं से सीमा पर पाकिस्तानी कस्टम विभाग द्वारा जब्त किए जाते थे इस सनीसनीखेज हनीट्रैप के सिलसिले में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ कुछ अन्य राज्यों की पुलिस ने जब देशव्यापी जांच शुरू की तो ऐसे 100 से ज्यादा सिम कार्डो का पता चला
पाकिस्तान की यात्रा पर जाने वाली भारतीय महिलाओं से जब्त सिम कार्ड का उपयोग सीमापार स्थित कॉल सेंटरों में काम करने वाली पाकिस्तानी महिलाओं की पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। भारतीय सिम कार्ड के जरिए संगीता मिश्रा, आयशा राय, नीता सिंह जैसे नामों से फेसबुक पर फर्जी भारतीय आईडी बनाए गए थे। झेलम के इस कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़कियों को खासतौर से धारा-प्रवाह हिंदी बोलने की ट्रेनिंग दी गई थी। आईएसआई के गुर्गों की मदद से ये लड़कियां पहले सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों व अधिकारियों की तलाश करती थीं और बाद में उनसे संपर्क स्थापित करती थीं
चैट से शुरुआत करने के बाद ये लड़कियां फेसबुक पर वीडियो कॉल करके उसे रिकॉर्ड कर लेती थीं।उसके बाद ये लड़कियां व्हाट्सएप पर उनसे कुछ ज्यादा ही अंतरंग बातें करने लगती थीं। भारतीय अधिकारियों को लगता था कि वे भारतीय लड़कियों से बात करते हैं और इस तरह वे आईएसआई के कॉल सेंटर के जरिए हनीट्रैप में फंस जाते थे। दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि इस बात का खुलासा तब हुआ जब गुप्तचरों ने दिल्ली की एक महिला से पूछताछ की। महिला की उम्र 30 से कुछ ही साल अधिक रही होगी। उसने बताया कि वह जब पाकिस्तान गई थी तब पाकिस्तानी कस्टम विभाग ने उससे उसका सिम कार्ड और फोन दोनों जब्त कर लिया था
सूत्रों ने बताया, "जांच के दौरान पता चला कि दिल्ली के ही मोबाइल और उसके सिम कार्ड का उपयोग झेलम शहर स्थित आईएसआई द्वारा संचालित पीटीसीएल के कॉल सेंटर में हो रहा है।" पुलिस अधिकारी ने कहा, "महिला की बातों से इस बात का भी खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी अधिकारी जिस भारतीय मोबाइल फोन या सिम कार्ड के उपयोग पर रोक की बात करके फोन व सिम जब्त करते हैं, उसी सिम कार्ड व फोन का इस्तेमाल पाकिस्तान की धरती पर हो रहा है।" सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में सेना के गुप्तचर विभाग यानी मिलिटरी इंटेलीजेंस को इसकी भनक तब लगी जब भारतीय सुरक्षा बल के कुछ अधिकारी फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे स्कैंडल में फंस गए। बाद में जब भारतीय मोबाइल नंबरों को ट्रैक किया गया और भारत में सिम कार्ड के मालिकों का पता चला तब जाकर खुफिया एजेंसियों को आईएसआई द्वारा भारतीय अधिकारियों पर डोरे डालने के इस करतूत की जानकारी मिली
सूत्रों ने बताया कि इसी साल उत्तर प्रदेश के एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने फेसबुक पर महिलाओं की 125 फर्जी आईडी का पता लगाया जिनका इस्तेमाल आईएसआई ने भारतीय अर्धसैनिक बल व सेना के अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाने के लिए किया था। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) और मिलिटरी एजेंसी ने फर्जी अकाउंट का डाटा एटीएस से साझा किया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंजीनियर निशांत अग्रवाल और बीएसएफ जवान अच्युतानंद मिश्रा को पिछले साल अक्टूबर में आईएसआई द्वारा हनीट्रैप में फंसाए जाने के बाद भातीय एजेंसियों ने अपना डाटा अन्य प्रदेशों की पुलिस से साझा किया। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी लड़कियों ने फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों के कई अन्य जवानों व अधिकारियों को भी फुसलाया है। उत्तर प्रदेश एटीएस की तरह दिल्ली पुलिस भारतीय सुरक्षाबलों की फ्रेंड लिस्ट में शामिल सैकड़ों ऐसी लड़कियों के फेसबुक अकाउंट को खंगाल रही है जो आईएसआई से प्रशिक्षण लेकर उसके लिए काम करती थीं।(एजेंसीज इनपुट्स सहित)