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उत्तराखंड : लाइव डिबेट में मुख्यमंत्री धामी ने हरीश रावत की बोलती बंद

                                                                                                           फोटो साभार: Times Now
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले ‘टाइम्स नाउ’ चैनल पर ओपिनियन पोल पर बहस के दौरान एक ऐसा मौका आया, जब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आमने-सामने आए। हरीश रावत राज्य में कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं, वहीं भाजपा ने इस बार पुष्कर सिंह धामी को आगे किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी भाजपा एक ऐसी पार्टी है जहाँ किसी सामान्य कार्यकर्ता को कभी भी कोई भी जिम्मेदारी दी जाती है और वो ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करता है।

सीएम धामी ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वो किसी अहंकार में ये सब बातें नहीं बोल रहे हैं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि हमने न तो लोगों के ऊपर डम्पर चलाए हैं, न गाड़ियाँ चलाई हैं और न ही भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने कहा कि हमने कोई काले कारनामे नहीं किए हैं, बल्कि काम किया है। उन्होंने हरीश रावत से कहा कि इन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता। उन्होंने इसे ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ बताते हुए कहा कि कुर्सी के लिए लड़ाई इतनी ज्यादा है कि ये कुछ भी कर सकते हैं। 

धामी ने हरीश रावत से पूछा कि वो इतने उत्तेजित क्यों हैं, क्या वो सर्वे देख कर घबरा गए हैं? उन्होंने कहा कि हरीश रावत को कई बार मौके दिए गए, इनके पास बहुत बड़ा अनुभव था। सीएम धामी ने कहा कि आपकी नजर में मैं अपरिपक्व हो सकता हूँ। उन्होंने कांग्रेस पर देश को पीछे ले जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले अपना घर सुलझा लीजिए, क्योंकि आपकी परिपक्वता लोगों ने देखी है। इस पर रावत ने कहा कि चुनाव हारने से किसी नेता की पहचान नहीं होती।

उन्होंने कहा कि एक सामान्य कार्यकर्ता भी भाजपा में सीएम बन सकता है और 10वें नंबर का बल्लेबाज भी ओपनिंग आकर अच्छी बल्लेबाजी कर सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे हरीश रावत पिछले चुनाव में दोनों सीटों से हार गए थे। एक अन्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस पार्टी के नेताओं ने CDS जनरल बिपिन रावत को सड़क का गुंडा कहा, वह भी आज सैनिकों की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सेना का अपमान और तुष्टीकरण की राजनीति करना कॉन्ग्रेस का इतिहास रहा है।

पंजाब : कांग्रेस ने अपने वादे पूरे करने के बजाए जनता को पकड़ाया झुनझुना

उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन खो चुकी कांग्रेस मनलुभावन प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। प्रियंका वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता से दूर करने स्मार्टफोन आदि देने का वायदा किया, लेकिन वह भूल गयी कि राजस्थान में किसानों का कर्ज माफ़ी का वायदा पूरा नहीं हुआ, सत्ता में आने के लिए आतुर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आजकल उत्तर प्रदेश में वादों की लॉलीपॉप दे रही हैं, लेकिन हकीकत में जनता के हाथ में झुनझुना ही आता है। दरअसल, कांग्रेस की यही परंपरा रही है। कांग्रेस के पंजाब में साढ़े चार साल के कार्यकाल में हुए कामों और जनता के किए गए वादों की पड़ताल करें तो वास्तविकता बेहद चौंकाती है। जनता ने जिन उम्मीदों के साथ कांग्रेस को सत्ता सौंपी, वह तो पूरी हुई नहीं…मुश्किलें और बढ़ती गईं। दिग्गज कांग्रेस नेता जनता का भला करने के बजाए, आपस में ही लड़ते रहे। आइये,  2017 में कांग्रेस द्वारा पंजाब के लोगों से किए टॉप टेन वादों और उसके नतीजों की पड़ताल करते हैं…

1. वादा – चार हफ़्ते में नशे का खात्मा..
नतीजा : साढ़े चार साल में और बढ़ गया
नशा पंजाब में बड़ा मुद्दा रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भटिंडा में प्रचार के दौरान हाथ में गटका साहिब उठा कर सरकार बनने पर चार हफ़्तों में नशा खत्म करने का वादा किया था…पर हकीकत यह है कि पंजाब में ड्रग्स का कारोबार अब भी जारी है. नवजोत सिंह सिद्धू और डिप्टी सीएम बने सुखजिंदर रंधावा तो पंजाब में नशे खासकर चिट्टे के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को सीधे दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल में डालने की मांग करते रहे हैं। सिद्धू खेमा कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने जानबूझकर मजीठिया के खिलाफ सख्ती बरतने के ऑर्डर नहीं दिया। कैप्टन के कार्यकाल के दौरान विभिन्न जिलों में 50 से ज्यादा युवाओं की नशे से मौत के मामले दर्ज हुए हैं। यह संख्या और ज्यादा हो सकती है, क्योंकि ऐसे ज़्यादातर मामलों में पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं होती। कांग्रेस सरकार ने ड्रग्स के ख़िलाफ़ बड़ी मुहिम कभी छेड़ी ही नहीं।

2. वादा– किसानों की कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फ़सल की पूरी रकम

नतीजा : 90 हजार करोड़ में से सिर्फ सिर्फ 5 हजार करोड़ की माफी
कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फसल की पूरी रकम का नारा लगाकर सत्ता में आई अमरिंदर सरकार ने न तो वादे के मुताबिक सभी किसानों का पूरा कर्ज़ा माफ किया और न ही प्रदेश में किसानों की कुर्की बंद हुई। इसके विपरीत कर्ज़ के बोझ तले किसान प्रदेश में ख़ुदकुशी कर रहे हैं. सरकार बनने से पहले सारे किसानों के सभी प्रकार के 90 हज़ार करोड़ रुपये के कर्ज़ माफ़ करने के वादा किया गया, लेकिन इसका परिणाम ऊंट के मुंह में जीरे के समान आया। कैप्टन सरकार ने कर्ज माफी की दिशा में जो थोड़ा-सा काम किया, उसमें बहुत ज्यादा शर्तें लगा दीं। नतीजा-कांग्रेस सरकार के साढ़े 4 साल के कार्यकाल में मात्र 5.64 लाख किसानों का 4623 करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो पाया। 2.68 लाख मजदूरों का भी सिर्फ 526 करोड़ रुपए का लोन माफ किया गया।

3. वादा – घर घर नौकरी, हर घर नौकरी, हर साल 1.61 नौकरी
नतीजा : नौकरियां न दे पाने पर कांग्रेस ने ही कैप्टन की क्लास लगाई
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी घोषणा पत्र में पंजाब के हर घर से एक व्यक्ति को नौकरी देने का वादा किया था. वादा किया गया था कि सरकार हर साल 1.61 लाख लोगों को नौकरियां देगी. पिछले साढ़े चार साल में घर घर नौकरी, हर घर नौकरी का वादा हवा-हवाई ही साबित हुआ है। दिखावे के लिए रोजगार मेले लगे, नियुक्ति पत्र भी बंटे, लेकिन लाखों की छोड़िए कुछ हजार युवाओं को ही नौकरी नसीब हो पाई। कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनकी सरकार पर ये वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगता रहा है। जुलाई-2021 में सोनिया गांधी के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे कैप्टन को जो 18 सूत्री कार्यक्रम दिया गया था, उसमें यह मुद्दा शामिल था। सिद्धू भी इसे लेकर कैप्टन सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।

4. वादा – खनन माफिया खत्म कर पंजाब का खजाना भरेंगे
नतीजा : माफिया हावी, रद्दी की टोकरी में सिद्धू की रिपोर्ट
पंजाब कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र की शुरुआत में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार को माफ़िया राज पर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इसके साथ ही वादा किया था कि रेत माफ़िया, केबल माफ़िया, शराब माफ़िया, ड्रग्स माफ़िया औऱ ट्रांसपोर्ट माफ़िया को कांग्रेस सरकार बनने पर तुरंत खत्म किया जाएगा। लेकिन साढ़े चार साल में सरकार कुछ नहीं कर पाई। नवजोत सिंह सिद्धू और उनका खेमा इस बात को पूरी ताकत से उठाता रहा है कि पंजाब सरकार के पास रेत के अवैध खनन को रोकने के लिए न तो कोई पॉलिसी है और न ही सरकार ऐसी कोई पॉलिसी बनाना चाहती है। कांग्रेस सरकार ने खनन का खूनी खेल खेलने वाले किसी बड़े माफिया को जेल में नहीं पहुंचाया। इसके विपरीत कांग्रेस सरकार के ही एक मंत्री को गैरक़ानूनी खनन में नाम आने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। 2017 में कैप्टन की कैबिनेट में मंत्री बनते ही सिद्धू, तेलंगाना और तमिलनाडू का मॉडल समझने के लिए खुद वहां गए और उसके बाद अपनी रिपोर्ट भी सरकार को दी, मगर कैप्टन ने उसे रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया।

5. वादा – सरकारी कर्मचारियों का रखेंगे पूरा ख्याल
नतीजा : लाखों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत
कैप्टन ने सत्ता में आने के लिए ठेका भर्ती बंद करने, कर्मचारियों को रेगुलर करने, खाली पदों को भरने, बकाया भत्ते जारी करने के लिए महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने के वादे किए थे. इनमें से वादे पूरे नहीं हुए. पंजाब में इस समय अध्यापक, आशा वर्कर, एएनएम, ठेका कर्मचारी, रोडवेज कर्मचारी और डीसी कार्यालय के कर्मचारी अपनी-अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इन कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक है। खुद सिद्धू का विरोध भी यही था कि कैप्टन सरकार को कर्मचारियों की मांगों को पूरा करना चाहिए।

6. वादा -नौजवानों, छात्रों को देंगा स्मार्टफ़ोन
नतीजा : प्रियंका गांधी के वादे जैसा ही लॉलीपॉप
प्रियंका गांधी अब यूपी स्मार्टफ़ोन देने का लॉलीपॉप दे रही हैं। पंजाब में चुनाव के दौरान स्मार्टफ़ोन देने का वादा करते हुए कांग्रेस ने युवाओं से फॉर्म तक भरवाए। अब तक उनमें से किसी को भी फ़ोन नहीं मिला है. सरकार के ख़िलाफ़ की जा रही पोल खोल रैलियों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन के स्मार्टफ़ोन पर चुटकुले सुना रहे हैं..

7. वादा – आटा दाल के साथ चीनी चाय पत्ती
नतीजा : अब लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है
कांग्रेस ने अकाली-भाजपा सरकार की प्रतिष्ठित आटा दाल योजना के साथ चाय पत्ती और चीनी देने का वादा किया था। लेकिन अब लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है. इस योजना में दाल, चीनी और चायपत्ती अब तक नहीं मिली। 

8. वादा – शराब माफिया पर पूरी तरह के नकेल कसेंगे
नतीजा : घर-घर में नकली और अवैध शराब की फैक्ट्रियां
कांग्रेस का वादा शराब माफिया पर पूरी तरह के नकेल कसने का था। लेकिन विपक्ष की छोड़िए कैप्टन सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और नवजोत सिंह सिद्धू कहते रहे हैं कि प्रदेश में शराब माफिया हावी है। जगह-जगह अवैध शराब बिक रही है। घर-घर में नकली फैक्ट्रियां लगाकर शराब निकाली और बेची जा रही है। इससे पंजाब का खजाना बर्बाद हो रहा है। कांग्रेस हाईकमान को शराब माफिया के खिलाफ कैप्टन अमरिंदर सिंह को काम करने के लिए कहना पड़ा, लेकिन कुछ हुआ नहीं। पंजाब में केबल कारोबार भी पहले जैसा ही चल रहा है और शराब और ट्रांसपोर्ट के कारोबार में भी कहीं कोई अंतर नहीं दिख रहा।

9. वादा- बेघर दलितों को देंगे अपने घर की सौगात
नतीजा : राज्य में दलितों के खिलाफ अपराध बढ़े
कैप्टन सरकार ने पंजाब में दलितों के सशक्तिकरण के लिए बेघरों को मकान, 50 हज़ार रुपये तक कर्ज़ माफ़ करने जैसे वादे किए थे जो जमीन पर पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। दलितों के खिलाफ अपराधों में जरूर बढ़ोतरी हुई है।

10. वादा- कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की जान बचाएंगे
नतीजा : कर्ज के कारण किसानों की खुदकुशी अब भी जारी
कृषि प्रधान प्रदेश पंजाब का भूमिपुत्र बुरी तरह के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। कर्ज पर कर्ज बढ़ने से परेशान किसान खुदकुशी को मजबूर है। कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए वादा किया कि वह किसानों की जान बचाने के लिए सारे जतन करेंगे। साढ़े चार साल के बाद भी न तो किसानों की कर्जमाफी हो पाई और न ही उन्हें अन्य मुश्किलों से छुटकारा मिल पाया है। इसके कारण पंजाब में किसानों की खुदकुशी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

पंजाब कांग्रेस में शुरू हुआ घमासान, सुनील जाखड़ ने बोला हरीश रावत पर हमला

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद से पंजाब कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया है। हालाँकि अगले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने आज (सितंबर 20, 2021) आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण ले ली है। वहीं इस कार्यक्रम से पहले सियासी बयानबाजी शुरू रही।

कहते है न बोया पेड़ बबूल का आम कहां से होए, जो पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा खुद मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में प्रदेश के कद्दावर नेता कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में शान से कांग्रेस की सरकार चला रहे थे, के विरुद्ध बिगुल बजाकर अमरिंदर की सरकार नहीं गिराई, बल्कि कांग्रेस को हो हाशिए पर ला दिया है। जिसे देख लगता है कि कांग्रेस में बुद्धिजीवियों का अभाव हो गया है या फिर वह केवल नाममात्र के लिए पार्टी में हैं। 

पार्टी ने केंद्र में रिमोट प्रधानमंत्री बनाकर भी कुछ नहीं सीखा। ठीक वही स्थिति पंजाब में भी हो गयी है, जब अगला चुनाव सिद्धू के नाम पर लड़ा जाएगा, फिर चरणजीत सिंह मुख्यमंत्री जरूर बन गए हैं, लेकिन रिमोट नवजोत के हाथ रहेगा, यानि चरणजीत की अभी से बेइज्जती। अगला चुनाव जीत गए सिद्धू की बल्ले-बल्ले, हार गए तो चरणजीत के सर बदनामी।   

पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत ने साफ किया है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू के चेहरे को आगे रखते हुए चुनाव लड़ा जाएगा। इधर, कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने हरीश रावत के बयान पर आपत्ति जताई है।

कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत पर हमला बोला है, उल्लेखनीय है कि हरीश रावत ने कहा था चेहरा तो सिद्धू होंगे, जाखड़ ने इसे गलत करार देते हुए कहा कि ‘यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने वाला है.

कांग्रेस आलाकमान द्वारा चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाये जानें के बाद ऐसा लग रहा था कि अब घमासान खत्म हो जाएगा। सीएम तय हो गया है, एक घंटे बाद शपथ ग्रहण समारोह होना है, लेकिन असली घमासान अब शुरू हुआ है..

पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने अपने ट्वीट में लिखा, मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत चन्नी के शपथ ग्रहण के दिन, हरीश रावत का यह कथन कि “चुनाव सिद्धू के नेतृत्व में लड़े जाएंगे”, चौंकाने वाला है। यह मुख्यमंत्री के अधिकार को कमजोर करने वाला है..

पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने रविवार को कहा कि ‘राज्य में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, जो राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बहुत लोकप्रिय हैं.

अगर हरीश रावत के बयान को देखा जाय तो चरणजीत सिंह चन्नी नाम के मुख्यमंत्री होंगे, क्योंकि जब चुनाव सिद्धू के नेतृत्व में लड़ा जाएगा तो सारे फैसले भी वही लेंगे। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि चरणजीत सिंह चन्नी इस अपमान को बर्दाश्त करते हैं या इस्तीफ़ा दे देंगे?

दो धड़ों में बँटी कांग्रेस : वरिष्ठ नेताओं ने कहा- हमारी इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने

अयोध्या जमीनी विवाद मामले पर दो धड़ों में बंटी कांग्रेस, सीनियर नेताओं ने दिए बयानअयोध्या विवाद पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाला है। कांग्रेस के नेता अभी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और संभलकर बयान दे रहे हैं। इस बीच कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा के राजनीति विचारों और सिद्धांतों से सुर मिलाना शुरू कर दिया है।
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Image result for हरीश रावतकांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी इच्छा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने। उन्होंने कहा कि वे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होते देखना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही सर्वोपरि है और वह सब के लिए मान्य होगा।
दिलचस्प बात यह है कि अक्टूबर 25, 2019 को दिल्ली में पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस की बैठक हुई थी। बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि एनआरसी, अनुच्छेद 370 और अयोध्या रामजन्म भूमि मसले पर पार्टी की राय एकमत हो। लेकिन लगता है कि पार्टी नेता अब कांग्रेस के पॉलिटिकल लाइन से अलग जा कर निजी विचारों को प्राथमिकता देने का फैसला कर बैठे हैं।
हालाँकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब नेताओं के विचार अपनी ही पार्टी के मूल विचारों से इतर हो। इससे पहले भी कांग्रेस नेता व असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने अयोध्या विवाद को लेकर अलग सुर में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इसमें कोई संशय नहीं कि अयोध्या विवाद का मामला वाकई बहुत संवेदनशील है जिस पर किसी भी फैसले पर पहुँचने से पहले एक स्वस्थ बातचीत की जरूरत है।
कांग्रेस के बदले तेवर लोकसभा चुनाव के बाद से ही लगातार देखे जा रहे हैं। पार्टी अनुच्छेद 370 को और एनआरसी जैसे विषयों को लेकर यू टर्न लेने से भी नहीं चुकी है। अब अयोध्या मामले पर पार्टी के नेताओं के सुर बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस नेता जतिन प्रसाद ने द संडे एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि एक हिंदू होने के नाते, वह चाहते हैं कि वहाँ मंदिर बने। लेकिन उस भूमि पर कोई भी फैसला तो कानूनी तौर पर ही निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वह सभी के लिए मान्य होगा। इस पर फैसला जितनी जल्दी संभव हो सके, आ जाए ताकि सभी वाद-विवाद और बातों पर विराम लग जाए। उन्होंने कहा कि यह समय है कि सभी समुदाय एक साथ शांति से रहें।
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अक्टूबर 30, 1990- यही वो दिन है जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अयोध्या में कारसेवकों पर गोली ....

वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी जितिन प्रसाद के बयान से इतेफाक रखते हुए सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का पक्ष बिल्कुल साफ है। यह एक भूमि विवाद से जुड़ा मसला है और इस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही अंतिम फैसला मानना होगा। इस पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ खड़ी रहे। 
मगर जब उनसे उनके निजी विचार के बारे में पूछा गया तो रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा?