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पूर्व रॉ अधिकारी ने किया था पवार-दाऊद संबंधों का दावा, अब उसकी बहन से जुड़े नवाब मलिक के तार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से लिंक का खुलासा किया है। अब खबर आई है कि NCP अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल के आवास पर एक बड़ी बैठक में हिस्सा लिया है। इस बैठक में मुंबई के पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और CP (लॉ एंड ऑर्डर) वी नांगरे पाटिल को भी तलब किया गया। इसमें आर्यन खान ड्रग्स मामले को लेकर चर्चा की गई। नवाब मलिक ने फिर से खुलासे की धमकी दी है।

देवेंद्र फडणवीस ने एक सलीम पटेल का जिक्र अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया, जिसे आतंकी दाऊद इब्राहिम का करीबी बताया जाता है। वो दाऊद की बहन हसीना पार्कर का ड्राइवर और बॉडीगार्ड हुआ करता था। 2007 में ये दोनों ही गिरफ्तार किए गए थे। जाँच में खुलासा हुआ था कि दाऊद इब्राहिम की सारी संपत्तियों को हसीना के नाम पर किया जा रहा है और इस पूरे मामले में ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ सलीम को बनाया जा रहा था। उसे ‘गोवा पटेल’ के नाम से अंडरवर्ल्ड में जाना जाता था।

जमीन के कब्जे की सारी वारदातों को वो अपने हाथ में लेता था और पूरा करता था। हैदराबाद बम ब्लास्ट मामले के अलावा रंगदारी और धोखाधड़ी के उस पर कई मामले दर्ज हैं। 2010 में तत्कालीन गृह मंत्री आरआर पाटिल के साथ सलीम पटेल की कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं। एक इफ्तार में दोनों बातचीत करते हुए दिखे थे। पाटिल को तब विपक्ष के आरोपों के बाद सफाई देनी पड़ी थी। ये पार्टी 11 सितंबर 2010 को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष नसीम कुरैशी के घर पर हुई थी।

इसी इफ्तार पार्टी में भाजपा के विधायक रहे प्रेम कुमार शर्मा की हत्या का आरोपित मोबिन कुरैशी भी उपस्थित था और उसने पाटिल को गुलदस्ता भेंट किया था। उस पर भी एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वो पेशे से बिल्डर था और अवैध निर्माण के कई नोटिस उसे मिल चुके थे। दिवंगत आरआर पाटिल NCP और कॉन्ग्रेस में रहे थे। वो महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी थे। 26/11 हमले के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन 2009 में उन्हें फिर गृह मंत्री बना दिया गया था।

अब नवाब मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर कहा है कि देवेंद्र फडणवीस ने सब कुछ ‘राई का पहाड़’ बना कर पेश किया है और असली ‘हाइड्रोजन बम’ तो वो अब फोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि फडणवीस के सीएम कार्यकाल में मुंबई हॉस्टेज बनी हुई थी और दुबई में बैठ कर अंडरवर्ल्ड वाले उगाही करते थे। नवाब मलिक ने कहा कि जिस जमीन की बात हो रही, वहाँ उनका परिवार पहले किराएदार था और बाद में मालिकाना हक़ मिला। उन्होंने दावा किया कि वहाँ पहले से उनके गोदाम और दुकानें थीं।

रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने NCP अध्यक्ष शरद पवार के सम्बन्ध में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के बेहद करीबी माने जाने वाले पार्टी सांसद अहमद पटेल के दाऊद से करीबी संबंध थे। कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से अपनी इसी करीबी का फायदा उठाकर अंडरवर्ल्ड डॉन देश से भाग निकलने में कामयाब रहा। उसे पकड़ कर लाने के खुफिया ऑपरेशन भी इसकी भेंट चढ़े। 1993 मुंबई ब्लास्ट के इस गुनहगार को केंद्र सरकार ने हाल ही में यूएपीए कानून के तहत आतंकी घोषित किया है।

सूद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जब दाऊद और मुंबई धमाकों के अन्य आरोपी देश से भागे, तब पवार मुख्यमंत्री थे। उनके मुताबिक धमाकों के बाद दाऊद और उसके गुर्गों के खिलाफ कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने सख्ती नहीं की। इस सबसे संकेत मिलते हैं कि शरद पवार और दाऊद के बीच संबंध थे। उन्होंने कहा था, “यह जगजाहिर है कि शरद पवार के दाऊद इब्राहिम से संबंध थे।” सूद ने जोर देकर कहा था कि आतंकवाद के सरपरस्त मुल्क पाकिस्तान की तारीफ करने के पीछे पवार और दाऊद इब्राहिम के ही संबंध ही हैं। दाऊद के साथ उनका व्यापारिक संबंध भी रहा है।

इसी तरह शरद पवार के एक अन्य करीबी NCP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के इकबाल मिर्ची से संबंधों का खुलासा हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें अवैध वित्तीय लेनदेन के मामले में समन भेजा था। उन्होंने अंडरवर्ल्ड के अपराधी इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेनन के साथ डील की बात स्वीकारी थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रफुल्ल पटेल और मिर्ची की डील को देशद्रोह करार दिया था। उन्होंने शरद पवार और राहुल गाँधी को भी इस मामले में ख़ुद को पाक-साफ़ साबित करने को कहा था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कहा था कि पटेल के दाऊद के साथ क्या सम्बन्ध हैं, वह जाहिर करें।

देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आरोप लगाए

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।
इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।
देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”
उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए?

पंजाब : कांग्रेस ने अपने वादे पूरे करने के बजाए जनता को पकड़ाया झुनझुना

उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन खो चुकी कांग्रेस मनलुभावन प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। प्रियंका वाड्रा ने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता से दूर करने स्मार्टफोन आदि देने का वायदा किया, लेकिन वह भूल गयी कि राजस्थान में किसानों का कर्ज माफ़ी का वायदा पूरा नहीं हुआ, सत्ता में आने के लिए आतुर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आजकल उत्तर प्रदेश में वादों की लॉलीपॉप दे रही हैं, लेकिन हकीकत में जनता के हाथ में झुनझुना ही आता है। दरअसल, कांग्रेस की यही परंपरा रही है। कांग्रेस के पंजाब में साढ़े चार साल के कार्यकाल में हुए कामों और जनता के किए गए वादों की पड़ताल करें तो वास्तविकता बेहद चौंकाती है। जनता ने जिन उम्मीदों के साथ कांग्रेस को सत्ता सौंपी, वह तो पूरी हुई नहीं…मुश्किलें और बढ़ती गईं। दिग्गज कांग्रेस नेता जनता का भला करने के बजाए, आपस में ही लड़ते रहे। आइये,  2017 में कांग्रेस द्वारा पंजाब के लोगों से किए टॉप टेन वादों और उसके नतीजों की पड़ताल करते हैं…

1. वादा – चार हफ़्ते में नशे का खात्मा..
नतीजा : साढ़े चार साल में और बढ़ गया
नशा पंजाब में बड़ा मुद्दा रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भटिंडा में प्रचार के दौरान हाथ में गटका साहिब उठा कर सरकार बनने पर चार हफ़्तों में नशा खत्म करने का वादा किया था…पर हकीकत यह है कि पंजाब में ड्रग्स का कारोबार अब भी जारी है. नवजोत सिंह सिद्धू और डिप्टी सीएम बने सुखजिंदर रंधावा तो पंजाब में नशे खासकर चिट्टे के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया को सीधे दोषी ठहराते हुए उन्हें जेल में डालने की मांग करते रहे हैं। सिद्धू खेमा कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने जानबूझकर मजीठिया के खिलाफ सख्ती बरतने के ऑर्डर नहीं दिया। कैप्टन के कार्यकाल के दौरान विभिन्न जिलों में 50 से ज्यादा युवाओं की नशे से मौत के मामले दर्ज हुए हैं। यह संख्या और ज्यादा हो सकती है, क्योंकि ऐसे ज़्यादातर मामलों में पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं होती। कांग्रेस सरकार ने ड्रग्स के ख़िलाफ़ बड़ी मुहिम कभी छेड़ी ही नहीं।

2. वादा– किसानों की कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फ़सल की पूरी रकम

नतीजा : 90 हजार करोड़ में से सिर्फ सिर्फ 5 हजार करोड़ की माफी
कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फसल की पूरी रकम का नारा लगाकर सत्ता में आई अमरिंदर सरकार ने न तो वादे के मुताबिक सभी किसानों का पूरा कर्ज़ा माफ किया और न ही प्रदेश में किसानों की कुर्की बंद हुई। इसके विपरीत कर्ज़ के बोझ तले किसान प्रदेश में ख़ुदकुशी कर रहे हैं. सरकार बनने से पहले सारे किसानों के सभी प्रकार के 90 हज़ार करोड़ रुपये के कर्ज़ माफ़ करने के वादा किया गया, लेकिन इसका परिणाम ऊंट के मुंह में जीरे के समान आया। कैप्टन सरकार ने कर्ज माफी की दिशा में जो थोड़ा-सा काम किया, उसमें बहुत ज्यादा शर्तें लगा दीं। नतीजा-कांग्रेस सरकार के साढ़े 4 साल के कार्यकाल में मात्र 5.64 लाख किसानों का 4623 करोड़ रुपए का कर्ज माफ हो पाया। 2.68 लाख मजदूरों का भी सिर्फ 526 करोड़ रुपए का लोन माफ किया गया।

3. वादा – घर घर नौकरी, हर घर नौकरी, हर साल 1.61 नौकरी
नतीजा : नौकरियां न दे पाने पर कांग्रेस ने ही कैप्टन की क्लास लगाई
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी घोषणा पत्र में पंजाब के हर घर से एक व्यक्ति को नौकरी देने का वादा किया था. वादा किया गया था कि सरकार हर साल 1.61 लाख लोगों को नौकरियां देगी. पिछले साढ़े चार साल में घर घर नौकरी, हर घर नौकरी का वादा हवा-हवाई ही साबित हुआ है। दिखावे के लिए रोजगार मेले लगे, नियुक्ति पत्र भी बंटे, लेकिन लाखों की छोड़िए कुछ हजार युवाओं को ही नौकरी नसीब हो पाई। कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनकी सरकार पर ये वादा पूरा नहीं करने का आरोप लगता रहा है। जुलाई-2021 में सोनिया गांधी के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे कैप्टन को जो 18 सूत्री कार्यक्रम दिया गया था, उसमें यह मुद्दा शामिल था। सिद्धू भी इसे लेकर कैप्टन सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।

4. वादा – खनन माफिया खत्म कर पंजाब का खजाना भरेंगे
नतीजा : माफिया हावी, रद्दी की टोकरी में सिद्धू की रिपोर्ट
पंजाब कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र की शुरुआत में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार को माफ़िया राज पर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इसके साथ ही वादा किया था कि रेत माफ़िया, केबल माफ़िया, शराब माफ़िया, ड्रग्स माफ़िया औऱ ट्रांसपोर्ट माफ़िया को कांग्रेस सरकार बनने पर तुरंत खत्म किया जाएगा। लेकिन साढ़े चार साल में सरकार कुछ नहीं कर पाई। नवजोत सिंह सिद्धू और उनका खेमा इस बात को पूरी ताकत से उठाता रहा है कि पंजाब सरकार के पास रेत के अवैध खनन को रोकने के लिए न तो कोई पॉलिसी है और न ही सरकार ऐसी कोई पॉलिसी बनाना चाहती है। कांग्रेस सरकार ने खनन का खूनी खेल खेलने वाले किसी बड़े माफिया को जेल में नहीं पहुंचाया। इसके विपरीत कांग्रेस सरकार के ही एक मंत्री को गैरक़ानूनी खनन में नाम आने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। 2017 में कैप्टन की कैबिनेट में मंत्री बनते ही सिद्धू, तेलंगाना और तमिलनाडू का मॉडल समझने के लिए खुद वहां गए और उसके बाद अपनी रिपोर्ट भी सरकार को दी, मगर कैप्टन ने उसे रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया।

5. वादा – सरकारी कर्मचारियों का रखेंगे पूरा ख्याल
नतीजा : लाखों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत
कैप्टन ने सत्ता में आने के लिए ठेका भर्ती बंद करने, कर्मचारियों को रेगुलर करने, खाली पदों को भरने, बकाया भत्ते जारी करने के लिए महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने के वादे किए थे. इनमें से वादे पूरे नहीं हुए. पंजाब में इस समय अध्यापक, आशा वर्कर, एएनएम, ठेका कर्मचारी, रोडवेज कर्मचारी और डीसी कार्यालय के कर्मचारी अपनी-अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इन कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक है। खुद सिद्धू का विरोध भी यही था कि कैप्टन सरकार को कर्मचारियों की मांगों को पूरा करना चाहिए।

6. वादा -नौजवानों, छात्रों को देंगा स्मार्टफ़ोन
नतीजा : प्रियंका गांधी के वादे जैसा ही लॉलीपॉप
प्रियंका गांधी अब यूपी स्मार्टफ़ोन देने का लॉलीपॉप दे रही हैं। पंजाब में चुनाव के दौरान स्मार्टफ़ोन देने का वादा करते हुए कांग्रेस ने युवाओं से फॉर्म तक भरवाए। अब तक उनमें से किसी को भी फ़ोन नहीं मिला है. सरकार के ख़िलाफ़ की जा रही पोल खोल रैलियों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन के स्मार्टफ़ोन पर चुटकुले सुना रहे हैं..

7. वादा – आटा दाल के साथ चीनी चाय पत्ती
नतीजा : अब लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है
कांग्रेस ने अकाली-भाजपा सरकार की प्रतिष्ठित आटा दाल योजना के साथ चाय पत्ती और चीनी देने का वादा किया था। लेकिन अब लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है. इस योजना में दाल, चीनी और चायपत्ती अब तक नहीं मिली। 

8. वादा – शराब माफिया पर पूरी तरह के नकेल कसेंगे
नतीजा : घर-घर में नकली और अवैध शराब की फैक्ट्रियां
कांग्रेस का वादा शराब माफिया पर पूरी तरह के नकेल कसने का था। लेकिन विपक्ष की छोड़िए कैप्टन सरकार के कई कैबिनेट मंत्री और नवजोत सिंह सिद्धू कहते रहे हैं कि प्रदेश में शराब माफिया हावी है। जगह-जगह अवैध शराब बिक रही है। घर-घर में नकली फैक्ट्रियां लगाकर शराब निकाली और बेची जा रही है। इससे पंजाब का खजाना बर्बाद हो रहा है। कांग्रेस हाईकमान को शराब माफिया के खिलाफ कैप्टन अमरिंदर सिंह को काम करने के लिए कहना पड़ा, लेकिन कुछ हुआ नहीं। पंजाब में केबल कारोबार भी पहले जैसा ही चल रहा है और शराब और ट्रांसपोर्ट के कारोबार में भी कहीं कोई अंतर नहीं दिख रहा।

9. वादा- बेघर दलितों को देंगे अपने घर की सौगात
नतीजा : राज्य में दलितों के खिलाफ अपराध बढ़े
कैप्टन सरकार ने पंजाब में दलितों के सशक्तिकरण के लिए बेघरों को मकान, 50 हज़ार रुपये तक कर्ज़ माफ़ करने जैसे वादे किए थे जो जमीन पर पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। दलितों के खिलाफ अपराधों में जरूर बढ़ोतरी हुई है।

10. वादा- कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की जान बचाएंगे
नतीजा : कर्ज के कारण किसानों की खुदकुशी अब भी जारी
कृषि प्रधान प्रदेश पंजाब का भूमिपुत्र बुरी तरह के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। कर्ज पर कर्ज बढ़ने से परेशान किसान खुदकुशी को मजबूर है। कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए वादा किया कि वह किसानों की जान बचाने के लिए सारे जतन करेंगे। साढ़े चार साल के बाद भी न तो किसानों की कर्जमाफी हो पाई और न ही उन्हें अन्य मुश्किलों से छुटकारा मिल पाया है। इसके कारण पंजाब में किसानों की खुदकुशी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।