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पूर्व रॉ अधिकारी ने किया था पवार-दाऊद संबंधों का दावा, अब उसकी बहन से जुड़े नवाब मलिक के तार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से लिंक का खुलासा किया है। अब खबर आई है कि NCP अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल के आवास पर एक बड़ी बैठक में हिस्सा लिया है। इस बैठक में मुंबई के पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और CP (लॉ एंड ऑर्डर) वी नांगरे पाटिल को भी तलब किया गया। इसमें आर्यन खान ड्रग्स मामले को लेकर चर्चा की गई। नवाब मलिक ने फिर से खुलासे की धमकी दी है।

देवेंद्र फडणवीस ने एक सलीम पटेल का जिक्र अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया, जिसे आतंकी दाऊद इब्राहिम का करीबी बताया जाता है। वो दाऊद की बहन हसीना पार्कर का ड्राइवर और बॉडीगार्ड हुआ करता था। 2007 में ये दोनों ही गिरफ्तार किए गए थे। जाँच में खुलासा हुआ था कि दाऊद इब्राहिम की सारी संपत्तियों को हसीना के नाम पर किया जा रहा है और इस पूरे मामले में ‘पॉवर ऑफ अटॉर्नी’ सलीम को बनाया जा रहा था। उसे ‘गोवा पटेल’ के नाम से अंडरवर्ल्ड में जाना जाता था।

जमीन के कब्जे की सारी वारदातों को वो अपने हाथ में लेता था और पूरा करता था। हैदराबाद बम ब्लास्ट मामले के अलावा रंगदारी और धोखाधड़ी के उस पर कई मामले दर्ज हैं। 2010 में तत्कालीन गृह मंत्री आरआर पाटिल के साथ सलीम पटेल की कुछ तस्वीरें भी सामने आई थीं। एक इफ्तार में दोनों बातचीत करते हुए दिखे थे। पाटिल को तब विपक्ष के आरोपों के बाद सफाई देनी पड़ी थी। ये पार्टी 11 सितंबर 2010 को राज्य अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष नसीम कुरैशी के घर पर हुई थी।

इसी इफ्तार पार्टी में भाजपा के विधायक रहे प्रेम कुमार शर्मा की हत्या का आरोपित मोबिन कुरैशी भी उपस्थित था और उसने पाटिल को गुलदस्ता भेंट किया था। उस पर भी एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वो पेशे से बिल्डर था और अवैध निर्माण के कई नोटिस उसे मिल चुके थे। दिवंगत आरआर पाटिल NCP और कॉन्ग्रेस में रहे थे। वो महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी थे। 26/11 हमले के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन 2009 में उन्हें फिर गृह मंत्री बना दिया गया था।

अब नवाब मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर कहा है कि देवेंद्र फडणवीस ने सब कुछ ‘राई का पहाड़’ बना कर पेश किया है और असली ‘हाइड्रोजन बम’ तो वो अब फोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि फडणवीस के सीएम कार्यकाल में मुंबई हॉस्टेज बनी हुई थी और दुबई में बैठ कर अंडरवर्ल्ड वाले उगाही करते थे। नवाब मलिक ने कहा कि जिस जमीन की बात हो रही, वहाँ उनका परिवार पहले किराएदार था और बाद में मालिकाना हक़ मिला। उन्होंने दावा किया कि वहाँ पहले से उनके गोदाम और दुकानें थीं।

रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने NCP अध्यक्ष शरद पवार के सम्बन्ध में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के बेहद करीबी माने जाने वाले पार्टी सांसद अहमद पटेल के दाऊद से करीबी संबंध थे। कांग्रेस और एनसीपी नेताओं से अपनी इसी करीबी का फायदा उठाकर अंडरवर्ल्ड डॉन देश से भाग निकलने में कामयाब रहा। उसे पकड़ कर लाने के खुफिया ऑपरेशन भी इसकी भेंट चढ़े। 1993 मुंबई ब्लास्ट के इस गुनहगार को केंद्र सरकार ने हाल ही में यूएपीए कानून के तहत आतंकी घोषित किया है।

सूद ने एक साक्षात्कार में कहा था कि जब दाऊद और मुंबई धमाकों के अन्य आरोपी देश से भागे, तब पवार मुख्यमंत्री थे। उनके मुताबिक धमाकों के बाद दाऊद और उसके गुर्गों के खिलाफ कानून-प्रवर्तन एजेंसियों ने सख्ती नहीं की। इस सबसे संकेत मिलते हैं कि शरद पवार और दाऊद के बीच संबंध थे। उन्होंने कहा था, “यह जगजाहिर है कि शरद पवार के दाऊद इब्राहिम से संबंध थे।” सूद ने जोर देकर कहा था कि आतंकवाद के सरपरस्त मुल्क पाकिस्तान की तारीफ करने के पीछे पवार और दाऊद इब्राहिम के ही संबंध ही हैं। दाऊद के साथ उनका व्यापारिक संबंध भी रहा है।

इसी तरह शरद पवार के एक अन्य करीबी NCP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के इकबाल मिर्ची से संबंधों का खुलासा हुआ था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें अवैध वित्तीय लेनदेन के मामले में समन भेजा था। उन्होंने अंडरवर्ल्ड के अपराधी इक़बाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेनन के साथ डील की बात स्वीकारी थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रफुल्ल पटेल और मिर्ची की डील को देशद्रोह करार दिया था। उन्होंने शरद पवार और राहुल गाँधी को भी इस मामले में ख़ुद को पाक-साफ़ साबित करने को कहा था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कहा था कि पटेल के दाऊद के साथ क्या सम्बन्ध हैं, वह जाहिर करें।

देवेंद्र फडणवीस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आरोप लगाए

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।
इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।
देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”
उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए?

‘नवाब मलिक की 4 संपत्तियों का दाऊद से लिंक, 20 लाख रूपए में 3 एकड़ जमीन, पैसे मुंबई बम धमाके के आतंकियों को भी मिले’: फडणवीस ने दिखाए सबूत

                          मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से सम्बन्ध होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वो दिवाली के बाद ही कुछ खुलासे करने वाले थे, लेकिन दस्तावेज जमा करने में देर हो गई थी।

उन्होंने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।

इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।

देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”

देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए? भाजपा नेता की मानें तो यह अकेला उदाहरण नहीं है और ऐसी 5 संपत्तियाँ हैं। उन्होंने बड़ा आरोप लगाया कि अंडरवर्ल्ड इनमें से 4 संपत्तियों के लेनदेन में सीधे तौर पर शामिल है।

देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि वो इन सभी करतूतों के सबूत न सिर्फ जाँच एजेंसियों को सौंपेंगे, बल्कि NCP के अध्यक्ष शरद पवार को भी देंगे। उन्होंने आगे बताया कि गोवा का कुर्ला में एलबीएस रूट पर एक कंपाउंड है। जमीन सॉलिडस नाम की कंपनी में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन सलीम पटेल और शाह वली खान द्वारा बेची गई थी और जिस सॉलिडस कंपनी को जमीन आवंटित की गई थी, वह नवाब मलिक के परिवार की कंपनी है। खरीद और बिक्री दस्तावेज पर एक फ़राज़ मलिक के नाम हैं।

महाराष्ट्र : Remdesivir सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस ने किया अरेस्ट

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कारगर दवा रेमडेसिविर (Remdesivir) पर राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने आरोप लगाया है कि रेमडेसिविर सप्लायर को महाराष्ट्र पुलिस परेशान कर रही है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य की पुलिस दमन स्थित रेमडेसिविर सप्लायर को सिर्फ इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि वहाँ के सप्लायर ने बीजेपी नेताओं के अनुरोध पर राज्य को एंटी वायरल ड्रग रेमडेसिविर का स्टॉक देने पर राजी हो गए थे। हालाँकि महाराष्ट्र पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह बस स्टॉक की जाँच के लिए निकले थे ताकि कालाबाजारी ना हो।

देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद आज रात (अप्रैल 17, 2021) लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।”

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मंजूनाथ सिंगे ने उन्हें बताया कि उनके पास इनपुट थे कि कुछ निर्यातकों के पास 60,000 रेमडेसिविर की शीशियाँ थीं और वे केवल उसी की जाँच के लिए जा रहे हैं। लेकिन वहाँ जाकर उन्होंने गिरफ्तारी कर ली।

फडणवीस ने बताया कि (फार्मा कंपनी के मालिक से) बात करने पर पता चला कि उन्हें धमकी दी गई है। इस बारे में देवेंद्र फडणवीस ने डीसीपी और एडिशनल सीपी से बात कर उन्हें तुरंत छोड़ने की माँग की। फडणवीस ने महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में एनसीपी (NCP) कोटे से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) पर महाराष्ट्र में रेमडेसिविर  की मौजूदा स्थिति को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि नवाब मलिक को सिर्फ कोरी राजनीति करना और नैरेटिव सेट करना आता है, उन्हें राज्य के लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्होंने डीसीपी मंजूनाथ सिंगे को अनुमति पत्र दिखाया और बताया कि रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए उन्होंने बोला है। लेकिन डीसीपी ने कहा कि इससे पहले उन्हें (पुलिस को) सूचित नहीं किया गया था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ये जो भी कुछ राज्य की सरकार पुलिस के साथ मिलकर कर रही है, वो गलत है।

देवेंद्र फडणवीस के आरोपों को डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने गलत बताया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें बस पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि एंटी वायरल दवा की व्यापक कालाबाजारी के इनपुट्स मिले थे।

केंद्र सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन और उससे जुड़े सभी प्रकार के इनग्रेडिएंट्स के निर्यात पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया है कि जब तक देश में कोविड-19 की स्थिति नहीं सुधरती है, तब तक रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगी रहेगी।

अर्नब प्रकरण : अन्वय नाइक की पत्नी और उद्धव ठाकरे की पत्नी के बीच करोड़ों का जमीन सौदा --किरीट सोमैया, भाजपा नेता का दावा

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, महाराष्ट्र भाजपा के तेज-तर्रार नेता किरीट सोमैया ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के परिवार का स्वर्गीय अन्वय नाइक के परिवार के साथ जमीन की लेनदेन का मामला था। भाजपा नेता सोमैया ने कहा कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं, जो ठाकरे और नाइक परिवार के बीच हुए जमीन के सौदे को साबित करते हैं।

किरीट सोमैया ने ट्विटर के जरिए यह खुलासा करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र सरकार की वेबसाइट में मौजूद मुरुद रायगढ़ के भूमि रिकॉर्ड के मुताबिक उद्धव ठाकरे की पत्नी का अन्वय नाइक के परिवार के साथ भूमि का लेनदेन हुआ था। इस मामले से जुड़े दस्तावेज उन्होंने एसपी और कलेक्टर को भेज दिए हैं।

आगे उन्होंने लिखा है कि उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे ने मनीषा रविंद्र वायकर के साथ मिलकर दिवंगत अन्वय नाइक और अक्षिता नाइक से मार्च 2014 में 2.20 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी थी। गौरतलब है कि अक्षिता नाइक, अन्वय नाइक की पत्नी हैं। इतना ही नहीं, अर्नब के मामले को जमीन के इस लेनदेन से जोड़ते हुए किरीट सोमैया ने उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया और पूछा कि क्या यह अर्नब गोस्वामी को फंसाने की वजह भी हो सकती है? उन्होंने अपने ट्वीट में कुछ दस्तावेज शेयर किया, जिन्हें वे इस जमीन सौदे से जुड़ा हुआ बता रहे हैं। 

अर्नब की तरह ही समित ठक्कर के खिलाफ भी महाराष्ट्र सरकार गुंडागर्दी पर उतारू

महाराष्ट्र सरकार की ज्यादतियों का शिकार बने रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई, लेकिन ऐसे और भी कई नाम हैं, जिन्हें महाराष्ट्र के जंगलराज का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। महाराष्ट्र में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के नेतृत्व में रोज-ब-रोज जंगलराज का नमूना पेश किया जा रहा है। उद्धव ठाकरे सरकार में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को सरकारी अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है। ठाकरे के विरोध में आवाज उठाने वालों का दमन किया जाना आम बात हो गई है। ट्विटर पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ टिप्पणी करने पर समित ठक्कर को नागपुर पुलिस ने 24 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया था। जमानत मिलने पर फिर उसे दूसरी जगह की पुलिस द्वारा फिर उठा लिया जाता है। एक खास मामले में जमानत मिलने पर उसे फिर गिरफ्तार कर लिया जाता है। दरअसल, सिर्फ एक ट्वीट के कारण समित ठक्कर को बार-बार गिरफ्तार कर उसके ऊपर अत्याचार किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ लोग मुखर हो रहे हैं और समित ठक्कर को रिहा करने की गुहार लगा रहे हैं।

कांग्रेस-शिवसेना-एनसीपी से खतरे में प्रेस फ्रीडम

इन्दिरा गांधी की कांग्रेसी सरकार ने 25 जून, 1975 को भारतीय लोकतंत्र और प्रेस की आजादी को लेकर एक काला अध्याय जोड़ा था, लेकिन 4 नवंबर, 2020 को महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना सरकार उससे भी आगे निकल गई है।

इन्दिरा गाँधी ने आपातकाल में प्रेस सेंसरशिप लगा दी थी, लेकिन किसी पत्रकार को इस बेशर्मी से नहीं पकड़ा। मुझसे भी वरिष्ठ पत्रकार और नेता इस बात को जानते होंगे कि दैनिक The Motherland और Organiser साप्ताहिक के मुख्य संपादक (स्व)केवल रतन मलकानी और इन्दिरा के बीच 36 का आंकड़ा था, आपातकाल लगाते ही पुलिस ने दीनदयाल शोध संस्थान(उस समय The Motherland और Organiser साप्ताहिक यहाँ से प्रकाशित होते थे), झंडेवालान और राजेंद्र नगर स्थित मलकानी के निवास स्थान को चारों तरफ घेर बिना किसी बदतमीजी किये उन्हें मीसा में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन शिव सेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने तो इंदिरा गाँधी को भी बहुत पीछे छोड़ दिया। 

अगर महाराष्ट्र सरकार ने अर्नब के विरुद्ध उस पुराने मुद्दे, जिसकी किन्ही कारणों से, फाइल पहले ही बंद हो चुकी है, उसको खोल छोटे पेंगुइन को बचाने के लिए अर्नब की आवाज़ दबाने के जो लिए कुचक्र किया है, वह बहुत ही निंदनीय है। पहले अर्नब को नोटिस देना था, संतुष्ट न होने पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी थी, लेकिन जल्दीबाजी की हड़बड़ी में सबकुछ चौपट हो गया। दूसरे, चर्चा यह भी है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नीस और उद्धव ठाकरे के बीच क्या बातचीत हुई थी? क्योंकि जिस केस को खोला गया है, वह देवेंद्र के कार्यकाल का है। सुशांत सिंह हत्या परिचर्चा में अर्नब ने इस मीटिंग पर भी वार किया था।

वास्तव में सुशांत कांड ने कई मुद्दों को उजागर कर दिया था, जिससे महाराष्ट्र सरकार, बॉलीवुड और ड्रग माफिया तक लपेटे में आ गए हैं। पुलिस कमिश्नर परवीन सिंह केवल एक मोहरा है, क्योंकि पुलिस को सरकार के आदेशों का पालन करना होता है। 

कोर्ट द्वारा उल्लेखित किये गए प्रश्नचिन्ह 

 पुलिस हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं;

अदालत की अनुमति के बिना पुराने केस की बंद फाइल को खोला गया;

आत्महत्या और अर्नब गोस्वामी के बीच कोई सम्बन्ध नहीं;   

मुंबई पुलिस ने दावा करते हुए कहा था कि जिस मामले को अदालत ने साल 2018 में बंद कर दिया था उसमें पुलिस को नए सबूत हासिल हुए हैं। इसकी वजह से उन्हें मामले की जाँच के लिए अर्णब गोस्वामी को पुलिस हिरासत में रखने की माँग उठाई थी। 6 घंटे की मैराथन सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस हिरासत की माँग को ठुकराते हुए अर्णब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 

अदालत ने कहा इस मामले में पुलिस हिरासत के लिए कोई अर्थपूर्ण आधार नहीं हैं। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि मामले आत्महत्या और अर्णब गोस्वामी की भूमिका के बीच संबंधों की कोई कड़ी नज़र नहीं आती है। न्यायाधीश ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यह एक पुराना मामला है जिसकी फाइल बंद हो चुकी थी और इसे बिना अदालत की अनुमति के शुरू किया गया है।

रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत ने अर्णब गोस्वामी के वकील को जमानत संबंधी दस्तावेज़ तैयार रखने के लिए कहा है। आज सुबह अलीबाग अदालत में इस मामले की सुनवाई होगी। इसी दौरान मुंबई उच्च न्यायालय साल अर्नब गोस्वामी द्वारा दायर की गई 2018 के इस मामले को ख़त्म करने की याचिका पर भी सुनवाई करेगी।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन चीफ अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार कर पत्रकार बिरादरी में खौफ पैदा करने की कोशिश की। महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों को ये संदेश देने की कोशिश की है कि खिलाफ जाने पर हर हाल में भुगतना पड़ेगा। किसी समाचार चैनल के प्रमुख को बिना किसी पूर्व नोटिस के सुबह-सुबह एक आतंकवादी की तरह गिरफ्तार कर घसीटकर ले जाया जाना कांग्रेसी फासिज्म का उदाहरण है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर प्रेस बिरादरी के लोग आहत हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।

अर्नब की गिरफ़्तारी पर मिलीजुली प्रक्रियाएं :-


महाराष्ट्र : निजामुद्दीन में आयोजित मजहबी कार्यक्रम से आए संक्रमित लोग ‘मानव बम’ जैसे : देवेंद्र फडणवीस, पूर्व मुख्यमंत्री

तबलीगी जमात
महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देख परेशान हुए पूर्व सीएम देवेन्द्र फडनवीस ने तबलीगी जमातियों को लेकर बढ़ा बयान दिया है। फडनवीस ने कहा है कि दिल्ली के मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के लोग संक्रमित होकर पूरे देश में घूम रहे हैं, जो कि एक मानव बम की तरह है। इनको पकड़कर इनकी जाँच की जानी चाहिए और इन्हें जल्दी से जल्दी क्वारंटाइन किया जाना चाहिए। फडनवीस ने यह बातें बीते दिन राज्यपाल से मुलाकात के बाद एक वीडियो जारी कर कहीं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार शाम को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया, वीडियो संदेश में फडणवीस ने कहा, “नई दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मजहबी कार्यक्रम में कोरोना वायरस से संक्रमित होकर आए लोग ‘मानव बम’ जैसे हैं। वे बड़ी आबादी को संक्रमित कर सकते हैं। इसलिए सरकार को इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से इलाज किया जाना चाहिए।”
वीडियो में फडनवीस ने राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। फडनवीस ने आगे कहा कि सरकार जानबूझकर तबलीगी जमात से जुड़े संक्रमित लोगों के आँकड़े पेश नहीं कर रही है। इतना ही नहीं सरकार के मंत्री तरह-तरह के बयान देकर भ्रामक बातें कर गंदी राजनीति कर रहे हैं। सरकार दिल्ली मरकज में शामिल होकर लौटकर आए लोगों को पकड़ने में असमर्थ है। जरूरी है कि इन लोगों का पता लगाकर जल्दी से जाँच की जाए और फिर इन्हें क्वारंटाइन किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने जो राशन लोगों के लिए दिया है वह यहाँ के लोगों को नहीं मिल रहा है। वह भुखमरी के कगार पर हैं। यहाँ तक कि सरकार डॉक्टरों को पीपीई किट भी उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं। इस तरह से ऐसे लोगों का मनोबल कम होता है, जो लोग सामने आकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं।

देश में सबसे अधिक कोरोना से मरने वालों और इससे संक्रमिल लोगों की संख्या महाराष्ट्र में सबसे अधिक है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाईट के मुताबित महाराष्ट्र में अब तक कोरोना की चपेट में आने से 72 लोगों की मौत, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1135 से अधिक हो चुकी है।
चौंकाने वाली बात यह कि अकेले मुंबई शहर ही कोरोना का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बना हुआ है यहाँ अकेले लगभग 700 कोरोना संक्रमित मरीज हैं और करीब 40 की मौत हो चुकी है। मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में जमात के कनेक्शन के चलते कोरोना वायरस फैला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई के अस्पतालों में 90 फीसदी मरीजों का तबलीगी जमात से कनेक्शन सामने आया है।
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साभार "दैनिक जागरण" आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज़ स...
इससे पहले बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में कहा था कि इस दिल्ली मरकज में शामिल और फिर वहाँ से कोरोना संक्रमित हुए तबलीगी जमात के लोग मानव बम की तरह घूम रहे। इन लोगों को खुद ही प्रशासन को सौंप देना चाहिए, ताकि समाज में यह बीमारी न फेंला सकें।

अजित ने मॉंगा 2.5 साल मुख्यमन्त्री पद

उद्धव ठाकरे, शरद पवार
महाराष्ट्र में आख़िरकार बनती दिख रही सरकार के आसार फिर खटाई में पड़ गए हैं। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि उद्धव ठाकरे पूरे 5 साल महाराष्ट्र पर राज नहीं कर पाएँगे, क्योंकि सहयोगी एनसीपी ने भी ढाई साल अपने लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी माँग ली है। गौरतलब है कि शिवसेना (56) और एनसीपी (54) की सीटों में केवल 2 विधायकों का अंतर है।
गौरतलब है कि कल तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पाला बदल कर उनके साथ पहुँचे शरद पवार के भतीजे अजित पवार के इस्तीफ़े के बाद शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन के अंतर्गत सरकार बनाने की घोषणा की थी। यह भी दावा किया था कि विधानसभा चुनाव तक न लड़ने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस गठबंधन के सीएम होंगे।
इस बीच यह भी खबर आई थी कि भाजपा को गच्चा देने के बाद अजित पवार अपनी पार्टी में लौट भी गए हैं और ससम्मान स्वीकार भी हो गए हैं। मौजूदा खबरों में भी उनके डिप्टी सीएम बनाए जाने की बात सामने आ रही है। बहुत सम्भव है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार 2.5 साल सीएम पद की माँग में भी उन्हीं का नाम आगे बढ़ा दें।
सत्ता पर अपनी जकड़ सबसे मजबूत करने का एनसीपी का व्यूह शुरू से था। जब 13 मंत्रियों और एक डिप्टी सीएम के बदले स्पीकर पद से कॉन्ग्रेस के दावा छोड़ने की बात सामने आई थी तो उसी समय यह साफ़ था कि शक्ति-संतुलन के नाम पर एनसीपी यह पद शिवसेना से छीन कर अपने पास रखेगी। इसके अलावा एक डिप्टी सीएम उसका होना ही था। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी भी उसने आधे समय के लिए छीन ही ली, तो उद्धव ठाकरे के लिए शिवसैनिकों को यह जवाब देना मुश्किल हो जाएगा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से ‘वादाखिलाफी’ करने वालों के साथ किसी तरह का समझौता न करने के नाम पर बाहर होने वाली पार्टी को यूपीए में इतने समझौते करने के बाद हासिल क्या हुआ। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कल अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि भाजपा 2.5 साल सीएम के अलावा शिव सेना की हर शर्त पर 30 साल पुराने गठबंधन को बचाने के लिए राज़ी थी।
स्तम्भकार आनंद रंगनाथन ने इस खबर पर चुटकी लेते हुए इस प्रकरण के पहले शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बैठक की याद दिलाई।
स्पीकर पद से दावा छोड़ा
कांग्रेस को स्पीकर पद नहीं उद्धव कैबिनेट में चाहिए अपने 13 मंत्री
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव ठाकरे के शपथ लेने से पहले कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा के स्पीकर पद पर दावेदारी से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस उद्धव कैबिनेट में 13 पद के लिए स्पीकर पद पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार हो गई है।
शुरुआत में कांग्रेस स्पीकर पद के लिए अड़ी थी। न्यूज़18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। इनमें विजय नामदेवराव,यशोम्मती ठाकुर, नाना पटोले, वर्षा गायकवाड़, अमीन पटेल, अशोक चव्हाण, अमित देशमुख, विश्वजीत कदम, बंटी पाटिल और केसी पडवी आदि नेताओं के नाम शामिल हैं। वहीं चार अन्य कांग्रेस नेता राज्य मंत्री बनाए जाएँगे।
शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार में स्पीकर पद एनसीपी के पास रहेगी। एनसीपी को कैबिनेट में भी उचित हिस्सेदारी मिलेगी। महाराष्ट्र में 43 से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं। 2003 में हुए 91वें संवैधानिक संशोधन के अनुसार राज्य कैबिनेट में विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकते।
महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक नया मोड़ उस वक़्त आया जब अजित पवार के समर्थन से सरकार बनाने वाले देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। बता दें कि 288 विधानसभा सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के पास 105 सीटें है।
फडणवीस के इस्तीफे के बाद उद्धव ठाकरे शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेता चुने गए। तीनों दलों के इस गठबंधन को महाविकास अघाड़ी नाम दिया गया है। उद्धव गुरुवार(नवम्बर 28) को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। उनके साथ छह अन्य लोगों के भी शपथ लेने की संभावना है।

“भाँड़ में जाएँ ये 3% ब्राह्मण” : मराठी पत्रकार निखिल वागले की घृणित जातिवादी सोच

निखिल वागले
महाराष्ट्र के पत्रकार निखिल वागले ने सोशल मीडिया पर घृणा फैलाई है। विवादास्पद बयानों के लिए कुख्यात निखिल वागले ने ट्विटर पर ब्राह्मणों को भला-बुरा कहा। उन्होंने महाराष्ट्र के केयरटेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की जाति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के ब्राह्मण देवेंद्र फडणवीस की सरकार जाने से ख़ुश नहीं है। वागले ने लिखा कि महाराष्ट्र के ब्राह्मण ऐसा सोचते थे कि फडणवीस की सरकार उनकी अपनी ही सरकार है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली भावी सरकार से ग्रामीण और दलित काफ़ी ख़ुश हैं।
निखिल वागले ने इसे स्पष्ट ध्रुवीकरण करार दिया। इसके बाद ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्होंने लिखा- “भाँड़ में जाएँ ये 3% ब्राह्मण।” वागले मराठी पत्रकार हैं और आईबीएन लोकमत के महानगर एडिटर रह चुके हैं। आज जातिवाद कर रहे निखिल वागले ने 2012 में जातिवाद हटाने की बात की थी। उस वक़्त उन्होंने लिखा था कि जाति, पंथ और मजहब की राजनीति से हट कर जनता को अब विकास की राजनीति की ज़रूरत है। उन्होंने लिखा था कि वो 1985, 92 और 2002 के दंगों को फिर से होता हुआ नहीं देखना चाहते।
निखिल वागले जिस शिवसेना की आज प्रशंसा कर रहे हैं, उससे कभी उन्हें ख़ासी चिढ़ थी। शिवसैनिकों ने उनके स्टूडियो में घुस कर उनकी पिटाई की थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निखिल वागले के चेहरे पर स्याही पोत दी थी। उस पिटाई के बाद वागले अक्सर शिवसेना की आलोचना करते मिलते थे। अब जब शिवसेना ने भाजपा को धोखा देकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाने का निर्णय लिया है, वागले उद्धव की तारीफ़ करते नहीं तक रहे।


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निखिल वागले की पिटाई के बाद शिवसेना के तत्कालीन अध्यक्ष बाल ठाकरे ने इसे मीडिया पर हमला मानने से इनकार कर दिया था। ठाकरे ने पूछा था कि अगर किसी पत्रकार की बीवी अपने पति को मारती है तो क्या उसे मीडिया पर हमला माना जाएगा?’ उन्होंने कहा था कि ये बस एक पत्रकार की पिटाई है, मीडिया की नहीं। बाल ठाकरे ने कहा था कि वागले ने राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद सोनिया गाँधी के चरित्र पर सवाल उठाए थे, तब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद वागले ने माफी माँगी थी। बालासाहब ने कहा था कि इसी तरह शिवसैनिक भी अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाए और वागले की पिटाई कर दी। ठाकरे ने कहा था कि इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।
तब बाल ठाकरे ने कहा था कि एनसीपी और कांग्रेस भी पूर्व में पत्रकारों पर हमले करती आई है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। हाल के दिनों में निखिल वागले ने शिवसेना की तारीफ़ में कई ट्वीट किए हैं। शिवसेना नेताओं और उनके बीच बधाइयों का आदान-प्रदान भी हो रहा है। उन्होंने टेलीग्राफ के उस हैडलाइन का भी समर्थन किया है, जिसमें कहा गया है कि चाणक्य एक ही थे। इस ख़बर में अमित शाह पर तंज कसा गया है।