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NCP में क्या खिचड़ी पक रही है?: 24 घंटे में 2 बार मिले पवार चाचा-भतीजा

NCP का बागी गुट लगातार पार्टी के संस्थापक शरद पवार को मनाने में लगा हुआ है। महाराष्ट्र की राजनीति में तब नया मोड़ आ गया था, जब 40 विधायकों का समर्थन लेकर नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया और राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने। उनके कोटे से कुल 9 मंत्रियों ने शपथ ली। अब मुंबई स्थित YB चव्हाण सेंटर में लगातार दूसरे दिन अजित पवार अपने चाचा को मनाने के लिए पहुँचे।

उनके साथ राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और और सुनील तटकरे भी थे। बागी नेताओं ने शरद पवार से अनुरोध किया कि वो NCP को एक रखें। प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि शरद पवार ने सबकी बातें सुनी, लेकिन कुछ कहा नहीं। एक दिन पहले भी ये बागी नेता इसी जगह पर शरद पवार से मिलने पहुँचे थे, उस दौरान भी उन्होंने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब फिर से लगातार दूसरे दिन भी मुलाकात हुई है। अब तक शरद पवार ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

ये नेता शरद पवार को इस बात के लिए मनाने के लगे हुए हैं कि वो महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) और NCP की सरकार को समर्थन दें, लेकिन वो मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उधर शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि विश्वासघात करने वालों के लिए पार्टी के दरवाजे नहीं खुलने चाहिए। शरद पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को विपक्षी दलों की बैठक में जाएँगे, ऐसा बताया जा रहा है। लेकिन, वो आज के विपक्षी डिनर में शामिल नहीं होंगे।

ये भी सामने आया है कि अजित पवार के साथ 30 विधायक भी थे जिन्होंने शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि शरद पवार ने उनलोगों की बातों को गंभीरता से सुना, लेकिन पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा है। असल में बागी विधायक चाहते हैं कि सीनियर पवार का आशीर्वाद उनके ऊपर बना रहे, क्योंकि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों का एक बड़ा वर्ग शरद पवार का वोट बैंक रहा है। प्रफुल्ल पटेल और अजित पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को NDA की बैठक में मौजूद रहेंगे।


दाल में कुछ काला : अचानक शरद पवार से मिलने पहुँचे अजित समेत NCP के बागी नेता

 YB चव्हाण सेंटर में शरद पवार से मिले अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल समेत NCP के अन्य बागी नेता (फोटो साभार: ANI/फेसबुक)
महाराष्ट्र की राजनीति लगातार दिलचस्प होती जा रही है। NCP के दो फाड़ होने के बाद अब अजित पवार अपने चाचा शरद राव पवार से मिलने पहुँचे। इतना ही नहीं, उनके साथ वो बागी विधायक भी थे जिन्होंने NCP के 2 फाड़ करने में उनकी मदद की। अजित पवार ने कई विधायकों-सांसदों के साथ NDA सरकार को समर्थन करने का फैसला लिया था, जिसके बाद वो राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने। उन्हें वित्त मंत्रालय भी दिया गया। शरद पवार द्वारा अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ये प्रकरण हुआ।

हाल ही में अजित पवार अपने चाचा के घर पहुँचे थे। बताया गया था कि बीमार चाची को देखने के लिए वो गए हैं। अब महाराष्ट्र के YB चव्हाण सेंटर में उन्होंने वरिष्ठ नेताओं सांसद प्रफुल्ल पटेल और मंत्री छगन भुजबल के साथ शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल ने इसके बाद कहा कि आज हम सब अपने नेता से मिलने आए हैं और हमने उनसे आशीर्वाद माँगा। उन्होंने कहा कि हमने इच्छा जताई कि ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी’ एकजुट रहे और मिलजुल कर सभी नेता काम करें।

उन्होंने कहा कि हम सब नेताओं ने शरद पवार के समक्ष इच्छा जताई कि NCP मजबूती से काम करे। इन नेताओं ने शरद पवार से आग्रह किया कि वो इस दिशा में विचार करें। प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि शरद पवार ने उन सबकी बातों को ध्यान से सुना, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। प्रफुल पटेल ने कहा कि हम सबकी नजर इस पर है कि शरद पवार क्या भूमिका निभाएँगे। विधानसभा के मॉनसून सत्र से पहले अजित पवार गुट के मंत्रियों मंत्रियों की बैठक भी उप-मुख्यमंत्री के आवास पर ही हुई।

प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि इसी बैठक के दौरान उन्हें शरद पवार के YB चव्हाण सेंटर में उपस्थित होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वो उन्हें सूचित किए बिना यहाँ पहुँचे और उन्हें प्रणाम कर के आशीर्वाद लिया। उन्होंने शरद पवार को अपना भगवान भी बताया। 5 जुलाई को शरद पवार की बैठक में शामिल न होने वाले विधायकों को नोटिस जारी किया गया है। उस दिन ये सभी नेता अजित पवार की बैठक में मौजूद थे। 1999 में स्थापित NCP के 40 विधायकों ने अजित पवार का समर्थन किया है।

‘NCP का सिंबल-नाम सब हमारा, सारे विधायक मेरे साथ’: डिप्टी CM बनने के बाद बोले अजित पवार

महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर ही रविवार (2 जुलाई, 2023) को तब बदल गई, जब नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने कई विधायकों समेत सरकार में शामिल होने का फैसला लिया। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ-साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं। प्रफुल्ल पटेल तो NCP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। धनंजय मुंडे और दिलीप वालसे पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी नेता भी अब भतीजे अजित के साथ हैं।

महाराष्ट्र में शिवसेना के बाद अब NCP टूट गई है। पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अजित पवार अब महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन गए हैं। इतना ही नहीं, उनके साथ-साथ छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, दिलीप वालसे पाटिल और अनिल पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी भी मंत्री बनाए गए हैं। यहाँ तक कि प्रफुल्ल पटेल, जिन्हें शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था – वो भी उनका साथ छोड़ कर इस शपथग्रहण समारोह में मौजूद रहे।

माना NCP के टूटते ही विपक्ष गठबंधन को झटका जरूर लगा, लेकिन प्रश्न गर्मा है कि 'क्या अजित पवार, छगन भुजबल प्रफुल्ल पटेल आदि जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, क्या भ्रष्टाचार-मुक्त हो गए हैं या कानूनी कार्यवाही होगी? दूसरे, अजित आदि के सत्ता में आने से संभावनाएं व्यक्त की जा रही है कि सबूतों को प्रभावित कर पवित्र सिद्ध हो सकते हैं। 

दूसरी ओर यह अटकलें जोरों पर है कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कमजोर करने का भी षड्यंत्र हो सकता है, क्योकि चुनावों में NCP के साथ आने पर बीजेपी को शिव सेना के साथ-साथ इस पार्टी के लिए भी सीटें छोड़ने को मजबूर होना पड़ेगा। 

NCP के वरिष्ठ नेताओं छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजित पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 9 वर्षों से विकास के लिए कार्य कर रहे हैं, और विकास को महत्व देना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा में भागीदारी की इच्छा के कारण ही वो राजग का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने कहा कि 1984 के बाद कोई ऐसा नेता नहीं हुआ जिसके नेतृत्व में देश आगे गया। उन्होंने इसका भी जिक्र किया कि विदेश में पीएम मोदी का कैसे सम्मान हो रहा है।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि विपक्ष में उन्हें ऐसा कोई नेतृत्व नहीं दिखता है। उन्होंने विपक्षी एकता के प्रयासों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बिखरा हुआ है और ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। अजित पवार ने NCP के नाम और सिंबल पर भी दावा कर दिया है। उन्होंने कहा कि लगभग सभी विधायक उनके पास पहुँच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि नागालैंड के भी 7 NCP विधायक ने भाजपा के साथ जाने का निर्णय लिया था। छगन भुजबल ने भी साफ़ किया कि उनलोगों ने कोई नई पार्टी नहीं बनाई है, वो NCP ही हैं।

नए-नवेले मंत्री भुजबल ने कहा कि शरद पवार खुद कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में लौट रहे हैं और उन लोगों ने उनके इच्छानुरूप ही काम किया है। उधर शरद पवार ने बागियों पर कार्रवाई की बात करते हुए कहा कि वो फिर से पार्टी खड़ा कर के दिखाएँगे। उन्होंने जितेंद्र अव्हाड को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रमुख चेहरा अब भी वही हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई नई बार नहीं है। साथ ही ED के डर से लोगों के भाजपा के साथ जाने की बात भी कही।

जिसे ‘चाणक्य’ बता कर ढोल पीट रही थी मीडिया, उसका उद्धव ठाकरे से भी बुरा हाल

थोड़ा सा पीछे चलते हैं। मई 2023 की शुरुआत में शरद पवार ने जब राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस (NCP) का अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की तो मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया । जब जून में उन्होंने बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो इसमें भी मीडिया ने उनका ‘राजनीतिक कौशल’ देखा। कहा गया कि उन्होंने एनसीपी का भविष्य तय कर दिया है और भतीजे अजित पवार को भी उनकी राजनीतिक हैसियत समझा दी है। लेकिन, जुलाई की 2 तारीख आते-आते शरद पवार के मास्टर स्ट्रोक की बत्ती बन चुकी है।

राजनीतिक कौशल का पता नहीं, उनके खुद के राजनीतिक भविष्य पर संकट खडे हो गए हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा में करीब-करीब एनसीपी साफ हो गई है। 53 विधायकों वाली पार्टी के ज्यादातर विधायक और अधिकतर बड़े नेता अजित पवार के साथ जा चुके हैं। 82 वर्षीय शरद पवार अब उस अवस्था में भी नहीं रहे कि सक्रियता दिखा कर अपने खेमे को गोलबंद करें और अपनी बेटी के नेतृत्व में काम करने के लिए मनाएँ। कुल मिला कर सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही पतन शुरू हो गया था।

यानी, मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक जिन फैसलों को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता रहे थे, वही एनसीपी के पतन का कारण बनी। NCP में शरद पवार के बाद अजित ही पार्टी के प्रबंधन से लेकर नेताओं को एकजुट रखने का काम अब तक देखते रहे हैं। ये चौथी बार है, जब अजित पवार राज्य के डिप्टी CM बने हैं। शरद पवार की पार्टी का भी वही हाल हुआ है, जो शिवसेना का हुआ था। आइए, पूरे खेल को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं क्योंकि हमें 2019 विधानसभा चुनाव को समझना पड़ेगा।

2014-19 तक महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार चली। तनातनी की खबरें आती रहीं, लेकिन सरकार पर कोई संकट नहीं आया। 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत भाजपा ने 152 और शिवसेना ने 124 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 105 और शिवसेना ने 56 सीटें प्राप्त की। इसके बाद शिवसेना का ड्रामा शुरू हुआ। पार्टी ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को नकारते हुए अपनी पार्टी से CM बनाने की माँग रख दी।

पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर और राज्यसभा सांसद संजय राउत जैसे नेताओं ने उलूल-जलूल बयान देने शुरू कर दिए और कहने लगे कि अगला सीएम शिवसेना से होगा। भाजपा ने मनाने की लाख कोशिश की, लेकिन उद्धव ठाकरे टस से मस नहीं हुए। पार्टी ने अपने विधायकों को बांद्रा में समुद्र किनारे स्थित रंग शारदा होटल में रखा, फिर उन्हें दूर मड आइलैंड्स में रखा। बड़ी बात ये है कि उस समय इन सबमें बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रहे एकनाथ शिंदे और रामदास कदम जैसे नेता अब भाजपा गठबंधन के साथ हैं।

खैर, किसी तरह शरद पवार ने डील फाइनल की और कॉन्ग्रेस-शिवसेना को एक साथ लेकर आए और राज्य में NCP के साथ मिल कर इन दोनों दलों ने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ की गठबंधन सरकार बनाई। लेकिन, उससे पहले जो हुआ वो चौंकाने वाला था। राष्ट्रपति शासन लग चुका था। अचानक से अजित पवार ने तड़के सुबह भाजपा का साथ देते हुए डिप्टी CM की शपथ ले ली। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, लेखों ये सरकार मात्र 3 दिनों तक चल सकी। अजित पवार वापस चाचा के खेमे में चले गए।

सरकार गिर गई और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया गया। अजित पवार इस सरकार में भी उप-मुख्यमंत्री बने। लेकिन, इस दौरान मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने शरद पवार का जो महिमामंडन किया, वो देखने लायक था। जिस व्यक्ति ने आज तक कभी मुख्यमंत्री का 5 साल का पूरा कार्यकाल नहीं चलाया, जिसकी पार्टी को कभी राज्य में बहुमत मिला ही नहीं, उसकी तुलना अमित शाह से की जाने लगी। अमित शाह, जो उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

हालाँकि, उद्धव ठाकरे की सरकार ढाई साल चली और जून 2022 में एकनाथ शिंदे सहित कई बड़े नेताओं ने बगावत कर दिया। अंततः एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने और शिवसेना टूट गई। उद्धव ठाकरे की एक जिद ने 40 विधायकों और 13 सांसदों को उनसे दूर कर दिया। ढाई साल बाद ही सही, शिवसेना टूटी और उद्धव ठाकरे के साथ रह गए प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने। आज उद्धव ठाकरे के साथ जो संख्या है, 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद वो और घट जाएगी।

शिवसेना के टूटने के एक साल बाद अब एनसीपी टूटी है। ये सबक है उन्हें, जो शरद पवार को चाणक्य बताते नहीं थक रहे थे और अमित शाह का मजाक बना रहे थे। मराठी पत्रकार निखिल वागले ने भी शरद पवार को चाणक्य बताया। इसी तरह से तमाम पत्रकारों और भाजपा विरोधी गिरोह ने उन्हें ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया। शिवसेना का मुख्यमंत्री तो भाजपा भी चाहती तो बना सकती थी, शरद पवार ने किसी NCP नेता को तो सीएम बनाया नहीं, लेकिन उनकी तारीफों के पुल बाँधे जाने लगे।

बात यही है कि जिस तरह बालासाहब ठाकरे के पुत्रमोह ने शिवसेना को डूबा दिया, ठीक उसी तरह शरद पवार के पुत्रीमोह NCP को खा गया। सुप्रिया सुले अपने पिता के गढ़ बारामती से सांसद हैं, जहाँ से शरद पवार भी 6 बार जीत चुके हैं। 1991 में अजित पवार भी यहाँ से सांसद बन चुके हैं। अजित पवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और उन्होंने लगातार 7वीं बार बारामती से जीत दर्ज की है। उनके पास अलग-अलग सरकारों में कई मंत्रालयों को सँभालने का अनुभव है और संगठन का भी।

अनुभव हो या राजनीतिक दक्षता, किसी भी क्षेत्र में सुप्रिया सुले अपने बड़े भाई अजित पवार के सामने नहीं टिकतीं। इसके बावजूद शरद पवार ने अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बनाया, और मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता दिया। कहा तो ये जाना चाहिए था कि शरद पवार अपने ही परिवार को नहीं सँभाल पा रहे हैं। लेकिन, ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ जैसे मीडिया संस्थानों में अंग्रेजी में लंबा-चौड़ा ओपिनियन लिख कर उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया।

शरद पवार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा तो प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की थी, इसके लिए उन्हें हाथ-पाँव भी मारा। लेकिन, 90 के दशक में अपनी सक्रियता के दौरान भी वो इसमें विफल रहे। उन्हें राष्ट्रपति तक बनाए जाने की बातें चलीं, लेकिन वो भी नहीं हो पाया। अब स्थिति ये हो गई है कि मीडिया ने जिसे ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया, वो न अपना पार्टी बचा पाया और न परिवार। अगले चुनाव में उनका और उद्धव का पूरी तरह पत्ता साफ़ होता दिख रहा है।

वैसे अब आश्चर्य न हो कि कल को शरद पवार को ‘चाणक्य’ बता कर उनका महिमामंडन करने वाले अब ये कहने लगें कि ED/CBI जैसी केंद्रीय जाँच एजेंसियों के डर से ये सब हो रहा है। अब बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं, तो चुनाव बाद EVM का रोना की तरह इस तरह का नया क्रंदन भी शुरू हो सकता है। शरद पवार की पार्टी और परिवार, दोनों टूट चुके हैं। उनका समर्थन करने वाले अब नया रोना क्या निकालते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

अजीत पवार से जुड़ी 1000 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त : गोवा का रिसॉर्ट, दिल्ली का फ्लैट, सतारा का चीनी मिल

आयकर (IT) विभाग ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। उनसे जुड़ी 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है। उनसे जुड़ी ये संपत्तियाँ महाराष्ट्र, गोवा और दिल्ली में मौजूद हैं। मंगलवार (2 नवंबर, 2021) को ये जानकारी दी गई। अजीत पवार से जुड़ी जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें उनकी एक कोऑपरेटिव चीनी मिल भी शामिल है। पिछले महीने चलाए गए एक गहन तलाशी अभियान में अजीत पवार की 184 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का पता चला था।

इसके बाद ताज़ा कार्रवाई की गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बेनामी विंग ने ये कार्रवाई की है। अभी इस मामले में जाँच जारी है और संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी जाँच का ही हिस्सा है। सतारा में स्थित जरांदेश्वर चीनी मिल के अलावा मुंबई स्थित एक परिसर को भी IT विभाग ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। गोवा में उनका एक रिसॉर्ट भी है, जो अब आयकर विभाग न अटैच कर लिया है। महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर उनकी 27 जमीनें अब IT विभाग के नियंत्रण में हैं।

इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत 1000 करोड़ रुपए के आसपास है, लेकिन इनकी ‘बुक वैल्यू’ काफी कम है। बताया जा रहा है कि इनमें से कोई भी संपत्ति सीधे अजीत पवार के नाम पर पंजीकृत नहीं हैं, अर्थात उनके करीबियों की हैं। पिछले महीने अजीत पवार से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में छापेमारी के बाद IT विभाग को 184 करोड़ रुपए की छिपी हुई कमाई का पता चला था। बताया जा रहा है कि ये अजीत पवार के रिश्तेदारों के थे। डीबी रियल्टी और शिवालिक ग्रुप नाम की ये कंपनियाँ उनके बेटे और बहन के नाम पर रजिस्टर्ड हैं।

7 अक्टूबर, 2021 को शुरू हुआ ये तलाशी अभियान मुंबई, पुणे, बारामती, गोवा और जयपुर के 70 लोकेशनों पर चला था। जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, उनमें दक्षिणी मुंबई निर्मल टॉवर और दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित एक फ्लैट भी शामिल है। ये कार्रवाई ‘बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम (Prohibition of Benami Property Transactions Act), 1988’ के तहत की गई है। IT विभाग को अजीत पवार से जुड़ी कंपनियों द्वारा बड़ी मात्रा में अवैध लेनदेन और अनसिक्योर्ड लोन की जानकारी मिली है।

अजित ने मॉंगा 2.5 साल मुख्यमन्त्री पद

उद्धव ठाकरे, शरद पवार
महाराष्ट्र में आख़िरकार बनती दिख रही सरकार के आसार फिर खटाई में पड़ गए हैं। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि उद्धव ठाकरे पूरे 5 साल महाराष्ट्र पर राज नहीं कर पाएँगे, क्योंकि सहयोगी एनसीपी ने भी ढाई साल अपने लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी माँग ली है। गौरतलब है कि शिवसेना (56) और एनसीपी (54) की सीटों में केवल 2 विधायकों का अंतर है।
गौरतलब है कि कल तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पाला बदल कर उनके साथ पहुँचे शरद पवार के भतीजे अजित पवार के इस्तीफ़े के बाद शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने महा विकास अघाड़ी गठबंधन के अंतर्गत सरकार बनाने की घोषणा की थी। यह भी दावा किया था कि विधानसभा चुनाव तक न लड़ने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे इस गठबंधन के सीएम होंगे।
इस बीच यह भी खबर आई थी कि भाजपा को गच्चा देने के बाद अजित पवार अपनी पार्टी में लौट भी गए हैं और ससम्मान स्वीकार भी हो गए हैं। मौजूदा खबरों में भी उनके डिप्टी सीएम बनाए जाने की बात सामने आ रही है। बहुत सम्भव है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार 2.5 साल सीएम पद की माँग में भी उन्हीं का नाम आगे बढ़ा दें।
सत्ता पर अपनी जकड़ सबसे मजबूत करने का एनसीपी का व्यूह शुरू से था। जब 13 मंत्रियों और एक डिप्टी सीएम के बदले स्पीकर पद से कॉन्ग्रेस के दावा छोड़ने की बात सामने आई थी तो उसी समय यह साफ़ था कि शक्ति-संतुलन के नाम पर एनसीपी यह पद शिवसेना से छीन कर अपने पास रखेगी। इसके अलावा एक डिप्टी सीएम उसका होना ही था। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी भी उसने आधे समय के लिए छीन ही ली, तो उद्धव ठाकरे के लिए शिवसैनिकों को यह जवाब देना मुश्किल हो जाएगा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से ‘वादाखिलाफी’ करने वालों के साथ किसी तरह का समझौता न करने के नाम पर बाहर होने वाली पार्टी को यूपीए में इतने समझौते करने के बाद हासिल क्या हुआ। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कल अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि भाजपा 2.5 साल सीएम के अलावा शिव सेना की हर शर्त पर 30 साल पुराने गठबंधन को बचाने के लिए राज़ी थी।
स्तम्भकार आनंद रंगनाथन ने इस खबर पर चुटकी लेते हुए इस प्रकरण के पहले शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बैठक की याद दिलाई।
स्पीकर पद से दावा छोड़ा
कांग्रेस को स्पीकर पद नहीं उद्धव कैबिनेट में चाहिए अपने 13 मंत्री
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव ठाकरे के शपथ लेने से पहले कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा के स्पीकर पद पर दावेदारी से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस उद्धव कैबिनेट में 13 पद के लिए स्पीकर पद पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार हो गई है।
शुरुआत में कांग्रेस स्पीकर पद के लिए अड़ी थी। न्यूज़18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा। इनमें विजय नामदेवराव,यशोम्मती ठाकुर, नाना पटोले, वर्षा गायकवाड़, अमीन पटेल, अशोक चव्हाण, अमित देशमुख, विश्वजीत कदम, बंटी पाटिल और केसी पडवी आदि नेताओं के नाम शामिल हैं। वहीं चार अन्य कांग्रेस नेता राज्य मंत्री बनाए जाएँगे।
शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार में स्पीकर पद एनसीपी के पास रहेगी। एनसीपी को कैबिनेट में भी उचित हिस्सेदारी मिलेगी। महाराष्ट्र में 43 से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं। 2003 में हुए 91वें संवैधानिक संशोधन के अनुसार राज्य कैबिनेट में विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकते।
महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक नया मोड़ उस वक़्त आया जब अजित पवार के समर्थन से सरकार बनाने वाले देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। बता दें कि 288 विधानसभा सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के पास 105 सीटें है।
फडणवीस के इस्तीफे के बाद उद्धव ठाकरे शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के नेता चुने गए। तीनों दलों के इस गठबंधन को महाविकास अघाड़ी नाम दिया गया है। उद्धव गुरुवार(नवम्बर 28) को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। उनके साथ छह अन्य लोगों के भी शपथ लेने की संभावना है।

3 दिन में सरकार गिरने की अंदरुनी कहानी!

धनंजय मुंडे, अजित पवार, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में एक और नया अध्याय जुड़ गया। जिस अजित पवार के भरोसे पर भाजपा राज्य में अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही थी, उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इससे पहले 24 नवम्बर की सुबह देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसी शपथ ग्रहण में अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की भी शपथ ली थी। दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के बीच भी लम्बे समय से खिचड़ी पाक रही थी।
हालाँकि जब अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो शरद पवार ने खुद को उनके इस फैसले से दूर रखा था। उनको पार्टी से तो नहीं हटाया गया था लेकिन पद से जरूर हटा दिया था। इस राजनीतिक समीकरण के बाद से तीनों पार्टियाँ (शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस) अपने-अपने विधायकों को इकठ्ठा करने में लग गई थीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के इस सियासी संकट में सबसे हैरान कर देने वाली घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सदन में 27 नवम्बर को होने वाले फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले अजित पवार ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 27 नवम्बर को फ्लोर टेस्ट का आदेश आने के बाद अजित पवार ने उनसे खुद संपर्क किया और कहा कि वह इस गठबंधन को आगे अपना समर्थन नहीं दे पाएँगे। इसके बाद ही देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने का निर्णय कर लिया। आने वाले समय में सरकार बनाने वालों को उन्होंने अपनी शुभकामनाएँ दीं। हालाँकि इस दौरान उन्होंने सोनिया गाँधी के नेतृत्व में शपथ ले लेने की ओर इशारा करते हुए शिवसेना पर निशाना भी साधा।

टाइम्स नाउ की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डिप्टी सीएम पद से अजीत पवार के इस्तीफे के पीछे तीन कारण हो सकते हैं। दरअसल अजित को उम्मीद थी कि भाजपा संग उनके गठबंधन को समर्थन देने के लिए कम से कम 30 विधायक ज़रूर साथ होंगे हालाँकि अंत तक उन्हें सिर्फ 12 विधायकों का ही समर्थन मिल सका। इस सियासी घटनाक्रम में धनंजय मुंडे द्वारा यू-टर्न ले लेने से पवार के फैसले पर काफी असर पड़ा। 24 नवम्बर को ही धनंजय मुंडे ने ट्वीट कर यह साफ कर दिया था कि शरद पवार का समर्थन करेंगे।
महाराष्ट्र की सियासत के इन बदलावों के बाद संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन के साथ हैं। उन्होंने कहा कि सदन में बहुमत साबित करने के बाद उद्धव ठाकरे पूरे पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।
राजनीति संभव एवं असंभावनाओं का खेल है, जो गिरगिट की तरह कब कब रंग बदल ले, कहना कठिन है। देखा जाए तो सियासत के आगे गिरगिट भी अपना रंग बदलने में शरमा जाए। उद्धव ठाकरे ने अपने पिताश्री बालासाहब से कुछ नहीं सीखा, दूसरे इतिहास से कुछ नहीं सीखा, उनके मुख्यमंत्री के लालच ने उनकी सुध-बुध ही शायद खो दी है। एनसीपी और कांग्रेस ऐसे कच्चे खिलाडी नहीं हैं, जो अपने घोर विरोधी को अपना समर्थन दे दे। शिवसेना के मुख्यमंत्री(नाम से सभी परिचित हैं) से अपने घोटाले की समस्त फाइलें दुरुस्त करवाकर, संभव है अपना समर्थन वापस ले लें। ये सब ड्रामा केवल अपनी फाइलें ठीक करवाने के लिए खेला गया प्रतीत होता है। दूसरे, शिवसेना और भाजपा के कार्यकाल में हुए घोटालों को उजागर भी करवाया जा सकता है। जैसाकि पीछे उद्धव भाजपा के विरोध में कहते रहे हैं।  
अवलोकन करें:-
जिस एनसीपी के अजित पवार के घोटालों के विरुद्ध भाजपा और शिवसेना ने चुनाव लड़ा था, आज ये दोनों पार्टियां सत्ता हथियाने उसी भ्रष्ट एनसीपी के तलवे चाट रही हैं, क्या है ये सब तमाशा? चर्चा यह हो रही है कि "यदि किसी कारण से समस्त गाँधी परिवार भाजपा में शामिल हो जाएं, उनके घोटाले एक स्वप्न मात्र रह जाएंगे।"

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार महाराष्ट्र में शिवसेना ने अपने घमंड को दर्शाते हुए सत्ता पाने की लालसा में सबसे बड़ी प....



बिना बहुमत के 41 सालों में 4 बार CM रहे शरद पवार

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एनसीपी के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार काफ़ी समय से राजनीति में हैं। वो 1958 में ही यूथ कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। अगर चुनावी इतिहास की बात करें तो शरद राव पवार 1967 में पहली बार बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। यही वो क्षेत्र है, जहाँ से फ़िलहाल उनके भतीजे अजित पवार विधायक हैं। बारामती लोकसभा क्षेत्र से शरद पवार सांसद भी रह चुके हैं। उनकी बेटी सुप्रिया सुले इसी संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। लेकिन, अगर हम आपको बताएँ कि पिछले 42 वर्षों से चुनावी राजनीति में सक्रिय पवार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मंत्री रहे लेकिन महाराष्ट्र ने कभी उन्हें बहुमत नहीं दिया, तो आप चौंक जाएँगे?
1978 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने से लेकर अभी तक, शरद पवार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए महाराष्ट्र ने कभी भी बहुमत नहीं दिया। लेकिन, जोड़-तोड़ के महारथी पवार 4 बार मुंबई की गद्दी पर आसीन हुए। वो पहली बार 1978 में मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने वसंसदादा पाटिल की सरकार गिराई थी और जनता पार्टी से मिल कर सरकार का गठन किया। इसके बाद वो 1988 में फिर से मुख्यमंत्री बने, जब महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री यशवंत राव चव्हाण को राजीव गाँधी ने अपनी कैबिनेट में शामिल किया और शरद पवार को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला लिया।
एक ऐसा भी समय आया था, जब शरद पवार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे। 1991 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रणब मुखर्जी और शरद पवार के नाम की चर्चा चल रही थी। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद पीएम पद के कई दावेदार थे। ऐसे में, नरसिम्हा राव ये बाजी मार ले गए। वो न सिर्फ़ प्रधानमंत्री बने बल्कि उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद भी अपने कब्जे में रखा। पूरे 5 सालों तक उन्होंने सरकार चलाई और शरद पवार के अरमान धरे के धरे रह गए। मार्च 1990 के चुनावों में भी कॉन्ग्रेस बहुमत से दूर रह गई। वही वो चुनाव था, जब शिवसेना और भाजपा बड़ी ताक़त बन कर उभरी।
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बेटी सुप्रिया सुले को अपना उत्तराधिकारी
बनाने की कवायत 
निर्दलीयों के समर्थन से शरद पवार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे। इसके बाद 1993 में बॉम्बे में दंगे हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री सुधाकर राव नाइक ने इन दंगों को हैंडल करने में हुई नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद शरद पवार फिर से मुख्यमंत्री बना कर महाराष्ट्र भेजे गए। उससे पहले वो नरसिम्हा राव कैबिनेट में रक्षा मंत्री थे। इस तरह से चार बार पवार मुख्यमंत्री बने लेकिन जनता ने कभी उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए बहुमत नहीं दिया। पहली बार 1978 में उन्होंने पार्टी तोड़ी। 1988 में राजीव गाँधी ने कृपा बरसाई। 1990 में जोड़-तोड़ कर सरकार बनाई। 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद सीएम बने।
शरद पवार ने जिस तरह से वसंतदादा की सरकार गिराई थी, ठीक उसी तरह आज उनके भतीजे अजित पवार ने बगावत कर दिया है। तब शरद पवार मुख्यमंत्री बने थे, आज अजित उप-मुख्यमंत्री बने हैं। खेल वही है, बस मोहरे और किरदार बदल गए हैं। शरद पवार ने सोनिया गाँधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठा कर 1999 के विधानसभा चुनाव लड़ा। चुनाव के बाद किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो शरद पवार ने फिर उसी सोनिया गाँधी को समर्थन दे दिया, जिसे तोड़ कर उन्होंने चुनाव लड़ा था।
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1999 के चुनाव में भाजपा-शिवसेना की कलह का भी उन्हें फायदा मिला। बाल ठाकरे ने 5 साल रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाई थी। उस दौरान शिवसेना के नारायण राणे और मनोहर जोशी सीएम थे। चुनाव के बाद भाजपा गोपीनाथ मुंडे को सीएम बनाने में जुटी थी लेकिन शिवसेना अड़ी रही। इसके बाद पवार ने कॉन्ग्रेस को समर्थन दे दिया और विलासराव देशमुख सीएम बने। शरद पवार 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके थे। मार्च 1995 के बाद से अब तक, यानी पिछले ढाई दशक से वह मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं देख पाए।
उनकी एनसीपी कॉन्ग्रेस की जूनियर पार्टी बन कर रह गई। उन्होंने 2004, 2009, 2014 और 2019- ये चारों विधानसभा चुनाव कॉन्ग्रेस के पार्टनर के रूप में लड़ा। विलासराव देशमुख, सुशिल कुमार शिंदे, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण की सरकारों को उनका समर्थन रहा। मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर शरद राव केंद्र में कृषि मंत्री बने रहे। वो 2004 से 2014 तक केंद्रीय कृषि मंत्री बने रहे। शरद पवार अपनी ही सेट की गई लिगेसी का सामना कर रहे हैं। वे 4 बार मुख्यमंत्री रहे, और चारों बार जनता से सीधा अपने नाम पर बहुमत पाकर सीएम नहीं बने। या तो अल्पमत में रहे, जोड़-तोड़ की या फिर अचानक से किसी सीएम के जाने के बाद कुर्सी पर बिठाए गए।
आज जोड़-तोड़ की ये राजनीति उनका ही पीछा कर रही है। सीनियर पवार अपने भतीजे के बयानों को ग़लत और भ्रामक बताते हुए दावा कर रहे हैं कि एनसीपी का गठबंधन अभी भी शिवसेना और कॉन्ग्रेस के साथ है। उद्धव ठाकरे एनसीपी विधायकों की बैठक में आकर उन्हें सम्बोधित करते हुए ढाँढस बँधा रहे हैं। उधर अजित पवार कह रहे हैं कि उन्होंने एनसीपी नहीं छोड़ी है और उनकी पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन हो चुका है। असमंजस की स्थिति बन चुकी है। ज़िंदगी भर जोड़-तोड़ में लगे रहे पवार अब ख़ुद इस समस्या से जूझ रहे हैं।
मीडिया में तरह-तरह की बातें चल रही हैं। कहा जा रहा है कि अजित पवार ने सितम्बर महीने में राजनीति से सन्यास की घोषणा कर दी थी, तभी से परिवार में कलह की शुरुआत हो गई थी। तब शरद पवार ने कहा था कि अजित के बेटे पार्थ पवार से उनकी बात हुई है। पार्थ ने सीनियर पवार को बताया कि अजित अपने चाचा यानी शरद पवार का नाम घोटाले में आने से दुःखी हैं। वैसे ये पहली बार नहीं था, तब अजित ने चाचा से बिना पूछे निर्णय लिया। इससे पहले 2012 में जब 70,000 करोड़ के सिंचाई घोटाले में उनका नाम आया था, तब भी उन्होंने डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय भी अजित ने शरद पवार से पूछा तक नहीं।

मीडिया में ये भी बातें चल रही हैं कि शरद पवार के एक अन्य भाई के पोते रोहित पवार को आगे किए जाने से अजित दुःखी थे। उनके बेटे पार्थ लोकसभा चुनाव हार गए और रोहित की विधानसभा चुनाव में जीत हुई। रोहित पवार और आदित्य ठाकरे मित्र हैं। सुप्रिया सुले ने रोहित और आदित्य के साथ फोटो डाल कर एनसीपी और शिवसेना की एकता दर्शाई है। राजनीतिक विश्लेषक सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अजित रोहित को आगे किए जाने और अपने बेटे पार्थ की हार से दुःखी थे? क्योंकि, उप-मुख्यमंत्री का पद तो उन्हें शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की सरकार में भी मिल रहा था।
देखना दिलचस्प होगा कि फ्लोर टेस्ट के दिन एनसीपी का क्या रुख रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है। इसमें वह कहते दिख रहे हैं कि कार्यकर्ता ये जानते हैं कि भाजपा कभी-कभी दुश्मन का किला ढाहने के लिए विभीषण की सहायता लेती है। तो क्या अजित पवार एनसीपी के विभीषण हैं? तो फिर रावण कौन है? कुछ दिनों पहले अमित शाह ने भी एएनआई को दिए गए इंटरव्यू में कहा था कि वो चुप बैठे हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि वो कुछ कर नहीं रहे। मोदी और शाह के इस बयानों के अलग-अलग मतलब निकाले जा रहे हैं। आप भी देखते रहिए- महाराष्ट्र का सियासी तमाशा।

बहुमत साबित करने से पहले ही देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार का इस्तीफा

बहुमत साबित करने से पहले ही CM फडणवीस का इस्तीफा, बोले- हमारे पास नंबर नहीं
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
महाराष्ट्र और हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत नहीं मिलने से शीर्ष नेतृत्व को आंखें खोलनी चाहिए। कुछ समय पूर्व अपने लेख शीर्षक "भाजपा ही भाजपा को हराएगी", लेकिन पार्टी के चमचों और अंधभक्तों ने भाजपा विरोधी करार दिया। जबकि इस लेख में स्पष्ट शब्दों में स्थानीय स्तर पर हो रही लापरवाहियों कमर्ठ कार्यकर्ताओं को अनदेखा करना, चुनावी चन्दों में धांधली करना, विपक्ष से मिल आधा-अधूरा दिखावे का प्रचार करना आदि। इन दोनों राज्यों के चुनावों को देखते हुए, शीर्ष नेतृत्व को स्थानीय स्तर को मजबूत करना होगा। केवल मिसकॉल से सदस्य बनाने से पार्टी का जनाधार नहीं बढ़ने वाला। वह केवल एक भ्रम और दिखावा है, जिस तरह भाजपा का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ। 
दिल्ली भी दूर दिख रही है 
जनता लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नाम पर बहुमत दे सकती है, लेकिन स्थानीय सदन में नहीं। इन चुनावों में किसी मोदी-योगी-अमित का जादू नहीं चलने वाला। हालांकि उपरोक्त लेख दिल्ली गतिविधियों पर आधारित था, लेकिन भगोने में पकने वाले चावल में से एक ही दाना देखा जाता है कि चावल पका है या नहीं। जनसमस्यों को अनदेखा करना, केवल चुनाव में कार्यकर्ताओं को जमाकर उनकी बेइजजती करने से स्थानीय चुनाव नहीं जीते जाते। हरियाणा और महाराष्ट्र को देख अभी दिल्ली भी दूर दिखाई देती है। क्योकि जो भूतपूर्व उम्मीदवार खुलेरूप से पार्टी के विरोध में काम कर रहा हो, क्या हश्र होगा पार्टी का? शीर्ष नेतृत्व स्वयं विचार करे कि ऐसे भेदियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की? क्या ऐसे लोग पार्टी में रहने योग्य हैं? 
 [4:32 PM, 6/17/2019] Bhandari Ashok: The below Msg.is from Sonia BJP ex MCD Candidate from Sita Ram Bazar Ward through phone No. 8860648747 [4:32 PM, 6/17/2019] Bhandari Ashok: आप सभी से प्रार्थना है जो भी साथी दिल्ली से हो या दिल्ली में उनके मित्र, साथी, संबंधित रिश्तेदारों को बोले "झाड़ू" को वोट दें। ये आपके बच्चों के भविष्य के लिए बहुत ही अच्छा विकल्प है। इस बार प्रधानमंत्री बनाने के चक्कर मे न पड़े । प्रधानमंत्री तो आपने 2014 में भी बनाया था क्या मिला ? न अच्छी शिक्षा, न अच्छा स्वास्थ्य न अच्छा आचार विचार दिल्ली में कांग्रेस जीत नही रही है। तो कांग्रेस को वोट दे कर अपना वोट खराब न करे। 2014 में दिल्ली की 7 सीट्स पर कांग्रेस 3 स्थान पर रही थी। और आम आदमी पार्टी मात्र कुछ वोटों से हार गई थी बीजेपी को 2019 में हराना बहुत जरूरी है। वरना हर जगह हिन्दू मुस्लिम होता रहेगा धर्म के नाम पर राजनीति चलती रहेगी । देश को आगे बढ़ाने में अरविंद केजरीवाल जी की मदद करे। नोट: झाड़ू को ही वोट दे।[4:32 PM, 6/17/2019] Bhandari Ashok: की मदद करे। नोट: झाड़ू को ही वोट दे। [4:36 PM, 6/17/2019] Bhandari Ashok: Party virodhi hai to party ke program me nahi shamil ho  
महाराष्ट्र में पल-पल बदल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ख़ुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के मीडिया को सम्बोधित किया। 2-4 मिनट के संबोधन के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।अटकलें लगाई जा रही हैं कि बहुमत परीक्षण से पहले अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि सुप्रिया सुले के पति सदानंद सुले से मुलाकात के बाद अजित पवार का मन बदल गया। सुले के पति शरद पवार का संदेश लेकर अजित से मिलने पहुंचे थे 
फडणवीस ने कहा कि जनता ने गठबंधन को बहुमत दिया लेकिन शिवसेना ऐसी बात पर अड़ी रही, जिसकी कोई बात ही नहीं हुई थी। शिवसेना को लगा कि उसके पास संख्या बल इतना है, जिससे वो मोलभाव कर सके। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव के पहले और बाद में हर इंटरव्यू में बताया कि भाजपा का सीएम होगा। फडणवीस ने कहा कि भाजपा का ये मत था कि जो तय नहीं हुआ, वो नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने भाजपा के बजाय एनसीपी से बात शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मातोश्री से न निकलने वाले लोग वहाँ से बाहर जाकर होटलों में बातचीत कर रहे थे।
सुप्रिया सुले के पति ने बदला अजित का मन, शरद पवार का खास संदेश लेकर गए थे मिलने- सूत्रउन्होंने कहा कि संख्या बल न होने के कारण राज्यपाल के बुलावे के बावजूद भाजपा ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया क्योंकि संख्याबल नहीं था। इसके बाद शिवसेना को आमंत्रित किया गया लेकिन उन्होंने ज्यादा समय माँगा। एनसीपी ने भी कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने कहा कि तीन ऐसी पार्टियाँ साथ आ गई हैं, जिनकी विचारधारा में कोई मेल नहीं है। उनका ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ एक ही था- भाजपा को सत्ता से बाहर रखना। उनके पास इसके अलावा कोई प्रोग्राम नहीं था। देवेंद्र फडणवीस ने कहा-
“एनसीपी के कुछ नेता हमारे साथ चर्चा में आएँ और उन्होंने हमे समर्थन पत्र दिया, जिसके आधार पर हमने सरकार बनाई। अब हमारे पास बहुमत नहीं है। अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया है। हम भी कोई हॉर्स ट्रेडिंग नहीं करेंगे और मैं भी इस्तीफा दूँगा। “
इससे पहले उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की इस्तीफे की ख़बर आई। एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि उन्हें मीडिया के के माध्यम से ये बातें पता चली हैं और वो पूरी जानकारी लेने के बाद ही इसपर टिप्पणी करेंगे। हालाँकि, अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने अपने पिता के इस्तीफे की ख़बरों को नकार दिया।
संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चैंबर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की। भाजपा नेता राम माधव ने ग्रैंड हयात होटल में एनसीपी, शिवसेना और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा कि बहुमत होटलों में या अन्य जगहों पर नहीं बल्कि सदन के फ्लोर पर साबित किया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत साबित कर देगी और इसे लेकर वो आश्वस्त हैं। उधर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि अजित पवार अपने गुट के विधायक लेकर आएँगे और भाजपा आसानी से बहुमत साबित कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि देवेंद्र फडणवीस बुधवार (नवंबर 27, 2019) को सदन में बहुमत साबित करें। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का भी आदेश दिया गया है। शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उनकी पार्टी 30 मिनट के भीतर बहुमत साबित कर के दिखा देगी। 

महाराष्ट्र : सिंचाई घोटाले से जुड़े 9 केस बंद करने के खिलाफ Congress-NCP और शिवसेना पहुंची सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले से जुड़े 9 केस बंद करने के खिलाफ Congress-NCP और शिवसेना पहुंची सुप्रीम कोर्टमहाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले से जुड़े 9 केस बंद करने के खिलाफ Congress-NCP और शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इसके साथ ही फडणवीस सरकार के किसी भी पॉलिसी निर्णय के लेने पर रोक की मांग की है. हालांकि महाराष्‍ट्र के भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो (एसीबी) के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने कहा है कि बंद किए गए 9 मामलों में से कोई भी मामला अजित पवार से नहीं जुड़ा है. जिन्‍होंने शनिवार की सुबह बड़े ही नाटकीय घटनाक्रम में मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उप मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी. ब्‍यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक रुटीन प्रक्रिया है. आपको बता दें कि  महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक हंगामे के बीच एक ख़बर आई थी कि एसीबी ने सिंचाई घोटाले (Irrigation scam) से जुड़े नौ केस बंद कर दिए हैं. सिंचाई घोटाले में अजित पवार भी आरोपी हैं जो फिलहाल फडणवीस की सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिए गए हैं. 
इस पर विवाद बढ़ता देख बाद में ACB के वरिष्‍ठ अधिकारी परमबीर सिंह ने ANI से कहा, 'सिंचाई से जुड़ी शिकायतों के मामले में करीब 3000 टेंडरों की जांच हम कर रहे हैं. ये नियमित जांच है जो बंद हुई है और बाकी मामलों में जांच पहले की तरह ही जारी है.' उन्‍होंने कहा कि आज जिन मामलों को बंद किया गया है उनमें से कोई भी अजित पवार से जुड़े नहीं हैं. एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो के नोटिफिकेशन के अनुसार जिन 9 मामलों को बंद किया गया है वो विदर्भ क्षेत्र के वाशिम, यवतमाल, अमरावति और बुलढाणा की सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े हैं.
देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी सिंचाई घोटाले को लेकर हमेशा अजित पवार पर निशाना साधते रहे हैं. 2014 में मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जो पहली कार्रवाई उन्‍होंने की थी वो थी सिंचाई घोटाले में अजित पवार की कथित भूमिका की जांच के आदेश देना. आरोपों में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के वक्‍त जब अजित पवार उप मुख्‍यमंत्री थे तब करीब 70000 करोड़ रुपये के हेराफेरी के भी आरोप हैं. सिंचाई घोटाले में महाराष्‍ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार के दौरान कई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने और उनके क्रियान्‍वयन में अनियमितताएं शामिल हैं. पिछले महीने महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, शरद पवार और अजित पवार दोनों पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन का आरोप लगाया था जो एक कोऑपरेटिव बैंक से जुड़ा था.

अजित पवार के दावे पर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने बीजेपी पर साधा निशाना

अजित पवार के दावे पर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने बीजेपी पर साधा निशाना, कहा- अगर आप भरोसा नहीं...
कांग्रेस के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने नवम्बर 24 की रात को आरोप लगाया कि बीजेपी, एनसीपी नेता और नवनियुक्त उप-मुख्यमंत्री अजित पवार का इस्तेमाल लोगों को 'भ्रमित' करने के लिए कर रही है। चव्हाण की यह प्रतिक्रिया अजित पवार की ओर से किए गए ट्वीट के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा कि वह अब भी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में हैं और शरद पवार उनके नेता हैं। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ‘‘अंग्रेजी में कहावत है अगर आप भरोसा नहीं दिला सकते तो उन्हें भ्रमित कर दीजिए। भाजपा ने किसी और के कंधे पर बंदूक रखकर ठीक वहीं काम कर रही है।'' 
उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें विधायक पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने के बाद होटल में चहलकदमी करते हुए दिख रहे हैं। चव्हाण ने कहा, ‘‘सभी विधायक एकजुट और मजबूत हैं।''


उल्लेखनीय है कि अजित पवार ने कई ट्वीट कर भाजपा नेताओं के बधाई संदेश पर धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि भाजपा-एनसीपी गठबंधन पूरे पांच साल महाराष्ट्र में स्थिर सरकार देगा। हालांकि, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अजित पवार के दावे के खारिज करते हुए साफ कर दिया कि महाराष्ट्र में भाजपा से गठबंधन का सवाल नहीं है। 

उपमुख्यमंत्री बनने के 48 घण्टे बाद ही अजित पवार शुरू हो गए भ्रष्ट्राचार से मुक्त

डिप्‍टी CM बनने के 48 घंटे के बाद अजित पवार को सिंचाई घोटाले से जुड़े 9 मामलों में क्‍लीनचिट
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ डिप्‍टी सीएम पद की शपथ लेने के तकरीबन 48 घंटे बाद ही भ्रष्‍टाचार रोधी ब्‍यूरो (ACB) ने एनसीपी नेता अजित पवार को बड़ी राहत दी है. एसीबी ने 70,000 करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्‍लीनचिट दी है. राज्य सरकार के सूत्रों की मानें तो जिन मामलों में अजित पवार को क्लीन चिट दी गई हैं इन मामलों से उनका संबंध नहीं है. सूत्रों की मानें तो बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद उन्हें क्लीन चिट दी गई है.
चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते थे "न खाऊंगा, न खाने दूंगा", लेकिन यह कहना भूल गए थे, "भाजपा में आने पर किसी घोटालेबाज़ पर कोई कार्यवाही नहीं होगी", हरियाणा में चौटाला से गठबंधन करते ही घोटाले के आरोप में बंद उपमुख्यमंत्री के पिताश्री जेल से बाहर आ गए, यानि भ्रष्टाचार के मुद्दे केवल जनता को पागल बनाने के लिए उजागर किए जाते हैं। 
वहीं एसीबी के डीजी ने कहा है कि सिंचाई घोटाले के 9 केसों में अजित पवार की कोई भूमिका नहीं थी, इन केस को बंद करने के लिए तीन महीने पहले ही अनुशंसा कर दी थी. एसीबी के डीजी ने कहा है कि सिंचाई घोटाले से जुड़े मामले में लगभग 3000 अनियमितताओं की जांच की जा रही है जिनमें से 9 मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
शनिवार(नवम्बर 23) को ली थी शपथ
महाराष्ट्र में हुए आश्चर्यजनक उलटफेर में शनिवार को भाजपा के देवेंद्र फडणवीस की मुख्यमंत्री के रूप में वापसी हुई जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने पर सहमति बनने की घोषणा की थी.
शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ‘‘मनमानी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई/फैसले’’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की.
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी द्वारा आनन-फानन में राजभवन में सुबह आठ बजे आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में नाटकीय तरीके से फडणवीस और पवार को शपथ दिलाए जाने के बाद राकांपा में दरार दिखाई देने लगी. पार्टी अध्यक्ष शरद पवार ने भतीजे अजित पवार के कदम से दूरी बनाते हुए कहा कि फडणवीस का समर्थन करना उनका निजी फैसला है न कि पार्टी का.
बाद में एनसीपी ने अजित पवार को पार्टी विधायल दल के नेता पद से हटाते हुए कहा कि उनका कदम पार्टी की नीतियों के अनुरूप नहीं है.
2018 में ठहराए गए थे जिम्मेदारइससे पहले महाराष्ट्र में हुए करीब 70 हजार करोड़ के कथित सिंचाई घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने नवंंबर 2018 में पूर्व उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार को जिम्मेदार ठहराया था. महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया था कि करोड़ों रुपये के कथित सिंचाई घोटाला मामले में उसकी जांच में राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार तथा अन्य सरकारी अधिकारियों की ओर से भारी चूक की बात सामने आई है. यह घोटाला करीब 70,000 करोड़ रुपए का है, जो कांग्रेस- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शासन के दौरान अनेक सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने और उन्हें शुरू करने में कथित भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है.
अजित पवार के पास महाराष्ट्र में 1999 से 2014 के दौरान कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार में सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी थी. एसीबी के महानिदेशक संजय बारवे ने एक स्वयंसेवी संस्था जनमंच की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के समक्ष एक हलफनामा दाखिल किया था.
एनजीओ ने जताई थी चिंता
एनजीओ ने याचिका में विदर्भ और कोंकण सिंचाई विभाग द्वारा शुरू की गई सिंचाई परियोजनाओं में कथित अनियमितता पर चिंता जताई थी. जवाबी हलफनामे में जल संसाधन विभाग के अंदर घोटाले को ‘साजिश का एक विचित्र मामला' बताया गया जिसने सरकार से ही धोखाधड़ी की.
इसमें कहा गया था कि पवार के जल संसाधन विकास मंत्री रहने के दौरान विदर्भ और कोंकण सिंचाई विकास निगम की कई परियोजनाओं में देरी हुई. इससे लागत में वृद्धि हुई और सिंचाई के अनुमानित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया जा सका. हलफनामे में कहा गया था कि पूछताछ के दौरान शरद पवार ने दावा किया था कि उन्होंने सारे निर्णय सचिव स्तरीय अधिकारियों के सुझाव पर लिए थे और इसमें से भी अधिकतर निर्णय जमीनी स्तर पर लिए गए थे. एसीबी ने तब, अनियमितता की जांच आगे बढ़ाने और कानून के मुताबिक आपराधिक कार्रवाई करने के लिए और वक्त मांगा था.

पहले अजित पवार को जेल भेजने की बात थी अब डिप्टी CM बना दिया-- कांग्रेस

'पहले अजित पवार को जेल भेजने की बात थी अब डिप्टी CM बना दिया, मोदी है तो मुमकिन है', कांग्रेस ने पूछे 10 सवालमहाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम पर कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से 10 सवाल पूछे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 23 नवंबर का दिन एक काले अध्याय के रूप में दर्ज़ होगा अवसरवादी अजीत पवार को जेल की सलाखों का डर दिखा कर प्रजातंत्र की हत्या कर दी गई है यह महाराष्ट्र के लोगों से धोखा है सुरजेवाला ने कहा कि पहले तो बोलते थे कि अजीत पवार को आर्थर रोड जेल भेजेंगे अब उन्हीं को उप मुख्यमंत्री बना दिया गया है क्योंकि मोदी हैं तो मुमकिन हैकांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने अमित शाह के हिटमैन के रूप में काम किया है बाबा साहेब के प्रदेश में संविधान को रौंदने वाले मोदी जी और अमित शाह हैं 
जहाँ तक प्रजातंत्र/लोकतंत्र की हत्या की बात है, कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिए कि इसकी हत्या तो नेहरू कांग्रेस ने भारत के प्रथम चुनाव में ही कर दिया था। जब रामपुर, उत्तर प्रदेश से हिन्दू महासभा के विशन सेठ ने कांग्रेस उम्मीदवार मौलाना अबुल कलम आज़ाद को 6000 से अधिक वोटों से हराने के बावजूद जवाहर लाल नेहरू के कहने पर विशन को विजयी जुलुस से उठवाकर उन्हीं के सामने उनकी वोटों को आज़ाद की वोटों में मिलाकर लगभग 3000 वोटों से विजयी घोषित कर दिया था। 
कांग्रेस के 10 सवाल 
सरकार बनाने का दावा कब और किसने पेश किया था. सरकार बनाने के दावे पर बीजेपी-NCP के कितने विधायकों के हस्ताक्षर हैं 
उन हस्ताक्षरों को कब किसने सत्यापित (वेरिफाई) किया है 
राज्यपाल महोदय ने रात में कितने बजे राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा की है 
केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा की है तो कितने बजे की गई  
कैबिनेट की बैठक रात में कितने बजे हुई और इस बैठक में कौन-कौन मंत्री शामिल था 
कैबिनेट की अनुशंसा रात में राष्ट्रपति महोदय के पास कितने बजे भेजी गई 
अनुशंसा को रात में कितने बजे राष्ट्रपति ने स्वीकार किया 
राज्यपाल महोदय ने कब और कितने बजे शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित किया 
सिर्फ़ एक ऐजेंसी ANI वालों के अलावा बाक़ी पत्रकारों को महाराष्ट्र के चीफ़ जस्टिस को क्यों नहीं बुलाया?
शपथ दिलाने के बाद राज्यपाल ने यह क्यों नहीं बताया कि बहुमत कब और कितनों में साबित करना है 
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महाराष्ट्र में राजनीतिक अटकलों ने एकाएक करवट बदली, सूबे में भाजपा-एनसीपी (फिलहाल अजित पवार) ने नई सरकार गठित की। दे....

अजित पवार साथ ने देते तो आर्थर रोड जेल में होते: संजय राउत

संजय राउत, शिवसेनामहाराष्ट्र में राजनीतिक अटकलों ने एकाएक करवट बदली, सूबे में भाजपा-एनसीपी (फिलहाल अजित पवार) ने नई सरकार गठित की। देवेंद्र फडणवीस जहाँ मुख्यमंत्री बने, वहीं अजित पवार ने डेप्युटी सीएम के नाम का शपथ ग्रहण लिया। लेकिन, NCP पार्टी प्रमुख शरद पवार ने इस निर्णय पर नाख़ुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाजपा को समर्थन देने का अजीत पवार का निर्णय उनका व्यक्तिगत निर्णय है न कि राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का। शरद पवार ने कहा, “हम उसके इस फ़ैसले का समर्थन नहीं करते हैं।”
वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने महाराष्ट्र में अचानक बदले राजनीतिक समीकरणों पर अश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि NCP ने यूटर्न क्यों लिया हमें नहीं पता। अनवर ने कहा, “देश में सिद्धांत-विचारधारा की राजनीति बची नहीं है। साजिश थी जिसको गुप्त रखा गया। पीएम और भाजपा अपने साजिश में कामयाब हुए।” वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अजित पवार के निर्णय पर वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह निर्णय पार्टी का नहीं है और न ही इस निर्णय को शरद पवार का समर्थन प्राप्त है।
इस बीच, शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित की, इसमें उन्होंंने कहा कि बैठक में अजित पवार हमसे बात नहीं करते थे। उनकी बॉडी लैंग्वेज ऐसी थी – वो बाहर निकले और अपना फोन बंद कर दिया। राउत ने कहा कि इन सारी बातों से शरद पवार का कोई संबंध नहीं। अजित पवार ने जो निर्णय लिया है, भाजपा की ओर से तोड़ने की कोशिश हुई है, उसे जनता जवाब देगी। उसने शरद पवार को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि अगर देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री नहीं बनते तो अजित पवार आर्थर रोड जेल में होते।
सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि कल तक भाजपा जिन लोगों पर भ्रष्टाचार पर कार्यवाही कर रही थी, आज उन्ही को गले लगाकर उन्हें ईमानदार नेता बनाकर सिद्ध कर दिया है कि भाजपा की भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई मात्र एक छलावा है। आगे-आगे देखिए होता है क्या। 

संजय राउत ने कहा कि जो महागठबंधन करने जा रहे थे उससे देश की दिशा बदलने वाली थी। रात में ये पाप हुआ है। दिन में सब के सामने शपथ क्यों नहीं लिया? चोरी की है, डाका डाला है, जनता के साथ दगा किया है। पैसा और सत्ता का दुरुपयोग करके ये धोखा हुआ है। आँखे खुलने के पहले ये पाप नष्ट होगा। राउत ने आगे कहा, “अजित पवार पर बोलने की ज़रूरत नहीं। कल नौ बजे तक हमारे साथ बैठे थे, बात भी कर रहे थे। फिर ग़ायब हो गए। लेकिन वो नज़रों से नज़र नहीं मिला रहे थे क्योंकि उनकी नज़रों में चोरी थी। भाजपा ने राजभवन का दुरुपयोग किया है।”
प्रेस कॉन्फ्रेन्स में शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “मैं मानता था कि राज्यपाल ऐसे व्यक्ति हैं जो आरएसएस से आए हैं, संस्कारी हैं, लेकिन ये अंधेरे में पाप हुआ है, धोखा हुआ है। अजित पवार और उनके साथ जो विधायक हैं उन्होंने छत्रपति शिवाजी और महाराष्ट्र का नाम खराब किया है। जनता जवाब देगी।”