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‘100 नेताओं ने सोनिया गाँधी को लिखी चिट्ठी, नेतृत्व बदलने की माँग’: संजय झा

संजय झा और रणदीप सुरजेवाला
आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं, "साझे की हांड़ी चौराहे पर ही फूटती है", लेकिन परिवार समर्पित बन चुकी कांग्रेस की हांड़ी को चौराहा भी नसीब नहीं होने वाला। जिस कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ नेता तक एक ही परिवार की गुलामी के आगे नत-मस्तक है, लगता है ये सभी वर्तमान समय के गुलाम हैं। इनके झूठ का पुलंदा तो 1971 इंडो-पाक युद्ध के दौरान देशभक्ति का खुल गया था। जैसाकि सर्वविदित है कि युद्ध के समय हर एयरलाइन को अपने-अपने पायलट को 24 घंटे ड्यूटी पर रहने का नियम है, लेकिन राजीव गाँधी इकलौता ऐसा पायलट था, जो विवाहित आनंद का सुख भोगने इटली गया हुआ था, परन्तु तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी का बेटा होने के कोई कार्यवाही नहीं हुई। क्यों? क्या इसका नाम देशभक्ति है?
दूसरे, संजय झा "कहाँ चील के घोंसले में गोस्त" ढूंढने निकले हैं। पार्टी में परिवार गुलामी तो उस समय मुखर हो चुकी थी, जब पार्टी अध्यक्ष दलित सीताराम केसरी को दूध में से मक्खी की तरह बाहर फेंक दिया। बात यहीं नहीं ख़त्म होती, भूतपूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के निधन होने पर उनके शव तक को आखिरी दर्शन के लिए रखने के लिए पार्टी ऑफिस के दरवाजे तक नहीं खोले। फिर परिवार के अतिरिक्त किसी बाहरी व्यक्ति को अध्यक्ष न बनाये जाने से सिद्ध होता है कि कांग्रेस में लोकतंत्र के नाम पर बेवकूफ बनाया जा रहा है। 
पार्टी में परिवार के अतिरिक्त एक से बढ़कर एक प्रभावशाली नेता हुआ, परन्तु किसी को महत्व देने की बजाए कदम-कदम पर उनका अनादर ही होता रहा। परिवार गुलाम भलीभांति जानते हैं कि अब परिवार का कोई सदस्य भारतीय संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री तो क्या मंत्री भी नहीं बन सकता। और यह यूपीए के 10 वर्ष के कार्यकाल में सिद्ध भी हो गया। सोनिया गाँधी परदे के पीछे बैठ मनमोहन सिंह के नाम से राज करती रहीं, राहुल को किसी भी मंत्रालय का मंत्री तक नहीं बनाया गया। लेकिन जनता को मुंगेरी लाल के सपने दिखाने से कोई नहीं चूक रहा।   
लेकिन संजय झा ने एक बार कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमा दी है। उन्होंने अगस्त 17, 2020 को ट्वीट कर दावा किया कि लगभग 100 कांग्रेस नेता (सांसद सहित) पार्टी के आंतरिक मामलों से परेशान हैं और इसे लेकर उन्होंने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा है।
झा को पार्टी ने पिछले दिनों निलंबित कर दिया था। अब इस ट्वीट के बाद पार्टी ने उनसे पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हुए कहा है कि वे बीजेपी के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं।
संजय झा ने अपने ट्वीट में दावा किया कि सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में इन नेताओं ने राजनीतिक नेतृत्व बदलने की माँग की है। साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति में पारदर्शी चुनावों की भी माँग की है।



इस ट्वीट के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। कांग्रेस ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई चिट्ठी ने लिखी गई और न उन्हें मिली है।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “गलत सूचना फैलाने वाले टीवी चैनलों को आज वॉट्सऐप पर निर्देश आ चुका है कि क्या करना है। आज उनको कांग्रेस नेताओं के ऐसे पत्र पर स्टोरी चलाने को कहा गया है, जो कभी लिखा ही नहीं गया है। ये फेसबुक से भाजपा के लिंक की खबरों से ध्यान हटाने की एक कोशिश है।”



पिछले दिनों संजय झा को कांग्रेस ने प्रवक्ता पद से हटा दिया था। गहलोत-पायलट के विवाद के बीच ट्वीट को लेकर उन्हें बाद में पार्टी से निलंबित कर दिया गया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी के खिलाफ काम करने और अनुशासन तोड़ने को लेकर संजय झा के खिलाफ ये कार्रवाई की थी।
इससे पहले जून में एक लेख लिखने पर उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया गया था। संजय झा ने कोरोना के दौरान कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए एक प्रमुख अखबार में एक लेख लिखा था और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात कही थी।

पहले अजित पवार को जेल भेजने की बात थी अब डिप्टी CM बना दिया-- कांग्रेस

'पहले अजित पवार को जेल भेजने की बात थी अब डिप्टी CM बना दिया, मोदी है तो मुमकिन है', कांग्रेस ने पूछे 10 सवालमहाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम पर कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से 10 सवाल पूछे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 23 नवंबर का दिन एक काले अध्याय के रूप में दर्ज़ होगा। अवसरवादी अजीत पवार को जेल की सलाखों का डर दिखा कर प्रजातंत्र की हत्या कर दी गई है। यह महाराष्ट्र के लोगों से धोखा है। सुरजेवाला ने कहा कि पहले तो बोलते थे कि अजीत पवार को आर्थर रोड जेल भेजेंगे अब उन्हीं को उप मुख्यमंत्री बना दिया गया है क्योंकि मोदी हैं तो मुमकिन है।कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल ने अमित शाह के हिटमैन के रूप में काम किया है। बाबा साहेब के प्रदेश में संविधान को रौंदने वाले मोदी जी और अमित शाह हैं। 
जहाँ तक प्रजातंत्र/लोकतंत्र की हत्या की बात है, कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिए कि इसकी हत्या तो नेहरू कांग्रेस ने भारत के प्रथम चुनाव में ही कर दिया था। जब रामपुर, उत्तर प्रदेश से हिन्दू महासभा के विशन सेठ ने कांग्रेस उम्मीदवार मौलाना अबुल कलम आज़ाद को 6000 से अधिक वोटों से हराने के बावजूद जवाहर लाल नेहरू के कहने पर विशन को विजयी जुलुस से उठवाकर उन्हीं के सामने उनकी वोटों को आज़ाद की वोटों में मिलाकर लगभग 3000 वोटों से विजयी घोषित कर दिया था। 
कांग्रेस के 10 सवाल 
सरकार बनाने का दावा कब और किसने पेश किया था. सरकार बनाने के दावे पर बीजेपी-NCP के कितने विधायकों के हस्ताक्षर हैं। 
उन हस्ताक्षरों को कब किसने सत्यापित (वेरिफाई) किया है। 
राज्यपाल महोदय ने रात में कितने बजे राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा की है। 
केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा की है तो कितने बजे की गई।  
कैबिनेट की बैठक रात में कितने बजे हुई और इस बैठक में कौन-कौन मंत्री शामिल था। 
कैबिनेट की अनुशंसा रात में राष्ट्रपति महोदय के पास कितने बजे भेजी गई। 
अनुशंसा को रात में कितने बजे राष्ट्रपति ने स्वीकार किया। 
राज्यपाल महोदय ने कब और कितने बजे शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित किया। 
सिर्फ़ एक ऐजेंसी ANI वालों के अलावा बाक़ी पत्रकारों को महाराष्ट्र के चीफ़ जस्टिस को क्यों नहीं बुलाया?
शपथ दिलाने के बाद राज्यपाल ने यह क्यों नहीं बताया कि बहुमत कब और कितनों में साबित करना है। 
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