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मोदी की विदाई करवाने वाले मार्क जुकरबर्ग लताड़ पड़ते ही META लगा गिड़गिड़ाने: कहा- अनजाने में हुई गलती के लिए माफ करें, भारत हमारे लिए महत्वपूर्ण देश

                           जुकरबर्ग के बयान पर मेटा ने माफी माँगी है (फोटो साभार: India TV)
2024 में भारत और अमेरिका में हुए चुनावों में मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के विरोधियों में कोई फर्क नहीं था, दोनों देशों में एक ही नारे थे। यानि जॉर्ज सोरोस और Deep State के हाथों बिकाऊ या कहा जाए भिखारी विपक्ष कठपुतली बन दोनों देशों की जनता को गुमराह करती रही। ट्रम्प के सत्ता संभालने से पहले ही भगदड़ शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही इन भारत विरोधी विपक्ष को "बटोगे तो कटोगे" नारा देगा चारों खाने चित करना शुरू कर दिया था। और योगी के इस नारे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "एक रहोगे तो safe रहोगे" कहकर चार चाँद लगा दिए। इन नारों को साम्प्रदायिक बताने वालों को जवाब देने का भारत में समय आ गया है। इन नारों को साम्प्रदायिक बताने वालों वोट के माध्यम से पूछना चाहिए कि ट्रम्प के सत्ता संभालने से पहले भगदड़ क्यों? 
फेसबुक और इंस्टाग्राम के स्वामित्व वाली कंपनी मेटा ने भारत से माफी माँगी है। मेटा ने अपने सीईओ मार्क जुकरबर्ग के बयान पर सार्वजनिक रूप से यह माफी माँगी है। मेटा ने कहा है कि भारत उसके लिए काफी महत्वपूर्ण है। मेटा की यह माफी उसे आईटी मामलों की संसदीय समिति द्वारा तलब किए जाने के ऐलान के बाद आई है।

मेटा की तरफ से उसके भारत के पब्लिक पॉलिसी के मुखिया शिवनाथ ठुकराल ने यह माफी एक्स (पहले ट्विटर) पर माँगी। उन्होंने अश्विनी वैष्णव के जुकरबर्ग की आलोचना वाले ट्वीट के नीचे इससे सम्बन्धित जवाब दिया है। उन्होंने मार्क जुकरबर्ग के बयान को लापरवाह और अनजाने में दिया गया बताया है।

शिवनाथ ठुकराल ने लिखा, “माननीय मंत्री अश्विनी वैष्णव जी, मार्क का यह कहना कि 2024 के चुनावों में कई मौजूदा पार्टियाँ दोबारा सरकार में नहीं लौटीं, कई देशों के संदर्भ में ठीक है लेकिन भारत के लिए नहीं। हम अनजाने और लापरवाही के चलते हुई इस गलती के लिए माफ़ी चाहते हैं। भारत मेटा के लिए महत्वपूर्ण है और हम इसके इनोवेटिव भविष्य के केंद्र में होने की आशा करते हैं।”

इससे पहले संचार और आईटी मामलों की स्थायी संसदीय समिति के मुखिया निशिकांत दुबे ने इस मामले में मंगलवार (14 जनवरी, 2025) को मेटा को तलब करने का ऐलान किया था। निशिकांत दुबे ने लिखा था, “मेरी कमिटी ग़लत जानकारी फ़ैलाने के लिए मेटा को बुलाएगी। किसी भी लोकतांत्रिक देश की ग़लत जानकारी उसकी छवि को धूमिल करती है। इस गलती के लिए भारतीय संसद से तथा यहाँ की जनता से उस संस्था को माफ़ी माँगनी पड़ेगी।”

इस मामले को लेकर आईटी मामलों के केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने एक ट्वीट में भारत में हुए चुनावों की कुछ जानकारी देते हुए जुकरबर्ग के बयान पर निराशा जताई थी। अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि मेटा के मुखिया का ही गलत जानकारी देते हुए देखना एकदम निराशाजनक है। 

मेटा मुखिया जुकरबर्ग हाल ही में जो रोगन के पॉडकास्ट में गए थे। उनका यह पॉडकास्ट 10 जनवरी, 2025 को रिलीज हुआ था। इस पॉडकास्ट के दौरान ही उन्होंने कंटेंट मॉडरेशन, सरकार पर भरोसा, COVID-19, एल्गोरिदम, सरकारी प्रभाव जैसे मुद्दों पर बात की थी। इसी बीच उन्होंने दावा किया था कि कोविड महामारी के बाद कई देशों की सरकारे गईं और इसी में भारत का उदाहरण दिया। जुकरबर्ग की गलत बयानी के ऊपर भारत में काफी आलोचना हुई थी।

‘बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी, जल्द दिखेगा असर’: रेजुवान को असम पुलिस ने दबोचा, पूछताछ में कहा – अलकायदा के लिए काम करता हूँ

फेसबुक पर खुद को अलकायदा का आतंकी बता रहे रेजुवान उल्ला मज़रभुइया को असम पुलिस ने दबोचा
बांग्लादेश में चल रही उठापटक के बीच भारत में कई कट्टरपंथी लोगों को भड़काने के की कोशिशों में जुट गए हैं। असम पुलिस ने खुद को अलकायदा का सदस्य बताने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम रेजुवान उल्ला मज़रभुइया है। बुधवार (7 अगस्त, 2024) को रेजुवान ने सोशल मीडिया पर लोगों को असम सहित पूरे भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की थी। गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ के बाद शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को उसे अदालत में पेश किया गया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला असम के हैलाकांडी का है। यहाँ के रेजुवान उल्ला मज़रभुइया ने गुरुवार को फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट किया। उसने लिखा कि बांग्लादेश के बाद अब भारत की बारी है। साथ ही उसने कहा कि बांग्लादेश का असर जल्द ही भारत में भी दिखने वाला है। इसी दौरान एक अन्य फेसबुक यूजर ने रेजवान उल्ला के बारे में जानकारी माँगी। जवाब में रेजुवान ने बताया कि वो भारत में रहता है लेकिन काम अलक़ायदा के लिए करता है।

रेजुवान ने अपने जवाब में कहा कि वो हमेशा खुद को बांग्लादेश के करीब मानता है। यह बातें रेजुवान ने ‘अमादर हैलाकांडी’ नाम के एक ग्रुप में लिखी थीं। इस कमेंट पर हैलाकांडी पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस ने जाँच की और रेजुवान को रंगपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को लाला पुलिस स्टेशन ला कर पूछताछ की गई। पूछताछ में रेजुवान ने बताया कि उसके कनेक्शन पाकिस्तान में सक्रिय अलकायदा के आतंकियों से हैं।

                                                               रेजुवान की फेसबुक पोस्ट

हैलाकांडी पुलिस के एडिशनल एसपी क्राइम समीर दप्तर बरुआ ने रेजुवान पर की गई कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आरोपित ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी बांग्लादेश से जुड़े आपत्तिजनक पोस्ट किए थे। पुलिस को रेजुवान उल्ला मज़रभुइया के खिलाफ सबूत मिले और इसी के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 147 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और 196 (शत्रुता को बढ़ावा देना) के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 39 के तहत कार्रवाई की गई है।

अवलोकन करें : -

बगावत के तेवर दिखा रहा हैलाकांडी का रेजुवान ही ऐसी मानसिकता वाला अकेला व्यक्ति नहीं है। बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों को जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी समूहों द्वारा हाईजैक किए जाने के बाद उन्हीं हरकतों को भारत में भी दोहराने के खतरनाक मंसूबे कई अन्य लोगों ने भी पाल रखे हैं। कई राज्यों में ऐसे लोगों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। ऐसी टिप्पणियाँ करने वालों में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता भी शामिल हैं। इन नेताओं में सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर भी शामिल हैं।

केरल : नाथूराम गोडसे के लिए किया कमेन्ट तो प्रोफ़ेसर पर हो गई FIR, सच्चाई से घबराते तुष्टिकरण करने वाले

                                                                                                                               साभार: NIT-C
केरल के कोझिकोड में एक महिला प्रोफ़ेसर पर नाथूराम गोडसे के समर्थन में कमेन्ट करने पर FIR हो गई है। केरल के कोझिकोड की पुलिस ने उनके विरुद्ध दंगा भड़काने की धारा के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है। उनके खिलाफ केरल के वामपंथी छात्र संगठन ने FIR दर्ज करवाई है।
यह कार्यवाही इस बात को शत-प्रतिशत सिद्ध कर रही है कि छद्दम धर्म-निरपेक्षों और तुष्टिकरण करने वालों ने कितनी भ्रांतियां फैलाई हुई थी/हैं कि सच्चाई सुनने को तैयार नहीं। गोडसे विरोधियों को मालूम होना चाहिए कि जस्टिस खोसला ने गोडसे को उनके 150 बयान पढ़ने के लिए माइक और लाउड स्पीकर की इजाजत दी थी, जो आज तक विश्व रिकॉर्ड हैं। सेवानिर्वित होने के बाद एक पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "गोडसे ने गाँधी को मारा क्यों?" शृंखला प्रकाशित की थी।(सामने देखिए पृष्ठ) अवलोकन कीजिए नीचे दिए लिंक।  
दूसरे, अगर गोडसे ने गाँधी को मार अपराध किया है, फिर क्यों तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गोडसे के कोर्ट में दर्ज 150 बयानों को सार्वजनिक होने पर क्यों प्रतिबन्ध लगाया था? गोडसे विरोधियों को यह भी मालूम होना चाहिए कि परिवार ने आज तक गोडसे की अस्थियों को सुरक्षित रखा हुआ है। गोडसे ने कहा था कि "अखंड भारत होने पर सिंधु नदी में विसर्जन किया जाए।" 
अवलोकन करें:-
महात्मा गाँधी प्रेमियों को गोडसे के 150 बयान घर-घर बंटवाने में क्या आपत्ति है?
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क्या महात्मा गांधी जन्मजात हिन्दू विरोधी थे ?
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जब मोपला में हुआ हिंदुओं का नरसंहार, तब गाँधी पढ़ा रहे थे खिलाफत का पाठ

जब अंबेडकर ने गाँधी के लिए कहा था- बगल में छुरी मुँह में राम, ‘हत्या’ को देश के लिए बताया था ‘अच्छ

जिन महिला प्रोफ़ेसर के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है, वह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (NIT) कालीकट में वरिष्ठ प्रोफ़ेसर हैं। उनका नाम शैजा अन्दावन है। वह NIT में मैकेनिकल इंजीयनियरिंग विभाग में पढ़ाती हैं। उन्होंने 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या की बरसी पर एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। पोस्ट में नाथूराम गोडसे को भारत में अनेकों लोगों का नायक बताया गया था। इसमें उन्होंने नाथूराम गोडसे का समर्थन किया था।

उन्होंने एक पोस्ट पर कमेन्ट किया, “भारत को बचाने के लिए गोडसे पर गर्व है।” यह पोस्ट गोडसे के समर्थन में किया गया था। उनके इस कमेन्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया। हालाँकि, उन्होंने यह कमेन्ट बाद में हटा दिया। यह पोस्ट एक हिंदूवादी वकील कृष्णा राज की पोस्ट पर किया गया था। जब प्रोफ़ेसर अन्दावन से इस सम्बन्ध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह यूनिवर्सिटी में विवाद नहीं पैदा करना चाहती, इसलिए उन्होंने कमेन्ट हटा दिया।

कमेंट डिलीट करने के बावजूद उनके खिलाफ वामपंथी छात्र संगठनों ने दो FIR दर्ज करवा दी। उनके खिलाफ राजद्रोह की धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया है। वामपंथी छात्र संगठनों का प्रोफ़ेसर पर आरोप है कि उन्होंने इस कमेन्ट के जरिए द्वेष फैलाने का प्रयास किया। इन संगठनों ने उन्हें NIT से निष्कासित करने की माँग की है। केरल के कोझिकोड से कॉन्ग्रेस सांसद एमके राघवन ने NIT के डायरेक्टर को पत्र लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

प्रोफ़ेसर शैजा अन्दावन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, “मेरा कमेन्ट गाँधीजी की हत्या की प्रशंसा करना नहीं था और ना ही मैं कभी ऐसा करना चाहती थी। मैंने गोडसे की ‘मैंने गाँधी को क्यों मारा’ किताब पढ़ी है। इस किताब में कई खुलासे और जानकारियाँ हैं, जो कि आम लोगों को नहीं पता। गोडसे ने इस किताब में हमें वह बताया है। मैंने इसी सम्बन्ध में फेसबुक पर डाली गई एक पोस्ट पर कमेन्ट किया था। जब मैंने देखा कि लोग मेरे कमेन्ट का गलत मतलब निकाल रहे हैं, तो मैंने वह हटा दिया।”

हाल ही में NIT कोझिकोड में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा एक विरोध में एक छात्र ने यहाँ पूरे कैम्पस में पोस्टकार्ड लहराए थे, जिसके बाद विवाद हो गया था। उसने यहाँ कुछ छात्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा उत्सव मनाए जाने का विरोध किया था।

‘ये एक ऐसा इलाज जो बीमारी से भी बदतर’: फेसबुक पर सेंसरशिप लगाने के लिए पहुँचे रोहिंग्या को हाईकोर्ट का दो टूक जवाब "नहीं"

यह केवल भारत में ही संभव है, जहां रोहिंग्या और घुसपैठियों को तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां तो अपनी कुर्सी और रोजी-रोटी की खातिर समर्थन करती हैं, शाहीन बाग बनाते हैं, लेकिन वकीलों को तो ऐसी कोई समस्या नहीं। जिन रोहिंग्यों को कोई मुस्लिम देश रखने को तैयार नहीं, फिर भारत में इनके समर्थन में खड़े होने वालों को क्या संज्ञा दी जाए? 
दिल्ली हाईकोर्ट में 2 रोहिंग्या मुस्लिमों ने याचिका दायर की थी कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं से नफरत दिखाने वाले वीडियो और कंटेंट के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाया जाए, क्योंकि फेसबुक इसको बढ़ावा देकर पैसे कमाता है। इसके लिए कोर्ट आदेश दे कि ऐसे कंटेंट को प्रसारित करने की अनुमति न दी जाए। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि फेसबुक को इस नफरत भरे भाषण को हटाने और रोहिंग्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में कहा गया था कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण के कई उदाहरण हैं। इनमें रोहिंग्याओं को ‘आतंकवादी’, ‘घुसपैठिए’ और ‘भारतीयों के लिए खतरा’ कहा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के भाषण रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे सकते हैं। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।

‘लाइव लॉ’ की खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि यह सुझाव कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं पर किसी भी कंटेंट के पब्लिश होने से पहले सेंसरशिप होनी चाहिए, ये ‘एक ऐसे उपचार का उदाहरण है जो बीमारी से भी बदतर है।’ इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फेसबुक इंडिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ ‘घृणित और हानिकारक सामग्री’ को बढ़ावा देने से रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा, ‘आईटी नियम, 2021 के अनुसार सभी लोगों के पास किसी भी शिकायत की अनुमति है, इसके अनुसार सरकार कार्रवाई करती है। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कंटेंट के प्रकाशित होने से पहले ही रोक लगाने की माँग की है, जो नियमों के अनुसार गलत है। ये तो किसी बीमारी से भी बदतर उसके इलाज जैसी बात है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी शक्ति मिल जाने से समस्याएँ ही बढ़ेंगी।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने फेसबुक के खिलाफ 2 रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद हमीम और कौसर मोहम्मद की याचिका का निपटान कर दिया। इसमें फेसबुक के एल्गोरिदम की शिकायत करते हुए कहा गया था कि फेसबुक पैसा बनाने के लिए रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कंटेंट को बढ़ावा देता है। लेकिन, कोर्ट ने कहा कि फेसबुक के खिलाफ माँगी गई राहतें बरकरार रखने योग्य नहीं हैं, क्योंकि रिट याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि अधिकारी आईटी नियम 2021 के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का पालन करने में विफल रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि फेसबुक एक बड़ी सोशल मीडिया कंपनी है। इसकी पहुँच दुनिया भर में है। ऐसे में, फेसबुक पर नफरत फैलाने वाले भाषण का असर भी बहुत बड़ा होता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फेसबुक को नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

वहीं, फेसबुक का कहना है कि उनकी कंपनी नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पास नफरत फैलाने वाले भाषण को पहचानने और हटाने के लिए तकनीक है। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकना संभव नहीं है। फेसबुक ने यह कहते हुए याचिका खारिज करने की माँग की थि कि इसमें इस बात का कोई संदर्भ नहीं दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाए गए दिशानिर्देश कैसे अप्रभावी हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दिया।

Facebook : वरदान या अभिशाप ; यूट्यूब के नाम पर लूट?

                                                                                                                           साभार 
जैसे-जैसे soft ware टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है, ज्यों-ज्यों यह फेसबुक पर मित्र बन मासूम और बेगुनाह लोगों को ब्लैकमेल भी कर  अपमानित किया जा रहा है, जिसके पीछे शंका है कोई गैंग काम कर रहा है, जिसकी गंभीर जाँच ही सच्चाई सामने ला सकती है। 

फेसबुक पर कोई अध्यापक, अध्यापिका, ब्यूटी पार्लर, ग्रहणी एवं सम्मानित सुशोभित बन मित्र तो
बनाते हैं, लेकिन मैसेंजर बॉक्स में एक-दो दिन बाद ही उनकी अश्लीलता उजागर होने लगती है। पहले सामने वाले को उकसाया जाता है, पोर्न वीडियो दिखाई जाती है, पोर्न दिखाते वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू। 

व्हाट्सअप DP पर नाम कुछ,  लेकिन धन किसी 
अन्य नाम में , क्या यह Youtube चैनल का आधिकारिक 
DP है?
20, 000 से 50, 000 रूपए तक की मांग की जाती है, पूरा नहीं करने पर यूट्यूब, X (ट्विटर), इंस्टाग्राम अथवा टेलीग्राम पर डालने की धमकी दी जाती है। इस धमकी का भी असर न होने पर साइबर क्राइम, पुलिस एवं यूट्यूब के तथाकथित अधिकारी के रूप में धमकाने का काम करते हैं। ऐसे में ज्वलंत प्रश्न यह है कि 'क्या यूट्यूब किसी ऐसे अश्लील वीडियो के वायरल न होने के पैसे लेता है?' अगर लेता भी है तो यूट्यूब राशि कंपनी के नाम पर लेने की बजाए किसी व्यक्तिगत नाम में लेने की आज्ञा देता है, क्यों?

दूसरे, एक बेकसूर को अपराधी बनाने से पूर्व उस तथाकथित साइबर क्राइम अधिकारी को इस बात की जाँच करनी थी कि:-

1. क्या अश्लील वीडियो के लिए सामने वाले ने बोला था?; 

2. ये अश्लील वीडियो क्या तुम्हारी अपनी है? 

3. यदि नहीं, फिर कौनसी पोर्न साइड से ली? 

4. अश्लील वीडियो को सामने वाले को वीडियो कॉल कर दिखाई क्यों?

5 . अगर दिखाई भी तो सामने वाले को दिखाते वीडियो क्यों बनाई?

6 . अगर बनाई तो सामने वाले को क्यों ब्लैकमेल किया जा रहा है? आदि आदि 

ऐसी स्थिति में इस बात की भी जाँच होनी चाहिए कि मैसेंजर बॉक्स की भी जाँच होनी चाहिए कि पोर्न वीडियो किसने डाली और क्यों? क्या सामने वाले/वाली ने बोला था? क्या वह पोर्न वीडियो उस महिला की है अथवा किसी अन्य पोर्न साइड से ली है? इस  तरह की अश्लील वीडियो डालने के लिए उकसाने वाले के विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करने अथवा करने वाली के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के साथ-साथ उस गैंग सम्मिलित लोगों को भी बक्शा नहीं जाना चाहिए। 

अवलोकन करें:-

जो DMK पार्टी चाहती है सनातन को मिटाना, उसके मुखपत्र ने शेयर की पोर्न वीडियो

ऐसा नहीं सभी ऐसी अथवा ऐसी होती हैं। कई तो इतने सभ्य तरीके से बातचीत करते हैं कि सामने वाला अपने सब दुःख/चिंताओं को भूल जाता है। कहावत है, एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है, ठीक वही स्थिति  मैसेंजर बॉक्स की हो रही है।  

जो DMK पार्टी चाहती है सनातन को मिटाना, उसके मुखपत्र ने शेयर की पोर्न वीडियो

              DMK के मुखपत्र के फेसबुक अकाउंट ने शेयर की पोर्न वीडियो (फोटो साभार: X/@Murasoli180)
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से अश्लील वीडियो शेयर की गई हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा मचा है। इस मामले में नेटिजेन्स का कहना है कि पेरियार की विचारधारा को मानने वाले लोग ऐसे ही होते हैं।

दरअसल, मुरासोली एक तमिल अखबार है। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने साल 1942 में इसकी शुरुआत की थी। इसके फेसबुक पेज पर 16 हजार लाइक्स और 22000 फॉलोअर्स हैं। 5 अक्टूबर को ‘मुरासोली’ के फेसबुक पेज पर दो स्टोरीज शेयर की गई हैं। इसमें महिलाओं को नग्न अवस्था मे दिखाया गया है।

इसको लेकर तमिलनाडु भाजपा के सचिव एसजी सूर्या ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “डीएमके के आधिकारिक समाचार पत्र मुरासोली के फेसबुक स्टेटस पर पोर्न वीडियो अपलोड किया गया है। यह क्या है सीएम एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन?”

एसजी सूर्या का ट्वीट सामने आने के बाद ऑपइंडिया ने मुरासोली की वेबसाइट चेक की। इसमें दाएँ कोने पर अखबार के सोशल मीडिया हैंडल मिले। फेसबुक आइकन पर क्लिक करने पर, ‘मुरासोली’ का आधिकारिक फेसबुक पेज खुल रहा है। इस पेज की स्टोरी खँगालने पर दो पोर्न क्लिप दिखाई दी। खबर लिखे जाने तक दोनों पोर्न वीडियो स्टोरी पर नजर आ रहे थे। इसको लेकर अब तक ‘मुरासोली’ या डीएमके की ओर से स्पष्टीकरण या माफीनामा जारी नहीं किया गया है।

डीएमके के मुखपत्र के फेसबुक पेज द्वारा अश्लील वीडियो शेयर करने पर एक यूजर ने लिखा, “अजीब बात यह है कि इन लोगों ने अब तक यह स्टोरी नहीं हटाई है। यह कैसी राजनीतिक पार्टी है। पेरियार की विचारधारा को मानने वाले दूषित लोग इस तरह की हरकतें करते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है।”

एक अन्य एक्स यूजर ने भी लिखा, “दूषित पेरियार की विचारधारा का अनुसरण करने वाले दूषित लोग।”

डीएमके तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी है। सीएम एमके स्टालिन पार्टी के मुखिया हैं। यह वही पार्टी है जिसके मंत्री और एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया बताते हुए खत्म करने की बात कही थी।