इंटरव्यू का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार - YouTube/The Wire) वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर ने शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को एक क्लिप शेयर की, जिसमें ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल (AICC) का अध्यक्ष और गुड शेफर्ड चर्च ऑफ इंडिया के प्राइमेट आर्कबिशप जोसेफ डिसूजा फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन अमेंडमेंट बिल, 2026 (FCRA Bill 2026) को ईसाई संस्थानों की लूट और चोरी और संघ परिवार का एजेंडा बताते हुए नजर आया।
जिस पॉडकास्ट में करण थापर ने जोसेफ डिसूजा का इंटरव्यू लिया था, वह 4 महीने पहले 2 अप्रैल 2026 को प्रसारित हुआ था। डिसूजा जो घोटाले का आरोपित और विदेशी फंडिंग प्राप्त ईसाई पादरी हैं, उसको द वायर बार-बार FCRA संशोधनों को लेकर मोदी सरकार को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। ये संशोधन संदिग्ध और अवैध फंडिंग, अवैध धर्मांतरण और अन्य गतिविधियों पर शिकंजा कसेंगे।
क्लिप शेयर करके द वायर उन आरोपों और झूठ की मुहिम में शामिल हो गया, जिन्हें कई निहित स्वार्थ वाले समूह FCRA बिल के खिलाफ लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। यह क्लिप डिसूजा द्वारा पत्रकार करण थापर को दिए गए एक इंटरव्यू से ली गई थी।
इंटरव्यू की शुरुआत थापर इस घोषणा के साथ करता हैं कि FCRA बिल में कठोर और देखने में असंवैधानिक उपाय शामिल हैं, जिस पर डिसूजा बिल को लेकर अपने खुद के निराधार दावे जोड़ता हैं।
द वायर पर घोटाले के आरोपित जोसेफ डिसूजा ने FCRA को कहा ईसाई संस्थानों की लूट और चोरी
थापर की बात से सहमति जताते हुए डिसूजा ने दावा किया कि अगर यह बिल पास हो जाता है, तो इससे वह संभव हो सकेगा जिसे भारतीय ईसाई समुदाय और वैश्विक ईसाई समुदाय की कानूनी लूट को बढ़ावा मिलेगा।
अपने गंभीर आरोप को समझाते हुए डिसूजा ने दावा किया कि यह बिल ईसाई संस्थानों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों पर कब्जा करने की एक चाल है। उसने आगे दावा किया कि बिल के तहत प्रस्तावित डेजिग्नेटिड अथॉरिटी को उन संगठनों के विदेशी योगदान और संपत्तियों पर स्थायी नियंत्रण लेने की व्यापक शक्तियाँ दी गई हैं, जिनका विदेशी योगदान पंजीकरण रद्द, समर्पित या समाप्त हो जाता है।
जोसेफ डिसूजा ने आगे दावा किया कि यह बिल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, क्योंकि डेजिग्नेटिड अथॉरिटी के फैसले न्यायिक समीक्षा या न्यायिक जाँच के अधीन नहीं हैं।
ईसाई चर्च के प्रति RSS की ऐतिहासिक दुश्मनी
डिसूजा ने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रावधान का गलत इस्तेमाल कर सकती है। वह किसी संगठन के नवीनीकरण आवेदन को समय पर मंजूर नहीं करके या उस पर कार्रवाई नहीं करके ऐसा कर सकती है, जिससे संगठन की संपत्तियाँ जब्त हो जाएँगी।
उसने FCRA बिल को अल्पसंख्यक अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए इसे देश के ईसाई संस्थानों को हड़पने के RSS के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला बताया।
उसने बिल लाने के पीछे सरकार की वैचारिक मंशा होने का आरोप लगाया। उसने दावा किया कि RSS की मदर टेरेसा और ईसाई चर्च के प्रति ऐतिहासिक दुश्मनी ही FCRA बिल के पीछे की वजह है।
बिल को अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए आर्कबिशप ने इसकी तुलना नाजी जर्मनी में बनाए गए यहूदी मामलों के कार्यालय, जिसे रेफरेट IV B4 कहा जाता था, से की। यह कार्यालय यहूदी लोगों की संपत्तियों, संस्थानों, सिनेगॉग और उनकी हर चीज को हड़पने के लिए बनाया गया था।
ईसाई समुदाय को कमजोर करना
आर्कबिशप ने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक लूट करने और ईसाई समुदाय को कमजोर करने की साजिश को FCRA बिल का रूप दिया गया है। उसने विदेशी फंडिंग से जुड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं को खारिज कर दिया और RSS पर आतंकवाद का आरोप लगाया।
उसने दावा किया कि ईसाई संगठनों की विदेशी फंडिंग की जाँच जरूरी नहीं है, क्योंकि ईसाई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। डिसूजा ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि बिल का उद्देश्य चर्चों में आने वाले उस विदेशी धन और उससे होने वाली आय को नियंत्रित करना है, जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए किया जाता है।
उसने आगे दावा किया कि भारत में ईसाई संगठन धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल होते हैं और सरकार को आधुनिक ईसाई धर्म की कोई समझ नहीं है। उसने धमकी दी कि बिल लाकर सरकार वैश्विक स्तर पर और संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर देगी।
उसने कहा कि इस कार्रवाई के वैश्विक स्तर पर असर होंगे और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से प्रतिक्रिया और विरोध का सामना करना पड़ेगा। आर्कबिशप ने धमकी दी कि अगर बिल संसद में पास हो गया, तो ईसाई संगठन देश और दुनिया की अदालतों का रुख करेंगे, अपने वैश्विक साझेदारों को उनकी अदालतों में जाने देंगे।
जोसेफ डिसूजा – हिंदुओं के खिलाफ नफरत का अभियान चलाने वाला व्यक्ति, 296.6 करोड़ रुपए निजी बैंक खातों में डायवर्ट करने का आरोप
डिसूजा खुद को दलितों और हाशिए पर मौजूद समुदायों की आवाज के रूप में पेश करता हैं, लेकिन FCRA बिल पर चर्चा में वह कोई निष्पक्ष आवाज नहीं है। अतीत में उन्हें विदेशी फंडिंग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जाँच का सामना करना पड़ा है।
वह और उसके पश्चिमी सहयोगी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह नैरेटिव आगे बढ़ाने के लिए कुख्यात है कि वो भारत के उन उत्पीड़ित, पिछड़े या अछूत समुदायों से आता है, जिन्होंने बाद में ईसाई धर्म अपना लिया।
गुड शेफर्ड चर्च और उससे जुड़े संगठनों के तहत स्कूलों, अस्पतालों और सामाजिक सेवा संगठनों समेत उसके संस्थानों के नेटवर्क को विदेशी फंडिंग मिलती है और हजारों अन्य NGO की तरह पिछले वर्षों में FCRA अनुपालन जाँच का सामना कर चुका है।
जोसेफ डिसूजा ने दलित फ्रीडम नेटवर्क की सह-स्थापना की थी, जिसका बाद में नाम बदलकर डिग्निटी फ्रीडम नेटवर्क (DFN) कर दिया गया। यह नेटवर्क अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में प्रमुख शाखाएँ संचालित करता है।
इन संगठनों से जुड़ी उसकी वेबसाइट और प्रचार सामग्री भारत की बेहद नकारात्मक तस्वीर पेश करती हैं और भारत में दलितों और ईसाइयों को कीड़ों की तरह मारा जा रहा है जैसे झूठ फैलाती हैं।
तेलंगाना CID और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गबन से जुड़े गंभीर आरोपों के संबंध में आरोप लगाए जाने के बाद जोसेफ डिसूजा जाँच के घेरे में आया।
उस पर और उसके बेटे जोश लॉरेंस डिसूजा पर गरीब दलित बच्चों की मुफ्त शिक्षा और कल्याण के लिए जुटाए गए लगभग 296.6 करोड़ रुपए के विदेशी फंड को फर्जी बिलों और शेल कंपनियों के जरिए निजी बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और महंगी रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए डायवर्ट करने का आरोप लगाया गया।
डिसूजा उन प्रमुख लोगों में से एक हैं, जिन्होंने भारत को बदनाम करने के लिए ईसाइयों के खिलाफ बढ़ती नफरत का झूठ फैलाया। ऑपइंडिया ने डिसूजा, उसके घोटाले और उसके विदेशी फंडिंग पर विस्तृत रिपोर्ट की है।
आर्कबिशप के झूठ का पर्दाफाश
FCRA बिल को लेकर डर फैलाने वाली बातें उन वर्गों की ओर से आ रही हैं, जिन्हें नए कानून के तहत वैध जाँच का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि वास्तविकता उन बातों से काफी अलग है, जिस तरह कुछ निहित स्वार्थ वाले समूह इसे पेश कर रहे हैं।
Who is the kingpin of the lie about ‘Christian persecution in India? 🧵#OpIndia is going to reveal the nefarious designs of a scam tainted Christian pastor funded by the international Church network, now under the ED scanner, to defame India and Hindus.
प्रस्तावित बिल स्पष्ट रूप से सभी पूजा स्थलों को सरकारी कब्जे, धर्मनिरपेक्षीकरण या किसी दूसरे उद्देश्य में बदले जाने से सुरक्षा देता है।
सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थानों पर कब्जा करने की व्यापक शक्तियाँ दिए जाने के दावों की सच्चाई का पता प्रस्तावित बिल को सीधे पढ़कर लगाया जा सकता है। प्रस्तावित बिल में एक प्रावधान इस प्रकार है:
“उप-धारा (6) में निहित किसी भी बात के बावजूद, नामित प्राधिकरण (डेजिग्नेटिड अथॉरिटी), जहाँ उसके पास स्थायी रूप से निहित कोई संपत्ति या उसका कोई हिस्सा पूजा स्थल है, वहाँ ऐसी संपत्ति या उसके हिस्से का प्रबंधन या संचालन ऐसे व्यक्ति को, ऐसे तरीके से और ऐसी शर्तों पर सौंपेगा, जो निर्धारित की जा सकती हैं और यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप बरकरार रहे।“
डिसूजा के दावे के विपरीत, डेजिग्नेटिड अथॉरिटी द्वारा पारित कोई भी आदेश प्रशासनिक समीक्षा और जिला न्यायाधीश के समक्ष न्यायिक अपील के अधीन रहेगा। इसके अलावा, केंद्र की पूर्व अनुमति के बिना राज्य स्तर की एजेंसियों को स्थानीय मुकदमे शुरू करने से रोक दिया गया है। यह मनमानी स्थानीय कार्रवाई के खिलाफ एक स्पष्ट सुरक्षा उपाय है।
FCRA बिल ईसाई धर्म समेत किसी भी धर्म के लिए विदेशी फंडिंग पर रोक नहीं लगाता। चर्च, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे समेत पूजा स्थल वास्तविक धार्मिक कार्यों के लिए विदेशी दान प्राप्त करते रहेंगे।
जोसेफ डिसूजा पर खुद अधिकारियों ने FCRA नियमों के उल्लंघन का लगाया है आरोप
जाँचकर्ताओं के अनुसार, गृह मंत्रालय (MHA) ने नेटवर्क से जुड़े प्रमुख संगठनों के FCRA लाइसेंस नियामकीय उल्लंघनों के कारण पहले निलंबित और बाद में रद्द कर दिए थे।
इसके बावजूद विदेशी फंड अप्रत्यक्ष माध्यमों से भारत में आते रहे। FCRA लाइसेंस रद्द होने का मतलब था कि संगठन सीधे विदेशी दान प्राप्त नहीं कर सकते थे। जाँचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इसके बाद डिसूजा ने अपनी व्यावसायिक इकाई OMBF (ओम बुक्स फाउंडेशन) का इस्तेमाल एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में किया।
आरोपों के अनुसार, प्रिंटिंग और पब्लिशिंग सेवाओं के लिए बढ़े-चढ़े और फर्जी बिल तैयार किए गए और उन्हें विदेशों में मौजूद संबंधित या कथित रूप से संबद्ध संगठनों को भेजा गया।
इन लेनदेन को वैध व्यावसायिक गतिविधियों के रूप में पेश किया गया, जिससे यह दिखाया जा सके कि विदेशी संगठनों ने किताबों और प्रकाशनों का ऑर्डर दिया था। जाँचकर्ताओं का दावा है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल सीधे विदेशी योगदान पर लगी पाबंदियों के बावजूद विदेशी फंड को भारत में भेजते रहने के लिए किया गया।
जाँचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ऊपर बताई गई गतिविधियों के जरिए जुटाए गए लगभग 296.6 करोड़ रुपए को रियल एस्टेट और अन्य परिसंपत्तियों में निवेश के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जाँच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पाया कि जोसेफ डिसूजा, उसके बेटे जोश लॉरेंस डिसूजा और करीबी सहयोगियों ने इन गतिविधियों से जुड़े फंड का इस्तेमाल करके महंगे जमीन के टुकड़े, कमर्शियल संपत्तियाँ और लग्जरी विला खरीदे थे।
जिसे ED ने अपराध से अर्जित आय (proceeds of crime) के रूप में वर्गीकृत किया, उस पर कार्रवाई के तहत ED ने 12 प्रमुख अचल संपत्तियों को अटैच और फ्रीज किया। इनकी संयुक्त बाजार कीमत 15 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई थी।
इसके बाद इन फंड को कागजी लेनदेन और फर्जी बिलों के जरिए निजी संपत्तियों और ऐशो-आराम वाली जीवनशैली में डायवर्ट किया गया, बजाय इसके कि इनका इस्तेमाल उन लाभार्थियों के लिए किया जाता, जिनके लिए ये फंड जुटाए गए थे।
राजनीतिक संबंध, भारतीय लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम और कॉन्ग्रेस के साथ वैचारिक तालमेल
जोसेफ डिसूजा के आलोचकों का कहना है कि उसका प्रभाव मजहबी गतिविधियों से आगे तक फैला हुआ है और उसने भारत के राजनीतिक तथा मीडिया इकोसिस्टम के कुछ हिस्सों के साथ करीबी संबंध बनाए रखे हैं।
उसका दावा है कि जब भी वित्तीय आरोपों से जुड़ी कानूनी कार्रवाई तेज होती है, तो राजनीतिक समर्थन तंत्र ऐसी कार्रवाइयों को राजनीतिक या वैचारिक रूप से प्रेरित बताने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। जोसेफ डिसूजा का वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेतृत्व के साथ संबंध कई वर्षों पुराना है।
2004 के आम चुनाव के बाद, जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार चुनाव हार गई और सोनिया गाँधी के नेतृत्व में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) सत्ता में आया, तब डिसूजा ने अमेरिका में चर्च नेटवर्क को पत्र लिखकर इस नतीजे को दैवीय न्याय (Divine Justice) और एक बड़ा चमत्कार बताया था।
उस समय डिसूजा ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल के वैश्विक अध्यक्ष के रूप में काम कर रहा था। ब्रेकिंग इंडिया के अनुसार, इन दावों और संबंधित दस्तावेजों पर किताब के अध्याय 8 में चर्चा की गई है।
इस तरह के राजनीतिक बयान जोसेफ डिसूजा जैसे लोगों से जुड़ी ED और CID की चल रही जाँच को मजहबी उत्पीड़न के मुद्दे के रूप में पेश करने का काम करते हैं, जिससे एक राजनीतिक सुरक्षात्मक नैरेटिव तैयार होता है। हालाँकि यह स्थापित कानूनी निष्कर्ष के बजाय राजनीतिक व्याख्या और अलग-अलग दृष्टिकोणों का मामला है।
मूल रूप से, द वायर ने न केवल एक ऐसे बिशप को मंच दिया, बल्कि बार-बार उनके निराधार आरोपों और खुले झूठ को भी आगे बढ़ाया, जिन्होंने ईसाई उत्पीड़न को लेकर झूठ फैलाते हुए भारत विरोधी और हिंदू विरोधी अभियान चलाया, जिन पर करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप है और जिन्होंने खुद FCRA नियमों का उल्लंघन किया है। यह सब प्रस्तावित FCRA संशोधनों के बारे में झूठ फैलाने के लिए किया गया, जो उसके जैसे घोटालेबाजों पर शिकंजा कसेंगे।
पाकिस्तानी चैनल अब भारत में एक्सेस नहीं हो रहे पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की पाकिस्तान पर कार्रवाई जारी है। भारत ने इसी कड़ी में पाकिस्तान पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ की है। मोदी सरकार ने अब पाकिस्तान के कई यूट्यूब चैनल का प्रसारण भारत में रोक दिया है। इन्हें दिखाने पर भारत में बैन लगा दिया गया है। यह काम गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद किया गया है।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी क्रिकेटरों के यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें शोएब अख्तर समेत 4 क्रिकेटरों के चैनल पर शिकंजा कसा गया है। इन यूट्यूब चैनल पर भारत के खिलाफ भड़काऊ और संवेदनशील सांप्रदायिक सामग्री फैलाने के आरोप हैं।
भारत ने पाकिस्तान के 16 यूट्यूब चैनल को भारत में दिखाने पर रोक लगाई है। अब यह चैनल भारतीय दर्शक यूट्यूब पर एक्सेस नहीं कर सकेंगे। भारत ने डॉन न्यूज, जियो टीवी, ARY न्यूज, SAMAA टीवी, GNN समेत 16 चैनल बंद कर दिए हैं। इनमें से कई न्यूज चैनल हैं और कई पत्रकारों के खुद के चैनल।
On the recommendations of the Ministry of Home Affairs, the Government of India has banned the 16 Pakistani YouTube channels including Dawn News, Samaa TV, Ary News, Geo News for disseminating provocative and communally sensitive content, false and misleading narratives and… pic.twitter.com/AusR1fCkvN
कुछ स्पोर्ट्स चैनल पर भी भारत ने यह पाबंदी लगाई है। इन सबके कुल मिलाकर 63 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इनके दर्शकों में एक बड़ा हिस्सा भारतीय है और इससे यह मोटी कमाई करते हैं। कुछ चैनल्स की 50% से अधिक व्यूअरशिप भारत से आती है।
इसके बावजूद यह चैनल लगातार पाकिस्तानी फ़ौज का प्रोपेगेंडा चलाते हैं। इन पर फर्जी खबरें भी लगातार प्रसारित होती हैं। यह भारतीय सेना के खिलाफ भी झूठी खबरें प्रसारित करते हैं। हालिया पहलगाम हमले को भी इन चैनलों ने झूठा करार देने का प्रयास किया था।
कई मौकों पर इन चैनल के ऊपर भारतीय नेताओं को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ भी की जाती हैं। हालाँकि, अब यह भारत में यूट्यूब पर दिखेंगे ही नहीं।
इन चैनल को यूट्यूब पर सर्च करने पर एक मैसेज प्रसारित हो रहा है। इसमें लिखा है, “राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था से संबंधित सरकार के आदेश के कारण यह कंटेंट वर्तमान में इस देश में उपलब्ध नहीं है।” इन चैनल का कोई भी वीडियो यूट्यूब पर नहीं दिख रहा है।
कुछ ऐसे चैनल भी हैं जिनका नाम इस प्रतिबन्ध वाली लिस्ट में नहीं शामिल है, लेकिन वह भी अब भारत में एक्सेस नहीं हो रहे। इसका एक उदारहण ‘वासे और इफ्फी’ का यूट्यूब चैनल है। यह स्पोर्ट्स को लेकर वीडियो जारी करते थे और भारतीय क्रिकेट प्रशंसक इन्हें बड़ी संख्या में देखते थे।
यूट्यूब चैनल से पहले भारत पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कार्रवाई कर चुका है। यह लगातार भारतीय सेना, सरकार और बाकी मामलों से जुड़ी झूठी खबरें फैलाया करते थे। इसके अलावा भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अटारी वाघा सीमा से होने वाला व्यापार भी बंद कर दिया है।
कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु में YouTuber अजीत भारती पर FIR कर्नाटक के बाद अब तमिलनाडु पुलिस ने YouTuber एवं पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ FIR दर्ज की है। उन पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाया गया है। M सैमुअल द्रवियन MC की शिकायत पर ये केस दर्ज किया गया है, जो चेन्नई ईस्ट में कांग्रेस पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष हैं। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि अजीत भारती ने दावा किया था कि राहुल गाँधी अयोध्या के राम मंदिर को ध्वस्त कर उसकी जगह फिर से बाबरी मस्जिद को खड़ी कर देंगे।
FIR में यूट्यूबर पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने और जनता के बीच घृणा फैलाने के लिए द्वेषपूर्ण भावना के साथ भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप मढ़ा गया है। इसके लिए ‘X’ को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (BNSS) के तहत नोटिस भी जारी किया गया है। सोमवार (15 जुलाई, 2024) को चेन्नई के वेपेरी स्थित सेन्ट्रल क्राइम ब्रांच के साइबर क्राइम पुलिस थाने के इंस्पेक्टर ने इस पर हस्ताक्षर किया। जिस पोस्ट को लेकर ये मामला दर्ज किया गया है, वो 13 जून, 2024 का है।
अजीत भारती के खिलाफ पूर्ववर्ती IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153A (मजहब-भाषा इत्यादि के आधार पर विभिन्न समूहों को लड़ाने के उद्देश्य से काम करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ IPC की धारा-505(1)(b) भी लगाई गई है, जो जनता के बीच डर बनाने के उद्देश्य से कोई बयान जारी करने पर दर्ज की जाती है। ‘X’ से अजीत भारती के हैंडल के संबंध में कई जानकारियाँ माँगी गई हैं, जैसे उनके डिवाइस, लॉगिन-लॉआउट का समय और ईमेल-फोन नंबर।
कर्नाटक कॉन्ग्रेस की धमकी और FIR के बाद अब तमिलनाडु कॉन्ग्रेस @tnpoliceoffl का दुरुपयोग कर रही है। जिस केस में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्थगन का आदेश दे रखा है, उस पर कथित घटना और केस पर स्टे के बाद, वापस दूसरे राज्य में केस करना क्या बताता है?
अजीत भारती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि जिस केस में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्थगन का आदेश दे रखा है, उस पर कथित घटना और केस पर स्टे के बाद, वापस दूसरे राज्य में केस करना क्या बताता है? बता दें कि कर्नाटक सरकार ने उनके NCR स्थित फ़्लैट के पास अपने कुछ पुलिसकर्मी भेजे थे। बाद में यूपी पुलिस इन पुलिसकर्मियों को ले गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने अजीत भारती को राहत दी थी। अब तमिलनाडु में केस हुआ है, जहाँ DMK अध्यक्ष MK स्टालिन मुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस सत्ता में साझीदार है।
स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी पर एकतरफा जानकारी देने के आरोप लगाए हैं (साभार: ANI & Opindia english)
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बताया है कि यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो के बाद उन्हें रेप-हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी ने बिना उनका पक्ष लिए एकतरफा वीडियो बना दिया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है।
स्वाति मालीवाल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख बताया है कि उनका पहले ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चरित्र हनन किया और उनके पीड़ित होते हुए भी उन्हीं को दोषी ठहराया। इसके बाद जब यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस पर वीडियो बनाया तो उनको हत्या और रेप की धमकियाँ मिलने लगीं।
स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्होंने ध्रुव राठी को अपना पक्ष बताने के लिए कॉल और मैसेज किए लेकिन राठी ने उनका पक्ष बिना जाने ही वीडियो बना दी। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी को इस बात पर शर्मिन्दा होना चाहिए कि वह AAP के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं और पीड़ित पर ही प्रश्न उठा रहे हैं।
After the leaders and volunteers of my party i.e. AAP orchestrated a campaign of charachter assassination, victim shaming and fanning of emotions against me, I have been getting rape and death threats.
स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी से उनके वीडियो में कई जानकारियाँ ना देने को लेकर कई प्रश्न भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर जब AAP ने एक दिन उनके साथ बदसलूकी की बात मान ली थी तो आखिर बाद में उस स्टैंड से यू टर्न क्यों ले लिया। मालीवाल ने ध्रुव राठी से पूछा कि आखिर उन्होंने अपनी वीडियो में उनकी मेडिकल रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं किया। उन्होंने जानबूझ कर छोटा वीडियो रिलीज किए जाए और विभव कुमार के फोन फॉर्मेट होने को लेकर प्रश्न पूछे।
स्वाति मालीवाल ने कहा कि ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में यह नहीं बताया कि विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास से गिरफ्तार किया गया, उन्हें घटनास्थल पर सबूत मिटाने का मौक़ा क्यों दिया गया। मालीवाल ने भाजपा के लिए काम करने के आरोपों पर कहा कि वह महिलाओं के लिए काम करती रही हैं, आखिर वह भाजपा द्वारा कैसे खरीदी जा सकती हैं।
स्वाति मालीवाल ने उनको भेजी गईं रेप और हत्या की धमकियों के स्क्रीनशॉट भी डाले और कहा कि वह इस मामले को दिल्ली पुलिस के पास लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो जिस व्यक्ति ने इसे चालू किया है, वह इसका जिम्मेदार होगा।
13 मई, 2024 को दिल्ली CM आवास में स्वाति मालीवाल के साथ अरविन्द केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने मारपीट की थी और उनको अभद्र गालियाँ दी थी। इस मामले में स्वाति मालीवाल ने FIR दर्ज करवाई थी जिसके बाद विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में विभव कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस ने एक SIT बनाई है, जो इसमें आगे कार्रवाई कर रही है।
अजीत अंजुम अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ YouTube पर प्रोपेगंडा फैलाने के लिए जाने जाते हैं। वो उस गिरोह का हिस्सा हैं, जो पीएम मोदी को ‘तानाशाह’ बता कर अपनी प्रासंगिता बनाए रखने की चेष्टा करता रहता है। हालाँकि, जब इस गिरोह के लोगों का खुद सवालों से सामने होता है तो वो भाग निकलते हैं। अजीत अंजुम से जब किसी पत्रकार ने सवाल पूछा तो उन्होंने उस पर ही जेल में बंद आसाराम से पैसे लेने का आरोप लगा दिया।
ये वह दौर था जब सारा मीडिया कांग्रेस/यूपीए के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं कर पता था, तत्कालीन सरकार के इशारे पर सारा मीडिया नचा करता था। आज तो जिसे देखो गोदी मीडिया कह सकता है, लेकिन उस समय सब भीगी बिल्ली बने रहते थे। जिसका फायदा मीडिया भी अपनी TRP बढ़ाने के लिए उल्टे-सीधे स्टिंग ऑपरेशन करते रहते थे।
याद करिये, दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका की होती दुर्गति। बेचारी इतना ज्यादा बेइज्जत हुई थी कि निर्दोष साबित होने के बावजूद नौकरी पर वापस करने की हिम्मत नहीं कर पायी। कौन महिला पब्लिक द्वारा बुरी तरह पीटते कपडे चिथड़े कर दिए जाएँ, लेकिन वही बेशर्म पत्रकार आज भी बहुत निर्भीक पत्रकार बन टीवी पर आता है। काश, ऐसा उसके परिवार की किसी महिला के साथ हुआ होता। कहाँ सो गया था मानव अधिकार और महिला आयोग?
उन्होंने सवाल पूछने वाले पत्रकार को ‘आसाराम का चेला’ बता दिया। बदले में पत्रकारों ने भी उनसे पूछा कि उन्हें कितने पैसे मिले थे? एक पत्रकार ने पूछा, “आपको कितने पैसे मिले थे लड़की को बदनाम करने के लिए?” इस दौरान अजीत अंजुम पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए लगातार उँगली बता-बता कर कुछ कुछ उलटा-सीधा बोलते रहे। इसके बाद वो कार में बैठ गए और ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। इस तरह बार-बार पीएम मोदी से सवालों के जवाब की अपेक्षा रखने वाले अजीत अंजुम खुद एक सवाल से भाग खड़े हुए।
एक तरह से 2-4 पत्रकारों ने मिल कर अजीत अंजुम को वास्तविकता का भान करा दिया। ये वीडियो कब का है, ये अभी तक सामने नहीं आया है। हालाँकि, ऐसा लग रहा है जैसे ये हाल का ही वीडियो है। एक ट्विटर यूजर ने तो दावा कर दिया कि अजीत अंजुम को चिकेन-पकौड़ा की दुकान से खदेड़ दिया गया। असल में अजीत अंजुम का एक अपुष्ट ट्वीट वायरल होता है जिसमें उन्होंने योगी आदित्यनाथ के दोबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद पत्रकारिता छोड़ चिकेन-पकौड़ा का दुकान खोलने की बात कही थी।
अजीत अंजुम को उसकी चिकन पकौड़ी दुकान से मार-मार के भागने की मैं कड़ी निंदा करता हूँ 😂😂 pic.twitter.com/b8eKaz75Ua
हालाँकि, अजीत अंजुम दावा करते हैं कि उन्होंने कभी इस तरह का ट्वीट किया ही नहीं। लोगों ने उनके ताज़ा वीडियो को ‘पकौड़ी माफिया पर जनता की स्ट्राइक’ कह कर भी चलाया। 2020 में भी एक वीडियो सामने आया था, जिसके आधार पर दावा किया गया था कि किसान आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने अजीत अंजुम की पिटाई की। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा मतदान के दौरान उन्होंने एक महिला से जबरन अपने सवाल का जवाब लेना चाहा, जिसके बाद लोगों ने उन्हें खदेड़ा था।
अभी बहुत समय नहीं हुआ है मुझे Youtube पर अपने video(s) को पोस्ट करते हुए। मैंने अभी तक केवल 16 वीडियो पोस्ट किए हैं लेकिन यह देख रहा हूं कि कुछ TRP जैसा गड़बड़झाला हो रहा है Youtube पर।
लेखक
Youtube से पैसे का भुगतान Views के आधार पर होता है और ऐसा कहते हैं कि एक वर्ष में 4000 घंटे समय के Views और 1000 subscribers होने पर ही भुगतान होता है। अभी तक तो मुझे पैसे के भुगतान की नौबत भी नहीं आई है लेकिन मेरे हर video में Views की संख्या घटा दी जाती है जबकि views बहुत ज्यादा भी नहीं होते - अभी तो लोगों से मैं subscribe करने के लिए अनुरोध ही कर रहा हूं लेकिन फिर भी subscribers अभी तक केवल 391 ही हुए हैं।
वीडियो -16 मैंने 20 दिसंबर को पोस्ट किया था जिसके लिए views की संख्या किस तरह घटाई गई है वह मैं नीचे दे रहा हूं। तारीख, समय और views की संख्या देखिए:
20/12/2023 (10.57 PM) - 240
20/12/2023 (12. 44 PM) - 272
20/12/2023 (04.24 PM) - 286
20/12/2023 (09.15 PM) - 328
20/12/2023 (11.17 PM) - 261 (20% कम कर दिए)
21/12/2023 (06. 29 AM) - 291
21/12/2023 (01. 06 PM) - 304
21/12/2023 (05. 08 PM) - 310
21/12/2023 (10.09 PM) - 255 (18% कम कर दिए)
22/12/2023 (12.13 AM) - 256
22/12/2023 (08.37 AM) - 264
22/12/2023 (06.20 PM) - 270
22/12/2023 (11.01 PM) - 254 (6% कम कर दिए)
23/12/2023 (12.18 PM) - 257
23/12/2023 (07. 04 PM) - 258
एक बार जो व्यक्ति View कर चुका है उसे हटाने का क्या मतलब है लेकिन यह हो रहा है और इसी से कुछ गड़बड़झाला नज़र आता है। कोई Like करके Like हटा सकता है जिसकी वजह से Likes की संख्या तो कम हो सकती है लेकिन Views की संख्या कम नहीं हो सकती।
दूसरी तरफ रवीश कुमार जैसे Youtube पर बैठे लोगों के videos के Views की संख्या 10 लाख से 45 लाख तक मिल जाएगी जो अपने आप में अकल्पनीय लगती है। यदि उसके views की संख्या 20% कम कर दी जाए तो उसे सीधा 35 से 40 हज़ार रुपए का फटका लग सकता है।
Youtube को मैंने एक video के Views कम करने पर शिकायत भी भेजी थी लेकिन चाहे Youtube हो, X हो, google हो ये सब automated reply भेज देते हैं लेकिन कभी किसी के Grievance पर ध्यान नहीं देते।
लाखों की संख्या में Views आने में TRP जैसा घोटाला होने की पूरी सम्भावना बनती है - कौन जाने क्या हो रहा है।
साभार जैसे-जैसे soft ware टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है, ज्यों-ज्यों यह फेसबुक पर मित्र बन मासूम और बेगुनाह लोगों को ब्लैकमेल भी कर अपमानित किया जा रहा है, जिसके पीछे शंका है कोई गैंग काम कर रहा है, जिसकी गंभीर जाँच ही सच्चाई सामने ला सकती है। फेसबुक पर कोई अध्यापक, अध्यापिका, ब्यूटी पार्लर, ग्रहणी एवं सम्मानित सुशोभित बन मित्र तो बनाते हैं, लेकिन मैसेंजर बॉक्स में एक-दो दिन बाद ही उनकी अश्लीलता उजागर होने लगती है। पहले सामने वाले को उकसाया जाता है, पोर्न वीडियो दिखाई जाती है, पोर्न दिखाते वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू।
व्हाट्सअप DP पर नाम कुछ, लेकिन धन किसी अन्य नाम में , क्या यह Youtube चैनल का आधिकारिक DP है?
20, 000 से 50, 000 रूपए तक की मांग की जाती है, पूरा नहीं करने पर यूट्यूब, X (ट्विटर), इंस्टाग्राम अथवा टेलीग्राम पर डालने की धमकी दी जाती है। इस धमकी का भी असर न होने पर साइबर क्राइम, पुलिस एवं यूट्यूब के तथाकथित अधिकारी के रूप में धमकाने का काम करते हैं। ऐसे में ज्वलंत प्रश्न यह है कि 'क्या यूट्यूब किसी ऐसे अश्लील वीडियो के वायरल न होने के पैसे लेता है?' अगर लेता भी है तो यूट्यूब राशि कंपनी के नाम पर लेने की बजाए किसी व्यक्तिगत नाम में लेने की आज्ञा देता है, क्यों?
दूसरे, एक बेकसूर को अपराधी बनाने से पूर्व उस तथाकथित साइबर क्राइम अधिकारी को इस बात की जाँच करनी थी कि:-
1. क्या अश्लील वीडियो के लिए सामने वाले ने बोला था?;
2. ये अश्लील वीडियो क्या तुम्हारी अपनी है?
3. यदि नहीं, फिर कौनसी पोर्न साइड से ली?
4. अश्लील वीडियो को सामने वाले को वीडियो कॉल कर दिखाई क्यों?
5 . अगर दिखाई भी तो सामने वाले को दिखाते वीडियो क्यों बनाई?
6 . अगर बनाई तो सामने वाले को क्यों ब्लैकमेल किया जा रहा है? आदि आदि
ऐसी स्थिति में इस बात की भी जाँच होनी चाहिए कि मैसेंजर बॉक्स की भी जाँच होनी चाहिए कि पोर्न वीडियो किसने डाली और क्यों? क्या सामने वाले/वाली ने बोला था? क्या वह पोर्न वीडियो उस महिला की है अथवा किसी अन्य पोर्न साइड से ली है? इस तरह की अश्लील वीडियो डालने के लिए उकसाने वाले के विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। अश्लील वीडियो के नाम पर ब्लैकमेल करने अथवा करने वाली के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के साथ-साथ उस गैंग सम्मिलित लोगों को भी बक्शा नहीं जाना चाहिए।
ऐसा नहीं सभी ऐसी अथवा ऐसी होती हैं। कई तो इतने सभ्य तरीके से बातचीत करते हैं कि सामने वाला अपने सब दुःख/चिंताओं को भूल जाता है। कहावत है, एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है, ठीक वही स्थिति मैसेंजर बॉक्स की हो रही है।
नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने बीते कुछ वर्षों में आईटी नियमों के अंतर्गत काफी सख्ती दिखाई है। सरकार ने 18 अगस्त को आईटी नियम 2021 के तहत सात भारतीय और एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को बैन (YouTube Channels Ban) कर दिया। इन चैनलों द्वारा फेक न्यूज और भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाया जाता था।
मोदी सरकार ने फेक न्यूज़ फ़ैलाने वाले चैनलों को तो बैन कर दिया, लेकिन उन पत्रकारों और नेताओं पर सख्ती कब होगी, जिनकी भ्रमक हरकतों/बयानबाज़ी की वजह से लाल किला जैसा हादसा और साम्प्रदायिक दंगे होते हैं? उन इतिहासकारों पर कब कार्यवाही होगी, जिन्होंने चंद चांदी के टुकड़ों के लालच में भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल कर मुग़ल आक्रांताओं को महान बताकर पढ़ाया? उन नेताओं और पार्टियों पर कब कार्यवाही होगी, जो घुसपैठियों के आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी आदि बनवाकर भारतीय नागरिक साबित करते हैं?उन नेताओं और पार्टियों पर कब कार्यवाही होगी, जो काला धन विदेशों में रखते हैं?
खैर, जिन यूट्यूब चैनलों को प्रतिबंधित किया गया है उनके नाम हैं- लोकतंत्र टीवी, यू एंड वी टीवी, एएम रजवी, गौरवशाली पवन मिथिलांचल, SeeTop5TH, सरकारी अपडेट, सब कुछ देखो। जिस पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को बैन किया गया है, उसका नाम है ‘न्यूज़ की दुनिया’।
फेक और देश विरोधी कंटेंट से कर रहे थे जमकर कमाई
फेक न्यूज फैलाने वाले ये सारे चैनल यूट्यूब द्वारा मॉनिटाइज किए जा चुके थे। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि फेक न्यूज और भारत विरोधी प्रोपेगैंडा फैलाकर कर ये यूट्यूब चैनल पैसा कमा रहे थे। इन कुल चैनलों कुल व्यूअरशिप 144 करोड़ और सब्सक्राइबर 85.73 लाख थे।
हालाँकि, भारत सरकार ने फेक न्यूज फैलाने वाले इन 8 चैनल्स पर बैन लगा दिया है, लेकिन इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को इन चैनल्स से कंटेंट हटाने में कुछ घण्टों का समय लगता है। ऐसे में हमने बिना देरी किए इन सभी चैनल्स की जानकारी जुटाई है।
सबसे पहले बात करते हैं लोकतंत्र टीवी की। इसके यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज, दोनों को भारत सरकार ने बैन कर दिया गया है। इस चैनल के 12.9 लाख सब्सक्राइबर हैं।
सोर्स: यूट्यूब
इस चैनल के एक वीडियो का टाइटल है, ‘गाय मांस में टॉप करने वाला भारत को बड़ा झटका…’। इस टाइटल ही गलफहमी पैदा करने वाला है, जबकि सच्चाई ये है कि भारत गोमांस का निर्यात करता ही नहीं है। हालाँकि यह सच है कि भारत बीफ के टॉप निर्यातकों में से एक है, लेकिन इसमें भैंस का मांस होता है न कि गाय का।
भारत सरकार द्वारा बैन किया गया अगला चैनल यू एंड वी टीवी है, जिसके 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल का सबसे लोकप्रिय वीडियो तीन साल पुराना था, जिसे 14 लाख बार देखा गया था।
18 अगस्त को अपलोड किए गए नवीनतम वीडियो का टाइटल था ‘गडकरी और शिवराज भाजपा से किए गए बाहर’। यह फर्जी खबर है। वास्तव में, इस चैनल द्वारा हर दिन इसी तरह की फर्जी और फेक खबरें अपलोड की जा रही थीं।
अगला चैनल एएम रज़वी है, जिसके यूट्यूब पर 95,900 सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल को यूट्यूबर AM Razvi चलाता था। चैनल पर सबसे लोकप्रिय वीडियो में स्क्रिप्टेड और फेक खबरें हैं।
अपनी प्रेस विज्ञप्ति में भारत सरकार ने इस चैनल का एक स्क्रीनशॉट साझा किया है जिसमें लिखा था, “अजमेर शरीफ दरगाह को बचाना हुआ मुश्किल, भगवाधारियों का दरगाह पर हमला”। यही नहीं इस वीडियो के थंबनेल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर है, जिसकी बैकग्राउंड में एक बुलडोजर भी दिखाई गई है। यह पूरी तरह से फेक खबर है और यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि सीएम योगी दरगाह को गिराना चाहते थे।
इस लिस्ट में अगला चैनल गौरवशाली पवन मिथिलांचल है, जिसके सात लाख सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल के सबसे पॉपुलर वीडियो को 57 लाख लोगों ने देखा था। इस चैनल को यूट्यूब द्वारा वेरीफाई किया गया है, जो कि सबसे अधिक आश्चर्यजनक बात है। इस चैनल में अधिकांश वीडियो फेक थे।
अगला चैनल SeeTop5TH है, जिसके 33.5 लाख सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल ने एक वीडियो में दावा किया है कि बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रेखा ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इस वीडियो में यह दावा किया गया कि रेखा ने कहा था, “बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने की साजिश रचने वालों को अल्लाह कभी माफ नहीं करेगा।”
अपनी प्रेस विज्ञप्ति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक स्क्रीनशॉट जोड़ा है। इसमें वीडियो का टाइटल था, ‘मोदी सरकार का अजमेर दरगाह पर ऐलान, हटाई जाएगी ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह’।
सभी चित्र साभार सोर्स: यूट्यूब
इन चैनल्स के अलावा तीन और चैनल- ‘सब कुछ देखो’, ‘सरकार अपडेट’ और ‘न्यूज की दुनिया’ (पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल) को भारत सरकार द्वारा बैन किया गया है। ये तीनों चैनल भी लाखों व्यूज वाले थे। सीधे तौर पर ये चैनल फेक खबर फैलाकर लाखों लोगों की मानसिकता को बदलने की कोशिश रहे थे।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने दिसंबर 2021 से अब तक 102 से अधिक यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके अकाउंट को फेक और भारत विरोधी कंटेंट शेयर करने के कारण बैन किया है। इसके अलावा, भारत सरकार ने भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल सौ से अधिक चीनी ऐप्स पर भी बैन लगाया है।
गूगल को लेनी चाहिए जिम्मेदारी
यदि देखा जाए तो भारत सरकार द्वारा हाल ही में बैन किए गए सभी चैनल्स का मॉनिटाइजेशन हो चुका था। इसका मतलब यह है कि इन सभी चैनल्स के वीडियोज पर विज्ञापन दिखाए जा रहे थे और वीडियो बनाने वाले लोग इससे पैसे कमा रहे थे।
गूगल दावा करता है कि उसके पास किसी भी यूट्यूब चैनल को मॉनिटाइज करने के लिए एक सख्त पॉलिसी है। सीधे शब्दों में कहें तो यदि किसी को यूट्यूब से पैसा कमाना है तो उसके लिए गूगल के पास कड़ा कानून है। इसमें, सबसे बड़ी बात यह है कि फेक खबर को लेकर गूगल या यूट्यूब की नीति स्पष्ट नहीं है। अक्सर यह देखा जाता है कि जब तक बड़े पैमाने पर लोगों द्वारा चैनल या वीडियो को जब तक रिपोर्ट नहीं किया जाता, तब तक उसे नहीं हटाया जाता है।
मॉनिटाइजेशन की बात करें यानी यूट्यूब की कमाई की बात करें तो जब किसी वीडियो पर कोई विज्ञापन दिखाई देता है तो वीडियो बनाने वाले और यूट्यूब दोनों ही पैसा कमाते हैं। यूट्यूब विज्ञापनों से होने वाली आय का औसतन 55% तक वीडियो बनाने वाले को देता है।
ये चैनल सिर्फ भारत में बैन हुए हैं। यदि कोई व्यक्ति VPN के जरिए इन चैनल को देखना चाहे या भारत से बाहर का कोई व्यक्ति देखना चाहे तो उसे देख सकता है। इसे देखने में उसे कोई परेशानी नहीं होगी।