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बिहार : कांग्रेस की मोहब्बत की दुकान में दे-दनादन ; पूर्व MLC अजय सिंह घायल, सुनील सिंह का फटा सिर

                                            कांग्रेस ऑफिस में दो गुटों में हिंसक भिड़ंत (साभार पत्रिका) 
बिहार के भोजपुर जिले में गुरुवार(10 जुलाई 2025) को कांग्रेस पार्टी के दो गुटों में भयंकर मारपीट हुई। यह हंगामा कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान हुआ। इस मारपीट में पार्टी के नेता शिवकुमार सिंह के बेटे और कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता सुनील कुमार सिंह का सिर भी फट गया है।

भोजपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और छत्तीसगढ़ के भिलाई विधानसभा के विधायक देवेंद्र यादव के आगमन पर आयोजित अभिनंदन एवं स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसी बीच दो गुटों ने आपस में मारपीट शुरु कर दी। इसी दौरान दो गुटों के बीच मारपीट होने लगी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ है।

इसमें कार्यकर्ता एक-दूसरे पर लात-घूसे चलाते दिखाई दे रहें हैं। हमले में गंभीर रुप से घायल सुनील कुमार ने बताया कि वे बीच-बचाव कर रहे थे। इस दौरान करीब 10 लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और गाली-गलौज करते हुए उनके सिर पर ईंट से हमला कर दिया। नवादा थानाध्यक्ष विपिन बिहारी ने बताया कि आवेदन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक चल रही थी। इसी दौरान दोनों गुटों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। मारपीट में सुनील कुमार सिंह का सिर फट गया, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद पूर्व एमएलसी अजय सिंह अपने घायल समर्थक के साथ नवादा थाना पहुंचे और आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की। इस घटना ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

मेरठ में ईद की नमाज के बाद आपस में भिड़ी मुस्लिम जमात, पहले लाठी-डंडे चले, फिर फायरिंग भी: 5 गिरफ्तार, Video


उत्तर प्रदेश के मेरठ में सिवालखास कस्बे में ईद की नमाज़ के बाद मुस्लिम समाज के दो पक्षों के बीच मारपीट हुई। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर डंडे से हमला किया, फिर पथराव हुआ और बीच में फायरिंग की आवाज भी सुनाई पड़ी। पूरी घटना में कई लोग घायल हो गए, कुछ के तो खून तक निकल आया। हिंसा की वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

घटना की सूचना पर जानी थाना समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची और मामला शांत कराया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि घायलों को मारपीट में मामूली चोटें आई हैं। गंभीर स्थिति नहीं है। पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर ले ली है। मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

SP देहात राकेश कुमार ने बताया कि रविवार (30 मार्च 2025) को सिवालखास निवासी जाहिद का बाज़ार में नाजिम से कहासुनी हुई थी। उस समय तो मामला संभल गया। सोमवार को ईद की नमाज के बाद रास्ते में दोनों का आमना-सामना हो गया। दोनों तरफ से भारी संख्या में लोगों ने एक दूसरे पर पथराव किया। फायरिंग भी हुई। हालाँकि अभी तक किसी को गोली लगने की सूचना नहीं है।

मध्य प्रदेश : ‘गाड़ न दिया तो अपने बाप की बेटी नहीं’: मधु शर्मा, महामंत्री, महिला कांग्रेस की अलका लांबा को चुनौती, लाम्बा ने कहा था, ‘जूते मार बाहर करो’; कहा- यह ब्राह्मणों का अपमान

     मधु शर्मा (बाएँ) और अलका लांबा (दाएँ) में बहस हो गई (चित्र साभार: Daily Mail & @NarendraSaluja/X)
मध्य प्रदेश में महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में हंगामा हो गया। यह बैठक महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ले रहीं थी। इस बैठक में प्रदेश की महामंत्री मधु शर्मा को अलका लांबा ने जूते मारकर बाहर निकालने की बात की। इसके बाद मधु शर्मा बैठक से बाहर चली आईं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बैठक भोपाल में मंगलवार (16 जुलाई, 2024) को हो रही थी। इसमें महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों को बुलाया गया था। बैठक में 50 से अधिक पदाधिकारियों को शामिल होना था लेकिन यहाँ मात्र 19 पदाधिकारी ही पहुँचे थे।

बैठक में सिंगरौली की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री मधु शर्मा भी मौजूद थीं। उन्होंने यहाँ बैठक के लिए बनाई गई सूची पर आपत्ति जताई। शर्मा ने प्रश्न उठाया कि उनका इस सूची में नाम नहीं है। इस पर अलका लांबा ने उनके साथ बहस चालू कर दी।

अलका लांबा ने मधु शर्मा को तुरंत बैठक से बाहर निकलने को कह दिया। इस पर मधु शर्मा ने उन्हें जवाब दिया कि उनकी नियुक्ति अलका लांबा ने ही की और नियुक्ति पत्र भी दिया है। मधु शर्मा के इस जवाब पर अलका लांबा ने बता दिया कि मध्य प्रदेश में कई नियुक्तियाँ फर्जी हैं।

मधु शर्मा इस पर भड़क गईं और पूछा कि क्या पदाधिकारियों को बैठक में जूते खाने बुलाया गया है। अलका लांबा इसके बाद अभद्रता पर उतर आईं और कहा कि मधु शर्मा जूते खाने लायक हैं और उन्हें जूते मारकर बाहर निकाल दिया जाए। मधु शर्मा ने इस पर उन्हें चुनौती दे डाली कि उन्हें बैठक से कोई नहीं निकाल सकता। मधु शर्मा ने कहा कि अगर अलका लांबा अपने बाप की बेटी हैं तो उन्हें बैठक से निकाल कर दिखाएँ। मधु शर्मा ने कहा कि अगर ऐसा होगा तो अलका लांबा को जमीन में गाड़ देंगी, ऐसा नहीं किया तो अपने बाप की बेटी नहीं।

मधु शर्मा ने इसे ब्राम्हण और विंध्य क्षेत्र का अपमान बताया। मधु शर्मा ने कहा कि वह पिछले 4 दशक से कांग्रेस में हैं जबकि अलका लांबा कुछ समय पहले ही पार्टी में आई है। उन्होंने कहा कि लांबा पहले AAP में रह चुकी हैं। मधु शर्मा ने कहा कि अलका लांबा अव्यावहारिक महिला हैं। अलका अपने अभद्र रवैये के लिए शुरू से बदनाम हैं। इस मामले में अलका लांबा की तरफ से कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।

‘ये एक ऐसा इलाज जो बीमारी से भी बदतर’: फेसबुक पर सेंसरशिप लगाने के लिए पहुँचे रोहिंग्या को हाईकोर्ट का दो टूक जवाब "नहीं"

यह केवल भारत में ही संभव है, जहां रोहिंग्या और घुसपैठियों को तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां तो अपनी कुर्सी और रोजी-रोटी की खातिर समर्थन करती हैं, शाहीन बाग बनाते हैं, लेकिन वकीलों को तो ऐसी कोई समस्या नहीं। जिन रोहिंग्यों को कोई मुस्लिम देश रखने को तैयार नहीं, फिर भारत में इनके समर्थन में खड़े होने वालों को क्या संज्ञा दी जाए? 
दिल्ली हाईकोर्ट में 2 रोहिंग्या मुस्लिमों ने याचिका दायर की थी कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं से नफरत दिखाने वाले वीडियो और कंटेंट के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाया जाए, क्योंकि फेसबुक इसको बढ़ावा देकर पैसे कमाता है। इसके लिए कोर्ट आदेश दे कि ऐसे कंटेंट को प्रसारित करने की अनुमति न दी जाए। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण को बढ़ावा दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि फेसबुक को इस नफरत भरे भाषण को हटाने और रोहिंग्या समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में कहा गया था कि फेसबुक पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण के कई उदाहरण हैं। इनमें रोहिंग्याओं को ‘आतंकवादी’, ‘घुसपैठिए’ और ‘भारतीयों के लिए खतरा’ कहा गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के भाषण रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे सकते हैं। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की।

‘लाइव लॉ’ की खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि यह सुझाव कि फेसबुक पर रोहिंग्याओं पर किसी भी कंटेंट के पब्लिश होने से पहले सेंसरशिप होनी चाहिए, ये ‘एक ऐसे उपचार का उदाहरण है जो बीमारी से भी बदतर है।’ इसके साथ ही हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फेसबुक इंडिया को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ ‘घृणित और हानिकारक सामग्री’ को बढ़ावा देने से रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा, ‘आईटी नियम, 2021 के अनुसार सभी लोगों के पास किसी भी शिकायत की अनुमति है, इसके अनुसार सरकार कार्रवाई करती है। लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कंटेंट के प्रकाशित होने से पहले ही रोक लगाने की माँग की है, जो नियमों के अनुसार गलत है। ये तो किसी बीमारी से भी बदतर उसके इलाज जैसी बात है।” कोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी शक्ति मिल जाने से समस्याएँ ही बढ़ेंगी।

इसी के साथ हाईकोर्ट ने फेसबुक के खिलाफ 2 रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद हमीम और कौसर मोहम्मद की याचिका का निपटान कर दिया। इसमें फेसबुक के एल्गोरिदम की शिकायत करते हुए कहा गया था कि फेसबुक पैसा बनाने के लिए रोहिंग्या लोगों के खिलाफ कंटेंट को बढ़ावा देता है। लेकिन, कोर्ट ने कहा कि फेसबुक के खिलाफ माँगी गई राहतें बरकरार रखने योग्य नहीं हैं, क्योंकि रिट याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि अधिकारी आईटी नियम 2021 के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का पालन करने में विफल रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि फेसबुक एक बड़ी सोशल मीडिया कंपनी है। इसकी पहुँच दुनिया भर में है। ऐसे में, फेसबुक पर नफरत फैलाने वाले भाषण का असर भी बहुत बड़ा होता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फेसबुक को नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

वहीं, फेसबुक का कहना है कि उनकी कंपनी नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी के पास नफरत फैलाने वाले भाषण को पहचानने और हटाने के लिए तकनीक है। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि यह पूरी तरह से नफरत फैलाने वाले भाषण को रोकना संभव नहीं है। फेसबुक ने यह कहते हुए याचिका खारिज करने की माँग की थि कि इसमें इस बात का कोई संदर्भ नहीं दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा लगाए गए दिशानिर्देश कैसे अप्रभावी हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता ने एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दिया।

Pak क्रिकेटर आसिफ अली पर लगेगा आजीवन बैन?; पाकिस्तानियों ने उकसाया, अफगानिस्तानी फैंस ने दम भर मार कर जीत लिया ‘मैच’

                       Pak क्रिकेटर आसिफ अली का पागलपन और भिड़ गए पाकिस्तान-अफगानिस्तान के फैंस
पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान के बीच 7 सितंबर 2022) को खेले गए एशिया कप 2022 (Asia Cup) मैच में दोनों देशों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए। नौबत यहाँ तक आ गई कि अंपायर्स और अन्य खिलाड़ियों को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा।

यह हंगामा 130 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही पाकिस्तानी टीम की पारी के 19वें ओवर की 5वीं गेंद पर हुआ। इस ओवर की चौथी गेंद पर आसिफ अली ने छक्का जड़ दिया। इसके बाद अगली ही गेंद पर फरीद अहमद ने आसिफ अली को आउट कर दिया। पवेलियन लौटने से पहले फरीद और आसिफ के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान के आसिफ अफगानिस्तान के फरीद पर हाथ उठाते दिखे। इसके बाद उन्होंने पवेलियन लौटते वक्त उन्हें अपना बल्ला भी दिखाया। ऐसे में फरीद अहमद उनसे सीना जोरी करने लगे तो अफगानिस्तान के अन्य खिलाड़ियों ने बीच बचाव किया और अंपायर को भी लड़ाई के बीच आना पड़ा।

अफगानिस्तान टीम के इंटरनेशनल क्रिकेट खिलाड़ी आफताब आलम ने आईसीसी को लिखा है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर आसिफ अली को हमेशा के लिए बैन किया जाए। आफताब आलम के अनुसार बैट उठा कर विरोधी टीम के खिलाड़ी को मारने की धमकी देने जैसा काम आसिफ अली ने एक नहीं बल्कि दो बार किया है, इसलिए उन्हें आजीवन बैन कर दिया जाना चाहिए।

जब खिलाड़ियों की लड़ाई थम गई तो मैच खत्म होने के बाद दोनों देशों के फैंस स्टेडियम में भिड़ गए। इस घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जीत के बाद पाकिस्तान के फैंस स्टेडियम में लगी कुर्सियाँ उखाड़कर फेंक रहे थे, अफगानियों को चिढ़ा रहे थे।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ऐसी खबरें आ रही हैं कि पाकिस्तानी फैंस ने बहस के बाद शारजाह में अफगान के प्रशंसकों पर हमला किया। इसके जवाब में अफगानिस्तान के फैंस ने पाकिस्तानी प्रशंसकों को बेरहमी से पीटा।”

ट्विटर पर एक यूजर ने इस घटना पर मजे लेते हुए लिखा, “मैच के बाद अफगानिस्तान जीता।”

एक और यूजर ने लिखा, “यह पाकिस्तान के प्रशंसक थे, जिन्होंने स्टेडियम में लगी कुर्सियाँ उखाड़ कर नुकसान किया।”

क्रिकेट और अफगानी-पाकिस्तानी फैंस की लड़ाई

साल 2019 की बात है। आईसीसी का वर्ल्ड कप चल रहा था। जगह था इंग्लैंड का लीड्स। तभी एक प्लेन स्टेडियम के ऊपर से गुजरा। उस पर एक स्लोगन लिखा हुआ था – ‘जस्टिस फॉर बलूचिस्तान (Justice for Balochistan)’।
इसके बाद स्टेडियम के बाहर अफगानी और पाकिस्तानी फैंस के बीच जम कर लड़ाई हुई थी। दोनों देशों के समर्थकों के बीच लड़ाई न तब चौंकाने वाली बात थी, न अब। पाकिस्तान समर्थक आतंक से अफगानिस्तान जूझता रहा है। इसी कारण से जब लोग आमने-सामने होते हैं तो ऐसे वाकये देखने को मिलते हैं।
एशिया कप के दूसरे राउंड यानी सुपर फोर के चौथे मुकाबले में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 1 विकेट से हरा दिया है। इस हार के साथ अफगानिस्तान के साथ-साथ भारत की भी फाइनल में पहुँचने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं।