Showing posts with label #Cow. Show all posts
Showing posts with label #Cow. Show all posts

सड़कों पर की कुर्बानी तो सीधे FIR, उत्तर प्रदेश-बंगाल के बाद अब दिल्ली में बकरीद के लिए जारी सख्त गाइडलाइंस: गाय-बछड़ा-ऊँट काटने पर बैन


उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बकरीद पर कुर्बानी के नियमों के बाद अब दिल्ली में भी कुर्बानी के नियमों को लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार (22 मई 2026) को X पर एक पोस्ट में लिखा, “बकरीद पर गौवंश, गाय, बछड़ा, ऊँट व अन्य प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी पूरी तरह गैरकानूनी है और ऐसा करने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।”

सरकार को प्रतिबंधित जानवरों की बिक्री पर ही रोक लगा देनी चाहिए ताकि जब प्रतिबंधित जानवर बिका ही नहीं फिर कोई इनकी कुर्बानी नहीं दे पायेगा और कानूनी कार्यवाही से बच जाएगा। वरना वही बात होगी सिगरेट और शराब पर लिखा होता है "सेहत के लिए नुकसानदायक" लेकिन धरल्ले से बिक रही है। क्योकि जितनी आय सरकार को इन उत्पादनों से होती है किसी और से नहीं।   

उन्होंने आगे लिखा, “सार्वजनिक स्थलों गली, सड़कों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं है, ऐसा करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुर्बानी के बाद सीवर व नाली या सार्वजनिक स्थलों पर वेस्ट को डालना पूरी तरह प्रतिबंधित है , कुर्बानी सिर्फ वैध स्थलों पर ही की जा सकती है।”

साथ ही, कपिल मिश्रा ने साफ कर दिया है कि अगर कहीं पर इन गाइडलाइंस का उल्लंघन होता है तो लोग पुलिस व दिल्ली सरकार के विकास मंत्रालय को सूचित कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश : अब्बू ने किया गाय का रेप, हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार: बैतूल का मामला


मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दामजीपुरा गाँव में अब्बू नाम के युवक ने गाय के साथ रेप किया। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर आरोपित अब्बू हिरासत में ले लिया है।

इस घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (1 फरवरी 2026) की सुबह करीब 10 बजे से ही गाँव में बवाल शुरू हो गया। वीडियो सामने आते ही आक्रोशित लोगों की भीड़ ने सबसे पहले आरोपित अब्बू की दुकान में आग लगा दी।

इसके बाद पास की अन्य दुकानों में भी तोड़फोड़ की गई और आगजनी की घटनाएँ हुईं। उपद्रव के दौरान टायर पंक्चर, इलेक्ट्रॉनिक, मोबाइल और टेलरिंग जैसी कई दुकानों को नुकसान पहुँचा है। कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया गया। घटना की खबर फैलते ही हिंदू संगठनों में भारी नाराजगी देखी गई और आसपास के जिलों से भी लोग दामजीपुरा पहुँचने लगे।

हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। भैंसदेही, चिचोली और मोहदा थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया है। पुलिस लाइन से अतिरिक्त बल भी भेजे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन गाँव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

क्या दूध भी नॉन-वेज होता है? भारत ने खरीदने से किया इनकार: अमेरिका के साथ क्यों नहीं बन रही बात, ट्रेड डील पर पड़ेगा क्या असर

                                        अमेरिका में गायों की डेयरी फर्म (फाइल फोटो, साभार - रॉयटर्स)
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुँच गया है, लेकिन ऐन मौके पर एक अनचाही समस्या सामने आ गई है। ये है मांसाहारी दूध, जो सौदे की राह में अड़चन बनकर उभरा है।

भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात को यह कह कर खारिज कर दिया है कि उनमें ऐसी गायों का दूध होता है जिन्हें मांसाहारी या पशुओं के अवशेष युक्त आहार खिलाया जाता है। ये भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध है।

नॉन-वेज दूध क्या है?

मांसाहारी दूध से का मतलब उन गायों का दूध और डेयरी उत्पाद है, जिन्हें माँस, खून या चर्बी जैसे पशु-आधारित चारे खिलाए जाते हैं। 2004 में प्रकाशित हुई सिएटल पोस्ट-इंटेलिजेंसर की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में गायों को ऐसा चारा दिया जा सकता है, जिसमें सूअर, मछली, मुर्गी, घोड़े, यहाँ तक कि बिल्ली और कुत्ते के अंग भी शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा, उन्हें सूअर और घोड़े का खून और मवेशियों के अंगों से बनी चर्बी भी खिलाई जा सकती है। हालाँकि गायें स्वभाव से शाकाहारी होती हैं, फिर भी अमेरिकी नियमों के अनुसार, उन्हें जानवरों से बनी चीजें खिलाने की अनुमति होती है। चाहे वे मांस के लिए पाली जा रही हों या दूध के लिए।

भारत में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यहाँ गायों को पौधों पर आधारित आहार ही दिया जाता है और जानवरों या मांस से बनी कोई चीज नहीं खिलाई जाती। इसी वजह से भारत ने अमेरिका से डेयरी उत्पादों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

भारत का इनकार: धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ

वर्ल्ड एटलस की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 38% जनसंख्या शाकाहारी है। यहाँ दूध और घी को पवित्र माना जाता है। ये हिंदू और जैन धर्म में दैनिक पूजा और प्रसाद में इस्तेमाल किए जाते हैं।

इन धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले दूध से बने उत्पाद शुद्ध (सात्विक) होने चाहिए। लेकिन अगर गाय को ऐसा चारा खिलाया गया हो जिसमें जानवरों के अंग, खून या मांस शामिल हों, तो उस गाय से प्राप्त दूध और उससे बने उत्पाद धार्मिक रूप से अशुद्ध और अस्वीकार्य माने जाते हैं।

नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक GTRI के अजय श्रीवास्तव ने एक उदाहरण देते हुए कहा, “कल्पना कीजिए, आप उस गाय का मक्खन खा रहे हैं जिसे किसी दूसरी गाय का मांस और खून खिलाया गया हो। भारत शायद ऐसा दूध उत्पाद कभी स्वीकार नहीं करेगा।”

भारत का पशुपालन और डेयरी विभाग विदेशों से आने वाले दूध और खाद्य उत्पादों के लिए पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र (Veterinary Certificate) अनिवार्य करता है। इस प्रमाणपत्र की एक जरूरी शर्त है कि “ऐसे पशुओं को कभी भी मांस, हड्डी, खून, अंगों या सूअर से बने किसी भी पदार्थ वाला चारा नहीं खिलाया गया हो।” यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि भारत में केवल शाकाहारी आहार पर पली हुई गायों से प्राप्त दूध उत्पाद ही आयात किए जा सकें।

भारत का इनकार: सिर्फ संस्कृति नहीं, अर्थव्यवस्था भी है वजह

भारत का अमेरिका से डेयरी उत्पादों का विरोध केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा कारण देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा करना भी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।

2023-24 में भारत ने 239 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन किया, जिससे 7.5 से 9 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2.5% से 3% है। भारत का डेयरी सेक्टर 8 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है।

इनमें से ज्यादातर छोटे किसान हैं जिनके पास सिर्फ 2 या 3 गाय/भैंस होती हैं। उनके लिए यही आमदनी का मुख्य जरिया है। अगर भारत ने अमेरिका जैसे देशों से सस्ते, सब्सिडी वाले डेयरी उत्पादों को आने की इजाजत दे दी, तो भारतीय बाजार में सस्ती विदेशी चीजें भर जाएँगी।

2024 में अमेरिका ने 8.22 बिलियन डॉलर का डेयरी निर्यात किया और अगर उसका भारत में आयात हुआ तो इसका भारी असर भी होगा। भारतीय स्टेट बैंक के एक विश्लेषण के अनुसार, इससे घरेलू दूध की कीमतों में कम से कम 15% गिरावट आ सकती है। इससे किसानों को हर साल लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

महाराष्ट्र के किसान महेश सकुंडे ने कहा, “सरकार को यह देखना होगा कि हम सस्ते विदेशी दूध से प्रभावित न हों। अगर ऐसा हुआ तो पूरे डेयरी उद्योग को और हम जैसे छोटे किसानों को बड़ा नुकसान होगा।”

बातचीत में रुकावट

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तय समय सीमा 1 अगस्त नजदीक आने पर समाचार सुनने को मिल रहा है कि सीमा आगे बढ़ा दी गयी है। अगर तब तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ा सकता है। डेयरी क्षेत्र को लेकर जारी विवाद भारत और अमेरिका के बीच 2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने के बड़े लक्ष्य पर भी असर डाल सकता है।

हालाँकि बातचीत चल रही है, लेकिन भारतीय पक्ष अब भी अपने रुख पर अडिग है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने साफ कहा, “डेयरी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। यह हमारे लिए एक स्पष्ट सीमा है।” इस बीच, अमेरिका ने यह मामला विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी उठाया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कहा कि नवंबर 2024 से लागू होने वाला भारत का नया डेयरी सर्टिफिकेशन नियम उनकी समस्याओं को पूरी तरह हल नहीं करता।

सनातन विरोध में कितना नीचे गिरेगी कांग्रेस? सनातन विरोधी कांग्रेस-DMK नेताओं से क्यों नहीं हो रहा बर्दाश्त IIT मद्रास के डायरेक्टर द्वारा ‘गौमूत्र’ में औषधीय गुण बताया जाना? माफी मँगवाने पर अड़े, प्रदर्शन की भी धमकी

कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण करते कितना नीचे गिरेगी? एक सीमा होती है। 7 नवंबर 1966 को गौ हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों के खून की होली खेलने वाली तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी भी कालपात्रु जी महाराज के अभिशाप से बच नहीं पायी। जब से जो कांग्रेस का पतन शुरू हुआ आज तक नहीं रुक रहा। दूसरे, दिल्ली से गौ को निकालने वाली तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का क्या हुआ हाल? सबके सामने है कोई बताने की जरुरत नहीं। 
फिर जब स्कूल में पढ़ते थे तब माध्यमिक कक्षाओं में गाय का प्रस्ताव याद करवाया जाता था। परीक्षा में भी प्रस्ताव लिखने को आता था। प्रस्ताव में एक लाइन होती थी कि गौ मूत्र से दवाइयां बनती हैं। लेकिन सनातन विरोधियों को नहीं मालूम कि धरती पर एकमात्र गाय है जिसके मूत्र में बदबू नहीं होती, क्योकि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं में वास होता है। इतना ही नहीं पहले के समय घरों में फर्श की लिपाई गौ गोबर से होती थी, भैंस के गोबर से नहीं क्योकि इसके गोबर तक में बदबू नहीं होती। कोई कीड़ा तक नहीं होता था। यानी मूत्र तो क्या गोबर भी दवाई ही है। गौर करने की बात है कि गाय का बछड़ा हजार गऊओं के बीच अपनी अपनी माँ को पहचान जाता है, यह विशेषता किसी अन्य पशु या पक्षी में नहीं है। यही कारण है कि पहले के लोग भैंस के दूध की बजाए गौ दूध पीते और पिलाते थे। लेकिन जब से गौ दूध की बजाए भैंस के दूध का चलन हुआ परिवारों में दूरी बन गयी। मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आयुर्वेद को दरकिनार कर यूनानी पद्धति को बढ़ावा दिया गया। लेकिन आज सनातन विरोधी कांग्रेस-DMK नेताओं को IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी द्वारा ‘गौमूत्र’ में बताए औषधीय गुण बताए जाने पर मातम करना शुरू कर दिया। अपने आपको जनहितैषी बताने वाली कांग्रेस और DMK पार्टियां विरोध कर क्यों अपनी तिजोरी और कुर्सी की खातिर जनता को गुमराह कर रही है?   

प्रोफेसर कामकोटी ने देसी गायों के संरक्षण की बात कही (फोटो साभार: Freepik & IndiaAI)
 

IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र के औषधीय गुणों के की तारीफ़ की है। उन्होंने गौमूत्र से एक साधु का बुखार ठीक होने की घटना भी बताई है। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और DMK के नेता भड़क गए हैं। उनके इस बयान का तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है।

प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र की यह तारीफ़ चेन्नई में एक कार्यक्रम में की। यह कार्यक्रम पोंगल के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गौमूत्र में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और पाचक गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि गौमूत्र पेट की समस्याओं के लिए भी अच्छी दवा है। उन्होंने इसके बाकी औषधीय गुण भी बताए।

प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र की विशेषता बताए हुए कहा इससे बुखार कम होने की बात कही। उन्होंने इस बीच एक सन्यासी का नाम भी लिया। प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र के यह गुण आर्गेनिक फार्मिंग के फायदे बताते हुए गिनाए।

उन्होंने कहा, “अगर हम उर्वरकों का खाद का करेंगे तो हम भूमि माता को भूल जाएँगे। जितनी जल्दी हम जैविक, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।” उन्होंने गोवंश की देशी नस्लों की वकालत भी की और। उन्होंने इसके अर्थव्यवस्था और खेती में महत्व पर भी बात की।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के इस बयान पर DMK और कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे झूठा विज्ञान और गलत करार दिया। DMK के एक नेता ने इसे देश में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास बताया। तमिलनाडु के बाकी पेरियार समर्थक संगठनों ने इस बयान पर माफी की माँग की। उन्होंने प्रदर्शन की भी धमकी दी।

प्रोफ़ेसर कामकोटी के बयान का तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है और इसके राजनीतिकरण ना किए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “IIT मद्रास के डायरेक्टर क्वांटम फिजिक्स के विशेषज्ञ हैं और वे शीर्ष सरकारी एजेंसियों के सदस्य भी रहे हैं। वह अपनी धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति सम्मान में दृढ़ हैं, जो कहीं से गलत नहीं है।”

अन्नामलाई ने आगे कहा, “उन्होंने किसी को गाय का मूत्र पीने के लिए मजबूर नहीं किया और केवल अपनी मान्यताओं को व्यक्त किया। हमें ऐसे बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। IIT-M के डायरेक्टर तमिलनाडु से हैं, जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मैं उन्हें जानता हूँ और मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता।”

कांग्रेस का गौ माता के सम्मान का ढोंग -DMK को गले में क्यों लटकाए हैं ?

सुभाष चन्द्र

द्रमुक सांसद सेंथिल कुमार ने गौ माता का अपमान करके माफ़ी मांगने का ढोंग किया है।  सही मायने में उसने कोई माफ़ी नहीं मांगी है। सेंथिल कुमार ने तो कहा है कि वह ऐसे बयान पहले भी देता रहा है। मेरी बात से कोई आहत हुआ है तो मैं माफ़ी मांगता हूं और भविष्य में अपनी यह बात कहने के लिए कुछ अन्य शब्दों का प्रयोग करूंगा। जब अन्य शब्द तलाश करेगा तो फिर माफ़ी कैसी मांग रहा है।

लेखक 
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सेंथिल कुमार पर नाराजगी जाहिर की है लेकिन ऐसी कोई नाराजगी स्टालिन ने अपने बेटे उदयनिधि स्टालिन पर जाहिर नहीं की थी जब उसने सनातन धर्म को मलेरिया और डेंगू बता कर समाप्त करने की बात कही थी। 

आज कांग्रेस भी सेंथिल कुमार के बयान की आड़ में “राजनीतिक हज़” पर जाना चाहती है - कार्ति चिदंबरम ने कहा है - “शब्दों का बेहद दुर्भाग्यपूर्ण चयन - सेंथिल को तुरंत माफ़ी मांगनी चाहिए”। मिलिंद देवड़ा ने कहा - “द्रमुक को अहसास होना चाहिए कि उसकी लापरवाह टिप्पणियां हिंदी पट्टी में भाजपा को चुनौती देने में INDI गठबंधन के प्रयासों को कमजोर करती हैं”। सबसे बड़ी बात तो अधीर रंजन चौधरी ने कही कि “हम गोमाता का सम्मान करते हैं”। 

कांग्रेस के नेताओं कार्ति, मिलिंद और अधीर रंजन की क्या औकात है, सवाल यह है सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इस पर कोई बयान क्यों नहीं दिया? 

राहुल गांधी तो खुल कर कहता है मुस्लिमों की तरफ इशारा करके कि उनके खाने की चीज़ों (गौमांस) पर रोक नहीं लगनी चाहिए। कांग्रेस ने 2013 में कर्नाटक भाजपा सरकार के गौहत्या पर लगाए बैन को 2018 में सत्ता में आते ही ख़त्म कर दिया था।

वर्ष 2015, 8 अक्टूबर को जम्मू कश्मीर विधान सभा प्रांगण में निर्दलीय MLA Engineer Rashid ने गौ हत्या पर प्रस्तावित बैन के विरोध में गोमांस की पार्टी दी थी। तब विधान सभा में कांग्रेस के 12 विधायक थे और किसी ने विरोध नहीं किया। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने तो यहां तक कहा था कि - “गोमांस को बैन करने के मामले में संयम से काम लेना चाहिए क्योंकि यह पूरे देश के लिए (खासकर कश्मीर के लिए) एक संवेदनशील मुद्दा है, हमें देखना होगा हम गौ हत्या बैन के प्रस्ताव के समर्थन करें या न करें”। 

वर्ष 2017 मई में केरल के कन्नूर में Youth Congress नेताओं ने सड़कों पर  गाय काट कर और पका कर पार्टी आयोजित की थी। भले ही कुछ लोगों को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया परंतु कभी गौ हत्या पर प्रतिबन्ध का समर्थन नहीं किया और राहुल गांधी गोमांस को मुस्लिमों का प्रिय भोजन कहता रहा है। 

अप्रैल, 2017 में राजस्थान में पहलू खान और उसके बेटों के साथ जब गोरक्षकों के साथ गोवंश की तस्करी को लेकर मुठभेड़ हुई और वह जब मारा गया, तब से कांग्रेस का वकील तहसीन पूनावाला उनके लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहा है जबकि सभी 6 आरोपी ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिए हैं। 

कांग्रेस किस मुंह से सेंथिल कुमार के बयान का विरोध करती है जबकि उस पार्टी को घोर हिन्दू विरोधी होने के बाद भी कांग्रेस ने गले में लटकाया हुआ है, जिस पर राजीव गांधी की हत्या में शामिल लोगों का समर्थन करने का भी आरोप रहा है। कांग्रेस हो, या द्रमुक हो या INDI गठबंधन का कोई भी दल हो, सबकी राजनीति हिन्दुओं की विरुद्ध ही चलती है। बरसाती मेंढक की तरह टर टर करने से कुछ नहीं होगा और न कुछ मंदिरों में भटकने से होगा।

सनातन धर्म कांग्रेस और विपक्ष का परम शत्रु है। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे खुल कर कह चुका है कि मोदी और RSS को मजबूत करने से सनातन धर्म का राज आ जायेगा।

तिरुपति बालाजी को गोविंदा क्यों कहा जाता है ?

यह एक अत्यंत रोचक घटना है, महालक्ष्मी की खोज में भगवान विष्णु जब भूलोक पर आए, तब यह सुंदर घटना घटी । भूलोक में प्रवेश करते ही, उन्हें भूख एवं प्यास यह मानवीय गुण प्राप्त हुए, भगवान श्री निवास ऋषि अगस्त के आश्रम में गए और बोले, "मुनिवर मैं एक विशिष्ट मुहिम से भूलोक पर (पृथ्वी) पर आया हूँ", "और कलयुग का अंत होने तक यहीं रहूंगा"। मुझे गाय का दूध अत्यंत पसंद है और और मुझे अन्न के रूप में उसकी आवश्यकता है।

मैं जानता हूँ कि आपके पास एक बड़ी गौशाला है, उसमें अनेक गाएँ हैं, मुझे आप एक गाय दे सकते हैं क्या? ऋषि अगस्त्य हँसे और कहने लगे, "स्वामी मुझे पता है कि आप श्रीनिवास के मानव स्वरूप में, श्रीविष्णु हैं"। मुझे अत्यंत आनंद है कि इस विश्व के निर्माता और शासक स्वयं मेरे आश्रम में आए हैं, मुझे यह भी पता है की आपने मेरी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए यह मार्ग अपनाया है, फिर भी स्वामी मेरी एक शर्त है कि, मेरी गौशाला की पवित्र गाय केवल ऐसे व्यक्ति को मिलनी चाहिए जो उसकी पत्नी संग यहाँ आए, मुझे आप को उपहार स्वरूप गाय देना अच्छा लगेगा, परंतु जब तुम मेरे आश्रम में देवी लक्ष्मी संग आओगे, और गो दान देने के लिए पूछोगे, तभी मैं ऐसा कर पाऊँगा।
श्रीनिवासन हँसे, और बोले ठीक है मुनिवर, तुम्हें जो चाहिए वह मैं करूँगा, ऐसा कहकर वे वापस चले गए। बाद में भगवान श्रीनिवास ने देवी पद्मावती से विवाह किया, विवाह के कुछ दिन पश्चात भगवान श्रीनिवासन, उनकी दिव्य पत्नी पद्मावती के साथ, ऋषि अगस्त्य महामुनि के आश्रम में आए, पर उस वक्त ऋषि आश्रम में नहीं थे। भगवान श्रीनिवासन से उनके शिष्यों ने पूछा आप कौन हैं? और हम आपके लिए क्या कर सकते हैं ?
तिरुपति बालाजी के द्वार 
प्रभु ने उत्तर दिया, "मेरा नाम श्रीनिवासन है, और यह मेरी पत्नी पद्मावती है"।
आपके आचार्य को मेरी रोज की आवश्यकता के लिए एक गाय दान करने के लिए कहा था, परंतु उन्होंने कहा था कि पत्नी के साथ आकर दान मांगेंगे तभी मैं गाय दान दूंगा। यह तुम्हारे आचार्य की शर्त थी, इसीलिए मैं अब पत्नी संग आया हूँ, शिष्यों ने विनम्रता से कहा, "हमारे आचार्य आश्रम में नहीं है इसीलिए कृपया आप गाय लेने के लिए बाद में आइये"। श्रीनिवासन हंँसे और कहने लगे, मैं आपकी बात से सहमत हूंँ, परंतु मैं संपूर्ण जगत का सर्वोच्च शासक हूंँ, इसीलिए तुम सभी शिष्यगण मुझ पर विश्वास रख सकते हैं, और मुझे एक गाय दे सकते हैं मैं फिर से नहीं आ सकता। शिष्यों ने कहा, निश्चित रूप से आप धरती के शासक हैं बल्कि यह संपूर्ण विश्व भी आपका ही है, परंतु हमारे दिव्य आचार्य हमारे लिए सर्वोच्च हैं, और उनकी आज्ञा के बिना हम कोई भी काम नहीं कर सकते।
धीरे-धीरे हंसते हुए भगवान कहने लगे, आपके आचार्य का आदर करता हूँ कृपया वापस आने पर आचार्य को बताइए कि मैं सपत्नीक आया था, ऐसा कहकर भगवान श्रीनिवासन तिरुमाला की दिशा में जाने लगे, कुछ मिनटों में ऋषि अगस्त्य आश्रम में वापस आए, और जब उन्हें इस बात का पता लगा तो वे अत्यंत निराश हुए ।
"श्रीमन नारायण स्वयं लक्ष्मी के संग, मेरे आश्रम में आए थे"।
दुर्भाग्यवश मेैं आश्रम में नहीं था, बड़ा अनर्थ हुआ । फिर भी कोई बात नहीं प्रभु को जो गाय चाहिए थी, वह मैंने तो देना ही चाहिए। ऋषि तुरंत गौशाला में दाखिल हुए, और एक पवित्र गाय लेकर भगवान श्रीनिवास और देवी पद्मावती की दिशा में भागते हुए निकले, थोड़ी दूरी पर श्रीनिवास एवं पत्नी पद्मावती उन्हें नजर आए।
उनके पीछे भागते हुए ऋषि तेलुगु भाषा में पुकारने लगे स्वामी (देवा) गोवु (गाय) इंदा (ले जाओ) तेलुगु में गोवु अर्थात गाय, और इंदा अर्थात ले जाओ।*
स्वामी, गोवु इंदा...
स्वामी, गोवु इंदा...
स्वामी, गोवु इंदा...
स्वामी, गोवु इंदा... (स्वामी गाय ले जाइए) ..
कई बार पुकारने के पश्चात भगवान ने नहीं देखा, इधर मुनि ने अपनी गति बढ़ाई, और स्वामी ने पुकारे हुए शब्दों को सुनना शुरू किया।
भगवान की लीला, उन शब्दों का रूपांतर क्या हो गया।
स्वामी गोविंदा,
स्वामी गोविंदा,
स्वामी गोविंदा,
गोविंदा
गोविंदा
गोविंदा,
ऋषि ने बार बार पुकारने के पश्चात भगवान श्रीनिवास वेंकटेश्वर एवं देवी पद्मावती वापिस मुडे, और ऋषि से पवित्र गाय स्वीकार की । मुनिवर तुमने ज्ञात अथवा अज्ञात अवस्था में मेरे सबसे प्रिय नाम गोविंदा को 108 बार बोल दिया है, कलयुग के अंत तक पवित्र पहाड़ियों पर मूर्ति के रूप में भूलोक पर रहूँगा, मुझे मेरे सभी भक्त "गोविंदा" नाम से पुकारेंगे
इन सात पवित्र पहाड़ियों पर, मेरे लिए एक मंदिर बनाया जाएगा, और हर दिन मुझे देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते रहेंगे। भक्त पहाड़ी पर चढ़ते हुए, अथवा मंदिर में मेरे सामने मुझे, गोविंदा नाम से पुकारेंगे।
मुनिराज कृपया ध्यान दीजिए हर समय मुझे इस नाम से पुकारे जाते वक्त, तुम्हें भी स्मरण किया जाएगा क्योंकि इस प्रेम भरे नाम का कारण तुम हो, यदि किसी भी कारणवश कोई भक्त मंदिर में आने में असमर्थ रहेगा, और मेरे गोविंदा नाम करेगा। तब उसकी सारी आवश्यकता मैं पूरी करूँगा। सात पहाड़ियों पर चढ़ते हुए जो गोविंदा नाम को पुकारेगा, उन सभी श्रद्धालुओं को मैं मोक्ष दूंगा।

पाकिस्तान से आया ‘लंपी’ वायरस, राजस्थान-गुजरात में तड़प-तड़प कर मर रहे गोवंश: अब तक 3300 मौत

                                                                            प्रतीकात्मक 
अभी कोरोना से छुटकारा मिला भी नहीं कि मंकिपॉक्स ने दस्तक देने के साथ मवेशियों में लंपी वायरस भी आ गया। 
राजस्थान और गुजरात में लंपी वायरस के कारण गोवंश की तड़प-तड़प कर मौत हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों राज्य में अब तक 3000 हजार से ज्यादा गोवंश की मौत हो चुकी है। करीब 27 जिलों में यह फैला चुका है।

राजस्थान में 2100 गायों की लंपी से मौत

अकेले राजस्थान में लंपी बीमारी से 2100 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में इन दिनों जानवरों में त्वचा संबंधी संक्रमण पैदा करने वाली ‘लंपी’ बीमारी तेजी से फैल रही है। बीते तीन महीनों के दौरान राजस्थान के 10 जिलों में करीब 2100 से अधिक गायों की मौत हुई है। 40,000 से ज्यादा गौवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं होने की वजह से पशुपालक खासकर गायों को पालने वाले किसान ज्यादा परेशान नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान के रास्ते आया वायरस

राजस्थान के अधिकारियों का कहना है कि लंपी नामक यह संक्रामक रोग इस साल अप्रैल में पाकिस्तान के रास्ते भारत आया। लंपी डिजीज पहले जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में फैली। अब यह जोधपुर, जालौर, नागौर, बीकापुर, हनुमानगढ़ और अन्य जिलों में भी फैल रही है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी ने लंपी रोग से बड़ी संख्‍या में गायों की मौत की बात स्‍वीकारते हुए कहा है कि सरकार केंद्रीय वैज्ञानिक दल की सिफारिशों के आधार पर इसके इलाज के लिए जरूरी कदम उठाएगी। एक केंद्रीय दल ने हाल ही में प्रभावित इलाके का दौरा किया था। पशुओं पर इस रोग के कहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जोधपुर जिले में पिछले दो सप्ताह में 254 मवेशी इस बीमारी से अपनी जान गँवा चुके हैं। राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सोलंकी ने पिछले दिनों विवशता जाहिर करते हुए कहा था कि इस बीमारी से बचने के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है।

गुजरात में भी लंपी का कहर

गुजरात के कुल 33 जिलों में से 17 में अब तक 1200 से ज्यादा मवेशी ‘लंपी’ रोग के कारण मर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सर्वेक्षण, उपचार और टीकाकरण की गति बढ़ा दी है और पशुओं के मेले के आयोजन पर भी रोक लगा दी है। राज्य के कृषि और पशुपालन मंत्री राघव जी पटेल ने कहा कि इस संक्रामक रोग की वजह से शनिवार (30 जुलाई 2022) तक 1240 मवेशियों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य में इस वायरस का पहला केस सामने आने के साथ ही पशुपालन मेडिकल व अन्य विभागों की बैठक बुलाकर पशुओं के उपचार व टीकाकरण का कार्य युद्ध स्तर पर चलाने का निर्देश दिया था। बचाव के लिए 5.74 लाख पशुओं को टीका दिया जा चुका है।

गुजरात के 17 जिले प्रभावित

पटेल ने कहा कि प्रभावित जिलों में सौराष्ट्र, कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, मोरबी, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, बनासकांठा, पाटण, सूरत, सुरेंद्रनगर, भावनगर अरवल्ली और पंचमहल शामिल है। राजकोट जिला प्रशासन के अनुसार, अन्य राज्यों, जिलों, तालुका और शहरों से मवेशियों के आवागमन पर 21 अगस्त तक पाबंदी लगा दी गई है। पशुओं को अलग-थलग रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने मरे हुए मवेशियों को खुले में फेंकने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्री ने कहा कि प्रभावित जिलों के 1746 गाँवों में 50328 मवेशियों का इलाज किया जा चुका है।

सबसे पहले अफ्रीका में फैला यह रोग

यह रोग सबसे पहले 1929 में अफ्रीका में फैला था। पिछले कुछ सालों में यह दुनिया के अन्य हिस्सों में भी फैला है। साल 2015 में तुर्की और ग्रीस और 2016 में रूस जैसे देश में इसने तबाही मचाई। जुलाई 2019 में इसे बांग्लादेश में देखा गया, जहाँ से ये कई एशियाई देशों में फैल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज साल 2019 से अब तक सात एशियाई देशों में फैल चुका है। अगस्त 2019 में भारत और चीन, जून 2020 में नेपाल, जुलाई 2020 में ताइवान, भूटान, अक्टूबर 2020 वियतनाम में और नंवबर 2020 में हांगकांग तक पहुँच गया।