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PAK फौजियों का काम तमाम, पुलिस चौकियों पर कब्जा और ताबड़तोड़ हवाई हमले: रमजान के बीच ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान में शुरू हुई जंग

चमन बॉर्डर क्रॉसिंग के पास पाकिस्तानी फौज (बाएँ), तोरखम बॉर्डर क्रॉसिंग पर तालिबान फौज (दाएँ), ( साभार : aljazeera)
रमजान के महीने के बीच डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भीषण युद्ध छिड़ गया है। गुरुवार (26 फरवरी) रात से जारी इस खूनी संघर्ष में तालिबान ने 55 पाकिस्तानी फौजियों को मार गिराने और 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा करने का दावा किया है। अफगानिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।

वहीं, बुरी तरह घिरे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी विफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए तालिबान को ‘भारत का प्रॉक्सी‘ करार दिया है। इस टकराव ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।

पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसके सिर्फ दो फौजी मारे गए हैं और 36 अफगान लड़ाके मारे गए हैं। दोनों देशों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई गुरुवार (26 फरवरी 2026) की रात शुरू हुई, जो इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 9 रमजान 1447 के दिन थी।

अफगानिस्तानी मंत्रालय ने कहा कि कुछ दिन पहले पाकिस्तानी फौज ने अफगान क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए मिसाइल और हवाई हमले किए थे, जिनमें महिलाएँ और बच्चे मारे गए थे। इसी के जवाब में तालिबान बलों ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों से लगे डूरंड लाइन के पार समन्वित जवाबी हमले किए।

अफगान रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, करीब चार घंटे चली इस लड़ाई में तालिबान बलों ने पाकिस्तान के दो सैन्य अड्डों और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया, जबकि चार अन्य चौकियों से पाकिस्तानी फौजी भाग खड़े हुए। मंत्रालय ने दावा किया कि इस दौरान 55 पाकिस्तानी फौजी मारे गए, कई को जिंदा पकड़ा गया।

वहीं कुछ शव अफगानिस्तान लाए गए और भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद भी जब्त किए गए हैं। एक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट करने और एक सैन्य परिवहन वाहन को कब्जे में लेने का भी दावा किया गया। तालिबान ने माना कि 8 तालिबान लड़ाके मारे गए और 11 घायल हुए।

तालिबान का आरोप: काबुल, कंधार और पक्तिया पर हवाई हमले

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कायर पाकिस्तानी फौजियों ने काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए हैं, सौभाग्य से अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।”

प्रवक्ता जबीहुल्लाह ने कहा कि इन हमलों के बाद अफगान बलों ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अफगान वायु रक्षा बलों ने अफगान हवाई क्षेत्र में घुसे एक पाकिस्तानी विमान को भी मार गिराया है। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।

तालिबान सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ओर से नंगरहार में स्थित एक शरणार्थी शिविर पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 13 अफगान नागरिक घायल हुए।

पाकिस्तान का पलटवार: तालिबान ने बिना उकसावे के की फायरिंग

पाकिस्तान ने तालिबान के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि सीमा पर झड़प की शुरुआत अफगान-तालिबान बलों ने की थी। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिर्फ उनके दो फौजी मारे गए और तीन घायल हुए हैं, जबकि 36 अफगान लड़ाके मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना उकसावे की गई फायरिंग का जवाब दे रहा है।

पीएम शहबाद शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ अली जैदी ने कहा कि पाकिस्तानी फौजियों के पकड़े जाने की खबर गलत है। पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “अफगान-तालिबान शासन ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तान-अफगान सीमा पर बिना उकसावे के फायरिंग शुरू की। इसका पाकिस्तान द्वारा प्रभावी जवाब दिया जा रहा है।”

इसके अलावा राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी बयान जारी करते हुए कहा, “पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा। हमारी सशस्त्र फौजियों की प्रतिक्रिया व्यापक और निर्णायक है। जो लोग हमारी शांति को हमारी कमजोरी समझते हैं, उन्हें कड़ा जवाब मिलेगा।”

संघर्ष का असर तोरखम सीमा चौकी तक फैल गया, जो दोनों देशों के बीच एक प्रमुख व्यापारिक और आवागमन मार्ग है। अफगान अधिकारियों ने सीमा के पास स्थित एक शरणार्थी शिविर को खाली कराना शुरू कर दिया, क्योंकि कई शरणार्थी घायल हो गए थे। वहीं पाकिस्तानी पुलिस ने बताया कि सीमा से सटे गाँवों के लोग सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं।

पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अफगान क्षेत्र से दागे गए मोर्टार गोले सीमावर्ती गाँवों में गिरे, हालाँकि किसी नागरिक के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।

क्यों बार-बार भड़कता है विवाद

डूरंड रेखा अफगनिस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच स्थापित की गई थी। अंग्रेजों के बनाए इस सीमा रेखा को अफगानिस्तान नहीं मानता है। रेखा के एक ओर अफगानिस्तान के 12 प्रांत हैं, दूसरी ओर पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान।

दोनों देशों के लोग इस खुली सीमा के आर-पार आते जाते हैं और परंपरागत रूप से जुड़े हुए हैं। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर काफी समानताएँ हैं। यही वजह है कि खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित जैसे इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ लोग विद्रोह कर रहे हैं। यहाँ पाकिस्तानी फौज का जुर्म सुर्खियों में भी रहा है।

महिलाओं-बच्चों के साथ अमानवीय हरकत, पुरुषों का लगातार गायब होने को लेकर लोग पाकिस्तान के फौज को जिम्मेदार मानते हैं। अफगानिस्तान के लिए यह एक संवेदनशील मामला है। यहाँ कोई भी शासन में आ जाए, वह डूरंड रेखा को नहीं मानेगा, क्योंकि ये भावनाओं से जुड़ा है।

अफगानिस्तान ने पश्तून प्रभाव वाले क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वाह को पश्तूनिस्तान बनाने का भी समर्थन किया है। पाकिस्तान ने जब पख्तूनख्वाह सीमा पर वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य किया, तो पख्तूनों ने प्रदर्शन किया। ब्रिटिश विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में अफगानिस्तान और भारत के बीच सीमा की स्थापना की थी और पख्तून प्रांत को अलग कर दिया था।

दोनों देशों के बीच फैली हुई लंबी डूरंड रेखा पख्तून जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है और उन्हें दो अलग-अलग मुल्कों में विभाजित करती है। पाकिस्तान बनने के बाद डूरंड रेखा उसे विरासत में मिली, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता या मान्यता नहीं है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) के उपाध्यक्ष काशिफ पानेजई के मुताबिक, सीमा पर जो इलाका बँटा हुआ है, वह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह उनका घर है। उन्होंने कहा, “डूरंड रेखा कई गाँवों को आधे में विभाजित करती है और कई लोगों को उनके कृषि वाली भूमि से विभाजित करती है। यह जनजातियों और अन्य समूहों को बीच से बाँटता है।”

डूरंड रेखा के बावजूद कई इलाके ऐसे भी हैं, जहाँ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की रेखा अस्पष्ट है। ये दुर्गम और सुलेमान पर्वत श्रृंखला वाला इलाका है। ओरकजई, स्पिन बोल्डक से गजनी तक कई क्षेत्र ऐसे हैं। इसको लेकर भी दोनों देशों में तनाव रहता है।

‘महाराज बहुत हो गया अब रोक दीजिए’: राजनाथ सिंह ने संसद से बताया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कैसे पाकिस्तान कर रहा था बाप-बाप

  लोकसभा में बोलते रक्षामंत्री राजनाथ सिंह/कश्मीर में ढेर हुए आतंकी (फोटो साभार: X@SansadTV/IndiaToday)
लोकसभा में सोमवार 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ जोरदार प्रहार करते हुए विपक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कभी-कभी विपक्षी दलों के लोग सवाल उठाते हैं कि हमारे कितने विमान गए? लेकिन उनका यह सवाल हमारी राष्ट्रीय भावनाओं का सही से प्रतिबिंब नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने एक बार भी यह नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए? यदि सवाल ही करना है तो सही सवाल यह होना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकी ठिकानों को प्रभावी तरीके से तबाह किया और ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उसका उत्तर है, हां।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर सरकार का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 6-7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना और आतंकवाद की नर्सरियों को नष्ट करना था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और उनके हैंडलर मारे गए।

रक्षामंत्री ने कहा कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर 26 लोगों की हत्या की थी, जिसमें ज्यादातर हिंदू थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी।

इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने सेना को निर्णायक कार्रवाई की छूट दी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ 22 मिनट में सभी आतंकी हमलों को हिट किया और 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया।

इसके बाद पाकिस्तान की ओर से हमले 7 मई से 10 मई की रात 1 बजकर 30 मिनट तक मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया। उसके निशाने पर हमारे सैन्य अड्डे थे। हमारा डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया और पाकिस्तान किसी भी टार्गेट को हिट नहीं कर पाया। भारत के रक्षा तंत्र ने सभी हमलों को विफल कर दिया।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान एक भी लक्ष्य को हिट नहीं कर पाया। इसके जवाब में 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर करारा प्रहार किया, जिसके बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से संपर्क कर कार्रवाई रोकने की अपील की।

रक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन को केवल पॉज किया गया है और यदि पाकिस्तान ने फिर उकसाया तो इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन युद्ध छेड़ने के लिए नहीं, बल्कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए था, जिसमें भारत ने अपने सभी लक्ष्य हासिल किए।

ऑपरेशन महादेव में हासिम मूसा समेत 3 आतंकी ढेर, जारी है एनकाउंटर

वहीं, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत श्रीनगर के लिदवास में 28 जुलाई को सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों सुलेमान साहा, अबु हमजा और यासिर को मार गिराया। चिनार कॉर्प्स के अनुसार, मुठभेड़ सुबह 11:30 बजे शुरू हुई, जब 24 राष्ट्रीय राइफल्स और 4 पैरा ने आतंकियों को घेर लिया।

मारे गए आतंकी सुलेमान साहा को मीडिया रिपोर्ट्स में हासिम मूसा बताया जा रहा है, जो पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था।

आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और ग्रेनेड बरामद हुए। माना जा रहा है कि ये आतंकी पहलगाम हमले से जुड़े थे, जिसके लिए एनआईए ने पहले दो आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ऑपरेशन अभी जारी है, क्योंकि एक अन्य आतंकी की तलाश चल रही है।

रक्षामंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सही सवाल नहीं पूछ रहे। उन्होंने जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक शक्ति का प्रतीक है। भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी भी हमले का करारा जवाब देगा।

राजनाथ सिंह ने कॉन्ग्रेस पर तंज करते हुए कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को दोनों देशों की डायलॉग प्रॉसेस से 2009 की सरकार ने डीलिंक कर दिया था। साल 2006 में यह मान लिया गया था कि पाकिस्तान आतंक से पीड़ित है। इसने भारत की रणनीति को कमजोर किया। हमारे डेलिगेशन ने दुनिया के देशों में जाकर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के स्टैंड को प्रभावी तरीके से रखा।

रक्षामंत्री ने कहा, “पीएम मोदी ने भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर रुका है, समाप्त नहीं हुआ है। पाकिस्तान अगर फिर कोई हरकत करता है, तो हम और भी कठोर कार्रवाई करेंगे। पाकिस्तान के मन में गलतफहमी थी, उसे हमने ऑपरेशन सिंदूर से दूर कर दिया। अगर कुछ बचा होगा तो उसे भी दूर कर देंगे।”

अग्निवीर पर राहुल गाँधी के झूठ की पोल बलिदानी के परिजनों ने खोली; सदन में गुमराह करने पर कांग्रेस नेता को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी फटकारा; राहुल कब तथ्यों पर बोलोगे?


लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने हाल में अग्निवीर योजना पर सवाल खड़ा करते हुए तमाम तरह के दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि अग्निवीर केवल यूज एंड थ्रो वाले मजदूर होते हैं। उन्हें न तो शहीद का दर्जा मिलता है और न ही उन्हें कोई मुआवजा मिलता है। उनके इसी बयान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को अग्निवीर योजना की सच्चाई बताई। उन्होंने राहुल गाँधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

राहुल जब सदन में बोल रहे थे, कई बार तो लगता था कि शायद अरविन्द केजरीवाल बोल रहे हैं उनका एक उद्देश्य है कि 'न खाता न बही, जो केजरीवाल बोले वही सही' ठीक वही हाल राहुल का था कि 'जो राहुल बोले वही सही', नेता प्रतिपक्ष को जिस गंभीरता से बोलते हुए सरकार को घेरना था, विपरीत इसके राहुल झूठ पर झूठ बोल खुद ही घिरते रहे। जब नेता प्रतिपक्ष की ऐसी स्थिति है, वह सरकार तो क्या देश को क्या निर्देश देगा, समझा जा सकता है। राहुल भूल रहे थे कि वह किसी चुनावी रैली नहीं सदन में बोल रहे हैं, जहाँ हवाबाज़ी में नहीं, तथ्यों पर बात करनी चाहिए। 

रक्षा मंत्री रानाथ सिंह ने राहुल गाँधी के बयान के बाद तत्काल सीट से खड़े होकर जवाब दिया। उन्होंने राहुल गाँधी के बयान पर आपत्ति जताते कहा, “राहुल गाँधी को गलत बयान देकर सदन को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हमारी सीमाओं की रक्षा करते हुए या युद्ध के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है।”

उन्होंने कहा, “मैं नेता प्रतिपक्ष से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करना चाहता हूँ कि कृपया वो संसद को गुमराह करने की कोशिश न करें। अग्निवीर योजना के संबंध में बहुत सारे लोगों से, 158 संस्थाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित किया गया, उनके सुझाव लिए गए, तब यह अग्निवीर योजना लाई गई है। बहुत सोच समझकर यह योजना लाई गई है। ऐसे में बिना अग्निवीर योजना के बारे में समझे। बिना उस संबंध में कोई पूरी जानकारी हासिल किए, इस तरीके से सदन को गुमराह करना, इसे कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

रक्षा मंत्री ने राहुल गाँधी की ऐसी हरकत के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि वह ऐसा झूठ फैलाने के लिए राहुल गाँधी को सदन से ही बाहर कर दें। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन झूठ बोलने की जगह नहीं। फैक्चुअल पोजिशन रखनी चाहिए अगर नेता प्रतिपक्ष अपने स्टेटमेंट का सत्यापन नहीं करते तो उन्हें माफी माँगनी चाहिए।

इसके अलावा अगर हम टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट देखें तो उससे पता चलता है कि राहुल गाँधी सदन में साफ झूठ बोलते देखे गए। यहाँ अग्रिवीर बलिदानी का परिवार बता रहा है कि उन्हें एक बार 50 लाख रुपए मिले, फिर दोबारा में 50 लाख रुपए मिले और महाराष्ट्र सरकार से भी 10 लाख रुपए भी मिले है। यानी कुल मिलाकर उन्हें अभी तक 1 करोड़ 10 लाख रुपए की सहायता सरकार से मिल चुकी है। 

अग्निवीर योजना को बदनाम करने का काम शुरुआत से ही होता रहा है। अब सदन में भी इस पर झूठ फैलाया जा रहा है जबकि हकीकत तो यह है कि इस योजना के तहत सेना में शामिल अग्निवीरों को अगर वीरगति प्राप्त होती है तो उन्हें अंतिम विदाई दी जाती है। अग्निवीर की सेवा शर्तों के मुताबिक युद्ध में बलिदान होने पर परिवार वालों को इंश्योरेंस (नॉन कॉन्ट्रिब्यूटरी) के 48 लाख रुपए, अग्निवीर द्वारा जमा सेवा निधि (30 पर्सेंट) और इतना ही अमाउंट सरकार द्वारा दिया जाएगा। वहीं एक्स ग्रेशिया के तौर पर 44 लाख रुपए, बाकी बचे कार्यकाल की सैलरी (चार साल कुल कार्यकाल) दी जाएगी। साथ ही आर्म्ड फोर्सेस बैटल कैजुअल्टी फंड से 8 लाख रुपए और AWWA की तरफ से तुरंत मदद के तौर पर 30 हजार रुपए दिए जाएँगे। मालूम हो कि यही सेवाएँ सामान्य प्रत्येक सैनिक के लिए होती हैं। इसलिए राहुल गाँधी का सदन मेंकिया दावा गलत होता है।