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पाकिस्तान में फिर अज्ञात हमलावरों ने ईद की नमाज के बाद निपटाया आतंकी बिलाल सलाफी: मुरिदके में लश्कर के गढ़ ‘मरकज तैयबा’ में घुसकर वार

                                                     आतंकी बिलाल आरिफ सलाफी
पाकिस्तान के मुरिदके से लश्कर-ए-तैयबा के लिए डराने वाली खबर सामने आई है। इस खबर ने ना केवल आतंकी संगठन बल्कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। दरअसल, ईद के दिन आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकाने ‘मरकज तैयबा’ के अंदर घुसकर अज्ञात हमलावरों ने खूंखार कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि यह घटना ईद की नमाज के तुरंत बाद हुई। जैसे ही नमाज खत्म हुई, हमलावर ने मौके पर मौजूद बिलाल आरिफ सलाफी को निशाना बनाया। पहले उस पर गोलियाँ चलाई गईं और फिर यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह बच न सके, उस पर चाकू से कई वार किए गए। हमलावर तब तक नहीं रुका जब तक उसने बिलाल की मौत की पूरी पुष्टि नहीं कर ली।

सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद के कुछ वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें बिलाल जमीन पर पड़ा दिख रहा है और लोग उसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

मरकज तैयबा को लश्कर-ए-तैयबा का हाई-सिक्योरिटी हेडक्वार्टर माना जाता है जहाँ बाहरी व्यक्ति का प्रवेश लगभग असंभव बताया जाता है। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि हमलावर पहले से ही नमाज के दौरान अंदर मौजूद था और उसने सही मौके का इंतजार किया। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गया और अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर उसकी तलाश कर रही हैं।

कौन था बिलाल आरिफ सलाफी?

लश्कर-ए-तैयबा में बिलाल आरिफ सलाफी को एक अहम सदस्य माना जाता था। वह मुरिदके के सेंटर में नए लोगों को जोड़ने और उन्हें विचारधारा सिखाने का काम करता था। उसकी जिम्मेदारी युवाओं को पहचानकर उन्हें संगठन से जोड़ना और ट्रेनिंग की देखरेख करना थी। इसी वजह से वह संगठन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता था और मरकज तैयबा में उसकी मौजूदगी उसकी अहमियत दिखाने कि लिए काफी थी।

सिक्योरिटी नहीं आई काम, मौके पर ही ढेर हो गया वैष्णो देवी के भक्तों का कातिल आतंकी अबु कताल, कैसे पाकिस्तान में बैठे भारत के दुश्मनों को एक-एक कर ढेर कर रहे ‘अज्ञात’

                                                    अबु कताल (फोटो साभार: आजतक)
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी अबु कताल की कल (16 मार्च 2025) पाकिस्तान के झेलम में अज्ञात लोगों द्वारा हत्या कर दी गई। घटना के वक्त अबु कताल अपने सिक्योरिटी गार्ड के साथ जा रहा था तभी, कुछ लोग आए और 15-20 राउंड फायरिंग की। इस हमले में उसके साथ उसका गार्ड भी मारा गया और उसने खुद भी वहीं दम तोड़ दिया।

कौन था अबु कताल?

अबु कताल पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख और मोस्ट वांटेड आतंकी था। उसकी संलिप्ता भारत में हुए कई हमलों में थी। वह आतंकी संगठन का मुख्य हैंडलर था जो पुंछ-राजौरी इलाके से एक्टिव था। उसका काम केवल आतंकी साजिश रचना नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर आतंकियों को LET से जोड़ना भी था। उसने सबसे पहली बार साल 2000 में जम्मू में घुसपैठ की थी। हाफिज सई से उसका रिश्ता चाचा-भतीजे वाला था। उसे हाफिज का दाहिना हाथ भी कहा जाता था।

आतंकी गतिविधियों में था शामिल

रिपोर्ट्स बताती हैं कि अबु कताल का नाम 1 जनवरी 2023 को राजौरी जिले के ढांगरी गांव में हुए एक आतंकवादी हमले में भी शामिल था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें अबु कताल सहित अन्य आतंकियों का नाम शामिल किया गया था। इसके अलावा अबु कताल का नाम 9 जून 2024 को शिवखोड़ी में हुए आतंकी हमले भी आया था। उस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

पाकिस्तान में किन-किन आतंकियों को ‘अज्ञात’ ने किया ढेर

पाकिस्तान में अज्ञात लोगों द्वारा आतंकियों के मारे जाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी बड़े-बड़े आतंकियों को अज्ञात द्वारा मारने के मामले सामने आए हैं।
  • साल 2024 में कुछ अज्ञात लोगों ने हाफिज सईद के ही करीबी लश्कर के आतंकी आमिर सरफराज की पाकिस्तान के लाहौर में हत्या कर दी गई थी। अज्ञात हमलावरों ने उसके ठिकाने पर डोरबेल बजाकर उसे मौत के घाट उतारा था।
  • साल 2023 में LeT के अकरम गाजी को खैबर पख्तूनख्वा में मोटरसाइकल पर सवार हमलावरों द्वारा गोली से मार दिया गया था।
  • मौलाना रहीम उल्लाह तरीक को भी 14 नवंबर 2023 को कराची के ओरंगी टाउन में गोली मार दी गई थी।
  • शाहिद लतीफ, भी जैश का मोस्ट वांटेड आतंकी था, उसकी हत्या भी 11 अक्तूबर 2023 को हुई थी।
  • आतंकी सरदार हुसैन अराइन को भी 1 अगस्त 2023 को कराची में उसी दुकान के पास गोली मारी गई थी।
  • ख्वाजा शाहिद, नाम का लश्कर आतंकी भी जो 2019 में जम्मू में सुंजवान आर्मी कैंप पर हुए हमले का मास्टरमाइंड था उसकी हत्या भी कश्मीर के पीओके में हुई थी। बाद में उसकी लाश सिर कटी अवस्था में मिली थी।
  • इसी प्रकार साल 2022 में कंधार विमान हाईजैक के आतंकी मिस्त्री जहूर की पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी।

 

‘दिल्ली में होगा खून-खराबा, कश्मीर को भारत से करेंगे अलग’: हमास का टेरर प्लान आया सामने, PoK में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर और जैश से मिलाए हाथ


इजरायल में आतंकी हमला करने वाले हमास ने 5 फरवरी को कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे इस्लामी संगठनों से हाथ मिला लिया। रावलकोट के शहीद साबिर स्टेडियम में आयोजित ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ और ‘हमास ऑपरेशन अल अक्सा फ्लड कॉन्फ्रेंस’ नामक कार्यक्रम में जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी ने मंच से इसकी घोषणा की।

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने धमकी देते हुए कहा, “फिलिस्तीन के मुजाहिदीन और कश्मीर के मुजाहिदीन अब एक हो गए हैं। दिल्ली में खून-खराबा करने और कश्मीर को भारत से अलग करने का समय आ गया है।” इस कार्यक्रम में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के भाई तल्हा सैफ, जैश कमांडर असगर खान कश्मीरी और मसूद इलियास और लश्कर के शीर्ष नेता शामिल हुए थे।

ईरान में आतंकी संगठन हमास के प्रतिनिधि डॉक्टर खालिद अल-कदौमी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुआ था। यह हमास नेता की पहली कश्मीर यात्रा थी। इसके अलावा, इस कार्यक्रम में कई फिलिस्तीनी नेताओं ने भी भाग लिया। बता दें कि पाकिस्तान 5 फरवरी को ‘कश्मीर एकजुटता दिवस’ मनाता है। इसके साथ ही वह ऐसी गतिविधियाँ करता है, जो भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाती हैं।

इस तरह के आयोजनों के जरिए इस्लामी आतंकी संगठन भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश करते हैं। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों ने भारत पर कई आतंकवादी हमले किए हैं। इनमें साल 2001 का संसद हमला, साल 2008 का मुंबई हमला और साल 2019 का पुलवामा बम धमाका प्रमुख है।

हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इज़रायल के इतिहास का सबसे भयानक हमला किया था। फिलिस्तीनी आतंकियों ने गाजा पट्टी से इजरायल में सैकड़ों रॉकेट दागे थे। साथ ही हमास के सैकड़ों आतंकवादियों ने इज़रायली क्षेत्र में घुसपैठ की और अंधाधुन फायरिंग करके 1300 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी और 250 से अधिक महिला, बुजुर्ग एवं बच्चों को बंधक लिया था।

हमास (Hamas) का पूरा नाम ‘हरकत अल-मुकावामा अल-इस्लामिया’ है। इसका अर्थ है ‘इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन’। हमास की स्थापना मिस्र में रहने वाले फिलिस्तीनी मौलवी शेख अहमद यासीन ने 1987 में की थी। काहिरा में इस्लामी पढ़ाई करने के बाद वह आतंकी संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की स्थानीय शाखाओं से जुड़ गया था। साल 1960 के दशक में यासीन ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में तकरीर दी।

इसके बाद दिसंबर 1987 में यासीन ने गाजा में मुस्लिम ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा के रूप में हमास की स्थापना की। यह पहले ‘इंतिफादा’ यानी वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम में कथित अत्याचारों के लिए इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी हमले पर आधारित था। साल 1993 से हमास आत्मघाती हमले कर रहा है। सन 1997 में संयुक्त राष्ट्र ने हमास को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित कर दिया।

साल 2004 में एक हवाई हमले में इजरायल ने मौलवी शेख अहमद यासीन को मार गिराया। साल 2006 से हमास ने गाजा पट्टी पर कब्ज़ा कर रखा है। उस समय इसने अपने प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल फतह को चुनावों में हराया था। बाद में हमास ने वहाँ कोई चुनाव नहीं कराया। आतंकी संगठन हमास के कई बड़े नेता तुर्की मे बैठकर गाजा पट्टी में आतंकी गतिविधियों को संचालित करते रहे हैं।

मुंबई 26/11 का आतंकी तहव्वुर राणा होगा अब भारत की गिरफ्त में, अमेरिकी कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी

                                                 तहव्वुर राणा (साभार: फाइनेंशियल एक्सप्रेस)
साल 2008 में हुए मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है। भारत में वांछित 63 वर्षीय तहव्वुर राणा को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई व्यवसायी है। भारत प्रत्यर्पण संधि के आधार पर तहव्वुर को भारत प्रत्यर्पित करने की माँग लंबे समय से करता आ रहा था।

भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर राणा की अहम भूमिका को लेकर भारत ने अमेरिका के साथ जरूरी दस्तावेज साझा किए थे। इसके बाद प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए तहव्वुर ने निचली अदालत में याचिका दी थी। निचली अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी तो तहव्वुर ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

मुंबई हमले की जाँच करने वाली एजेंसी ने 405 पन्नों की चार्जशीट में तहव्वुर राणा को आरोपित बनाया था। चार्जशीट के अनुसार, तहव्वुर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI और इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य है। वह हमले का मास्टरमाइंड एवं मुख्य आरोपित डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सईद गिलानी की मदद कर रहा था।

चार्जशीट में कहा गया है कि तहव्वुर और हेडली ने मुंबई हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। तहव्वुर ने आतंकियों को बताया था कि मुंबई में हमलावर आतंकियों को कहाँ ठहरना है और उन्हें कहाँ-कहाँ हमले करने हैं। तहव्वुर ने उसकी मदद की थी। अमेरिका में सुनवाई के दौरान तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे पता था कि हेडली लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है।

तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है और उनसे क्या बात कर रहा है। उसे हमले की योजना और टारगेट के बारे में भी बता था। तहव्वुर राणा अपने बचपन के दोस्त और आतंकियों के मददगार डेविड कोलमैन हेडली की आर्थिक सहित हर तरह से मदद करके इस्लामी आतंकियों का सपोर्ट कर रहा था। यह बात उसने अमेरिकी कोर्ट में मानी है।

हेडली अमेरिकी नागरिक है। उसकी माँ अमेरिका और उसके अब्बू पाकिस्तानी मूल के थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अक्टूबर 2009 में हेडली को अमेरिका के शिकागो से गिरफ्तार किया था। अमेरिकी कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को मुंबई में आतंकी हमलों में शामिल होने का दोषी मानते हुए हेडली को 35 साल जेल की सजा सुनाई थी। भारत हेडली के प्रत्यर्पण की भी लगातार माँग कर रहा है।

तहव्वुर और हेडली बचपन के दोस्त हैं। हेडली भी शुरुआती 5 साल की पढ़ाई पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में की है। इसके बाद वह परिवार के साथ अमेरिका चला गया। तहव्वुर राणा भी इसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। फिर वह कनाडा चला गया। कुछ साल के बाद उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई।

तहव्वुर ने शिकागो में ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म की शुरुआत की। इस फर्म की एक शाखा मुंबई में भी थी। इसी फर्म के सहारे हेडली भारत आया था और हमले करने वाली जगहों की रेकी की थी। तहव्वुर राणा फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में हिरासत में है। उसे एफबीआई ने साल 2009 में शिकागो से दबोचा था। 

26 नवंबर 2008 को मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई के लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज पैलेस, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज ने निशाना बनाया था। वे अपने साथ भारी मारा मात्रा में IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47 लेकर आए थे।

इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 लोग मारे गए थे। मृतकों में अमेरिकी सहित कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन आतंकियों के खिलाफ NSG, मरीन कमांडो फोर्स, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF, मुंबई फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस फोर्स ने ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया था। साल 2012 में उसे फाँसी दी दे गई थी।

पंजाब : भगवंत मान की AAP सरकार के बाद बढ़ी भारत में ड्रोन से अरबों की ड्रग्स की सप्लाई, Pakistan लश्कर, जैश और डी कंपनी की भी ले रहा मदद


आर्थिक कंगाली और तंगहाली के मुहाने पर खड़ा पाकिस्तान अपनी ऐसे बदहाली के बावजूद नापाक इरादों से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान से पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में ड्रोन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। ताकि भारत के युवाओं को नशे की लत लगाई जा सके। पहले कांग्रेस और फिर पंजाब में आप की मान सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान की ओर से भारत में ड्रोन के जरिए ड्रग्स भेजने का अभियान और तेज हुआ है। चार साल में पंजाब के सीमावर्ती गांवों में पकड़े गए 391 ड्रोन पाकिस्तान से नार्को टेरर अभियान के तहत लॉन्च हुए हैं। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान के जहरीले इरादों में कुख्यात तस्कर, आतंकी सरगना और संगठन शामिल हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों को इन्वेस्टिगेशन के दौरान कुछ प्रमुख तस्करों और संगठनों के नाम जांच में मिले हैं। जो भारत में ड्रग्स भेजकर इसकी अवैध कमाई को हवाला के जरिए नेपाल और चीन में जुटाते हैं। इसके बाद पाकिस्तान से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए शेल कंपनियों को पैसे ट्रांसफर करते हैं।

पंजाब में भगवंत मान सरकार के बाद ड्रग्स तस्करी और तेजी से बढ़ी
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से सीमा पार से ड्रग्स का आना बेहद आम हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय किसान बताते हैं कि “ड्रग्स का बहुत अच्छे से संचालन किया जा रहा है, क्योंकि जो लोग इससे जुड़े हुए हैं, उन्हें वो इलाके पता हैं जहां सीमा के उस पार से ड्रग्स को फेंकना है।” किसानों या मजदूरों को बस उन पैकेटों को अपने घर ले जाना होता है। एक बार जब ये उनकी सीमा में पहुंच गए तो भारतीय कुरियर या ‘पांधी’, जैसा कि स्थानीय रूप से इन्हें जाना जाता है, इन्हें उनके घरों से ले जाते हैं। वो कहते हैं कि ये ‘पांधी’ ड्रग्स के इन पैकेटों को पास के शहरों में पहले से तय जगहों पर ले जाते हैं जहां दूसरा कुरियर वाला आता है। वहां से इसे बेचने वालों तक ले जाया जाता है। फिर वो इसे वितरकों तक पहुंचाते हैं और वहां से यह ग्राहकों तक पहुंचता है। सीमा पर गुप्तचरी में लगे एक अधिकारी के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन मिलता है। इन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है।

पाकिस्तान से ड्रग्स की डिलीवरी लेकर आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े
इसका खुलासा सुरक्षा बलों के एक्शन में साफ नजर आता है। पिछले चार साल में ही पाकिस्तान से आए 391 ड्रोन सुरक्षा बलों ने पकड़े हैं। 2020 से 2023 तक 266 और 2024 के शुरुआती 8 महीनों में ऐसे 125 ड्रोन बीएसएफ ने पकड़े हैं, जिनमें 2023 तक तीन सालों में 1500 किग्रा हेरोइन भेजी गई। 2024 में 2400 किग्रा से ज्यादा का हेरोइन और गांजा पकड़ा जा चुका है, जो बताता है कि नार्को टेरर कितनी तेजी से बढ़ रहा है। पाकिस्तान ड्रोन से ड्रग्स भेज रहा है। बीएसएफ ने 840 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी है। ड्रोन के जरिए तस्करी में सबसे पहले नाम पंजाब का है। पंजाब राज्य पाकिस्तान के बॉर्डर से जुड़ा है। जैसा की सबको मालूम है कि अफगानिस्तान में अफीम की खेती की जाती है। अफगानिस्तान के रास्ते अफीम, गांजा और हेरोइन जैसे अन्य नशीले पदार्थ पाकिस्तान आते हैं। इसके बाद बॉर्डर में ड्रोन के सहारे इसे पंजाब पहुंचाया जाता है। यहां पर ड्रग्स के गिरोह के बड़े-बड़े सरगना इस अवैध अफीम, कोकीन और अन्य नशीले पदार्थों को दिल्ली समेत पूरे देश में पहुंचाने का काम करते हैं।

साल में ही 40 हजार तस्कर गिरफ्तार, 30 करोड़ रु. बरामद
एक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन और ड्रग्स की यह केवल 15-20% ही रिकवरी है। बाकी की ड्रग्स की खेप तस्करी के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचने की आशंका है। दरअसल, पाक का नरोवाल गुरदासपुर जिले से सटा है। कसूर इलाका फिरोजपुर और सियालकोट व बहावलपुर भारतीय सीमा के पास हैं। बीएसएफ सूत्रों के मुताबिक, ड्रग्स और हथियार लदे ड्रोन इन्हीं इलाकों से लॉन्च किए जा रहे हैं। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि सितंबर 2024 तक ढाई वर्षों में कुल 2,546 किग्रा हेरोइन, 2,457 किग्रा अफीम, 1,156 क्विंटल पोस्त और 42.9 मिलियन टैबलेट्स, कैप्सूल्स, इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। इन अभियानों में कुल 39,840 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से ड्रग्स तस्करी से अर्जित 30.83 करोड़ की नकदी बरामद की। एनआईए ने खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकी समूहों के कनेक्शन का पता लगाया है, जो आईएसआई के मार्गदर्शन में एक्टिव रहते हैं।

ड्रग्स की तस्करी में इस्तेमाल हो रहे चार तरह के ड्रोन
1. फिक्स्ड-विंग ड्रोनः अधिकतम दूरी तक उड़ान भरकर बड़ी मात्रा में ड्रग्स लाते हैं।
2. मल्टीरोटर ड्रोनः वर्टिकल उड़ान भरने, छोटे पैकेट लाने और कहीं भी उतरने में सक्षम।
3. हाइब्रिड ड्रोनः फिक्स्ड-विंग और मल्टीरोटर दोनों गुणों को मिलाते हैं और लंबी दूरी तय कर दुर्गम स्थानों पर उड़ान भरते हैं। इन ड्रोन पर चीनी कंपनियों के लेबल लगे मिले हैं।
4. ऑटोनॉमस ड्रोनः ये ड्रोन बिना मानव नियंत्रण के उड़ान में सक्षम हैं। तस्कर इनका उपयोग पूर्व-निर्धारित मार्ग पर करते हैं, जिससे इनकी गतिविधियां छिप जाती हैं।

तस्करी का ‘गोल्डन क्रिसेंट’ से चार साल में बदल गई क्रॉस बॉर्डर स्मगलिंग
अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक देश है और वहां से ड्रग्स पाक के रास्ते भारत में पहुंचाई जाती हैं। तस्करी के इस नेटवर्क को ‘गोल्डन क्रिसेंट’ कहते हैं, जो अफगानिस्तान, पाक और ईरान से होकर गुजरता है। भारतीय सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सतर्कता चलते चार सालों में पाकिस्तान से ड्रग्स तस्करी का पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है। 2022 में एनआइए ने हरविंदर सिंह को अटारी से गिरफ्तार किया था। अटारी सीमा पर लगभग 100 किग्रा हेरोइन जब्त की गई थी, जो पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए 10 से अधिक में भेजी गई थी। एक स्टडी में सामने आया है कि 2020 में दुनिया में मैक्सिकन तस्करी संगठनों ने अमेरिकी सीमा के पास और पाकिस्तानी ड्रग्स तस्करों ने भारत में ड्रग्स तस्करी के लिए ड्रोन जैसे एडवांस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया।

ड्रग्स की कमाई से आतंकियों की फंडिंग कर रहा है पाकिस्तान
माध्यम लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन सीधे तौर पर अपनी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इसे एक बड़ा आर्थिक स्रोत बना चुके हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जुड़ा एक कुख्यात ड्रग तस्कर हाफिज मुहम्मद अंसार है उसका नाम भारत में ड्रग्स तस्करी में सामने आता रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में सक्रिय मक्की ड्रग कार्टेल भी भारत में ड्रग तस्करी में जुटा हुआ है। स्थानीय अपराधी गिरोहों और शेल कंपनियों के जरिए दूसरे प्रदेशों के नेटवर्क तक ड्रग्स पहुंचाई जाती है। हवाला के अलावा इसकी अवैध कमाई को ट्रांसफर करने के कई तरीके हैं। गैरकानूनी वित्तीय चैनलों से नेपाल व चीन और फिर पाकिस्तान में ट्रांसफर किया जाता है। मनी लॉन्ड्रिंग के इस पहले चरण में ड्रग्स की अवैध व नकद कमाई को वैध व्यवसायों, बैंक खातों या अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा किया जाता है। नकदी को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते हैं। बड़ी राशि और संदेह से बचने का यह रास्ता ‘स्मर्किंग’ कहलाता है। चीन और नेपाल के कैसीनो के माध्यम से भी इसे वैध किया गया है, जहां बड़ी धनराशि को गेम में वैध जीत से प्राप्त दिखाते हैं। लेयरिंग के दूसरे चरण में पैसा कई जटिल लेन-देन के जरिए घुमाया जाता है ताकि इसके स्त्रोत का पता लगाना मुश्किल हो। नकदी का एक हिस्सा खास तौर पर पंजाब और महाराष्ट्र में टारगेट किलिंग और रंगदारी वसूलने के लिए भी खर्च करने में भी उजागर हुए हैं।

डी कंपनी से लेकर बलूच तस्करों की भी मदद ले रहा है पाकिस्तान
पंजाब में पकड़ी गई ड्रग्स की जड़ें पाकिस्तान के अलावा यूरोप और यूएई में संचालित वैश्विक नेटवकों तक पहुंचती हैं। जसमीत हकीमजादा जैसे प्रमुख व्यक्तियों को नाकों आतंक के संचालक के तौर पर पहचाना गया है, जो स्थानीय युवाओं को इस धंधे और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए प्रलोभन देता है। वे एनआईए के रडार पर हैं। दाऊद इब्राहिम का डी-कंपनी नेटवर्क आतंकी गतिविधियों और ड्रग्स तस्करी में भी शामिल है। पाकिस्तान का एक और कुख्यात ड्रग तस्कर ताहिर महमूद उर्फ ‘चाचा’ भी अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत पहुंचाता है। वहीं, बलूचिस्तान में सक्रिय कई तस्कर गुट भी अफगानिस्तान से ड्रग्स को पाकिस्तान के पंजाब और सिंध के जरिए भारत भेजते हैं।

अवैध ड्रग्स सप्लाई से कमाई के उदाहरण…

  • 2020 में 1,212 किग्रा ड्रग्स की भारत में तस्करी का पता चला। जिन तस्करों को पकड़ा, उनसे हवाला के जरिए जुटाए गए 7.21 करोड़ रु. मिले।
  • 2021 में तस्करों ने पंजाब में 1,504 किग्रा ड्रग्स भेजी। हवाला से जुटाए गए 8.54 करोड़ के साथ तस्कर पकड़े गए तो इस बात का खुलासा हुआ।
  • 2022 में 1854 किग्रा ड्रग्स गुप्त नेटवर्क के जरिए सप्लाई की। इसकी एवज में 8.54 करोड़ रुपए शेल कंपनियों के माध्यम से जुटाए गए।
  • 2023 और अब तक 2005 किग्रा ड्रग्स सप्लाई के एवज में स्थानीय गिरोहों ने हवाला और क्रिप्टोकरंसी के जरिए 30.83 करोड़ रुपए की राशि को सफेद धन में बदला गया।
  • सूत्रों के मुताबिक पंजाब की आप सरकार में पुलिस के एक बड़े हिस्से को तस्करों के साथ गठजोड़ में शामिल पाया गया है, जो कानून प्रवर्तन प्रयासों की कमजोरी बना है। यही वजह है कि संदिग्ध 10 हजार पुलिस कर्मियों का सीमावर्ती जिलों से ट्रांसफर किया गया है।
                                        ड्रग बेचती लड़की 

वर्ष     कौनसा ड्रग्स          ड्रग्स मात्रा     कीमत

2020  हेरोइन, गांजा, एमडीएम  1707 किलो    403 करोड़
2021  हेरोइन, गांजा               1686 किलो    303 करोड़
2022  हेरोइन, गांजा               1821 किलो    236 करोड़
2023  हेरोइन, गांजा               1548 किलो    209 करोड़
2024  हेरोइन, गांजा               2400 किलो    840 करोड़